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ऐसे बदली उत्तराखंड की डेमोग्राफी: 11 साल में 12.5% बढ़ी मुस्लिम आबादी, हिन्दू देवी-देवताओं के नाम से कर रहे कारोबार
जब देवभूमि उत्तराखंड का निर्माण किया गया जब 1 से 1.5% मुस्लिम आबादी थी जो आज बढ़कर 14% से 18% हो चुकी है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में राज्य में छिपे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के भी सत्यापन का ऐलान किया था। उन्होंने देवभूमि की डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव पर चिंता जताते हुए हजारों संदिग्धों के चिन्हित किए जाने का दावा किया था।
“पहले उत्तराखंड में मुस्लिमों की कुल आबादी 1.5 से 2% के आस-पास थी। यहाँ के मुस्लिम गढ़वाली बोलते थे और यहीं की संस्कृति को मानते थे। बाद में जब हरिद्वार जिले को उत्तराखंड में शामिल किया गया तब यहाँ की आबादी 5 से 6% हो गई थी। वहीं जब UP में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तबसे वहाँ के हजारों मुस्लिम भाग कर उत्तराखंड में बस गए। इन बसने वालों में कई बड़े मुस्लिम नेता और व्यापारी भी शामिल हैं। अब यहाँ की मुस्लिम आबादी लगभग 14% हो चुकी है। इस आबादी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठी भी शामिल हैं जो नदी के किनारे झुग्गियों को कब्ज़ा करते हुए आगे फैलते जा रहे हैं। उन्होंने तमाम सरकारी दस्तावेज भी बनवा डाले हैं।”
बन चुकी हैं बंगाली कालोनियाँ
स्वामी भारती ने आगे बताया, “देहरादून की विकासनगर में पहली विधानसभा में लगभग 6000 मुस्लिम वोटर थे। आज उसी विधानसभा में लगभग 32 हजार मुस्लिम वोटर हैं।
ये तेजी से बढ़ी संख्या अन्य प्रदेशों से आई है। इसमें UP, बिहार, बंगाल के मुस्लिम भी शामिल हैं। आज हालात ये हैं कि उत्तराखंड के कुछ शहरों में तो बंगाली कालोनियाँ बस चुकी हैं। कम से कम 50 हजार बंगाली मुस्लिम यहाँ बसे हुए हैं। पहाड़ों की हालत भी गंभीर है।
आज उत्तरकाशी में भी लगभग 5 हजार मुस्लिम वोटर हैं जबकि कभी वहाँ 150 वोटर भी नहीं थे। हमने बद्रीनाथ खाली करवाया वरना वहाँ भी मुस्लिम बस गए थे। एक बार तो मुस्लिम समाज ने बद्रीनाथ मंदिर कमेटी से अपने लिए जगह माँग ली थी। फ़िलहाल वहाँ फिर से बसना शुरू हो गए हैं क्योकि हम रोज रखवाली नहीं कर सकते। भाजपा ने कभी मुस्लिम नहीं बसाए। इनके कागजात कॉन्ग्रेस ने तैयार करवाए।”
बता दें कि नवंबर 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था तो मुस्लिमों की आबादी केवल 1.5 फीसदी थी।
वहीं 2011 की जनगणना में यह बढ़कर 13.95% हो गई।
इसके बाद मुस्लिमों की जनसंख्या में वृद्धि को लेकर आधिकारिक आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है आबादी बढ़ने की इस रफ्तार में कमी के कोई संकेत नहीं हैं।
व्यापार में भी हार रहा हिन्दू
स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक उत्तराखंड झटका मीट के कारोबार के लिए ही जाना जाता था। आज यहाँ हलाल मीट का कारोबार फल फूल रहा है।
हर दिन 25 करोड़ रुपए का हलाल मीट देहरादून में ही बिक रहा है। अन्य व्यापार में भी सब्ज़ी, मीट, पंचर, नाई आदि सभी पर मुस्लिम काबिज़ है। हरिद्वार के पास स्थित चिड़ियापुर में लाईन से खाने-पीने की दर्जनों दुकानें हैं।
उन तमाम दुकानों के नाम बद्री केदार, गंगोत्री जैसे हिन्दू देवी देवताओं के नाम पर रखे गए हैं। लेकिन उनमे से मात्र 3 दुकानें हिन्दुओं की हैं। बाकी सभी मुस्लिम समुदाय की।
देहरादून में कई मुस्लिमों की दुकानें नाम बदल कर चल रही हैं। इसके अलावा फर्नीचर, वेल्डिंग, पानी, खनन और बिल्डिंग मैटेरियल के कामों में भी मुस्लिमों का प्रभुत्व हो गया है। आप देवभूमि में अपना घर बिना मुस्लिमों के सहयोग के नहीं बनवा सकते हैं। अब तो ये सोचना पड़ेगा कि मुस्लिमों का प्रभुत्व किस क्षेत्र में नहीं है।
उन्होंने अपने पेज पर रुद्रप्रयाग में फैजाज अहमद द्वारा चलाई जा रही फल की दुकान बद्री केदार ट्रेडर्स को शेयर भी किया है।
स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, “केदारनाथ में 90% घोड़े मुस्लिमों के चलते हैं। जिन हिन्दुओं के इन धंधों पर कब्ज़े जमाए गए वो हिन्दू अब नौकरी कर के बच्चे पाल रहे हैं। हिन्दुओं के हाथ से गए सभी काम थोक पैसे वाले थे जिसमें GST या कोई अन्य टैक्स का झंझट भी नहीं था।”
ऋषिकेश में हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी अमन पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया, “ऋषिकेश में भी कई मुस्लिम कारोबारी नाम बदल कर काम करते हैं। गद्दे बेचने वाला अब्दुल मलिक ऋषिकेश मुख्य मार्किट में मलिक हैंडलूम नाम से काम करता है। इस से पहले जूस की एक दुकान इसी वजह से बंद हुई थी जो मुस्लिम हो कर अपना नाम हिन्दू बताता था।”
हरिद्वार में VHP उठा चुका है नाम बदल कर व्यापार पर आपत्ति
1 अप्रैल 2022 को हरिद्वार में विश्व हिन्दू परिषद ने भी इस मुद्दे पर एक मीटिंग की थी।
इस मीटिंग में हरिद्वार से मुजफ्फरनगर तक ढाबों और होटलों को मुस्लिम मालिकों द्वारा हिन्दू नाम से चलाने पर आपत्ति जताई गई थी।
इस दौरान महालक्ष्मी होटल नाम से ढाबा चला रहे मुस्लिम व्यक्ति दिलशाद के नाम का खुलासा किया गया था। उस होटल में भगवा पट्टिका लगाई गई थी। इसके अलावा कई अन्य स्थानों का खुलासा किया गया था।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी हर हाल में बनाने का एलान
आपको याद ही होगा उतराखंड के विधानसभा चुनाव 2022 में कॉन्ग्रेस के हरीश रावत ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का वादा किया था। इसका व्यापक विरोध हुआ था।
बाद में कॉन्ग्रेस ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया था। हालाँकि। विरोध के बाद भी अप्रैल 2022 में उत्तराखंड के कॉन्ग्रेस कमेटी महासचिव अकील अहमद ने हर हाल में उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की थी।
आपको यह पोस्ट कैसी लगी और इस वर्ग विशेष की बढ़ती जनसंख्या को रोकने का क्या उपाय किया जाना चाहिए।
“कांग्रेस का घटियापन”
अच्छा तो ये होता कि राहुल गांधी पाकिस्तान से पूछते कि तुम्हारे १०० आतंकवादी मारे गये , पर छुटपुट लड़ाई थी , ज़्यादा चोट तो नहीं लगी?
मल्लिकार्जुन खडगे पाकिस्तान से पूछते कि आतंकवादीयो के जनाजे में फ़ौजी अफ़सर मातम मनाने गये थे , उनके ज़्यादा आँसू तो नहीं खर्च हुए।
कांग्रेस के मुम्बई वाले नेता , आसिम मुनीर सें पूछते कि तुमने ८०० ड्रोन भेजे , एक भी निशाने पर नहीं लगा , क्या इसमें ज़्यादा खर्चा नहीं हो गया?
एक बार ये भी पूछ लेते कि तुम्हारे ११ एयर बेस को भारतीय वायु सेना ने बर्बाद कर दिया , तुम्हारे कितने लड़ाकू विमान नष्ट हुए? कितना नुक़सान हुआ?
अच्छा तो ये होता कि ये नेता शहबाज शरीफ से ये पूछते कि जिस जनरल ने सेना का इतना नुक़सान करवाया , करोड़ों रूपए की मिसाइल्स बर्बाद कर दी उसे तुमने फील्ड मार्शल किसके दबाव पर बना दिया? क्या इसके लिये ट्रम्प का फ़ोन आया था?
पाकिस्तान से एक बार ये पूछ लेते कि DGMO ने फ़ोन करके युद्ध क्यों रुकवाया? तुम्हारे परुमाण हथियार , भारत की मिसाइल की हद में तो नहीं आ गये थे?
लेकिन कांग्रेस के नेता हमारी सेना से सवाल पूछ रहे हैं कि तुम्हारे कितने लड़ाकू विमान गिरे? हमारी सेना से पूछ रहे है कि तुमने पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने के लिये लाखों की मिसाइल क्यों चलाई? अब कोई पूछे क्या युद्ध के मैदान में फौज बही-खाता लेकर जाती है? पैसे गिन-२ कर हथियार चलाती है? अगर पाकिस्तान को हराने के लिए, आतंकवाद को समाप्त करने के लिये करोड़ों भी खर्च करने पड़े तो किसी को कोई तकलीफ नहीं होगी ।
जब कांग्रेस का शासन था तब भारत में कही भी बम धमाके हो जाते थे, बेगुनाह लोग यूँही आतकवादीयो द्वारा मार दिये जाते थे। जगह-२ पर चेतावनी लिखी होती थी कि किसी भी छूटी वस्तु को न छुए क्योंकि उसमे बम हो सकता है।
Author - Prashask Samiti
March 21, 20251 minute read
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जब तक किसान मोदी के खिलाफ थे मर जा मोदी मर जा मोदी के नारे लगाते थे तब तक वह विपक्ष के लिए अन्नदाता थे और जो जब उन्होंने विपक्ष की सरकार से एमएसपी मांग किया क्योंकि विपक्ष की सरकारों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में लिखित में वायदा किया था, और जब उन्होंने विपक्ष शासित राज्यों के हाईवे ब्लॉक कर दिए और जब विपक्ष की सरकार को समझ में आ गया यह तो हमारी आर्थिक विकास में बाधा बन रहा है
तब विपक्ष की सरकार उनके ऊपर जेसीबी बुलडोजर लाठी लेकर टूट पड़ी और अब जो किसान कभी उनके लिए अन्नदाता थे अब उनके लिए वह आतंकवादी बन गए। लेकिन जो द&ले अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा,रवीश कुमार,साक्षी जोशी, ध्रुव राठी, राजदीप सरदेसाई दिल्ली में किसान आंदोलन को सपोर्ट करते थे वहां जा जाकर वीडियो बनाते थे, आज सभी दल्ले दूम दबाकर बैठ गए क्योंकि आम आदमी पार्टी ने उनके आगे मांस वाली बोटी फेंक दिया है वह उसे चबाने में व्यस्त
आज 'शायद' पंजाब की आम आदमी सरकार की आँखें खुल गई हैं
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नील गर्ग ने चंडीगढ़ में कहा, कि किसान आंदोलन के कारण पंजाब के उद्योग धंधे बर्बाद हो रहे हैं..... और केंद्र सरकार को किसानों ने बात करके इसका हल निकालना चाहिए.
वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि खनोरी और शम्भू बॉर्डर पिछले साल भर से बंद हैं.... जिसके कारण आस पास के इलाकों में व्यापार बर्बाद हो गया है.
बात सही भी है.
पिछले कुछ सालों में हर Quarter में चलने वाले कथित किसान आंदोलनो के कारण पंजाब की Industries को 5 लाख करोड़ रूपए का नुकसान हो चुका है
वहीं प्रदेश से लगभग 1 लाख करोड़ का investment या Business दूसरे प्रदेशों में जा चुका है.... इनमे भी हरियाणा, उत्तरप्रदेश को ज्यादा गया है... क्यूंकि इन प्रदेशों में किसान आंदोलनो का ज्यादा प्रभाव अब नहीं पड़ता.... और पंजाब में किसानों द्वारा बार बार train और सड़क के रास्ते रोकने का भी प्रभाव नहीं पड़ता.
वहीं पंजाब में अब किसान आंदोलन Isolate हो गया है... यह अब पंजाब की सीमा के अंदर ही सीमित है... इसलिए नुकसान उन्हीं का है.
यह वही आम आदमी पार्टी है.. जिसने दिल्ली और उत्तरप्रदेश बॉर्डर पर किसानों के permanent धरना स्थल बनवाये थे... वहाँ एक तरह का छोटा सा शहर बसवा दिया था... उन प्रदर्शन करने वालों को खाना पीना, बिजली और मुफ्त internet तक की सुविधा इन्ही लोगों ने दी थी.... और आज यह मगरमच्छ के आंसू निकाल रहे हैं.
ऐसा अनुमान है कि पहले किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा और उत्तरप्रदेश को कई हजारों करोड़ का नुकसान हुआ था....दिल्ली के कई बॉर्डर बंद थे.. जिस वजह से उनके आस पास के इलाकों के काम धंधे बर्बाद हो गए थे... जो आज तक नहीं उबर पाए हैं
तब इन आपियों को नहीं दिख रहा था नुकसान?? आज खुद पर आई तो दर्द हो रहा है.
किसान आंदोलन का हाल यह है.. कि केंद्र सरकार इनसे बात कर रही है.. फिर भी इन लोगों ने खनोरी और शम्भू बॉर्डर बंद कर रखा है.. और इसमें पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस का पूरा पूरा सहयोग है.
अब इस मामले में पंजाब की आम जनता को ही निर्णय करना होगा..... इस निकम्मी सरकार के कारण उनके काम धंधे बंद हो गए..... उनके बच्चों को नौकरी नहीं मिलेगी.... और अब तो अमेरिका और कनाडा जाना भी आसान नहीं रहा.. ऐसे में इनके बच्चे क्या कमाएंगे और क्या खाएंगे??
ऐसी दोगली सरकार को उखाड़ फेंकना चाहिए.. जैसे दिल्ली वालों ने किया.
समाप्त हुआ 144 साल बाद आयोजित हुआ विशेष, भव्य, दिव्य महाकुंभ!
महाकुंभ में बने कई महारिकॉर्ड...सराह रही दुनिया!
★ महारिकॉर्ड-1 : श्रद्धालु
अमेरिका की आबादी से दोगुने 64 करोड़ लोग महाकुंभ पहुंचे।
★ महारिकॉर्ड-2 : इन्फ्रास्ट्रक्चर
4 हजार हेक्टेयर का महाकुंभ क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम से 160 गुना बड़ा।ाबड़
★ महारिकॉर्ड-3 : कुंभ सिटी
4 लाख से ज्यादा तंबू और 1.5 लाख टॉयलेट बने।
★ महारिकॉर्ड-4 : ट्रांसपोर्टेशन
13,830 ट्रेनों से पहुंचे 30.2 करोड़ श्रद्धालु इस दौरान 2,800 से ज्यादा फ्लाइट्स प्रयागराज पहुंचीं, जिसमें 4.5 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की।
★ महारिकॉर्ड-5 : सिक्योरिटी
50 हजार सुरक्षाकर्मी और 2700 कैमरों से महाकुंभ की सुरक्षा।
★ महारिकॉर्ड-6 : हेल्थ
मेला क्षेत्र में 43 हॉस्पिटल बने 6 लाख लोगों का इलाज किया गया।
★ महारिकॉर्ड-7 : स्वच्छता
4 लाख डस्टबिन लगे, 11 हजार कर्मियों ने सफाई की, हर 25 मीटर पर एक डस्टबिन।
★ महारिकॉर्ड-8 : कारोबार
मेला क्षेत्र में 3 लाख करोड़ के लेन-देन का अनुमान।
कुछ दिनों पहले ही ‘लुधियाना पश्चिम’ से AAP विधायक के घर पर ही उसके सर पर गोली लगने से उसकी मौके पर मौत हो जाती है! यह हत्या है या आत्महत्या पुलिस ने अबतक स्पष्ट नहीं किया है… आम लोगों में चर्चाएं हैं “घोटाले में नाम आ गया था” कोई कह रहा है “किसी का प्रैशर था MLA पर…”
सनद रहे, दिल्ली की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर भी मनु सिंघवी के लिए राज्यसभा सीट खाली करने का दबाव बनाया गया था जब मालीवाल को शीश महल में बुलाकर पीटा गया था।
खैर, पर विधायक के मरने से लुधियाना की एक विधानसभा सीट खाली हो चुकी है। अब उस रिक्त सीट पर पंजाब से अपने राज्यसभा सांसद को विधानसभा उपचुनाव का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है AAP द्वारा, उक्त राज्यसभा सांसद भी लुधियाना से ही हैं। और अब उसके द्वारा छोड़ी सीट पर केजरीवाल खुद राज्यसभा जाएगा।
• स्पष्ट शब्दों में समझाएं तो… विधायक के मरने से विधानसभा सीट खाली हुई… उस सीट के उपचुनाव में राज्यसभा सांसद को प्रत्याशी घोषित करने से राज्यसभा सीट खाली हो गई… और उसके द्वारा छोड़ी राज्यसभा सीट पर केजरीवाल के बैठने का रास्ता साफ हुआ।
🥸
ट्रम्प चाचा ने बोल दिया है कि
बांग्लादेश को भारत पर छोड़ रहा हूँ. इससे इतना तो सिद्ध हुआ कि डेमोक्रेटिक पार्टी भारत के लिये जो मुसीबत खड़ी कर रही थी, रिपब्लिकन पार्टी का स्टैंड वैसा नहीं है.
अब यक्ष प्रश्न भारत के लिये है कि बांग्लादेश का क्या करें ? बांग्लादेश ने जो सैन्य संबंधी कदम उठाये हैं उससे स्पष्ट है कि इनका इरादा भारत को परेशान करने का है. बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हुए हैं , लेकिन ऑन पेपर ये कारण युद्ध के लिये पर्याप्त नहीं है.
*सबसे ज्यादा गौर करने की बात ये है कि यदि भारत ने बांग्लादेश पर आक्रमण किया तो हम एक नंगे को पीट रहे होंगे जिसके पास खोने को कुछ नहीं है. मगर यदि उसने हमारे कोट मे एक छेद भी कर दिया तो हमारा नुकसान हो जाएगा.*
दूसरी बात बांग्लादेश को जीतकर क्या करना है ? एक कठपुतली सरकार ही बना सकते हैं जिसके खिलाफ कभी भी बगावत होंगी. अमेरिका ये काम इराक में कर चुका है और उसके बाद जो हुआ सबको पता है.
*इसलिए ज़ब तक फिनिशिंग लाइन ना दिखे रेस शुरू करने का मतलब नहीं है.*
एक विकल्प है कि युद्ध करके बांग्लादेश को अपने हाल पर छोड़ो, उनके हथियारों को डिसमेंटल करके चिकन्स नेक बड़ा करो. ये प्रैक्टिकल है, लेकिन इसकी पहली माँग है कि बांग्लादेश की धरती कब्ज़ानी होंगी और हम संयुक्त राष्ट्र के जिम्मेदार सदस्य हैं जो वैश्विक सीमाओं का सम्मान करते हैं.
कुछ जमीन पाने के लिये हम उस विदेश नीति से समझौता नहीं कर सकते जो अब जाकर बैलेंस हुई है. लेकिन यदि बांग्लादेश के कुछ इलाके स्वयं विद्रोह कर दें तो बात बन सकती है.
असल मे फेसबुक पर जितने भी विचारक हैं , हम में से किसी के पास इस समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है. इसका समाधान तीन प्रकार के लोग बता सकते हैं,
पहले ... 80-85 वर्ष के हमारे पूर्व सैनिक अफसर जो बांग्लादेश को बाहर के साथ साथ अंदर से भी जानते हैं.
दूसरे ... हमारे एजेंट्स या अज्ञात तत्व जो आज भी ऑपरेट कर रहे हैं और सारे राज जानते हैं.
तीसरे ... विदेश मंत्रालय में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके अधिकारी जिन्हे सारी गोपनीयता पता है. मोदी सरकार के हाथ में सिर्फ हरी झंडी दिखाना है.
तीनों वर्गो को साथ मे बैठना होगा. विभीषण हर देश मे होते है, बांग्लादेश में भी निश्चित होंगे उन्हें जेलों से आजाद करवा के या फिर किसी तरह भारतीय सीमा में लाकर कुछ जानकारी लेनी होंगी.
युद्ध करेंगे तो निर्दोष लोग भी मरेंगे उनका उत्तर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी देना होगा. यदि हमारा राफेल सिर्फ दिल्ली से ढाका की उड़ान ही भरे तो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष खर्चे मिलाकर भी मिलियन डॉलर खर्च होना है. युद्ध लड़ने का खर्चा तो अलग ही है.
*ज़ब बांग्लादेश जलेगा तो भारत के भी कुछ इलाकों में इस्लाम की आँधी उठेगी. उन्हें दबाने के लिये एक अलग पुलिस बल चाहिए. यदि भारत एक लाख सैनिक भेजेगा तो 1000 तो वीरगति भी पाएंगे. उसके बाद चूड़ी तोड़ कार्यक्रम करके हमारे लोग सेना का मनोबल गिराएंगे वो भी काउंटर करना होगा.*
बीच-बीच में अफवाहें फैलेंगी कि सेना का जहाज यहाँ वहाँ फंस गया, किसी सैनिक के साथ बर्बरता हो गयी तो सरकार को दो मोर्चे संभालने होंगे ... एक बॉर्डर पर दूसरा संसद और जनता के बीच.
ये साधारण चुनौतिया हैं , क्योंकि भारतीयों का स्वभाव अमेरिकियों की तरह जुझारु नहीं है. हमारा सैनिक शहीद होता है तो मेटा पर लाइक कमेंट का ट्रेंड चलने लगता है. हमारा सिविक सेन्स इजरायलियों की तरह नहीं है, कि हम समझें कि युद्ध के समय सोशल मीडिया पर क्या डालना है क्या नहीं.
इसलिए हमारे लिये युद्ध हमेशा मुश्किल विकल्प है, हमें दो जगह लड़ना पड़ता है. ऊपर से सरकार भी गठबंधन की है यदि ज्यादा कम हो गया तो सारी मेहनत खड्ढे मे चली जायेगी.
ट्रम्प ने जो मर्जी बोला हो, सरकार ढेर सारे पहलुओं पर विचार करके ही निर्णय लेगी. हो सकता है ... युद्ध के बिना ही एक जंग जीती जा सकती हो, इसलिए सारे हिंदूवादी और दक्षिणपंथियो को चाहिए कि सरकार, सेना, एजेंसी और भारतीय डीप स्टेट पर भरोसा रखें.
पिछले 11 वर्षो में कभी देश का सौदा नहीं हुआ है, यक़ीनन आज भी नहीं होगा लेकिन जल्दबाजी दुनिया भर के शर्मसार समझौते करवाएगी.
गौरवशाली भारतवर्ष
कितने लोग नहाए ? महाकुंभ में गिनती कैसे हो रही है?*
*ये कहा जा रहा है कि महाकुंभ में 45 करोड़ लोग स्नान करेंगे । मकर संक्रांति के दिन ही 3.5 करोड़ लोगों ने स्नान किया था । ये सारे आंकड़े देखकर जिहादियों और कम्युनिस्टों के सीने में काफी जलन हो रही है ।*
*हाल ही में अपने एक कार्यक्रम में रवीश कुमार ने एक सवाल खड़ा किया है कि यूपी सरकार ने ये कह दिया कि 45 करोड़ लोग स्नान करेंगे तो किसी ने इस आंकड़े पर प्रश्न क्यों नहीं खड़ा किया । आखिर कैसे ये मान लिया जाए कि इतने लोग आ रहे हैं । क्या गिनती का कोई तरीका है ।*
*महाकुंभ के वैभव से चिढ़ रहे जिहादी और कम्यूनिस्ट लिबरल भी काफी जल रहे हैं और अपने आस पास मौजूद हिंदुओं से सवाल पूछ रहे हैं कि बताओ गिनती कैसे हो रही है ।*
*तो ऐसे सभी लोगों को और जलाने के लिए ये लेख जरूर भेजें । दरअसल कोई भी आराम से घर बैठे गिनती कर सकता है । मैं बताता हूं कैसे । देखिए 3 हजार स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं और सब फुल हो चुकी हैं टिकट तो मिलना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है । अब एक ट्रेन में 20 डिब्बे होते हैं और हर डिब्बे में औसतन 100 यात्री होते हैं अगर एक ट्रेन एक बार में 2000 लोगों को लेकर आ रही है तो इस हिसाब से 3000 ट्रेनों से हर दिन 60 लाख लोग कुंभ पहुंच रहे हैं ।*
*महाकुंभ की पार्किंग में 5 लाख गाड़ियों को रोके जाने की व्यवस्था है । अगर अगर मान लीजिए न्यूनतम एक गाड़ी में 4 लोग भी बैठें तो भी 20 लाख लोग हर रोज गाड़ियों से आ रहे हैं और ये सबको पता है कि पार्किंग भी फुल है*
*7000 स्पेशल बसें चल रही हैं अगर हर बस में कम से कम 60 लोग मानें तो भी 4 लाख से ज्यादा लोग हर दिन बस से आ रहे हैं और सबसे बड़ी बात कि ये स्पेशल बस और ट्रेनों की बात हो रही है सामान्य ट्रेनों और बसों से भी इतने ही लोग आ रहे हैं ।*
*यानी अगर स्पेशल ट्रेन बसें और गाड़ियां की पार्किंग को ही देख लें तो 60 लाख प्लस 20 लाख प्लस 4 लाख... यानी करीब 85 लाख तो यही हो गए । करीब एक करोड़ का हिसाब तो आप घर बैठे ही लगा सकते हैं ।*
*बाकी योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके कुंभ में आने वाले लोगों की गिनती की व्यवस्था कर ली है ।*
*ड्रोन से कैमरे की फोटो अत्याधुनिक तरीके से बता सकती है कि कितने लोग इतने किलोमीटर में मौजूद है । और दूसरी तरफ रात में थर्मल काउंटिंग होती है यानी ह्यूमन हीट को मापने वाली मशीन लगाकर भी थर्मल तरीके से काउंटिंग हो रही है ।*
*महाकुंभ में स्नान का क्षेत्र पूरे 20 किलोमीटर में फैला हुआ है करीब डेढ़ लाख तो टायलेट ही बनवाए गए हैं । इस बार पानी भी बहुत साफ है । बहुत अच्छी व्यवस्था है पूरी दुनिया इतना बड़ा मेला देखकर दांतों तले अंगुली दबा रही है लेकिन हमारे देश में रवीश कुमार जैसे लोग हिंदू धर्म और कुंभ के खिलाफ नकारात्मक बातें फैलाने में लगे हुए हैं।*
मेरी अब मृत्यु हो चुकी है.
महाकुंभ में 1500 सनातनी ने जीवित ही किया अपना पिंडदान किया बने सन्यासी।
19 महिलाएं भी आज महाकुंभ में सन्यासी बनने की दीक्षा लेंगी।
इन्हें गुरु परंपरा के अनुसार ही दीक्षा दी जाएगी।
इन सभी ने पंच दशनाम जूना अखाड़े से जुड़कर हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच नागा सन्यासी बनने की दीक्षा ली।
जूना अखाड़े के रमता पंच के श्री महंत रामचंद्र गिरि, दूध पुरी, निरंजन भारती और मोहन गिरि की देखरेख में पहले सभी लोगों का मुंडन संस्कार किया गया।
इसके बाद सभी ने 108 बार गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाई।
इसके बाद गंगा पूजन किया औऱ अपना पिंडदान किया।
पिंडदान के बाद सभी ने एक स्वर में खुद को सांसारिक मोह माया से अलग करते हुए सांसारिक तौर पर खुद के मृत होने का ऐलान कर दिया।
🚩 शिव है तो सब है अन्यथा संसार शव ही शव है 🚩
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*कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुला पत्र*
श्री अमित शाह,
सबसे पहले मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ कि आपने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के बारे में भाजपा की वास्तविक राय को खुलकर सामने लाकर आखिरकार सच बोला। संसद में आपके बयान (18-12-2024) ने हमें चौंकाया नहीं हम आपकी पार्टी की असली मानसिकता को पहले से ही जानते थे। लेकिन अब,पूरे देश ने भारतीय संविधान के निर्माता के प्रति आपके अनादर को देखा है।उनके संविधान के तहत चलने वाली संसद में खड़े होकर उनकी याद को "आदत" कहना आपके अहंकार को दर्शाता है।बधाई हो, श्री शाह,इस बेशर्मी भरे कृत्य के लिए!
