वानस्पतिक नाम – Amomum subulatum Roxb. (एमोमम् सबुलॅटम् राक्स)
सामान्य नाम – बड़ी इलायची, भद्रैला, बृहदेला
कुल – Zingiberaceae (झिंजिबेरॅसी) - आर्द्रक कुल
स्वरूप – पत्रदण्ड 3 - 4 फुट ऊँचा होता है। पत्ते 1- 2 फुट लम्बे, 3 - 4 इन्च चौड़े, आयताकार, भालाकर, हरे एवं चिकने होते हैं।
गुण - कर्म:-
गुण - यह किंचित् उष्ण, पाचक, सुगन्धि, उत्तेजक एवं वातानुलोमक है।
रस - कटु, तिक्त
वीर्य - उष्ण
विपाक - कटु
प्रभाव - कफवातशामक, पित्तवर्धक
प्रयोज्य अंग – बीज
मात्रा - 1-2 ग्राम
प्रयोग -
मन्दाग्नि, आध्मान, शूल, अतिसार, यकृतशोथ तथा मूत्रकृच्छ्र् में इसका उपयोग किया जाता है।
यह कफ विकारों में प्रयोग होता है।
यह दुर्गन्धनाशक, शूलहर, त्वग्दोषहर और व्रणरोपण है।
यह हृदयोत्तेजक, मूत्रल व विषघ्न है।
मुख रोगों तथा दन्तरोगों में इसके क्वाथ से कुल्ला करते हैं।
शिर:शूल में इसका लेप करते हैं। कण्डु आदि चर्मरोगों में लेप देते हैं।
ज्वर तथा शीत में प्रयोग होता है।