1) इतिहास के 8 अनसुलझे और इत्तेफाक । 8 unsolved and coincidences of history
1) 1969 में जिम सुलेमान नाम के एक म्यूजीशियन ने एक एलबम रिलीज किया जिसका नाम था यूएफओ। इस एलबम के एक गाने में यह दिखाया गया कि बीच रेगिस्तान में एलियंस जिम का अपहरण कर लेते हैं। अब इसे इत्तेफाक कहेंगे या जिम की खराब किस्मत, क्योंकि इस एलबम के रिलीज होने के कुछ ही साल बाद जिम न्यू मैक्सिको के एक रेगिस्तान में ही गायब हो गया और उसकी कार बीच रेगिस्तान में ठीक वैसी ही हालत में मिली जैसा उसने अपने एलबम में दिखाया था। इस घटना के बाद जिम को ढूंढने की बहुत कोशिश की गई लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। आज के इस story में आप दुनिया में घटी कुछ ऐसे ही दिलचस्प इत्तेफाक के बारे में जानोगे जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।
2) टाइटैनिक शिप ट्रैजिडी के बारे में तो हर शख्स जानता है, पर क्या आप जानते हैं कि एक शख्स ने इस बात की भविष्यवाणी टाइटैनिक के डूबने के 14 साल पहले ही कर दी थी। मॉर्गन रॉबर्टसन नाम के एक शख्स ने टाइटैनिक के डूबने के 14 साल पहले एक नॉवेल लिखी, जिसमें उसने लिखा कि एक large unsinkable ship जिसका नाम टाइटन होता है, north atlantic ocean में एक आइसबर्ग से टकराकर डूब जाता है। और शिप में लाइफ बोट्स की कमी के कारण सैकड़ों लोग अपनी जान गवां देते हैं। इस नॉवेल के पब्लिश होने के ठीक 14 साल बाद टाइटैनिक के साथ भी बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसा रॉबर्टसन ने अपनी नॉवेल में लिखा था और उनकी नॉवेल के शिप का नाम टाइटन भी टाइटैनिक से मिलता जुलता था।
3) यह वाकया है 2014 का, जब एक दिन कुछ ही टाइम के इंटरवल में मलेशियन एयरलाइंस की दो फ्लाइट्स क्रैश हो गई, जिनमें से एक को यूक्रेन में मार गिराया गया और दूसरी इंडियन ओशन में जाकर क्रैश हुई। लेकिन इस घटना में एक अजीबो गरीब इत्तेफाक हुआ। एक डच साइकलिस्ट martin de jonge को शेड्यूल के हिसाब से इन दोनों फ्लाइट्स को बोर्ड करना था, लेकिन अचानक उसे दूसरी फ्लाइट्स में टिकट सस्ती मिलने की वजह से वह आखिरी समय पर अपना इरादा बदल देता है और इस तरह से वह मौत को एक बार नहीं दो बार मात देता है।
4) 20 December 1921 के दौरान hoover dam की construction साइट अचानक कोलोराडो नदी में आई बाढ़ की चपेट में आ गई, जिसकी वजह से एक worker john gregory tierney की बाढ़ में बह जाने की वजह से मौत हो गई, जो इस dam के प्रोजेक्ट में हुई पहली कैजुअल्टी थी। इस घटना के ठीक 14 साल बाद इसी दिन 20 December 1935 को एक और वर्कर डैम के एक टावर के ऊपर से गिर जाने की वजह से मारा गया। उस शख्स का नाम था patrick william tierney, जो इत्तेफाक से john gregory tierney का ही बेटा था, जो इस घटना के 14 साल पहले इसी दिन इसी जगह पर मौत का शिकार हुए थे। एक ही दिन एक ही जगह पर पिता और उसके बेटे की मौत हो जाना आज भी अपने आप में एक रहस्मयी इत्तिफाक है। जिनकी याद में आज भी इस डैम के पास उन दोनों के नाम की एक मेटल प्लेट लगी हुई है।
5) 1945 अगस्त month में यह एक बिजनेस ट्रिप पर हिरोशिमा आया हुआ था। तभी 6 अगस्त 1945 को सुबह 08:00 बजे अमेरिका ने वहां पर परमाणु बम गिरा दिया। ग्राउंड जीरो से महज दो किलोमीटर दूर होने के बाद भी यह शख्स आश्चर्यजनक रूप से जिंदा बच गया और वापस अपने शहर नागासाकी के लिए निकला। जहां पर 9 अगस्त 1945 हिरोशिमा में हुए हमले को अपने दोस्तों से शेयर कर ही रहा था। तभी अमेरिका ने नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिरा दिया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यामागुची दुनिया का इकलौता इंसान था, जिसने एक नहीं दो दो परमाणु हमलों को ढेला और इसके बाद भी वह जिंदा बच गया।
6) इस प्लेयर को तो आप जानते ही होंगे। जो लोग नहीं जानते उन्हें मैं बता दूं। इसका नाम है alec stewart, जो इंग्लैंड का विकेटकीपर बैट्समैन हुआ करता था। इनकी डेट ऑफ बर्थ है, 8 April 1963 जिसे अगर न्यूमेरिक फॉर्म में लिखा जाए तो यह होता है 8-4-63। आपको लग रहा होगा कि इसमें कौन सा इत्तेफाक है। तो सुनिए। अपने टेस्ट कैरियर में इस खिलाड़ी ने जो टोटल रन स्कोर किए थे वो थे 8463, जो इत्तेफाक से इस खिलाडी की डेट ऑफ बर्थ थी।
