विश्व की अधिकतर बड़ी भाषाएँ विदेश में शासक भाषा बन कर फैली हैं जैसे अंग्रेजी, पुर्तगाली, फ्रांसीसी, स्पेनी, अरबी आदि लेकिन हिंदी एक ऐसी भाषा है जो प्यार और भाईचारे की भाषा के रूप मेंपूरे संसार में फैली है। इस कारण हिंदी विश्व के कई देशों में बोली जाती है। हिंदी विश्व के सभी महाद्वीपों में किसी न किसी रूप में बोली जाती है। भारत से बहुत वर्ष पहले गए भारतवंशी (people of Indian origin) संसार के कई देशों में रहते हैं और अब तक उन्होंने हिंदी भाषा को इस्तेमाल करना जारी रखा है। प्रवासी भारतीय लोगों की हिंदी की निम्नलिखित बोलियाँ हैं:
मॉरिशसी हिंदी
मॉरिशसी हिंदी अफ्रीका के दक्षिण पूर्व में स्थित मॉरिशस गणराज्य (Republic of Mauritius) में बोली जाती है। यह देश हिंद महासागर में एक द्वीप है। यह हिंदी मुख्य रूप से भोजपुरी, फ्रांसीसी और क्रियोल से मिल कर बनी है। इस भाषा को बोलने वाले अधिकतर लोगों के पूर्वज भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार से वहाँ गए थे। इस हिंदी में लोग आपस में बातचीत औरपारिवारिक कार्य करते हैं। कुछ उदाहरण हैं: बुतिक =दुकान, पलामुन= टमाटर, लासेमेन= सप्ताह, प्लांते करना = रोपना, नाजे करना = तैरना, फिनी करना = खत्म करना, लेगिम = सब्ज़ी, छोकड़ा = लड़का, छोकड़ी = लड़की आदि।
फ़िजी हिंदी
फ़िजी हिन्दी फ़िजी में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है। फ़िजी दक्षिण प्रशांत महासागर में मेलानेशिया में द्वीपों का देश है। इसे फ़िजियन हिन्दी या फ़िजियन हिन्दुस्तानी या फ़िज़ीबात भी कहा जाता है। यह फ़िजी की आधिकारिक भाषाओं मे से एक है। यह अधिकांशतः भारतीय मूल के फ़िजी लोगों द्वारा बोली जाती है। फ़िजी हिन्दी देवनागरी लिपि और रोमन लिपि दोनों में लिखी जाती है। यह मुख्य रूप से अवधी, भोजपुरी भाषा और हिन्दी की अन्य बोलियों के मेल से बनी है, जिसमें अन्य भारतीय भाषाओं का भी समावेश है। इसमें फ़िजी और अंग्रेजी से बड़ी संख्या में शब्द उधार लिए गए हैं। फ़िजी हिन्दी में बड़ी संख्या में ऐसे अनूठे शब्द भी हैं, जो फ़िजी में रह रहे भारतीयों के नए माहौल में ढलने के लिए जरूरी थे। फ़िजी भारतीयों की पहली पीढी़, जिसने इस भाषा को बोलचाल के रूप में अपनाया इसे 'फ़िजी बात' कहते थे। फ़िजीबात का एक उदाहरण:
“ईसटा के छृट्टी में हम लोगन गवा झुरमुट सुकुल के घरे लामी। सूवा बड़ा गरम रहा। बिचार करा गय की समुंदर के किनारे पियाई करा जाय तो मजा पकरी। बीयर, विस्की, रम, जिन-बिन लय के छुटा हम लोगन। एक बड़का हण्डा भर के चखना भी रहा।
सर-सर-सर-सर बहे समुंदर के ठण्डा हवा। आम के नीचे बड़ा आनंद रहा। चटाई बिछाय के हम लोगन सात जने बइठा। हम के लगा रहा पियास महराज, हम ग्यारा बोतल ठण्डा बीयर मार दिया। एक हाथ में उठाई गिलास अउर दुसरका में चखना, दुनो हाथ चला दनादन आधा घंटा। इसके बाद आय गय नींद के झटका, बस हम चटाई के एक किनारे मार दिया घर्राटा। हमके खाली तारा दिखाय, अउर कुछ नहीं। हम लोगन के गेंग में दुइ लउण्डे रहिन देहात के, ”चिलबिल सिंह” अउर हड़पनाथ। हड़पनाथ हमरे हथवा में से उतार लिहिस पाइलेट वाला घड़ी। जब हम गय रहा असमान में पुच्छल तारा देखे तब घड़िया खरीदे रहा एक हज़ार डोला में। हम सूता रहा तब सखा उतार लिहिस घड़िया, वइसे कहाँ उतार पावत। कुंभकरनी नींद में हमके कुछ पते न चला”