यह कहकर देश को गुमराह करने की कोशिश न करें कि, "बाबासाहेब के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है,और मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।" हम भोले नहीं हैं। अपने शब्दों को स्वीकार करें और देश का सामना करें।
हमारे लिए अंबेडकर कोई "फैशन" नहीं बल्कि एक शाश्वत प्रेरणा हैं।जब तक हम सांस लेंगे, जब तक इस धरती पर सूर्य और चंद्रमा चमकते रहेंगे,अंबेडकर की विरासत कायम रहेगी। आप जितना उनकी यादों को मिटाने की कोशिश करेंगे, उतनी ही वे हमें आगे ले जाने के लिए मजबूत होंगी।भले ही आपके चाटुकार आपके अहंकार पर ताली बजा रहे हों,लेकिन याद रखें *इस देश में लाखों लोग,जिन्होंने बाबा साहब की वजह से समानता और सम्मान प्राप्त किया है, वे आपकी निंदा कर रहे हैं*।
अगर डॉ.अंबेडकर का जन्म नहीं हुआ होता,*तो मुझे आज मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिलता- मैं अपने गांव में मवेशी चरा रहा होता हमारे वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जी AICC का नेतृत्व करने के लिए नहीं उठे होते* वे कलबुर्गी में किसी फैक्ट्री में काम कर रहे होते।हम अपनी प्रगति और सम्मान के हर कदम के लिए बाबा साहब और उनके द्वारा दिए गए संविधान के ऋणी हैं।
सिर्फ मैं ही नहीं-अंबेडकर के योगदान के बिना,*आप भी आज गृह मंत्री नहीं होते। इसके बजाय,आप अपने गृहनगर में कबाड़ का कारोबार कर रहे होते आपके सहयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी रेलवे स्टेशन पर चाय बेच रहे होते* बाबा साहब के विजन ने ही हम सभी को ऊपर उठाया है।यहां तक कि प्रधानमंत्री भी इसे स्वीकार कर सकते हैं,और आपको भी ऐसा करना चाहिए।
इतिहास जानने वालों के लिए अंबेडकर के प्रति आपकी नफरत कोई नई बात नहीं है,*आपके वैचारिक माता-पिता,आरएसएस ने बाबासाहेब द्वारा उनके जीवनकाल में लिखे गए संविधान को क्यों खारिज कर दिया*? ऐतिहासिक अभिलेखों में हेडगेवार, गोलवलकर और सावरकर जैसे आरएसएस नेताओं के संविधान के खिलाफ बयान दर्ज हैं।आप इन सच्चाइयों को दबाने की कोशिश कर सकते हैं,लेकिन उन्हें मिटाया नहीं जा सकता,संसद में आपकी टिप्पणी उस लंबे समय से चली आ रही आरएसएस विचारधारा का ही विस्तार है।
मुझे आपके लहजे में जवाब देने दें।आपकी पार्टी और उसके वैचारिक परिवार ने अब "मोदी...मोदी...मोदी" जपने का फैशन विकसित कर लिया है।अगर आप मोदी का नाम जितनी बार जपते हैं, उतनी बार भगवान का नाम भी लेते,तो शायद आपको सात जन्मों के लिए नहीं, बल्कि सौ जन्मों के लिए स्वर्ग में जगह मिल जाती,शायद सत्ता से चिपके रहने के लिए किए गए आपके पाप भी माफ़ हो जाते....।
सादर,
*सिद्धारमैया*
मुख्यमंत्री,कर्नाटकदक्षिण हमेशा उत्तर से बेहतर क्यों है इसके लिए पढ़े..👇
*कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुला पत्र*
श्री अमित शाह,
सबसे पहले मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ कि आपने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के बारे में भाजपा की वास्तविक राय को खुलकर सामने लाकर आखिरकार सच बोला। संसद में आपके बयान (18-12-2024) ने हमें चौंकाया नहीं हम आपकी पार्टी की असली मानसिकता को पहले से ही जानते थे। लेकिन अब,पूरे देश ने भारतीय संविधान के निर्माता के प्रति आपके अनादर को देखा है।उनके संविधान के तहत चलने वाली संसद में खड़े होकर उनकी याद को "आदत" कहना आपके अहंकार को दर्शाता है।बधाई हो, श्री शाह,इस बेशर्मी भरे कृत्य के लिए!
यह कहकर देश को गुमराह करने की कोशिश न करें कि, "बाबासाहेब के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है,और मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।" हम भोले नहीं हैं। अपने शब्दों को स्वीकार करें और देश का सामना करें।
हमारे लिए अंबेडकर कोई "फैशन" नहीं बल्कि एक शाश्वत प्रेरणा हैं।जब तक हम सांस लेंगे, जब तक इस धरती पर सूर्य और चंद्रमा चमकते रहेंगे,अंबेडकर की विरासत कायम रहेगी। आप जितना उनकी यादों को मिटाने की कोशिश करेंगे, उतनी ही वे हमें आगे ले जाने के लिए मजबूत होंगी।भले ही आपके चाटुकार आपके अहंकार पर ताली बजा रहे हों,लेकिन याद रखें *इस देश में लाखों लोग,जिन्होंने बाबा साहब की वजह से समानता और सम्मान प्राप्त किया है, वे आपकी निंदा कर रहे हैं*।
अगर डॉ.अंबेडकर का जन्म नहीं हुआ होता,*तो मुझे आज मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिलता- मैं अपने गांव में मवेशी चरा रहा होता हमारे वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जी AICC का नेतृत्व करने के लिए नहीं उठे होते* वे कलबुर्गी में किसी फैक्ट्री में काम कर रहे होते।हम अपनी प्रगति और सम्मान के हर कदम के लिए बाबा साहब और उनके द्वारा दिए गए संविधान के ऋणी हैं।
सिर्फ मैं ही नहीं-अंबेडकर के योगदान के बिना,*आप भी आज गृह मंत्री नहीं होते। इसके बजाय,आप अपने गृहनगर में कबाड़ का कारोबार कर रहे होते आपके सहयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी रेलवे स्टेशन पर चाय बेच रहे होते* बाबा साहब के विजन ने ही हम सभी को ऊपर उठाया है।यहां तक कि प्रधानमंत्री भी इसे स्वीकार कर सकते हैं,और आपको भी ऐसा करना चाहिए।
इतिहास जानने वालों के लिए अंबेडकर के प्रति आपकी नफरत कोई नई बात नहीं है,*आपके वैचारिक माता-पिता,आरएसएस ने बाबासाहेब द्वारा उनके जीवनकाल में लिखे गए संविधान को क्यों खारिज कर दिया*? ऐतिहासिक अभिलेखों में हेडगेवार, गोलवलकर और सावरकर जैसे आरएसएस नेताओं के संविधान के खिलाफ बयान दर्ज हैं।आप इन सच्चाइयों को दबाने की कोशिश कर सकते हैं,लेकिन उन्हें मिटाया नहीं जा सकता,संसद में आपकी टिप्पणी उस लंबे समय से चली आ रही आरएसएस विचारधारा का ही विस्तार है।
मुझे आपके लहजे में जवाब देने दें।आपकी पार्टी और उसके वैचारिक परिवार ने अब "मोदी...मोदी...मोदी" जपने का फैशन विकसित कर लिया है।अगर आप मोदी का नाम जितनी बार जपते हैं, उतनी बार भगवान का नाम भी लेते,तो शायद आपको सात जन्मों के लिए नहीं, बल्कि सौ जन्मों के लिए स्वर्ग में जगह मिल जाती,शायद सत्ता से चिपके रहने के लिए किए गए आपके पाप भी माफ़ हो जाते....।
सादर,
*सिद्धारमैया*
मुख्यमंत्री,कर्नाटक
कांग्रेस के बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कथित प्रेम की असलियत जानने के लिए आप इंडिया टीवी की यह रिपोर्ट देख सकते हैं।
यरिपोर्ट 2013 और फिर जनवरी 2014 में दो बार नागपुर के चिंचोली में स्थित बाबा साहेब अंबेडकर संग्रहालय से की गई थी।
इस संग्रहालय में माई साहेब, यानी बाबा साहेब की धर्मपत्नी सविता अंबेडकर द्वारा दी गईं 400 बहुमूल्य निशानियां जर्जर हालत में पड़ी थीं। वहां की स्थिति देख कोई भी दंग रह जाता। बाबा साहेब का वह कोट, जिसे आपने उनकी अधिकतर तस्वीरों में देखा होगा, दीमकों के हमले से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। उनकी टाई, वेस्टकोट, कमीज, पैंट और शेरवानी सभी कटे-फटे और चिथड़ों की हालत में थे। माई साहेब और बाबा साहेब की तस्वीरें भी पूरी तरह खराब हो चुकी थीं।
जिस टाइपराइटर से उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया था, वह धूल खा रहा था। माई साहेब की इच्छा के अनुसार, बाबा साहेब के पीए नानक चंद रत्तू ने इस म्यूजियम की स्थापना की थी।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस बदहाल स्थिति की जानकारी कांग्रेस की तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार, दोनों को थी। बावजूद इसके, किसी ने कुछ नहीं किया। नेशनल म्यूजियम, जो केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आता था, हर सरकारी चिट्ठी में इस दुर्दशा का उल्लेख करता रहा और मरम्मत के लिए मदद मांगता रहा। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
उनकी चिट्ठियों में स्पष्ट लिखा गया था कि संग्रहालय में रखी गईं निशानियां दीमक, कीड़े-मकोड़ों और फफूंदी से नष्ट हो रही हैं और उन्हें तत्काल केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। यहां तक कि संग्रहालय ने सिर्फ एक एसी की मांग की थी ताकि तापमान को नियंत्रित रखा जा सके, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसी बीच, केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने भी एक चिट्ठी लिखकर चिंता जताई थी कि इन बहुमूल्य वस्तुओं को संरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन यह चिंता केवल कागजों तक सीमित रही।
हालात तब और बदतर हो गए जब 2 जनवरी 2014 को पुरातत्व विभाग की औरंगाबाद शाखा ने संग्रहालय के संचालकों को चिट्ठी लिखकर 6,73,165 रुपये जमा करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि के भुगतान के बाद ही इन वस्तुओं को बचाने का कोई प्रयास किया जाएगा।
इस मुद्दे पर नागपुर के तत्कालीन कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने दोष महाराष्ट्र सरकार पर मढ़ा, लेकिन यह भूल गए कि उस समय महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। उनका बयान भी इस रिपोर्ट में दर्ज है।
इस रिपोर्ट के बाद हंगामा मच गया। आखिरकार, छह महीने बाद पैसा रिलीज हुआ और संग्रहालय की मरम्मत शुरू हो सकी।
यह है बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस की असलियत।कांग्रेस के बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कथित प्रेम की असलियत जानने के लिए आप इंडिया टीवी की यह रिपोर्ट देख सकते हैं।
यह रिपोर्ट 2013 और फिर जनवरी 2014 में दो बार नागपुर के चिंचोली में स्थित बाबा साहेब अंबेडकर संग्रहालय से की गई थी।
इस संग्रहालय में माई साहेब, यानी बाबा साहेब की धर्मपत्नी सविता अंबेडकर द्वारा दी गईं 400 बहुमूल्य निशानियां जर्जर हालत में पड़ी थीं। वहां की स्थिति देख कोई भी दंग रह जाता। बाबा साहेब का वह कोट, जिसे आपने उनकी अधिकतर तस्वीरों में देखा होगा, दीमकों के हमले से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। उनकी टाई, वेस्टकोट, कमीज, पैंट और शेरवानी सभी कटे-फटे और चिथड़ों की हालत में थे। माई साहेब और बाबा साहेब की तस्वीरें भी पूरी तरह खराब हो चुकी थीं।
जिस टाइपराइटर से उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया था, वह धूल खा रहा था। माई साहेब की इच्छा के अनुसार, बाबा साहेब के पीए नानक चंद रत्तू ने इस म्यूजियम की स्थापना की थी।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस बदहाल स्थिति की जानकारी कांग्रेस की तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार, दोनों को थी। बावजूद इसके, किसी ने कुछ नहीं किया। नेशनल म्यूजियम, जो केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आता था, हर सरकारी चिट्ठी में इस दुर्दशा का उल्लेख करता रहा और मरम्मत के लिए मदद मांगता रहा। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
उनकी चिट्ठियों में स्पष्ट लिखा गया था कि संग्रहालय में रखी गईं निशानियां दीमक, कीड़े-मकोड़ों और फफूंदी से नष्ट हो रही हैं और उन्हें तत्काल केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। यहां तक कि संग्रहालय ने सिर्फ एक एसी की मांग की थी ताकि तापमान को नियंत्रित रखा जा सके, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसी बीच, केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने भी एक चिट्ठी लिखकर चिंता जताई थी कि इन बहुमूल्य वस्तुओं को संरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन यह चिंता केवल कागजों तक सीमित रही।
हालात तब और बदतर हो गए जब 2 जनवरी 2014 को पुरातत्व विभाग की औरंगाबाद शाखा ने संग्रहालय के संचालकों को चिट्ठी लिखकर 6,73,165 रुपये जमा करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि के भुगतान के बाद ही इन वस्तुओं को बचाने का कोई प्रयास किया जाएगा।
इस मुद्दे पर नागपुर के तत्कालीन कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने दोष महाराष्ट्र सरकार पर मढ़ा, लेकिन यह भूल गए कि उस समय महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। उनका बयान भी इस रिपोर्ट में दर्ज है।
इस रिपोर्ट के बाद हंगामा मच गया। आखिरकार, छह महीने बाद पैसा रिलीज हुआ और संग्रहालय की मरम्मत शुरू हो सकी।
यह है बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस की असलियत।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ऊपर बने बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हुए हिंदू नरसंहार और बलात्कार की सच्ची घटनाओं पर लिखी तस्लीमा नसरीन जी की पुस्तक *लज्जा* पर भी फिल्म बननी चाहिए जिससे सत्य सारे विश्व के सामने आए।
लज्जा , 6 दिसंबर 1992 को भारत में श्रीराम मंदिर के ऊपर बने बाबरी ढांचे के विध्वंस के तुरंत बाद बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भड़के हिंदू विरोधी दंगों पर तस्लीमा नसरीन की प्रतिक्रिया है। पुस्तक सूक्ष्म रूप से संकेत देती है कि सांप्रदायिक भावनाएं बढ़ रही थीं, बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे थे, और धर्मनिरपेक्षता छाया में थी।
पुस्तक में एक बहुत ही हृदय विदारक सत्य घटना का वर्णन भी है जिसमें एक मां अपनी बेटी के बलात्कारी इस्लामिक राक्षसों के सामने गिड़गिड़ा रही है कि यह बच्ची है एक एक करके बलात्कार करो अन्यथा यह मर जाएगी।
आज भी बांग्लादेश की अभागी हिन्दू माताओं, बहनों, बेटियों के साथ यही हो रहा है और संपूर्ण विश्व गूंगा, बहरा हो गया है।
विश्व की छोड़ो फिलिस्तीन के लिए आंसू बनाने वाले नेता और बॉलीवुड बेशर्मी की चादर ओढ़ कर सो रहे हैं।श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ऊपर बने बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हुए हिंदू नरसंहार और बलात्कार की सच्ची घटनाओं पर लिखी तस्लीमा नसरीन जी की पुस्तक *लज्जा* पर भी फिल्म बननी चाहिए जिससे सत्य सारे विश्व के सामने आए।
लज्जा , 6 दिसंबर 1992 को भारत में श्रीराम मंदिर के ऊपर बने बाबरी ढांचे के विध्वंस के तुरंत बाद बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भड़के हिंदू विरोधी दंगों पर तस्लीमा नसरीन की प्रतिक्रिया है। पुस्तक सूक्ष्म रूप से संकेत देती है कि सांप्रदायिक भावनाएं बढ़ रही थीं, बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे थे, और धर्मनिरपेक्षता छाया में थी।
पुस्तक में एक बहुत ही हृदय विदारक सत्य घटना का वर्णन भी है जिसमें एक मां अपनी बेटी के बलात्कारी इस्लामिक राक्षसों के सामने गिड़गिड़ा रही है कि यह बच्ची है एक एक करके बलात्कार करो अन्यथा यह मर जाएगी।
आज भी बांग्लादेश की अभागी हिन्दू माताओं, बहनों, बेटियों के साथ यही हो रहा है और संपूर्ण विश्व गूंगा, बहरा हो गया है।
विश्व की छोड़ो फिलिस्तीन के लिए आंसू बनाने वाले नेता और बॉलीवुड बेशर्मी की चादर ओढ़ कर सो रहे हैं।
"‘काफिरों! तुम्हारा अंत अब ज्यादा दूर नहीं…’:
जरा याद उन हिंदुओं को भी कर लो जिनका कत्लेआम डायरेक्ट एक्शन डे के नाम ।।
16 अगस्त 1946 को भारत ने मजहबी कट्टरपंथ का वह रूप देखा जो दशकों तक याद रखा जाने वाला था। मुस्लिम लीग के नेता और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने इस दिन घोषणा की थी ‘डायरेक्ट एक्शन डे (Direct Action Day)’ की, जिसके बाद लाखों की संख्या में मुस्लिम, कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के अंदर इकठ्ठा हुए थे और महज कुछ घंटों के भीतर हजारों हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं का किया गया यह नरसंहार इतना क्रूर था कि कभी यह पता ही नहीं चल पाया कि उस ‘द ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ के दौरान मरने वाले हिन्दुओं की संख्या कितनी थी।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर गौर से नजर रखने वाले अमेरिकी पत्रकार फिलिप टैलबॉट ने इंस्टीट्यूट ऑफ करंट वर्ल्ड अफेयर्स को भेजे गए अपने खत में डायरेक्ट एक्शन डे के बाद हुई मौतों के बारे में लिखा था,
“प्रांतीय सरकार ने मरने वालों का आँकड़ा 750 बताया जबकि सैन्य आँकड़ा 7,000 से 10,000 मौतों का है। 3,500 लाशों को तो इकट्ठा किया जा चुका है लेकिन कोई नहीं जानता कि हुगली में कितने लोगों को फेंका गया, कितने लोग शहर के बंद पड़े नालों में घुट कर मर गए। 1200 के लगभग हुई भीषण आगजनी की घटनाओं में कितने लोग जला दिए गए और कितने लोगों का उनके रिश्तेदारों ने चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया। एक सामान्य अंदाजा लगाया जाए तो मरने वालों की संख्या 4000 से अधिक और घायल होने वाले लोग लगभग 11000 थे।”
हालाँकि जिस तरीके से मुस्लिम भीड़ ने कलकत्ता और उसके आसपास के इलाकों में दंगे को अंजाम दिया था उससे यह नहीं लगता कि मरने वाले हिन्दुओं की संख्या इतनी कम रही होगी। इसके अलावा हिन्दुओं की लाशों को नदी में भी बड़ी संख्या में फेंक दिया गया था। इसलिए मौतों का सही आँकड़ा क्या था, यह कहना बहुत मुश्किल है। जुगल चंद्र घोष नाम के एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि उसने 4 ट्रक देखे थे जिसमें 3 फुट की ऊँचाई तक लाशें भरी हुई थीं और इन लाशों से खून और विभिन्न अंग बाहर आ रहे थे। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि 17 अगस्त जो कि डायरेक्ट एक्शन डे का सबसे खतरनाक दिन माना जाता है, उस दिन कलकत्ता की सड़कों पर चारों ओर सिर्फ, ‘अल्लाह-हु-अकबर’, ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘लड़ के लेंगे पाकिस्तान’ और ‘कायदे आजम जिंदाबाद’ ही सुनाई दे रहा था।
हर बार की तरह इस बार भी हिन्दुओं की मौतों का आँकड़ा बस इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गया। उसके बाद के हालात कुछ ऐसे थे कि अधिकांश हिन्दू कलकत्ता लौट ही नहीं पाए और जो लौटे उनका कुछ बचा ही नहीं था। लेकिन आँकड़ों से भी महत्वपूर्ण है वह विचारधारा जिसके कारण ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दौरान बंगाल में हिन्दुओं का कत्लेआम किया गया। यह वही विचारधारा है जिसके कारण दिल्ली के दंगों में हिन्दुओं की हत्याएँ हुई और गुजरात के गोधरा में ट्रेन से लौट रहे रामभक्तों को जिंदा जला दिया गया था।
तथागत रॉय की किताब ‘My People, Uprooted: A Saga of the Hindus of Eastern Bengal’ में बताया गया है कि किस तरह मुस्लिमों ने एक प्लान के तहत हिन्दू विरोधी दंगों की तैयारियाँ की और अंततः 16 अगस्त 1946 को उन तैयारियों को नरसंहार के रूप में अंजाम दिया। कलकत्ता के मेयर और कलकत्ता मुस्लिम लीग के सचिव एसएन उस्मान ने बांग्ला भाषा में लिखे हुए पत्रक बाँटे थे जिनमें लिखा हुआ था, “काफेर! तोदेर धोंगशेर आर देरी नेई। सार्बिक होत्याकांडो घोतबे”, जिसका मतलब था, “काफिरों! तुम्हारा अंत अब ज्यादा दूर नहीं है। अब हत्याकांड होगा
डायरेक्ट एक्शन डे के रूप में इतिहास से एक सबक मिलता है, (अब इसे सबक ही कहा जाना चाहिए लेकिन लिबरल और वामपंथी इसे इस्लामोफोबिया कहेंगे) कि जहाँ भी इस्लामिक कट्टरपंथी सत्ता में पहुँच जाते हैं वहाँ रक्तपात होता है और ऐसा रक्तपात कि उसका जिक्र सदियों तक होता रहे। भारत में पूर्व में इस्लामी शासन के दौरान हुआ हिन्दू नरसंहार इसी सबक का एक उदाहरण है। इसके अलावा आधुनिक समय में इराक, सीरिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान भी इस तथ्य को सत्य साबित करते हैं। अफगानिस्तान में जो हो रहा है वह भी इस्लामिक कट्टरपंथ का सीधा उदाहरण है। हमें यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि डायरेक्ट एक्शन डे, एक अलग देश के लिए कम, बल्कि हिन्दू नरसंहार के लिए आतुर मुस्लिम कट्टरपंथियों के मन में सुलग रही मजहबी इच्छा का दिन था।"
"*सरदार पटेल पर जानलेवा हमला*
हमें यह तो किताबों में पढ़ाया गया कि महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी, लेकिन यह कभी नहीं पढ़ाया गया कि 14 मई 1939 को भावनगर में सरदार पटेल के ऊपर जानलेवा हमला और उनकी हत्या की कोशिश किसने की थी और कितने अपराधियों को फांसी और आजीवन कारावास की सजा अदालत ने सुनाई थी।
14 मई और 15 मई 1939 को भावनगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में भावनगर राज्य प्रजा परिषद का पांचवा अधिवेशन होने वाला था। सरदार वल्लभभाई पटेल भावनगर आए और रेलवे स्टेशन से खुली जीप में उनकी भव्य शोभा यात्रा निकली।
सरदार पटेल खुली जीप में बैठकर सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। जब यह यात्रा खार गेट चौक पहुंची तब वहां *नगीना मस्जिद में छुपे हुए 57 शांतिप्रिय लोग तलवार छुरी और भाला लेकर जीप की तरफ दौड़कर आए* । दो नवयुवक बच्चू भाई पटेल और जाधव भाई मोदी की नजर उन पर पड़ी, वे सरदार पटेल को चारों तरफ से पकड़ कर खड़े हो गए और एक ढाल की तरह पूरा जानलेवा हमला खुद पर झेल लिया।
वे सरदार पटेल का सुरक्षा कवच बन गए। हमलावरों ने तलवार के कई वार उन दोनों युवाओं पर किये, जिसमें बच्चू भाई पटेल तो घटनास्थल पर ही वीरगति को प्राप्त हो गए जबकि जाधव भाई मोदी अस्पताल में वीरगति को प्राप्त हुए।
जहां पर वे दोनों वीर नवयुवक वीरगति को प्राप्त हुए थे, वहां पर उनकी मूर्तियां भी लगी हुई हैं।
इस घटना में तब की अंग्रेज सरकार ने बहुत अच्छे तरीके से जांच कराई और एक विशेष कोर्ट बनाई। 57 आरोपी पकड़े गए, जिसमें से *आजाद अली, रुस्तम अली सिपाही को सजा ए मौत यानी फांसी दी गई, और कासम डोसा घांची, लतीफ मियां काजी, मोहम्मद करीम सिपाई, सय्यद हुसैन, चांद गुलाब सिपाई, हाशम सुमरा संधि, लोहार मूसा अब्दुल्ला, अली मियां अहमद मियां सैयद, अली मामद सुलेमान, मोहम्मद सुलेमान कुंभार, अबू बकर अब्दुल्ला, लोहार अहमदिया, मोहम्मद मियां काजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।*
इन्होंने अदालत में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कोलकाता में मुस्लिम लीग के खिलाफ भाषण दिया था। उसी से उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।
अफसोस की बात यह है कि इतिहास की यह घटना नेहरू सरकार ने पटेल जी की मृत्यु के बाद किताबों से हटा ली ताकि भविष्य में यह कोई जान न सके कि सरदार पटेल के ऊपर जानलेवा हमला और उनकी हत्या की साजिश कभी शांतिप्रियों ने रची थी।
Jara sochiye aur thoda samaziye bhi dosto...🙏🙏"
राइट ब्रदर्स दिवस आज
*****
आज से 119 साल पहले 17 दिसंबर 1903 के दिन राइट बंधुओं ऑरविल और विलबर ने उत्तरी कैरोलिना में राइट फ्लायर नामक विमान से सफल उड़ान भरी थी। विमान 120 फीट की ऊंचाई पर 12 सेकेंड तक उड़ा. इस उड़ान ने उनकी वर्षों की मेहनत को वसूल कर दिखाया था। इसके बाद ही आसमान में विमानों का उड़ना संभव हो पाया था। राइट ब्रदर्स का पूरा नाम ऑरविल राइट और विल्बर राइट था। इन्होंने ही दुनिया को विमानन युग आने की राह दिखाई थी।
जानें रोचक कहानी
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दिसंबर 1903 की उस बेहद ठंडी सुबह अमेरिका के राइट बंधुओं ने तय किया कि वे नॉथ कैरोलिना के किल डेविल हिल्स में बारी-बारी से विमान उड़ाएंगे। दोनों भाई- विलबर और ऑरविल राइट सालों से इसकी तैयारी में जुटे थे। आसपास के लोगों और यहां तक कि घरवाले के मजाक उड़ाने के बाद भी वे तैयारियां करते रहे। आखिरकार 17 दिसंबर को विमान उड़ाया गया। ये शुरुआत थी। दोनों भाइयों की इसी जिद ने पूरी दुनिया को हवाई जहाज का तोहफा दिया।
विलबर और ऑरविल तब क्रमशः 11 और 7 साल के थे, जब उनके पिता बच्चों के लिए उड़ने वाला खिलौना लेकर घर आए। कागज, रबर की रिंग्स और बांस से बना ये खिलौना भाइयों को इतना पसंद आया कि वे खुद भी उसकी सवारी करने की सोचने लगे। तभी से दोनों स्कूल से बचे वक्त में लुक-छिपकर हवाई जहाज बनाने की कोशिश करने लगे।
ओहयो की एक साइकिल दुकान में पीछे की ओर बैठकर दोनों भाई विमान के पुर्जे बनाने की कोशिश किया करते। एक के बाद एक कई मॉडल्स बनाए गए। लेकिन कोई भी कामयाब नहीं रहा। उसी दौरान यूरोप और अमेरिका में भी कई सारे समूह हवाई जहाज बनाने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण हर मॉडल फेल हो रहा था।
बार-बार नाकामयाबी मिलने के दौरान विलबर ने अपने एक इंजीनियर दोस्त ऑक्टेव केन्यूट को पत्र लिखा, जिसमें वे कहते हैं- कुछ सालों से मुझे ऐसा लग रहा है कि इंसान भी उड़ सकते हैं। मेरी ये बीमारी हर दिन के साथ बढ़ती जा रही है और मुझे लगता है कि जल्द ही ये मेरी जिंदगी नहीं लेकिन मेरे सारे पैसे ले लेगी। इसके बाद ऑक्टेव से उन्हें मदद भी मिली।
सालों बाद पतंगनुमा एक चीज में 25 हॉर्सपावर का इंजन लगाकर उन्होंने एक मॉडल बनाया जो उड़ता था। इसी के आधार पर प्रयोग को आगे बढ़ाया गया। और आखिरकार उन्हें कामयाबी मिली।
जब हुआ था दुनिया का ‘पहला ह्यूमन हार्ट ट्रांसप्लांट’
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हवाई जहाज में एक ही व्यक्ति के बैठने की क्षमता थी। पहली उड़ान छोटे भाई ऑरविल ने भरी। ये उड़ान महज 12 सेकंड चली और जहाज की धरती से ऊंचाई थी 120 फीट. तीन और बार ये क्रम दोहराया गया। आखिरकार उसी ठंडी शाम को बड़े भाई ने चौथी उड़ान भरी। तब विमान की धरती से 852 फीट ऊपर था और वो एक मिनट तक हवा में रहा। इसी दिन दोनों भाई दुनिया के पहले विमान चालक बन गए।
यूएम आर्मी ने दोनों भाइयों की इस तकनीक में काफी संभावना देखी। उन्होंने भाइयों से संपर्क किया। और उनसे करार किया। साल 1908 में ये करार किया गया जिसके तहत दोनों भाई आर्मी के लिए ये डिजाइन बनाने में जुट गए। आखिरकार 1909 में पहला मिलिट्री फ्लायर सामने आया। उससे बाद से वायुयान बनाने में ढेर सारे बदलाव होते रहे लेकिन मूल सिद्धांत वही रहा जो दशकों प
आज से 119 साल पहले 17 दिसंबर 1903 के दिन राइट बंधुओं ऑरविल और विलबर ने उत्तरी कैरोलिना में राइट फ्लायर नामक विमान से सफल उड़ान भरी थी। विमान 120 फीट की ऊंचाई पर 12 सेकेंड तक उड़ा. इस उड़ान ने उनकी वर्षों की मेहनत को वसूल कर दिखाया था। इसके बाद ही आसमान में विमानों का उड़ना संभव हो पाया था। राइट ब्रदर्स का पूरा नाम ऑरविल राइट और विल्बर राइट था। इन्होंने ही दुनिया को विमानन युग आने की राह दिखाई थी।
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दिसंबर 1903 की उस बेहद ठंडी सुबह अमेरिका के राइट बंधुओं ने तय किया कि वे नॉथ कैरोलिना के किल डेविल हिल्स में बारी-बारी से विमान उड़ाएंगे। दोनों भाई- विलबर और ऑरविल राइट सालों से इसकी तैयारी में जुटे थे। आसपास के लोगों और यहां तक कि घरवाले के मजाक उड़ाने के बाद भी वे तैयारियां करते रहे। आखिरकार 17 दिसंबर को विमान उड़ाया गया। ये शुरुआत थी। दोनों भाइयों की इसी जिद ने पूरी दुनिया को हवाई जहाज का तोहफा दिया।
विलबर और ऑरविल तब क्रमशः 11 और 7 साल के थे, जब उनके पिता बच्चों के लिए उड़ने वाला खिलौना लेकर घर आए। कागज, रबर की रिंग्स और बांस से बना ये खिलौना भाइयों को इतना पसंद आया कि वे खुद भी उसकी सवारी करने की सोचने लगे। तभी से दोनों स्कूल से बचे वक्त में लुक-छिपकर हवाई जहाज बनाने की कोशिश करने लगे।
ओहयो की एक साइकिल दुकान में पीछे की ओर बैठकर दोनों भाई विमान के पुर्जे बनाने की कोशिश किया करते। एक के बाद एक कई मॉडल्स बनाए गए। लेकिन कोई भी कामयाब नहीं रहा। उसी दौरान यूरोप और अमेरिका में भी कई सारे समूह हवाई जहाज बनाने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण हर मॉडल फेल हो रहा था।
बार-बार नाकामयाबी मिलने के दौरान विलबर ने अपने एक इंजीनियर दोस्त ऑक्टेव केन्यूट को पत्र लिखा, जिसमें वे कहते हैं- कुछ सालों से मुझे ऐसा लग रहा है कि इंसान भी उड़ सकते हैं। मेरी ये बीमारी हर दिन के साथ बढ़ती जा रही है और मुझे लगता है कि जल्द ही ये मेरी जिंदगी नहीं लेकिन मेरे सारे पैसे ले लेगी। इसके बाद ऑक्टेव से उन्हें मदद भी मिली।
सालों बाद पतंगनुमा एक चीज में 25 हॉर्सपावर का इंजन लगाकर उन्होंने एक मॉडल बनाया जो उड़ता था। इसी के आधार पर प्रयोग को आगे बढ़ाया गया। और आखिरकार उन्हें कामयाबी मिली।
जब हुआ था दुनिया का ‘पहला ह्यूमन हार्ट ट्रांसप्लांट’
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हवाई जहाज में एक ही व्यक्ति के बैठने की क्षमता थी। पहली उड़ान छोटे भाई ऑरविल ने भरी। ये उड़ान महज 12 सेकंड चली और जहाज की धरती से ऊंचाई थी 120 फीट. तीन और बार ये क्रम दोहराया गया। आखिरकार उसी ठंडी शाम को बड़े भाई ने चौथी उड़ान भरी। तब विमान की धरती से 852 फीट ऊपर था और वो एक मिनट तक हवा में रहा। इसी दिन दोनों भाई दुनिया के पहले विमान चालक बन गए।
यूएम आर्मी ने दोनों भाइयों की इस तकनीक में काफी संभावना देखी। उन्होंने भाइयों से संपर्क किया। और उनसे करार किया। साल 1908 में ये करार किया गया जिसके तहत दोनों भाई आर्मी के लिए ये डिजाइन बनाने में जुट गए। आखिरकार 1909 में पहला मिलिट्री फ्लायर सामने आया। उससे बाद से वायुयान बनाने में ढेर सारे बदलाव होते रहे लेकिन मूल सिद्धांत वही रहा जो दशकों पहले दो भाइयों का था।
मित्रों जिस बात को ये कह रहे है ये पहले सोशल मीडिया पर बहुत बार पढी पर विश्वास इसलिए नहीं किया कि ऐसा थोड़े हो सकता है उसको झूठ माना
लेकिन दोस्तों जो इस बिल के बारे में लिखा गया था वह पूर्ण रूप सत्य था क्योंकि अब तो देश के बड़े पत्रकार राष्ट्रीय टीवी पर कह रहे हैं तो मानना ही पड़ेगा
इतना बड़ा धोखा हिंदुओं के साथ
वास्तव मे वो बिल लागू हो जाता तो अब तक इस बात को कहने के लायक ही नहीं रह
जानिए बिल क्या था
आपकी रूह कांप जायेगी
क्या आप लोग तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा #हिन्दुओं पर थोपे जाने वाले इस 𝐂𝐎𝐌𝐌𝐔𝐍𝐀𝐋 𝐕𝐈𝐎𝐋𝐄𝐍𝐂𝐄 𝐁𝐈𝐋𝐋 के बारे में कुछ जानते हैं !?