7) जेसन और जेनी इंग्लैंड की वो कपल हैं जो खुद तो lucky थे लेकिन जिस भी country में ये घूमने गए वहां के लिए ये बेहद मनहूस साबित हुए। 2001 में यह कपल जब न्यू यॉर्क की सैर पर गया तभी वहां पर नाइन इलेवन के दिन आतंकी अटैक हो गया। जिसमें यह कपल बाल बाल बच गया। इसके बाद जुलाई 2005 में यह कपल लंडन ट्रिप पर था। तभी 7 जुलाई 2005 को चार सुसाइड बॉम्बर्स ने अंडरग्राउंड ट्रेन और बसों में सीरियल ब्लास्ट किए। इस घटना के बाद इस कपल ने नवंबर 2008 में भारत का रुख किया और तभी 26/11 2008 को मुंबई में टेररिस्ट अटैक हो जाता है, जिसमें हर बार की तरह यह कपल आश्चर्यजनक रूप से बच गया। तीनों आतंकवादी हमलों में उसी शहर में मौजूद रहते हुए भी बच जाना और जिस भी देश में जाना और वहां पर टेररिस्ट अटैक हो जाना, यह बात अपने आप में ही हैरान कर देने वाली है।
8) एक ही शख्स के ऊपर चार बार बिजली का गिरना, वह भी हर छह साल के डिफरेंस में आज भी अपने आप में एक रहस्य है, क्योंकि इत्तेफाक तो यह हो नहीं सकता। इस शख्स के ऊपर एक नहीं बल्कि चार बार आसमानी बिजली गिरी। वह भी हर छह साल के अंतराल में। 1918 में वह एक दिन हॉर्स राइडिंग कर रहे थे, तभी पहली बार उनके ऊपर बिजली गिरी, जिसमें उनकी कमर के नीचे का पूरा हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया, लेकिन कुछ दिन में वह ठीक हो गए। इस घटना के छह साल बाद 1924 में एक दिन वह पेड़ के किनारे बैठकर मछली पकड़ रही थे तभी उन पर एक बार फिर से बिजली गिरी। इस घटना के ठीक छह साल बाद 1930 में एक पार्क में टहलते हुए इन पर एक बार फिर से बिजली गिरी। इस बार इनकी बॉडी का right पार्ट पैरालाइज्ड हो गया और जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए आखिरकार 1932 में जिंदगी की जंग हार गए। लेकिन ये कहानी यहां पर खत्म नहीं होती। 1936 में एक बार फिर उन पर बिजली गिरी, लेकिन इस बार ये बिजली उनकी कब्र के ऊपर गिरी थी। जिसमें उनकी कब्र के ऊपर लगा पत्थर टुकड़े टुकड़े हो गया।
तो आज के historical story में बस इतना ही। इसी तरह की कुछ अनसुनी मिस्ट्रीज के साथ आपसे अगले historical story में।
2) Top 8 Mysterious Places in India You Won’t Believe Existed | भारत के 8 रहस्यमय स्थान
https://www.youtube.com/watch?v=nrt-H0DwLMw
नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है नई mystery story में आज हम बात कर रहे है भारत देश में ऐसी कई स्थान है जहाँ रहस्य से भरी पड़ी है। आज हम भारत के उसी रहस्यमयी स्थान के बारे में बात करेंगे। चलिए शुरू करते हैं।
नंबर एक मैग्नेटिक हिल लदाख (Magnetic Hell Ladakh)। हमें मालूम है कि ढलान में एक वाहन फिसल जाता है, लेकिन क्या यह वास्तव में दूसरी तरफ बढ़ सकती है? लदाख में एक पहाड़ी है जिसे माना जाता है कि मैग्नेटिक है। अगर आप अपनी कार पार्क करने के लिए जाते हैं और उस तट पर छोड़ देते हैं जो पहाड़ी पर चढ़ते हैं। यह 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर पहाड़ की तरफ बनने वाली सड़क पर चढ़ जाएगा। यह हिमालय वंडर के नाम से जाना जाता है। वास्तव में कुछ जादुई कर्मों की तरह दिखाई देते हैं जो सड़क और पहाड़ को इस तरह से रखा गया है कि यह ऐसा प्रतीत होता है कि यह क्षेत्र एक ऊँचा इलाका है, लेकिन वास्तव में यह थोड़ा ढलान है। इसीलिए जब गाड़ी गियर से बाहर निकलते हैं, तो ऐसा लगता है कि यह ऊपर चढ़ रहा है।
नंबर दो, हैंगिंग पिलर, लेपाक्षी, आंध्र प्रदेश (Hanging pillior)। दक्षिणी आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी का हैंगिंग पिलर वास्तव में एक रहस्य है। विजयनगर की स्टाइल में 16 वी सदी के पत्थर से बनी यह मंदिर निर्मित है। इस पिलर में हम कपड़े या कागज के मध्यभाग का एक टुकड़ा स्वाइप कर सकते हैं, जो जमीन और पिलर को अलग करती है। ऐसे मैटर फैक्ट एक क्यूरियस ब्रिटिश इंजीनियर ने इसके सपोर्ट के रहस्य को समझने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप इस प्रक्रिया में थोड़ा सा उखड़ गया। कुछ लोग मानते हैं कि पिलर पर पूरे परिसर खड़ा है।
नंबर तीन लीविंग रोडवेज (Living roots bridge) चेरापूंजी, मेघालय। चेरापूंजी मेघालय के लीविंग के बीच का नाम है। रबर के पेड़ को जड़ कहा जाता है जो कि 3000 फीट तक जाते हैं। और यदि आप सोच रहे हैं कि पृथ्वी पर यह कैसे बने, तो उन्होंने इस तरह से घुमावदार जड़े ढलानों के साथ अपना रास्ता बना लिया, जैसे कि नदी के किनारे ऊंचे क्षेत्र में पेड़ों से चिपके रहते हैं। वे अपनी जड़ों को नदी के किनारे तक भेजते हैं। यह कहा जाता है कि मानव ने नदियों के बीच एक प्राकृतिक पुल के रूप में सहायता करने के लिए इन्हें यह आकार दिया गया है।
नंबर चार फ्लोटिंग लेक (Floating lake) लोकटक, मणिपुर। भारत के उत्तर पूर्वी लोकटक लेक सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। इसके फ्लोटिंग के कारण इसे दुनिया का एकमात्र रास्ता झील का नाम दिया गया है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता के इलावा यह झील मणिपुर की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाती है। Hydro Power Generation Irrigation, Drinking Water सप्लाई और स्थानीय मछुआरों के लिए जीविका के रूप में सेवा करते हैं।