सूरीनामी हिंदी
सूरीनामी हिंदी दक्षिण अमेरिका के उत्तर में स्थित सूरीनाम गणराज्य (Republic of Suriname) में बोली जाती है। सरनामी हिंदी, डच और स्रनांग टॊंगो (एक क्रियोल भाषा) के बाद वहाँ की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। यहाँ की आबादी में 33 % लोग भारतवंशी हैं जो सरनामी हिंदी बोलते हैं। इन भारतवंशियों के पूर्वज भारत के बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से यहाँ आये थे। सरनामी हिंदी भोजपुरी, अवधी, मगही, डच, स्रनान टोगों आदि के मिलन से विकसित हुई है। क्योंकि यह देश पहले हॉलैंड (Netherlands) के डच शासकों के अधीन था, इसलिए सरनामी हिंदी में डच भाषा के कई शब्द आ गए हैं। जैसे – फ़ोरज़ाल = बैठक, दोदूफ़ी = कबूतर, बोसरोको = बनियान। सूरीनाम से हॉलैंड रहने गए सरनामी लोगों द्वारा सरनामी हिंदी बोली जाती है। इस भाषा का एक उदाहरण: “हमार घर मोय है।पहले हमलोग सरनाम में रहत रहली। हुआ हमार नाना और नानी रहे है। हमार आजा और आजी भी हुआ रहे। ऊ सब हमलोगन के चिट्ठी लिखे है। कुछ दिन में नाना और नानी हियाँ आई। तब ऊ हम सब लोगन के लगी रहिए। हम ऊ सभन के बहुत चाहिला।
त्रिनिदादी हिंदी
त्रिनिदादी हिंदी केरिबियन सागर में स्थित त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य में बोली जाती है। वेनेजुएला के पास स्थित यह देश त्रिनिदाद और टोबैगो नाम के दो द्वीपों से मिलकर बना है। इस देश में सबसे बड़ी जनसंख्या भारतवंशियॊं की है जो त्रिनिदादी हिंदी बोलते हैं। इन भारतवंशियो के पूर्वज मुख्य रूप से भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार से आये थे। त्रिनिदादी हिंदी भोजपुरी, अवधी, अंग्रेजी और स्थानीय क्रियोल भाषाओं के मेल से बनी है। त्रिनिदादी हिंदी के कुछ उदाहरण: तुम = टुम, करिया = काला, बड़का = बड़ा आदि। इस हिंदी में एक खास प्रकार का संगीत भी प्रसिद्ध है जिसे ’चटनी’ कहते हैं।
दक्षिण अफ़्रीक़ी हिंदी / नैताली हिंदी
नैताली हिंदी दक्षिण अफ़्रीक़ा के नैताल, ट्रांसवॉल और केप में बोली जाती है। दक्षिण अफ्रीका के भारतवंशियों के पूर्वज भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और राजस्थान से जाकर वहाँ बस गए थे। इस हिंदी पर भोजपुरी और अंग्रेजी का गहरा प्रभाव है। उदाहरण: भगत- अरे डेम फूल! वो सुन घंटी बजी। चल काम पर चलें। तोहार घर कासी में न हो भगतिन? भगतिन- हां, भगत! ओही कासी दिहलन फांसी। ओही कासी में रहत रहलीं फिर हुआ से कलकत्ता चल गयल रह लीं और उहंई से हियां अइली हैं। आज काल में हमका गदेला होवै वाला है। अब बताओ हम कइसे काम करी। भगत- चुप रह, चुप। देख साहब आवत हौवन। चल हियां से चल देइ अपने काम पर। भगतिन- हम कइसे काम पर जाई। मौरे बुते काम न होइ। देखो साहब आवत हौवत, उनकीन के पांव पड़कर आपन दुख कहब। (साहब आगया) साहब। हम गरभ से हई, जल्दी गदेला होने वाला बा। हम काम नाही कर सकत हई। साहब- यू रास्कल, टुम काम छोड़ डेना चाहटा है। हम टुमारा बोटी बोटी काट डालेगा। भगतिन- नाहीं साहेब, हम काम छोड़ के कहां जाइब? गदेला होय जाई ते फिर हम काम करब। दुई चार दिंनां का हमका छुटी देव। साबह- उल्लू का पट्ठा डैम, सूवर कुली। बहुत बाट करता है। जल्दी काम पर जाओ नहीं टो अबी हम टुमको ठीक कर देगा।