https://youtu.be/sRiyGdNKA_k?si=4Ak-WHduekHu7bTD
एक बार की बात है एक आदमी था उस आदमी के तीन दोस्त थे और वह बड़े ही पक्के दोस्त थे। वह तीनों दोस्त हमेशा उस आदमी के आसपास ही रहते थे और उस आदमी को जिंदगी के हर मोड़ पर उन तीनों की किसी ना किसी तरह से जरूरत पड़ती रहती थी। तो उस आदमी का जब आखिरी वक्त आया मतलब कि जब वह मौत और जिंदगी से लड़ रहा था। तो उसके पहले दोस्त ने उससे कहा कि मैं तुम्हारी मौत को तो नहीं टाल सकता हूं लेकिन मैंने हर परिस्थिति में हर सिचुएशन में चाहे अच्छी हो चाहे बुरी हर परिस्थिति में तुम्हारा साथ दिया है। लेकिन अब मैं तुम्हें सिर्फ इस बात का भरोसा दे सकता हूं कि मैं तुम्हारा अंतिम संस्कार ठीक से करूंगा।
अब दूसरे दोस्त ने कहा कि मैंने तुम्हारे बचपन से लेकर आज तक किसी ना किसी तरीके से तुम्हारा साथ दिया है मेरे होने से तुम दुनिया की किसी भी चीज को पा सकते थे लेकिन मैं तुम्हें फिर से जिंदगी नहीं दे सकता हूं। मैं पूरे तरीके से बेबस हूं और तुम्हारी कुछ भी मदद नहीं कर सकता हूं। अब जो तीसरा दोस्त था उसने इस आदमी से कहा कि दोस्त तुम अपनी सिचुएशन से परेशान मत होना मैं हमेशा से तुम्हारे साथ था और हमेशा तुम्हारे साथ ही रहूंगा। चाहे जिंदगी हो या मौत मैं हमेशा तुम्हारे साथ ही रहूंगा तुम इसके बाद जहां भी जाओगे वहां भी मैं तुम्हारा साथ साया बनकर तुम्हारे साथ ही रहूंगा।
अब मैं आपको बताता हूं कि उस आदमी के उन तीनों दोस्तों के नाम क्या थे और वह कौन थे। पहले दोस्त का नाम था परिवार परिवार वाले हमें इस बात का भरोसा देते हैं कि आपका अंतिम संस्कार हम ठीक-ठाक से कर देंगे। दूसरे दोस्त का नाम था पैसा जिससे हम दुनिया की हर चीज को खरीद सकते हैं और तीसरे दोस्त का नाम था कर्म आपके द्वारा किया गया अच्छा काम यानी कि आपका कर्म आपको यह गारंटी देता है कि वह इस दुनिया में भी आपके साथ था और मरने के बाद भी आपके साथ ही रहेगा। एक कहावत है कि कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो क्योंकि वह चीज आपको आपके आखिरी वक्त में काम आएगी और आपकी अच्छाई आपका कर्म एक ऐसी इन्वेस्टमेंट होती है जो कभी फेल नहीं होती।
https://youtu.be/rAwcCW_FH_A?si=r8Z3ANeQ9YDYyW0-
एक बार की बात है एक मूर्ति बनाने वाला आदमी जिसने अभी मूर्ति बनाना शिखा था वह अकेले एक जंगल से जा रहा था। जंगल में उसे एक बड़ा सा पत्थर दिखता है वह आदमी उस पत्थर को देखकर यह सोचता है की क्यों ना मैं इस पत्थर से भगवान की एक खूबसूरत मूर्ति बना लूं। उस आदमी ने अभी-अभी मूर्ति बनाना शिखा था तो वह बहुत ही उत्सुक था मूर्ति बनाने के लिए इसीलिए उसे जो भी अच्छा सा और बड़ा सा पत्थर दिखता वह उसे मूर्ति बनाने के बड़े में सोचता। उस आदमी ने अपने बैग से हथौड़ी निकाली और उस पत्थर के मूर्ति बनाने के लिए बैठ गया उसने जैसे ही उस पत्थर पर हथौड़ी चलाई तो उस पत्थर से आवाज आई मुझे दर्द हो रहा है। वो आदमी आवाज सुनकर हैरान हो गया उसने फिर से उस पत्थर पर हथौड़ी चलाई फिर उस पत्थर से आवाज आई मुझे दर्द हो रहा है।
वो आदमी अपना समान उठा कर वहां से चला गया और थोड़ा आगे जाने के बाद उसे एक और बड़ा सा पत्थर दिखा। उसने फिर से उसे पत्थर को मूर्ति बनाने का सोचा और अपना समान निकालकर उस पत्थर पर वार करने लगा उस पत्थर को भी दर्द हो रहा था। लेकिन वह पत्थर चुप रहा और दर्द को सहेता रहा थोड़ी डर के बाद उस मूर्ति बनाने वाले ने उस पत्थर से खूबसूरत मूर्ति बना दी मूर्ति बनाने के बाद वह उसे वहीं छोड़कर आगे चला गया।
वह एक गांव में पहुंच तो उसे पता चला की उस गांव में एक नया मंदिर बना है जहां पर भगवान की मूर्ति की जरूर है तो उस मूर्ति बनाने वाले ने उस गांव के लोगों से कहा की मैंने अभी-अभी जंगल में एक भगवान की खूबसूरत मूर्ति बनाई है तुम कुछ लोग मिलकर जंगल में जो और उस मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित कर दो।उस गांव के लोगों ने जंगल में जाकर मूर्ति लाई और उस मंदिर में स्थापित कर दिया। मूर्ति रखने के बाद गांव का एक आदमी ने कहा की मूर्ति का इंतजाम तो हो गया लेकिन अब नारियल फोड़ने के लिए एक बड़े से पत्थर की जरूर है। तभी उस मूर्ति बनाने वाले ने कहा की तुमने जंगल में जहां से ही मूर्ति लाई है उसी रास्ते में थोड़ा आगे जाओगे तो तुम्हें वहां पर एक बड़ा सा पत्थर भी मिल जाएगा।
