Hindi-Urdu Geet by Uday Shah
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तुम मुझे भूल ही जाओ यही बेहतर होगा।
वक़्त की चाल से मैं प्यार के क़ाबिल न रहा;
और मजबूरी-ए-हालात से कामिल न रहा;
बेवफ़ाई का ये इल्ज़ाम मेरे सर होगा;
तुम मुझे भूल ही जाओ यही बेहतर होगा।
क्यूं समझती हो कि तुम मुझको भुला सकती नहीं;
दिल से अपने क्यूं मेरी याद मिटा सकती नहीं;
वक़्त के साथ कोई बोझ न दिल पर होगा;
तुम मुझे भूल ही जाओ यही बेहतर होगा।
मेरा क्या है मैं ग़मों का ये ज़हर पी लूंगा;
दिल के ज़र्रों में बसी आहों के लब सी लूंगा;
बाद मुद्दत भी तेरे सजदे में ये सर होगा;
तुम मुझे भूल ही जाओ यही बेहतर होगा।
(छंद/बहर : गाल़गागां लल़गागां लल़गागां लल़गा)
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सेल्फ़ी ले ली, सेल्फ़ी ले ली, मैंने सेल्फ़ी ले ली।
छोटी-छोटी बातों में भी सेल्फ़ी लेती रहती;
फ़ेसबूक पे अपलोड़ करती वोट्सएप भी मैं करती;
देखके सबकी लाइक-कोमेन्ट मैं इतराती फिरती;
सेल्फ़ी ले ली, सेल्फ़ी ले ली, मैंने सेल्फ़ी ले ली।
कुछ लोगों ने प्यार से मुझको लाइक-कोमेन्ट दे दी;
कुछ लोगों ने और वजह से लाइक-कोमेन्ट भेजी;
बाक़ी सबने बिन देखे ही लाइक-कोमेन्ट कर दी;
सेल्फ़ी ले ली, सेल्फ़ी ले ली, मैंने सेल्फ़ी ले ली।
(छंद/बहर : गांगाग़ागा गांगाग़ागा गांगाग़ागा गांगा)
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