नंबर पाँच ग्रेविटी डिफरेंट पैलेस (Gravity defying palace) बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ। यह स्थापत्य आठवीं सदी की है। नवाब साहब को दुल्ला ने इस अद्भुत मिशन को यूरोप और अरबी वास्तुकला को एकदम सही सद्भावी बनाया है। सेंट्रल हॉल 50 मीटर लंबा है और लगभग तीन मंजिला ऊंची किसी भी खिलाड़ी या बीम के सपोर्ट के बिना खड़ी है। मेन हॉल भूलभुलैया की वास्तुकला है। यह हजार से अधिक सीढ़ियों के लिए जाना जाता है। इमामबाड़ा परिसर में भरपूर उद्यान, शानदार मस्जिद और बावड़ी है।
नंबर छह क्वींसटाउन (Twins town), कोडिन्ही, केरला। केरल में मल्लापुरम जिले में स्थित ये छोटा गांव लगभग 2000 परिवारों के लिए निवास है। यह असामान्य बात है कि इन परिवारों ने करीब 220 जुड़वा बच्चों का जन्म दिया है। एक आंकड़ों के मुताबिक कोडिन्ही में पैदा हुए जुड़वा बच्चों की औसत संख्या लगभग छह गुना है। डॉ। कृष्ण विजू जो एक स्थानीय डॉक्टर है और इस जुड़वा के रहस्य को समझने की कोशिश कर रहे हैं, यह मानते हैं कि गांव की भोजन की आदत के कारण हो सकता है। कई रिसर्चर्स ने परिणाम प्राप्त करने की कोशिश की है, लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ है।
नंबर सात मास सुसाइड (Mass birds suicide) जतिंगा, असम। असम में एक छोटे से गांव जतिंगा में सबकुछ है जो आप एक पीसफुल हॉलिडे डेस्टिनेशन में उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि इसके हरे भरे हरियाली और पहाड़ों की पृष्ठभूमि के बजाय छटेंगे एक रहस्यमय घटना से प्रसिद्ध है, जो हर साल मॉनसून के अंत के महीने के दौरान होता है। सूर्यास्त के ठीक बाद जब लोग रात के लिए तैयारी में व्यस्त थे, तब सैकड़ों प्रवासी पक्षियों ने आत्महत्या कर देते हैं। यह अक्सर होता है। आश्चर्य की बात नहीं है, स्थानीय लोग एक डरावना सिद्धांत बताते हैं कि इस घटना के लिए आकाश में बुरी आत्माएं जिम्मेदार हैं। छवि रूप से, पक्षी विज्ञानी स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और अपने स्वयं एक वैज्ञानिक सिद्धांत के साथ आए हैं। वे कहते हैं कि घने कोहरे के समय जब इन घबराए हुए पक्षियों गांव की रोशनी के लिए अपना रास्ता बनाने की कोशिश करते हैं तो वे पेड़ों और इमारतों को मारते हैं। इसके परिणामस्वरूप मौत या गंभीर चोटें होती हैं। हालांकि यह समझने में कोई भी नहीं है कि ये पक्षी रात में क्यों उड़ते हैं और हर साल उसी स्थान पर क्यों फंस जाते हैं।
नंबर आठ द स्केलेटन लेक (The Skeleton Lake) रूपकुंड, उत्तरखंड हर साल रूपकुंड में बर्फ पिघलता है। 16 हज़ार 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक ग्लेशियर लेक है, जहां मानव कंकाल के सैकड़ों floating देखा जाता है। Forensics और radiocarbon परीक्षणों का मानना है कि लाश लगभग 1200 साल पुरानी है। कोई भी यह नहीं जानता कि ये लोग कौन थे। हिमालय के ऐसे क्षेत्र में क्या कर रहे थे। लोक कथाओं के अनुसार कंकाल का अवशेष कन्नौज के राजा जस धवल की गर्भवती पत्नी और सैकड़ों नौकर है, जो एक तीर्थ यात्रा पर नंदा देवी मंदिर की तरफ जा रहे थे। हालांकि इससे पहले कि वे अपने गंतव्य तक पहुंच सके लेकिन एक भयानक तूफान में फंस गए। छुपने के लिए किसी भी स्थान को खोजने में असमर्थ रहे और पूरे लोग झील के पास मारे गए।
दोस्तों उम्मीद करते हैं यह mysterious story in hindi आपको पसंद आई हो। धन्यवाद दोस्तों।
https://www.youtube.com/watch?v=caw14U6miYI
https://www.youtube.com/watch?v=Mjwg7mR5f_Q&pp=ygUvU3RvcnkgT2YgTXlzdGVyaW91cyBHaG9zdCBUcmFpbiB8IFphbmV0dGkgdHJhaW4%3D
Zanetti train 14 जून 1911 इटली के शहर रोम की ट्रेन कंपनी अपनी ट्रेन की पहली यात्रा के लिए 100 लोगों का चुनाव करती है क्योंकि यह ट्रेन का पहला ट्रायल था। इसलिए कंपनी अपने प्रचार के लिए और अपने मुफ्त में एक खूबसूरत ट्रेन के सफर का आनंद दिलाने के लिए ट्रेन में उन सबके खाने पीने की चीजों का इंतजाम भी करती है। साथ ही उन सारे यात्रियों की वापसी का भी पूरा इंतजाम किया जाता है। उन यात्रियों के लिए छह Staff भी ट्रेन में भेजे जाते हैं, जिनका काम होता है कि वह तीन डिब्बों वाली नई Zanetti train के एक एक यात्री का ध्यान रखते हुए उन्हें खाने पीने की चीजें प्रोवाइड करवाते रहें। इस तरह ट्रेन में कुल 106 लोग मौजूद होते हैं। जैसे ही ट्रेन में सब लोग बैठ जाते हैं और ट्रेन को स्टेशन से ग्रीन सिग्नल मिलता है तो ढेर सारे धुंए के साथ ही ट्रेन का इंजन अपने साथ लगे तीनों डिब्बों को खींचना शुरू कर देता है। जल्दी ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ लेती है। इटली के खूबसूरत रास्तों से गुजरते हुए ट्रेन लोगों को सफर का खूबसूरत अनुभव कराते हुए चल रही थी। सारे यात्री खिड़कियों से झांकते हुए आस पास की खूबसूरती को देखते हुए ट्रेन की सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे। सब कुछ निर्धारित तरीके से चल रहा था। ट्रेन सही समय से चल रही होती है। आसपास के इलाके के लोग भी इस ट्रेन को अपने इलाके से गुजरते हुए देखते हैं। लेकिन तभी उन 106 लोगों के साथ कुछ ऐसा होता है जिससे आज 110 साल बाद भी इटली के लोग हैरान हैं। ट्रेन अपनी रफ्तार से last stop के लिए आगे बढ़ ही रही होती है कि रास्ते में लोम्बार्डी टनल आती है। यह टनल करीब एक किलोमीटर लंबी होती है और यही इस टनल के आने से पूरी कहानी की खूबसूरत तस्वीर में डर और हैरानी का काला रंग भर जाता है। वैसे आपको बता दें यह टनल बहुत वक्त से इस्तेमाल में आ रही थी। इसीलिए इस टनल से होकर गुजरना ट्रेन के लिए कोई अलग बात नहीं थी। इसी कन्वेंशनल रास्ते पर ट्रेन पूरे शान से टनल में एंटर करती है। लेकिन दोस्तो, ट्रेन टनल के एक सिरे पर एंटर तो होती है, लेकिन टनल के दूसरे सिरे से बाहर नहीं आती और यहीं पर पूरे इटली के होश उड़ जाते हैं। करीब एक दिन का समय निकल गया और 106 यात्रियों को लिए हुए तीन डिब्बे वाली एक जेनेटिक ट्रेन अभी भी लापता है। कंपनी के लोग अपनी जानकारी के हिसाब से यह बता रहे होते हैं कि उनके पास ट्रेन की आखिरी लोकेशन लोम्बार्डी टनल की है।
इसके बाद उनके पास उस ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है और यहीं पर मामला राष्ट्रीय अखबारों और देश की सरकार तक पहुंचना शुरू हो जाता है। लोगों को हैरानी सिर्फ इस बात की होती है कि महज एक किलोमीटर लंबी सुरंग में इतनी बड़ी ट्रेन आखिर कहां गायब हो गई है, जो सुरंग से बाहर निकल ही नहीं पाई। कंपनी के लोगों के तर्क सुनकर अखवार वाले हंस रहे हैं। कंपनी को लगता है कि सुरंग में ज़रूर ऐसा कोई बड़ा गड्ढा होगा जिसमें ट्रेन गिर गई होगी। इसलिए कंपनी अपने कुछ Expert को सुरंग की जांच करने के लिए भेजती है। Expert भी डरे डरे से सुरंग में एंटर करते हैं क्योंकि सुरंग ने लोगों के भीतर खौफ तो भर ही दिया था। Expert की टीम पूरे टनल की काफी बारीकी से जांच करती है, लेकिन उन्हें उस टनल में कोई बड़ा गड्ढा नहीं मिलता है। इस ट्रेन से जुड़ी कोई भी चीज हासिल नहीं होती है। इसी प्रयास के साथ ही ट्रेन को खोज पाने और उसमें सवार 106 यात्रियों के वापस आने की संभावनाएं भी खत्म होने लगती हैं। देश की सरकार और कंपनी की बहुत बेइज्जती हो जाती है, लेकिन सरकारी और कंपनी कोई कुछ भी नहीं कर पाते है। अब ट्रेन लापता का पोस्टर बनवाने का समय आ चुका था। सोचिए आप कहीं कोई ऐसा पोस्टर पढ़ें, आपको कैसा लगेगा? आगे बढ़ते हैं अब इस ट्रेन की कहानी से नई और रोचक कहानियां निकलनी शुरू होने लगती हैं।
ट्रेन के लापता होने के कुछ ही दिनों बाद मैक्सिको के रहने वाले दो युवक इस बात का दावा करते हैं कि वो दोनों Zanetti train की उस यात्रा का हिस्सा थे। अपनी बात के पक्ष में वह बताते हैं कि वह दोनों ट्रेन के सुरंग में दाखिल होने से पहले ही ट्रेन से कूद गए थे और जब उनसे पूछा गया आप लोग क्यों कूदे थे तो उन्होंने जो बताया वह काफी हैरान करने वाला था। उनका दावा था कि ट्रेन के टनल में एंटर करने से पहले ही ट्रेन में घना काला सफेद धुआं भरने लगा था और साथ ही अजीब सी आवाजें भी सुनाई देने लगी थी, जिससे कि पूरी ट्रेन में दहशत फैल गई। चूंकि ड्राइवर ने टनल में घुसने से पहले ट्रेन की रफ्तार धीमी कर दी थी, इसलिए वह दोनों उस ट्रेन से कूद गए। लेकिन कूदने के दौरान उन्हें काफी चोटें भी आई और वे वहीं बेहोश पड़े रहे। जिस वजह से उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चला कि ट्रेन के साथ आखिर हुआ क्या था। उन लोगों ने लगातार बातचीत और जांच पड़ताल के दौरान कुछ ऐसा हासिल नहीं किया जिससे कि उनकी बातों को सच माना जा सके। क्योंकि उन दोनों की ही मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन इसके कुछ दिनों बाद एक और ऐसा दावा सामने आया जिसने लोगों को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया। यह दावा था मैक्सिको के एक डॉक्टर का जिसने बताया इस हादसे के अगले दिन उनके यहां पर कुछ। 