गांव के लोगों ने उस पत्थर को भी लाकर मंदिर में नारियल फोड़ने के लिए रख दिया। एक दिन रात के समय मूर्ति और पत्थर आपस में बात कर रहे थे। पत्थर ने मूर्ति से कहा की तू कितना खुश है तेरी लोग पूजा करते हैं तुझे सजाते हैं मानते हैं और मुझ पर नारियल फोड़ते हैं मुझे नारियल की वजह से दर्द होता है। तभी मूर्ति उस पत्थर से बोली अगर उस दिन उस मूर्ति बनाने वाले का वार सहन कर लेता तो आज मेरी जगह तू होता और तेरी जगह में। लेकिन तूने वो वार सहन नहीं किया इसलिए आज तुझ पर लोग नारियल फोड़ते हैं और मेरी पूजा करते हैं। दोस्तों किसी ने क्या खूब कहा है की जिंदगी जीना आसन नहीं होता बिना संघर्ष के कोई महान नहीं होता। जब तक न पड़े हथौड़ी की चोट तो पत्थर भी भगवान नहीं होता इसलिए जब भी आपको लगे की आपकी जिंदगी में बहुत ज्यादा दर्द है तकलीफ है परेशानी है तो। समझ जाइए की इन दर्द, तकलीफ और परेशानी के कारण आप में बदलाव होंगे और इसके बाद आपके लिया मीठा फल इंतजार कर रहा है।
https://youtu.be/-qaeWSBoPXA?si=gr9jyDpqgAquA8di
एक बार की बात है एक राजा था उस राजा का राज्य बहुत ही छोटा था और उस राजा के पास ज्यादा सिपाही भी नहीं थे। तो उसे हर समय यह डर रहता कि कब किधर से कोई उसके राज्य पर हमला कर दे। एक बार वह राजा जंगल के रास्ते से अपने महल की तरफ जा रहा था तभी जंगल में उसे एक बड़े से पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग बैठे हुए दिखते हैं। जो बहुत ही ज्ञानी थे और सारे गांव वाले उन्हीं से हर चीज की राय लेते थे। राजा अपने घोड़े से उतरकर उन बुजुर्ग आदमी के पास जाता है और उनसे कहता है कि आप मुझे कोई ऐसा तावीज दे दीजिए जो मुझे बुरे वक्त से बचा कर रखें। यह सुनने के बाद उन बुजुर्ग आदमी ने राजा की तरफ मुस्कुराते हुए देखा और कहा कि मैं तुम्हें कोई ऐसा तावीज या कोई ऐसी चीज नहीं दे सकता हूं जो तुम्हें बुरे वक्त से बचा कर रखे।
लेकिन मैं तुम्हें एक ऐसा तावीज दे सकता हूं कि जब तुम पर कोई मुसीबत या बुरा वक्त आ जाए तो उस तावीज को खोलने के बाद वह तावीज तुम्हें उस मुसीबत से लड़ने में मदद कर सकता है। लेकिन याद रखना इस तावीज को तभी खोलना जब तुम पर चारों तरफ से मुसीबत आ चुकी हो और तुम्हारा समय बहुत खराब चल रहा हो और तुम्हारे लिए सारे दरवाजे बंद हो चुके हो। तब तुम उस तावीज को खोलना तुम्हें उस मुसीबत से लड़ने की हिम्मत मिल जाएगी। राजा उस तावीज को लेकर वहां से चला गया कुछ समय बीतने के बाद उस राजा के राज्य पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। राजा को पता था कि यह उस के साथ एक दिन जरूर होगा राजा ने अपने सैनिकों को तैयार किया लेकिन उस राजा के पास ज्यादा सैनिक नहीं थे और इसीलिए वह यह जंग हार गया।
लेकिन किसी तरह से राजा एक घोड़े पर बैठकर वहां से अपनी जान बचाकर भाग निकला और वह जंगल के अंदर एक गुफा में जाकर छुप गया। लेकिन उसका पीछा करते-करते कुछ सैनिक भी उसके पीछे आ गए। अब वह राजा गुफा के अंदर छुपा हुआ था और उसे सैनिकों के कदमों की आवाज आ रही थी अब उस राजा के पास कुछ भी नहीं बचा था सब कुछ खत्म हो चुका था। तभी उसे उन बुजुर्ग का दिया हुआ तावीज अपने गले में नजर आता है उसने बड़ी ही उम्मीद के साथ उस तावीज को खोलकर देखा उस तावीज के अंदर उसे एक चिट्ठी दिखी जिस पर लिखा हुआ था कि यह वक्त भी गुजर जाएगा। यह पढ़कर राजा को कुछ समझ नहीं आया और जब उसने फिर से उस लाइन को ध्यान से पढ़ा और उसे समझा तो राजा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। मान लो उसे कोई सहारा मिल गया हो और फिर उस राजा ने एक गहरी सांस ली और उसने उन सैनिकों का मुकाबला किया और वहां से बच निकला और दूसरे मुल्क में जाकर फिर से उस राजा ने अपनी सल्तनत कायम की।
दोस्तों कहने को तो यह बहुत ही छोटी लाइन है कि यह वक्त भी गुजर जाएगा। लेकिन इसके अंदर बहुत ही डीप मीनिंग छुपा हुआ है और जब भी आप कोई मुसीबत में फंस चुके हो बहुत सारी परेशानी आप पर आ चुकी है चाहे आप पर बहुत सारा कर्जा हो चुका हो। आपके पास काम नहीं है आप मेहनत कर रहे हो लेकिन आपको फल नहीं मिल रहा है और आपको कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। तब यह लाइन खुद को बोलकर देखना आपको एक सुकून मिलेगा और आपको यह फील होगा कि जाने दो।
आज जो भी मेरी कंडीशन है कितना भी मेरा वक्त बुरा चल रहा है लेकिन कल परसों और एक ना एक दिन यह वक्त भी गुजर जाएगा और तभी आपको उस मुसीबत से निपटने की हिम्मत मिल जाएगी। वह कहते हैं ना कि जब आपका अच्छा समय चल रहा हो तो उस टाइम पर शुक्र करो और जब आपका बुरा वक्त चल रहा हो तो उस टाइम पर सबर करो। क्योंकि समय अच्छा चल रहा हो या बुरा वह ज्यादा दिन तक नहीं रहता और जिंदगी उसे ही कहते हैं जिसमें सुख भी हो और दुख भी तभी लगता है कि हम जिंदगी जी रहे हैं।
https://youtu.be/FBSV4kU2Lng?si=gI8t4Twxn60pqJNP
एक बार की बात है एक राजा था वो राजा बहुत दयावान और दिलदार था अच्छा था लोगों की मदद किया करता था। वह राजा कई बार रात के समय में भेस बदलकर अकेले ही अपने राज्य का चक्कर लगाया करता था। यह देखने के लिए कि उसके राज्य में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है या नहीं सारे लोग सुख शांति से जी रहे हैं या नहीं। तो एक बार जब वो राजा रात के समय भेस बदलकर अपने राज्य का चक्कर लगाकर अपने महल की तरफ वापस आ रहा था। तो महल से थोड़ी दूरी पर उसे एक बूढ़ा आदमी पेड़ के नीचे बैठा हुआ दिखता है। ठंड का समय था और बूढ़े आदमी के पास कोई गर्म कपड़ा या कंबल नहीं था वह बूढ़ा आदमी पेड़ के नीचे सिकुड़ कर बैठा हुआ था। राजा उस बूढ़े आदमी के पास जाता है और उसे पूछता है कि क्या आपको ठंड नहीं लग रही है इतनी ज्यादा ठंड है और आपके पास कोई कंबल भी नहीं है। तो वह बूढ़ा आदमी राजा से कहता है कि मेरे पास कोई कंबल नहीं है लेकिन मुझे इसकी आदत है मैं रोज ऐसे ही ठंड में रहता हूं तो राजा बूढ़े आदमी से कहता है कि आप यहीं रुकिए मैं आपके लिए कंबल लेकर आता हूं। बूढ़ा आदमी यह सुनकर खुश हो जाता है राजा जब महल के अंदर जाता है तो व उस बूढ़े आदमी को कंबल देना भूल जाता है। अब अगले दिन जब सुबह होती है तो महल के बाहर बहुत सारी भीड़ जमा हो जाती है जब राजा सैनिकों से पूछता है कि बाहर क्या हुआ है। तो सैनिक राजा से कहता है कि महल से थोड़ी दूरी पर एक पेड़ के नीचे किसी बूढ़े आदमी की लाश पड़ी हुई है। राजा जब उस लाश को देखने जाता है तो देखता है कि वह वही बूढ़ा आदमी था जिसे रात में राजा ने कंबल देने का कहा था। यह देखकर राजा बहुत दुखी हो जाता है और जब वह उस बूढ़े आदमी की लाश के थोड़ा करीब जाता है तो देखता है कि वहां जमीन पर उस बूढ़े आदमी ने रेत पर कुछ लिखा हुआ था। उस बूढ़े आदमी ने लिखा था कि इतने सालों से मैं बिना गर्म कपड़ों और कंबल के इतनी ठंड में भी जी रहा था मेरे पास कंबल नहीं था। लेकिन उस ठंड से लड़ने की मानसिक शक्ति थी लेकिन तुम्हारे कंबल देने की आस ने मेरी मानसिक शक्ति को खत्म कर दिया।
तो इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सारा खेल मानसिकता का है। अगर आप मानोगे नहीं कि आप सक्सेस हो सकते हो और आप कभी सक्सेसफुल हो ही नहीं सकते हो। क्योंकि दिमाग ऐसे ही काम करता है। इतने सालों से उस बूढ़े आदमी के दिमाग को पता था कि अपने पास कंबल नहीं है तो वह उस ठंड को बर्दाश्त कर लेता था। लेकिन जैसे ही दिमाग को पता चला कि थोड़ी देर में कंबल मिलने वाला है तो उसने अपने बर्दाश्त करने की पावर को खत्म कर दिया। इसी तरह जब आप अपने दिमाग से बोलते हो कि अगर यह नहीं हो पाया तो कुछ दूसरा कर लूंगा। तो आपका दिमाग उस काम को करने में अपना 100% देगा ही नहीं क्योंकि आपके पास दूसरा ऑप्शन भी है। जिस टाइम आपके दिमाग को पता चलता है कि कुछ भी हो जाए मुझे यह करना ही पड़ेगा इसके सिवा मेरे पास कोई रास्ता ही नहीं है। तब आपका दिमाग आपको ऐसी शक्ति देता है कि वह 100% के भी आगे निकल जाती है। तो अपनी मानसिकता अपना माइंडसेट सही बनाओ और अपने दिमाग को यह बताओ कि मैं यह कर सकता हूं। तभी आपका दिमाग उस काम में अपना 100% दे पाएगा।
