https://www.youtube.com/watch?v=Kf9c2Ov8ZhY
कई बार जिंदगी में हमारी मुलाकात कई लोगों से होती है और हर मुलाकात का अपना एक एहसास होता है। पर क्या हो अगर एक मुलाकात आपकी जिंदगी ही बर्बाद कर दे। यह कहानी जापान में रहने वाले एक लड़के हिकारू की है। हिकारू की जिंदगी काफी सिंपल थी। दिन में कॉलेज की क्लासेस होती थी। शाम लाइब्रेरी में बैठे असाइनमेंट सॉल्व करते हुए निकल जाती थी और रात कंप्यूटर गेमिंग में गुजरती थी। पर 21 अक्टूबर की रात उसकी जिंदगी बिल्कुल बदल गई। हिकारू अक्सर कॉलेज से सीधा लाइब्रेरी जाकर पढ़ाई करता था। उस दिन हिकारू काफी थका हुआ था। इसलिए उसकी आंख लाइब्रेरी में ही लग गई और जब आंख खुली तो उसने देखा की घड़ी में रात के साढ़े 12 बज रहे हैं। हिकारू कभी भी इतनी देर रात अपने घर से बाहर नहीं रहता था। उसने फटाफट से अपने सामान को पैक किया और अपने घर की ओर निकल गया। हिकारू का घर लाइब्रेरी से करीब 20 मिनट दूर था पर उसके घर जाने के लिए एक शॉर्टकट रास्ता भी था जिससे वो बस 10 मिनट में पहुंच जाता था। लेकिन उसे सब लोग उस शॉर्टकट को लेने से अक्सर मना किया करते थे। उसे शॉर्टकट वाले रास्ते पर कोई भी लैंप या रोशनी नहीं थी। उस रास्ते पर बिल्कुल अंधेरा रहता था और लोग कहते थे की उस अंधेरे में अकाई होना रहती है। अकाई होना जापान का एक मिस्टीरियस हॉरर लीजेंड था। कहते हैं की बहुत से लोगों को रात के अंधेरे में एक रेड ड्रेस में लड़की दिखाई देती है और उस लड़की के चेहरे को अगर कोई देख लेता है तो वो लड़की उसके पीछे एक साये की तरह पड़ जाती है। कई लोग या तो गायब हो गए या मरे हुए पाए गए पर हिकारू अकाई होना को बस एक हॉरर लीजेंड मानता था। और तो और वो पहले भी कई बार उस शॉर्टकट से घर गया था और उसे कभी ऐसा कुछ नहीं मिला। पर ये पहली बार था जब इतनी रात हो चुकी थी। हिकारू को बहुत तेज नींद आ रही थी और वो बिना कुछ सोचे उसी शॉर्टकट वाले रास्ते पर चल दिया। शुरुआत में हिकारू को उस रास्ते पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था पर धीरे धीरे हल्की आसमान की रोशनी में उसे थोड़ा बहुत रास्ता दिखाई देने लगा। कुछ दूर चलते ही अचानक हिकारू को दीवार के पास एक औरत खड़ी दिखाई दी। उस औरत ने लाल रंग की ड्रेस पहनी हुई थी।
हिकारू को अचानक से घबराहट होने लगी। उस औरत का चेहरा देख नहीं पा रहा था और वो बस चुपचाप एक जगह खड़ी थी। हिकारू को बहुत अजीब लगा की इतनी रात में ये औरत क्यों दीवार के पास खड़ी है। और तो और उसने एक लाल रंग की ड्रेस पहनी हुई है। उसे एक पल के लिए लगने लगा की कही अकाई होना का लेजेंड कहीं सच तो नहीं। फिर भी हिकारू बिना कुछ बोले अपना सर झुकाए आगे चलता रहा। लेकिन जैसे ही हिकारू उस औरत के पास से गुजरा। उससे रहा नहीं गया और उसने नजर उठाकर उस औरत के चेहरे को देख लिया और उसके होश उड़ गए। उस औरत का चेहरा भयानक था। इतना सफेद की ऐसा लग रहा था की वहां पर किसी औरत की लाश पड़ी हुई है। इतना अजीब चेहरा हिकारू ने आज तक नहीं देखा था। हिकारू उस औरत को देखकर बहुत डर गया और वहां से जल्दी से भाग गया। जैसे तैसे वो अपने घर पहुंचा। हिकारू ने जो देखा वो उसे भुला नहीं पा रहा था। उस औरत का चेहरा मानो उसके दिमाग के अंदर छप गया था। अगले दिन हिकारू अपनी उसी रूटीन के साथ जिंदगी जीने लगा। पर अब शाम होते ही उसके साथ कुछ अजीब होने लगा था। उसे ऐसा महसूस होता की जैसे उसके आसपास कोई मौजूद है जो उस पर नजर गड़ाए बैठा हुआ है। ऐसी ही एक रात हिकारू अपने बिस्तर पर चादर ओढ़ कर सो रहा था। तभी उसे ऐसा लगा की जैसे किसी ने उसकी चादर को नीचे की तरफ से खींचा। हिकारू की नींद खुल गई। उसने अपनी नजरों से इधर उधर देखा तो उसे कुछ नहीं दिखा। पर तभी उसकी आंखों के सामने एक लाल परछाई तेजी से कमरे की खिड़की के बाहर चली गई। हिकारू को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसे लग रहा था कि वो पागल होता जा रहा है। उसने खुद को समझाया की ये सब उसका वहम था और जबर्दस्ती अपनी आंखें बंद करके छत की तरफ मुंह करके सो गया। कुछ देर तक सोने की कोशिश करने के बाद हिकारू ने बेचैनी में अपनी आंख खोली और फिर जो उसने देखा वो इस दुनिया के ही परे था। उसके कमरे की छत पर बिस्तर के ठीक ऊपर वही लाल ड्रेस वाली लड़की दीवार से चिपकी हुई उसे घूरे जा रही थी। हिकारू जोर से चीखा और वहीं उसकी नींद खुल गई। हिकारू को अब समझ आया की वो सब एक सपने में देख रहा था। उसका गला बुरी तरह सूख गया और पूरा शरीर पसीने पसीने में भीगा था। तभी वो उठकर पानी पीने लगा। पानी पीते हुए हिकारू नजर अपने कमरे की खिड़की पर गई और उसके हाथ से उसका पानी का गिलास छूट गया। खिडकी के ठीक बाहर वही लाल ड्रेस वाली औरत खड़ी थी और वो अपने उसी भयानक चेहरे से हिकारू को घूरे जा रही थी। लेकिन हिकारू ने जैसे ही लाइट्स ऑन की तो उसने देखा की खिड़की पर कोई नहीं है। दिन ब दिन ये सब इंसिडेंट बढ़ते जा रहे थे।
उसे हर जगह अकाई होना दिखने लगी थी। हिकारू ने अपने कुछ दोस्तों से भी इस बारे में बात की पर किसी ने भी उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया। उसके दिमाग में यही चल रहा था की कहीं वो अब गायब तो नहीं हो जाएगा। हिकारू का डर बढ़ता ही जा रहा था। उसने डिसाइड किया की वो पुलिस स्टेशन जाकर वहां से मदद मांगेगा। पर तभी उसे अपने घर के मेन गेट खुलने की आवाज आई। हिकारू हिम्मत करके बाहर देखने गया तो उसने देखा की उसके घर का दरवाजा पूरा खुला हुआ था और बाहर से तेज हवाएं अन्दर आ रही थी। हिकारू ने अपने एक दोस्त को सब कुछ बताने के लिए फोन मिलाया हिकारू अपने साथ हुए इंसिडेंट के बारे में बोलता चला गया। तभी बात करते करते वो एकदम से रुक गया क्योंकि उसे अपनी गर्दन के ऊपर किसी की सांसें महसूस हुई। हिकारू समझ गया की उसके पीछे कोई खड़ा था। एकदम से उसे एक हाथ अपनी गर्दन पर आता हुआ महसूस हुआ। जब हिकारू ने शीशे में देखा तो वो कांप उठा। अकाई होना उसके ठीक पीछे खड़ी थी। हिकारू ने घबराते हुए अपने दोस्त से फोन पर कहा अकाई होना वो मुझे लेने आई है। वो वो मुझे लेने आ गई है। कुछ ही देर बाद हिकारू का दोस्त उसके घर पहुंचा। हिकारू का पूरा घर तहस नहस हो चुका था। ऐसा लग रहा था की जैसे घर के अंदर कोई तूफान आया हो। हिकारू के दोस्त ने पूरा घर ढूंढा पर हिकारू कहीं भी नहीं था। हिकारू अपने ही घर से गायब था। और उस दिन के बाद वो कभी किसी को नहीं मिला। आज तक कोई नहीं जानता की हिकारू के साथ आखिर हुआ क्या था। कौन है अकाई होना और क्यों वो जापान में लोगों को गायब कर रही है। इन सभी सवालों के जवाब तो हमारे पास नहीं है पर हम सिर्फ इतना जानते हैं अगर आपको कभी कोई ऐसी औरत किसी अंधेरी गली में खड़ी दिखाई दे तो वहां से वापस मुड़ जाना ही बेहतर है।
https://youtu.be/N7s2bqeJsJs?si=pzS128ALcGtuNNZu.
नन्हा वैभव अपनी माँ संगीता की गोद में चढ़ने की कोशिश करते हुए बोला मम्मा! मम्मा मेरी बात सुनो ना।संगीता ने उसे गोद में लेते हुए कहा। बस थोड़ी देर और रुक जाओ बेटा, मैं खिलौना डिजाइन कर लूं, फिर तुमसे ढेर सारी बातें करूंगी। संगीता एक जानी मानी खिलौना निर्माता कंपनी की हेड डिजाइनर थी। कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन के कारण आजकल वो घर से ही अपना काम कर रही थी। संगीता और वैभव के अलावा उनके घर में वैभव की छाया रहती थी लेकिन लॉकडाउन के कारण वो अपने गांव से वापस नहीं आ पाई थी। वैभव छह वर्ष का बहुत ही प्यारा और बातूनी सा बच्चा था। हर समय उसकी जुबान पर कोई ना कोई कहानी मौजूद रहती थी। पहले तो उसकी आया चाव से उसकी कहानियां सुनती थी लेकिन अभी वो भी छुट्टी पर थी। और संगीता अपने काम में ही व्यस्त रहती थी जिसके कारण वह उदास रहने लगा था। जैसे ही संगीता ने अपना कंप्यूटर बंद किया। मम्मा आप मेरे लिए एक बोलने वाली गुड़िया बना दो। फिर मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करूंगा और उसी से अपनी सारी बातें किया करूंगा।वैभव की भोली सी बात सुन कर संगीता हंस पड़ी। कुछ सोच कर वो उठी और स्टोर रूम में चली गई। पिछले ही सप्ताह संगीता के डिजाइन किए हुए कुछ खिलौने फैक्ट्री से जांच के लिए उसके पास आए थे, जो अचानक कोरोना की वजह से दफ्तर बंद हो जाने के कारण उसके घर पर ही रह गए थे। संगीता ने उन खिलौनों में से एक गुड़िया निकाल कर वैभव को खेलने के लिए दे दी। वो गुड़िया वैसे तो दिखने में बहुत ही सुंदर थी लेकिन उसकी आंखें बहुत बड़ी थी। जो कभी कभी डरावना सा एहसास दे जाती थी। वैभव ने जैसे ही वो गुड़िया देखी वह खुशी से उछल पड़ा। अरे वाह मम्मा, आप कितनी अच्छी हैं। इतनी जल्दी आप मेरे लिए इतनी प्यारी गुड़िया ले आई। अब तो मैं इससे खूब सारी बातें करूंगा। वैभव गुड़िया को लेकर अपने कमरे में चला गया और संगीता खाना बनाने में जुट गई। कुछ देर के बाद जब संगीता और वैभव खाने के लिए बैठे तो संगीता ने देखा की वैभव ने ना सिर्फ अपना खाना बहुत जल्दी खा लिया बल्कि उसने संगीता की प्लेट से भी खाना लेकर खाना खाना शुरू कर दिया। संगीता थोड़ी हैरान हुई। फिर उसने सोचा की शायद देर तक खेलने के कारण वैभव को ज्यादा भूख लग गई होगी। खाना निपटा कर संगीता एक बार फिर अपने कंप्यूटर के आगे बैठ गई और वैभव अपनी नई गुड़िया से खेलने में मग्न हो गया। अभी कुछ ही मिनट बीते ही होंगे की वैभव के हंसने की आवाज से संगीता का ध्यान भंग हुआ। उसे आज वैभव की हंसी बदली हुई सी लगी। वह चौंक कर उसके पास पहुंची तो उसने देखा वह गुड़िया को लेकर अलमारी के ऊपर चढ़ कर बैठा हुआ था। उसे यूँ देख कर संगीता घबरा सी गई। तुम अलमारी पर कैसे चढ़े? अगर गिर जाते तो क्या होता? इस लॉकडाउन में मैं तुम्हें कैसे घर से बाहर हॉस्पिटल लेकर जाती और हॉस्पिटल में अगर तुम्हें मुझे इन्फेक्शन हो जाएगा तो क्या होगा? पता नहीं ये कौन सा नया खेल सूझा है तुम्हें। चलो जल्दी नीचे आओ। ओफ्फो मम्मा, कितना मजा तो आ रहा है। मेरी गुड़िया ने मुझसे कहा है कि हम यहाँ बैठकर खेलेंगे। इसीलिए मुझे उसकी बात माननी पड़ी और फिर उसका हाथ पकड़ कर मैं आसानी से यहाँ ऊपर आ गया। संगीता वैभव की कहानियाँ बनाने की आदत से वाकिफ थी इसलिए उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और किसी तरह वैभव को अलमारी से नीचे उतारा। अब तुम्हें अकेले अपने कमरे में खेलने की जरूरत नहीं है तो मेरे सामने बैठ कर खेलो। वैभव को अपने सामने देख कर संगीता ने राहत की सांस ली और अपने काम में लग गई। अब कुछ ना कुछ अजीब घटनाएं रोज का क्रम बनती जा रही थी।
कभी वह जरूरत से ज्यादा खाता। तो कभी अजीब सी आवाज में हंसता। कभी वह पलक झपकते ही किसी ऊंची जगह पर बैठा हुआ नजर आता। तो कभी उसका चेहरा संगीता को डरावना सा अहसास देता। वैभव की हर बात में यह बात जुड़ी होती कि गुड़िया ने बोला, ऐसा करो, वैसा करो। लेकिन संगीता इसे वैभव का बचपना समझकर भुला देती थी। इन सब बातों के असर से संगीता को लगने लगा की वह शायद जरूरत से ज्यादा अपने काम में उलझ गई है और आराम के अभाव में उसे अजीब अजीब बातें दिखाई सुनाई पड़ने लगी है। इसलिए उसने तय किया की वह कल ही अपने बॉस से बात करके दो दिन की छुट्टी ले लेगी और अपने साथ साथ वैभव का भी पूरा ख्याल रखेगी। लेकिन अभी रात बाकी थी। संगीता ने रात के खाने के लिए जैसे ही वैभव को आवाज दी। नहीं मम्मा, मुझे नहीं खाना है। वैभव का जवाब सुनकर परेशान संगीता उसके कमरे में पहुंच कर बोली। क्यों नहीं खाओगे? चलो। जिद मत करो। गुड़िया ने मुझे खाने के लिए मना किया है। अगर मैं खाना नहीं खाऊंगा तो धीरे धीरे मर जाऊंगा और फिर उसकी तरह ही गुड़िया बन कर हमेशा के लिए उसकी दुनिया में उसके साथ रहूंगा। वैभव ने अजीब सी आवाज में कहा। वैभव के मुंह से मरने की बात सुनकर संगीता के गुस्से का ठिकाना नहीं रहा। उसने वैभव को थप्पड़ मारने के लिए अपना हाथ उठाया। लेकिन यह क्या? उसका हाथ बीच हवा में ही रुक गया। वह वैभव को छू ही नहीं पा रही थी। संगीता ने आश्चर्य से वैभव की तरफ देखा तो उसने पाया कि वैभव की आंखें लाल हो चुकी थी, मानो उसमें खून तैर रहा हो। उसके हाथ में मौजूद गुड़िया से भी हंसने की विचित्र आवाज आ रही थी, जो अब संगीता को बुरी तरह डराने लगी थी। गुड़िया और वैभव दोनों की आवाज एक साथ संगीता के कानों से टकराई। हमें थप्पड़ मारना तो बहुत दूर की बात है। तुम ना तो हमारे पास आ सकती हो और ना ही तुम हमें छू सकती हो। जाओ चली जाओ यहां से और हमें अकेला छोड़ दो।
