हिंदी अध्यापिका
हिमालय से ऊँचा है साहस इनका,
आंधियों से टकरा जाते हैं समझ तिनका,
पराक्रम ऐसा दुनिया जिसके गुण गाए,
प्रकृति का कण- कण श्रद्धा से झुक जाए,
तेरा व्यक्तित्व ही महान है,
देश पर मर मिटने वाला सैनिक,
तुझे कोटि कोटि प्रणाम है।
जो लौटकर न आऊँ,
तो आँसू न बहाना,
मैं तो झोंका हूं पवन का,
मेरा हर स्पर्श पहचान जाना,
देश का परचम लहराऊँ,
बस ये दुआ दे जाना,
मोह ममता सब कुछ भुला आया है,
अपनी नन्हीं गुड़िया को जो,
बिलखता छोड़ आया है,
हर धड़कन तेरी इस मिटटी से निभाती है वचन,
भावपूर्ण ह्रदय से करते है तुझको नमन,
तेरे हौसले को हम सबका सलाम हैं,
देश पर मर मिटनेवाला सैनिक
तुझे कोटि कोटि प्रणाम हैं |
कभी सर्द मौसम है,
कभी तपती धूप,
मुल्क की हिफाजत करता,
देशभक्ति का वह रूप,
मृत्यु के आलिंगन पर, कभी न वो घबराता है,
अपनी धरती को गोद समझ माँ की,
तिरंगा जो लहराता है,
खूबसूरत तिरंगा इनके शौर्य के लिए,
कफन बन जाता है,
कुर्बानी देकर भी जो,
जय हिंद के गाने गाता है,
पूजित हैं वे लोग, जिनकी ये संतान हैं,
आज इनसे ही हम सबका हिंदोस्तान है,
देश पर मर मिटने वाला सैनिक तुझे कोटि-कोटि प्रणाम है |
Anamika Singh
Science Educator