https://youtu.be/IxnPmmOHxNs?si=9tNQa8KkTfkD_OJU
एक बार की बात है एक आदमी अपने कुछ ऑफिस के काम में बिजी था और वह घर में बैठकर लैपटॉप पर अपना काम कर रहा था। अब उस आदमी का 10 साल का बच्चा हर बार कोई ना कोई सवाल लेकर उसके पास आ रहा था और उसे पूछ पूछ कर तंग कर रहा था। अब वह आदमी अपने बच्चे से परेशान हो गया था उसने सोचा क्यों ना मैं इसे कोई ऐसा काम दे दूं जिसमें वह कुछ घंटे उलझा रहे और उतने समय में मैं अपने ऑफिस का काम कर लूंगा। तो अबकी बार जब बच्चा उसके पास आया तो उसने एक पुरानी किताब उठाई और उस किताब के एक पेज पर वर्ल्ड मैप बना हुआ था। उसने उस पेज को फाड़कर उस पेज के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए और अपने बेटे को देते हुए कहा कि इस पेज पर वर्ल्ड मैप बना हुआ था। मैंने इसे कुछ टुकड़ों में तोड़ दिया है तुम्हें इन टुकड़ों को जोड़कर फिर से वर्ल्ड मैप तैयार करना है अब जाओ जाकर इसे जोड़ो और जब वर्ल्ड मैप बन जाए तब आकर मुझे दिखाना।
बच्चा व टकड़े लेकर चला गया और इधर उस आदमी ने चैन की सांस ली कि अब उसका बेटा उसके पास नहीं आएगा और उसे तंग नहीं करेगा और वह शांति से अपना काम अब कर सकता है। लेकिन अगले ही कुछ मिनट के अंदर ही वह बच्चा फिर से अपने पिता के पास आया और बोला पापा देखिए मैंने वर्ल्ड मैप बना लिया है। यह तो बहुत ही आसान था पापा। उस आदमी ने जब चेक किया तो देखा कि मैप तो बिल्कुल सही जुड़ा हुआ था तभी उस आदमी ने हैरानी में अपने बेटे से पूछा कि यह तुमने इतनी जल्दी कैसे किया। बच्चे ने फिर से कहा कि यह तो बहुत ही आसान था पापा आपने जिस पेज के टुकड़े मुझे दिए थे उसके एक साइड पर तो वर्ल्ड मैप बना हुआ था और दूसरे साइड पर एक मंकी बना हुआ था मैं मंकी को जोड़ता गया और वर्ल्ड मैप अपने आप बन गया।
दोस्तों अक्सर कई बार जब कोई बड़ी प्रॉब्लम समस्या हमारे सामने आती है तो हम उसे देखकर यह सोचते हैं कि हमारी जो प्रॉब्लम है हमारी जो समस्या है हमारी जो परेशानी है वो बहुत बड़ी है और वो इतनी आसानी से हल हो ही नहीं सकती है। हम उसका सिर्फ एक पहलू देखते हैं और अपना एक पॉइंट ऑफ व्यू बना लेते हैं जबकि उसका दूसरा पहलू भी हो सकता है। जहां से उसका हल बहुत ही आसानी से निकल सकता है इसलिए जिंदगी में जब भी कोई बड़ी प्रॉब्लम आए तो उसके हर पहलू को देखकर उसे सॉल्व करने की कोशिश हमें करनी चाहिए।
https://youtu.be/07PWPqB3T0g?si=uZ8BFjGPe37T7Qx0
एक बार एक लड़का एक स्कूल में अपने एडमिशन करने के लिए आया और जिस स्कूल में वह लड़का अपने एडमिशन करने के लिए आया था। उसे स्कूल का एक नियम था एक रूल था और वह रूल यह था की हर रोज क्लास शुरू होने से पहले वहां के सभी स्टूडेंट्स को मेडिटेशन करना पड़ता था और यह रूल्स लड़के को नहीं पता था। तो उस लड़के का एडमिशन होने के बाद जब वो लड़का क्लास के लिए आया तो वहां के गुरु ने उससे कहा की तुम्हें भी क्लास शुरू होने से पहले आधा घंटा मेडिटेशन करना पड़ेगा। वह लड़का मेडिटेशन के लिए बैठा और मेडिटेशन करने लगा लेकिन दो मिनट के बाद ही उस लड़के को गुस्सा आने लगा और उसने अपनी आंखें खोल ली और वो मेडिटेशन से उठ गया। लेकिन वहां के गुरुओं ने उसे फिर से मेडिटेशन करने के लिए कहा। वह लड़का फिर से मेडिटेशन करने के लिए बैठा लेकिन फिर से दो मिनट के बाद ही उसे गुस्सा आने लगा, दरअसल प्रॉब्लम यह थी की जब वो लड़का मेडिटेशन करने के लिए बैठता था तो उसे आसपास के लोगों की बातों की आवाज़ आती थी। जिससे उसे गुस्सा आता था और उस लड़के के साथ रोज ऐसा ही होने लगा तीन दिन बीतने के बाद उसने अपनी यह प्रॉब्लम स्कूल के गुरु को बताई और उस लड़के ने गुरु से यह भी कहा की जब हम मेडिटेशन करते हैं तो यहां के लोगों को बातें करने के लिए माना कीजिए। क्योंकि जब यह डिस्टरबेंस होता है तभी मुझे गुस्सा आता है और जब मैं मेडिटेशन करता हूं और कोई मुझे डिस्टर्ब करता है तो मेरा मन उस इंसान को मरने के लिए या डाँटने के लिए करता है इसीलिए मुझे मेडिटेशन करने के लिए शांत हुआ वातावरण चाहिए।