संगीता के लिए वहां एक सेकंड भी खड़ा रहना मुश्किल हो गया था। पसीने से लथपथ, घबराई हुई सी वो तेजी से वहां से भाग कर अपने कमरे में आ गई। कुछ देर के बाद जब वो शांत हुई तब वो फिर धीरे से वैभव के कमरे में पहुंची। वहां पहुंचकर उसने देखा वैभव सो गया था लेकिन गुड़िया अभी भी उसके बिस्तर पर उसके पास ही थी। संगीता को अब उस गुड़िया से बहुत डर लग रहा था। फिर भी किसी तरह हिम्मत जुटा कर उसने गुड़िया को वैभव के पास से उठाया और उसे बाहर ले जाकर उसने उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। फिर गुड़िया के इन टुकड़ों को उसने एक बॉक्स में पैक किया और उसे अन्य डैमेज खिलौनों के साथ रीकंस्ट्रक्शन के लिए स्टोर रूम में डाल दिया। चलो उस मनहूस गुड़िया से मुझे और मेरे बेटे को छुटकारा मिला। स्टोर रूम का दरवाजा बंद करते हुए संगीता स्वयं से बोली। अभी वो खुश होते हुए वैभव के कमरे में पहुंची ही थी की उसके मुंह से जोरों की चीख निकल गई। बिस्तर पर वैभव की जगह वही गुड़िया लेटी हुई थी और वैभव एक गुड्डे के रूप में उसके हाथ में था। तुम्हें क्या लगा? तुमने मुझे खत्म कर दिया। मुझे कोई खत्म नहीं कर सकता। मैं एक श्राप हूं। ऐसा श्राप जिसे कोई नहीं मिटा सकता। मुझे अपनी दुनिया में अपने जैसे कुछ साथी चाहिए थे। देखो, मैंने एक साथी ढूंढ लिया है। अब तुम्हारा वैभव भी गुड्डा बन चुका है। देखो। गुड़िया ने अपनी आंखों को नचाते हुए कहा। देखते ही देखते वह बेहोश होकर गिर पड़ी। बेहोशी में वो बस लगातार एक ही बात बड़बड़ा रही थी छोड़ दो। छोड़ दो, मेरे वैभव को छोड़ दो, छोड़ दो उसे गुड्डा मत बनाओ, मेरे वैभव को छोड़ दो। अचानक संगीता को महसूस हुआ कि कोई उसके चेहरे पर पानी डाल रहा है। उसने धीरे धीरे अपनी आंखे खोली तो उसके सामने पानी का जग लिए वैभव खड़ा था। वैभव पर नजर पड़ते ही संगीता झटके से उठ कर बैठ गई और उसने उसे खींच कर अपने गले से लगा लिया। संगीता की इस प्रतिक्रिया से वैभव ने घबरा कर उससे पूछा।
मम्मा आपको क्या हो गया था? पता है मैं कितना डर गया था। आप अपनी आंखें भी नहीं खोल रही थी और पता नहीं क्या क्या बोल रही थी। फिर मैंने आया आंटी को फोन करके उन्हें सारी बात बताई। तब उन्होंने मुझे आपके चेहरे पर पानी डालने के लिए कहा। यह सब सुनकर वैभव को स्वयं से अलग किए बिना संगीता बोली। मुझे कुछ नहीं हुआ है मेरे बच्चे। कुछ नहीं। और मैं कुछ होने भी नहीं दूंगी। भगवान का शुक्र है की वो सब एक डरावना सपना था। थोड़ी देर बाद जब संगीता कुछ संभली तब उसने वैभव से गुड़िया के विषय में पूछा। वैभव ने रुआंसी आवाज में कहा, पता नहीं मम्मा, मेरी गुड़िया कहां गई? मैं कब से उसे ही ढूंढ रहा हूं। यह सुनकर संगीता ने चुपचाप स्टोर रूम का रुख किया। वहां पैकेट में गुड़िया के टूटे हुए टुकड़ों को देखकर उसे तसल्ली हुई। संगीता ने तुरंत माचिस निकाली और गुड़िया के टुकड़ों में आग लगा दी। देखते ही देखते वो सारे टुकड़े जलने लगे। आग के बुझने के बाद जब संगीता वैभव के कमरे में पहुंची तो वहां वैभव की जगह पर वही गुड़िया बैठी थी और संगीता को देख कर मुस्कुरा रही थी। संगीता उसे बिस्तर पर देख कर हैरान हो गई। तभी गुड़िया के अंदर से आवाज आई। मैंने कहा था ना मैं एक श्राप हूं श्राप जिसे कोई नहीं मिटा सकता है यह सुनते ही संगीता के रोंगटे खड़े हो गए संगीता भागते हुए जैसे ही स्टोर रूम में पहुंची उसकी चीख निकल गई उसने गुड़िया समझकर वैभव के टुकड़े करके उसे आग लगा दी थी। अक्सर पागल खाने में रोते हुए संगीता की आवाज सुनाई देती थी। मैंने वैभव को नहीं मारा है मैने तो श्रापित गुड़िया को मारा था।
यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए है। हम किसी भी तरह के अंधश्रद्धा को बढ़ावा नहीं देते। तेज बारिश हो रही थी। रात के करीब 11:00 बजे का टाइम था। अपने कमरे में टेबल लैम्प की रौशनी में मोहन कुछ फाइलों को पढ़ रहा था। उन फाइल्स को पढ़ते वक्त उसकी आँखों से आँसू आने लगे। क्या हुआ? आप परेशान लग रहे हैं। यह तो अस्पताल की रिपोर्ट है। क्या लिखा है इसमें? अरे तुम अभी तक सोई नहीं। डॉक्टर ने कहा है ना, तुम्हें प्रॉपर आराम करना है। दवाई ली तुमने? हाँ, मैंने दवाई ले ली है। मगर आप बताओ तो रिपोर्ट में क्या लिखा है। और क्या लिखा होगा? हमारी खराब किस्मत। सब कुछ ठीक है मगर ना जाने क्यों हमें संतान का सुख नहीं मिल रहा है। ऐसा कैसे हो सकता है सब कुछ ठीक है तो। तुम ज्यादा मत सोचो सो जाओ। कल किसी और डॉक्टर से रिपोर्ट शेयर करूंगा। रात के करीब 02:00 बजे रजनी के सोने के बाद मोहन खुली हवा की तलाश में घर की छत पर चला आया। तभी उसने देखा की कुएं पर कोई लड़की बैठी हुई है और वो उसी की ओर देख रही थी। मोहन कुछ समझ पाता उससे पहले ही वो लड़की अचानक कुएं में कूद गई। घबराते हुए मोहन तुरंत उसे बचाने के लिए कुएं में उतर गया। मगर वहां पर कुछ भी नहीं था। मोहन उस कुएं में डूबने लगा। बचाओ बचाओ, मुझे बचाओ। मोहन की आवाज सुनकर पास सो रही उसकी पत्नी रजनी जाग गई। क्या हुआ? आप क्यों चीखे? और आप गीले कैसे हो रहे हो? रजनी की आवाज सुनकर मोहन ने आँखे खोली तो देखा कि वो पूरा भीगा हुआ था। मैं मैं यहाँ पर कैसे आया? मैं तो कुएं में था। कैसी बकवास बातें कर रहे हो? आप तो यहीं पर थे, कुएं में कैसे जा सकते हो? मोहन को कुछ समझ में नहीं आया कि उसके साथ क्या हुआ। वो तुरंत अपनी जगह पर से खड़ा हुआ और कुएं के पास जाकर कुछ ढूँढने लगा। रजनी भी उसके पीछे पीछे वहां आ गई मगर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। दूर खड़ी वही लड़की उन दोनों को देख रही थी। वो भी पूरी तरह से भीगी हुई थी।
देखो उस लड़की को देखो। उसे बचाने के लिए ही मैं पानी में कूदा था। मगर जैसे ही रजनी ने उसे देखा वो लड़की वहां से गायब हो गई। कौन है वहां पर? कोई भी तो नहीं है। चलो चल कर कपड़े बदल लो। वरना गीले कपड़ों में सर्दी लग जाएगी। कहते हुए रजनी मोहन का हाथ पकड़ कर उसे घर के भीतर ले जाने लगी। माँ कहाँ जा रही हो? मुझे ढूँढ़ रही हो ना? मैं तो यहाँ हूँ। वो आवाज सुनते ही रजनी पीछे मुड़ कर देखने लगी। मगर वहाँ पर कोई नहीं था। मैं भी ना लगता है मेरे कान बज रहे हैं। अगले दिन सुबह जब रजनी चाय बना रही थी तो उसे किसी छोटे बच्चे के रोने की आवाज आने लगी। वो उस आवाज के पीछे पीछे उसी कुएँ के पास आ गई। उसने कुएँ के आसपास देखा तो वहाँ पर कोई भी नजर नहीं आया। ऐसा कैसे हो सकता है? बच्चे के रोने की आवाज यहीं से आ रही थी। बच्चा तो कहीं नजर नहीं आ रहा है। क्या हुआ बहुरिया? यहाँ पर क्या कर रही हो? जाओ जाओ। वो मोहन तुम्हें बुला रहा है। तनिक दो घड़ी जाकर वहाँ पर बैठ जाओ। वो वैसे भी बहुत परेशान रहता है। अपनी सास की बात सुनकर रजनी अपने कमरे में जाने लगी। तभी उसे वापस किसी बच्चे के रोने की आवाज आने लगी। वो देखने के लिए पलटी तो उसे भी वो लड़की नजर आई जो कल मोहन को दिखी थी। वो उस लड़की को देख कर बेहोश हो जाती है।
आज मैं बहुत खुश हूं। तुम मां बनने वाली हो। ये कैसे हो सकता है? अरे बहुरिया जैसे होता है वैसे ही हुआ है। हम तुम्हारे लिए बहुत खुश है। कहते हुए जानकी जी मिर्च से रजनी की नजर उतार उसे जला देती है। मिर्च के जलते ही रजनी को फिर से बच्चे के रोने की आवाज आती है। वो उस आवाज से सम्मोहित होने लगती है। और वो जलती हुई मिर्च को ठोकर मार देती है। ये क्या किया बहुरिया? हे ईश्वर रक्षा करना। रजनी उस आवाज के पीछे पीछे कुएं तक पहुंच जाती है। वहां उसे कुएं पर वही लड़की बैठी नजर आती है। अभी भी वक्त है। यहां से चले जाओ। वरना तेरी संतान भी ऐसे ही मार दी जाएगी। कहते हुए वो लड़की रजनी के देखते ही देखते कुएं में कूद गई। अरे कोई बचाओ उसे कोई है। प्लीज कोई बचाओ उसे। कोई देख रहा है प्लीज। कोई बचाओ उसे रजनी के पीछे पीछे मोहन भी उस कुएं तक आया था। उसने भी उस लड़की को कुएं में गिरते हुए देख लिया था। मोहन को कुछ समझ नहीं आ रहा था, इसलिए उसे समझा बुझाकर कमरे में ले गया। मगर उसके मन में भी कई सारे सवाल थे। वो उन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए गांव के तांत्रिक के पास पहुंचा।
यह तो बहुत खुशी की बात है कि रजनी गर्भवती है। मगर जो कुछ भी तुमने बताया वो बहुत चिंता का विषय है क्योंकि बुरी आत्माओं को कई बार गर्भवती औरत की खुशबू आ जाती है और वो उसके बच्चे की तलाश में उसके आस पास मंडराती है। हो न हो उस लड़की का नजर आना रजनी के होने वाले बच्चे से कोई न कोई संबंध जरूर है।
आप कुछ भी करके रजनी और मेरे होने वाले बच्चों की सुरक्षा का प्रबंध कीजिए। अवश्य मगर उसके पहले हमें यह पता लगाना होगा कि उस आत्मा का मकसद क्या है। वो तुम्हें और रजनी को ही नजर आई थी। इसीलिए आज रात वहीं पर हम विशेष पूजा करेंगे। मोहन ने तांत्रिक के अनुसार सारी पूजा की व्यवस्था कर ली थी। देर रात तांत्रिक जब उस कुएं के आसपास पूजा की तैयारी कर रहा था। तेज हवाएं चलने लगी। और पूजन सामग्री हवा में उड़ रही थी। यह देख मोहन के चेहरे पर चिंता के भाव आ गए। मगर तांत्रिक शांत बैठे हुए थे। तेज हवा में भी उन्होंने कुछ मंत्र पढ़ते हुए एक दीया लगाया। जो दीया जल रहा था। जैसे ही दीया जला, सब कुछ शांत हो गया। तांत्रिक ने पूजा शुरू की तो छोटे बच्चों के रोने की आवाज आने लगी। तांत्रिक और मोहन दोनों सतर्क होकर आवाज की ओर ध्यान लगाने लगे। आवाज कुएं के भीतर से आ रही थी। यह तो बहुत शक्तिशाली आत्मा है। इसे कच्चा कलुआ कहा जाता है। कच्चा कलुआ मतलब। कच्चा कलुआ नवजात लड़कियों की आत्मा होती है। ऐसी आत्मा जो कई वर्षों तक भटकती रहती है। यह बहुत शक्तिशाली है। मगर नवजात शिशु की आत्मा यहां कैसे? कहते हुए तांत्रिक जानकी जी की तरफ देख रहा था। जानकी जी के चेहरे का रंग बदल गया मगर उन्होंने सच्चाई छुपा ली। हम तो पिछले कई बरसों से यहां रह रहे हैं। हमने कभी किसी बुरी आत्मा को यहां नहीं देखा। जब से यह रजनी बहुरिया गर्भवती हुई है, तब से यह आत्मा वगैरह सुन रहे हैं। ना जाने कौन सी आफत हमारे बच्चों की खुशियों के पीछे पड़ी है। आप चिंता ना करें, वह तो हम आसानी से पता लगा लेंगे। कहते हुए तांत्रिक ने वहीं पर रखे हुए नरमुंड पर अपनी हथेली को चीरकर खून डाला और धीरे धीरे वह मंत्र पढ़ता जा रहा था। देखते ही देखते कुएं में बवंडर उठा और छोटे बच्चों के कंकाल बाहर आने लगे। यह सब क्या है? इस कुएं में से यह सब कैसे बाहर आ सकता है? कहते हुए वह जानकी जी की तरफ देख रहा था। मगर जानकी जी डरते हुए अपनी जगह पर खड़ी हो गई। तभी वह लड़की उनके सामने आई और तेजी से हंसने लगी। मुझे मारते हुए डर नहीं लग रहा था। अब मुझसे डर कर कहां जा रही हो?
मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया। तुम चली जाओ यहाँ से। कहते हुए जानकी जी रोने लगी। जानकी मुझे सब पता चल गया है। यह तेरी ही बेटी है। तूने बेटे की चाह में अपनी बेटी को मार दिया था और ये पाप तूने एक बार नहीं बल्कि दो बार किया। बोल सही कह रहा हूँ ना मैं। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। हमारे खानदान में किसी को भी लड़की नहीं हुई थी सिवाय मेरे तो मोहन के पिता जी ने उन्हें अपने हाथों से इस कुएं में जिंदा डाल दिया था। उन लड़कियों के पहले भी हमारे खानदान में जन्मी सारी लड़कियों को इस कुएं में डाल कर मार दिया गया था। उन लड़कियों के श्राप के कारण ही तो तुम्हारे खानदान को वारिस नहीं मिल पा रहा है। मगर इतने वर्षों बाद वे लोग वापस क्यों आए हैं? तुम्हारी पत्नी गर्भवती है और उसके गर्भ में कन्या ही है। इन लोगों को लगा कहीं तुम लोग उसे भी ना मार दो। इसलिए ये लोग उसकी रक्षा के लिए आई है। यदि ऐसी बात है तो मैं इन लोगों को वचन देता हूँ की मैं अपनी बेटी की हमेशा रक्षा करूंगा और आप मेरी इन सभी बहनों और बुआओं की मुक्ति के लिए कुछ विशेष पूजा करवा दीजिए। कच्चा कलुआ अपनी मर्जी की मालकिन होती है। उनकी मुक्ति उन्हीं के हाथों में है। शायद इस घर के आंगन में किसी लड़की के पायल की झंकार उनकी मुक्ति का रास्ता बन जाए। हरी ओम अपना और रजनी बिटिया का ध्यान रखना। उस दिन के बाद से कई बार मोहन और रजनी को कच्चा कलुआ नजर आया, मगर उसने उन दोनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।
https://youtu.be/KnypoVR-3ow?si=66gep46QvLbNBrp9
यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए है। हम किसी भी तरह के अंधश्रद्धा को बढ़ावा नहीं देते हैं। मुंबई की सड़कों पर दरबदर भटकते हुए चल रहे शोएब को कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। वो यूं ही भटकते हुए समुद्र किनारे आकर बैठ गया। देर तक वो अकेला बैठा था। तभी एक मौलवी उसके पास आया। क्या बात है, बहुत परेशान लग रहे हो। मेरी समस्या का हल आपके पास नहीं है कहते हुए वह अपनी जगह से खड़ा हो गया। मगर मौलवी ने उसका हाथ पकड़ा और कहा। इस दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान अल्लाह ताला के पास न हो। उसकी बनाई हुई इस कायनात में कुछ ऐसा भी है जो किस्मत से ज्यादा देने का जज्बा रखता है। बाबा, आपकी बातें मेरी समझ में नहीं आ रही हैं। शायद तुम्हें पता नहीं कि कुछ ऐसी शक्तियां होती हैं जो इंसान को भी खुदा बना देती हैं। उसकी हर ख्वाहिश पूरी होती है। क्या यह मुमकिन है? मुझे भी कुछ ऐसा मिल सकता है क्या, जिससे मैं अपनी हर ख्वाहिश पूरी कर सकूं? मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। हर चीज की एक कीमत होती है।
तामसिक शक्तियां बर्बादी का रास्ता है। वो इंसान की आत्मा का सौदा करती है। इसलिए अच्छा है इन शक्तियों से दूर रहा जाए। कहते हुए मौलवी वहां से जाने लगे तो शोएब ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा कि उसे हर हाल में उन शक्तियों को हासिल करना है। तब मौलवी ने उसे खबीस के बारे में बताया। खबीस जिसे कुछ लोग जिन्न के बच्चे के नाम से भी जानते हैं वो इंसान की हर ख्वाहिश को पूरी करता है। आपकी बात सुनकर तो मैंने निश्चय कर लिया है। मुझे हर हाल में खबीस की सिद्धि चाहिए। मौलवी ने उसे खबीस की सिद्धि हासिल करने के तरीके के बारे में बता दिया और खुद वहां से चले गए। कुछ दूर जाने के बाद वो आसमान में चांद की ओर देखने लगे और उनके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कुराहट आ गई। जैसी अल्लाह ताला की मर्जी। लगता है कुछ अनोखा होने वाला है। दूसरी तरफ शोएब मौलवी जी के बताए अनुसार शहर के बाहर जंगल में इमली के पेड़ के नीचे खबीस को सिद्ध करने की कोशिश कर रहा था। कुछ समय के बाद वो अपनी कोशिश में कामयाब हो गया और एक परछाई उसके सामने आई। जैसे ही वो परछाई दिखने लगी वातावरण में भयंकर दुर्गंध फैल गई थी। मगर शोएब उस दुर्गंध को नजरअंदाज कर। खबीस को अपने साथ घर ले आया। उसके आसपास जब भी खबीस होता, तेज दुर्गंध आती। मगर शोएब को तो सिर्फ अपनी इच्छापूर्ति से मतलब था। कुछ ही दिनों में शोएब की इच्छा अनुसार उसे फिल्मों में काम मिलने लगा था। अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी कर वह बहुत खुश था। मगर इस बात को भूल गया था कि यदि कोई इच्छा पूरी होगी तो उसकी कीमत भी चुकानी होगी। शोएब की जिंदगी में वो रात अंधेरा लेकर आई। दिन भर की थकान के कारण शोएब को बिस्तर पर सोते ही नींद लग गई। मगर देर रात उसके बिस्तर पर हलचल होने लगी। किसी ने उसके सीने पर हाथ रखा और बालों को सहलाने लगा। शोएब तुरंत जाग गया। वो अपने बिस्तर पर आस पास देखने लगा। मगर उसे कोई नजर नहीं आया। कौन है यहां जो परेशान कर रहा है। सामने आओ। शोएब ने देखा की खिड़की के पास एक साया लहरा रहा था। वो जैसे ही खिड़की के पास गया उसे साए ने तेजी से उसके ऊपर झपट्टा मारा और उसे पलंग पर लाकर पटक दिया। उसके बाद वही सब हुआ जो नहीं होना था। खबीस शोएब के शरीर पर हावी हो चुका था। वो नकारात्मक शक्ति शोएब के साथ अनैतिक संबंध बना चुकी थी। अपनी शारीरिक ख्वाहिश को पूरा करने के बाद खबीस कुछ पल के लिए जा चुका था। एक खतरनाक प्रेतात्मा के साथ संबंध बनाने के कारण शोएब लगभग बेहोश था। अगले दिन जब उसे होश आया तो दर्द के कारण उसका पूरा शरीर टूट रहा था। मगर उसने इस बात को नजरअंदाज कर दिया। उसे ऐसा लग रहा था कि उसने खबीस को एक बार कीमत चुका दी। उसके बाद फिर कभी ऐसा नहीं होगा। मगर वो इस बात से अनजान था कि यह तो केवल एक शुरुआत है। तभी उसके दरवाजे की घंटी बजी। उसने जाकर दरवाजा खोला तो सामने उसकी मेड सलमा थी।
क्या साहब? कब से घंटी बजा रही थी? आपने दरवाजा ही नहीं खोला। आप अगर दरवाजा नहीं खोलते ना तो मैं चली जाती थी। कहते हुए सलमा घर के भीतर दाखिल हो गई। खबीस अभी कुछ देर पहले तक घर के अंदर था तो घर में से सड़ी हुई गंध आ रही थी। क्या साहब, आपके घर में कहीं चूहा मर गया है क्या? बास के मारे? मेरी तो जान ही निकली जा रही है। बदबू। कहाँ है बदबू? लगता है तुम्हारी नाक खराब हो गई है। चुपचाप अपना काम करो। कहते हुए शोएब वॉशरूम में चला गया और सलमा घर के काम कर रही थी। ड्रेसिंग टेबल पर कांच पहुंचते पहुंचते कांच में अपना चेहरा देख वह श्रृंगार करने लगी। तभी उसे कांच में खबीस का चेहरा नजर आया। उसने डरते हुए पीछे देखा तो वहां पर कोई नहीं था। तभी ऐसा लगा किसी ने उसके कमर को छुआ। सलमा ने गुस्से में झाड़ू उठाई और बोली साहब। इसीलिए मैं अकेले लड़कों के घर काम नहीं करती। सलमा की इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश की ना तो आपकी इज्जत उतार दूंगी मैं। अब कहां पर छुपे हो, बाहर आओ। कहते हुए सलमा शोएब को ढूंढने लगी। मगर शोएब वहां नहीं था। तभी वो वॉशरूम से बाहर आया और बोला। सलमा क्या हो गया? क्यों चिल्ला रही थी? साहब ज्यादा भोले मत बनो। अभी यहां खड़े होकर मुझे परेशान कर रहे थे और अब बाथरूम से आ रहे हो। दिमाग तो ठिकाने पर है। मैं बहुत देर से वॉशरूम में ही था। मुझे देर हो रही है। नाश्ता लगा दो। कहते हुए शोएब हॉल में आ गया। सलमा डरते हुए कमरे में कुछ ढूँढने की कोशिश कर रही थी। सलमा आज मिल जाएगा खाना। आई साहब शोएब खाना खा ही रहा था की उसके मोबाइल पर किसी फिल्म की कास्टिंग के लिए मैसेज आया। ये देख वो खुश हो गया और अपना पोर्टफोलियो लेकर निकल गया। खबीस के कारण उसे ये फिल्म भी मिल गई। लगता है मेरे अच्छे दिन आ गए। अब मुझे आसानी से फिल्म मिल जाती है। आखिर फिल्म मिले क्यों ना। मैं कितना खूबसूरत दिखता हूँ। मेरी खूबसूरती के कारण ही तो कॉलेज के लोग मुझे हमेशा कहते थे की तुझे फिल्म लाइन ज्वाइन कर लेनी चाहिए। मेरी खूबसूरती का जवाब नहीं जियो शोएब।
आत्ममुग्ध होकर शोएब बहुत खुश था। वो घर गया तो मेड शाम के लिए खाना बना रही थी। अचानक शोएब को अपना शरीर भारी लगने लगा और उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा रहा था। उसकी नजर अपनी मेड की कमर पर ही थी। आज न जाने क्यों वासना का ज्वर उसके भीतर उमड़ रहा था। इस सलमा को तो यहाँ किचन की बजाय मेरे बिस्तर पर होना चाहिए। कहते हुए वो किचन में गया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। साहब! होश में आओ। ये सब क्या कर रहे हो? क्या दारू पी रखी है आपने? तुम्हारे पास से बहुत बदबू आ रही है। हट जाओ। चली जाओ यहाँ से। मगर शोएब को उसकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसके शरीर में खबीस सवार था, इसलिए उसे संतुष्ट होने में समय लग गया। सलमा यह बर्दाश्त ही न कर पाई और वहीं पर उसने अपना दम तोड़ दिया। शोएब को जब होश आया तो उसने बेजान सलमा की हालत देखी तो उसे खुद पर ही गुस्सा आया। ये क्या हो गया मुझसे? मेरा खुद पर कोई कंट्रोल क्यों नहीं था? क्या हो गया था मुझे? अब मैं क्या करूँगा? शोएब ने डर के मारे सलमा की लाश को अपने ही घर के एक कमरे में छुपा दिया और खुद से ही बातें करते हुए शोएब रोने लगा। क्या करूँ? क्या हो गया? है? क्या करूँ? तभी उसके कानों में आवाज आई। क्यों? शोएब? तुम्हें मजा नहीं आया? देखो, अब आएगा मजा। ये आवाज किसी और की नहीं बल्कि खबीस की थी। वो भी शोएब के सामने आया। उसका भयानक रूप देखकर एक पल के लिए तो शोएब डर गया। मगर उसका डर एक भयानक रूप में परिवर्तित हुआ जब उसे कल रात की तरह यातना भुगतनी पड़ी। अब कभी शोएब की इच्छा पूरी करने के बदले अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करता उस खतरनाक प्रेतात्मा की जरूरतों को पूरा करने के कारण खूबसूरत सा दिखने वाला शोएब अब भयानक नजर आ रहा था। पूरा चेहरा पीला पड़ा था, आंखें अंदर धंस गई थीं। वो ऐसा लग रहा था मानो कई वर्षों से बीमार हो। अब हर दिन समुद्र के किनारे चक्कर लगाने लगा। शायद उसे वही मौलवी नजर आ जाए जिसने उसे खबीस की साधना के बारे में बताया था। न जाने वो मौलवी साहब कब नजर आएंगे। कैसे भी करके इस मुसीबत से छुटकारा पाना है। तुम्हें क्या लगता है तुम मुझसे इतनी आसानी से छुटकारा पा सकते हो? नहीं मरते दम तक मैं तुम्हारी इच्छाएं पूरी करूंगा और तुम मेरी जरूरत। यदि मरने के बाद मुझे तुमसे मुक्ति मिलेगी। तो मार दो मुझे रोज तिल तिल कर मरने से बेहतर है की एक ही दिन में मर जाऊं। इतनी आसानी से तुम्हें मुक्ति नहीं मिलेगी। बहुत दिनों तक खबीस शोएब का शोषण करता रहा। शोएब को वो मौलवी दोबारा नजर नहीं आए। जब खबीस का शोएब से मन भर गया तो एक रात खबीस ने उसे वहीं पर खत्म कर दिया। अब खबीस शोएब की गुलामी से आजाद था। पहले वो मौलवी और अब शोएब। मगर इसे मारने के बाद मेरी जरूरतों का क्या? इससे पहले कि किसी तांत्रिक या मौलवी की मुझ पर नजर पड़े और वो मुझे कैद करे, उसके पहले मुझे जल्द ही नया शिकार ढूंढना होगा। कहते हुए उसकी नजर वहीं दूर खड़ी एक लड़की पर गई जो परेशान नजर आ रही थी। वो भी शोएब का भेष बनाकर उस लड़की के पास पहुंचा और बातें करने लगा। उसकी आंखें लाल थीं। क्या बात है, बहुत परेशान लग रहे हो।
