अगर आप जी दीक्षा उपदेश का मन बना रहे है तो अभी आप को रुकना है | क्यूंकि दीक्षा उपदेश सिर्फ गुरु ही प्रदान करता है | दूसरे को वह अधिकार ही नहीं है | अन्य किसी से उपदेश लेना व्यर्थ है | और नुकसान होने की संभावना बहुत ज्यादा है | उपदेश सिर्फ गुरुदेव ही देंगे तभी तो हम सफल होंगे | अभी गुरुजी जेल में है | जब वह बाहर आयेंगे तभी ही हमे उनसे उपदेश लेना है और पूर्ण परमात्मा को प्रसन्न करना है | सत्य भक्ति करना है | गुरु से उसकी जाती ना पूछिये | पूछ लीजिए ज्ञान | क्यूंकि ज्ञान ही नारायण है | आप गुरु जी को समझे उनके विचारों को समझे उनके बताये हुए ज्ञान प्रमाणों को अपने पवित्र वेदों से मिलान करिए | गुरू जी के ज्ञान को बहुत ज्यादा समझिए | उसे अपने भीतर उतारिए | ऐसा करने के बाद ही उपदेश का मन बनाए | उसके पहले उपदेश लेना ही कच्चे पन की निशानी है | गुरु पर अपना पूरा विश्वास बनाए | फिर उनके कहीं बातों पर चलने की कोशिश करे |
फिर अभी के लिए आप भक्ति बोध नाम की पुस्तक को तीन समय की संध्या के रूप में नित्य नियम बनाकर पढ़ा करे | जिससे आप का ज्ञान और भक्ति यज्ञ पुरा होगा | जो आप को कहीं सारे लाभ और मन में शांति को बनाए रखे गा | इससे आप परमात्मासे भी सदेव जुड़े रहेंगे |
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