तो उस स्कूल के गुरु ने उस लड़के से कहा तुम कुछ भी कर लो लोग तुम्हें हर जगह डिस्टर्ब करेंगे। तुम्हें अपने गुस्से पर काबू करना पड़ेगा और अगर फिर भी तुम चाहते हो की तुम्हें एक शांत वातावरण चाहिए तो कल से तुम उस नदी के पास मेडिटेशन करना। वहां पर तुम्हें बातों की आवाज़ नहीं आएगी। वह लड़का अगले दिन नदी के पास मेडिटेशन करने लगा जब वह मेडिटेशन करने के लिए बैठा तो थोड़ी देर के बाद वहां से एक आदमी अपना कुत्ता लेकर जा रहा था। उस कुत्ते की आवाज़ से उस लड़के को डिस्टर्ब हुआ और उसे गुस्सा आ गया और फिर से 3 दिन तक उसके साथ ऐसा ही हुआ। फिर उस लड़के ने सोचा क्यों ना मैं नदी के बीच में जाकर मेडिटेशन करूं वहां पर मुझे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।
वह लड़का एक नव लेकर नदी के बीच में चला गया और वहां पर मेडिटेशन करने लगा और जैसा उसने सोचा था वैसा ही हुआ। नदी के बीच में उसे किसी ने भी डिस्टर्ब नहीं किया और अब से हर रोज ऐसा ही होने लगा था वो लड़का अपना मेडिटेशन अच्छे से कर रहा था। लेकिन एक हफ्ता बीतने के बाद जब वो लड़का नदी के बीच में मेडिटेशन कर रहा था तभी उसे पानी की छप-छप की आवाज़ आई। उसने आंखें खोल कर देखा तो उसे अपने सामने एक नव देखी जो की उसकी तरफ आ रही थी। उस लड़के ने उसे नव की तरफ देखकर चिल्लाते हुए कहा अपनी नव यहां पर मत लाओ। यहां पर मैं मेडिटेशन कर रहा हूं उस नव से कोई आवाज़ नहीं आई लड़के ने दोबारा चिल्लाते हुए कहा लेकिन फिर भी नव उसकी तरफ आ रही थी और उस नव ने लड़के की नव को टक्कर मार दी। अब लड़के को बहुत गुस्सा आ गया था लड़के ने सोचा इस नव में जो भी होगा उसे अब मैं नहीं छोड़ने वाला और लड़का जैसे ही उस नव के अंदर गया लड़के ने देखा उस नव में कोई भी नहीं था लड़के का गुस्सा शांत हो गया। इतने में नदी के साइड से एक आदमी भागते हुए आया लड़के ने सोचा यह नव उस आदमी की होंगी। लड़के को गुस्सा आया और फिर से लड़का उस आदमी पर चिल्लाने लगा। लेकिन वह नव उस आदमी की भी नहीं थी उस आदमी ने लड़के से बोला मैं तो यहां तुम्हें ये पता पूछना आया था और तुम मुझमें पर ही चिल्लाने लगे।
यह सुनने के बाद लड़के का गुस्सा फिर से शांत हो गया फिर लड़का उस नव को उस दिशा में लेकर गया जिस दिशा से वो नव आई थी। लड़के ने यह सोचा की वहां पर इस नव का मलिक मिल जाएगा। वहां पर जाकर उस पर अपना गुस्सा निकलूंगा लेकिन यह लड़का जब वहां पर पहुंचा तो वहां पर पहुंचने के बाद इसे मालूम पड़ा की यह नव जो है बंधी हुई थी और तेज हवा और लहरों की वजह से ये खुलकर खुद नदी में चली गई। अब उस लड़के का गुस्सा फिर से शांत हो गया वो किसी को कुछ बोल ही नहीं सकता था क्योंकि यह सब जो हुआ था यह तो नेचुरल ही हुआ था। प्रकृति की वजह से हुआ था किसी का भी इसमें कोई दोष नहीं था फिर उस लड़के ने एक मिनट के लिए यह सोचा की जब इस नव ने मेरी नव को टक्कर मारी थी तो तब मुझे बहुत गुस्सा आया था और मेरा मन यह का रहा था की जिस किसी ने भी यह किया हो उसे मैं नहीं छोडूंगा और जैसे ही मुझे पता चला की वो नव खाली है। उस नव में कोई नहीं है तो मेरा गुस्सा शांत हो गया और जब मुझे यह पता चला की नव किसी इंसान की वजह से नहीं बल्कि हवा की वजह से नेचुरल ही खुल गई थी तो मैं अपने गुस्से को भूल गया।
यही चीज होती है हमारे साथ भी जब हमें किसी चीज पर गुस्सा आता है वो चीज किसी इंसान की वजह से होती है तो हम अपना गुस्सा उस इंसान पर तो निकल लेते हैं। लेकिन जब अगर कोई चीज प्रगति की वजह से होती है नेचरली होती है तो हम अपना गुस्सा किसी पर निकल नहीं सकते और हम अपने गुस्से को भूल जाते हैं। अगर हम हर बार ऐसा ही सोचे जब हमें गुस्सा आए किसी इंसान की वजह से तो हम यह सोचे की अगर यह प्रकृति की वजह से होता तो क्या हम उसे इंसान पर चिल्लाते। मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो अपने गुस्से को जरा भी कंट्रोल नहीं कर सकते और फिर जिंदगी भर पछताते रहते हैं क्योंकि गुस्से में इंसान इंसान नहीं रहता है जानवर बन जाता है याद रखिए अगर आप अपने गुस्से में एक पाल के लिए सबर कर लेते हैं तो आप हजार दिनों के दुख से बच जाएंगे।
https://youtu.be/giSDl9JkKE0?si=0Pi3yMhpM2_He02u