क्या आप लोग जानते हैं !? 2011 में भारत में जॉर्ज सोरोस के निर्देश पर कैसे कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और हर्ष मंदर के द्वारा चुनी गई 32 सदस्यीय टीम द्वारा #प्रत्येक हिन्दू को किसी भी दंगे के लिए #डिफ़ॉल्ट रूप से दोषी घोषित करने के लिए एक सांप्रदायिक हिंसा विधेयक तैयार किये गये थे. देखिए इस विडियो को अशोक श्रीवास्तव जी की जुबानी से. इसे सुनकर आप लोगों की रोंगटे खड़े हो जाएंगे...
प्रधानमंत्री जी के आज़ के भाषण के समय और उसके बाद राहुल गांधी के चेहरे का रंग बिल्कुल उतर गया। पप्पू को यह नहीं पता है कि मोदी जी के ऊपर पत्थर फेकोगे तो वह उससे घर बना लेंगे। जिस संविधान के नाम पर इसने लोगों को बेवक़ूफ़ बनाया, अब वहीं संविधान इसके गले पड़ने वाला है। यह पिंड छुड़ाना चाहेगा लेकिन मोदी छोड़ने नहीं देंगे। यह भागता फिरेगा लेकिन इसको घेरकर शिकारा किया जाएगा।
पहले जब यह नेता विपक्ष नहीं होता था तो कम से कम इसे इतनी सुविधा थी कि मोदी जी कुछ कहते थे तो उसके चाटुकार हो हल्ला करके इसकी बेशर्मी को ढक लेते थे। अब इसके पास यह भी मौका नहीं है।
राहुल गांधी यदि पाँच साल से पहले नेता विपक्ष का पद छोड़कर भाग जाये तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा। अड़ानी के जबाब में जॉर्ज सोरोस का मुद्दा जिस प्रखरता से भाजपा ने उठाया है, उससे पूरी कांग्रेस पहले से ही घबराई हुई थी और इधर आज मोदी जी ने संविधान और जुमला दो शब्द पकड़कर इनकी ऐसी हालत की कि आज तो ठीक से हूटिंग भी नहीं कर पाये। हरियाणा, महाराष्ट्र में पटखनी और उधर अमेरिका में सोरोस विरोधी नेताओं का सत्तासीन होना राहुल गांधी के इकट्ठा हुए जोश को तोड़ डाला है। पप्पू को यदि संसद में टिकना है तो जल्द से जल्द नया शब्द पकड़ना होगा वरना प्रत्येक सत्र में इनकी हालत बद से बदतर होनी है!
जॉर्ज सोरोस और डीप स्टेट ने पप्पू की छवि बनाने की कोशिश में अरबों खर्च किए; लेकिन ये एक ही भाषण में टुकड़े-टुकड़े कर देता हैं।
आज जॉर्ज सोरोस भी सोच रहा होगा किस 54 साल के बालक-बुद्धि पर पैसा लगा दिया सब बर्बाद है
राहुल के सोरोस उनके की इटली में "No Entry"
पता नही जॉर्जिया मेलोनी पर क्या जादू हो गया कि यहां भारत में चार दिनों से संसद में जॉर्ज सोरेस पर बहस चल रही है। राहुल गांधी कांग्रेस किसान आंदोलन से लेकर INDI गठबंधन को पूरा फंडिंग जॉर्ज सोरेस कर रहा है..और उधर इटली में
जॉर्जिया मेलोनी जॉर्ज सोरेस पर भड़क गई और कह रही हैं कि वह एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जिससे जॉर्ज सोरेस और उसके NGO को इटली में प्रवेश की इजाजत ही नहीं होगी, और इटली के बैंक खातों में जॉर्ज सोरेस और उसके एनजीओ में जितना पैसा जमा होगा वह इटली सरकार जप्त कर लेगी।राहुल के सोरोस उनके की इटली में "No Entry"
पता नही जॉर्जिया मेलोनी पर क्या जादू हो गया कि यहां भारत में चार दिनों से संसद में जॉर्ज सोरेस पर बहस चल रही है। राहुल गांधी कांग्रेस किसान आंदोलन से लेकर INDI गठबंधन को पूरा फंडिंग जॉर्ज सोरेस कर रहा है..और उधर इटली में
जॉर्जिया मेलोनी जॉर्ज सोरेस पर भड़क गई और कह रही हैं कि वह एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जिससे जॉर्ज सोरेस और उसके NGO को इटली में प्रवेश की इजाजत ही नहीं होगी, और इटली के बैंक खातों में जॉर्ज सोरेस और उसके एनजीओ में जितना पैसा जमा होगा वह इटली सरकार जप्त कर लेग
जय शाह अमित शाह के बेटे हैं.... जय शाह ढंग से बोल नहीं पाते.... क्रिकेट नहीं खेल पाते..... नेता के बेटे हैं वरना कहीं चपडासी ना लगते.
ऐसी बातें हमें अमूमन सुनने को मिलती हैं.... इनमे से कुछ सही भी हैं... कुछ Over Exaggeration भी हैं.
राजनीतिक बहस में पड़ने से बेहतर है हम उनके प्रदर्शन पर बात करें.
जय शाह ने Asian क्रिकेट कौंसिल भी संभाली है... और BCCI भी संभाली है... 1 दिसंबर से वह ICC के President भी बन जायेंगे.
सवाल उठता है कि उन्होंने क्या कोई अच्छा काम किया है??
जब वो BCCI में रहे तब उन्होंने IPL के rights बहुत ऊंची कीमत पर बेचने में बड़ी भूमिका निभाई.. और आज यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी Sports लीग है.
2028 के Olympic में क्रिकेट को जोड़ने का श्रेय उन्हें ही जाता है.
अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम... जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है.... जहाँ 1,32,000 लोग एक साथ बैठ सकते हैं.. उसे बनवाने में जय शाह का बहुत बड़ा रोल रहा है.
अब बात करते हैं खिलाड़ियों की.
जय शाह ने ही महिलाओं के World कप को बड़े स्तर पर शुरू किया और महिलाओं की IPL को शुरू किया... जिसके बाद महिलाओं के खेल में भी पैसा और ग्लैमर आना शुरू हुआ.
उन्होंने ही पुरुष और महिलाओं की सैलरी बराबर कर दी.... 2022 में उन्होंने ही Equal Pay लागू किया और अब महिला क्रिकेटर को पुरुष क्रिकेटर के बराबर ही सैलरी मिलती है.
हाँ Brand Endorsement इससे अलग है... वो क्रिकेटर की brand value के हिसाब से कंपनी देती हैं.... लेकिन अब वहाँ भी महिला क्रिकेटर्स को पहले से बेहतर पैसा मिलने लगा है.
महिला क्रिकेटर को मिलने वाले पैसे में ज़मीन आसमान का अंतर आ गया है अब.... इस वजह से अब ज्यादा महिलाएं क्रिकेट में अपना करियर बनाने के लिए आ रही हैं.
वो जय शाह ही थे जिन्होने हमारे क्रिकेट के Domestic Structure को बेहतर किया है.... रणजी, दिलीप ट्रॉफी और अन्य local प्रतियोगिताओं में खेलने वाले खिलाड़ियों को भी पहले से कहीं ज्यादा पैसा मिलने लगा है.
क्रिकेटिंग Staff, कोच, मेडिकल staff और अन्य लोगों की सैलरी में भी अच्छा खासा बदलाव आया है.
जो खिलाड़ी रिटायर हो जाते हैं.. उनके लिए पैसा और मेडिकल सुविधा शुरू की हैं जय शाह के आने के बाद.
क्रिकेट अपने आप में बहुत बड़ा Ecosystem है.. जिससे लाखों लोग जुड़े हुए हैं... उन सबके जीवन को बेहतर बनाने का काम जय शाह ने किया है.
पिछले ही दिनों भारतीय क्रिकेट अंशुमन गायकवाड को इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी... Bcci ने तुरंत 1 करोड़ भेजा था
यह जय शाह ही थे जिन्होने विदेशी Teams, जैसे अफ़ग़ानिस्तान को भारत में खेलने की सुविधा दी.. क्यूंकि उनके देश में हालात अच्छे नहीं थे.
देश में Test क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए जय शाह ने ही 10Test Cricket Season लागू करवाया.
अब यह सब तो चलो अच्छा है... लेकिन जो सबसे शानदार काम जय शाह ने किया है... वो है पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाना.
एशिया कप पाकिस्तान में होने वाला था... भारत ने जाने से मना कर दिया... पाकिस्तान वाले हल्ला करने लगे.... भारत में होने वाले World कप का बहिष्कार करने की धमकी देने लगे.
लेकिन हुआ क्या?
भारत एशिया कप में खेला.. लेकिन उसके सभी मैच श्रीलंका में हुए... वहीं धमकी देने वाला पाकिस्तान नाक रगड़ कर World कप में खेलने भारत आया.
Champions Trophy की कहानी भी यही होगी.... भारत ने जाने से मना कर दिया है.... पाकिस्तान वाले हल्ला मचा रहे हैं... लेकिन होना वही है जो जय शाह चाहेंगे.... और पाकिस्तान बस शोर मचाता रह जायेगा.
जय शाह की जगह राजीव शुक्ला, शरद पवार या डालमिया होते तो वो पाकिस्तान की शर्तो के आगे झुक जाते.
जय शाह नहीं झुके.. और कांग्रेस इस कारण उनसे सबसे ज्यादा नफ़रत करती है.
मेरे लिए जय शाह का सम्मान करने के लिए यह कारण ही सबसे बड़ा और हाँ आज भी मै क्रिकेट के खिलाफ हु जहां क्रिकेटर ने स्पोर्ट्स को धंधा बना दिया
ऐसी बातें हमें अमूमन सुनने को मिलती हैं.... इनमे से कुछ सही भी हैं... कुछ Over Exaggeration भी हैं.
राजनीतिक बहस में पड़ने से बेहतर है हम उनके प्रदर्शन पर बात करें.
जय शाह ने Asian क्रिकेट कौंसिल भी संभाली है... और BCCI भी संभाली है... 1 दिसंबर से वह ICC के President भी बन जायेंगे.
सवाल उठता है कि उन्होंने क्या कोई अच्छा काम किया है??
जब वो BCCI में रहे तब उन्होंने IPL के rights बहुत ऊंची कीमत पर बेचने में बड़ी भूमिका निभाई.. और आज यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी Sports लीग है.
2028 के Olympic में क्रिकेट को जोड़ने का श्रेय उन्हें ही जाता है.
अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम... जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है.... जहाँ 1,32,000 लोग एक साथ बैठ सकते हैं.. उसे बनवाने में जय शाह का बहुत बड़ा रोल रहा है.
अब बात करते हैं खिलाड़ियों की.
जय शाह ने ही महिलाओं के World कप को बड़े स्तर पर शुरू किया और महिलाओं की IPL को शुरू किया... जिसके बाद महिलाओं के खेल में भी पैसा और ग्लैमर आना शुरू हुआ.
उन्होंने ही पुरुष और महिलाओं की सैलरी बराबर कर दी.... 2022 में उन्होंने ही Equal Pay लागू किया और अब महिला क्रिकेटर को पुरुष क्रिकेटर के बराबर ही सैलरी मिलती है.
हाँ Brand Endorsement इससे अलग है... वो क्रिकेटर की brand value के हिसाब से कंपनी देती हैं.... लेकिन अब वहाँ भी महिला क्रिकेटर्स को पहले से बेहतर पैसा मिलने लगा है.
महिला क्रिकेटर को मिलने वाले पैसे में ज़मीन आसमान का अंतर आ गया है अब.... इस वजह से अब ज्यादा महिलाएं क्रिकेट में अपना करियर बनाने के लिए आ रही हैं.
वो जय शाह ही थे जिन्होने हमारे क्रिकेट के Domestic Structure को बेहतर किया है.... रणजी, दिलीप ट्रॉफी और अन्य local प्रतियोगिताओं में खेलने वाले खिलाड़ियों को भी पहले से कहीं ज्यादा पैसा मिलने लगा है.
क्रिकेटिंग Staff, कोच, मेडिकल staff और अन्य लोगों की सैलरी में भी अच्छा खासा बदलाव आया है.
जो खिलाड़ी रिटायर हो जाते हैं.. उनके लिए पैसा और मेडिकल सुविधा शुरू की हैं जय शाह के आने के बाद.
क्रिकेट अपने आप में बहुत बड़ा Ecosystem है.. जिससे लाखों लोग जुड़े हुए हैं... उन सबके जीवन को बेहतर बनाने का काम जय शाह ने किया है.
पिछले ही दिनों भारतीय क्रिकेट अंशुमन गायकवाड को इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी... Bcci ने तुरंत 1 करोड़ भेजा था
यह जय शाह ही थे जिन्होने विदेशी Teams, जैसे अफ़ग़ानिस्तान को भारत में खेलने की सुविधा दी.. क्यूंकि उनके देश में हालात अच्छे नहीं थे.
देश में Test क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए जय शाह ने ही 10Test Cricket Season लागू करवाया.
अब यह सब तो चलो अच्छा है... लेकिन जो सबसे शानदार काम जय शाह ने किया है... वो है पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाना.
एशिया कप पाकिस्तान में होने वाला था... भारत ने जाने से मना कर दिया... पाकिस्तान वाले हल्ला करने लगे.... भारत में होने वाले World कप का बहिष्कार करने की धमकी देने लगे.
लेकिन हुआ क्या?
भारत एशिया कप में खेला.. लेकिन उसके सभी मैच श्रीलंका में हुए... वहीं धमकी देने वाला पाकिस्तान नाक रगड़ कर World कप में खेलने भारत आया.
Champions Trophy की कहानी भी यही होगी.... भारत ने जाने से मना कर दिया है.... पाकिस्तान वाले हल्ला मचा रहे हैं... लेकिन होना वही है जो जय शाह चाहेंगे.... और पाकिस्तान बस शोर मचाता रह जायेगा.
जय शाह की जगह राजीव शुक्ला, शरद पवार या डालमिया होते तो वो पाकिस्तान की शर्तो के आगे झुक जाते.
जय शाह नहीं झुके.. और कांग्रेस इस कारण उनसे सबसे ज्यादा नफ़रत करती है.
मेरे लिए जय शाह का सम्मान करने के लिए यह कारण ही सबसे बड़ा और हाँ आज भी मै क्रिकेट के खिलाफ हु जहां क्रिकेटर ने स्पोर्ट्स को धंधा बना दिया है.
'EVM से होती है धांधली, केवल मतपत्रों से हों चुनाव', एलन मस्क ने कहा- वोटिंग मशीन पर भरोसा नहीं
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले एलन मस्क ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईवीएम से चुनाव में धांधली होती है। मस्क ने पूरे देश में मतपत्रों से चुनाव कराने और हाथ से मतगणना की अपील की। मस्क ने वोटिंग मशीन बनाने वाली एक कंपनी पर निशाना साधा। हालांकि कंपनी ने मस्क के दावों को तथ्यों से परे बताया।
अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क
एलन मस्क बोले- कंप्यूटर के बारे में बहुत कुछ जानता हूं।
इसे हैक करना बहुत आसान है, इस वजह से भरोसा नहीं।
देशभर में मतपत्रों से वोटिंग और हाथ से हो मतगणना।
एएनआई, पेंसिल्वेनिया। अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल खड़े किए हैं। मस्क कहा कहना है कि वोटिंग मशीनों से चुनाव में धांधली होती है। उन्होंने मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग की। उनका कहना है कि मैं खुद तकनीक से जुड़ा हूं। यही वजह है कि कंप्यूटर प्रोग्राम पर अधिक भरोसा नहीं कर सकता। इसे हैक करना आसान है।
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक उद्यमी एलन मस्क ने पेंसिल्वेनिया के एक टाउन हॉल में वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। मस्क ने अपने संबोधन में डोमिनियन कंपनी की वोटिंग मशीनों को फिलाडेल्फिया और एरिजोना में रिपब्लिकन की हार से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि डोमिनियन वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल फिलाडेल्फिया और मैरिकोपा काउंटी में किया जाता है। मगर बहुत सी अन्य जगहों पर नहीं किया जाता है। क्या यह एक संयोग की तरह नहीं लगता? मस्क ने कहा कि देशभर में मतपत्रों से चुनाव होने चाहिए। मतपत्रों की गिनती भी हाथ से होनी चाहिए।
पहले भी लगे आरोप
एलन मस्क ने जिस डोमिनियन कंपनी की वोटिंग मशीन का उल्लेख किया है, उस पर पिछले साल फॉक्स न्यूज ने वोटों में हेराफेरी का आरोप लगाया था। हालांकि बाद में न्यूज चैनल पर कंपनी ने मानहानि का मुकदमा किया और मामला 787 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर खत्म हुआ।
मस्क के बयान पर कंपनी का जवाब
मस्क के बयान के बाद डोमिनियन के प्रवक्ता ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि डोमिनियन फिलाडेल्फिया काउंटी की सेवा नहीं करती है। हमारी मतदान प्रणाली पहले से ही मतदाता द्वारा सत्यापित कागजी मतपत्रों पर आधारित है। कागजी मतपत्रों की हाथ से गिनती और ऑडिट ने बार-बार साबित किया है कि डोमिनियन मशीनें सटीक परिणाम देती हैं।
विश्वसनीय स्रोतों पर करें भरोसा
डोमिनियन कंपनी ने सत्यापित स्रोतों से आने वाली सूचनाओं पर ही मतदाताओं से भरोसा करने की अपील की। कंपनी ने कहा कि हम 2024 के चुनाव से जुड़े दावों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। लोगों से अपील है कि चुनाव से जुड़ी जानकारी सत्यापित और विश्वसनीय स्रोतों से आने पर ही भरोसा करें।
ट्रंप के कट्टर समर्थक हैं मस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 में एलन मस्क पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। मस्क लगातार उनके पक्ष में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। हाल ही में मस्क ने कहा था कि अगर डोनाल्ड ट्रंप चुनाव हारे तो उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। इसी साल एलन मस्क ने ट्रंप की राजनीतिक कार्रवाई समिति को 75 मिलियन डॉलर का दान दिया। मैं एक प्रौद्योगिकीविद् हू। मैं खुद कंप्यूटर के बारे में बहुत कुछ जानता हूं। मेरा मानना है कि मैं कंप्यूटर प्रोग्राम पर भरोसा नहीं करेंगे। इसी वजह यह है कि इसे हैक करना बहुत आसान है। एलन मस्
इजरायल के हमले में मारा गया हसन नसरल्लाह, हिज्बुल्लाह ने की पुष्टि, खामेनेई सुरक्षित स्थान पर गए
इजरायल ने शनिवार तड़के बेरूत के दक्षिणी जोरदार एयर स्ट्राइक किया. इजरायली हमले में नरसल्लाह की बेटी जैनब की मौत हो गई है. साथ ही इजरायली सेना ने कहा कि हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह मारा गया है.सेना ने उनके साथ-साथ हिजबुल्लाह के अतिरिक्त कमांडरों और ऑपरेटिव्स को भी मार गिराया है.
जानकारी के अनुसार दक्षिणी बेरूत में हिज़्बुल्लाह के गढ़ों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों में जैनब की मौत हुई है. हालांकि, हिज़्बुल्लाह या लेबनानी मीडिया की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है.
इजरायल ने यह भी दावा किया है कि लेबनान में हवाई हमलों में हिजबुल्लाह के कई कमांडर मारे गए हैं. आईडीएफ ने शनिवार सुबह कहा, 'इजरायली वायु सेना (आईएएफ) ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की मिसाइल यूनिट के कमांडर, आतंकवादी मोहम्मद अली इस्माइल और उनके डिप्टी, आतंकवादी हुसैन अहमद इस्माइल पर हमला कर उन्हें मार गिराया.'
बेरूत में चश्मदीदों ने बताया कि इजरायली लड़ाकू विमान शहर के दक्षिणी उपनगर के ऊपर उड़ान भर रहे थे और उन्होने दहीह में एक घंटे के भीतर कई बार बमबारी की है.
युद्धविराम की संभावनाए खारिज
संयुक्त राष्ट्र में, नेतन्याहू ने लेबनान के साथ बढ़ते संघर्ष में तत्काल युद्धविराम की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने ईरान की ओर से खतरों का जिक्र करते हुए कहा, "हम तेहरान या उसके प्रॉक्सी से खतरों के सामने पीछे नहीं हटेंगे." उन्होंने ईरान की ओर से खतरों का जिक्र करते हुए कहा, "हम तेहरान या उसके प्रॉक्सी से खतरों के सामने पीछे नहीं हटेंगे." उन्होंने इजरायल की कार्रवाइयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया.
महाभारत का युद्ध क्यों हुआ था?... एक प्रश्न जो हिंदुओं के धर्मज्ञान की सच्चाई बता रहा है
यह तो बहुत ही सरल प्रश्न है, लेकिन मैं पूछ क्यों रही हूँ? तो चलिए इसका कारण समझते हैं कि यह अत्यंत सोचनीय और दयनीय स्थिति हो गई है हमारे समाज की कि वह इसका उत्तर भी गलत देते हैं। कल ही मैं यू ट्युब पर श्री नीरज अत्री जी का जीवंत प्रसारण देख रही थी, उन्होंने यही प्रश्न अपने दर्शकों / श्रोताओं से किया तो जो उत्तर मिले वह सुनकर माथा पीटने का मन करता है। उत्तर इस प्रकार से थे, जमीन के लिए, राज्य के लिए, धन के लिए, द्रोपदी के कारण, शकुनि के कारण, दो परिवारों के पारिवारिक क्लेश के कारण, आदि – आदि। यह दर्शक श्रोता मेरे अनुमान से 30 से अधिक आयु के ही होंगे क्योंकि युवा पीढ़ी सिर्फ रील, ओटीटी आदि में व्यस्त है। यदि वह भी होते तो सम्भवत: पूछते कौन सा युद्ध, किसके बीच हुआ था? एक ने भी उत्तर नहीं दिया कि यह धर्म और अधर्म के बीच का युद्ध था, अधर्म के नाश के लिए युद्ध था। शेष अन्य कारण तो सहायक तत्व थे। लेकिन यह हुआ क्यों? किसी को भी सही उत्तर क्यों नहीं मिला?
आज घरों में गीता, रामायण, रामचरित मानस जैसे ग्रंथ नहीं हैं, माता पिता भी बच्चों को बाबा ब्लैक शीप, ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार, टाटा बाय बाय आदि सिखाते हैं। जैसे ही घर में अतिथि घर के द्वार पर आता है बच्चा उसे टाटा बाय बाय कर देता है। हमारे माता पिता रामायण और महाभारत के प्रसंग सुनाते थे। पाठशाला में भी गुरुजन पढाते समय रामायण, गीता व महाभारत के प्रसंग सुना देते थे। पाठ्यक्रम में भी अधिक नहीं तो सरसरा परिचय तो होता ही था। लेकिन आज हमारे धर्म और सस्कृति के विषय में NCERT की पुस्तकों में क्या पढाया जा रहा है उसके पृष्ठ का एक चित्र संलग्न है। हमारे धर्म में पित्रसत्तात्मक सत्ता है, मात्र सत्ता नहीं है। धन सम्पत्ति पिता से पुत्र को प्राप्त होती है पुत्री को नहीं। जबकि हमारे यहाँ पुत्री को विवाह में चल सम्पत्ति देने का प्रचलन है जिसे दहेज कह दिया गया। कुछ लालची लोगों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना भी प्रारम्भ किया, इससे दहेज प्रथा जो अच्छी प्रथा थी, पुत्री को अचल सम्पत्ति में अधिकार देती थी वह कलंकित हो गई। मनुस्मृति में लिखा है:
तस्मादेताः सदा पूज्या भूषणाच्छादनाशनैः। भूतिकामैर्नरैर्नित्यं सत्कारेषूत्सवेषु च॥3.59॥
इसलिये स्त्रियों को हमेशा भूषण, वसन और भोजन से सन्तुष्ट करना चाहिये। समृद्धि की इच्छा वाले पुरुषों को नित्य मंगलकार्य उत्सवों में स्त्रियों को भूषण से सन्तुष्ट रखना चाहिये।
स्त्रियां तु रोचमानायां सर्वं तद्रोचते कुलम्। तस्या त्वरोचमानायां सर्वमेव न रोचते॥3.62॥
अलंकारादि से युक्त प्रसन्नचित्त स्त्री से सारा कुल दीप्तियुक् हो जाता है। यदि स्त्री असन्तुष्ट हो तो सारा कुल मलिन हो जाता है।
इसके ठीक विपरीत विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है। सीधी, मध्यप्रदेश में 12,000 वर्ष पूर्व की एक मंदिर के दबे हुए अवशेषों माँ के देवी स्वरूप की मूर्ती पुरातत्व विभाग को खनन में प्रात हुई है। आस पास के गांवों में जाकर देखने में मिला कि उसी प्रकार की मूर्तियाँ उनके घरों में भी देवी माँ के रूप में विराजमान हैं। अंत में सरकार से अनुरोध है कि शिक्षा विभाग तुरंत ही कार्यवाही करे और NCERT की पुस्तकों द्वारा हमारे सनातन धर्म का अपमान करने वाले पाठों को हटाए।
इसके अतिरिक्त एक स्वघोषित आचार्य भी हैं जो प्रवचन देता है नाम है प्रशांत वह बता रहा है कि भगवान श्री कृष्ण ने तो युद्ध करने की बात ही नहीं करी। ऐसे कथित आचार्यों का बहिष्कार करना चाहिए और हमें इसके विरुद्ध जन जागरण अभियमहाभारत का युद्ध क्यों हुआ था?... एक प्रश्न जो हिंदुओं के धर्मज्ञान की सच्चाई बता रहा है
यह तो बहुत ही सरल प्रश्न है, लेकिन मैं पूछ क्यों रही हूँ? तो चलिए इसका कारण समझते हैं कि यह अत्यंत सोचनीय और दयनीय स्थिति हो गई है हमारे समाज की कि वह इसका उत्तर भी गलत देते हैं। कल ही मैं यू ट्युब पर श्री नीरज अत्री जी का जीवंत प्रसारण देख रही थी, उन्होंने यही प्रश्न अपने दर्शकों / श्रोताओं से किया तो जो उत्तर मिले वह सुनकर माथा पीटने का मन करता है। उत्तर इस प्रकार से थे, जमीन के लिए, राज्य के लिए, धन के लिए, द्रोपदी के कारण, शकुनि के कारण, दो परिवारों के पारिवारिक क्लेश के कारण, आदि – आदि। यह दर्शक श्रोता मेरे अनुमान से 30 से अधिक आयु के ही होंगे क्योंकि युवा पीढ़ी सिर्फ रील, ओटीटी आदि में व्यस्त है। यदि वह भी होते तो सम्भवत: पूछते कौन सा युद्ध, किसके बीच हुआ था? एक ने भी उत्तर नहीं दिया कि यह धर्म और अधर्म के बीच का युद्ध था, अधर्म के नाश के लिए युद्ध था। शेष अन्य कारण तो सहायक तत्व थे। लेकिन यह हुआ क्यों? किसी को भी सही उत्तर क्यों नहीं मिला?