104 लोग इलाज करवाने आए थे, जिनमें सारे के सारे मानसिक रूप से बीमार थे। डॉक्टर ने बताया उसने यह जानने की काफी कोशिश की उनके साथ हुआ क्या है। लेकिन ऐसा करने में वह नाकामयाब रही क्योंकि उन सबकी हरकतें इतनी अजीब थी कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया। इस दावे पर इटली भरोसा नहीं कर पा रहा था, लेकिन जैसा कि डॉक्टर ने कहा था कि कुल 104 लोग थे, जिनमें से अगर पहले दावा करने वाले दोनों लोगों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या कुल यात्रियों की संख्या यानी 106 के बराबर हो रही थी। लेकिन अंत में इस दावे से कुछ भी हासिल नहीं हुआ। समय के साथ लोग इस ट्रेन हादसे को भूलने लगे थे और सारी जांच एजेंसियों ने भी खुद को समेटना शुरू कर दिया और इसी के साथ यह हादसा एक गहरा राज बनकर रह गया। लेकिन बाद में इस ट्रेन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें सामने आई जिसने हैरानी का लेवल और बढ़ा दिया था। जैसे कि इस ट्रेन को अलग अलग समय पर अलग अलग जगहों पर देखा गया, जिसमें यूक्रेन, रशिया, मैक्सिको और इटली के कुछ शहर शामिल थे। इसको देखने का दावा करने वाले लोग जिस तरह से इसका हुलिया बताते थे वह हूबहू इसी Zanetti train के जैसा ही होता है। इसी के साथ एक और ऐसी बात इस ट्रेन के बारे में सुनने में आती है जो ज्यादा ही हैरान करने वाली है। लेकिन इस बात से इस ट्रेन की गुत्थी कुछ हद तक सुलझती हुई नजर भी आती है। हुआ कुछ यूं कि मैक्सिको में बिल्कुल ऐसी ट्रेन यानी Zanetti train को देखने के बारे में कहा जाता है और वहां साल 1840 यानी Zanetti train से करीब 70 साल पहले ही उसे मैक्सिको में देख लिया गया था। अब आपको लगेगा कैसे यह दावा चीजें साफ करता नजर आ रहा है। तो बात कुछ यूं है भाईसाब कि मैक्सिको के इस दावे के बाद एक्सपर्ट्स ने वही सोचा जो सोचना चाहिए था। उन्होंने यह बात कही शायद इस टनल में घुसते ही ट्रेन, स्थान यात्रा को छोड़कर समय यात्रा पर निकल गई थी। इसी वजह से उसका कुछ पता नहीं चला और वह टनल के बाहर कभी निकली ही नहीं और यही कारण था कि इस ट्रेन को 1840 में मैक्सिको में देखा गया क्योंकि मुमकिन है कि वह टाइम ट्रैवल कर के पास में चली गई हो। आपको क्या लगता है आखिर इस ट्रेन के साथ क्या हुआ होगा? क्या सच में वह ट्रेन टाइम ट्रैवल का शिकार हुई? हमें कमेंट में बताइए ना।
अगर आज की story अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ शेयर कर देना। फिलहाल के लिए इतना ही अभी के लिए हमें दीजिए इजाजत। आपसे मुलाकात होगी अगली mysterious story में।
शुक्रिया।
4) Top 6 Unsolved Mysteries | संसार के 6 अनसुलझे रहस्य |
https://www.youtube.com/watch?v=wjRMgRZ5L_4
दोस्तो दुनिया में बहुत सी ऐसी रहस्यमयी चीजे और घटनाएं है जो आज तक एक mystery ही बनी हुई है जैसे की shroud of turin पर आखिर जीसस क्राइस्ट की डेड बॉडी के निशान कैसे आए और क्या tutankhamun का खंजर अंतरिक्ष आया था। क्यों उसने वैज्ञानिकों को 100 साल तक यह मानने में मजबूर कर दिया कि यह खंजर इस दुनिया का है ही नहीं। Sodder family के बच्चे आखिर रहस्यमय तरीके से कैसे गायब हो गए? क्या Pollock Sisters का सच में पुनर्जन्म हुआ था? आखिर zodiac killer कौन था । ऐसी ही कुछ mystery आज हम जानने और उन्हें समझने की कोशिश करेंगे। तो आइए जानते हैं
नंबर एक क्या Pollock Sisters पुनर्जन्म को सच साबित करती हैं? क्या आपको लगता है कि कोई मरने के बाद दोबारा जन्म ले सकता है? अगर आप डाउट में हैं तो आज हम आपको ऐसी बहनों की कहानी बताने जा रहे हैं जो इस बात को सच साबित करने की Possibilities बढ़ा देगी कि पुनर्जन्म होता है। दोस्तों may 1957 में church जाते वक्त एक कार एक्सीडेंट में तीन बच्चों की मौत हो जाती है। जिसमें से एक नौ साल का लड़का था। छह और 11 साल की दो सगी बहनें। अपने बच्चों की मौत से Pollock family पूरी तरह टूट जाती है। लेकिन इस घटना के तीन साल बाद Pollock family में ही दो जुड़वा लड़कियों का जन्म हुआ। Pollock family अपने बच्चों को एक्सीडेंट में खोने के बाद इन लड़कियों के जन्म से बहुत खुश थी। लेकिन जब ये लड़कियां चार साल की हुई तो वो अपनी चार पांच साल पुरानी बातें याद करने लगी। जो Pollock family की उन दो मरी हुई बेटियों को पता थी वो उस स्कूल की बातें कर रही थी जहां वो कभी गई ही नहीं लेकिन जिसमें उनकी मरी हुई बेटियां जाया करती थी। इसके अलावा उन दोनों जुड़वा बहनों को कार और रोड से बहुत डर लगता था। जब Pollock family ने इन लड़कियों को अपनी मरी हुई बेटियों के खिलौने दिए तो जुड़वा बहनें इन खिलौनों से ठीक वैसे ही खेल रही थी जैसे उनकी मरी हुई बेटियां खेला करती थी। और यह शक यकीन में तब बदला जब उनकी एक बेटी ने अपनी दूसरी बहन के गोद में सिर रखा हुआ था और दूसरी बहन बोल रही थी कि देखो तुम्हारी आंख से खून आ रहा है और यही तुम्हारा कार से एक्सीडेंट हुआ है। इसके बाद Pollock family को भरोसा हो गया था कि ये उनकी मरी हुई बेटियां ही हैं जिनका पुनर्जन्म हुआ है। पुनर्जन्म की ये घटना वाकई किसी mystery से कम नहीं है क्योंकि इन लड़कियों का जन्म उसी घर और उन्हीं माता पिता से हुआ था।