दोस्तों एक बार की बात है एक बूढ़ा आदमी एक रास्ते से जा रहा था और उस बूढ़े आदमी के पास तीन बड़ी थैलियां थी। वह तीनों थैलियां बहुत ज्यादा भरी हुई थी उस बूढ़े आदमी ने एक लड़के को रुका कर उससे मदद मांगी और उससे कहा कि बेटा मेरे पास यह तीन बहुत भारी थैलियां है क्या तुम इनमें से एक थैली पकड़कर मुझे आगे तक छोड़ दोगे। लड़के ने बिना कुछ कहे उस बूढ़े आदमी के पास से एक थैली अपने पास ले ली और वह उस बूढ़े आदमी के साथ चलने लगा। थोड़ी दूर चलने के बाद बूढ़े आदमी ने उस लड़के से कहा बेटा क्या तुम मेरे पास से यह एक और थैली ले लोंगे।
लड़के ने बूढ़े आदमी की तरफ देखा और कहा कि बाबा आप ऐसा करो आपके पास की दोनों थैलियां भी मुझे दे दो। बूढ़े आदमी ने उसे दोनों थैलियां देने से मना कर दिया तभी लड़के ने मुस्कुराते हुए बूढ़े आदमी से कहा कि घबराइए मत मैं आपकी थैलियां लेकर भागने वाला नहीं हूं। बूढ़े आदमी ने यह सुनकर उसे अपने पास की एक थैली दे दी और एक थैली अपने पास ही रखी तभी लड़के ने उस बूढ़े आदमी से कहा कि आखिर यह थैली इतनी भारी क्यों है क्या है इनमें। बूढ़े आदमी ने उस लड़के की तरफ देखकर कहा कि जो दो थैलियां तुम्हारे पास है उनमें से एक थैली में चांदी के सिक्के हैं और एक थैली में तांबे के और यह जो एक थैली मेरे पास है इस थैली में सोने के सिक्के हैं। लड़का यह सुनकर हैरान हो गया अब थोड़ी दूर चलने के बाद एक पहाड़ पर चढ़कर उन्हें गांव में जाना था। तभी उस लड़के ने बूढ़े आदमी से कहा कि आप ऐसा करिए कि आपके पास की थैली भी मुझे दे दीजिए और आप आराम से पहाड़ चढ़िये मैं अपनी रफ्तार से चढ़कर पहाड़ पर पहुंचने के बाद ऊपर पहाड़ पर आपका इंतजार करता हूं। बूढ़े आदमी ने अपने पास की थैली भी जिसमें सोने के सिक्के थे वह उस लड़के को दे दी। लड़का अपनी रफ्तार से पहाड़ चढ़ने लगा जब लड़का थोड़ा ऊपर चढ़ गया और जब उसने वहां से बूढ़े आदमी को देखा तो उसे वह बूढ़ा आदमी बहुत दूर नजर आ रहा था और तभी उस लड़के की नियत बदल गई। वह लड़का उन तीनों थैलियों को वहां से लेकर भाग गया जब वह अपने घर पहुंचा और उसने थैलियों को खोलकर देखा तो उसने देखा कि उन तीनों थैलियों में पत्थर भरे हुए थे और उसमें से लड़के को एक चिट्ठी मिली जिस पर लिखा हुआ था कि अगर तुम इन थैलियों को लेकर नहीं भागते तो मैं तुम्हें अपने महल का खास आदमी बना देता। असल में मैं एक राजा हूं जो महल के लिए खास आदमी की तलाश कर रहा था। पहले तो मुझे तुम पर भरोसा हो गया था लेकिन एंड वक्त में तुम्हारी नियत बदल गई और तुमने एक खास मौके को अपने हाथों से गवा दिया।
दोस्तों कहते है कि अगर आपकी नियत साफ है तो आपको कामयाबी के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आप अभी भी एक कामयाब इंसान है बस आपको सबर करना है। कामयाबी खुद आपके पास आने का मौका तलाश करेंगी।
https://youtu.be/Qf09zPlqooY?si=fahIvF6wOFqn5pKa
एक बार एक आदमी एक जंगल के रास्ते से जा रहा था। तो उस आदमी को जंगल के अंदर एक घर दिखाई देता है और उस घर के बाहर एक बड़ा सा हाथी एक छोटी सी पतली रस्सी से बंधा हुआ था। जब उस आदमी ने इस बड़े से हाथी को देखा तो वह हैरान हो गया और सोचने लगा कि इतना बड़ा हाथी इतना विशाल जानवर सिर्फ एक छो सी रस्सी से बंधा हुआ है। यह हाथी चाहे तो इस रस्सी को कभी भी तोड़कर यहां से भाग सकता है और आजाद हो सकता है। लेकिन यह हाथी ऐसा कर क्यों नहीं रहा है तो उस हाथी को देखते हुए इस आदमी के दिमाग में कई सारे सवाल आ रहे थे। उतने में उस घर के अंदर से उस हाथी का मालिक बाहर आता है यह आदमी हाथी के मालिक से पूछता है कि आपने इतने बड़े हाथी को इस छोटी सी रस्सी से बांध कर रखा है क्या यह हाथी इस रस्सी को तोड़कर भागता नहीं है।