आज घरों में गीता, रामायण, रामचरित मानस जैसे ग्रंथ नहीं हैं, माता पिता भी बच्चों को बाबा ब्लैक शीप, ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार, टाटा बाय बाय आदि सिखाते हैं। जैसे ही घर में अतिथि घर के द्वार पर आता है बच्चा उसे टाटा बाय बाय कर देता है। हमारे माता पिता रामायण और महाभारत के प्रसंग सुनाते थे। पाठशाला में भी गुरुजन पढाते समय रामायण, गीता व महाभारत के प्रसंग सुना देते थे। पाठ्यक्रम में भी अधिक नहीं तो सरसरा परिचय तो होता ही था। लेकिन आज हमारे धर्म और सस्कृति के विषय में NCERT की पुस्तकों में क्या पढाया जा रहा है उसके पृष्ठ का एक चित्र संलग्न है। हमारे धर्म में पित्रसत्तात्मक सत्ता है, मात्र सत्ता नहीं है। धन सम्पत्ति पिता से पुत्र को प्राप्त होती है पुत्री को नहीं। जबकि हमारे यहाँ पुत्री को विवाह में चल सम्पत्ति देने का प्रचलन है जिसे दहेज कह दिया गया। कुछ लालची लोगों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करना भी प्रारम्भ किया, इससे दहेज प्रथा जो अच्छी प्रथा थी, पुत्री को अचल सम्पत्ति में अधिकार देती थी वह कलंकित हो गई। मनुस्मृति में लिखा है:
तस्मादेताः सदा पूज्या भूषणाच्छादनाशनैः। भूतिकामैर्नरैर्नित्यं सत्कारेषूत्सवेषु च॥3.59॥
इसलिये स्त्रियों को हमेशा भूषण, वसन और भोजन से सन्तुष्ट करना चाहिये। समृद्धि की इच्छा वाले पुरुषों को नित्य मंगलकार्य उत्सवों में स्त्रियों को भूषण से सन्तुष्ट रखना चाहिये।
स्त्रियां तु रोचमानायां सर्वं तद्रोचते कुलम्। तस्या त्वरोचमानायां सर्वमेव न रोचते॥3.62॥
अलंकारादि से युक्त प्रसन्नचित्त स्त्री से सारा कुल दीप्तियुक् हो जाता है। यदि स्त्री असन्तुष्ट हो तो सारा कुल मलिन हो जाता है।
इसके ठीक विपरीत विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है। सीधी, मध्यप्रदेश में 12,000 वर्ष पूर्व की एक मंदिर के दबे हुए अवशेषों माँ के देवी स्वरूप की मूर्ती पुरातत्व विभाग को खनन में प्रात हुई है। आस पास के गांवों में जाकर देखने में मिला कि उसी प्रकार की मूर्तियाँ उनके घरों में भी देवी माँ के रूप में विराजमान हैं। अंत में सरकार से अनुरोध है कि शिक्षा विभाग तुरंत ही कार्यवाही करे और NCERT की पुस्तकों द्वारा हमारे सनातन धर्म का अपमान करने वाले पाठों को हटाए।
इसके अतिरिक्त एक स्वघोषित आचार्य भी हैं जो प्रवचन देता है नाम है प्रशांत वह बता रहा है कि भगवान श्री कृष्ण ने तो युद्ध करने की बात ही नहीं करी। ऐसे कथित आचार्यों का बहिष्कार करना चाहिए और हमें इसके विरुद्ध जन जागरण अभियान च
अमेरिका 9/11 अटैक
4 विमान हाईजैक, 2500 से ज्यादा मौतें, अलकायदा की फंडिंग, हमले के लिए मिले थे इतने रुपए
11 सितंबर 2001 की तारीख अमेरिकी इतिहास में काले दिन के रूप में याद की जाती है। इस दिन अल-कायदा (Al-Qaeda) के आतंकवादियों ने अमेरिका पर एक भीषण हमला किया था। भले ही, 23 साल बीत गए हों, लेकिन उसकी भयावहता आज भी लोगों के दिलों में ताजा है। उस दिन, अल-कायदा के आतंकवादियों ने चार अमेरिकी कॉमर्शियल विमानों को हाईजैक किया। इसके बाद, मानिए कहर टूट पड़ा हो।
हाईजैकर्स ने अमेरिका के प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण स्थानों पर एक के बाद एक चारों विमान कैश कर दिए। इस भीषण हमले में 2,977 से ज्यादा मासूम लोगों की जान चली गई, जिनमें से ज्यादातर न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टॉवर्स में थे। इस हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा के लीडर ओसामा बिन लादेन ने ली थी। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका के महत्वपूर्ण प्रतीकों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। आइए 9/11 अटैक की 23वीं वर्षगांठ पर पलटते हैं उन पन्नों को और टाइमलाइन में जानते हैं पूरी घटना....
9/11 अटैक: विमानों का हाईजैक और हमले
अमेरिकन एयरलाइंस-11 और यूनाइटेड एयरलाइंस-175 (American Airlines-11 and United Airlines-175): दोनों ही कॉमर्शियल फ्लाइट्स को हाईजैक किया गया था और न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी और दक्षिणी टावरों से टकराया गया। इन टक्करों के बाद आग लग गई, जिससे टावर ढह गए और हजारों लोगों की जान चली गई।
अमेरिकन एयरलाइंस फ़्लाइट 77 (American Airlines Flight 77): इस फ्लाइट को हाईजैक कर वर्जीनिया के अर्लिंग्टन में स्थित पेंटागन, जो अमेरिकी रक्षा विभाग का मुख्यालय है, से टकरा दिया गया। इस हमले में भी कई लोग मारे गए।
यूनाइटेड एयरलाइंस फ़्लाइट 93 (United Airlines Flight 93): यात्रियों ने इस फ्लाइट में हाइजैकर्स से विमान का नियंत्रण वापस लेने की कोशिश की थी, जिस कारण यह विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। माना जाता है कि इसका उद्देश्य वॉशिंगटन डीसी के व्हाइट हाउस या यूएस कैपिटल को निशाना बनाना था।
टाइमलाइन में समझें कब क्या हुआ? (America 9/11 Attack Timeline)
8:46 AM : अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 11 न्यूयॉर्क शहर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टॉवर से टकराया।
9:03 AM : यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 175 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दक्षिणी टॉवर से टकराया।
9:37 AM : अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 77 वर्जीनिया के अर्लिंग्टन में पेंटागन से टकराया।
10:03 AM : यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 पेन्सिल्वेनिया के एक खेत में क्रैश हो गया। यात्रियों की बहादुरी के चलते यह विमान अपने लक्षित निशाने तक नहीं पहुंच पाया।
चारों तरफ चीख-पुकार, दर्द और खौफ का माहौल
जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टॉवर्स पर विमान टकराए, तो उनमें से आग और धुंआ उठने लगा। दोनों टॉवर्स कुछ ही घंटों में पूरी तरह से ढह गए, जिससे पूरे न्यूयॉर्क शहर में तबाही मच गई। चारों तरफ चीख-पुकार, दर्द और खौफ का माहौल था। आग बुझाने वाले और बचाव दल के सदस्य जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में लगे थे, लेकिन टॉवर्स के गिरने के बाद हालात और भी बदतर हो गए। सैकड़ों फायरफाइटर्स, पुलिसकर्मी और बचावकर्मी अपनी जान गंवा बैठे।
9/11 हमले में कितने लोग मरे? (America 9/11 Attack Death Cases)
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर: ट्विन टावर्स के ढहने से 2,753 लोग मारे गए।
पेंटागन: पेंटागन पर हमले में 184 लोग मारे गए।
फ्लाइट 93: विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 40 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए।
कुल मरने वाले: 2,977 लोगों की मौत
9/11 हमले की साजिश: किसने बनाया ब्लूप्रिंट?
इस हमले का ब्लूप्रिंट खालिद शेख मोहम्मद उर्फ केएसएम ने तैयार किया था। हालांकि, उसे इस हमले को अंजाम देने के लिए पैसों की जरूरत थी, जिसके लिए उसने अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन से मदद ली। केएसएम ने इस हमले की प्लानिंग को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अल-कायदा का भरोसेमंद सदस्य बन गया।
अलकायदा की फंडिंग (America 9/11 Al Qaeda Funding)
अमेरिका द्वारा जारी 'THE 9/11 COMMISSION REPORT' के अनुसार, इस हमले की तैयारी में करीब 5 लाख डॉलर का खर्च आया था। सारे पैसों का इंतजाम अल-कायदा ने किया था। हमले को अंजाम देने वाले हर आतंकवादी को लगभग 10 हजार डॉलर दिए गए थे।
ओसामा बिन लादेन की मौत (Osama bin Laden)
9/11 हमलों के बाद ओसामा बिन लादेन दुनिया का सबसे वांछित आतंकवादी बन गया था। अमेरिका ने "वार ऑन टेरर" अभियान चलाया, जिसमें अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर हमले किए गए और बिन लादेन को पकड़ने का मिशन शुरू हुआ।
कई सालों की खुफिया जानकारी और सैन्य ऑपरेशनों के बाद, अमेरिकी नौसेना ने 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। उसकी मौत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण जीत मानी गई।
पत्थरों पर दर्ज नाम, बयां करते हैं दास्तां
9/11 की त्रासदी ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। पीड़ित परिवार आज भी उन पलों को याद करते हुए अपनी आंखों में आंसू भर लेते हैं। हर साल 11 सितंबर को इस दिन की याद में समारोह आयोजित होते हैं, जहां लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। न्यूयॉर्क के ग्राउंड ज़ीरो पर बने स्मारक में उन सभी लोगों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने उस दिन अपनी जान गंवाई थी। यह दिन सिर्फ एक हमले का नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के दर्द का प्रतीक बन गया है जो अपनों को खो चुके हैं।
शर्तें न मानने पर CM के साथ बैठक के लिए नहीं पहुंचे डॉक्टर, ममता ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की
बताया गया है कि पुलिस सुरक्षा में प्रतिनिधिमंडल शाम करीब साढ़े पांच बजे सचिवालय पहुंचा, जबकि बैठक का समय पहले पांच बजे तय हुआ था। राज्य सरकार की तरफ से 15 लोगों की शर्त के बावजूद 30 चिकित्सक नबन्ना पहुंचे।
नबन्ना की तरफ पदयात्रा करते प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या के मुद्दे पर सरकार और चिकित्साकर्मियों के बीच गतिरोध जारी है। इस मुद्दे पर गुरुवार को डॉक्टरों का एक दल बैठक के लिए नबन्ना पहुंचा। हालांकि, यहां बैठक नहीं हो पाई। ममता बनर्जी ने बैठक को लेकर कहा कि बातचीत होने पर ही समाधान संभव है। उन्होंने बताया किहमने जूनियर डॉक्टरों से मिलने के लिए दो घंटे तक इंतजार किया, लेकिन वे बैठक स्थल पर नहीं आए। ममता ने इसके बाद कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
ममता ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं। मुझे पद की चिंता नहीं है। मुझे न्याय चाहिए, मुझे केवल न्याय मिलने की चिंता है।"
उन्होंने आगे कहा, "आरजी कर मामले में गतिरोध को समाप्त करने के लिए मैंने जूनियर डॉक्टरों से बातचीत करने की तीन बार कोशिश की। हमारे पास जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था थी, हम उच्चतम न्यायालय की अनुमति से इसे उनके साथ साझा कर सकते थे। बंगाल सीएम ने कहा कि आरजी कर मामला क्योंकि न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए जूनियर डॉक्टरों की मांग के अनुसार उनके साथ बैठक का सीधा प्रसारण नहीं किया जा सकता।
बंगाल सीएम ने कहा, "मैंने जूनियर डॉक्टरों के साथ बैठने की पूरी कोशिश की। यहां तक कि जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं किया, तब भी मैंने अपने मुख्य सचिव, गृह सचिव, DG और मेरे राज्य मंत्री सहित अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ 3 दिन तक इंतजार किया। मुझे खेद है। मैं इस देश और दुनिया के लोगों से माफी मांगती हूं जो उनका (डॉक्टरों) समर्थन कर रहे हैं, कृपया अपना समर्थन दें। मुझे कोई समस्या नहीं है। हम आम लोगों के लिए न्याय चाहते हैं। हम आम लोगों के इलाज के लिए न्याय चाहते हैं। हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार वे अपनी ड्यूटी पर वापस आएं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 3 दिन बीत चुके हैं लेकिन हम कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि कभी-कभी हमें बर्दाश्त करना पड़ता है। कभी-कभी बर्दाश्त करना हमारा कर्तव्य है।"
शाम को ही नबन्ना पहुंचे डॉक्टर,पर नहीं हुई मुलाकात
बताया गया है कि पुलिस सुरक्षा में प्रतिनिधिमंडल शाम करीब साढ़े पांच बजे सचिवालय पहुंचा, जबकि बैठक का समय पहले पांच बजे तय हुआ था। राज्य सरकार की तरफ से 15 लोगों की शर्त के बावजूद 30 चिकित्सक नबन्ना पहुंचे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य भवन के बाहर धरना शुरू करने से पहले कहा था कि वे बैठक का सीधा प्रसारण करने की मांग से पीछे हटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। राज्य के मुख्य सचिव बैठक के लिए अपने नये निमंत्रण में पहले ही इस मांग को अस्वीकार कर चुके हैं।बैठक स्थल पर चिकित्सक और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग बैठक की ताकि यह तय किया जा सके कि बैठक की प्रक्रिया का सीधा प्रसारण किया जाए या नहीं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिता श्री पूनमचंद यादव की अंतिम यात्रा में केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए और मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ढांढस बंधाया।
भारत सरकार को मिली गुप्त सूचना के अनुसार , किसान आन्दोलन फिर से शुरू होने वाला है ! Deep State काम में लगा हुआ है !*
*गत सप्ताह , नई दिल्ली की चाणक्यपुरी में एक अजीब घटना सामने आई । रात के करीब 02:00 , 11-12 अज्ञात पुरुष अमरीकन एम्बेसी में दाखिल हुए , जिनके चेहरे ढके हुए थे । वह लोग करीब डेढ़ घंटे के बाद बाहर आए ! इससे पता चलता है कि उनकी अमरीकी डिप्लोमेट्स के साथ कोई विशेष गुप्त मीटिंग हुई थी ।*
*इस तरह से सब के चेहरे छिपाए जाने के कारण , चाणक्यपुरी में तैनात खुफिया एजेंसियों के कर्मचारियों को संदेह हुआ । इस लिए अमरीकी दूतावास से इनके बाहर आने पर , इनका गुप्त तरीके से पीछा किया गया। वह सभी लोग छतरपुर के एक फार्म हाउस में पहुंचे। तब जाकर इंटेलिजेंस अधिकारियों को , उन लोगों की एनक्यवारी करके , उनकी पहचान हुई और इसकी जानकारी I.B (Intelligence Bureau) को दी गई ।*वहां पर की गई एंक्वायरी से सुरक्षा अधिकारीयों को पता चला , कि वह सारे लोग किसान नेता हैं , जो हरियाणा , पंजाब , पश्चिमी उत्तरप्रदेश और कम्युनिस्ट पार्टी से सम्बंधित किसान नेता हैं इस जानकारी के मिलने के बाद , NSA अजीत डोभाल ने अमरीकी NSA से फ़ोन पर बात करके उसे चेतावनी दी , कि किसी भी प्रकार के भारत के आंतरिक मामलों में अमरीकी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । अभी कुछ दिन पहले ही किसान यूनियन के नेता , राकेश टिकैत ने बांग्लादेश जैसे ही भारत में तख्ता पलटने का बयान दिया था , जो अमरीकी दूतावास में हुई उस गुप्त मीटिंग के बाद ही आया था गृहमंत्री मंत्रालय को मिले इनपुट के अनुसार , आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी अमरीकी हस्तक्षेप की पूरी संभावना जताई गई है !*आजकल आपने समाचार पत्रों में पढ़ा होगा , कि आजकल अमेरिकी दूतावास के अधिकारी बहुत सक्रिय हो गए हैं । वह कभी ओवैसी से मिलते हैं , कभी चन्द्रबाबू नायडू से और कभी उमर अब्दुल्ला से ! यह सब , सिर्फ़ और सिर्फ़ , मोदी जी को हटाने के लिए चालें चली जा रही हैं ! याद रखिए , कि अगर! देश सुरक्षित रहेगा , तो ही हम सुरक्षित रहेंगे !*
*आप से अनुरोध है , कि इस लेख को अपने सभी जानने वालों के साथ शेयर करें ।*
. *🇮🇳 जय भारत , वंदेमातरम 🇮🇳*
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❀ वर्तमान समय की एक ज्वलंत समस्या ❁•
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★ चींटी और टिड्डे की कहानी ★
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❗ भारत की आजादी के पूर्व ❗
एक चींटी थी. वो बहुत मेहनती थी,
वह हमेशा अपने काम मे लगी रहती थी.जबकि टिड्डा दिन भर मस्ती करता था.चींटी अक्सर उसे समझाती, कि हमेशा मौज मस्ती मे डूबे रहना अच्छा नहीं है.कुछ ही दिनों के बाद सर्दियों का मौसम आने वाला था.चींटी अथक मेहनत कर सर्दियों के आने से पहले एक घर बना लेना चाह रही थी,और पर्याप्त भोजन जमा कर रख लेना चाह रही थी इसके विपरीत टिड्डाआने वाली सर्दी के मौसम से बेखबर दिन भर मौज मस्ती में लगा रहा. कुछ दिनों बाद सर्दी आ गयी.
चींटी अपने घर में आराम कर रही थी,पर टिड्डा, बाहर जाड़े में ठिठुर भूख से व्याकुल होकर मर गया.सभी लोगों ने चींटी की तारीफ़ करी,और टिड्डे को गलत बताया.सबने कहा कि .मेहनत ही सबसे अच्छा रास्ता है.
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❗ आजादी के बाद ❗
सर्दी का मौसम आते ही टिड्डा ठंड से काँप रहा था, लेकिन अब टिड्डा भी चतुर हो गया था.उसे मालूम हो गया था, कि वह एक पिछड़े समुदाय का है, उसे एक आईडिया सूझा.उसने एक प्रेस काँफ्रेंस बुलाया, और अपने आपको ठंड से ठिठुरते और चींटी को अपने घर में चैन से आराम करते हुए, और उसका भोजन सामग्री से भरा घर दिखाया.सभी न्यूज़ चैनल वाले आये.उन्होंने यह समाचार प्रमुखता से दिखाया.टिड्डे को ठंड से ठिठुरते और
चींटी को अपने घर में चैन से आराम करते और उसका भोजन सामग्री से भरा घर दिखाया.विश्व राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संघ यह विचित्र विरोधाभास देखकर दंग रह गये. क्यों इस गरीब टिड्डे को इस भयंकर सर्दी में ठंड से ठिठुरते हुए छोड़ दिया गया.महिला मोर्चे से एक नेत्री दौड़ी आई,और अन्य टिड्डों के साथ आमरण अनशन पर बैठ गयी.सर्दियों के मौसम में टिड्डों को अपेक्षाकृत गर्म स्थान में रहने और भोजन का उचित प्रबंध किया जाये. शहर की उभरती नेता
चींटी के घर के सामने प्रदर्शन करने आई, एक दलित नेता ने टिड्डे को दलित मानते हुए,इसे उनके साथ घोर अन्याय माना.विश्व के अनेक देशों से
सहानुभूति के साथ-साथ मदद के ऑफर आने लगे.लोग टिड्डे के प्रति इस अन्याय के लिए ईश्वर को दोष देने लगे.विरोधी दल के नेता ने संसद का बहिष्कार किया वाम दलों ने भारत बंद का आह्वान कर दिया.
एक विपक्ष के नेता ने अधिकांश ट्रेनों में एक स्पेशल कोच ”टिड्डा रथ” के नाम से जोड़ने हेतु रेल मंत्री को लिखा, जिसमें टिड्डे को मामूली भाड़े पर भारत भ्रमण की सुविधा दी जाए.
अन्त में सरकार द्वारा एक न्यायिक जाँच आयोग की स्थापना की गई,
जिसने एक नया एक्ट Prevention of Terrorism against Tidda Act POTATA की रुपरेखा बनाकर
सरकार को दिया, जिसे सर्दियों का मौसम आने से पहले ही लागू मान लिया गया शिक्षण संस्थाओं में मानव संसाधन मंत्री द्वारा टिड्डों के लिए अतिरिक्त आरक्षण की अनुसंशा की गई.केन्द्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा सरकारी नौकरियों में टिड्डों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था की गई.सरकार द्वारा मेहनती चींटी पर
POTATA एक्ट के तहत कई प्रकार के टैक्स लगाकर उसके घर को जब्त कर, मिडिया के सामने टिड्डों को दे दिया गया.किसी ने इसे A Triumph of Justice कहा.
नेताओं ने इसे 'सामाजिक न्याय' कहा. मेहनती चीटीं हारकर दूसरे देश चली गई. विदेशी सरकार ने चींटियों की मेहनत से प्रभावित होकर आसान शर्तों पर वीसा दे दिया.इन चीटिंयों ने वहाँ करोड़ों डालर की कम्पनियाँ बना लीं.और टिड्डा आज भी सरकारी सहायता का मोहताज बना हुआ है. सैकड़ों की संख्या में टिड्डे आज भी मर रहे हैं.सरकारी विभाग आलसी टिड्डों से भर गये बिना मेहनत किए उन्हें सब पाने की
आदत हो गई है. एक प्रकार का कटाक्ष है ये हम सब पर दोस्तों ! यहाँ सिर्फ और सिर्फ मैं यही कहना चाहती हूँ , कि ~हम आज भी उस टिड्डे की तरह किसी नेता की राह नहीं देखें,किसी छलावे और बहकावे की राह न देखें.हम सब यही देख रहें हैं कि सरकार हमारे समाज को निचली जाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक जाति का तोहफा दे,ताकि हम कम मेहनत में ऊँची जगह पहुँच सकें. दोस्तों हम हमारा सम्मान अपनी मेहनत और लगन से जरूर बना सकते हैं. हमारा देश हमारा सम्मान करेगा.बस भरोसे पर मत रहो कि मैने इस जाति में या सम्प्रदाय में जन्म क्यों नहीं लिया.लगन से बढ़ो,कठिनाइयों से लड़ो एक दिन शिखर पर पहुँच ही जाओ अब ये आप पर निर्भर करता है, कि आप सफलता के लिए चींटी के गुण को अपनाना चाहते हो या टिड्डे के.
*🚩जय श्री हरि 🚩*
*_श्रीराम का घर छोड़ना षड्यंत्रों में घिरे एक राजकुमार की करुण कथा है और कृष्ण का घर छोड़ना गूढ़ कूटनीति। राम जो आदर्शों को निभाते हुए कष्ट सहते हैं, कृष्ण षड्यंत्रों के हाथ नहीं आते बल्कि स्थापित आदर्शों को चुनौती देते हुए एक नई परिपाटी को जन्म देते हैं_*।
*श्री राम से श्री कृष्ण हो जाना एक सतत प्रक्रिया है। श्रीराम को मारीच भ्रमित कर सकता है लेकिन कृष्ण को पूतना की ममता भी नहीं उलझा सकती। श्रीराम अपने भाई को मूर्छित देखकर ही बेसुध बिलख पड़ते हैं लेकिन कृष्ण अभिमन्यु को दांव पर लगाने से भी नहीं
*राम राजा हैं*
*कृष्ण राजनीति*
*राम रण हैं*
*कृष्ण रणनीति।*
*श्री राम मानवीय मूल्यों के लिए लड़ते हैं श्री कृष्ण मानवता के लिए। श्री राम धर्म है तो श्री कृष्ण धर्म स्थापना*
*,हर मनुष्य की यात्रा राम से ही शुरू होती है और "समय" उसे कृष्ण बनाता है। व्यक्ति का कृष्ण होना भी उतना ही जरूरी है जितना राम होना लेकिन राम से प्रारंभ हुई यह यात्रा तब तक अधूरी है जब तक इस यात्रा का समापन कृष्ण पर न हो_*.!!🙏
*भाई-भाई के बीच वैमनस्य क्यों*
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*भाई - भाई के झगड़ों के कारण एक ही घर में दीवार खिंच जाती है और थोड़ी सी बात में झगड़ा बढ़ सकता है ।* भाइयों में पारस्परिक कटुता के कारण प्रायः ये होते हैं (१) जायदाद का बंटवारा, (२) पिता का एक पर अधिक स्नेह, दूसरे का तिरस्कार, (३) एक भाई का अधिक पढ़-लिख संपन्न होना, दूसरे की हीनता, (४) मिथ्या गर्व और अपने बड़प्पन की मिथ्या भावना, (५) अशिष्ट व्यवहार, (६) एक भाई की कुसंगति, दुर्व्यसन या व्यभिचार इत्यादि दुर्गुण, (७) उनकी पत्नियों का मन परस्पर न मिलना ।
*उपर्युक्त कारणों में से कोई भी उपस्थित होने पर बड़े भाई को पूर्ण "शांति" और "विवेक" से छोटे भाई की मनोवृत्ति पर ध्यान देना और उसका सूक्ष्म अध्ययन करना चाहिए ।* कभी-कभी तनिक से विवेक-बुद्धि और शांति से बड़े काम चलते हैं। गर्मा-गर्मी में आने से अपशब्द निकलते हैं, बड़े भाई के आत्म सम्मान एवं प्रतिष्ठा की हानि होती है। *यदि एक दूसरे के लिए थोड़ा सा त्याग कर दिया जाय, तो अनेक झगड़े समाप्त हो सकते हैं ।*
*जायदाद के बंटवारे के मामले में किसी बाहरी सज्जन को डालकर उचित बंटवारा कराना और जितना मिले उसी में प्रत्येक को संतोष रखना चाहिए ।* यदि हम थोड़ा सा त्याग करने को प्रस्तुत रहें, तो कोई कठिनाई आ ही नहीं सकती। यदि पिता एक पुत्र पर अधिक तथा दूसरे पर कम प्रेम प्रकट करते हैं, तो भी व्यग्र होने का कोई कारण नहीं है । पिता के हृदय में सबके प्रति समान प्रेम है । चाहे वे प्रकट एक पर ही करें, वह प्रत्येक पुत्र-पुत्री को समभाव से प्रेम करते हैं। इस प्रकार का दृष्टिकोण रखने से हम अनेक कलुषित और अनर्थकारी विचारों से बच सकते हैं।
*सामान्यत: स्त्रियों में ईर्ष्या का दुर्गुण बहुत मात्रा में होता है। यदि पत्नियों को शिक्षा दी जावे और कुशलता से स्त्री स्वभाव की इस कमजोरी का ज्ञान करा दिया जावे, तो अनेक झगड़े प्रारंभ ही न हों।* एक अच्छा नियम यह है कि पत्नी की बातों में न आया जाय और गलतफहमी से बचा जाय । *यदि कोई गलतफहमी आ जाय तो शांति से उसे दूर करना उचित है । उसे हृदय में रखना पाप की मूल है ।* बाहर वालों के कहने में कदापि न आना चाहिए ।
*भाई से अपनी आत्मा और रक्त का संबंध है। दोनों में उसी आत्मा का अंश है, उसी रक्त से उनके शरीर, मन तथा भावनाओं का निर्माण हुआ है। उसमें कटुता का तत्व किसी तीसरे के षडयंत्र से उत्पन्न होता है ।* समाज में ऐसे व्यक्तियों की न्यूनता नहीं है, जो परस्पर युद्ध करा दें । अतः उनसे बड़े सावधान रहें ।
*भाई आपका सबसे बड़ा "मित्र" और "हितैषी" है। बड़ा भाई "पिता" तुल्य गिना जाता है । छोटा भाई आड़े समय अवश्य काम आता है, सेवा करता है।* एक और एक मिलकर ग्यारह बनते हैं। यदि दो भाई मिल-जुल कर अग्रसर हों तो संसार में निर्विघ्न चल सकते हैं । *एक दूसरे के आड़े समय पर काम आ सकते हैं, आर्थिक सहायता कर सकते हैं और एक के मरने पर दूसरे के कुटुम्ब का पालन- पोषण कर सकते हैं। वे भाई धन्य हैं जो मिल-जुल कर चलते हैं ।*
*"छोटा भाई" बड़े भाई में पथ प्रदर्शक, हितैषी एवं संरक्षक की प्रतिच्छाया देखता है । उसके लिए बड़े भाई को वही त्याग और बलिदान करने चाहिए जो एक पिता अपने पुत्र के लिए करता है।* पिता की मृत्यु के पश्चात् ज्येष्ठ पुत्र के ऊपर संपूर्ण उत्तरदायित्व आ जाता है ।
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*महात्मा गांधी..!!*
महात्मा गांधी के पुत्र हरिलाल गाँधी ने *27 जून 1936* को
नागपुर में इस्लाम कबूल किया था और *29 जून 1936* को मुंबई में उसने इसकी सार्वजनिक घोषणा की कि , वो हरिलाल गाँधी से *अब्दुल्लाह* बन गया है।
*1 जुलाई 1936* को जकारिया ने अब्दुल्लाह के घर की बैठक में बैठे हुए रोष भरे शब्दों में कहा- अब्दुल्लाह,
यह मैं क्या सुन रहा हूँ कि तुम्हारी यह *सात साल की छोकरी आर्य समाज मंदिर में हवन करने जाती है?’’*
यह अब तक मुस्लिम क्यों नहीं बनी ?
इसे भी बनाइए, यदि इसे मुस्लिम नहीं बनाया गया तो इसका तुमसे कुछ भी संबंध नहीं है।’
हरिलाल पर इस्लाम का रंग चढ़ गया था और हर हाल में पूरे हिंदुस्तान को इस्लामी देश बनाना चाहता था।
वह जकारिया के सवाल का कुछ जवाब नहीं दिया।
लेकिन मनु ने जबाब दिया कि *‘‘मैं इस्लाम कबूल नहीं करूंगी’’*
जकारिया ने अब्दुल्लाह की मासूम बेटी मनु जो उस समय सात या आठ साल की ही थी, उसकी ओर मुखातिब होकर कहा,
तुम इस्लाम क्यों नही कबूल करोगी ?
यदि तुम इस्लाम कबूल नहीं करोगी तो तुम्हें मुंबई की चौपाटी पर नंगी करके तुम्हारी बोटी-बोटी करके चील और कौव्वों को खिला दी जाएगी।
फिर वे अब्दुल्लाह (हरिलाल) को चेतावनी देने लगा – ए अब्दुल्ला
*लड़कियां और औरतें अल्लाह की और मुस्लिमों को दी गई नेमतें हैं…*
देखो यदि तुम्हारी बेटी इस्लाम कबूल नहीं करेगी तो
*तुम्हें इसको रखैल समझकर भोग करने का पूरा हक है।*
क्योंकि जो माली पेड़ लगाता है , उसे फल खाने का भी *हक़* है।
यदि तुमने ऐसा नहीं किया तो हम ही इस फल को चौराहे पर सामूहिक रूप से चखेंगे।
हमें हर हाल में हिन्दुस्तान को मुस्लिम देश बनाना है
और पहले हम *लोहे को लोहे से ही काटना चाहते हैं।*
कहकर वह चला गया था ।।
और उसी रात उस मूर्ख अब्दुल्लाह ने अपनी नाबालिग बेटी की नथ तोड़ डाली थी ( अर्थात अपनी हवस का शिकार बना डाला)
बेटी के लिए पिता भगवान होता है,
लेकिन यहां तो बेटी के लिए पिता शैतान बन गया था।
मनु को कई दिन तक रक्तस्राव होता रहा और उसे डाॅक्टरी इलाज से ठीक हुआ, स्नेहिल स्वजन आप कल्पना कीजिये उस नन्ही बच्ची पर क्या गुजर रही होगी और उस फूल सी बच्ची की माँ की भी क्या मनःस्थिति होगी।
(ऐसी है इस्लाम की अंदर की स्थिति)
उन दिनों जब मनु पीड़ा से कराह रही थी तो उसने अपने दादा महात्मा गांधी को खत लिखा,
जो तब तक अपनी होशियारियों के चलते बापू के नाम से सारी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुका था।
लेकिन बापू ने साफ कह दिया कि इसमें मैं क्या कर सकता हूं ?
इसके बाद मनु ने अपनी *दादी कस्तूरबा* को खत लिखा।
खत पढ़कर दादी बा की रूह कांप गई।
फूल सी पोती के साथ यह कुकर्म…और वह भी पिता द्वारा…?