मुंबई मरीन ड्राइव मुंबई दुनिया का एक ऐसा शहर है जो शायद कभी नहीं सोता। रात में यहां अक्सर लोगों की रौनक लगी रहती है। स्पेशली मुंबई के मरीन ड्राइव पर, जो कि मुंबई की जान है। रात के अंधेरे में कई लोग यहां आते हैं और कभी ना अंत होने वाले समुद्र के व्यू को एन्जॉय करते हैं। लेकिन एक रात मरीन ड्राइव पर कुछ ऐसा हुआ की वो रात रोहन की जिंदगी की सबसे खौफनाक रात बन गई। रोहन का ऑफिस मरीन ड्राइव के पास था और रोहन लगभग हर शाम ऑफिस के बाद कुछ देर मरीन ड्राइव पर सैर करने जाता था। कुछ दिनों से उसके ऑफिस में काम का लोड बहुत ज्यादा बढ़ गया था, जिसकी वजह से उसे ऑफिस से निकलते हुए देर रात हो जाती थी। लेकिन फिर भी वो मरीन ड्राइव जरूर जाता था। उसके लिए एक ऐसी जगह थी। जहां वो अपने दिमाग को शांत कर सकता था। एक रात उसे ऑफिस से निकलते हुए दो बज गए।
वो रोज की तरह उस रात भी मरीन ड्राइव पर गया लेकिन उस रात हवा में एक अजीब सी ठंडक थी। मरीन ड्राइव पर ठंडी रात में अक्सर कई लोग वहां बैठा करते थे, लेकिन उस रात रोहन वहां बिल्कुल अकेला था। दूर दूर तक उसे कोई नजर नहीं आ रहा था। लेकिन वो ये सब इग्नोर करके कान में इयरफोन्स लगाए वहां वॉक करने लगा। वो गाना एन्जॉय करते हुए वॉक कर ही रहा था कि अचानक उसकी इयरफोन्स में आवाज आनी बंद हो गई। उसका फोन अचानक से स्विच ऑफ हो गया था। ये बात रोहन को बहुत अजीब लगी क्योंकि उसके फोन में तो करीबन 80 परसेंट चार्जिंग थी। वो फोन ऑन करने की कोशिश कर रहा था जब अचानक से उसे किसी के रोने की आवाज आई। वो कुछ आगे चला तो वहां एक लड़की बैठ कर रो रही थी। ये देख कर ना जाने रोहन को क्या हुआ कि वो उसके पास चला गया और उससे रोने का कारण पूछने लगा। उस लड़की ने बताया की उसका नाम अंजलि है और जिस लड़के से वो प्यार करती थी और साथ रहती थी उस लड़के ने उसे धोखा दे दिया। उस लड़की की बातें सुनते हुए रोहन वहीं पर बैठ गया। रोहन काफी देर तक वहीं उसके साथ बैठा रहा और फिर अचानक से रोहन के सर में बहुत जोरों का दर्द शुरू हो गया। वो दर्द इतना तेज था कि रोहन का पूरा चेहरा लाल हो गया और देखते ही देखते रोहन अपने होश खो बैठा।
जब रोहन की आंख खुली तो सुबह हो चुकी थी और वो मरीन ड्राइव पर ही लेटा पड़ा था। उसके आसपास कोई भी नहीं था, अंजलि भी नहीं। उसे कुछ समझ नहीं आया। क्योंकि आखिरी चीज जो उसे याद थी वो ये थी कि वो अंजलि के साथ मरीन ड्राइव पर बैठा बातें कर रहा था। अगली रात रोहन ऑफिस के बाद सीधा मरीन ड्राइव पर पहुंच गया और वहां अंजलि को ढूंढने लगा। काफी देर बाद करीब रात के 03:00 बजे उसे अंजलि एक कोने में बैठी मिली। जब रोहन ने पिछली रात के बारे में अंजलि से पूछा तो अंजलि ने कहा कि रोहन बहुत थक गया था और वो वहीं पर सो गया। रोहन को भी लगा की शायद सच में उसकी मरीन ड्राइव पर आंख लग गई होगी। रोहन और अंजलि फिर से बातें करने लगे। लेकिन फिर कुछ देर बाद रोहन के सर में दर्द होने लगा और वो फिर से बेहोश हो गया। जब वो उठा तो वो फिर से मरीन ड्राइव पर लेटा हुआ था। रोहन को फिर कुछ समझ नहीं आया। लेकिन अब रोहन के दिमाग में सिर्फ अंजलि चल रही थी। वो अंजलि का दीवाना सा हो गया था। इतना दीवाना की वो रोज देर रात मरीन ड्राइव पर अंजलि से मिलता और बातें करते करते बेहोश हो जाता।
रोज सुबह उसकी मरीन ड्राइव पर लेटे हुए ही आंख खुलती। धीरे धीरे रोहन बहुत कमजोर होने लगा था। उसकी तबीयत बहुत ढीली रहने लगी थी। एक रात ऑफिस में रोहन के एक दोस्त ने उसकी हालत देख कर पूछा की क्या वो ठीक है। तब रोहन ने उसे अंजलि के बारे में बताया। लेकिन उसके दोस्त ने बताया की वो भी पिछली रात मरीन ड्राइव पर ही था और उसने रोहन को मरीन ड्राइव पर अपने आप से बातें करते हुए देखा था। उसके आसपास कोई लड़की नहीं थी। रोहन अपने दोस्त की इस बात को सुनकर थोड़ा चौंक गया। उस रात रोहन मरीन ड्राइव पर अंजलि को ढूंढ रहा था तो उसे वो कहीं नहीं दिख रही थी। वो बुरी तरह परेशान होने लगा था। रोहन के हाथ पैर कांपने लगे और पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया था। अंजलि से मिलना मानो उसके लिए नशा सा बन गया था। रोहन अंजलि को ढूंढने के लिए मरीन ड्राइव की बाउंड्री वॉल के ऊपर चढ़ गया और अंजलि को आवाज देने लगा। और तभी अचानक उसे ऐसा लगा कि जैसे समुद्र से कोई काला साया निकला हो और उसके शरीर के आर पार हो गया हो। लेकिन इससे पहले की रोहन कुछ सोचता, उसे अंजलि की आवाज आई।
वो रोहन को अपने पास बुला रही थी। रोहन पीछे मुड़ा तो अंजलि उसे वहीं खड़ी मिली। रोहन फिर से अंजलि के पास जाकर बैठ गया। रोहन को उसके ऑफिस कलीग की बात बार बार परेशान कर रही थी। इसलिए उसने सोचा की वो अंजलि के साथ एक फोटो खींचेगा। उसने अपना फोन निकाला और अंजलि के साथ फोटो खींचने लगा पर जैसे ही उसने फोटो क्लिक का बटन प्रेस किया तभी अंजलि ने गुस्से में आकर उसके फोन पर अपना हाथ मारा और रोहन का फोन दूर जाकर गिरा। रोहन को ये बात बहुत अजीब लगी पर अंजलि ने उससे कहा की उसे फोटो खिंचवाना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। रोहन ने जब अपने फोन को उठाया तो उसने देखा की उसके फोन में एक ब्लर फोटो थी। पर उस फोटो में अंजलि के हाथ कुछ अजीब से काले दिख रहे थे। रोहन को कुछ समझ नहीं आया। तभी अंजलि ने फिर से उसे आवाज लगाई और रोहन अब थोड़ा सहम गया। रोहन अंजलि के पास गया और उसने उससे पूछा अंजलि, हम इतने समय से मिल रहे हैं, पर तुमने कभी बताया नहीं की तुम आखिर रहती कहाँ हो?
अंजलि ने उस बात का कोई जवाब नहीं दिया। वो बस चुप होकर फिर से रोने लगी। और उसके रोने की आवाज सुनकर। रोहन के सर में फिर से जोरो का दर्द शुरू हो गया। हर बार जब भी रोहन का सर दर्द करता उसके बाद उसे कुछ याद नहीं रहता। लेकिन इस बार जैसे ही रोहन को चक्कर आने लगे उसने अपना फोन का कैमरा निकाला और उससे अंजलि की फोटो ले ली। तस्वीर लेते ही अंजलि जोर से चिल्लाई पर वो आवाज किसी इंसान की नहीं बल्कि ऐसा लग रहा था की वो कोई भयानक जानवर हो। रोहन ने जैसे ही फोन के अंदर देखा तो उसका दिल दहल गया। उस फोटो में बैठी लड़की अंजलि नहीं थी बल्कि एक बहुत भयानक चुड़ैल लग रही थी जिसका पूरा शरीर काला पड़ चुका था। यह देखते ही रोहन के हाथों से फोन छूट गया और वो चीखता हुआ तेजी से मरीन ड्राइव से दूर भागने लगा। कुछ दूर जाकर जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो अंजलि का चेहरा पूरी तरह बदल चुका था। वो एक भयानक चुड़ैल दिख रही थी और वो चुड़ैल धीरे धीरे समुंदर में जाकर कहीं गायब हो गई।
रोहन को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। जब उसने आसपास के सामान बेचने वालों से पूछा तो एक बूढ़े आदमी ने उसे बताया कि कई साल पहले एक लड़की रोज रात में आकर मरीन ड्राइव पर रोती थी। लोग कहते थे की उसके लवर ने उसे धोखा दे दिया और उसे छोड़कर चला गया और इसी दुख में उसने एक रात मरीन ड्राइव पर पानी में कूद कर अपनी जान दे दी। उस बूढ़े सामान बेचने वाले ने ये भी बताया कि कई लड़के रात में खुद से बातें करते देखे गए हैं और उसमें से कई लड़के समुद्र में डूब कर अपनी जान भी दे चुके हैं। रोहन को लगा कि शायद वो भी उस आत्मा के वश में आ गया था और उसकी जान बाल बाल बची है। उस रात के बाद रोहन फिर कभी मरीन ड्राइव गया ही नहीं। लेकिन आज तक रोहन को रात में सपने आते हैं कि अंजलि मरीन ड्राइव के समुंदर के पास खड़ी रोहन को अपने पास बुला रही है।
यह चैनल केवल मनोरंजन के लिए है। हम किसी भी तरह के अंधश्रद्धा को बढ़ावा नहीं देते। तकरीबन आधी रात गए कमल अपने घर से बाहर निकला। अपने मोहल्ले से होता हुआ श्मशान वाली पहाड़ी की तरफ जा रहा था, जहाँ रात तो क्या लोग दिन में भी जाने से कतराते थे। गुस्से और दुःख से भरा हुआ कमल खुद से ही बातें करता हुआ बोला छिः, ऐसी जिंदगी से तो मौत भली। अब यह सब मैं और नहीं झेल सकता। आज इन सभी परेशानियों का अंत कर दूंगा। इतना सब बोलते हुए कमल अपने मोहल्ले से निकलकर काली पहाडी की तरफ मुड गया। काले घने पेड़ और पथरीली चट्टानों से भरी हुई काली पहाड़ी काफी डरावनी नजर आ रही थी। कमल काली पहाड़ी की एक चोटी पर खड़ा था। आज में खुद ही अपने जीवन लीला समाप्त कर दूंगा। अब और नहीं झेला जाता। कमल खुद से बातें करता हुआ पहाड़ी से नीचे कूदने ही वाला था कि तभी अचानक। बच्चा बहुत भूख लगी है तेरे पास कुछ खाने को है। यह आवाज सुन कर कमल चौंक पड़ा। भला इतनी रात गए यहाँ कौन हो सकता था? उसने पीछे मुड़कर देखा उसके सामने एक अघोरी खड़ा था। उसकी आँखें पूरी तरह से लाल थीं और वो कमल को देख कर मुस्कुरा रहा था। अब आप कौन हैं?
