सात भाईयो और एक बहन के अलावे भी गीत भाव , श्रुति ,स्मृति लेखन और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण हेतु प्रस्तावित दृष्टिकोण
— संतोष कुमार द्वारा प्रस्तुत विचार
1. उद्देश्य
हमारा मूल उद्देश्य यह है कि जो भी बातें या गीत भाव , श्रुतियाँ , स्मृतियाँ हमारे समाज के बुजुर्गों के पास मौखिक परंपरा के रूप में संरक्षित हैं—चाहे वह देवी-देवताओं से जुड़ी कहानियाँ हों, गीत हों, या सामाजिक परंपराएँ—उन्हें उनकी जुबानी को ही पुस्तक रूप में लिखा जाए और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित भी रखा जाए।
अपने कुल-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना।
आने वाली पीढ़ियों को अपने मूल, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जोड़ना।
सामूहिक स्मृति और पहचान को अक्षुण्ण बनाना।
2. विषय की संवेदनशीलता और विविधता
यह स्पष्ट है कि स्मृतियों और गीतों में क्षेत्रीय अंतर और विविधताएं हैं।
उदाहरण के लिए, बिंदीडीह के श्री बाबा जगजीवन ठाकुर, मोकामा के श्री बाबा परशुराम ठाकुर, कटौना के श्री बाबा लखनसेन और प्राण ठाकुर, खनवा के श्री लक्ष्मी नारायण —इन सभी की चर्चा होती है। नरहट के पहुना ठाकुर और बारात के वरमत ठाकुर की भी चर्चा गीत भाव मे है।
विवाह सम्बंधित प्रतिबंध या विशेष परंपराएँ (जैसे आपस में विवाह न होना) भी किसी ना किसी सामाजिक या ऐतिहासिक रहस्य से जुड़ी हैं, जिसको पुराने लोग जानते है नए लोग नहीं जानते है।
3. विधि और प्रस्तुति का प्रस्ताव
जो जैसा कहे, जैसा गीत भाव में गाए, जैसा पूजा पद्धति में करे—उसे जस का तस रिकॉर्ड किया जाए, न उसमें बहुत टीका-टिप्पणी हो, न ही कोई 'संपादन' जिससे मूल भाव बदल जाए।
बहुत गावों मे ठाकुर की पूजा अलग अलग नाम से है। जिन स्थानों में ऐसी परंपराएं दिखती हैं, जैसे नेया या, मकनपुर, तेरा, बगोदर आदि, वहां की बातें भी इसी स्वरूप में सहेजी जाएं।
4. सहयोग की आवश्यकता
यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता का है।
सभी जो इसमें रुचि रखते हैं, अपने विचार चाहे लिखकर दें या ऑडियो के माध्यम से साझा करें।
संतोष कुमार
यह पुस्तक किस बारे में है? (जैसे – मंदिर का इतिहास, बाबा के सात भाइयों का योगदान, सांस्कृतिक चेतना)
लक्षित पाठक कौन हैं? (युवाओं, भक्तों, शोधकर्ताओं या आम समाज के लोग)
आप अपनी पुस्तक को निम्नलिखित अध्यायों में बाँट सकते हैं:
"कुल वंश, परंपरा और प्राचीन धरोहर की खोज"
भूमिका / लेखकीय निवेदन
श्री लक्ष्मी नारायण (माता का यश परिचय)
श्री लक्ष्मी नारायण के सात भाइयों का (माता का यश परिचय)
आध्यात्मिक महत्व एवं जनविश्वास
मंदिर निर्माण अभियान – एक जन जागरण
सामाजिक नेतृत्व
पीढ़ियों की सोच – युवाओं से संवाद
चुनौतियाँ और सामाजिक समर्थन
भविष्य की दिशा – शिक्षा, सेवा और संस्कृति
परिशिष्ट: चित्र, नक्शे, QR कोड, पत्र आदि
आभार और सहयोगकर्ता सूची
संदर्भ सूची
ऐतिहासिक तथ्य, साक्षात्कार, संस्मरण और सच्ची कहानियाँ जोड़ें।
भाषा सरल, भावनात्मक और प्रेरक रखें।
चित्र, उद्धरण, मानचित्र व सांस्कृतिक विवरण शामिल करें।
आप चाहें तो पुस्तक हिंदी, अंग्रेज़ी या द्विभाषी रूप में लिख सकते हैं।
मंदिर, सातों भाई, निर्माण स्थल, आयोजनों की स्पष्ट और भावपूर्ण तस्वीरें।
QR कोड जोड़ें जिससे लोग वीडियो, वेबसाइट, दान लिंक आदि स्कैन कर सकें।
एक आकर्षक और सांस्कृतिक भावना से ओतप्रोत कवर पृष्ठ बनवाएं।
व्याकरण, तथ्यों और तारीखों की जाँच करें।
किसी अनुभवी संपादक से समीक्षा करवाएं (इसमें मैं भी सहायता कर सकता हूँ)।
B. प्रकाशन:
नलंदा प्रकाशन
प्रस्ताव पत्र (Proposal) के साथ अध्याय नमूने भेजें
भव्य पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित करें
सोशल मीडिया, फेसबुक पेज, व्हाट्सऐप ग्रुप में प्रचार करें
पुस्तक की भौतिक व डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराएं
दान लिंक / QR कोड शामिल करें
विद्यालयों, पुस्तकालयों, मंदिर समितियों में वितरण करें
विषय चयन और सामग्री संग्रह – 1 माह
लेखन कार्य (ड्राफ्ट) – 2-3 माह
संपादन व डिज़ाइन – 1 माह
प्रकाशन और विमोचन – 15 दिन
🙏 वंदे मातरम् 🙏