*बा ने 27 सितंबर 1936* को अपने बेटे अब्दुल्लाह को पत्र लिखा और बेटी के साथ कुकर्म न करने की अपील की और साथ ही पूछा कि तुमने धर्म क्यों बदल लिया ?
और गोमांस क्यों खाने लगे ?
बा ने बापू से कहा- अपना बेटा हरि मुस्लिम बन गया है,
तुम्हें आर्य समाज की मदद से उसे दोबारा शुद्धि संस्कार करके हिन्दू बना लेना चाहिए।
गांधी- यह असंभव है।
बा- क्यों ?
*गांधी- देखो मैं शुद्धि आंदोलन का विरोधी हूँ।*
जब *स्वामी श्रद्धानंद* ने मलकाने मुस्लिम राजपूतों को शुद्धि करके हिन्दू बनाने का अभियान चलाया था तो
उस अभियान को रोकने के लिए मैंने ही *आचार्य बिनोबा भावे* को वहाँ भेजा था और मेरे कहने पर ही बिनोबा भावे ने *भूख हड़ताल* की थी और अनेक *हिन्दुओं को मुस्लिम बनाकर ही दम लिया था।*
मुझे इस्लाम अपनाने में बेटे के अंदर कोई बुराई नहीं लगती। इससे वह शराब का सेवन करना छोड़ देगा!
*बा ने कहा*-वह तो *अपनी ही बेटी से बीवी जैसा बर्ताव* करता है, हद है नीचता व क्रूरता की यह सब मुस्लिमों में ही सम्भव रहता जहां स्त्रियों की बड़ी ही दुर्दशा रहती है।
गांधी - अरे नहीं वह ब्रह्मचर्य के प्रयोग कर रहा होगा।
मैं भी तो अनेक औरतों और लड़कियों के संग नग्न सो जाता हूँ।
और अपने ब्रह्मचर्य व्रत की परीक्षा करते हैं।
देखिए गांधी की पुस्तक *मेरे सत्य के प्रयोग*
*मैं तुम्हारे और तुम्हारे बेटे के कुकर्म पर मैं शर्मिंदा हूं।*
कहते हुए बा घर से निकल पड़ी थी और सीधे पहुंची थी
आर्यसमाज बम्बई के नेता श्री विजयशंकर भट्ट के द्वार पर और साड़ी का पल्ला फैलाकर आवाज लगाई थी –
क्या अभागिन औरत को भिक्षा मिलेगी ?
विजयशंकर भट्ट बाहर आए और देखकर चौंक गए कि
बा उनके घर के द्वार पर भिक्षा मांग रही है।
मां क्या चाहिए तुम्हें ?
मुझे मेरा बेटा लाकर दे दो।
वह विधर्मियों के चंगुल में फंस गया है और अपनी ही बेटी को सता रहा है।
मां आप निश्चित रहें आपको यह भिक्षा अवश्य मिलेगी!!
अच्छी बात है,
तब तक मैं अपने घर नहीं जाऊंगी।
कहते हुए बा ने उनके ही घर में डेरा डाल लिया था !
श्री विजयशंकर भट्ट ने अब्दुल्लाह की उपस्थिति में वेदों की इस्लाम पर श्रेष्ठता विषय पर दो व्याख्यान दिए,
जिन्हें सुनकर अब्दुल्लाह को बेहद आत्मग्लानि हुई कि, वह मुस्लिम क्यों बन गया !
फिर अब्बदुल्लाह को स्वामी दयानंद का *#सत्यार्थ प्रकाश* पढ़ने को दिया गया।
जिसका असर यह हुआ कि जल्द ही बम्बई में खुले मैदान में हजारों की भीड़ के सामने, अपनी मां कस्तूरबा और अपने भाईयों के समक्ष आर्य समाज द्वारा अब्दुल्लाह को शुद्ध कर वापिस हीरालाल गांधी बनाया गया।
गांधी को जब यह पता चला तो उन्हें दुख हुआ कि
उनका बेटा क्यों दोबारा काफिर बन गया
और उन्होंने बा को बहुत डांटा कि, तुम क्यों आर्य समाज की शरण में गई…
*अब बताइये यदि ये बात सत्य है तो आप किसके साथ है गांधी के या गोडसे के साथ ??*
MM Singh द्वारा यह लेख फरहाना ताज लिखित पुस्तक *वेद वृक्ष की छाया तले* से उद्घृत
मेरा हाथ जोड़ के निवेदन है कि समस्त समाज को शेयर करे ताकि गांधी के बारे में लोग कुछ और भी जान सके।
और यदि शेयर नहीं हो पा रहा हो तो डूब मरने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। 🚩
*🌹जो गांधी का गुणगान करते हैं, उनके लिये।🌹*
*जिहाद का जवाब जिहाद से देने वाला पहला हिंदू योद्धा तक्षक 🤺*
मोहम्मद बिन कासिम ने सन 712 में भारत पर आक्रमण किया। वह बेहद क्रूर और अत्याचारी था। उसने अपने आक्रमण में एक भी युवा को जीवित नहीं छोड़ा।
कासिम के इस नरसंहार को 8 वर्ष का बालक तक्षक चुपचाप देख रहा था। वही इस कथा का मुख्य पात्र है।
तक्षक के पिता सिन्धु नरेश राजा दाहिर के सैनिक थे। कासिम की सेना के साथ लड़ते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए थे।
राजा दाहिर के मरने के बाद लूट मार करते हुए अरबी सेना तक्षक के गांव में पहुंची, तो गांव में हाहाकार मच गया। स्त्रियों को घरों से बाहर खींच-खींच कर सरेआम इज्ज़त लूटी जाने लगी।
भय के कारण तक्षक के घर में सब चिल्ला उठे। तक्षक की दो बहनें डर से कांपने लगीं। तक्षक की मां सब परिस्थिति भांप चुकी थी। उसने कुछ पल अपने तीनों बच्चों की तरफ देखा। उन्हें गले लगा लिया और रो पड़ी।
अगले ही पल उस क्षत्राणी ने तलवार से दोनों बेटियों का सिर धड़ से अलग कर दिया। उसकी मां ने तक्षक की ओर देखा और तलवार अपनी छाती में उतार ली।
यह सब घटना ८ वर्ष का अबोध बालक "तक्षक" देख रहा था। वह अबोध बालक अपने घर के पिछले दरवाजे से बाहर निकल कर खेतों की तरफ भागा। और समय के साथ बड़ा होता गया।
तक्षक भटकता हुआ कन्नौज के राजा "नागभट्ट" के पास पहुँचा। उस समय वह 25 वर्ष का हो चुका था। वह नागभट्ट की सेना में भर्ती हो गया। और अपनी बुद्धि बल के कारण वह कुछ ही समय में राजा का अंगरक्षक बन गया।
तक्षक के चेहरे पर न कभी खुशी और न गम दिखता था। उसकी आंखें हमेशा क्रोध से लाल रहती थी। उसके पराक्रम के किस्से सेना में सुनाए जाते थे।
तक्षक इतना बहादुर था कि तलवार के एक वार से हाथी का सिर कलम कर देता था। सिन्धु पर शासन कर रही अरब सेना कई बार कन्नौज पर आक्रमण कर चुकी थी लेकिन हमेशा नागभट्ट की बहादुर सेना उन्हें युद्ध में हरा देती थी। और वे भाग जाते थे। युद्ध के सनातन नियमों का पालन करते हुए राजा नागभट्ट की सेना इन भागे हुए जिहादियों का पीछा नहीं करती थी। इसी कारण वे मजबूत होकर बार-बार कन्नौज पर आक्रमण करते रहते थे।
एक बार फिर अरब के खलीफा के आदेश से सिन्धु की विशाल सेना कन्नौज पर आक्रमण करने आयी। यह खबर पता चली तो कन्नौज के राजा नागभट्ट ने अपने सेनापतियों की बैठक बुलाई। सब अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इतने में महाराजा का अंगरक्षक तक्षक खड़ा हुआ। उसने कहा महाराज हमें दुश्मन को उसी की भाषा में ज़बाब देना होगा। एक पल नागभट् ने तक्षक की ओर देखा, फिर कहा कि अपनी बात खुल कर कहो तक्षक क्या कहना चाहते हो।
तक्षक ने महाराजा नागभट्ट से कहा कि अरब सैनिक महा बरबर, जालिम, अत्याचारी, जेहादी मानसिकता के लोग हैं। उनके साथ सनातन नियमों के अनुसार युद्ध करना अपनी प्रजा के साथ अन्याय होगा। उन्हें उन्हीं की भाषा में ज़बाब देना होगा।
महाराजा ने कहा किन्तु हम धर्म और मर्यादा को कैसे छोड़ सकते हैं, "तक्षक"
तक्षक ने कहा कि मर्यादा और धर्म का पालन उनके साथ किया जाता है जो मर्यादा और धर्म का मर्म समझें। इन राक्षसों का धर्म हत्या और बलात्कार है। इनके साथ वैसा ही व्यवहार करके युद्ध जीता जा सकता है।
राजा का मात्र एक ही धर्म होता है- प्रजा की रक्षा। राजन: आप देवल और मुल्तान का युद्ध याद करें। मुहम्मद बिन कासिम ने युद्ध जीता, दाहिर को पराजित किया और उसके पश्चात प्रजा पर कितना अत्याचार किया। यदि हम पराजित हुए तो हमारी स्त्रियों और बच्चों के साथ वे वैसा ही व्यवहार करेंगे।
महाराज : आप जानते ही हैं कि भारतीय नारियों को किस तरह खुले बाजार में राजा दाहिर के हारने के बाद बेचा गया। उनका एक वस्तु की तरह भोग किया गया।
महाराजा ने देखा कि तक्षक की बातों से सभा में उपस्थित सारे सेनापति सहमत हैं। महाराजा नागभट्ट गुप्त कक्ष की ओर तक्षक के साथ बढ़े और गुप्तचरों के साथ बैठक की।
तक्षक के नेतृत्व में युद्ध लड़ने का फैसला हुआ। अगले ही दिन कन्नौज की सीमा पर दोनों सेनाओं का पड़ाव हो चुका था। आशा थी कि अगला प्रभात एक भीषण युद्ध का साक्षी होगा।
आधी रात बीत चुकी थी। अरब की सेना अपने शिविर में सो रही थी। अचानक ही तक्षक के नेतृत्व में एक चौथाई सेना अरब के सैनिकों पर टूट पड़ी।
जब तक अरब सैनिक संभलते तब तक मूली गाजर की तरह हजारों अरबी सैनिकों को तक्षक की सेना मार चुकी थी। किसी हिंदू शासक से रात्रि युद्ध की आशा अरब सैनिकों को न थी। सुबह से पहले ही अरबी सैनिकों की एक चौथाई सेना मारी जा चुकी थी। बाकी सेना भाग खड़ी हुई।
जिस रास्ते से अरब की सेना भागी थी उधर राजा नागभट्ट अपनी बाकी सेना के साथ खड़े थे। सारे अरबी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। एक भी सैनिक नहीं बचा। युद्ध समाप्त होने के बाद राजा नागभट्ट वीर तक्षक को ढूंढने लगे। वीर तक्षक वीरगति को प्राप्त हो चुका था। उसने अकेले हजारों जेहादियों को मौत की नींद सुला दिया था।
राजा नागभट ने वीर तक्षक की भव्य प्रतिमा बनवायी। जो कन्नौज में आज भी उस बहादुर तक्षक की प्रतिमा विद्यमान है।
यह युद्ध सन् 733 में हुआ था। उसके बाद लगभग 300 वर्ष तक अरब से दूसरे आक्रमणकारी को आक्रमण करने की हिम्मत नहीं हुई।
यह इतिहास की घटना है जो सत्य पर आधारित है।
जागो हिन्दू जागो अपनी मातृभूमि की रक्षा करो।
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मित्रों प्राचीन भारत में शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल इतिहास है। हमारे प्राचीन भारत के 25 प्राचीन #विश्वविद्यालय... दुनिया भर से हजारों प्रोफेसर और लाखों छात्र यहां रहते थे और कई विज्ञानों और विषयों का अध्ययन और अध्यापन करते थे। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों की जानकारी दी जा रही है: समय अति प्राचीन काल है सभी विश्वविद्यालयों का।
1.नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 5वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और इसमें विभिन्न विज्ञान, दर्शन, और धर्म का अध्ययन किया जाता था। यहाँ पर 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे।
2.तक्षशिला विश्वविद्यालय (Taxila University):
स्थान: पाकिस्तान
स्थापना: 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व
विशेषता: यह भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यहाँ पर चिकित्सा, कानून, कला, सैन्य विज्ञान आदि की शिक्षा दी जाती थी।
3.विक्रमशिला विश्वविद्यालय (Vikramshila University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यह भी बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
4.ओदंतपुरी विश्वविद्यालय (Odantapuri University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: बौद्ध शिक्षा और साहित्य का प्रमुख केंद्र।
5.मिथिला विश्वविद्यालय (Mithila University):
स्थान: बिहार
विशेषता: न्यायशास्त्र और तंत्र की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध।
6.वल्लभी विश्वविद्यालय (Vallabhi University):
स्थान: गुजरात
स्थापना: 6वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यहां पर धर्म, कानून, और चिकित्सा की शिक्षा दी जाती थी।
7.स्रृंगेरी मठ (Sringeri Math):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: अद्वैत वेदांत का प्रमुख केंद्र।
8.कांचीपुरम विश्वविद्यालय (Kanchipuram University):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: यहाँ पर तमिल साहित्य और दर्शन का अध्ययन किया जाता था।
9.पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (Pushpagiri University):
स्थान: ओडिशा
विशेषता: यह बौद्ध और जैन शिक्षा का केंद्र था।
10. उज्जयिनी विश्वविद्यालय (Ujjayini University):
स्थान: मध्य प्रदेश
विशेषता: यहाँ पर ज्योतिष, खगोल विज्ञान, और गणित की शिक्षा दी जाती थी।
11.कृष्णापुर विश्वविद्यालय (Krishnapur University):
स्थान: पश्चिम बंगाल
विशेषता: विभिन्न विज्ञानों और संस्कृत की शिक्षा का केंद्र।
12.नेल्लोर विश्वविद्यालय (Nellore University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: यहां पर धर्म और तंत्र की शिक्षा दी जाती थी।
13.सोमपुरा विश्वविद्यालय (Somapura University):
स्थान: बांग्लादेश
विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
14.अमरावती विश्वविद्यालय (Amravati University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: बौद्ध और जैन शिक्षा का केंद्र।
15.नागरजुनकोंडा विश्वविद्यालय (Nagarjunakonda University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र।
16.रत्नागिरी विश्वविद्यालय (Ratnagiri University):
स्थान: ओडिशा
विशेषता: बौद्ध धर्म और तंत्र का केंद्र।
17.माल्कापुरम विश्वविद्यालय (Malkapuram University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: विभिन्न धर्मों और विज्ञानों की शिक्षा।
18.त्रिसूर विश्वविद्यालय (Trissur University):
स्थान: केरल
विशेषता: कला, साहित्य और ज्योतिष की शिक्षा।
19.विजयपुरा विश्वविद्यालय (Vijayapura University):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: धर्म, तंत्र, और ज्योतिष की शिक्षा।
20.कादयर विश्वविद्यालय (Kadayar University):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: तमिल साहित्य और कला का अध्ययन।
21.मयंकट विश्वविद्यालय (Manyaket University):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: धर्म और तंत्र का प्रमुख केंद्र।
23.उडीपी मठ (Udipi Math):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: अद्वैत वेदांत और धर्म की शिक्षा।
23.कण्णूर विश्वविद्यालय (Kannur University):
स्थान: केरल
विशेषता: साहित्य, कला और ज्योतिष की शिक्षा।
24.अन्नूरधपुर विश्वविद्यालय (Anuradhapura University):
स्थान: श्रीलंका
विशेषता: बौद्ध धर्म और तंत्र का केंद्र।
25.कंथालूर शाला (Kanthaloor Shala):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: विभिन्न विज्ञानों और तंत्र का प्रमुख केंद्र।
ये प्राचीन विश्वविद्यालय शिक्षा के उच्चतम मानकों के प्रतीक थे और यहाँ पर दुनिया भर से छात्र और शिक्षक ज्ञान प्राप्त करने और साझा करने के लिए आते थे। इन संस्थानों में विभिन्न विज्ञान, धर्म, कला, और तंत्र की शिक्षा दी जाती थी, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का हिस्सा हैं।
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NalandaUniversity
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Vikramshila
Odantapuri
Mithila
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Kanchipuram
Pushpagiri
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Krishnapur
Nellore
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Amravati
Nagarjunakonda
Ratnagiri
Malkapuram
Trissur
Vijayapura
Kadayar
Manyaket
UdipiMath
Kannur
Anuradhapura
KanthaloorShalaमित्रों प्राचीन भारत में शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल इतिहास है। हमारे प्राचीन भारत के 25 प्राचीन #विश्वविद्यालय... दुनिया भर से हजारों प्रोफेसर और लाखों छात्र यहां रहते थे और कई विज्ञानों और विषयों का अध्ययन और अध्यापन करते थे। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों की जानकारी दी जा रही है: समय अति प्राचीन काल है सभी विश्वविद्यालयों का।
1.नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 5वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और इसमें विभिन्न विज्ञान, दर्शन, और धर्म का अध्ययन किया जाता था। यहाँ पर 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे।
2.तक्षशिला विश्वविद्यालय (Taxila University):
स्थान: पाकिस्तान
स्थापना: 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व
विशेषता: यह भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यहाँ पर चिकित्सा, कानून, कला, सैन्य विज्ञान आदि की शिक्षा दी जाती थी।
3.विक्रमशिला विश्वविद्यालय (Vikramshila University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यह भी बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
4.ओदंतपुरी विश्वविद्यालय (Odantapuri University):
स्थान: बिहार
स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: बौद्ध शिक्षा और साहित्य का प्रमुख केंद्र।
5.मिथिला विश्वविद्यालय (Mithila University):
स्थान: बिहार
विशेषता: न्यायशास्त्र और तंत्र की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध।
6.वल्लभी विश्वविद्यालय (Vallabhi University):
स्थान: गुजरात
स्थापना: 6वीं शताब्दी ईस्वी
विशेषता: यहां पर धर्म, कानून, और चिकित्सा की शिक्षा दी जाती थी।
7.स्रृंगेरी मठ (Sringeri Math):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: अद्वैत वेदांत का प्रमुख केंद्र।
8.कांचीपुरम विश्वविद्यालय (Kanchipuram University):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: यहाँ पर तमिल साहित्य और दर्शन का अध्ययन किया जाता था।
9.पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (Pushpagiri University):
स्थान: ओडिशा
विशेषता: यह बौद्ध और जैन शिक्षा का केंद्र था।
10. उज्जयिनी विश्वविद्यालय (Ujjayini University):
स्थान: मध्य प्रदेश
विशेषता: यहाँ पर ज्योतिष, खगोल विज्ञान, और गणित की शिक्षा दी जाती थी।
11.कृष्णापुर विश्वविद्यालय (Krishnapur University):
स्थान: पश्चिम बंगाल
विशेषता: विभिन्न विज्ञानों और संस्कृत की शिक्षा का केंद्र।
12.नेल्लोर विश्वविद्यालय (Nellore University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: यहां पर धर्म और तंत्र की शिक्षा दी जाती थी।
13.सोमपुरा विश्वविद्यालय (Somapura University):
स्थान: बांग्लादेश
विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
14.अमरावती विश्वविद्यालय (Amravati University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: बौद्ध और जैन शिक्षा का केंद्र।
15.नागरजुनकोंडा विश्वविद्यालय (Nagarjunakonda University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र।
16.रत्नागिरी विश्वविद्यालय (Ratnagiri University):
स्थान: ओडिशा
विशेषता: बौद्ध धर्म और तंत्र का केंद्र।
17.माल्कापुरम विश्वविद्यालय (Malkapuram University):
स्थान: आंध्र प्रदेश
विशेषता: विभिन्न धर्मों और विज्ञानों की शिक्षा।
18.त्रिसूर विश्वविद्यालय (Trissur University):
स्थान: केरल
विशेषता: कला, साहित्य और ज्योतिष की शिक्षा।
19.विजयपुरा विश्वविद्यालय (Vijayapura University):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: धर्म, तंत्र, और ज्योतिष की शिक्षा।
20.कादयर विश्वविद्यालय (Kadayar University):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: तमिल साहित्य और कला का अध्ययन।
21.मयंकट विश्वविद्यालय (Manyaket University):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: धर्म और तंत्र का प्रमुख केंद्र।
23.उडीपी मठ (Udipi Math):
स्थान: कर्नाटक
विशेषता: अद्वैत वेदांत और धर्म की शिक्षा।
23.कण्णूर विश्वविद्यालय (Kannur University):
स्थान: केरल
विशेषता: साहित्य, कला और ज्योतिष की शिक्षा।
24.अन्नूरधपुर विश्वविद्यालय (Anuradhapura University):
स्थान: श्रीलंका
विशेषता: बौद्ध धर्म और तंत्र का केंद्र।
25.कंथालूर शाला (Kanthaloor Shala):
स्थान: तमिलनाडु
विशेषता: विभिन्न विज्ञानों और तंत्र का प्रमुख केंद्र।
ये प्राचीन विश्वविद्यालय शिक्षा के उच्चतम मानकों के प्रतीक थे और यहाँ पर दुनिया भर से छात्र और शिक्षक ज्ञान प्राप्त करने और साझा करने के लिए आते थे। इन संस्थानों में विभिन्न विज्ञान, धर्म, कला, और तंत्र की शिक्षा दी जाती थी, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का हिस्सा हैं।
AncientIndiaUniversities
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Mithila
Vallabhi
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Pushpagiri
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KanthaloorShala
ब्यूरो चीफ/हरदोई
गीतांजली वर्मा
शवेता दर्पण समाचार पत्र
आसमान गिर गया विपक्षी नेताओं की घर की छतों पर,_*
*_वक्फ बिल क्या पेश हुए, कोहराम मच गया -_*
*_JPC में क्या कर लोगे -_*
*_विपक्ष ने वक्फ बिल को JPC में भेजने की मांग की तो सरकार ने भी कोई इसमें कोई नानुकर नहीं की जबकि सरकार चाहती तो बिल लोकसभा में पास करा सकती थी - अब जो भी रिपोर्ट आएगी JPC की उस पर विपक्ष को बोलने का ज्यादा अधिकार नहीं रहेगा - वैसे JPC की रिपोर्ट अक्सर Party Lines पर ही आती है -_*
*_JPC में संसद के दोनों सदनों के 30 सदस्य होंगे, 20 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से और उन्हें लोकसभा स्पीकर नामित करेंगे - JPC की पहली बैठक होने के 3 महीने बाद उसे अपनी रिपोर्ट देनी होगी - मतलब कुछ समय के लिए मामला लटका है लेकिन मोदी सरकार ने गोटियां सोच समझ कर बैठाई हैं -_*
*_अखिलेश यादव की एक बात पर मेरा ध्यान गया - उसने कहा कि वक्फ बोर्ड में 2 सदस्य गैर-मुस्लिम रखने का क्या मतलब है जबकि अन्य धर्मों के साथ ऐसा नहीं किया जाता - DMK की कनिमोझी ने भी कहा कि क्या ईसाई और मुस्लिम किसी हिंदू मंदिर के बोर्ड में शामिल हो सकते हैं - कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने कहा, आज आप मुस्लिमों के लिए कानून बना रहे हो, कल ईसाइयों के लिए बनाएंगे, फिर आप जैन लोगों के लिए और फिर पारसी लोगों के लिए करेंगे -_*
*_शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह पीड़ादायक है और किसी भी देश की जिम्मेदारी होती है अल्पसंख्यकों की रक्षा करना - लेकिन इंडी गठबंधन के नेता चुप हैं हिंदुओं की दुर्दशा पर_*
*_ओवैसी कह रहा है कि यह बिल संविधान के Basic Structure पर हमला है, ये न्यायिक स्वतंत्रता और Separation of Powers की अवहेलना करता है - उसने यह भी कहा कि “आप मुसलमानों के दुश्मन हैं और यह बिल इसका सबूत है”_*
*_वेणुगोपाल जी, मुस्लिमों द्वारा 9 लाख एकड़ जमीन पर कब्ज़ा करने के साथ, ईसाइयों की चर्चों के लिए अंग्रेजों की फ्री में दी हुई जमीनों की 100 वर्ष की लीज़ कब की ख़त्म हो चुकी है, क्या करें उसका, आप ही बताओ - उसके विपरीत जैन और पारसी समाज ने कभी देश को कोई कोई समस्या नहीं दी, वो देश को देते है जबकि मुस्लिम तो लूट ही रहे हैं - जैन तो हिंदू ही हैं, आपने अलग किया उन्हें -_*
*_ओवैसी मियां, कैसे ढक्कन हो तुम, संविधान में वक्फ बोर्ड कहां से Basic structure हो गया बल्कि इसका तो कॉलेजियम की तरह संविधान में कोई जिक्र ही नहीं है -और दुश्मन मुस्लिमों की भाजपा नहीं है, दुश्मन हिंदुओं के मुस्लिम हैं, तभी पाकिस्तान ले गए और आज भी एक और पाकिस्तान मांग रहे हैं, आज मुस्लिमों की हिंदुओं से दुश्मनी का सबूत बांग्लादेश में दिखाई दे रहा है - अरफ़ा खानुम का शिव लिंग की जगह कूड़ेदान दिखाना क्या हिंदुओं के मोहब्बत की निशानी है - भगवान शंकर का अपमान हर मुसलमान कर रहा है लेकिन आप कुछ नहीं कहते -_*
*_अखिलेश और कनिमोझी आप भी सुनो -_*
*_तमिलनाडु हर साल करोड़ों रुपया हिंदू मंदिरों से जबरन वसूल करती है और चर्च और मस्जिदों को देती है और ऐसा दक्षिण के सभी राज्य करते हैं;_*
*_तिरुपति मंदिर के बोर्ड का अध्यक्ष एक ईसाई को बनाया गया दो बार;_*
*_बंगाल में तारकेश्वर मंदिर के बोर्ड का अध्यक्ष 2017 में एक मुस्लिम फिरहाद हाकिम को बनाया जो ममता के बहुत करीब था और जो अपने चुनाव क्षेत्र को “Mini Pakistan” कहता था -_*
*_वर्ष 2013 में कुंभ मेले की आयोजन समिति का अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक मुसलमान आज़म खान को बनाया -_*
*_वक्फ बोर्ड बना कर और उसे असीमित शक्तियां देकर कांग्रेस ने भारत में दूसरा पाकिस्तान बनाने की कुटिल चाल चली जिससे मुस्लिम देश पर कब्ज़ा कर सकें - वक्फ बोर्ड किसी की भी सम्पत्तियों को हड़प रहा है और उसी लिए 2 गैर मुस्लिमों को बोर्ड में रखना जरूरी है जिससे हिंदुओं और अन्य की भूमि न हड़पी जा सके -_*
विनेश फोगाट ओलंपिक से बाहर, बजरंग पुनिया की राजनीति..क्या सोचते हैं आप,
ऑलम्पिक में वो पूनिया के पर्सनल सिस्टम से गई होगी? सुनो, सुशील कुमार भी पदकधारी थे, उसकी कुश्ती के मेडल आज भी भारत की पदक तालिका में गिने जाते हैं, पर वो हत्या के अपराध में जेल में है।
विनेश ने जो तब माँगा (अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बिना ट्रायल के आगे जाएँ), वो तब भी अनुचित था, आज गोल्ड जीते तब भी अनुचित ही रहेगा।
वो गोल्ड जीतेगी हम उसे सर पर बिठाएँगे, वो राजनीति करेगी, तो राजनैतिक तथ्यों के हिसाब से ही आलोचना होगी। उसके लिए सम्मान एक खिलाड़ी के तौर पर था और रहेगा। किसी के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने पर चलेगी, तो लोग उसी मानदंड पर आँकेंगे।
बजरंग पूनिया की बकलोली यह है कि वो ‘सिस्टम से हार गई’ ऐसे कह रहा है मानो विनेश कुश्ती लड़ने जा रही थी और सरकार ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया, उसे जुलाब की गोलियाँ खिला दी और उसकी कार का टायर पंचर करा दिया!