मैं एक अघोरी हूँ बेटा। मेरा नाम मटुकनाथ है। इस वक्त उस अघोरी को अपने सामने देख कर कमल थोड़ा चिढ़ते हुए बोला, मैं आपको खाने को क्या दे सकता हूं बाबा? मैं तो खुद ही भिखारी हो चुका हूं। एक जिंदगी थी और और आज उसे भी यहां खत्म करने आया था। इसका मतलब तू आत्महत्या करने आया था, है ना? मगर ये तो कायरों की निशानी है बेटा। आत्महत्या न करूं तो क्या करूं? न नौकरी है, न पैसे। घर में हर तरफ कंगाली है। जिस काम में भी हाथ लगाता हूं, वही खराब हो जाता है। पता नहीं कौन सी पनौती है। जो पीछा नहीं छोड़ती। अघोरी ने पहले उसे शांत किया और फिर समझा बुझाकर अपने साथ ले गया। दोनों जंगल में बनी एक गुफा के सामने खड़े थे। फिर कमल ने अघोरी से पूछा, ये आप मुझे कहां लेकर आए हैं बाबा? यह मेरी तप स्थली है बेटा। मेरे साथ आ हो।
कमल अघोरी के साथ अंदर दाखिल हुआ। चारों तरफ इंसानी खोपड़ियां और जले कटे मुर्दे पड़े थे। उस जगह तेज बदबू फैली थी। पहले तो कमल डर गया। फिर उसने सोचा कि वह तो मरने ही निकला था, इसलिए उसका डर खत्म हो गया। अघोरी उसे एक जलते हुए कुंड के पास लेकर गया। फिर दोनों आमने सामने बैठ गए। फिर अघोरी ने उसे अपनी आँखें बंद करने के लिए कहा। अघोरी ने किसी तरह का भभूत उस जलती हुई खोपड़ी पर फेंका। उसमें से तेज ज्वाला निकली। फिर अघोरी ने कुछ मंत्र पढ़ते हुए हवन कुंड में एक चाकू से अपनी हथेली काट कर ताजे खून की आहुति दी। तभी हवन कुंड से एक काले धुएं का गुबार निकला और देखते ही देखते वह एक खौफनाक आकृति में बदल गया। अपनी आँखें खोल कमल। कमल ने जैसे ही आँखें खोली। उसके सामने इतनी खतरनाक आकृति देख कर उसके शरीर का सारा खून जम सा गया। ये कौन है बाबा? घबरा मत ये माया और लालच का साकार रूप है। धन के साथ साथ लालच, भय और चिंता भी इंसान के ऊपर हावी होती है। मैं तुझे धनवान तो बना सकता हूँ पर इस माया से तुझे अपनी रक्षा खुद ही करनी होगी। जब जब तू भय, चिंता और लालच से ग्रसित होगा, ये तेरा शरीर अंदर से खाती जाएगी। इसे अपने ऊपर हावी होने से रोकना होगा वरना यही तेरी मृत्यु का कारण बनेगी और तू मुझमें यानी 0 में समाहित हो जायेगा।
कमल को अघोरी की बाते जरा भी समझ नही आ रही थी। उसे तो जल्द से जल्द अमीर बनना था इसलिए उसे अघोरी की हर शर्त मंजूर थी। अघोरी काफी देर तक मंत्र पढ़ते हुए हवनकुंड में आहुति डालता रहा और आखिरकार हवन कुंड की आग बुझ गई। सामने हवनकुंड में रखी हुई काली खोपड़ी पर एक चमकीला पत्थर रखा हुआ था। अघोरी ने उसे उठाया और कमल को देते हुए बोला यह एक चमत्कारी खंड है। जब तक यह तेरे पास रहेगा, तुझे हर तरफ से सफलता ही मिलेगी। मगर जैसा मैंने बताया, अगर तू उस सफलता को संभाल नहीं सका तो माया तेरी मृत्यु का कारण बनेगी। नहीं बाबा, ऐसा नहीं होगा। मैं मोह माया को अपने ऊपर कभी हावी होने नहीं दूंगा। मैं अपने भाग्य के दम पर खूब सारा पैसा कमा लूंगा और अच्छे काम भी करूंगा। फिर कमल ने वो पत्थर का टुकड़ा अघोरी से लिया और वहां से चला गया। इस घटना को कुछ महीने गुजर गए। इस बीच कमल की पूरी जिंदगी बदल चुकी थी। बड़ा बंगला, बड़ी गाडियां और खूब सारा पैसा। कमल अब करोड़पति बन चुका था। काफी वक्त तक उसने मेहनत से ढेर सारा पैसा कमाया। लेकिन धीरे धीरे अघोरी की कही बातें वो भूलता गया। उसकी जिंदगी अय्याशियों में गुजरने लगी। धीरे धीरे शराब और पार्टियों में कमल डूबता जा रहा था।
मगर इन सब के बीच माया धीरे धीरे उस पर हावी होती जा रही थी। एक रात कमल देर रात पार्टी करके घर लौटा। वो नशे में धुत्त था इसलिए सीधा जाकर बिस्तर पर लेट गया। लगभग आधी रात के वक्त उसे एहसास हुआ जैसे उसके सीने में बेहद दर्द हो रहा हो। वो सांस नहीं ले पा रहा था। उसने आंख खोलने की कोशिश की तो वो आंख भी नहीं खोल पा रहा था। तभी उसे किसी औरत के हंसने की आवाज सुनाई दी। कमल बेहद डर गया था। वो बिस्तर पर अपने हाथ पैर पटकने लगा। तभी अचानक उसकी आंख खुल गई। मगर आंख खुलते ही उसका कलेजा मुंह को आ गया। उसके सीने पर एक बेहद खौफनाक रूप में माया बैठी थी जो उसके सीने के मांस को अपने हाथों से चीर कर खा रही थी। कमल ने जोर से चीखते हुए कहा कौन है कौन है।
मुझे नहीं पहचाना कमल। मैं माया शर्त के मुताबिक मैं तेरे शरीर का मांस खाने आई हूँ। बिस्तर पर पड़ा हुआ कमल अपने हाथ पैर पटकते हुए जोर जोर से चीख रहा था। मगर वहाँ उसे सुनने वाला कोई नहीं था। तभी अचानक उसकी आँखें खुल गई। उसका पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था क्योंकि वो एक बेहद डरावना सपना देख रहा था। इस घटना के बाद कमल की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी थी। डर और चिंता ने उसे पूरी तरह से जकड़ लिया था। अब कमल लोगों से मिलने जुलने से घबराता था। उसे हर समय डर रहता था कि उसकी बेशुमार दौलत की वजह से कोई न कोई उसका कत्ल कर देगा या फिर ये सब उससे छिन जाएगा। उधर अघोरी अपनी गुफा में ध्यान लगाए बैठा था। अचानक उसके कान में किसी के हंसने की आवाज गई।
उसने अपनी आंखें खोली और देखा उससे कुछ ही दूरी पर माया खड़ी थी। जो हंस रही थी और उसके मुंह और हाथों पर खून लगा था। माया ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। देख अघोरी देख कमल कमजोर हो रहा है। अब मेरे जरिए तेरी शक्तियां बढ़ेंगी। माया अघोरी की ही काली शक्तियों का हिस्सा थी वह जैसे ही किसी को अपना शिकार बनाती थी अघोरी की शक्तियां बढ़ जाती थी। एक रात कमल अपने ऑफिस में नशे की हालत में बैठा हुआ खुद से ही बड़बड़ा रहा था। सब के सब मेरे जान के दुश्मन किसी को कोड़ी भी नहीं दूंगा। यह सारी दौलत मैंने मेहनत से कमाई है इस पर सिर्फ और सिर्फ मेरा हक है। व यह सब बोल ही रहा था कि तभी उसकी सेक्रेटरी मोहिनी ने कमरे में आते हुए कहा सर यह कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट थे जिस पर आपके सिग्नेचर चाहिए थे। तुम सभी मेरे जान के दुश्मन हो धोखे से मेरी सारी प्रॉपर्टी हड़पने के चक्कर में लगे हो किसी को नहीं दूंगा फूटी कोड़ी।
मोहिनी कमल की बातें सुनकर चौक पड़ी जब तक वह इन बातों का मतलब समझ पाती अचानक कमल उसकी तरफ देखते हुए डरने लगा। माया बचाओ बचाओ उसे मोहिनी में माया नजर आ रही थी और वो डरते हुए ऑफिस से बाहर भागा। जो कि थर्ड फ्लोर पर था मेरा पीछा छोड़ दे छोड़ दे मेरा पीछा। कमल जल्दबाजी में सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा था कि अचानक उसका पैर सीढ़ियों से फसल गया। सिर के बल गिरने के कारण कमल की मौके पर ही मौत हो गई। अगले दिन शाम के वक्त स्मशान घाट में पूरे विधि विधान से कमल की लाश जलाई जा रही थी। उसके परिवार वाले रो रहे थे जिस दौलत के लिए वह पागल हुआ था उसका एक भी रुपया उसके साथ नहीं जा रहा था घनी रात स्मशान घाट में कमल की चिता की आग ठंडी पड़ चुकी थी। उससे हल्का धुआं और रोशनी निकल रही थी पास ही बैठा अघोरी उस चिता से कमल के लाश के टुकड़े निकाल निकाल कर खा रहा था। और उसके पास ही खड़ी माया यह सब नजारा देख रही थी।
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दिल्ली की सर्दी के बारे में पूरा इंडिया जानता है। कड़कती ठंड में दिल्ली बहुत ही खूबसूरत लगती है। पर इसी ठंड में हमें देखने को मिलता है खूब सारा कोहरा। घना कोहरा जो एक चादर की तरह पूरी दिल्ली को ढक देता है। पर क्या हो अगर यह कोहरा अपने साथ कुछ ऐसा लेकर आए जो आपकी जिंदगी ही बदल दे। आज की कहानी है जावेद और उसके दोस्तों की। जावेद और उसके दोस्त दिल्ली के बढ़ते पॉल्यूशन से परेशान हो गए थे और कुछ समय के लिए दिल्ली से बाहर जाना चाहते थे। उन सभी ने मिलकर हिमाचल जाने का प्लान बनाया। तीन दिन बाद ही उन्होंने कैब हायर की और सुबह 04:00 बजे अपनी ट्रिप के लिए निकल गए। जावेद और उसके दोस्तों को लेने आया ड्राइवर बहुत ही हंसमुख और खुशमिजाज था। कुछ ही समय में उस ड्राइवर की दोस्ती सभी से हो गई थी। उन लोगों को घर से निकले हुए करीब चार घंटे हो चुके थे। सुबह के आठ बज रहे थे। आसमान में अब भी अंधेरा छाया हुआ था। तभी गाड़ी में बैठे सभी लोगों को सामने रोड पर एक घने कोहरे की चादर दिखी। वो कोहरा इतना गहरा था की उसके आगे रोड दिखाई ही नहीं दे रही थी। जावेद ने नोटिस किया की उनका ड्राइवर जो पहले बहुत मुस्कुरा रहा था अब अचानक से बहुत सीरियस हो गया है। उसके चेहरे का मानो रंग ही उड़ गया है। जावेद को लगा कि शायद ड्राइवर कोहरे में गाड़ी चलाने से घबरा रहा था। जावेद ने ड्राइवर के कंधे पर हाथ रखा और उससे कहा, भैया टेंशन मत लो। धीमी स्पीड पर गाड़ी कोहरे से निकाल लेना। तभी उस ड्राइवर ने जावेद को देखा और सहमी हुई आवाज में कहा, मेरी आपसे विनती है। कोहरे से निकलते वक्त प्लीज गाड़ी की खिड़की बंद ही रखना। भूल कर भी मत खोलना। ड्राइवर इतना डरा हुआ था की जावेद और उसके दोस्तों की हंसी छूट गई। इस पर उस ड्राइवर ने बताया की वो जिस इलाके में है वहां कभी कोहरा नहीं आता और जब कभी ऐसा कोहरा आता है तो वो अपने साथ एक छलावा, एक झूठ, एक माया लेकर आता है। जावेद और उसके दोस्तों को ड्राइवर की बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने उसकी बात को अंधविश्वास बोल कर नकार दिया और देखते ही देखते उनकी गाड़ी कोहरे के अंदर चली गई। कोहरे की चादर उनकी उम्मीद से काफी बड़ी थी। ड्राइवर धीरे धीरे गाड़ी आगे चला तो रहा था पर किसी को आगे का कुछ भी नहीं दिख रहा था। अचानक ही गाड़ी में बैठी रिया को अजीब सी बेचैनी होने लगी। उसे बिल्कुल सांस ही नहीं आ रही थी। वो ड्राइवर की बात को भूल गई और उसने गाड़ी का शीशा खोल दिया और अपनी गर्दन गाड़ी के शीशे से थोड़ी बाहर निकाल ली। खिड़की खोलते ही रिया को वापस सांस आई लेकिन वो कोहरा अब गाड़ी के अंदर आ चुका था। कुछ ही सेकंड्स बाद जैसे ही रिया ने गाड़ी के अंदर देखा तो उसके होश ही उड़ गए। गाड़ी रोड पर चल रही थी पर उस गाड़ी के अंदर रिया के अलावा और कोई नहीं था। रिया की सांस वहीं अटक गई। जावेद रवि और ड्राइवर तीनों ही गाड़ी से गायब थे। गाड़ी अपने आप आगे चल रही थी। रिया ने गाड़ी से कूदने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोलने की कोशिश की, पर गाड़ी लॉक थी और जोर लगाने पर भी उसका लॉक नहीं खुल रहा था। वो जोर जोर से गाड़ी के अंदर चिल्लाने लगी। तभी कुछ ही देर में धीरे धीरे वो गाड़ी खुद ही रुक गई और दरवाजे का लॉक अपने आप खुल गया। रिया ने बिना कुछ सोचे समझे गाड़ी का लॉक खोला और गाड़ी से बाहर भागने लगी। पर उसे अपने आस पास घने कोहरे के अलावा और कुछ भी नहीं दिख रहा था। रिया चिल्ला चिल्लाकर मदद मांगने लगी। उसका दिल अब