नंबर दो the shroud of turin दोस्तो shroud of turin एक 14 फुट लंबा लिनन का कपड़ा है। लेकिन इस कपड़े में कुछ खास है जो आज भी एक मिस्ट्री बना हुआ है। दरअसल, इस 14 फुट लंबे कपड़े पर एक आदमी का प्रिंट बना हुआ है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये प्रिंट जीसस क्राइस्ट यानी यीशु मसीह का है। क्योंकि इस कपड़े पर बने हुए प्रिंट पर ठीक वैसे ही बॉडी और घाव के निशान हैं जैसे यीशु मसीह की डेथ से पहले उनके शरीर पर लगे हुए थे। ये कहा जाता है कि जब यीशु मसीह की डेथ हुई थी तो उन्हें इसी कपड़े में लगाया गया था। तभी से ये निशान इस कपड़े पर मौजूद हैं। इस कपड़े को पहली 1354 में एक मशहूर योद्धा जो फ्राइडे चारणी के पास देखा गया था। जिसके बाद इस कपड़े को 1578 में ट्यूरिन के कैथेड्रल चर्च में रखा गया था और तभी से इसे The Shroud of Turin कहते हैं। वैसे इस कपड़े को लेकर बहुत सी कहानियां हैं जिसमें से एक ये है कि जब रोमन ने जीसस को क्लासिफाई किया था तब जीसस की डेथ के बाद उन्हें पूरे रीति रिवाजों के साथ एक लिनन के कपड़े में लपेट कर दफना दिया गया था। लेकिन इस घटना की सबसे हैरानी की बात ये थी कि जीसस को दफनाने के तीन दिन बाद जब मकबरे का निरीक्षण किया गया तो उनकी बॉडी वहां नहीं थी। वहां पर सिर्फ लिनेन का कपड़ा मौजूद था, जिसमें जीसस को लपेटा गया था। इसीलिए ऐसा माना जाता है कि शिराज़ ऑफ ट्यूरिन वही लिनेन का कपड़ा है जिसमें जीसस को लपेटा गया था। अब तक इस कपड़े की बहुत सी रिसर्च की जा चुकी है। Research में पता चला कि इस कपड़े पर कुछ लैटिन और ग्रीक भाषा के वर्ड्स लिखे हुए थे, जिससे यह पक्का हो गया था कि ये कपड़ा 2000 साल पुराना है। लेकिन जब इस कपड़े की कार्बन डेटिंग चेक की गई तो पता चला कि ये कपड़ा 1200 या 1300 ईस्वी का है, जिससे इस कपड़े का जीजस से कोई भी रिलेशन नहीं बन पा रहा था और तभी से ये शॉर्ट ऑफ ट्यूरिन एक मिस्ट्री बना हुआ है।
नंबर तीन आखिर sodder children कहां है? sodder family की मिस्ट्री 1945 में क्रिसमस से पहले की रात को शुरू हुई थी। sodder family यूनाइटेड स्टेट्स के वेस्ट वर्जीनिया में एक छोटे से टाउन फीट वेल में रहती थी। इस फैमिली में जॉर्ज सोडा और जैनी सोडा अपने 10 बच्चों के साथ रहते थे। जब सोडा फैमिली को घर में आग लगने का एहसास हुआ तो वो सब अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे। जॉर्ज ने बाहर देखा कि उनके पांच बच्चे अभी भी बाहर नहीं आए हैं। वहीं घर को पूरी तरह से आग की लपटों ने घेर लिया था। जॉर्ज ने बच्चों को बचाने के लिए सीढ़ी ढूंढी लेकिन उस वक्त सीढ़ी गायब थी और उन्हें वो नहीं मिली। जॉर्ज ने सोचा कि अपने ट्रक्स के ऊपर चढ़कर अपने बच्चों को खिड़की से बचा लो, लेकिन उस वक्त उनका एक भी ट्रक स्टार्ट नहीं हुआ। और तो और जब जॉर्ज ने आग को बुझाने के लिए पानी ढूंढा तो सारा पानी उन्हें बर्फ में जमा हुआ मिला। जब जॉर्ज के पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड को कॉल करके बुलाने की कोशिश की तो किसी का भी फोन काम नहीं कर रहा था। आखिरकार घर ऐसे ही सुबह तक जलता रहा। 25 दिसंबर की सुबह जब पुलिस सोडा फैमिली के घर पहुंची तो वहां जॉर्ज के पांच बच्चे, उनकी बॉडीज और लाश नहीं थी। पुलिस ने अपनी इनवेस्टिगेशन में पाया कि उस एरिया की सभी टेलिफोन लाइन्स कटी हुई थी। जैनी यानि बच्चों की मां से पूछताछ करने पर पता चला कि रात को आग लगने से ठीक एक घंटे पहले किसी ने उनके घर पर फोन किया था। लेकिन जैनी ने उस वक्त उन सब चीजों पर ध्यान नहीं दिया था और इन्वेस्टिगेशन होने पर पता चला कि। एक अनजान आदमी को बहुत दिनों से जॉर्ज के घर के बाहर देखा जा रहा था, लेकिन उस आदमी और फैमिली के बच्चों का आज तक कुछ पता नहीं चला है। सोडा फैमिली ने अपने बच्चों को ढूंढने के लिए हर कोशिश की, लेकिन वह हमेशा नाकामयाब ही हुए। पता नहीं आखिर वह बच्चे कहां गायब हो गए थे और क्या उस अनजान आदमी का इससे कुछ लेना देना भी था या वह सिर्फ एक कॉन्फिडेंस था। यह आज भी एक मिस्ट्री है।
5) वैज्ञानिक भी है हैरान ऐसा कैसे संभव है ? Creepiest Recent Archaeological Discoveries!