खिलाड़ी का सम्मान खेल के लिए है, किसी काल्पनिक कथन के लिए नहीं कि फलाँ नेता ने साल भर में हजारों लड़कियाँ छेड़ दीं, वह भी तब जब आपने उसकी बड़ाई पहले की हो।
ब्यूरो चीफ/लखनऊ
कोमल
शवेता दर्पण समाचार पत्र
कंगना रनौत का राहुल गांधी पर बड़ा आरोप!*
"ड्रग्स लेते हैं राहुल गांधी, राहुल गांधी का डोप टेस्ट होनी चाहिए।"
"राहुल गांधी संसद में बदहवास हालत में पहुंचते हैं।"
"संसद में नॉनसेंस बातें करते हैं ऐसा कोई नशेड़ी ही कर सकता है।"
"राहुल गांधी की बातों से लगता है कि वो लगातार ड्रग्स का सेवन करते हैं।"
"राहुल गांधी संविधान का जरा भी सम्मान नहीं करते हैं, संसद में बिना सिर-पैर की बाते बोलते हैं।"
ब्यूरो चीफ/नोएडा
मीनाक्षी वर्मा
शवेता दर्पण समाचार पञ
सोचिए, आज से 48 वर्ष पूर्व जब बड़े-बड़ों ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए न्यूयॉर्क के मैनहटन में जमीन देने से इनकार कर दिया था, तब 30 साल का एक नवयुवक सामने आया और कहा - 'रथों के निर्माण के लिए दुनिया के सबसे पॉश इलाके में मैं दूँगा जमीन।'
वो नवयुवक कोई और नहीं, ट्रंप ही थे। तब जाकर न्यूयॉर्क में पहली बार जगन्नाथ रथ यात्रा संभव हुई। सबसे बड़ी बात - डोनाल्ड ट्रंप ने जो संपत्ति इस्कॉन को इस्तेमाल के लिए दी थी उसका नाम था 'पेंसिलवानिया रेलरोड यार्ड्स' और आज जो हमला हुआ है वो पेंसिलवानिया में ही हुआ है।
आप किस मिट्टी के बने हुए हैं, वो तभी दिखता है जब मौत एकदम आपके सामने से गुजर रही हो। डोनाल्ड ट्रम्प ने दिखा दिया कि ये उन शख्सों में हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी लड़ना नहीं छोड़ते।
कान से छू कर मौत निकल गई, चेहरे पर खून के छींटे पड़े हैं, सीक्रेट सेविस वाले घेरे में लिए हुए हैं, हजारों समर्थक आसपास मौजूद हैं, पूरी मीडिया खिलाफ में है - फिर भी चेहरे पर ललकार का भाव और भिंचीं हुई मुट्ठी दिखाती है कि ये व्यक्ति किस मिट्टी का बना हुआ है।
इसे महाप्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद कहें या कोई भी दैवीय हस्तक्षेप, एक तरफ पुरी में भगवान घर से बाहर निकले हुए हैं वहीं दूसरी तरफ 5 दशक पहले उनके काम में हाथ बँटाने वाला व्यक्ति मौत के मुँह से बाहर निकला है।
।।क्या फिनलैंड से भी कमजोर है भारत? जो काम राष्ट्रहित में फिनलैंड कर सकता है वो भारत क्यों नहीं कर सकता
मुस्लिम घुसपैठियों के खिलाफ फ़िनलैंड ने बनाया कानून !अपने देश में एक भी मुस्लिम घुसपैठिया को घुसने नहीं देगा।
सिरिया, ईरान, अफ्रीका, सोमालिया से आने वाले घुसपैठियों के खिलाफ संसद में पास किया कानून।फिनलैंड में अब बॉर्डर गार्ड को होगा अधिकार, बॉर्डर पर ही घुसपैठियों को रोक सकेंगे।
छिपकर फ़िनलैंड में घुसने वालों को ढूंढकर देश से बाहर निकालने की तैयारी में फ़िनलैंड सर
घुसपैठियों से सारा विश्व परेशान है। जहां भी ये कट्टरपंथी घिसपेठिए गए वहां की शांति को समझो ग्रहण लग गया, वहां अपराध लगातार बढ़ते जाते हैं और यही हाल हमारे भारत में भी है। हमारा प्रश्न है की जब एक फिनलैंड जैसा देश राष्ट्रहित में घुसपैठियों के विरुद्ध खड़ा निर्णय ले सकता है तो आखिर भारत देश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? भारत को भी घुसपैठ मुक्त करना ही चा
मुस्लिम घुसपैठियों के खिलाफ फ़िनलैंड ने बनाया कानून !अपने देश में एक भी मुस्लिम घुसपैठिया को घुसने नहीं देगा।
सिरिया, ईरान, अफ्रीका, सोमालिया से आने वाले घुसपैठियों के खिलाफ संसद में पास किया कानून।फिनलैंड में अब बॉर्डर गार्ड को होगा अधिकार, बॉर्डर पर ही घुसपैठियों को रोक सकेंगे।
छिपकर फ़िनलैंड में घुसने वालों को ढूंढकर देश से बाहर निकालने की तैयारी में फ़िनलैंड सर
घुसपैठियों से सारा विश्व परेशान है। जहां भी ये कट्टरपंथी घिसपेठिए गए वहां की शांति को समझो ग्रहण लग गया, वहां अपराध लगातार बढ़ते जाते हैं और यही हाल हमारे भारत में भी है। हमारा प्रश्न है की जब एक फिनलैंड जैसा देश राष्ट्रहित में घुसपैठियों के विरुद्ध खड़ा निर्णय ले सकता है तो आखिर भारत देश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? भारत को भी घुसपैठ मुक्त करना ही चाहिए।
मुस्लिम घुसपैठियों के खिलाफ फ़िनलैंड ने बनाया कानून !अपने देश में एक भी मुस्लिम घुसपैठिया को घुसने नहीं देगा।
सिरिया, ईरान, अफ्रीका, सोमालिया से आने वाले घुसपैठियों के खिलाफ संसद में पास किया कानून।फिनलैंड में अब बॉर्डर गार्ड को होगा अधिकार, बॉर्डर पर ही घुसपैठियों को रोक सकेंगे।
छिपकर फ़िनलैंड में घुसने वालों को ढूंढकर देश से बाहर निकालने की तैयारी में फ़िनलैंड सर
घुसपैठियों से सारा विश्व परेशान है। जहां भी ये कट्टरपंथी घिसपेठिए गए वहां की शांति को समझो ग्रहण लग गया, वहां अपराध लगातार बढ़ते जाते हैं और यही हाल हमारे भारत में भी है। हमारा प्रश्न है की जब एक फिनलैंड जैसा देश राष्ट्रहित में घुसपैठियों के विरुद्ध खड़ा निर्णय ले सकता है तो आखिर भारत देश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? भारत को भी घुसपैठ मुक्त करना ही चाहिए।
किसी भी देश पर इस्लामी कब्ज़ा करने के 12 चरण
भारत के बारे में मेरा आकलन
भारत अभी स्टेज 10 पर है
इसलिए भारत की स्थिति बहुत गंभीर है। 99% संभावना है कि भारत अगले X सालों में इस्लामी देश बन जाएगा
X का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि भारत के हिंदू कितना प्रतिरोध कर सकते हैं
लेकिन अभी भी 1% संभावना है कि भारत इस अधिग्रहण से उबर सकता है। अगर भारत तुरंत अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव करे, हिंदुओं को मजबूत करे, धर्म परिवर्तन के लिए सख्त कानून बनाए, समान नागरिक संहिता और सख्त NRC लाए और अप्रवासियों को बाहर निकाले।
भारतीय विधवा महिला के साथ पाकिस्तानी राजनयिक के घर में घिनौनी हरकत, FIR हुई तो पाकिस्तान भेजा और पीड़िता को …..
शैतान तो शैतानी करेंगे ही, पाकिस्तान हो या हिंदुस्तान।
पाकिस्तान में जो हिंदू महिलाओं के साथ होता है वो तो जगजाहिर है ही परंतु अब हिंदुस्तान की राजधानी नई दिल्ली में तैनात एक पाकिस्तानी राजनयिक के घर में काम करने वाली भारतीय महिला के साथ छेड़छाड़ और यौन संबंध बनाने की चेष्टा करने की घटना सामने आई है। अपने साथ हुए घृणित दुर्व्यवहार के चलते पीड़ित भारतीय महिला ने 28 जून 2024 को पुलिस के पास जा कर अपनी शिकायत दर्ज करवाई है।
पीड़िता के अनुसार पुलिस में शिकायत करने से पहले उसने पाकिस्तानी राजनयिक को मिन्हाज हुसैन की करतूत के बारे में विस्तार से बताया था परंतु तब हूसैन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद हुसैन को बकरीद के बहाने पाकिस्तान भेज दिया गया। पीड़िता के अनुसार उसकी फरियाद सुनने की बजाए उसे नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया है। इतना ही नहीं इसके बाद मिन्हाज फिर से हिंदुस्तान लौट आया और राजनयिक के यहाँ काम करने लगा।
बता दें की जिस पाकिस्तानी राजनयिक के घर यह घटना हुई है उसका नाम साद अहमद वाराइच है। मिन्हाज हुसैन उनके आधिकारिक निवास में रसोइए के तौर पर काम करता था। पीड़िता भी वहीं पर घरेलू सहायिका के तौर पर नौकरी कर रही थी। वह दोनों नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वाराइच के आधिकारिक आवास में बने सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी वर्ष फरवरी में मिन्हाज हुसैन भारत आया था।
वह तब से ही पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था। हुसैन महिला के साथ अश्लील छेड़ छाड़ करता था। उतना ही नहीं वह उसे यौन संबंध बनाने के लिए भी कहता था। हुसैन से परेशान पीड़िता ने वाराइच को इसके बारे में बताया तो बजाए कोई कार्रवाई करने के उन्होंने उसे बकरीद के बहाने चुपचाप पाकिस्तान भेज दिया।
इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग ने पीड़िता को फोन कर के 30 जून तक नौकरी और वाइराइच का घर छोड़ने को कह दिया और इसी बीच हुसैन पाकिस्तान से लौटकर फिर से वाइराइच के आवास में काम करने लगा। अपने साथ हुए अन्याय का इंसाफ ना मिलने पर आहत हो कर पीड़ित महिला 28 जून 2024 को तिलक मार्ग थाने में पहुंच गई और मिन्हाज हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी।
पीड़ित महीला के अनुसार वह विधवा है और उसके साथ अश्लीलता करने वाला हुसैन 54 वर्ष की आयु का है और वो पाकिस्तान का रहने वाला है। वह आधिकारिक पासपोर्ट और वीजा पर भारत में रह रहा है। शिकायत प्राप्त होने पर दिल्ली पुलिस ने IPC की धारा 354 के तहत FIR दर्ज कर ली। परंतु इससे पहले की पुलिस कोई एक्शन ले पाती मिन्हाज हुसैन को अधिकारियों द्वारा 30 जून को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया।
🔱🛕 *मेरी संस्कृति मेरा गौरव* 🛕🔱
01. अंको का अविष्कार भारत में हुआ।
02. शून्य का अविष्कार भारत ने किया।
03. अंकगणित का अविष्कार पूर्व भास्कराचार्य ने किया।
04. बीज गणित का अविष्कार भारत में आर्यभट्ट ने किया।
05. सर्वप्रथम ग्रहों की गणना आर्यभट्ट ने 499 ई. पूर्व में की।
06. भारतीयों को त्रिकोणमिति व रेखागणित का 2,500 ई.पूर्व से ज्ञान था।
07. समय और काल की गणना करने वाला विश्व का पहला कैलेण्डर भारत में लतादेव ने 505 ई. पूर्व सूर्य सिद्धान्त नामक अपनी पुस्तक में वर्णित किया।
08. न्यूटन से भी पहले गुरूत्वाकर्षण का सिद्धान्त भारत में भास्कराचार्य ने प्रतिपादित किया।
09. 3,000 ई. पूर्व लोहे के प्रयोग का प्रभाव वेदों में वर्णित है, अशोक स्तम्भ इसका स्पष्ट प्रमाण है।
10. 400 ई. पूर्व सुश्रूत (भारतीय चिकित्सक) द्वारा सर्वप्रथम प्लास्टिक सर्जरी का प्रयोग किया गया।
11. विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला के रूप में 700 ई. पूर्व भारत में स्थापित था, जहाँ दुनिया भर के 10,500 विद्यार्थी 60 विषयों का अध्ययन करते थे।
12. सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचने वाले प्रकाश की गति गणना सर्वप्रथम भास्कराचार्य ने की।
13. यूरोपिय गणितज्ञों से पूर्व ही छठी शताब्दी में बोद्धायन ने पाई के मान की गणना की, जो पाइथोगोरस प्रमेय के रूप में जाना जाता है। हमारा ज्ञान-विज्ञान और इतिहास गौरवशाली एवं समृद्ध है।
14. दुनिया का पहला संवत्-"विक्रम संवत्" पूरे एशिया से शकों को परास्त करते हुये अवन्ति के चक्रवर्ती सम्राट "विक्रमादित्य महान" ने प्रवर्तित किया। जो ईसा पूर्व 56 से आरम्भ हुआ। इसका उल्लेख जूलियस सीज़र के रोम ऐतिहासिक तिथिक्रम में भी है। सम्राट गदाफेरिज के लेख में भी विक्रम संवत् का उल्लेख ज्यू ग्रन्थ अनुसार मिलता है, इससे विक्रम संवत् की विश्व व्यापकता स्पष्ट होती है।
15. महान वैज्ञानिक डां.जगदीशचन्द्र बसु ने ही पहला वायरलेस कम्युनिकेशन का अविष्कार किया, जो बाद में विकसित होता चला और आज मोबाइल, इण्टरनेट आदि के रूप में विकसित हुआ।
16. सूर्य किरण में सात रंग है यह डां. सी. वी. रमन ने पहली बार दुनिया को बताया। 19 वीं सदी में यह दुनिया ने जाना और Scattering of Lights के सिध्दान्त पर उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन गर्व और हैरानी की बात ये है कि "तैत्तिरीय संहिता" नामक प्राचीन ग्रन्थ को "सप्त-रश्मी" कहा गया है। यानी तैत्तिरीय संहिता के लेखक ऋषि वैज्ञानिक, सी. वी. रमन से पहले ही उनकी Theory समझ चुके थे और उस ज्ञान विज्ञान के ज्ञाता थे।
17. पहला अर्थशास्त्र भारत में लिखा गया, कौटिल्य दुनिया के पहले अर्थशास्त्री थे।
18. दुनिया का पहला संविधान भारत ने ही लिखा, राजा मनु इसके रचयिता थे और वेद आधार था, इसका नाम मनुस्मृति था। यह राजनितीशास्त्र का पहला महान ग्रन्थ है। अंग्रेज़ी षड्यन्त्र के तहत मैक्समूलर के हाथो अंग्रेज़ों ने लिखवाकर इसमें तोडमरोड़ की और तथ्यों को बदल दिया।
19. नाव का अविष्कार और सोने के सिक्कों का प्रचलन आर्यावर्त की ही देन है।
20. पारा (Mercury) बनाने की विधियाँ वैज्ञानिक नागार्जुन एवं महर्षि चरक ने सर्वप्रथम दुनिया को दी।
21. एक्यूप्रेशर चिकित्सा जो आज चीन में भी विकसित है, वह भारत की ही देन है।
22. बोधिवर्मन की मार्शल आर्ट प्रणाली भारत की ही प्राचीन देन है। स्वयं श्रीकृष्ण इसमें निष्णात और पारंगत योद्धा थे, उन्होंने इसी के प्रयोग द्वारा कंस के बलाढ्य पहलवान मार गिराये।
*🚩धर्मो रक्षति रक्षितः...*🚩
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की गई है.
एडवोकेट विनीत जिंदल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें विदेशी राज्य 'फिलिस्तीन' के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए ओवैसी को अनुच्छेद 102 (4) के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हरिशंकर जैन ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ शिकायत की और अयोग्य ठहराने की मांग की है.
पानी जेहाद" गोताखोर जेहादी हिंदुओं श्रद्धालुओं को पानी में डुबाकर मार रहे...?..
एक खबर सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल हो रही है, खबर पहले भी वायरल हुई थी और एक बार फिर आग की तरह फेल रही है क्योंकि हनुमानगढ़ी के महान राजू दास जी ने इस खबर को ट्वीट किया पानी जेहाद ...... !! सच या झूठ ये दूसरी बात है लेकिन ऐसा हो सकता है या नहीं ये आप पोस्ट पढ़ने के बाद कमेंट जरुर करें
पुलिस की प्रारम्भिक जाँच में मोदीनगर के गंग नहर में ऐसे कई सुबूत मिले है जो पिछले एक महीने में 60 लोगो की डूबने से हुई मौत पर सवाल उठाते है,
इन सभी लोगो के शव नहर से खोजने के लिए वहाँ गोताखोरी करने वाले मुस्लिम गोताखोरों ने 30 से 40 हजार रूपये लिए है! पता चला की नहर के अंदर झाड़ियो और पत्थरों से मोटी रस्सियाँ बंधी मिली।
यानी जो लोग घाट पर नहाने के लिए जाते थे तो पहले से ही पानी में घात लगाये 10-15 मुस्लिम गोताखोरो में से कोई भी उनका पैर पकडकर गहरे पानी में खिंच लेता था!फिर उन्हें डुबोकर मार देता था फिर शव को पानी के अंदर ही पत्थर या झाडी से बाँध देता था।
फिर जब परिजनों को डूबने की सुचना मिलती थी तब यही मुस्लिम गोताखोर सामने आकर शव को पानी से खोज निकालने का सौदा करते थे, और 40 हजार रूपये वसूलते थे!
सोचिये ये कौम पैसे के लिए कितनी नीचता करती है!
एक काफिर को मारकर जन्नत का टिकट भी पक्का किया, सवाब कमाया और 40 हजार उसी काफिर के रिश्तेदारों से वसूले।
AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की गई है.
एडवोकेट विनीत जिंदल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें विदेशी राज्य 'फिलिस्तीन' के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए ओवैसी को अनुच्छेद 102 (4) के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हरिशंकर जैन ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ शिकायत की और अयोग्य ठहराने की मांग की है.
#AIMIM #Owaisi #Palestine
असल पहचान छिपा के हिंदू लड़की का शिकार किया फिर करवा दिया दोस्तों से गैंगरेप, साथियों सहित पकड़ा गया शहीद
हर रोज हो रहे नए नए खुलासों के बावजूद बर्बाद होने को तैऐसे आरोप लगाते रहते हैं कि मुस्लिम युवकों को मस्जिदों और मौलवियों से हिंदू लड़कियों को फसाने के लिए पैसे मिलते हैं। इस इन बातों में सच्चाई कितनी है यह हमें नहीं पता किंतु यह तो एक अकाट्य सच्चाई है कि अगर हिंदुओं के धर्म गुरुओं ने हिंदुओं को और हिंदुओं की बेटियों को बजाए ठुमके लगाने के अच्छे संस्कार दिए होते तो आज हिंदुओं की लड़कियां इस तरह से लव जिहाद का शिकार ना हो रही होती।
अब फिर से एक हिंदू लड़की ने एक लव जिहादी के जाल में फंस कर अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली है। इस लड़की के साथ अपनी असल पहचान छुपा कर एक मुसलमान युवक ने मित्रता की और फिर उसके साथ अपने दोस्तों से गैंग रेप भी करवा दिया। जैसा कि हर मामले में होता है की हिंदू लड़कियों पर मुसलमान बनने का दबाव बनाया ही जाता है इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। अपने साथ हुई सारी आपबीती के बारे में पीड़ित युवती ने पुलिस के पास शिकायत दी है।
अब मध्यप्रदेश के इंदौर में एक हिंदू लड़की के साथ लव जिहाद होने की घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शाहिद नाम के मुस्लिम युवक ने अपनी असली पहचान छिपाते हुए एक हिंदू लड़की को अपनी जाल में फँसाया, फिर पोल खुलने के बाद उसे झांसा दिया की ‘तुम मुस्लिम ना बनना’। इस तरह अपने जाल में उलझाकर हिंदू लड़की से शादी भी कर ली। जिसके बाद लड़की एक बच्चे की मां भी बन गई।
पता चला है की बच्चा पैदा होने के बाद 1 साल तक शाहिद अहमद कहीं चला गया और जब लौटा तो उसने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपनी पत्नी के साथ गैंगरेप कर डाला। इतना ही नहीं उसनेवहिंदू लड़की पर धर्म-परिवर्तन करके मुसलमान बनने का दबाव भी डाला। मीडिया सूत्रों के अनुसार 24 साल की लड़की ने कनाड़िया थाना पुलिस को दी शिकायत में ये आरोप भी लगाया कि शाहिद से उसकी दोस्ती कॉल सेंटर के माध्यम से हुई। तब शाहिद ने उसे अपना नाम राज बताया था, और उसके साथ प्रेम संबंध बनाया।
पीड़िता के अनुसार जब वो राज के साथ उसके घर गई, तो पता चला कि वो राजवनाहीन बल्कि शाहिद नाम का ऐक मुसलमान है। जब उसने अपने साथ किए गये धोखे के बारे में शहीद से जानना चाहा तो शाहिद ने कहा कि – उसे मुस्लिम बनने की जरूरत नहीं है। वो हिंदू रहकर भी उसके साथ अपनी जिंदगी बिता सकती है। तब शाहिद की लच्छेदार बातों में लड़की आ गई। पुलिस को दिए बयान में पीड़ित लड़की ने कहा है कि शाहिद से उसे एक बेटा हुआ, जिसका शाहिद ने मुस्लिम नाम रखा।
पीड़िता के अनुसार शाहिद अहमद उर्फ राज, सास शबनम, ननद सानिया अहमद उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे। इसके बाद शाहिद एक साल के लिए बाहर चला गया था। जब वो लौटा, तो अपने दोस्तों नौमान खान, फैसल खान और वसीम अख्तर के साथ घर आया। तब शाहिद ने उसे कोई नशा दिया जिसके बाद नशें की हालत में उन सभी ने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया।
आरोप है कि शाहिद और उसके परिवार के लोगों ने उसका धर्म बदलने का प्रयास भी किया। वो सबकुछ सहती रही, परंतु गैंगरेप के बाद उसने अपने परिजनों और हिंदू संगठनों के सदस्यों को अपने बारे में सब कुछ बता दिया। इस मामले की सूचना मिलने पर हिंदू संगठनों ने 10 जून 2024 को कनाड़िया थाने पर जोरदार हंगामा किया, जिसके बाद ये मामला मीडिया की नजर में आया। इस मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और साथ ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
बड़ा सवाल – क्या अब भी हिंदू धर्मगुरु या कथावाचक हिंदुओं को सावधान करने की बजाए नचवाते ही रहेंगे ?1
लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही एनडीए -* जो न तो एंटी इनकम्बेंसी का शिकार हुई, और न ही *तमाम विपक्ष के एकजुट होने* के *झूठी अफवाहें और तानाशाही* के डर को धता बताकर भी मतदाताओं ने एक बार फिर *मोदी जी पर विश्वास दिखाया* है! फिर भी आश्चर्य यह है कि, इस *जीत को भी हार की तरह प्रोजेक्ट* किया जा रहा हैं।
अकेली बीजेपी 240 से ज्यादा सीटें ला रहीं हैं...वहीं कॉंग्रेस दस साल से सत्ता से दूर रहने के बाद भी 100 का आंकड़ा नहीं पार कर पाई हैं। उनके *युवराज जो शहजादे* हैं, वो आम आदमी बनकर सड़को पर निकल गए... *युवा नेता से गम्भीर प्रोढ़* बनकर उन्होंने हर तरह के *प्रलोभन और डर* दिखाए गए....*पर नतीजा यह है कि उनके अपने दम पर 100 सीट भी निकल नहीं* पाई!
आज *3 सीट जीतने वाले भी उछल* रहे हैं...*21 वाले मास्टर स्ट्रोक* के लिए रेडी हैं तो *16 वाले मजबूत* दिख रहे हैं! पर हम इन सबके बीच यह *भूल रहे* हैं कि यह *खेल मात्र बहुमत* का हैं।
लगातार *दस वर्षों तक राज* कर के *तीसरी बार सत्ता में आना* संकेत है कि *एक बड़ा वर्ग आज भी मोदी और एनडीए को चाहता* हैं।
साथ ही यह संकेत भी है कि जो *मतदाता आपको मत देते* हैं वो *आपसे अपेक्षा रखते* ही हैं...उन्हें पूरा करने की *जिम्मेदारी सरकार* की ही है।
यह *चेतावनी हैं उन मतदाताओं* को भी है जो *आलस्य, डर या लोभ* में आकर अपने *मताधिकार का उपयोग नहीं* करते हैं!
सरकार को समझना चाहिए कि उनका *'कोर वोटर' उनसे विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के साथ उनके साथ का विश्वास भी चाहता* हैं।
...यही *राजनीति* हैं, जिसमे *आप जीतते हो तो सब जायज़* हैं, सब *स्वीकार्य* हैं...*पर हारते हैं तो* आपके *अच्छे कार्य भी बुरे* में आएंगे!
इस *समय एक मजबूत विपक्ष की देश को जरूरत* थी। यह *आई ओपनर* हैं। यह *जरूरी* था।
दोनो पार्टी के मतदाता ख़ुशी मना सकते हैं क्योंकि...न तो *ईवीएम में गड़बड़ी हुई, चुनाव आयोग भी न्यूट्रल रहा और कोई तानाशाही या डर भी नहीं* रहा!🎐
🎐यह लोकतंत्र की जीत हैं। यह हम सब की लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही एनडीए -* जो न तो एंटी इनकम्बेंसी का शिकार हुई, और न ही *तमाम विपक्ष के एकजुट होने* के *झूठी अफवाहें और तानाशाही* के डर को धता बताकर भी मतदाताओं ने एक बार फिर *मोदी जी पर विश्वास दिखाया* है! फिर भी आश्चर्य यह है कि, इस *जीत को भी हार की तरह प्रोजेक्ट* किया जा रहा हैं।
अकेली बीजेपी 240 से ज्यादा सीटें ला रहीं हैं...वहीं कॉंग्रेस दस साल से सत्ता से दूर रहने के बाद भी 100 का आंकड़ा नहीं पार कर पाई हैं। उनके *युवराज जो शहजादे* हैं, वो आम आदमी बनकर सड़को पर निकल गए... *युवा नेता से गम्भीर प्रोढ़* बनकर उन्होंने हर तरह के *प्रलोभन और डर* दिखाए गए....*पर नतीजा यह है कि उनके अपने दम पर 100 सीट भी निकल नहीं* पाई!
आज *3 सीट जीतने वाले भी उछल* रहे हैं...*21 वाले मास्टर स्ट्रोक* के लिए रेडी हैं तो *16 वाले मजबूत* दिख रहे हैं! पर हम इन सबके बीच यह *भूल रहे* हैं कि यह *खेल मात्र बहुमत* का हैं।
लगातार *दस वर्षों तक राज* कर के *तीसरी बार सत्ता में आना* संकेत है कि *एक बड़ा वर्ग आज भी मोदी और एनडीए को चाहता* हैं।
साथ ही यह संकेत भी है कि जो *मतदाता आपको मत देते* हैं वो *आपसे अपेक्षा रखते* ही हैं...उन्हें पूरा करने की *जिम्मेदारी सरकार* की ही है।
यह *चेतावनी हैं उन मतदाताओं* को भी है जो *आलस्य, डर या लोभ* में आकर अपने *मताधिकार का उपयोग नहीं* करते हैं!
सरकार को समझना चाहिए कि उनका *'कोर वोटर' उनसे विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के साथ उनके साथ का विश्वास भी चाहता* हैं।
...यही *राजनीति* हैं, जिसमे *आप जीतते हो तो सब जायज़* हैं, सब *स्वीकार्य* हैं...*पर हारते हैं तो* आपके *अच्छे कार्य भी बुरे* में आएंगे!
इस *समय एक मजबूत विपक्ष की देश को जरूरत* थी। यह *आई ओपनर* हैं। यह *जरूरी* था।
दोनो पार्टी के मतदाता ख़ुशी मना सकते हैं क्योंकि...न तो *ईवीएम में गड़बड़ी हुई, चुनाव आयोग भी न्यूट्रल रहा और कोई तानाशाही या डर भी नहीं* रहा!🎐
यह लोकतंत्र की जीत हैं। यह हम सब की जीत हैं - जीत की बधाई l
तेलंगाना के करीमनगर में एक दिलचस्प घटना सामने आई है. यहां कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के लिए एक मंदिर बनाया गया है ताकि तेलंगाना राज्य देने के लिए उनका धन्यवाद किया जा सके. यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसे पार्टी के जिला महासचिव नेवरी वेंकट रेड्डी और उनकी पत्नी येल्लारेड्डीपेट ममता, एक पूर्व सरपंच, ने बनवाया है.राजन्ना सिरसिल्ला जिले के येल्लारेड्डीपेट में साईबाबा कामन स्थित इस मंदिर का उद्घाटन रविवार को तेलंगाना गठन दिवस पर टीपीसीसी सदस्य नागुला सत्यनारायण ने किया. वेंकट रेड्डी ने बताया कि जब सोनिया गांधी ने तेलंगाना के लिए राज्य का दर्जा देने की घोषणा की और लगभग साढ़े चार करोड़ लोगों के सपने को पूरा किया, तो उन्होंने उनके लिए एक मंदिर बनाने का संकल्प लिया था.उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्माण को पूरा करने में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि बंटवारे के बाद बीआरएस सरकार बन गई और उसके नेताओं ने उनके लिए कई बाधाएं खड़ी कीं. लेकिन पिछले साल विधानसभा चुनावों में जीत के बाद राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के साथ, वह निर्माण को सफलतापूर्वक पूरा कर पाए और तेलंगाना गठन दिवस पर इसका उद्घाटन करके खुश हैं.
वेंकट रेड्डी ने कहा- "सोनियाम्मा के बिना, अलग तेलंगाना राज्य हासिल करने का सपना संभव नहीं होता. हमारा सपना पूरा करने के लिए उनकी पूजा करना हमारा कर्तव्य है," यह घटना तेलंगाना में सोनिया गांधी के लिए राज्यवासियों की कृतज्ञता और सम्मान को दर्शाती है. यह राजनीतिक क्षेत्र में एक अनोखी घटना है, जहां एक नेता के लिए मंदिर बनाया गया है.
एक बात कहनी आवश्यक है, क्योंकि अब चुनाव बीत चुका है। दो महीने की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अगर सबसे अधिक शिकायतें किसी की मिली हैं, तो वो भाजपा की IT सेल है, मेरे पास ये कहने के कारण हैं।
Quality के नाम पर इनके पास कुछ नहीं है। सिर्फ विभिन्न हैंडलों से PM नरेंद्र मोदी के ट्वीट्स को रीट्वीट करवाना ही इनका काम है। हर एक मुद्दे पर विमर्श किस दिशा में चले, कितना व्यापक हो और कैसे इसमें विपक्षियों को लपेटा जाए - इसकी कोई तैयारी इनकी तरफ से नहीं दिखती।
ये इस लायक भी नहीं हैं कि विरोधियों को काउंटर कर सकें। एक ध्रुव राठी ने इनके पूरे इकोसिस्टम को हिला कर रख दिया, अंत में जर्मन शेफर्ड को जवाब दिया भी तो ऐसे गों ने ही जिन्हें BJP का आईटी सेल देखना तक नहीं चाहता। रवीश कुमार की प्रासंगिकता भी खत्म करने का श्रेय IT सेल को नहीं जाता।
वो दक्षिणपंथी मीडिया संस्थानों को अपने जूतों की नोक पर रखना चाहते हैं, १०० वीडियो/आर्टिकल में से अगर एक उन्हें पसंद नहीं आया तो इसके लिए बेचारे छोटे-मोटे संस्थानों को उनके कोपभाजन का सामना करना पड़ता है।
उन्हें जमीन की समझ नहीं है। सांसदों के नकारेपन को लेकर अगर कोई भाजपा का मतदाता भी आवाज़ उठाता है तो उसे डपट दिया जाता है। जबकि IT सेल का काम है कि ऐसी समस्याओं को ऊपर तक पहुँचाए। कम से कम जनता से लोकल मुद्दों को लेकर राय-मशविरा ही कर लिया गया होता तो बिहार जैसे राज्य में पार्टी की सीटें घटती हुई नहीं दिखतीं।
ठेकेदारों का Ego उनके सर चढ़ कर बोलता है। IT सेल एक महीने में एक वीडियो बनाता होगा, वो भी ख़राब गुणवत्ता वाला। इधर कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोज-रोज वीडियो बना कर I.N.D.I. गठबंधन के खिलाफ माहौल बनाते रहे, लेकिन उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया जाता है। जितना भाजपा का आईटी सेल १ साल में करता है, वो काम आनंद रंगनाथन या अजीत भारती जैसे लोग ३ दिन में कर देते हैं।
कुछ ऐसे चंद नेता चुन लिए गए हैं, जिनका पिछलग्गू बनने में IT सेल के कर्मियों को मजा आता है। ये नेता खूब पैसे खर्च करते हैं, इनका ख्याल रखते हैं, अपने क्षेत्र में इन्हें सुविधाएँ मुहैया कराते हैं। ऐसे में उनके लिए ये जनता को गाली देने तक के लिए तैयार रहते हैं।
इनका Arrogance अलग स्तर पर पहुँच चुका है। इसीलिए, इनकी जगह नए लोगों को वहाँ डालने की आवश्यकता है। भले ही आपके कार्यों से भाजपा को फायदा पहुँच रहा हो, लेकिन अगर आप IT सेल के लोगों से किसी प्रकार की मदद या समर्थन की अपेक्षा करते हैं तो ये बेमानी है। हाँ, ये ऊपर के नेताओं के पास जाकर ऐसे कार्यों का श्रेय ज़रूर लूट लेते हैं।
कई लोगों ने बताया है कि घटिया कंटेंट के नाम पर ऊपर से बड़ा बजट उठाया जाता है। दर्जनों PR कंपनियाँ बना ली गई हैं और उनके माध्यम से खूब लूट मचाई जा रही है। इन पैसों का बहुत कम हिस्सा नीचे के लोगों तक पहुँचता है, जो सही में मेहनत कर रहे हैं। प्रतिभावान युवाओं से मुफ्त में ही काम लिया जाता है।
ये असहिष्णु हैं, सकारात्मक आलोचना को बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं रखते हैं। 'किसान आंदोलन' के समय इनका ये कन्फ्यूजन दिखा था। अगर आप कोई सलाह देंगे तो ये पूछने लगेंगे कि क्या तुम मोदी-शाह से ज़्यादा होशियार हो? जबकि इनका काम ही है जनता के मूड को भाँप कर उस हिसाब से सोशल मीडिया की रणनीति बनाना।
सभी बड़े नेताओं के इर्दगिर्द ये ऐसे फैले हुए हैं कि नेताओं से आपके व्यक्तिगत रिश्ते नहीं हैं तो उन तक अपनी बात पहुँचाना तक दूभर हो जाएगा। अब तो फिल्म निर्माताओं से लेकर कारोबारियों तक के इर्दगिर्द अब ये जम चुके हैं।
कटु_सत्य - आधुनिकता के कारण बिगड़ता समाज का संतुलन
कुछ पढ़ी लिखी लडकियां ही ज्यादातर कोर्ट का चक्कर इसलिए लगा रहीं हैं...क्योंकि, उनसे घर का काम नहीं होता है ? पढ़ी लिखी लडकियां इसलिए भी एकाकी जीवन में रह रहीं हैं, क्योंकि, उनकी उसी व्यक्ति से पटरी नहीं खा रही है जिनके साथ अग्नि के सात फेरे लिए हुए हैं ?क्योंकि उनकी शिक्षा उनको सामंजस्य बैठाना नहीं सिखाती, सास ससुर की सेवा का भाव नहीं सिखाती ? घरों में माता पिता संस्कार ही नहीं दे पाते
(नोट: ये बातें सभी लड़कियों पर नहीं लागू होती लेकिन कुछ पर फिट बैठती हैं.... अन्यथा ना लेते हुए ध्यान से समझने की जरूरत है ताकि हमारा समाज एक अच्छा समाज बना रहे...नारी हमारे समाज की रीढ़ है इसलिए उसपर चिंतन महत्वपूर्ण हो जाता है बाकी हमारे हिंदू समाज का पतन होता तो सबको नजर आ ही रहा है)
ससुराल में एक मर्यादित जीवन में रहना नहीं सिखाती,
और सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात... अधिकतर पढ़ी लिखी लड़कियां... शायद अब लडकियां रही ही नहीं ? वे हर मामले में सबको सबक सिखाने की होड़ में लगी हुई हैं...शायद उनके अंदर की लड़की समाप्त हो चुकी है ?