उसके शरीर से बाहर आ रहा था कि तभी उस कोहरे में कुछ दूर पर उसे एक काली परछाई दिखी जो एक बहुत ही बड़े आदमी जैसी लग रही थी। रिया मदद के लिए उस आदमी की तरफ भागने लगी पर भागते हुए उसने यह देखा की वो परछाई के करीब पहुँच ही नहीं पा रही है। वो परछाई हमेशा उतनी ही दूर होती जितनी पहले थी। इससे पहले रिया कुछ भी समझ पाती उसे महसूस हुआ की जैसे उसके पीछे कोई खड़ा हुआ है। रिया इतनी डर चुकी थी की उसके अंदर पीछे मुड़ने की भी हिम्मत नहीं थी। पर हिम्मत करके जब रिया ने पीछे देखा उसकी रूह कांप गई। रिया के पीछे एक 12 फीट लंबा काला साया था। लंबे काले साये को देखकर रिया बुरी तरह कांपने लगी। तभी अचानक रिया को पीछे से एक बहुत जोर का धक्का लगा और वो नीचे गिर पड़ी। जावेद, रवि और वो ड्राइवर और रिया अब भी गाड़ी में थे। रिया ने जैसे ही वो खिड़की खोली थी वो बेहोश हो गई थी। उस ड्राइवर ने उसके बेहोश होते ही रवि को जल्दी से वो खिड़की बंद करने को कहा। जावेद और रवि रिया की हालत देख कर उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे और ड्राइवर बस बार बार एक ही चीज बोले जा रहा था। गाड़ी की खिड़की नहीं खोलनी चाहिए थी। नहीं खोलनी चाहिए थी गाड़ी की खिड़की। जावेद को अब ड्राइवर पर गुस्सा आने लगा था। उसे लग रहा था की वो ड्राइवर एक मेडिकल इमरजेंसी पर वहम की पट्टी चढ़ा रहा है। जावेद बस वहां से निकल कर रिया को हॉस्पिटल ले जाना चाहता था। जावेद ने ड्राइवर को गाड़ी तेज चलाने के लिए कहा। ड्राइवर ने जावेद की बात मानी और गाड़ी के एक्सीलरेटर पर अपना पैर दबा दिया। लेकिन कुछ ही सेकेंड्स में अचानक से गाड़ी के सामने एक लड़की आ गई और इतनी तेज स्पीड होने की वजह से गाड़ी उस लड़की से टकरा गई। उस लड़की के टकराने के बाद ड्राइवर ने गाड़ी वहीं रोक दी। अब जावेद और रवि की सांसे वहीं अटक गई थीं। वे तुरंत गाड़ी से उतरकर उस लड़की को देखने गया। उसने देखा की एक लड़की खून से लथपथ रोड पर उल्टी पड़ी हुई थी। जावेद ने जैसे ही उसकी शक्ल देखने के लिए उसे पलटा उसका दिल दहल गया। वो खून से लथपथ पड़ी लड़की कोई और नहीं बल्कि जावेद की दोस्त रिया थी। जावेद को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि रिया तो उसके साथ गाड़ी में थी। जावेद दोबारा गाड़ी की ओर गया और उसने देखा की पूरी गाड़ी बिल्कुल खाली थी। गाड़ी के अंदर और कोई भी नहीं बैठा था। जावेद को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो बहुत ज्यादा डर चुका था।जावेद ने रिया की बॉडी को उठाकर गाड़ी में रखा और खुद ड्राइवर सीट पर बैठकर गाड़ी को चलाने लगा फिर जावेद घने कोहरे में बस तेजी से गाड़ी चला रहा था। तभी उसे चलती हुई गाड़ी के सामने वही 12 फुट लंबा काला साया आ गया और जावेद का गाड़ी की स्टेयरिंग पर से कंट्रोल बिगड़ गया और वो गाड़ी रोड के एक साइड के एक पेड़ से जाकर टकरा गई। अगली सुबह उनकी गाड़ी एक पेड़ से टकराई हुई मिली जिसमें ड्राइवर जावेद, रवि और रिया थे। वो चारों उस कोहरे की रात जिंदा तो बच गए लेकिन जावेद के सिर पर चोट आने की वजह से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और रिया को इतना गहरा सदमा लगा कि अब उसे हर जगह सिर्फ वही काला साया दिखता है। अगली बार कोहरे में जाओ तो अपनी गाड़ी की खिड़की कभी मत खोलना।
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ये कहानी केरला के अर्नाकुलम डिस्ट्रिक्ट की है। किशोर अपना सब कुछ छोड़ कर अपने जीवन की एक नई शुरुआत करने के लिए केरला आया था। उसे बचपन से ही केरला की खूबसूरत हरियाली में रहना था और सस्ते कीमत पर ज़मीन मिलने के बाद किशोर को लगा कि शायद उसका सपना अब पूरा होने वाला था। किशोर ने उस ज़मीन पर निर्माण का काम शुरू करवा दिया। करीबन दो महीनों में उसके घर का ग्राउंड फ्लोर तैयार हो गया था। किराये का इंतजाम करना किशोर के लिए थोड़ा कठिनाई हो रहा था इसलिए उसने तय किया कि वो अपने अधूरे बने घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही रहेगा और इस तरह वो निर्माण के काम को सुपरवाइजर भी कर पाएगा। पूरा दिन काम करवाने के बाद किशोर ने अपने नए घर के कोने में एक खाट बिछाई और चद्दर तान कर सो गया। किशोर की आंख बस लगी ही थी कि अचानक से उसकी खाट ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी और उसके ऊपर लेटे लेटे ही पलट गए। किशोर ज़मीन पर गिर गया और उसकी खाट उसकी आंखों के सामने उल्टी पड़ी थी। किशोर की कमर में चोट आ गई थी और वो एकदम से हुए इस हादसे से बहुत सहम गया था। उसने अपनी खाट को उठा कर सीधा किया और खाट घर के बाहर ले जाने लगा। घर की मुख्य प्रवेश द्वार पर अभी तक दरवाज़ा नहीं था। किशोर एंट्रेंस तक पहुंचा ही था कि उसे किसी खूंखार जानवर की गुर्राने की आवाज़ आई। नई जगह में देर रात को अपने साथ ऐसी अजीब चीज़ें होता देख। किशोर काफ़ी घबरा गया। वो कुछ कर पाता उससे पहले ही उसके घर की एंट्रेंस की छत अचानक से ढह गई। किशोर को कोई चोट तो नहीं आई पर बाहर जाने का एक लौता रास्ता अब बंद हो गया था। अब किशोर के पसीने छूटने लगे थे। घर में सिर्फ अंधेरा था और उसे बार बार किसी भयानक जानवर के गुर्राने की आवाज़ आ रही थी। किशोर अब जैसे तैसे करके वो रात गुज़ारना चाहता था क्योंकि सुबह होते ही उसके वर्कर्स घर पर आ जाते और तब वो अकेला नहीं होता किशोर घर के बीचों बीच खड़ा सहमा हुआ रात गुजारने का कोई तरीका सोचने लगा की उसी वक्त उसे ऐसा लगा की जैसे कोई उसके पीछे उसके बेहद करीब से भागकर निकला हो किशोर ने अपनी आंखें बंद कर ली और हाथ जोड़ कर भगवान का नाम लेने लगा। करीबन दो मिनट तक आँखें बंद रखने के बाद किशोर ने महसूस किया कि वो भयानक आवाज़ें अब बंद हो गई थी। उसे अब एक अजीब सा सन्नाटा महसूस हो रहा था। हवा भी बेहद ठंडी हो गई थी। इस सन्नाटे की आड़ में किशोर ने अपनी आंखें खोली और उसके ठीक सामने एक भयानक दृश्य था। उसके सामने एक दो सींग वाला राक्षस खड़ा था। उसकी बड़ी बड़ी आँखें थी जो गुस्से से लाल हो रही थी, लम्बे दांत थे और उसकी लंबी जीभ बाहर निकली हुई थी। वो ख़ून भरी आंखों से किशोर को देख रहा था। किशोर उसे देखते ही ज़ोर से चीखा और उस राक्षस ने किशोर पर हमला कर दिया और उसके बाएं हाथ का मांस नोचकर खा लिया। किशोर को अपनी मौत अपनी आंखों के सामने दिख रही थी।वो राक्षस उसके हाथ से नोचा हुआ मांस खा रहा था और किशोर चीखता हुआ मदद मांग रहा था। कुछ ही पलों में किशोर का बहुत सारा खून बह चुका था और वो बेहोशी की हालत में आ गया था कि तभी उसे कहीं दूर से घंटियां बजने की आवाज़ आने लगी। कोई कहीं से ज़ोर ज़ोर से मंत्र उच्चारण करने लगा और उन मंत्र के उच्चारण से वो राक्षस शांत हो रहा था किशोर के उसे देखते देखते ही वह राक्षस अचानक से वहां से गायब हो गया। किशोर को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन उस राक्षस के गायब होते ही किशोर ने एक राहत की सांस ली। किशोर का काफ़ी खून बह चुका था और इसीलिए कमज़ोरी की वजह से वह वहीं पर बेहोश हो गया। जब उसकी आंख खुली तो वह एक बेड पर लेटा हुआ था और उसके हाथ पर पट्टी बंधी थी। उसके बगल में उस गांव के सबसे बड़े पुजारी बैठे थे। किशोर के मन में बहुत सारे सवाल थे।वह डरा सहमा उस रात के बारे में बड़बड़ाने लगा। पुजारी ने किशोर को शांत किया और उसे बताया कि जो जानवर कल रात उसे दिखा था। वो कोई जानवर नहीं वो एक ब्रह्मराक्षस था। पुजारी ने बताया कि उनके गाँव को पिछले सौ सालों से एक श्राप मिला हुआ था। वहां पर उस ब्रह्मराक्षस की अनुमति के बिना कोई ईंट भी नहीं लगा सकता था। उस गाँव का हर एक रहने वाला आदमी कोई भी नया काम करने से पहले मंदिर में लगी उस ब्रह्मराक्षस की मूर्ति की पूजा करता और उस ब्रह्मराक्षस की अनुमति लेता था क्यूंकि किशोर उस गाँव में नया था इसलिए वो ये सब नहीं जानता था और उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया और इसीलिए ब्रह्मराक्षस उससे नाराज़ हो गया और उसका यह हाल हुआ। किशोर को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने पुछा ब्रह्मराक्षस। वो क्या होता है? पुजारी ने जवाब दिया कि जब एक ब्राह्मण की अकाल मृत्यु हो जाती है या फिर वो ब्राह्मण अपने ज्ञान का इस्तेमाल बुरे कामों के लिए करता है या फिर मरने के बाद अगर उसकी गति ना की जाए तो वो ब्राह्मण एक ब्रह्मराक्षस वन जाता है इस घटना के बाद किशोर को समझ ए गया की इस गांव में रहने के लिए उसे उस ब्रह्मराक्षस की अनुमति लेनी ही होगी और अगले ही दिन उसने अपने घर की पूजा उस मंदिर में करवाई उस दिन के बाद से उसके साथ फिर कभी ऐसी कोई भयानक घटना नहीं हुई। कैसी लगी आपको ये कहानी? अगर आप भी ब्रह्मराक्षस के बारे में और कुछ जानते हैं तो हमें कमेंट में ज़रूर बताइए।
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जोसफ़ाबाद गाँव सुंदर पहाड़ियों के बीच बसा हुआ था। चार्ल्स और क्लैरा, जोसफ़ाबाद में बने हुए एक सुंदर घर की बालकनी में खड़े थे। तभी क्लैरा की नज़र एक चर्च पर पड़ी। चार्ल्स, वो देखो, पहाड़ी के सुंदर हरियाली के बीच सामने बना हुआ चर्च कितना सुंदर लग रहा है। चलो ना चार्ल्स, चर्च में चलते हैं। वैसे तुम्हारा ख्याल बुरा नहीं है। वैसे भी आज हमारा इस गांव में पहला दिन है और अब हमें यहीं रहना है। इन गांव वालों में घुलने मिलने के लिए चर्च से ज़्यादा अच्छी जगह कोई नहीं हो सकती। कुछ देर बाद, चार्ल्स और क्लैरा चर्च के गेट के बाहर खड़े इधर उधर देख रहे थे कि तभी उनके कानों में एक महिला की आवाज़ टकराती है। तुम दोनों कौन हो? तुम इस गाँव के तो नहीं लगते? चार्ल्स और क्लेरा ने देखा, तो उनके पीछे एक औरत खड़ी थी, और उन दोनों को घूरे जा रही थी। मेरा नाम चार्ल्स है और यह मेरी दोस्त क्लैरा। आपने सही कहा, हम इस गांव में नए हैं। मेरा नाम मारथा है। अगर अपनी जान की सलामती चाहते हों, तो इस चर्च के आसपास भी मत भटकना। ये चर्च बरसों से बंद हैं। इतना कहकर मारथा, तेज़ कदमों के साथ वहां से चली गई। इसके बाद चार्ल्स ने क्लैरा की ओर देख कर कहा। अजीब बात है, इस चर्च की हालत देखकर तो नहीं लगता कि चर्च बंद है और अगर ये बंद है, तो इसका दरवाज़ा खुला हुआ क्यूं है? चार्ल्स ने इतना कहा ही था कि तभी चार्ल्स के कानों में लड़की की आवाज़ टकराई। क्या तुम दोनों चर्च के बाहर ही खड़े रहोगे? या फिर अंदर आकर play भी करोगे? चार्ल्स और क्लेरा ने जैसे ही पलट कर देखा, तो सामने एक सुंदर नन खड़ी थी। चार्ल्स ने नन की ओर देख कर कहा। अभी कुछ सेकंड पहले मारथा नाम की एक औरत बता रही थी कि चर्च बरसों से बंद है। मगर उसने चार्ल्स की बात का कोई जवाब नहीं दिया और वो तेज़ क़दमों के साथ चर्च के अंदर चली गई। चार्ल्स और क्लैरा भी उसके पीछे पीछे चर्च के अंदर चले गए। चर्च के अंदर अंधेरा फैला हुआ था।अचानक चर्च के अंदर रखी हुई मोमबत्तियां अपने आप जल उठीं। ये देखकर चार्ल्स डरते हुए बोला, ये क्या हो रहा है क्लैरा मुझे यहां कुछ ठीक नहीं लग रहा। हमें यहां से चलना चाहिए और वो और नन कहां गायब हो गई। तभी चार्ल्स और क्लैरा के कानों में किसी औरत के गुर्राने की आवाज़ टकराई। उन दोनों ने जैसे ही पीछे पलट कर देखा, तो उन दोनों के होश उड़ गए। पीछे वही नन खड़ी थी जिसका चेहरा अब भयानक हो चुका था।