तो उस हाथी का मालिक इस आदमी से कहता है कि जब यह हाथी इतना विशाल नहीं था और छोटा था।तब मैंने इस हाथी को जंगल से लाया था और उस टाइम पर मैं इस हाथी को इसी रस्सी के सहारे से बांधा करता था। और इस हाथी ने उस टाइम पर इस रस्सी को तोड़ने की बहुत कोशिश की लेकिन छोटा होने की वजह से यह हाथी रस्सी को तोड़ नहीं पाता था। इसने उस टाइम पर भागने की बहुत कोशिश की लेकिन इस रस्सी ने उसे रोक रखा था। अब दिन गुजरते गए और धीरे-धीरे इस हाथी को यह यकीन होने लग गया था कि वह इस रस्सी को कभी भी तोड़ नहीं सकता है और इस रस्सी को तोड़ पाना नामुमकिन है।फिर वक्त गुजरता गया और यह हाथी एक विशाल और बड़ा हाथी बन गया लेकिन इसे अभी भी यही लगता है कि यह रस्सी इससे नहीं टूट पाएंगी और अब यह हाथी इस रस्सी को तोड़ने की कोशिश भी नहीं करता है।
यह बात सुनने के बाद वह आदमी मन ही मन मुस्कुराते हुए सोच रहा था कि हाथी अगर एक बार कोशिश कर ले तो इसे यह पता चलेगा कि इस रस्सी को तोड़ पाना अब इसके लिए कितना आसान हो गया है। लेकिन इस हाथी ने उस रस्सी से हार मान ली दोस्तों सेम सिचुएशन हमारे साथ भी होती है। हम भी यही सोचकर जिंदगी गुजार देते हैं कि मैंने कुछ समय पहले किसी काम को करने की कोशिश की थी लेकिन मैं उसमें नाकाम हो गया था। यही सोचकर हम अपने दिमाग में यह बात डाल देते हैं कि अब उस चीज में मैं कभी भी कामयाबी हासिल नहीं कर सकता हूं और उस चीज में कामयाबी हासिल करना मेरे लिए नामुमकिन है।
लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि उस समय वक्त अलग था और आज वक्त अलग है। आप ही की तरह कुछ साल पहले बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने का ट्राई किया था लेकिन उस टाइम पर वह फेल हो गए थे। लेकिन उन्होंने कुछ समय बाद फिर से ट्राई किया और आज वह सोशल मीडिया से कमा रहे हैं। और आपने अपने आप को यह यकीन दिला दिया है कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना मेरे बस की बात नहीं है। आपने भी उस हाथी की तरह उस छोटी सी रस्सी से हार मान ली है और अपने आप को एक सीमित सोच में बांध लिया है।
https://youtu.be/m0PUH-6KBXs?si=eEpxmVZiyB3eoR2U
एक बार की बात है अलग-अलग गांव की चार औरतें कुए से पानी भर रही थी और पानी भरते भरते व चारों औरतें अपने अपने बेटों की तारीफें कर रही थी क्योंकि चारों के बेटे गांव आए हुए थे। तो उनमें से एक औरत कहती है कि मेरा बेटा तो काशी से पढ़कर आया है और अब वह संस्कृत का विद्वान हो गया है। उसे बड़े-बड़े ग्रंथ मुँह जबानी याद है। यह सुनकर दूसरी औरत ने कहा कि मेरे बेटे ने तो ज्योतिष की विद्या सीखी है एक बार जो भविष्यवाणी कर देता है वह कभी खाली नहीं जाती है। फिर तीसरी औरत ने कहा कि मेरे बेटे ने भी अच्छी शिक्षा ली है और वह दूसरे गांव में पढ़ाने के लिए जाता है। अब चौथी महिला जो चुप थी तो उसे इन बाकी महिलाओं ने पूछा कि तुम भी बताओ अपने बेटे के बारे में उसने कहां तक शिक्षा हासिल की है। तो उस महिला ने कहा कि मेरा बेटा इतना ज्यादा तो पढ़ा लिखा नहीं है पर वो खेतो में बहुत मेहनत करता है और मेरी भी बहुत देखभाल करता है। अब बातें करते हुए वह चारों औरतें आगे बढ़ जाती है तभी उस रास्ते से वहां पर पहली महिला का बेटा आते हुए दिखाई देता है। वह अपने मां के साथ की महिलाओं को प्रणाम करता है और वहां से चला जाता है। अब दूसरी महिला का लड़का रास्ते में मिलता है तो उसने भी अपनी मां के साथ की औरतों को प्रणाम किया पैर छुए और वहां से चला गया। तीसरी महिला का लड़का आया उसने भी प्रणाम किया कुछ बातें की पैर छुए और वहां से चला गया। अब चौथी महिला के लड़के ने जब अपनी मां को रास्ते में देखा तो वह दौड़ता हुआ अपनी मां के पास गया और उसके पास से पानी का घड़ा अपने पास ले लिया और मां से कहा कि तुम बिना बताए क्यों चली आई। मुझसे कह दिया होता कुएं से पानी मैं ले आता। यह कहकर वह लड़का अपनी मां के साथ चला गया और बाकी की महिलाएं वहीं खड़ी उस लड़के को देखती रही।
तो इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जिंदगी में शिक्षा तो जरूरी है ही लेकिन व्यवहार बिहेवियर अपने से बड़ों की रिस्पेक्ट इज्जत वो भी जरूरी है। मैं आपको बता दूं कि बिहेवियर नॉलेज से ऊपर ही रहता है क्योंकि जिंदगी में कई ऐसी सिचुएशन आती है जहां पर नॉलेज फेल हो जाती है लेकिन बिहेवियर सब कुछ हैंडल कर लेता है। वो कहते हैं ना कि टाइम डिसाइड करता है कि आप अपनी जिंदगी में किससे मिलोगे और दिल डिसाइड करता है कि आप अपनी जिंदगी में किसे चाहोगे और आपका बिहेवियर डिसाइड करता है कि आपकी जिंदगी में कौन रहेगा। क्योंकि आपका बिहेवियर आपका बर्ताव वो आईना होता है जिसमें लोग अपने आप को देखते हैं।