पत्नी अब पति के लिए पत्नी नहीं अपितु एक जेलर, उसका मालिक बनने की होड़ में रहती है ?
वह स्वयं के दोषों को अपनी ही गलतियों के कारण बढ़ा रही है ? ईर्ष्या, द्वेष, शक, कर्कश बोलना, चिंतन न करना, सामाजिकता से न रहना आदि बहुत से दोषों के कारण वह अपने ही परिवार को नष्ट कर रही हैं, जाने अनजाने अपने ही पति, बच्चों, परिवार, संबंधियों के हृदय में अपने लिए नफरत बो रही हैं ?
कानून के ढुलमुल रवैये , नए नए असामजिक नियमों के कारण, लिव इन में रहना, अवैध संबंध, समलैंगिता आदि ने और भी ज्यादा बेड़ा गर्क किया हुआ है....
ब्यूरो चीफ/ग्वालियर
बीना वर्मा
शवेता दर्पण समाचार पत्र
"साहब, मेरे पास दिल्ली जाने के लिए पैसे नहीं हैं, कृपया पुरस्कार डाक से भेज दीजिए।"
ये शब्द पद्मश्री पुरस्कार विजेता हलधर नाग के हैं।
हलधर नाग, जिन्हें कभी 'श्री' कहकर नहीं पुकारा गया, उनके पास केवल तीन जोड़ी कपड़े, एक टूटी हुई रबर की चप्पल, एक जोड़ी रिमलेस चश्मा है और उनके पास 732 रुपये की बचत है। फिर भी, उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
हलधर नाग, ओडिशा के रहने वाले हैं और कोसली भाषा में लिखने वाले एक प्रसिद्ध कवि हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि वे अपनी सभी कविताओं और अपने द्वारा लिखे गए 20 महाकाव्यों को याद से सुना सकते हैं। उनके लेखन का संग्रह, 'हलधर ग्रंथावली 2' अब संबलपुर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
हम इस असाधारण व्यक्ति को अपना सम्मान देते हैं और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए पद्मश्री चयन समिति की सराहना करते हैं।
कथनी और करनी के अंतर को समझो...कांग्रेस कहती कुछ है और करती कुछ
चुनावों के समय कांग्रेस बातें तो बहुत भली-भली करती है, लेकिन उसका एक्चुअल ट्रैक-रिकॉर्ड क्या है - इस पर कभी बात क्यों नही होती?
मोदी के दौर मे इस देश ने किस किस फ्रंट पर दुनिया मे अपना लोहा मनवाया है — यह कोई गुप्त रहस्य नही है। यह बच्चा-बच्चा जानता है, यहाँ तक कि पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश के लोग भी जानते और मानते हैं।
रेनकोट अंकल की पगड़ी पर पाँव धर कर राजमाता और शहजादे ने भी मोदी की ही तरह पूरे दस वर्षों तक इस देश पर शासन किया है। मै शहजादे और कांग्रेस - दोनो को चुनौती देता हूँ कि उन दस वर्षों के दौर कि कोई एक भी ऐसी उपलब्धि बता दें जिसके लिये वैश्विक पटल पर भारत के बारे मे कोई सकारात्मक चर्चा तक हुई हो कभी. . . कोई एक भी?!?
कांग्रेसियों तुम्हें चैलेंज है पूरे 10 वर्ष में कोई एक ऐसा काम बता दो जिसके कारण भारत का नाम रोशन हुआ दुनिया में
साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश के साथ जो हुवा या कहें जो कांग्रेस सरकार के समय किया गया वो सुनके आपकी आत्मा सिहर उठेगी। इतना अत्याचार ऐसा महापाप हुवा ताकि हिंदू आतंकवाद की कांग्रेसी थियरी को सच किया जा सके। साध्वी प्रज्ञा को केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया अपितु एक साध्वी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए पोर्न दिखाते मानसिक प्रताड़ना भी दी, कर्नल पुरोहित को नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर हमले किए गए, मेजर रमेश को बेटी के रेप की धमकियां दी गई ताकि RSS, VHP के लोगों को फंसाकर हिंदू आतंकवाद को बनाया जा सके।
ऐसी पार्टी पर कैसे भरोसा किया जा सकता है, कैसे कोई हिंदू इस विचारधारा का समर्थन कर सकती है और इन्हें वोट कर सकते हैं। हिंदू आतंकवाद की थ्योरी रची और फिर उस थ्योरी को सच बनाने के लिए सारी हदें पार कर कानून का दुरुपियोग किया और सेना और संत समाज से जुड़े लोगों को निशाना बनाया। हिंदू समाज इन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
हिंदू बहुसंख्यक देश में जो हिंदूविरोधी माहौल आज आपको देखने को मिलता है वो एक रात का या कुछ सालों का काम नहीं है। दशकों से कॉन्ग्रेस की सरकार ने इसकी परिपाटी तैयार की है। कॉन्ग्रेस ही वो पार्टी है जिनके सत्ता में रहने के दौरान ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द अस्तित्व में आया और उन्होंने इसे सही साबित करने के लिए निर्दोषों पर अत्याचार की हदें पार कर दीं।
आपको अगर इस बात को और गहराई से समझना है तो साल 2008 में हुआ मालेगाँव ब्लास्ट के बारे में जानना होगा। इस केस को पढ़कर आपको पता चलेगा कि कैसे कॉन्ग्रेस की प्राथमिकताओं में मुस्लिमों को खुश रखना हमेशा सबसे टॉप पर था, वहीं हिंदू उनके लिए कुछ भी नहीं थे।
बात साल 29 सितंबर 2008 की है। मुंबई के मालेगाँव में ब्लास्ट हुआ था। धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। तब, केंद्र में यूपीए की मनमोहन सरकार थी। चूँकि ये घटना एक मस्जिद के पास घटी थी इसलिए कॉन्ग्रेस ने इसे खूब भुनाया और जन्म दिया ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को। उन्होंने जगह-जगह इस शब्द का प्रयोग शुरू किया। सवाल उठे, तो अपनी थ्योरी सही साबित करने के लिए वह ऐसे लोगों को पकड़कर प्रताड़नाएँ देने पर आमादा हो गए, जिनसे उनकी थ्योरी को बल मिले। हालाँकि बाद में उनकी इस कुत्सित प्रयास की पोल दुनिया के आगे खुद उनके ही काल के ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि ने खोली थी।
आरवीएस मणि एक पूर्व नौकरशाह हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस के दौर में गृह मंत्रालय में एक अंडर-सेक्रेटरी के रूप में काम किया था। अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ में, मणि ने संपूर्ण मिलीभगत का वर्णन किया हुआ है। उन्होंने बताया है कि किन-किन खिलाड़ियों ने ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने के लिए मिलीभगत की और कैसे, कई वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कई अन्य लोग इस साजिश में शामिल थे।
वहीं, कोर्ट में भी गवाहों ने यह जानकारी दी थी उनके ऊपर हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए कहा गया था। ये जानकारी चौंकाने वाली थी। लेकिन जब तक ये सच सामने आया तब तक कॉन्ग्रेस के तुष्टिकरण का शिकार ‘निर्दोष’ हो चुके थे। इनमें एक देश की सेना के कर्नल पुरोहित थे, मेजर रमेश उपाध्याय थे और भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा थीं। तीनों का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने ये फैलाने के लिए किया कि उनकी हिंदू आतंकवाद की थ्योरी एकदम सही है।
आज के समय में जहाँ सेना और संत-समाज से जुड़े लोगों को सम्मान देने का काम होता है, उनके लिए पाकिस्तान तक से देश की ठन जाती है, उसी वर्ग पर कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार में महाराष्ट्र एटीएस ने असहनीय दर्द दिए थे। इन्हें शारीरिक, सामाजिक और मानसिक रूप से ऐसी ठेस पहुँचाई थी कि अग आज इनकी कहानी सुन ली जाए तो आत्मा सिहर जाएगी। जैसे,
साध्वी प्रज्ञा की बात करें तो वह कई बार इस मामले में अपना दर्द साझा करके भावुक हो चुकी हैं। वह वो दर्दनाक समय को नहीं भुला पातीं जब जेल के भीतर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम हुआ था। उनके अनुसार, इस केस में हिरासत में लिए जाने के बाद पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल होते थे।
इसके अलावा 4-5 पुलिसकर्मी लगाकर उन्हें मारा जाता था। उनकी पिटाई चमड़े की बेल्ट से होती थी। उनको बिन किसी सबूत के भगवा आतंकी कहा जाता था। उनपर इतने अत्याचार होते थे कि उनकी हालत खुद के पाँव पर चलने लायक नहीं बची थी। उनकी रीढ़ की हड्डी में समस्या आ गई थी और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा ने ये भी बताया था कि इन्हीं सबके कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई थी और उनके शरीर में पस पड़ गया था।
वहीं मेजर रमेश उपाध्याय ने भी अपने बारे में बताया था कि मालेगाँव ब्लास्ट में कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार ने उनको फँसाया था। हिरासत में लिए जाने के बाद एटीएस उनके साथ बर्बरता करती थी। उन्हें धमकी दी जाती थी कि पत्नी को नंगा घुमाया जाएगा, बेटी का रेप किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा। इसके अलावा उनके मकान मालिक तक को उनके खिलाफ भड़काया गया- आतंकी को क्यों रख रहे हों। जिसके कारण उनके परिवार के सिर से छत छिन गई। उनकी शादीशुदा बेटियों के घरों पर दबिश दी गई । हर वो हालात पैदा कर दिए गए कि वो कैसे भी वो जुर्म कबूलें जो उन्होंने किया ही नहीं। प्रशासन उन्हें इस कदर इस मामले में दोषी बनाना चाहता था कि मेजर का नार्को टेस्ट भी कराया। हालाँकि जब उसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई तो ये बर्दाश्त नहीं हुआ और रिपोर्ट को दबा दिया गया।
इसी तरह प्रताड़ना की कहानी भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की है। मालेगाँव ब्लास्ट केस में महाराष्ट्र एटीएस ने कर्नल पुरोहित को फँसाने के बहुत प्रयास किए। ये जानते हुए कि जिस समय ये ब्लास्ट हुआ था, उस वक्त वो अपने मिशन पर थे उन्हें हिरासत में लिया गया और देशद्रोही घोषित करने की कोशिश हुई। बाद में उनपर दबाव बनाया गया कि वो पूछताछ में आरएसएस और वीएचपी नेताओं का जबरन नाम लें ताकि हिंदू आतंकवाद की थ्योरी सही साबित हो सके। जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनका पैर तोड़ा गया, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा, उन्हें नंगा करके मारा गया, उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया, उन्हें बाल से नोचा और खींचा गया।
… और ये सब इन तीनों के साथ क्यों हुआ… क्योंकि ये तीनों कॉन्ग्रेस की भगवा आतंकवाद की थ्योरी को सही साबित करने के लिए उचित चेहरे थे। 2008 में जहाँ एक तरफ मुस्लिमों को रैलियों के दौरान ये बताकर खुश किया जा रहा था कि मालेगाँव ब्लास्ट को इस्लामी आतंकियों ने अंजाम नहीं दिया है बल्कि हिंदू आतंकवादियों ने दिया है। वहीं दूसरी तरफ, हिंदू नेताओं को पूरे मामले में फँसाने की साजिश चल रही थी।
खुद गवाहों ने इस बात को स्वीकारा था कि उन पर योगी आदित्यनाथ समेत अन्य हिंदू नेताओं का नाम लेने का दबाव था। इसके अलावा जो प्रताड़नाएँ मेजर और कर्नल को दी गई थीं उसका मकसद भी यही था कि ये अपने बयानों में हिंदू नेताओं का नाम ले… लेकिन ये सब होता कैसे? कुछ दिन यूपीए शासन में ये नैरेटिव गढ़ा-बढ़ा। मगर फिर हकीकत सामने आने लगी। केस एनआईए के पास गया, चार्जशीट दाखिल हुई, गवाहों की पेशी हुई और हकीकत खुलती गई। ये भी सामने आया कि ये पूरा नैरेटिव सिर्फ जनता का ध्यान CWG घोटाले से हटाने के लिए किया था। इसी बीच ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि की किताब जनता के बीच आई, जिनसे कॉन्ग्रेस के हिंदूविरोधी चेहरे को शीशे जैसा साफ कर दिया।
सर्वोच्च_न्यायालय के माननीय ।न्यायमूर्ति संजीव_खन्ना और माननीय न्यायमूर्ति दीपांकर_दत्ता की अवांछित सहृदयता के कारण पांच पाबंदियों के साथ अंतरिम जमानत पर तेईस दिन यानि १ जून तक बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के एकमेव नेता अरविन्द केजरीवाल ने दो प्रकार से अंतरिम जमानत की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन किया है,
1) यह बोल कर कि उन्हें झूठे मामले में जेल भेजा गया है
और
2) यह बोल कर कि वो लोग (भाजपा के नेता, प्रवक्ता व समर्थक) बोल रहे हैं कि बीस दिन बाद फिर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा, पर अगर जनता इंडी गठबंधन को भारी बहुमत से जीत दिलाती है लोकसभा चुनावमें तो उन्हें दुबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा। पर दो दिन बीत जाने के बाद भी ।सर्वोच्च_न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति द्वय ने इस धृष्टता से भरे अंतरिम_जमानत की शर्त के उल्लंघन का कोई संज्ञान नहीं लिया है। अंतरिम जमानत की शर्त यह है कि वह अदालत में विचाराधीन मामले से संदर्भित कोई वक्तव्य नहीं देंगे, कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
नोट:
अगर आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल के अलावा एक भी और कोई नेता होता तो इस बात की पूरी संभावना थी कि उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत नहीं दिया जाता, यह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों की मामले में सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों व रवैये से स्पष्ट हो जाता है।
आज ही के दिन कश्मीर के डोडा में 35 हिन्दुओ को मुसलमानो ने लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था, बिलकुल ISIS के अंदाज में, इन 35 हिन्दुओ में 1 बच्ची भी शामिल थी जिसकी उम्र मात्र 3 साल थी,
उस समय शासन में कौन था ?
उस समय राहुल किस पद पर था ?
उस समय मोमबत्तियां के भाव क्या थे
सब पता है ___
क्योंकि मरने वाले हिन्दू थे
और मारने वाले मुसलमान
इसलिए आज तक कोई अपराधी पकड़ा नहीं गया
क्योंकि हिन्दू का अपने ही देश में कोई मानवाधिकार नहीं होता।
हिंदु सेकुलर है जातिवाद करना जानते है
हिन्दू स्वयं मूर्ख ही है बहुत जल्दी भुल जाते हैं और
उस राजनीतिक दल के साथ रहते है जो इनको ही मिटाना चाहते है ।
किसी को भी गिरफ्तार किया गया ही नहीं ।
और
जिनको धर्म का पता नही चला हो तो दोगली मिडिया या सेकुलर नेताओ से पुछ लेना ! कम से कम धर्म भी हमें ही बताना पड़ेगा ?
जय हिंद वंदेमातरम
जय श्री राम राम
सांप ने काटा तो युवक को श्री गंगा जी में लटका दिया और फिर ….
निश्चित ही गंगा मईया जी का सनातन धर्म में बहुत उच्च स्थान है।
यह निर्विवाद सत्य है कि गंगा मैया जी का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। धर्म से जुड़े हुए आधे से अधिक प्रसंग गंगा जी से ही जुड़े हुए हैं। जिस कारण धर्म को मानने वाले लोग वर्ष भर कहीं ना कहीं पर श्री गंगा जी में स्नान करने के लिए पहुंचते रहते हैं। किंतु कई बार कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आ जाती हैं जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता है।
इसी प्रकार की एक घटना घटी है उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में। यहां पर रहने वाले एक युवक को विषैले सांप ने काट लिया था जिस कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। युवक की मौत होने पर उसके परिवार में कोहराम मच गया किंतु इसके बाद उसके परिजनों ने उसे रस्सियों से बांधकर गंगा जी में लटका दिया था। दरअसल मृतक युवक के परिजनों को किसी ने बता दिया था कि अगर युवक के शव को श्री गंगा जी के जल में रखा जाएगा तो उसका सारा जहर उसके शरीर में से सांप का सारा जहर निकल जाएगा और वह जिंदा हो जाएगा।
स्वाभाविक है कि सभी हिंदू गंगा जी में विश्वास तो करते ही हैं जिसके चलते युवक के परिजनों ने उसके शव को रस्सियों से बांधकर गंगा जी में लटका दिया था। ये सब हुआ है बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत पढ़ते जयरामपुर कुदैना गांव में यहां पर बीते 26 अप्रैल को जयरामपुर कुदेना गांव का रहने वाला 20 वर्षीय मोहित कुमार मतदान करने के बाद खेत पर चला गया था।
इस दौरान उसे सांप ने काट लिया, जिसकी सूचना उसने परिजनों को दी। परिजन उसे इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले गए। आराम नहीं मिलने पर परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए ले गए, लेकिन उसकी हालत और अधिक बिगड़ती चली गई। कुछ लोगों ने परिजनों को बताया कि सांप काटे व्यक्ति के शरीर को गंगा में रखने पर जहर उतर जाता है।
अपने बच्चे के जिंदा होने की आशा में मृतक के परिजनों ने युवक को गंगा की धार के बीच लटका दिया। उसे पुल के खंभे से बांध दिया। काफी समय तक शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। सांस वापस नहीं आने उन्होंने हार कर अपने बेटे का विधिवत अग्नि संस्कार कर दिया।
*राजमाता गायत्री देवी का 800 किलो सोना लूटने वाले लोग, आज ज्ञान दे रहे हैं !!!इमरजेंसी के दौरान *आयरन लेडी* ने सभी महलों को *सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया था*
*बेगम ने* आर्मी की बटालियन को गायत्री देवी की “डूँगरी” और “जयगढ़ क़िले” में *सर्च ऑपरेशन के लिए भेजा था*फिर शुरू हुआ “खुदाई” का काम *जयपुर आमेर, जयगढ़, मोती दूआँगिरी इत्यादि को* 04 महीनों तक *खोदती रही* इसके बाद *एक “सीक्रेट” टेलीग्राफ मेसेज भेजा गया*
**search has been completed and the treasure has been found***
संजय गांधी* “सांगानेर” एयरपोर्ट पर *ख़ुद से ही विमान उड़ा कर पहुँच गये थे* मीडिया उस समय *इंदिरा गाँडी के कब्जे में थी, लेकिन खबर फैल गई थी* फिर जयपुर में कर्फ्यू लगा कर *उस सोने को लगभग 70 ट्रकों में भर कर दिल्ली ले जाया गया था*
*सरकार ने कहा कि* कुछ किलो “सोना” मिला था *लेकिन 05 दिन लंबे चले कर्फ्यू में, विमान से लेकर ट्रकों तक से संजय गांधी की देख रेख में ख़ज़ाना* दिल्ली भेज दिया गया *उस ख़ज़ाने का क्या हुआ, कोई अतापता नही और उस चोर खानदान का व्यक्ति* अब हम आम जनता के *सोने-चाँदी की फ़िक्र कर रहा है !!! वाह रे वाह
कॉन्ग्रेस सबकी सम्पत्ति बाँटेगी, वक्फ को छुएगी तक नहीं: पीएम मोदी ने चेताया- युवराज की विचारधारा करेगी देश को बर्बाद
पीएम मोदी ने राहुल गाँधी के प्लान पर हमला बोला है (
पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा है कि कॉन्ग्रेस का सम्पत्ति दोबारा बाँटने का वादा बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस वक्फ जैसी संपत्तियों को छुएगी तक नहीं जबकि अन्य समुदायों की संपत्तियों को जब्त कर लेगी। उन्होंने सम्पत्ति बाँटने के विचार को माओवादी विचारधारा और देश को बर्बाद करने वाला कदम बताया।
पीएम मोदी ने यह बातें टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में कहीं। कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के सम्पत्ति के दोबारा बाँटने के वादे पर पीएम मोदी ने कहा, “हमें कॉन्ग्रेस की इस घातक योजना को हलके में नहीं लेना चाहिए, यह खतरा काफी बड़ा है और हमारे देश को पीछे धकेलने वाला है। यह माओवादी विचारधारा का स्पष्ट उदाहरण है। दुखद बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी और इसके युवराज ऐसी विचारधारा को आगे लेकर बढ़ रहे हैं जो कि देश को बर्बाद करेगी।”
पीएम मोदी ने आगे इस मुद्दे पर कहा, “हमारा संविधान अल्पसंख्यकों की सम्पत्ति को सुरक्षित करता है। ऐसे में जब कॉन्ग्रेस सम्पत्ति के दोबारा बँटवारे की बात करती है तो इसका मतलब है कि वह अल्पसंख्यकों की सम्पत्ति नहीं छू सकती। वह वक्फ की सम्पत्ति को आँख उठा कर भी नहीं देख सकती लेकिन बाक़ी समुदायों की सम्पत्ति बाँटेगी, इससे समाज में बँटवारा होगा।” पीएम मोदी ने राहुल गाँधी के एक्सरे वाले बयान पर कहा कि इससे देश के हर घर में छापा होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने मजहब के आधार पर आरक्षण दिया, यह बताना ध्रुवीकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान स्पष्ट रूप से मजहबी आधार पर आरक्षण रोकता है कि लेकिन कॉन्ग्रेस ने यह कर्नाटक में किया और साथ ही अब तेलंगाना में दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय के खिलाफ है। पीएम मोदी ने कहा कि हम उस पार्टी से और क्या आशा कर सकते हैं जिसके प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का है।
पीएम मोदी ने विपक्ष के लोकतंत्र खतरे में होने के दावों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सत्ता नहीं मिल रही इसलिए वह देश को विश्व में बदनाम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक ‘चुनावी तानाशाही’ नहीं बन जाएगा क्योंकि युवराज को सत्ता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी विपक्ष की इस बात की स्वीकार्यता नहीं है और केवल हर बात पर प्रमाणपत्र जारी करने वाले ही उनकी सुन रहे हैं।
कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा के विरासत टैक्स के आइडिया पर भी हमला बोला। पीएम मोदी ने प्रश्न उठाया कि अगर सरकार लोगों की सम्पत्ति लेने लगेगी तो भला वह काम क्यों करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि यह देश में बढती खाई का समाधान नहीं बल्कि समाधान के रूप एक और समस्या है। पीएम मोदी ने कहा कि सम्पत्ति का बँटवारा और विरासत टैक्स जैसी योजनाओं ने कभी गरीबी को खत्म नहीं किया बल्कि गरीबी को बराबर बाँट कर सबको ही गरीब कर दिया।
पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर कहा कि जहाँ भी वह गए हैं वहाँ उन्हें लोगों का अपार समर्थन दिखा है, ऐसे में NDA 400 पार कर जाएगा और भाजपा 370 से अधिक सीट लाएगी।
अत्यंत दुर्भगायपूर्ण हैं की भारत में लगभग 40% गद्दा₹ ऐसे हैं जो अपना आप को राष्ट्रवादी या राष्ट्रप्रेमी तो बोलते होंगे लेकिन वोट देने नहीं जाते और सोचते हैं की एक वोट से क्या फरक पड़ता है। कोई विदेशों से नौकरी छोड़ वोट देने भारत आ जाता है , कोई अस्पताल से एंबुलेंस में वोट देने आता है तो कोई हाथ ना होने से कारण पैर से वोट देता है, लेकिन लगभग 40% लोग ऐसे हैं जो वोट नहीं देते फिर भी अपने आप को राष्ट्रप्रेमी समझते हैं वोट को केवल अधिकार मानने वाले सच्चे राष्ट्रभक्त नहीं हो सकते, सच्चे राष्ट्रभक्त वही हैं जो वोट को राष्ट्र के प्रति अपना परम कर्तव्य मानते हैं और हर हाल में वोट देते हैं ताकि देश की सत्ता सही हाथों में जाय और देश हर चुनौतियों से लड़ते हुए आगे बढ़े, मजबूत बने। पहले चरण से लेकर द्वितीय चरण में भी 60% ही मतदान हुवा जो शर्मनाक है। वोट देने के बाद हमारी उंगली पर निशान हमारे लिए एक सम्मान चिन्ह होता है।
कांग्रेस का धन-वितरण भारतीयों को गुलाम बना देगा और हमें एक मृत अंत की ओर ले जाएगा!
धन-वितरण का यह दुष्प्रचार हमारे खिलाफ़ एक दुष्ट एजेंडा है और आइए एक परिदृश्य विश्लेषण करें!
तो यह पुनर्वितरण कैसे काम करेगा? मान लीजिए 4 लोग काम कर रहे हैं:
A ₹1000 कमाता है
B ₹800 कमाता है
C ₹200 कमाता है
D बेरोजगार है
राहुल गांधी द्वारा पुनर्वितरण शुरू करने के बाद
समूह की कुल आय ₹2000, लोग - 4, इसलिए
A घटकर ₹500 हो गया
B घटकर ₹500 हो गया
C और D को ₹500 मिलते हैं
A, B निराश हैं और सोचते हैं कि जब कड़ी मेहनत से लाभांश नहीं मिलता है तो अतिरिक्त काम क्यों करें और
C सोचता है कि मैंने ₹200 के लिए काम किया और फिर भी मुझे ₹500 मिले और D ने कुछ नहीं किया फिर भी मुझे ₹500 मिले
अब,
A ₹500 कमाने के लिए काम करता है
B ₹500 कमाता है
C काम नहीं करता है इसलिए 0
D बेरोजगार है
पुनर्वितरण.. कुल आय ₹1000 और लोग - 4, इसलिए इस साल
A ₹250 मिलते हैं
B को ₹250 मिलते हैं
C को ₹250 मिलते हैं
D को ₹250 मिलते हैं
C और D राहुल को वोट देना जारी रखते हैं, भले ही उनकी आय आधी हो गई हो, लेकिन उन्हें अभी भी बिना काम के एक पैसा मिल रहा है.. लेकिन वे इस बात से भी नाराज़ हैं कि उनकी आय आधी हो गई है!
इसलिए राहुल अब A और B पर कर लगाते हैं, ताकि उस पैसे को C और D में फिर से वितरित किया जा सके निराश A और B देश छोड़ देते हैं या फिर वे अपना व्यवसाय भी बंद कर देते हैं
अब कुल आय - 0 और लोग 2 या 4 रह जाते हैं पुनर्वितरण काम कर सकता है, लेकिन सभी बुनियादी बातें गलत हो जाती हैं। अर्थव्यवस्था मर जाती है और लोग भी मर जाते हैं!और देश वेनेजुएला बनने की राह पकड़ लेता है खटा_खट_खटा_खट
इसे कांग्रेस पार्टी की रणनीति के रूप में देखें। यह हमें अपने मतदान विकल्पों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है। पुनर्वितरण केवल उच्च आय वाले व्यक्तियों को प्रभावित नहीं करता है; यह मध्यम वर्ग और यहाँ तक कि गरीबों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे संभावित रूप से लंबे समय में सभी आर्थिक रूप से वंचित हो सकते हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल कर दिया है. नामांकन से पहले राहुल गांधी ने एक रोड शो भी किया, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए. रोड शो में राहुल गांधी के साथ उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं.
लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद झामुमो पहली बार एक बड़ी रैली का आयोजन हजारीबाग में करने जा रहा है. यह रैली झामुमो हजारीबाग जिला के 45वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मटवारी गांधी मैदान में गुरुवार को आयोजित की जायेगी. इसमें मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, कल्पना सोरेन, राज्य समन्वय समिति के सदस्य फागू बेसरा, गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू, हजारीबाग जिला संयोजक संजीव बेदिया समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे......
