औपचारिक हिंदी
भाषा और उसे इस्तेमाल करने वाले समाज के बीच गहरा रिश्ता है। औपचारिक रूप से हिंदी के दो रूप हो सकते हैं:
साहित्यिक हिंदी: साहित्यिक हिंदी भाषा का संबंध मानव के हृदय या भावना से है। यह साहित्य की भाषा है। यह भाषा रचनात्मक भाषा है। इसमें अनुभव और कल्पना का मिलन होता है। साहित्यिकहिंदी कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना आदि विभिन्न साहित्यिक विधाओं के लिए प्रयोग की जाती है। साहित्यिक भाषा में उस देश या क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक औरधार्मिक मूल्य शामिल होते हैं। यह भाषा कलात्मक, अलंकारयुक्त और अभिधा, व्यंजना व लक्षणा से भरी होती है। उदाहरण: दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला (दिन समाप्तहोने वाला था, आकाश लाल हो चला था)
[शब्दों की तीन शक्तियाँ होती हैं : अभिधा, लक्षणा, व्यंजना
अभिधा : जब किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है तब वहाँ उसकी अभिधा शक्ति होती है, जैसे 'सिर पर चढ़ाना' का अर्थ किसी चीज को किसी स्थान से उठाकर सिर पर रखना होगा।
लक्षणा : जब शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग न करते हुए किसी विशेष प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह जिस शक्ति के द्वारा होता है उसे लक्षणा कहते हैं। लक्षणा से 'सिर पर चढ़ने' का अर्थ आदर देना होगा। उदाहरण के लिए 'अँगारों पर लोटना', 'आँख मारना', 'आँखों में रात काटना', 'आग से खेलना', 'खून चूसना', 'ठहाका लगाना', 'शेर बनना' आदि में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसीलिए वे मुहावरे हैं।
व्यंजना : जब अभिधा और लक्षणा अपना काम खत्मकर लेती हैं, तब जिस शक्ति से शब्द-समूहों या वाक्यों के किसी अर्थ की सूचना मिलती है उसे 'व्यंजना' कहते हैं। व्यंजना से निकले अधिकांश अर्थों को व्यंग्यार्थ कहते हैं। 'सिर पर चढ़ाना' मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो 'सिर' पर निर्भर करता है न 'चढ़ाने' पर वरन् पूरे मुहावरे का अर्थ होता है उच्छृंखल, अनुशासनहीन अथवा ढीठ बनाना]
साहित्यिक हिंदी आनंदमूलक हिंदी है।
प्रयोजनमूलक हिंदी: प्रयोजनमूलक का मतलब है ’प्रयोजन है मूल जिसका’। प्रयोजनमूलक हिंदी (Functional Hindi) से तात्पर्य ऎसी व्यावहारिक भाषा से है, जिसका उपयोग एक से अधिक प्रयोजनों (functions) के लिए हो। जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयुक्त भाषा ही प्रयोजनमूलक भाषा है। यह भाषा आम तौर पर जीवन के लिए उपयोगी उपकरणो से बनती है। इस प्रकार से कहाजा सकता है कि प्रयोजनमूलक हिंदी, हिंदी का वह रूप है, जिसका प्रयोग किसी विशेष कार्य या विशेष उपयोग के लिए किया जाता है। इसे कामकाजी हिंदी या व्यावहारिक हिंदी भी कहा गया है। यहहिंदी प्रशासन, विधि, वाणिज्य, उद्योग, विज्ञान, संचार, अर्थशास्त्र, राजनीति, शोध, शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में चिंतन और अभिव्यक्ति का माध्यम है। प्रयोजनमूलक हिंदी का नामकरण सन 1974 ईसवी में केंद्रीय हिंदी संस्थान के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के भाषाविद श्री मोटुरी सत्यनारायण ने किया था।
प्रयोजनमूलक हिंदी की विशेषताएँ