https://youtu.be/rN7-5OYUcok?si=_R9VeImmjTxyhtxr
एक बार की बात है एक गांव में एक लकड़हारा रहता था। वह लकड़हारा बहुत ही गरीब था लेकिन वह दिल से बहुत ईमानदार था। वह रोज जंगल जाता और जंगल से लकड़ियां काटकर अपने घर लाता फिर वह उन लकड़ियों को बाजार में बेच देता। यही उसका रोज का काम था तो एक दिन जब वह लकड़हारा जंगल में एक नदी के किनारे कुछ लकड़ियां काट रहा था तभी अचानक उसकी कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूटकर उस नदी में गिर जाती है। अब वो लकड़हारा परेशान हो जाता है क्योंकि उसके पास एक ही कुल्हाड़ी थी और उसे तैरना भी नहीं आता था और अगर आज वह लकड़हारा लकड़ियां काटकर अपने घर नहीं जाएगा तो उसके घर पर आज चूल्हा नहीं जलेगा। अब उस कुल्हाड़ी को बाहर कैसे निकालना है यही सोचते हुए वो लकड़हारा एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है। तभी कुछ समय गुजरने के बाद उस जंगल से एक बुजुर्ग गुजर रहे थे और वह बुजुर्ग कोई मामूली बुजुर्ग नहीं थे वह एक महान और विद्वान बुजुर्ग थे।
जब उन्होंने इस लकड़हारे को परेशान बैठा हुआ देखा तो उन्होंने इस लकड़हारे से पूछा क्या हुआ बेटा इतने परेशान क्यों बैठे हो। लकड़हारे ने उन्हें बताया कि मैं एक लकड़हारा हूं और जब मैं यहां कुछ लकड़ियां काट रहा था तो अचानक मेरी कुल्हाड़ी इस नदी में गिर गई और मुझे तैरना भी नहीं आता है और अगर आज मैं खाली हाथ अपने घर गया तो मेरे बच्चे भूखे ही सो जाएंगे। उन बुजुर्ग ने इस लकड़हारे से कहा कि मैं तुम्हारी मदद तो कर सकता हूं लेकिन अगर मैंने तुम्हारी कुल्हाड़ी तुम्हें इस नदी में से निकालकर वापस दे दी तो तुम फिर से इन पेड़ों की हत्या करने लगोगे। तभी लकड़हारे ने उनसे कहा कि आप गलत सोच रहे हो मैं वैसा लकड़हारा नहीं हूं जो पेड़ों को काटते हैं। बल्कि मुझे भी पेड़ों से प्यार है मैं तो उन लकड़ियों को काटता हूं जो खुद ही पेड़ों पर से नीचे गिर जाती है इसलिए मुझे जंगल में इतना अंदर आना पड़ता है नहीं तो दूसरे लकड़हारे गांव के आसपास के ही पेड़ों को काटते हैं। यह सुनने के बाद उन बुजुर्ग को उस लकड़हारे पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन फिर भी उन्होंने उस लकड़हारे से कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी तुम्हें निकाल कर दे देता हूं। वह बुजुर्ग नदी में गए और नदी में से एक सोने की कुल्हाड़ी को बाहर निकाला और उस लकड़हारे को दिखाते हुए कहा यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी। लकड़हारे ने कुल्हाड़ी को देखा और कहा कि यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। वह बुजुर्ग फिर से नदी के अंदर गए और इस बार उन्होंने एक चांदी की कुल्हाड़ी को निकाला और उस लकड़हारे से कहा कि यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी।लकड़हारे ने फिर से उन्हें कहा कि यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। अब वह बुजुर्ग फिर से नदी के अंदर जाते हैं और लोहे की कुलड़ी को निकालकर उस लकड़हारे से फिर से कहते हैं यह लो तुम्हारी कुलड़ी। अब लकड़हारा उस कुल्हाड़ी को देखकर खुश हो जाता है और कहता है कि यही मेरी कुल्हाड़ी है। दरअसल वह बुजुर्ग यह देखना चाहते थे कि क्या यह लकड़हारा पेड़ों को काटने वाली बात उनसे सच बोल रहा था या झूठ पर वह लकड़हारा बहुत ही ईमानदार था और सच बोल रहा था। इसीलिए उन बुजुर्ग ने वह सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी उस लकड़हारे को ही दे दी और वह लकड़हारा फिर से खुशी खुशी अपना काम करने लगा।
दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर आप ईमानदार हो और पूरी ईमानदारी से अपना काम करते हो तो आपको किसी के सामने झुकने की या किसी भी परेशानी में डरने की कोई जरूरत नहीं है। आपके साथ वैसा ही होगा जैसा आपका बर्ताव है अगर आप ईमानदार हो तो आपकी खोई हुई चीज भी किसी ना किसी के जरिए से वह आप तक पहुंच ही जाएंगी।