दोस्तो, आपने पुरातत्व यानी archaeological के बारे में तो सुना होगा। एक ऐसी दुनिया जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान रह जाता है। बड़े बड़े archaeological जब हड़प्पा सभ्यता जैसी दुनिया की खोज करते हैं तो मानव सोचने पर मजबूर हो जाता है। पुराने समय के इंसान कैसे रहा करते होंगे? उन लोगों की जिंदगी कैसी होगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए archaeological दिन रात लगे रहते हैं। कभी कभी ऐसी डिस्कवरी हो जाती है, जो archaeological को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। आज के इस blog में हम आपको कुछ ऐसे ही archaeological discovery के बारे में बताएंगे, जिन्हें देखने के बाद आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। तो बने रहिए हमारे साथ।
Pot burial, Pot burial का मतलब होता है बर्तन दफनाना। Egypt के अंदर archaeological को कुछ ऐसा मिला, जो वाकई हैरान करने वाला था। इन बर्तनों के अंदर उन्हें बहुत सारे नवजात शिशुओं के अवशेष मिले। हालांकि कुछ जगह व्यस्क लोगों की हड्डियां भी मौजूद थी, मगर इनकी संख्या बहुत कम थी। दोस्तों आपको बता दें Egypt के अंदर बहुत सारे ऐसे कॉफिन मिल चुके हैं जिनके अंदर मम्मी को गोल्ड के साथ रखा गया था। ऐसे में archaeological दिमाग लगा रहे हैं कि बर्तनों के अंदर जिन लोगों की खोपड़ी और हड्डियां मिली है वो लोग गरीब तबके के रहे होंगे और ये लोग कॉफिन नहीं खरीद पाए होंगे। लेकिन बाद में पता चला ऐसा कुछ भी नहीं था। बल्कि बर्तनों के अंदर दफनाना, जीवनचक्र पूरा करने की एक प्रक्रिया थी और ये लोग deadbody को बर्तन के अंदर आने से पहले उसकी खोपड़ी को तोड़ दिया करते थे। ठीक उसी तरह जिस तरह हिंदू परंपरा में deadbody को जलाते समय उसकी खोपड़ी में डंडा मारा जाता है ताकि खोपड़ी टूट सके।
एशियन सोल्जर हेलमेट, दोस्तों आपने हॉलीवुड की मूवी या फिर चंद्रगुप्त मौर्य जैसे ऐतिहासिक सीरियल में इस तरह के हेलमेट को जरूर देखा होगा। कहा जाता है पुराने समय में सारे सिपाही ठीक इसी तरह का हेलमेट इस्तेमाल करते थे। लेकिन इजरायल में हाइफा हारबर का एक ऐसा greek हेलमेट मिला है जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आर्कियोलॉजिस्ट का मानना है कि इस तरह के हेलमेट आज से करीब ढाई हजार साल पहले greek सिपाहियों ने पहना होगा। इस तरह के हेलमेट को हमने फिल्मों में तो बहुत देखा है, लेकिन हकीकत में इस हेलमेट को देखना वाकई में बहुत बड़ा experience है। यह हेलमेट पूरी तरह से मेटल का बना है।
Archeology and the olympic game। दोस्तों ज़रा सोचिए कोई देश ओलंपिक games की तैयारी कर रहा हो और इसी तैयारी के दौरान उसे अपने इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण चीजें मिल जाये तो कितना मजा आएगा। दरअसल 2015 में चीन के बीजिंग शहर में ओलंपिक गेम्स होने वाले थे। अब आप भलीभांति जानते हैं कि चीन अपनी क्रिएटिविटी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। चीन के दिमाग में आईडिया आया क्यों न बीजिंग के आसपास किसी इलाके में एक ओलंपिक सिटी बना दी जाए ताकि ओलंपिक में आने वाले सभी दर्शक एन्जॉय कर सकें। इसके बाद चीन ने गांव में ओलंपिक सिटी बनाने का फैसला किया। ओलंपिक सिटी बनाने से पहले वहां की गवर्नमेंट ने पूरे इलाके का अच्छी तरह से विश्लेषण किया ताकि कोई गड़बड़ ना हो। और इसी खोजबीन के दौरान archaeological को वहां पर 800 साल पुराना एक पैलेस मिला। हम आपको बता दें यह यांग जिंग नाम की राजधानी के पास मौजूद है। यांग जिंग उस समय वहां की राज्य की राजधानी हुआ करती थी, लेकिन वर्तमान में इसे हम बीजिंग के नाम से जानते हैं। इसके बाद चाइनीज गवर्नमेंट ने ओलंपिक सिटी को वहां से थोड़ा दूर बनाने का फैसला किया और इस जगह को टूरिस्ट के लिए खोल दिया। आज भी बड़े बड़े खिलाड़ी और खेल प्रेमी जब ओलंपिक सिटी को देखने आते हैं तो चीन के इस कल्चरल प्लेस को देखना नहीं भूलते।
इंग्लिश कब्रिस्तान इंग्लैंड में हुई इस खोज के बाद पूरी दुनिया में चर्चा होने लगी। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इस कब्रिस्तान में ऐसा क्या है। दरअसल इंग्लैंड में कुछ लोग घर बनाने के लिए खुदाई कर रहे थे। तभी उन्हें वहां पर बहुत सारे नरकंकाल मिले जो अलग अलग सदी के लोगों के थे। इसके बाद इसकी सूचना आर्कियोलॉजिस्ट को दी गई और टीम एलिन अपनी टीम लेकर वहां जांच पड़ताल करने पहुंच गए। टीम एलिन का कहना था कि ये नरकंकाल उन्हीं लोगों के हैं जो सबसे पहले इंग्लिश बोला करते थे। मतलब हम कह सकते हैं कि इंग्लिश बोलने की शुरुआत इन्हीं लोगों ने की होगी। मगर इनकी इंग्लिश आज की इंग्लिश से बहुत अलग थी। लेकिन आज हम लोग जो इंग्लिश बोलते हैं वो इन्हीं लोगों की इंग्लिश का विकसित रूप है, जिसे हम लोगों ने अपने हिसाब से मॉडरेट कर लिया है। आर्कियोलॉजिस्ट टीम के हैड टीम एलिन के अनुसार ये लोग झुंड से सभ्यता के लोग हुआ करते थे। दोस्तो, आपको क्या लगता है? क्या सच में झूठ सभ्यता के लोग दुनिया में सबसे पहले इंग्लिश बोला करते थे।