उसकी आंखों की पुतलियां गायब हो गई थी। वो उन दोनों को वहशी मुस्कान के साथ देख रही थी। इसका मतलब, मारथा नाम की औरत सही कह रही थी। क्लैरा कांपते हुए उस भयानक नन को देख कर बोली मैं जानती हूँ कि इस चर्च में एक शापित नन वास करती है मगर मैं यहाँ पर एक मक्सद के लिए आई हूँ। कौन सा मक्सद शादी के बाद पिछले दो साल से मैं तीन बार गर्भवती हो चुकी हूँ मगर हर बार कुछ महीनों बाद मेरा गर्भ गिर जाता है मैंने सुना है कि इस चर्च के अंदर बहुत सी उन महिलाओं को संतान के सुख की प्राप्ति हुई है जो संतान के सुख से वंचित थी। ठीक है, इस बार तुम्हारा गर्व नहीं गिरेगा, तुम्हें एक लड़की होगी, मगर तुम्हें एक वादा करना होगा। जवान होने के बाद, तुम्हें उस लड़की को नन के रूप में इस चर्च को समर्पित करना होगा। यानी कि मुझे। मुझे मंजूर है। लेकिन तुम्हें इस चर्च से अकेले बाहर जाना होगा।तुम्हारा पति इस चर्च से कभी बाहर नहीं जाएगा। मुझे वो भी मंजूर है। इतना कहकर क्लैरा चार्ल्स से कहती है। मुझे माफ करना चार्ल्स। मुझे किसी भी हाल में एक संतान चाहिए। तभी उस भयानक नन के मुंह से सैकड़ों भयानक कीड़े निकल कर बिजली की रफ़्तार से चार्ल्स के चेहरे पर चिपक गए। चार्ल्स की चीख चर्च में गूंजने लगी। कुछ पलों के बाद, चार्ल्स हड्डियों का ढांचा वन कर वहीं गिर गया और क्लैरा चर्च से बाहर निकल गई। इस घटना के बीस साल बाद, क्लैरा की बेटी एना बीस वर्ष की हो चुकी थी। उसकी सुंदरता के चर्चे जोसफ़ाबाद के हर घर में फैली हुई थी।
एक दिन एना बाज़ार से अपने घर आ रही थी कि तभी सैंडी और उसके दोस्त डेनियल ने उसका रास्ता रोक लिया। मैं तुमसे प्यार करता हूँ एना और तुमसे शादी करना चाहता हूँ। मैं तुमसे प्रेम नहीं करती। मेरी मां ने मुझे बचपन से यही सिखाया है कि मुझे विवाह जैसी मोह माया से दूर रहना है और मुझे अपना पूरा जीवन चर्च को समर्पित करना है। इतना कहकर एना तेज़ क़दमों से वहाँ से चली गई। एना के जाते ही डेनियल ने सैंडी से कहा। लगता है तेरा दिमाग खराब हो गया है सैंडी। जानता है कि ऐना शापित है। जोसफ़ाबाद के लोग उस चर्च के आसपास भी नहीं भटकते, मगर मैंने देखा है कि ये ऐना चर्च के अंदर बेधड़क घुस जाती है, और वैसे भी ऐना एक नन बनने वाली है। हाँ, जानता हूँ कि ऐना नन बनने वाली है, उसके बाद भी मैं उससे प्यार करता हूँ। डेनियल डरता हुआ सैंडी की दादी, मारथा के पास जाकर कहता है। मुझे आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी है आंटी, सैंडी ऐना के प्यार में दीवाना हो चुका है। और पूरा गाँव ऐना और उसकी माँ से घबराता है। तभी वहां पर सैंडी पहुंचा। और डेनियल की ओर देख कर बोला, तुमसे एक छोटी सी बात भी हज़म नहीं होती डेनियल। मारथा सैंडी की ओर देख कर कहती है तुम्हें ऐना से दूर रहना चाहिए सैंडी।लेकिन क्यों दादी, आखिर क्यों गांव वाले ऐना से इतना घबराते हैं।
मारथा एक कमरे के अंदर से बहुत ही प्राचीन किताब उठा कर लाती है और उस किताब में एक भयानक औरत का चित्र सैंडी को दिखा कर कहती है। उस चित्र को देख कर सैंडी डरते हुए कहता है, ये तो बड़ा ही भयानक चित्र है, कौन है ये? ये एक शैतान की देवी का चित्र है सैंडी, जो दूसरी दुनिया में रहती है। दूसरी दुनिया? हाँ सैंडी, दूसरी दुनिया। हमारा ये चर्च हमेशा से वीरान नहीं था। बरसों पहले इस चर्च में एक नन रहा करती थी जिसने एक लड़की के शरीर से आत्मा निकालने की कोशिश की थी। वो लड़की तो ठीक हो गई। मगर चर्च के अंदर दूसरी दुनिया का द्वार खुल गया। और जिस शैतान की देवी का चित्र तुम देख रहे हो, उसने ऐना के शरीर पर क़ब्ज़ा जमा लिया। तब से वो नन शापित हो गई। लेकिन वो शापित नन से, ऐना और उसकी माँ का क्या सम्बन्ध? गाँव वाले ऐना और उसकी माँ से, इतना क्यों घबराते हैं? ऐना की माँ और पिता बरसों पहले मुझे उस चर्च के बाहर मिले थे। मैंने उन्हें चर्च के पास रुकने के लिए मना किया था। मगर वो नहीं माने और अंदर चले गए। कहते हैं कि कुछ देर बाद चर्च के बाहर सिर्फ़ ऐना की माँ निकली थी और उसके पिता का तब से कुछ भी नहीं पता चला। उसके बाद ही ऐना ने जनम लिया।मैंने क्लैरा के बारे में पता किया तो मुझे पता चला कि क्लैरा के तीन बार गर्भ गिर चुके थे।ज़रूर उसने उस शापित नन से अपने लिए एक संतान मांगी होगी। उस नन के अंदर जिस शैतान की देवी ने क़ब्ज़ा जमा रखा है, वो अपनी बेटी को इंसानी के जरिए इस संसार में लाना चाहती है। क्लैरा से पहले उसने जिस इंसान की भी संतान की प्राप्ति कराई, वो संतान दस वर्ष बाद ही इस दुनिया से चली गई।मगर ऐना अब तक जीवित है। ऐना शैतान की बेटी है। वो शापित है सैंडी। अपनी दादी मां की बात सुन कर, सैंडी चुप हो गया।
आधी रात का वक़्त हो चुका था। क्लैरा अपनी बेटी ऐना के साथ गहरी नींद में सो रही थी कि तभी कमरे में अचानक काला धुआं फैलने लगा। अचानक क्लैरा की आँख खुल गई। उसने देखा कि वही भयानक नन उसके सामने थी। ऐना अब से केवल चर्च में ही रहेगी और वो चर्च के बाहर अब कभी भी नहीं निकलेगी। ये सुनकर क्लैरा बुरी तरह से चौंकती हुई बोली। लेकिन तुमने तो कहा था कि मेरी बेटी को चर्च के प्रति समर्पित रहना होगा एक नन के रूप में। लेकिन तुमने ये नहीं कहा था कि वो चर्च से बाहर अपना कदम भी नहीं निकालेगी। तुम्हारा काम यहीं पर खत्म हो गया है।अचानक उस भयानक नन के मुंह से भयानक कीड़े निकलकर क्लैरा के चेहरे पर चिपक गए। क्लैरा एक भयानक चीख के साथ कंकाल बनकर वहीं पर ढेर हो गई। तभी ऐना की आँख खुल गई और वो किसी सम्मोहित अवस्था में उस भयानक नन को देखने लगी।
उठ जाओ ऐना और अपने उस प्रेमी को जो तुमसे सबसे ज्यादा प्यार करता है चर्च के अंदर लेकर आओ।इतना कहकर वह भयानक दिखने वाली नन वहां से गायब हो गई। ऐना किसी सम्मोहित अवस्था में अचानक उस कमरे में पहुंच गई जहां सैंडी गहरी नींद में सोया हुआ था। अचानक सैंडी की आंख खुलती है और वोह अपने सामने ऐना को देखकर बुरी तरह से घबरा जाता है और कहता है तुम अंदर कैसे आई। चलो मेरे साथ सैंडी किसी सम्मोहित अवस्था में ऐना के साथ चर्च के अंदर चला गया। चर्च के अंदर उस भयानक नन को देखकर सैंडी का सम्मोहन टूट गया और वह कांपते हुए नन की ओर देखकर बोला यह यह कौन है।ऐना एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ सैंडी से कहती है। यह मेरी मां है सैंडी तुम डरो मत जैसे ही मैं और मेरी मां तुम्हारे शरीर का खून पिएंग। हम दोनों की शक्तियां जो इस संसार में पूरी तरह से काम नहीं करती वापस आ जाएंगी। इतना कहकर ऐना का चेहरा उस भयानक नन की तरह भयानक हो गया तभी उन दोनों के कानों में मारथा की आवाज टकराई। मैं जानती थी कि ऐसा कुछ होने वाला है ऐना और उस भयानक नन ने जैसे ही पलट कर देखा। तो उनके बीच मारथा हाथ में बंदूक लिए हुए खड़ी थी। ना जाने कितनी कोशिश के बाद मैं अपनी बेटी को किसी इंसानी के जरिए इस संसार में ले आ पाई हूं। मूर्ख औरत तुझे क्या लगता है तू इस इंसानी खिलौने से मुझे और मेरी बेटी को खत्म कर देगी। मैंने तेरे और तेरी बेटी के बारे में प्राचीन किताबों में बहुत कुछ पढ़ा है और मैं जानती हूं कि तुम दो दोनों जैसे ही मेरे बेटे सैंडी का खून पियोगी तुम्हारी शक्तियां वापस आ जाएंगी। और तुम दोनों मानवता पर कहर ढा दोगी। मैं यह भी जानती हूं कि मैं तुम्हारा मुकाबला नहीं कर सकती। और उसके बावजूद भी तुम यहां मरने चली आई। तुमने मेरी पूरी बात नहीं सुनी अगर मैं अपने बेटे को मार दूं तो मैं यह भी जानती हूं कि तुम दोनों हमेशा के लिए इसी चर्च के अंदर कैद होकर रह जाओगी और तुम्हारी शक्तियां भी खत्म हो जाएंगी। तुम दोनों के कहर से मानवता को बचाने के लिए अगर मुझे खुद अपने बेटे की बलि लेनी पड़े। तो मुझे कोई हर्ज नहीं इतना कहकर मारथा ने तुरंत गोली चला दी। यह तूने क्या किया अपने ही बेटे को मार डाला। तभी उस भयानक नन और नन की बेटी के शरीर में आग लग गई। मारथा तुरंत उस चर्च से बाहर निकल आई एक तेज हवा के साथ उस चर्च का द्वार बंद हो गया। बाहर डेनियल कांपता हुआ मारथा से बोला ये आपने क्या किया। इंसानियत को बचाने के लिए मेरे पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं था अब शैतान की देवी और उसकी बेटी हमेशा के लिए इस चर्च के अंदर कैद है। अब वह कभी बाहर नहीं आ सकती इतना कहकर मारथा डेनियल को लेकर वहां से चली गई।
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कहते हैं कि अमावस्या की रात काली शक्तियां अपने चर्म पर होती हैं और अपने लिए शिकार की तलाश में रहती है। इसलिए कहा जाता है कि अमावस्या की रात बहुत सावधान रहना चाहिए और भूलकर भी रात के अंधेरे में बाहर निकलने की गलती नहीं करनी चाहिए। लोग जब यह सब बातें बोलते थे तो मुझे यह महज उनका अंधविश्वास लगता था। मुझे भूत प्रेत और उनसे जुड़ी कहानियों पर कभी विश्वास नहीं होता था। लेकिन मेरी जिंदगी की उस एक अमावस्या की रात ने मेरी सोच को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। बात तब की है जब मैं 17 साल का था गर्मियों के दिन थे। हम सब नानी के घर सीता मणि रुकने गए हुए थे जो बिहार में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। मैं मां और मेरा छोटा भाई नितिन और छोटी बहन नीति भी थी। शाम के समय हम सब मिलकर घर के आंगन में खेल रहे थे। तभी मामी अपने हाथ में एक पूजा की थाली लेकर आई उन्होंने घर की चौखट के बाहर जाकर दीवार और दरवाजे पर हल्दी के कुछ टीके लगाए और अपने हाथ पर हल्दी लगाकर दीवार पर उसकी छाप लगा दी। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने मामी से पूछा अरे मामी यह आप क्या कर रही हो। घर के बाहर यह हल्दी के टीके क्यों लगा रही हो तो नानी अपनी लाठी के सहारे चलती हुई आंगन में आई बेटा आज रात अमावस की रात है गांव में आज की रात काली शक्तियां भटकती रहती हैं। इसीलिए घर की सुरक्षा के लिए सब गांव वाले अपने घर के बाहर यह हल्दी के टीके लगाते हैं ताकि किसी भी काली शक्ति का साया घर पर ना पड़े। क्या नानी आप भी दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है और आप अभी भी इन मन गणन बातों पर विश्वास करते हो। शहरों में तो कोई ऐसा कुछ नहीं करता लेकिन फिर भी वहां ऐसा कुछ नहीं होता लेकिन यह गांव है बेटा यहां पर यह सब चीजें बहुत आम है चलो अब तुम अंदर जाओ और सुबह होने तक अब कोई भी घर के बाहर नहीं निकलेगा। मुझे उस समय उन सबकी बातें मन गणन लग रही थी लेकिन मैं बड़े लोगों से बहस भी क्या करता इसलिए चुपचाप अंदर कमरे में चला गया। मामा जी भी उस दिन सूरज ढलते ही घर आ गए गली के बच्चे जहां रात तक गली में खेलते रहते थे आज शाम के 7:00 बजे ही वह गली भी एकदम सुनसान हो गई। गांव के लोग भी ना कितने डरपोक होते हैं अमावस्या की रात की फालतू अफवाहों से सब अपने घरों में छिपकर बैठ गए। नहीं समीर भैया यह सब अवफाएं नहीं है गांव के बहुत से लोगों ने अमावस की रात को चुड़ैल प्रेतों और डायनो को गांव में भटकते हुए देखा है। और हमारे घर के सामने वो जो पीपल का पेड़ है सतीश काका ने तो पिछले साल अमावस की रात को उस पेड़ पर चुड़ैल को देख लिया था। उसके बाद उनकी जो हालत खराब हुई पूरे एक महीने में जाकर अपने बिस्तर से उठ पाए थे। अच्छा तब तो अब मैं भी उस चुड़ैल को देखूंगा मैं भी तो देखूं वो चुड़ैल तुम्हारे गांव वालों को ही दिखाई देती है या मुझे भी दिखेगी। आज रात में छत पर सोऊंगा और देखूंगा कि मुझे कोई चुड़ैल दिखती है या नहीं।