प्रयोजनमूलक भाषा की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं -
1. वैज्ञानिकता :
प्रयोजनमूलक शब्द पारिभाषिक होते हैं। किसी वस्तु के कार्य-कारण संबंध के आधार पर उनका नामकरण होता है, जो शब्द से ही प्रतिध्वनित होता है। ये शब्द वैज्ञानिक तत्वों की भांति सार्वभौमिकहोते हैं। हिन्दी की पारिभाषिक शब्दावली इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
2. अनुप्रयुक्तता :
उपसर्गो, प्रत्ययों और सामासिक शब्दों की बहुलता के कारण हिन्दी की प्रयोजनमूलक शब्दावली स्वत: अर्थ स्पष्ट करने में समर्थ है। इसलिए हिन्दी की शब्दावली का अनुप्रयोग सहज है।
3. वाच्यार्थ प्रधानता :
हिन्दी के पर्याय शब्दों की संख्या अधिक है। अत: ज्ञान-विज्ञान के विविध क्षेत्रों में उसके अर्थ को स्पष्ट करने वाले भिन्न पर्याय चुनकर नए शब्दों का निर्माण संभव है। इससे वाचिक शब्द ठीक वही अर्थप्रस्तुत कर देता है। अत: हिन्दी का वाच्यार्थ भ्रांति नहीं उत्पन्न करता।
4. सरलता और स्पष्टता :
हिन्दी की प्रयोजनमूलक शब्दावली सरल औैर एकार्थक है, जो प्रयोजनमूलक भाषा का मुख्य गुण है। प्रयोजनमूलक भाषा में अनेकार्थकता दोष है। हिन्दी शब्दावली इस दोष से मुक्त है।
इस तरह प्रयोजनमूलक भाषा के रूप में हिन्दी एक समर्र्थ भाषा है। स्वतंत्रता के पश्चात प्रयोजनमूलक भाषा के रूप में स्वीकृत होने के बाद हिन्दी में न केवल तकनीकी शब्दावली का विकास हुआ है, वरन विभिन्न भाषाओं के शब्दों को अपनी प्रकृति के अनुरुप ढाल लिया है। आज प्रयोजनमूलक क्षेत्र में नवीनतम उपलब्धि इंटरनेट तक की शब्दावली हिन्दी में उलब्ध है, और निरंतर नए प्रयोग हो रहहैं।
प्रयोजनमूलक हिंदी के रूप:
1. व्यावसायिक हिंदी: मंडियों की भाषा, शेयर बाज़ार की भाषा। उदाहरण- मुद्रा, पूंजी, दिवालिया, सोना लुढ़का, चाँदी उछली, भाव
2. प्रशासनिक हिंदी: राजभाषा हिंदी, कार्यालयी हिंदी। उदाहरण – तत्काल, गोपनीय, आदेश, निर्देश, सूचना, विज्ञप्ति, निदेशक, कुलसचिव
3. तकनीकी हिंदी: तकनीक और विज्ञान की हिंदी। उदाहरण – अग्निशामक, वातानुकूलित, शयनयान, जालस्थल, गैसचूल्हा, घर्षण, शल्य-चिकित्सा
4. जनसंचारी हिंदी: टी.वी, रेडियो, समाचारपत्र आदि जनसंचार माध्यमों की हिंदी। इसे मीडियाई हिंदी भी कहते हैं। उदाहरण: दूरदर्शन, उद्घॊषक, संवाददाता, प्रसारण, धारावाहिक, संवाद, अनुवादक, पटकथा, संगीतकार, संपादक, प्रकाशक
5. समाजी हिंदी / सामाजिक हिंदी: सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली हिंदी।
6. विधिपरक हिंदी: कानून की हिंदी। उदाहरण - वकील, न्यायालय, मुकदमा, न्यायाधीश, वादी, सबूत, गवाह, अपराध, दंड संहिता
7. सहित्यिक हिंदी: नाट्यशास्त्र, काव्यशास्त्र, लोकशास्त्र की हिंदी
8. अन्य प्रयोजनों की हिंदी: खेल, राजनीति, धर्म, खान-पान (food), पाक-कला (cookery) आदि की हिंदी। उदाहरण – पाक-कला की हिंदी :उबालें, कूट लें, लपेट कर रोल कर लें, गरम गरम परोसें, बगैर तेल के सुनहरा होने तक भूनें,आटे की लोई बना लें, सेंक लें, भरने के लिए आलू के टुकडों को काट लें, तड़का लगाएँ, मसाला कूट लें। खेलकूद की हिंदी: बल्लेबाज, मुक्केबाज, प्यादा, हरफनमौलाखिलाड़ी, धावक, तैराक, बाधा दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, भाला-फेंक, गोल- फेंक, नौकायन, बादशाह, गुलाम, छक्का, चौका