Egypt ओल्ड गार्डन दोस्तो, आप लोग भलीभांति जानते हैं कि Egypt में खुदाई के दौरान अलग अलग तरह की मम्मी मिली है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि Egypt के पास एक पुराना गार्डन भी मिला है। इससे साफ जाहिर है कि उस जमाने में लोग पेड पौधे लगाया करते थे और उन्हें गार्डनिंग का काफी शौक था। आज के जमाने में हर कोई अपने घर के आसपास एक बगीचा जरूर बनाते हैं, लेकिन Egypt में ओल्ड गार्डन का मिलना वाकई में हैरानी वाली बात है। archaeological गार्डन को चार हज़ार साल पुराना बता रहे हैं। इतना ही नहीं, archaeological को Egypt की राजधानी के पास जो गार्डन मिला है, उसमें खजूर के अवशेष भी मिले हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि आज से चार हज़ार साल पहले भी लोग ड्राय फ्रूट खाना पसंद करते थे।
आयरन एज टीनेजर दोस्तों, हम लोग जब भी किसी यंग एज के लड़के और लड़की की डेडबॉडी को एक साथ देखते हैं तो सभी लोग यही अंदाजा लगाते हैं। शायद दोनों लवर्स होंगे और एक साथ मर गए। ठीक इसी तरह archaeological ने कजाकिस्तान में आयरन एज की दो लड़कियों और लड़के के कंकाल को खोज निकाला। इन दोनों की डेडबॉडी को एक साथ अगल बगल में दफनाया गया था। archaeological का मानना है कि आज से करीब 27 साल पहले इन दोनों की मौत हुई होगी और ये दोनों साका नाम के समूह के सदस्य रहे होंगे। साका के लोग ईरानियन भाषा बोला करते थे और इनका संबंध मध्य एशिया और रशिया से हुआ करता था। इन लोगों ने तकरीबन 600 साल तक इस एरिया में अपना कब्जा जमाकर रखा लेकिन उसके बाद ये लोग विलुप्त हो गए। उस लड़की के कंकाल की छानबीन करने के बाद archaeological ने बताया, जब इस लड़की की मौत हुई होगी तो उसकी उम्र करीब 16 साल की रही होगी। लेकिन इस लड़की की कब्र को लुटेरों ने लूट लिया। इसलिए वहां ज्यादा कुछ नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ उस यंग लड़के ने अपने गले में सोने के आभूषण पहन रखे थे। दरअसल, माना जाता है कि साका समूह के लोग सोने के आभूषण पहनते थे और जब ये लोग घर से बाहर निकलते थे तो इनके पास हमेशा तलवार और तीर रहा करते थे। उस लड़के के कंकाल के पास भी सोने की तलवार और एक सोने का तरकश मिला है। इतना ही नहीं उस तरकश में तांबे के बने कुछ तीर भी थे। दोस्तों इतना सुनकर आप समझ गए होंगे कि उस समय लोगों के पास कितना सोना हुआ करता था। उस लड़के और लड़की के कंकाल ने काफी क्वालिटी वाले कपड़े भी पहने हुए थे और इसी बात से archaeological अंदाजा लगाते हैं कि दोनों समाज के ऊंचे वर्ग के सदस्य रहे होंगे। लेकिन archaeological इस बात का पता आज तक नहीं लगा पाए कि इन दोनों के बीच क्या संबंध थे। दोस्तों हम आपको बता दें कि साका प्रजाति ने लिखित में कुछ भी नहीं छोड़ा है इसलिए इनके बारे में कुछ भी जान पाना बहुत मुश्किल है।
रोमन ट्रेडिंग town। दोस्तों जरा सोचिए अगर किसी शहर के अंदर मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए काम चल रहा हो तभी वहां पर एक ऐसी सभ्यता मिल जाए जिस पर उस जमाने की फैक्ट्रियां पुराने जमाने के घर और सोने चांदी के सिक्के भी मौजूद हों तो कितना रोमांचकारी होगा ना। दरअसल इंग्लैंड के एक इलाके में SH2 रेलवे कंस्ट्रक्शन का काम बड़ी तेजी से किया जा रहा था। तभी वहां पर बहुत सारी archaeologist चीजें मिल गई। हम आपको बता दें 2018 से यहां पर लगभग 100 से ज्यादा आर्कियोलॉजिस्ट साइट की डिस्कवरी हुई है। archaeological बता रहे हैं कि पुराने जमाने पर यहां पर रोमन सभ्यता का कोई छोटा सा गांव हुआ करता था, लेकिन समय के साथ धीरे धीरे ये इंडस्ट्रियल एरिया बन गया।
Ethiopian Monolith दोस्तों जब भी अनसुलझे archaeological चीजों की बात आती है तो Ethiopian Monolith की तस्वीरें हमारे सामने आ जाती हैं। दरअसल वॉशिंगटन स्टेट के रिसर्चर ने नई टेक्नॉलजी से Ethiopian Monolith के बारे में काफी रिसर्च की। तब जाकर उन्हें पता चला कि यह Monolith एक हज़ार नहीं बल्कि दो हज़ार साल पुराने हैं। पूरे शोपियां में इस तरह के लगभग 10,000 स्ट्रक्चर मौजूद होंगे। लेकिन आज तक कोई नहीं जानता कि आखिर इन्हें बनाने का मकसद क्या रहा होगा। कोई नहीं जानता। यह स्ट्रक्चर किस चीज की गवाही दे रहे हैं? दोस्तो, इस रहस्य के बारे में आप क्या सोचते हैं।
दोस्तों इंसानों के इतिहास हमेशा से हैरान करने वाला रहा है। हालांकि आज के समय में हम लोग अपने अतीत के बारे में बहुत कुछ जानने का दावा करते हैं लेकिन इसके बावजूद हम लोग कुछ नहीं जानते।Egypt की मम्मी हो या फिर पिरामिड का रहस्य, कोई नहीं जानता। आखिर पिरामिड को कैसे बनाया गया होगा? इन रहस्यमयी पिरामिड को बनाने में जिन बड़े बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। आज के समय में हमारे पास ऐसी कोई मशीन मौजूद नहीं है जो इतने भारी पत्थरों को उठा सके। तो फिर उस जमाने में उन लोगों ने इन पत्थरों को आखिर इतनी ऊंचाई तक कैसे उठाया होगा? यह सवाल हमेशा इंसान को सोचने पर मजबूर करता रहेगा। दोस्तो, आज की blog में बस इतना ही। हमें उम्मीद है आज के blog पढ़ने के बाद आपने बहुत कुछ सीखा होगा, बहुत कुछ जाना होगा और आपके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा होगा। मिलते अगले historical story blog में।