वीर मेरे मामा जी का बेटा था। उसने मुझे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन मुझे तो बस सबको झूठा साबित करना था। इसलिए मैंने छत पर सोने की जिद बांध ली देखो भैया मैं नहीं चाहता कि आपको कुछ हो अगर आप मेरी बात नहीं मानोगे तो मैं सबको बता दूंगा फिर कोई आपको छत पर नहीं जाने देगा। वीर की इस बात से मैं समझ गया कि अगर इसके सामने मैं छत पर गया तो कोई मुझे छत पर जाने नहीं देगा।अच्छा ठीक है नहीं जाऊंगा मैं छत पर तू निश्चिंत रह मैंने वीर को ऐसा विश्वास दिलाया और उसके साथ कमरे में जाकर सोने की एक्टिंग करने लगा। उसी कमरे में हमारे साथ मेरा छोटा भाई नितिन भी सोया हुआ था। थोड़ी देर बाद वो दोनों बातें करते करते गहरी नींद में सो गए। मैंने अपना फोन लिया और चुपके से दबे पांव सीढ़ियों से होता हुआ एक चटाई लेकर छत पर चला गया। मैंने छत पर चटाई बिछाई और उस पर लेट गया मेरा चेहरा गली की तरफ था। छत पर जो चार दीवारें बनी हुई थी उसमें बहुत सारे खाने बने हुए थे जैसे अक्सर पहले के घरों में बने होते थे जिससे बाहर का नजारा बिल्कुल साफ दिखाई देता था। रात अमावस्या की थी तो चांद की कोई रोशनी नहीं थी। लेकिन घर के सामने जो पीपल का पेड़ था उसके नीचे बहुत सारे दिए जले हुए थे जिन्हें गली मोहल्ले के लोगों ने ही जलाया था। मैं बहुत देर तक उसी पीपल के पेड़ की तरफ देखता रहा लेकिन मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दिया। तो मैं बोर होकर अपने फोन में गेम खेलने लगा मुझे छत पर आए लगभग एक घंटा बीत गया था। रात के लगभग डेढ़ बज गए थे मुझे हल्की हल्की ठंड लगनी शुरू हुई। तो मैंने सोचा कि नीचे चला जाता हूं मैं चटाई से उठने ही वाला था कि तभी मुझे लगा कि मेरे पीछे से अभी अभी कोई चल कर गया है। मुझे लगा कि शायद नीचे किसी को मेरे छत पर होने का पता चल गया है और शायद मामा जी मुझे बुलाने के लिए छत पर आए हैं। मैं पीछे मुड़ा लेकिन देखा कि छत पर तो कोई है ही नहीं तभी मुझे फिर से लगा कि इस बार फिर से कोई तेजी से चलता हुआ मेरे पीछे से गुजरा है। मैं जैसे ही पीछे मुड़ा तो यहां पर कोई था जो अचानक से कहीं गायब हो गया। मैं हक्का बक्का हो गया और मेरे दिल की धड़कन भी तेज हो गई थी। एक बार तो मैंने सोचा कि मैं नीचे चला जाऊं मेरी वहां से हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन फिर भी मैं हिम्मत करते हुए उठने के लिए मुड़ा तभी मेरी नजर सामने की सीढ़ियों पर पड़ी अंधेरे में कुछ साफ दिखाई तो नहीं दिखा लेकिन मैं जानता हूं कि वहां पर कोई खड़ा था वह कोई परिवार वाला नहीं था। अपने चेहरे पर हाथ रखकर वह अपनी हंसी दबाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी हंसी की एक भयानक आवाज धीमी धीमी मेरे कानों में पड़ रही थी। उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए मैं इस हद तक डर चुका था कि मुझे ऐसा लग रहा था। जैसे मेरी मौत आज मेरे सामने खड़ी है मैंने डर के मारे अपनी आंखें बंद कर ली और धीरे-धीरे मेरे कानों में पड़ रही वह हंसी की आवाज भी शांत हो गई। मुझे लगा कि वो मेरा वहम था इसलिए मैंने हिम्मत करते हुए अपनी आंखें खोली तो एक बेहद भयानक आदमी जिसका चेहरा बहुत ज्यादा डरावना था और उसके शरीर पर सिर्फ एक फटा हुआ कपड़ा लिपटा हुआ था।वह ऐसा लग रहा था मानो किसी ने कब्र से खोदकर किसी के मुर्दे को बाहर निकाला हो। वह बहुत तेजी से मेरी तरफ दौड़ता हुआ आया और मेरे शरीर से आर पार हो गया डर के मारे जो मेरा हाल था वो मैं बया भी नहीं कर सकता। मैं समझ भी नहीं पा रहा था कि मेरे साथ अभी अभी यह क्या हुआ तभी फिर से मुझे अपने पीछे से उसी की हंसी की आवाज सुनाई दी। मैं इतना डर चुका था कि अब फिर से पीछे की तरफ भी देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी कि तभी वह आवाज धीरे-धीरे तेज होने लगी मानो वो बढ़ता हुआ मेरी तरफ ही आ रहा था। मैंने जरा सी गर्दन घुमाई तो वह बिल्कुल मेरे बगल में बैठा हुआ मुझे ही देख रहा था।मैंने बहुत जोर से चिल्लाने की कोशिश की लेकिन मेरी आवाज मेरे गले में ही दब कर रह गई तभी वो उठा और छत की दीवार की तरह भागता हुआ छत से नीचे कूद गया। इससे पहले कि मैं इस सदमे से उभर पाता तभी मुझे गली की तरफ से पायलों की आवाज सुनाई दी मैंने मुड़कर गली की तरफ देखा। मेरा ध्यान सीधे पीपल के पेड़ पर पड़ा मैंने जो उस रात अपनी आंखों से देखा मैं कभी भूल नहीं सकता। पीपल के पेड़ से लटकी हुई एक चुड़ैल मेरी और देख रही थी। वह मेरी ओर देखकर बहुत ही भयानक तरीके से हंसी तभी मैंने देखा कि पड़ोस में रहने वाले मेरे मामा जी के दोस्त सतबीर सिंह अपनी साइकिल पर आ रहे थे। शायद वो कहीं काम से गए थे और काम से लौटने में उन्हें बहुत देर हो थी। वह अपने घर की तरफ बढ़ रहे थे लेकिन बहुत घबराए हुए थे तभी व साइकिल चलाते हुए उसी पीपल के पेड़ के पास पहुंचे। मैंने देखा कि अब वह चुड़ैल वहां पर नहीं है पर सतबीर मामा जी को वहां पर देखकर मेरी रोह कांप रही थी। मैं जानता था कि वह मामा जी को नुकसान जरूर पहुंचाएगी। मैंने डर के मारे कुछ पलों के लिए अपनी आंखें झपका ली लेकिन जब दोबारा आंखें खोलकर देखा तो ना तो वहां पर सतबीर मामा जी थे और ना ही वह चुड़ैल पेड़ पर लटकी हुई थी।
मुझे लगा कि अब सब कुछ बिल्कुल शांत हो गया है और सतबीर मामा जी भी अपने घर पहुंच गए हैं। मैं थोड़ा निश्चिंत हो गया लेकिन तभी मुझे गली से एक अजीब सी आवाज सुनाई दी। मैंने चार दीवारी के उन खानों से पीछे गली की तरफ देखा तो वही चुड़ैल अपने हाथ में किसी के मांस का टुकड़ा लिए भाग रही थी।उस मांस के टुकड़े से खून गिरकर नीचे फैल रहा था। उसने मुझे भयानक तरीके से हंसते हुए देखा और मानो तेजी से दौड़ती हुई हमारे घर की तरफ आने लगी। मैं इससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकता था इसलिए डर के मारे मैं वहीं बेहोश हो गया। तभी थोड़ी देर बाद मेरे कानों में किसी की आवाज पड़ी वो आवाज मेरी छोटी बहन नीति की थी। उसकी आवाज सुनकर मेरी आंख खुल गई मैंने समय देखा तो 3:00 बज रहे थे। मैंने गली की तरफ देखा तो वो चुड़ैल अभी भी पेड़ पर उल्टी लटकी हुई मेरी तरफ देख रही थी। नीति ने मेरी तरफ देखते हुए मुझसे कहा आप पूरी रात छत पर ही सो रहे थे क्या भैया। मुझे तो छत से बहुत अजीब अजीब आवाजें आ रही थी मैं डर कर आपके कमरे में गई तो देखा आप वहां नहीं हो मुझे लगा कि शायद आप छत पर हो। तो मैं ऊपर आ गई अगर किसी को पता चल गया कि आप छत पर हो तो आपको बहुत डांट पड़ेगी जल्दी से नीचे चलो। अब मुझे खुद से ज्यादा नीति की चिंता हो रही थी मैं अपने लिए तो नीचे जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लेकिन नीति को देखकर मेरे अंदर हिम्मत आ गई मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर सीधा नीचे चला गया। नीचे जाकर देखा तो नानी जी अपने कमरे में भगवान के सामने जोत जलाकर पाठ कर रही थी इसी बीच मेरा ध्यान गया कि नीति वहां नहीं है। मैंने नीति को ढूंढा लेकिन वह मुझे नहीं मिली मैं बहुत बुरी तरह डर गया। मैं नीति को देखने के लिए जब अंदर कमरे में गया तो वो तो मां के साथ गहरी नींद में सो रही थी तो जो मुझे ऊपर बुलाने आई वह कौन थी। इससे पहले कि मैं कुछ और सोच समझ पाता नानी आई और मेरे माथे पर तिलक लगा दिया और बड़े ही चिंता भरे भाव से उन्होंने कहा। आज कुछ तो अनहोनी हुई है वरना इतनी रात गए मेरा मन इतना बेचैन नहीं होता। यह समय पूजा पाठ करने का नहीं है कोई हम पर वार करना चाहता है किसी बुरी शक्ति का आभास हो रहा था मुझे। इसीलिए देवी मां की आरती की लेकिन तू इस समय यहां पर क्या कर रहा है। जा जाकर अपने कमरे में सो जा नानी की बातें सुनकर मुझे कुछ कुछ बात समझ में आ गई थी कि जो मुझे ऊपर बुलाने आई। वह कोई और नहीं शायद खुद देवी मां थी। जिन्होंने उस रात मेरी रक्षा की मैं सीधे नानी के कमरे में गया और देवी मां के सामने जल रही ज्योति के सामने अपना सर झुकाया। मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे आज शायद मेरी जिंदगी की आखिरी रात थी लेकिन भगवान ने मुझे बचा लिया। मैं बहुत डरा हुआ था मैं सीधे अपने कमरे में गया और अपने छोटे भाई नितिन से लिपट कर सो गया। अगले दिन सुबह जब मेरी आंख खुली तो पड़ोस से लोगों के रोने की आवाज आ रही थी। तब मुझे पता चला कि कल रात सतबीर मामा जी चल बसे और उनका पार्थिव शरीर उसी पीपल के पेड़ से लटका हुआ मिला। यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मुझे पूरा यकीन हो गया कि कल रात मैंने जो देखा वह कोई मेरा भ्रम नहीं था। उस रात के बाद मुझे यकीन हो गया कि भूत प्रेत सच में होते हैं और इन शक्तियों पर संदेह करने की गलती हमें कभी भी नहीं करनी चाहिए। मैं उस रात के बाद फिर कभी अमावस्या के समय अपनी नानी जी के गांव नहीं गया। लेकिन अभी भी जब भी कभी मैं वहां पर जाता हूं तो वही अमावस्या की रात मेरी आंखों के सामने घूमने लगती है। आज भी गांव में अमावस्या की रात को काली शक्तियां भटकती हैं और जो उनकी चपेट में आ जाता है वह उन्हें हमेशा के लिए अपने साथ ही लेकर चली जाती है।