New Year Poems - Hindi
अमनदीप सिंह
जन सरोकार मंच के कविता जब बोलती है प्रोग्राम में, मैं, अमनदीप सिंह, आपको बोस्टन, USA से नए साल की शुभकामनाएं देता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं और उम्मीद करता हूं कि यह नया साल आप के लिए नई उम्मीदें, उमंगे, खुशी और आनंद लाए। मैं जन सरोकार मंच और देवेंद्र जी का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे कविता जब बोलती है प्रोग्राम में कविता पाठ करने का अवसर प्रदान किया।
एक और साल की आखिरी शाम आई और चली गई और हमें एक और साल दे गई। उसमें से भी अब कुछ दिन बीत गए हैं। समय भी अजीब है! हम गुजरते समय को देखते रहते हैं! एक शायर लिखता है कि गाड़ी में बैठकर हमें लगता है कि पेड़ पीछे जा रहे हैं, जबकि असल में गाड़ी आगे जा रही होती है। इसी तरह, हमें लगता है कि दिन, महीने और साल ग़ुज़रते जा रहे हैं, लेकिन असल में हम आगे जा रहे होते हैं।
इस नए साल के अवसर पर मेरी कुछ कविताएं प्रस्तुत हैं। आशा है आपको पसंद आएंगी।
समय के फ़लक से, साल का एक तारा टूटा
दिल में कुछ हुआ, नयनों का चश्मा फूटा
यादों की लहरें, उठती चली गईं
दिल की नाजुक परतें तड़पाती चली गईं
शाम की उदासी फैल रही है ख्यालों में
दर्द की ख़लिश उठ रही है सालों में
उस ख़लिश ने अपना जमाल है दिखा दिया
सपनों के एक और सूर्य को उगा दिया
सपनों के इस नए सूर्य को सलाम है
आँखों में आशा की चमक और हाथो में जाम है!
नया साल मुबारक हो
1.
सबको नया साल मुबारक हो
हर ह्रदय में ब्रह्म का ज्ञान हो!
आँखों में प्यार की लालिमा
और होठों पे मुस्कान हो
मन में कुछ अच्छा करने की चाह
हाथों को सच्चे काम का गुमान हो
दिमाग की सोच आज़ाद हो
पैरों को सत्य का मार्ग परवान हो।
2.
आओ जीवन में उल्फ़त का रंग भरें
सपनों की एक रंगली दुनिआ तैयार करें
जो पल समय के सैलाब में वह गए
आज उन पलों को फिर साकार करें
दिल के ज़ख्मों पे प्यार की मरहम लगा
आओ दर्द का सागर धीरे धीरे तरें
बीत रहे साल की यादों को सजा कर
आने वाले साल का स्वागत करें।
3.
ऐ, आने वाले साल!
तुम सूर्य की तरह आना।
तारीक ज़िंदगी में
आशा की शफ़क लाना।
आँखों में सपने, दिल में धड़कन लाना।
गालों पर लाली, होठों पर तबुस्सम लाना।
वक़्त के परिंदे उड़ते हैं जाते -
निर्मोही परिंदे वापस देश लाना।
हिज्र के बोझिल पल खत्म कर -
प्यार का मौसम लाना।
नए साल मैंने कुछ टप्पे लिखे हैं। इस में कुछ पंजाबी के शब्द भी हैं। आशा है आप को पसंद आएंगे।
टप्पे
मेरे पास तू आ माहिया!
मैने रोशनी जलाई है -
तू भी लेता जा लौ, माहिया!
सपने तरसते रहते हैं!
सालों के साल देखो -
कैसे पानी जैसे बहते हैं!
देखो! नया साल है आया!
दिल में यह कसक रही -
क्यों तू नहीं आया!
ज़िंदगी की हंसती नुहार देखो!
बाहर तो खुशबू है -
अंदर ग़म के खार देखो!
कोयल की कूक सुनती है!
एक तो तूफ़ान भारी, दूजी
मन में हूक सुनती है!
फूल डाली पर लटक रहे!
एक तेरे बिन जानम -
हम दर-दर भटक रहे हैं!
हर तरफ़ उजाला है छाया!
नई उम्मीदें ले कर -
ये नया साल है आया!
नई उमँगे ले कर -
ये नया साल आया है!
अंग्रेज़ी के विश्व प्रसिद्ध लेखक डी.एच. लॉरेंस ने वक़्त के बारे में कुछ विचार लिखें हैं। उनसे प्रेरणा ले कर मैंने यह नज़्म लिखी है।
वक़्त
अमनदीप सिंह
वक़्त असल में कुछ नहीं है -
सिर्फ़ तुम ही हो -
जीते… जागते… धड़कते...
अपनी उम्मीदों और सपनों के साथ मंज़िल की ओर चलते।
वक़्त तो भाववाचक है -
हवा की तरह उड़ता है -
हम सिर्फ़ महसूस कर सकते हैं...
छू नहीं सकते!
लेकिन वक़्त हमें छू सकता है!
और यह एहसास कराता है -
कि हम सच में हैं
इस जहां में चलते फिरते।..
और भाववाचक नहीं हैं!
सिर्फ़ और सिर्फ़
इस पल में जी रहे हैं -
यादों और सपनों का धागा बुन रहे हैं!
जो पीछे छूट गया -
उसकी सिर्फ़ यादें हैं -
आगे क्या है पता नहीं -
सिर्फ़ सपने ही हैं!
यह पल जिसमें हम हैं, सिर्फ़ हमारा है -
असल में, यह एक पल हम खुद ही हैं!
आओ, इस एक पल को जिएं!
(डी.एच. लॉरेंस से प्रेरित)
बस यही दुआ है कि इस नए बर्स में सारे संसार में अमन शांति हो, सब लड़ाई झगड़े खत्म हो जाएं।
धन्यवाद।