स्ट्रिंग सिद्धांत, ब्लैक होल और चंद्रमा पर रामानुजन के प्रभाव से संबंधित एक शोधपत्र रॉयल सोसायटी ने छापा है जिसने विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है। अभी तक रामानुजन को महान गणितज्ञ के रूप में जाना जाता था पर अब भौतिकी खासकर अंतरिक्ष भौतिकी के क्षेत्र में रामानुजन द्वारा खोजे गए सूत्र अध्ययन के नए द्वार खोल रहे हैं।
महान रामानुजन ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष में जब उनकी शारीरिक शक्तियां क्षीण हो गईं थी, कुछ खोजों पर काम कर रहे थे। लगभग एक साल में उन्होंने डेढ़ सौ पेज में आड़े तिरछे फार्मूले लिखे जिसे उनकी पत्नी जानकी ने उनकी मृत्यु के बाद मद्रास विश्वविद्यालय को दे दिए जहां से वे ट्रिनिटी कॉलेज की व्रेन लाइब्रेरी में रख दिए गए। यह समय 1922 के आस पास का था। 1976 में जॉर्ज एंड्रयूज को लाइब्रेरी में एक बक्सा दिखा, उसे जब उन्होंने खोला और पढ़ा तो वह नाचने लगे। सौ से अधिक पृष्ठों में छह सौ से अधिक गणितीय सूत्र बिना किसी प्रमाण के एक के बाद एक लिखे गए थे।
रामानुजन के नोट्स पर किताब लिखने वाले गणितज्ञ बर्नड्ट नोटबुक की खोज के बारे में कहते हैं कि इस 'लॉस्ट नोटबुक' की खोज ने गणितीय दुनिया में लगभग उतनी ही हलचल पैदा कर दी जितनी बीथोवेन की दसवीं सिम्फनी की खोज ने संगीत की दुनिया में पैदा की होगी।
मैंने इस संदर्भ में अपने एक वैज्ञानिक मित्र से बात की, उन्होंने बताया कि बाहर की यूनिवर्सिटीज रामानुजन के प्रमेय सिद्ध करने वाले छात्र को सीधे पीएचडी की डिग्री अवार्ड करती हैं। उन्होंने लगभग चार हजार प्रमेय प्रतिपादित किए हैं जिसमें अधिकांशत बिना सिद्ध किए ही अनुप्रयोग में लाए जा रहे हैं।
महान रामानुजन के लिए गणित के सूत्र बनाना भगवती की अर्चना में फूल अर्पित करने जैसा था। वह गणित के पर्याय थे, बचपन में अपने मित्र द्वारा गणित के बारे में पूछने पर उन्होंने अपनी कोहनी दिखाई। कोहनी की त्वचा एकदम काली और मोटी हो गई थी जो उनके द्वारा स्लेट पर लिखी गणनाओं को लिखने मिटाने से हुआ।
महान रामानुजन घोर आर्थिक संकट में रहे, स्वास्थ्य बिगड़ता गया मात्र 32 वर्ष की उम्र में मां भारती का लाल अनंत की खोज में अनंत में विलीन हो गया।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ पार्टी से इस्तीफा देने के छह घंटे बाद ही गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए. जमशेदपुर के एक्सएलआरआई में प्रोफेसर रहे गौरव वल्लभ का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए बड़े झटके की तरह है. भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई. राजस्थान से आने वाले गौरव वल्लभ का लोकसभा चुनाव के बीच भाजपा मे जाने का राजस्थान में कांग्रेस के चुनावी प्रबंधन पर असर पड़ सकता है. वे आर्थिक मामलों के जानकार प्रवक्ताओं में शुमार किए जाते हैं। साथ ही भाजपा की आर्थिक नीतियों के खिलाफ काफी मुखर रहते थे.
रांची में आयोजित एक मीडिया हाऊस के कार्यक्रम से वे तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा से बीच बहस में पूछ डाला था कि ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं. संबित इसका जवाब देने की जगह दूसरी बातें करने लगे. यह वीडियो खूब वायरल हुआ था और राजनीतिक हलके में आज भी चटखारे लेकर देखा जाता है. सुबह में कांग्रेस छोड़ने का एलान करते हुए गौरव वल्लभ ने कहा था कि वे सनातन को गाली नहीं दे सकते हैं. उसी वक्त यह कयास लगाया जाने लगा था कि वे जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं
ब्यूरो चीफ
मीनाक्षी वर्मा
शवेता दर्पण समाचार पत्र
हिंदुओं, तुम खुद को मोची कहलाना पसंद नही करते थे, और यहाँ तुम्हारे नाम पर कंपनी खुल गयी, जिसका टर्न ओवर अरबों में है... Mochi और Metro दोनों ही मुसलमानों की कंपनी है....
तुम्हारा क्या गजब ब्रेनवाश किया है इन भीमटो ने... वरना बाटा हो या टाटा लेदर, सब के मालिक तुम्हे होना था...
जातिवाद न पहले था, न अब है... अपनी जड़ों से जो कट जाता है समझो मिट जाता है... आज कारीगरी के हर क्षेत्र में मुसलमानों का कब्जा बढ़ता ही जा रहा है और हिंदुओ के लौंडे जाति की डुगडुगी बजाकर ग्रेजुएट बनकर बेरोजगार घूम रहे है... न कोई हुनर है, न कोई टेलेंट है, जबकि हिंदु एकमात्र ऐसी कौम है जहां हर काम की एक जाति है... फिर भी उस जाति का व्यक्ति 8 हज़ार महीने की नौकरी कर लेगा मगर अपने धंधे से उसको लाखो कमाने में शर्म महसूस होती है...
आज एक दर्जी महीने का लाखो कमाता है, मगर दर्जी के बेटे को MBA करके 15 से 25 हज़ार की नौकरी करनी है... बाद में महंगाई का रोना तो रोना ही है... यही हाल नाई, सुतार, बढई, लोहार, पंडीत, सोनार, चर्मकार, धोबी इत्यादि सभी हिंदु जातियों का है...
फिर कहते है कि हम बेरोजगार है...
जिन्हें तुम पंचरपुत्र कह कर खुश होते रहते हो, वो धीरे धीरे तुम्हारा 70% कारोबार खा गए...
आज फॅब्रिकेशन का जो काम हमारे लोहार भाईयों का था, वो 80% से ज्यादा अब इनके पास है...
अपने पड़ोस में 10 में से 2 सलून भी अगर तुम्हें किसी हिंदु नाई के मिल जाए, तो बड़ी बात है...
जितने दर्ज़ी मिलेंगे वो उनमे अधिकतर इनके होंगे...
बढ़ाई का 80% काम इनके पास है... तेली का काम इनके पास है... मॅकेनिक का काम इनके पास है...
और जो हिंदु इन कामों को कर सकते थे, वो अब सिक्योरटी गार्ड की नौकरी में खुश हो रहे है...
कुछ सालों बाद, फेसबुक पर इनके आर्थिक बहिष्कार की पोस्ट डाल कर, जब मार्किट में निकलोगे, तो इनसे सामान लेना तुम्हारी जरूरत ही नही, मज़बूरी हो जाएगी...
हिंदुओ, नोकरी के पिछे मत भागो
88 वर्षीय बीमार हिंदू संत को ना बेल ना पैरोल, स्वास्थ्य के अधिकार से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का खुला उलंघन।
हिंदू संत श्री आशाराम जी बापू के दिन प्रतिदिन खराब हो रहे स्वास्थ्य के बावजूद बेल ना मिलने से राष्ट्रीय महिला उपाध्यक्ष भाजपा सहयोगी संगठन की शवेता रस्तोगी ने चिंता जताई है।
जब देश के कई खतरनाक अपराधियों, आतंकवादियों गैंगस्टरों, नेताओं अभिनेताओं और कई धर्म गुरुओं को मानवाधिकारों के नाम पर बेल या पैरोल दी जा सकती है तो आखिर क्यों लगभग 11 वर्ष, लगभग एक लाख घंटे और 60 लाख मिनट बीत जाने के बावजूद 88 साल के एक वृद्ध और गंभीर बीमार हिंदू संत को आज तक एक मिनट की न तो बेल मिली और न ही पैरोल।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में सभी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं जीवन की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है। संविधान में सभी को मौलिक अधिकार प्रदान किये गए हैं तो क्या भारत देश में ये मौलिक अधिकार एक हिंदू संत के लिए नही हैं ।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वास्थ्य के अधिकार (राइट टू हेल्थ) को एक मौलिक अधिकार माना गया है तो हिंदू संत को उन के अनुकूल उत्तम स्वास्थ्य के अधिकार से वंचित रखना कही न कही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 की धज्जियां नही उड़ रही हैं क्या।
उन्होंने कहा जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 16 फरवरी 2024 को लावा इंटरनेशनल मोबाइल कंपनी के प्रबंध निदेशक 57 वर्षीय हरिओम राय को अपनी पसंद के अस्पताल में हृदय रोग का इलाज कराने के लिए बेल दी जा सकती है, यूपी के माफिया डॉन रहे मुख्तार अंसारी के साले आतिफ रजा उर्फ़ सरजील रजा को कैंसर का इलाज कराने के लिए जमानत मिल सकती है। 13 हजार 500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप मे हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को स्वास्थ्य कारणों की वजह से बेल दी जा सकती है।
जब 1000 लोगों का धर्मांतरण कराने के आरोप में गिरफ्तार मौलाना कलीम सिद्दीकी को जमानत दी जा सकती है, बिलकिस बानो केस में रमेश चंदना को भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिनों का पैरोल दिया जा सकता है, तो संत श्री आशाराम जी बापू को उन के पसंद के अस्पताल में जानलेवा बीमारियों के इलाज कराने के लिए बेल क्यों नही दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नेशनल ह्यूमन राइटस कमीशन) को हिंदू संत के मौलिक अधिकारों का हो रहा हनन दिखाई क्यों नही दे रहा है। क्या आयोग कुंभकर्णी नींद सो रहा है, उन्होंने कहा कि एक देश एक कानून एक संविधान तो हिंदू संत के लिए न्यायालय की तरफ से ये दोहरा मापदंड नही अपनाया जा रहा है क्या।
उन्होंने कहा कि पूज्य संत श्री आशारामजी बापू, जिन्हें हृदय की 3 धमनियों में (99%, 90%, 80-85%) ब्लॉकेज है, साथ ही आँतों में रक्तस्राव की समस्या, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया आदि कई गम्भीर तकलीफें भी हैं, जिनके चलते जोधपुर एम्स अस्पताल ने उनको हाई रिस्क केटेगरी पेशेंट घोषित करते हुए हाथ खड़े कर दिये हैं। पिछले 4 महीनों में उन्हें अनेक बार हार्ट अटैक आ चुका है। ऐसी गंभीर स्थिति में भी बापूजी के अनुकूल चिकित्सा के लिए अदालत में राहत हेतु बार बार लगायी गई अब तक की सभी अर्जियाँ खारिज कर दी गयी हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदू संत श्री आशारामजी बापू के साथ हो रहे इस घोर अन्याय के खिलाफ, पूज्य बापू जी के अनुकूल उपचार व त्वरित रिहाई की माँग को लेकर देशभर में रैलियों, धरना-प्रदर्शनों आदि द्वारा समाज सड़कों पर उतर कर चीख चीख कर न्याय की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अब बिना देरी किए पूज्य बापू जी को उनके अनुकूल उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए व शीघ्रातिशीघ्र ससम्मान रिहा किया जाना चाहिए। बताने की आवश्यकता नहीं है कि लगातार देश के बड़े-बड़े संत और बड़े-बड़े अधिवक्ता निरंतर वयोवृद्ध संत श्री आसाराम जी बापू के पक्ष में आवाज उठाते आ रहे हैं किंतु न जाने क्या कारण है कि कोई भी पार्टी, सरकार या न्यायालय इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
हिंदू द्रोही मीडिया के लिए बहुत फंडिंग है, किंतु हिंदुत्ववादी मीडिया को अपना खर्चा चलाना भी मुश्किल है। हिंदु
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के बारे में फर्जी खबरों का पता लगाने के लिए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के तहत ‘फैक्ट चैक’ (तथ्यों की जांच करने वाली) इकाई बनाने को लेकर जारी केंद्र की अधिसूचना पर गुरुवार को रोक लगा दी. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत 20 मार्च को ‘फैक्ट चैक’ इकाई (एफसीयू) के लिए अधिसूचना जारी की थी.
यहां जानिए केजरीवाल के इर्दगिर्द पसरते गिरफ्तारी के जाल की परत दर परत कहानी…*
*CBI, ED के बाद अब NIA की होगी एंट्री, केजरीवाल ने जो जासूसी वाला देशद्रोह का महापाप किया हैं,*
*उसे सुनकर देशवासियों के होश उड़ जाएँगे।*
*इसके पाप इस तरह है:*
*१. कंजरिवाल ने “War Against Country” की तर्ज़ पर भयानक साज़िश रची।*
*इस आत्ममुग्ध बौने ने मोसाद और केजीबी कि तर्ज पर Semi Spy और Semi Military Organization “Feed Back Unit” बनाने कि पूरी तैयारी की।*
*२. ना किसी से इसने सरकारी या केबिनेट की इजाज़त ली...*
*17-18 रिटायर्ड नमक हराम नौकरशाहों को इसके लिए नियुक्त किया गया, जिनके ज़रिए वो देश के सभी उच्चपद के लोगों की जासूसी कर सके, यें उनके फ़ोन टॅप कर रहा था।*
*३. जिनकी जासूसी ये कर रहा था वो थे, देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जानेमाने सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट जज जस्टिस, वकील, नौकरशाह, जल, थल और वायु सेना के अधिकारी, विपक्ष के राजनेता उतना ही नहीं खुद की पार्टी के नेताओ, उनकी पत्नी, बेटी इन सबके फ़ोन टॅप करके जासूसी कर रहा था।*
*४. ये साज़िश तब उजागर हुई जब, इससे भी ज़्यादा भयानक जासूसी की साज़िश को अंजाम देने के लिए इसने “Military Grade Snooping Device” का ऑर्डर इजराइल को दिया।*
*ये बौना पेगासस के पिताजी को ला रहा था।*
*५. इजराइल की उस कम्पनी ने ये कह कर इस Device को देने से मना कर दिया कि वो किसी भी राज्य सरकार को ये नहीं दे सकती, उसके लिए उनको केंद्र की अनुमति दिखानी होगी।*
*६. बस फिर क्या, केजरीवाल ने सोचा, समझदार तो सिर्फ़ एक मैं हूँ, किसी कों क्या पता चलेगा।*
*ऐसा मान कर उसने गृहमंत्रालय से ये कह कर Device को ख़रीदने के अनुमति माँगी की ये हमको ऐसे ही फ़ीड बैक यूनिट के लिए चाहिए।*
*७. जैसे ही ये अर्ज़ी मोटाभाई तक पहुँची, उनके होश उड़ गए…*
*देश का एक मुख्यमंत्री देश के ख़िलाफ़ जासूसी की साज़िश करने के लिए उनसे ये कैसी अनुमति माँग रहा हैं।*
*बस इसके बाद गिरगिट की चाल सारी उलटी पड गई, गृहमंत्रालय ने तुरंत जाँच के आदेश दिए।*
*उसमें ऐसे ऐसे तथ्य सामने आए की अब इस केजरी माफिया का बचना नामुमकिन है।*
*८. क़रीब 700 लोगों की जासूसी ये करवा चुका हैं, इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई देश के प्रमुख मीडिया हाउस ने...*
*इन मिडीया दलालों ने निश्चित किया कि केजरीवाल से संबंधित कोई भी कमी, साज़िश, नाकामी और धोखाधड़ी की न्यूज़ उनके चॅनल पर ना आये ।*
*बराबर केजरीवाल का महिमामंडन इनके चॅनलो पर होता रहेगा, जिसके लिए इनको मोटी रक़म मिलती रहेगी।*
*अब देखिए बहुत जल्दी धमाके पर धमाके होंगे।*
*पंजाब में हुई अमृतपाल की गिरफ्तारी से ऑपरेशन शुरू हो चुका है।*
SBI ने चुनावी बॉन्ड से जुड़ा सारा डेटा चुनाव आयोग को सौंपा
Electoral Bonds: SBI ने चुनावी बॉण्ड से जुड़ा सारा डेटा चुनाव आयोग सौंप दिया है. एसबीआई ने कहा कि उसने निर्वाचन आयोग को चुनावी बॉण्ड का पूरा ब्यौरा दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीसरी बार भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को फटकार लगाते हुए उसे चुनिंदा रवैया न अपनाने और 21 मार्च तक चुनावी बॉण्ड योजना से संबंधित सभी जानकारियों का पूरी तरह खुलासा करने का आदेश दिया था.
RRR: एसएस राजामौली अपनी पॉपुलर फिल्म आरआरआर की स्पेशल स्क्रीनिंग में भाग लेने के लिए जापान गए थे. इस दौरान 83 वर्षीय फैन ने उन्हें 1,000 ओरिगामी क्रेन गिफ्ट में दिए हैं..
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने रतन टाटा के साथ तस्वीर शेयर की, युवाओं को दी बड़ी खुशखबरी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया एक्स पर शेयर की. तस्वीर में सरमा टाटा का हाथ थामे दिख रहे हैं. असम के सीएम ने तस्वीर शेयर करने के साथ बताया कि टाटा के साथ एक कौशल विकास केंद्र बनाने पर सहमति हुई है. जो जगीरोड में सेमीकंडक्टर सुविधा परिसर के भीतर होगा. सरमा ने बताया, केंद्र उत्तर प्रदेश के युवाओं को सशक्त बनाएगा. केंद्र का उद्देश्य युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पाठ्यक्रम प्रदान करना है. साथ ही इससे जगीरोड इकाई में नौकरियां मिलने में भी मदद होगी.
रेल कोच फैक्ट्री (कपूरथला) ने अप्रेंटिसशिप एक्ट 1961 के तहत अप्रेंटिसशिप के 550 पदों पर आवेदन आमंत्रित किये हैं. इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
RCF Recruitment 2024: कुल पद
कुल पद 550
अप्रेंटिसशिप
फिटर 200
वेल्डर (जी एंड ई) 230
मशीनिस्ट 5
पेंटर (जी) 20
बढ़ई 5
इलेक्ट्रीशियन 75
एसी एवं रेफरी, मेकेनिक 15
RCF Recruitment 2024: आप कर सकते हैं आवेदन
मान्यताप्राप्त बोर्ड से 10वीं में न्यूनतम 50 अंक प्राप्त करनेवाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदक के पास संबंधित ट्रेड में आईटीआई का सर्टिफिकेट होना चाहिए.
RCF Recruitment 2024: आयु सीमा
आवेदन करनेवाले उम्मीदवार की आयु 15 वर्ष से कम व 24 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.
RCF Recruitment 2024: चयन प्रक्रिया
इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जायेगा. मेरिट सूची दसवीं में प्राप्त अंकों एवं आईटीआई के अंकों के आधार पर तैयार की जायेगी.
RCF Recruitment 2024: स्टाइपेंड
चयनित उम्मीदवारों को रेलवे के नियमों के अनुसार स्टाइपेंड प्रदान किया जायेगा.
RCF Recruitment 2024: आवेदन शुल्क
सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के रूप में 100 रुपये का भुगतान करना होगा
RCF Recruitment 2024: ऐसे करें आवेदन
इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार फिशियल वेबसाइट rcf.indianrailways.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
RCF Recruitment 2024: अंतिम तिथि : 9 अप्रैल, 2024.
अन्य जानकारी के लिए देखें : https://rcf.indianrailways.gov.in/.../files/act-app/act.pdf
इस बार आईपीएल में कॉमेंट्री बॉक्स से एक और आवाज सुनाई देगी. जिसे हम सभी जानते हैं और उनकी कॉमेंट्री को पसंद भी करते हैं. ये कोई और नहीं बल्कि नवजोत सिंह सिद्धू हैं. नवजोत सिंह सिद्धू की कॉमेंट्री में वापसी हो रही है. सिद्धू काफी लंबे समय से कई कारणों के चलते कमेंट्री से दूर थे.
भारत का संविधान बनाने में संविधान सभा में 23 सदस्य ऐसे थे जो 1946 में पाकिस्तान बनाने के लिए मुस्लिम लीग के टिकट पर जीते थे।
लेकिन जब इन्होंने पाकिस्तान बना लिया तो उसके बाद यह बड़ी होशियारी से पाकिस्तान नहीं गए और फिर नेहरू गांधी ने इनको भारत के संविधान बनाने का ही जिम्मा दे दिया है, इन सब ने भी अपना संविधान बनाया है।
यह सिर्फ भारत में नेहरू और गांधी ही कर सकते थे कि जिनको गद्दारी का चार्ज लगाकर जेल में डालना था उनको सीधे संविधान बनाने की जिम्मेदारी दे दी। इनमें से कुछ नाम है। यह सब बाद में बहुत सारे लोग केंद्र और राज्यो में मंत्री अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के चांसलर तक बने।
मद्रास से:
१. मुहम्मद इस्माइल साहिब
२. केटीएम अहमद इब्राहिम
३. महबूब अली बेग साहिब बहादुर
४. बी. पोकर साहिब बहादुर, मुम्बई से
५. अब्दुल कादिर मोहम्मद शेख
६. अब्दुल कादिर अब्दुल अजीज खान, असम से
७. मोहम्मद सादुल्ला,
८. अब्दुर रौफ, उत्तर प्रदेश से
९ बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल नवाब, हरदोई से
१० सैयद फजल-उल-हसन हसरत मोहानी, AMU से
११ नवाब इस्माइल खान, मेरठ से जो बाद में AMU के चांसलर बने
१२. जेडएच लारी, बिहार से
१३. हुसैन इमाम, गया से
१४. सैयद जफर इमाम
१५. लतिफुर रहमान
१६. मोहम्मद ताहिर
आज इनके वंशज बड़े बड़े नेता बनकर बोल रहे हैं कि हमारा भी खून शामिल है इस देश में।
सबसे बड़ा आश्चर्य तो तब हुआ जब पूरा खोजा कि इनका नाम मिल जाए तो किसी भी वेबसाइट पर किसी भी हिंदूवादी पार्टी या संगठन ने इनका नाम तक गूगल पर नहीं डाला है। खोज खोज कर नाम ढूढे हैं। हम हिंदू वादियों को विचारधारा के स्तर पर अभी बहुत काम करने की जरूरत है।मुस्लिम हमसे इस मामले में हजार गुना आगे हैं कि इन सब करतूतों के बाद भी देश में इतने बड़े देश भक्त की भी इमेज बनाये हुए है। कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान को मुस्लिम देश बनाने के बाद भारत को भी मुस्लिम लोगों का देश बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। अल्पसंख्यक आयोग वक्फ बोर्ड मदरसा शिक्षा मुस्लिम पर्सनल लॉ सभी कांग्रेस पार्टी की देन है।
केंद्र की मोदी सरकार ने होली से पहले इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों और उसके खरीदारों को बड़ा तोहफा दिया है. खबर है कि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और उससे जुड़े उपकरणों के निर्माण, बिक्री और खरीद को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पोर्टेबल स्कीम 2024 (ईएमपी स्कीम 2024) पर अपनी मुहर लगा दी है.
“हिंदू महिलाओं” पे कहर 80 भुक्तभोगी HC को बताएंगी आपबीती
हर घर की सुंदर लड़की और नई नवेली दुल्हन पर होती थी उनकी नजर और जब जी चाहे …….
संदेशखली की महिलाओं पर हुए कहर का मुद्दा अब आगे बढ़ने लगा है। यह वही संदेशखाली है जहां पर अनुसूचित जाति के हिंदुओं के घरों पर शाहजहां शेख के गुंडो की हमेशा नजर रहती थी। वह लोग किसी भी घर की सुंदर लड़की अथवा नई नवेली दुल्हन को अपने पास बुला लेते थे और भय का वातावरण इस हद तक था कि महिलाएं सारे अत्याचार चुपचाप सहन करने के लिए विवश थीं क्योंकि उन्हें पता था कि अगर वह टीएमसी के कार्यालय में रात को नहीं जायेंगी तो उनके पिता, पति अथवा भाइयों को मार दिया जाएगा।
आखिर जब बहुत सारी महिलाओं ने इकट्ठे होकर इसके बारे में विरोध प्रदर्शन किए तब जाकर यह है मामला सारी दुनिया के सामने आ पाया। अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के साथ यह घटनाएं पिछले कई वर्षों से होती आ रही थ बंगाल में सरकार बदली ममता बनर्जी का राज आ गया किंतु फिर भी महिलाओं की स्थिति जस की तस बनी रही। अब लग रहा है की संदेश खली की महिलाओं को न्याय मिल जायेगा और आगे से उनका जबरन यौन शोषण कोई नहीं कर पाएगा, क्योंकि हाई कोर्ट ने उन 80 मुक्तभोगी महिलाओं को अदालत में अपने बयान दर्ज करवाने की अनुमति दे दी है जो अपनी पीड़ा अदालत को बताना चाहती थीं। मुख्य न्यायाधीश शिवगणनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना है कि सभी 80 महिलाओं को अदालत में लाना काफी मुश्किल होगा। इसलिए टिबरेवाला उनके बयानों को एक आवेदन अथवा पूर्वक हलफनामा के जरिए दायर करवा सकती हैं जिससे पीड़ित महिलाएं अदालत के रिकॉर्ड में आ सकेंगी। दरअसल अदालत में दायर एक याचिका में याचिकाकर्ता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा था कि संदेशखली की बहुत सारी पीड़ित महिलाएं अदालत को अपनी आपबीती बताना चाहती हैं। अदालत ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि सभी पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज होने से पहले उचित तरीके से उनका सत्यापित किया जाना चाहिए और महिलाओं के पहचान भी साफ होनी चाहिए। अगर महिलाएं अपनी स्थानीय भाषा में बयान देंगी तो उसकी अनुवादित कॉपी भी अदालत को दी जानी चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इन सभी पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा देने की अनुमति भी दे दी है। बता दें कि बंगाल पुलिस को कोलकाता हाईकोर्ट ने पहले पक्षपाती कहते हुए फटकार लगाई थी। संदेश खली की महिलाओं का दोषी टीएमसी का नेता शाहजहां शेख ED पर हमला करने का भी आरोपी है। ED पर हमला करने के बाद शाहजहां शेख फरार हो गया था। इसके बाद ED पर हमले की जांच की जिम्मेदारी बंगाल पुलिस से लेकर सीबीआई को दे दी गई थी। काफी भाग दौड़ करने के बाद पुलिस ने शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया था, तथा अब वह सीबीआई की कस्टडी में है और अब उससे पूछताछ की जा रही है। इस सारे प्रकरण में पश्चिम बंगाल की विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि उन्हें पीड़ित महिलाओं से मिलने से रोका जा रहा है।
विगत 7 मार्च को संदेशखाली जाते समय बंगाल पुलिस ने कुछ इलाकों में धारा 144 लागू होने का हवाला देकर भाजपा की प्रदेश इकाई की महासचिव अग्निमित्रा पाल और लॉकेट चटर्जी के नेतृत्व में गुरुवार दोपहर संदेशखाली जा रहीं पार्टी की महिला नेताओं को कोलकाता के बाहरी इलाके न्यू टाउन में ही रोक लिया। इसके बाद इन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में इन्हें रिहा कर दिया गया।
बहरहाल अब हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्देश के बाद आशा की जानी चाहिए कि संदेश खली की पीड़ित महिलाओं को अब न्याय मिल पाएगा, और आगे से उनका जीवन कोई भी शाहजहां शेख बर्बाद नहीं कर पाएगा।
हिंदू द्रोही मीडिया के लिए बहुत फंडिंग है, किंतु हिंदुत्ववादी मीडिया को अपना खर्चा चलाना भी मुश्किल है
*आज कांग्रेसी चमचे कहते हैं कि मोदी राम मंदिर पर वोट क्यों मांग रहे हैं*
*आपको जानकर आश्चर्य होगा की यही कांग्रेस इंदिरा गांधी की लाश पर वोट मांगा था*राजीव गांधी 1984 के चुनाव के समय जहां भी जाते थे उनके कुर्ते की जेब में ग्लिसरीन की सीसी रहती थी और वह स्टेज पर ग्लिसरीन लगाकर रोते हुए कहते थे कि उन्होंने मेरी मां को मार दिया और उन्हें वह शब्दावली दिया गया था कि बगैर मां-बाप के बच्चे को क्या कहते हैं मुझे याद है कि चुनाव प्रचार के दौरान जब राजीव गांधी मेरे गांव में आए थे तब पडरौना के राजा CPN सिंह उम्मीदवार थे और उन्होंने कहा था कि मैं टूअर हो गया हूँ आप लोग ही मेरे माई बाप हो*पूर्वी यूपी में यदि कोई बिना मां-बाप का हो तो उसे टूअर कहते हैं यानी कि उन्हें यह शब्द पूरे भारत में बता दिया गया था कि किस इलाके में मां-बाप के बगैर के बच्चे को क्या कहते हैं*न सिर्फ स्टेज पर राजीव गांधी बार-बार अपने मां के लाश की तस्वीर दिखाते थे जो खून से लथतथ थी बल्कि इस तरह की जीप बनाए गए थे जिस जीप पर चारों तरफ इंदिरा गांधी की लाश का फोटो लगा था और इंदिरा गांधी की लाश को दिखाकर वोट मांगे गए थे और प्रचंड जीत दर्ज की थी।*
हिंदुओं को 2 पक्षियों के उदाहरण से सीखने की जरूरत है......
1:- पक्षी नंबर वन डोडो....
डोडो पक्षी मॉरीशस और हिंद महासागर के कुछ अन्य दीप जैसे मेडागास्कर में पाया जाता था.. इन द्वीपों पर पहले इंसानी आबादी नहीं थी....
डोडो पक्षी आराम से इन द्वीपों पर रहते थे और चूंकि इन द्वीपो पर इनका शिकार करने वाला कोई अन्य जीव-जंतु नहीं था इसलिए यह पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी रक्षात्मकता और अपनी आक्रामकता भूल चुके थे।
क्योंकि इन्हें इन द्वीपों पर भरपूर खाना मिलता था इसलिए यह आराम से इन द्वीपो पर रहते थे।
इन्हें तेज भागना नहीं पड़ता था। दौड़ना या दौड़ाना नहीं पड़ता था। उड़ना नहीं पड़ता था। इसलिए धीरे-धीरे इनके टांगों की हड्डियां कमजोर हो गई।
16 वीं शताब्दी के शुरू में मॉरीशस पर डच लोग गए और डच लोग हैरान रह गए कि इस पक्षी को मनुष्य बड़े आराम से पकड़ लेता था फिर डच लोगों ने इनका शिकार करना शुरू कर दिया।
चुकी डच लोग अपने साथ कुत्ते चूहे इत्यादि लेकर गए थे धीरे-धीरे कुत्तों ने भी इनका शिकार करना शुरू कर दिया और चूहों ने इनके अंडे वगैरह खाने शुरू कर दिए। डोडो पक्षी बिल्कुल भी रक्षात्मक था नहीं दिखाता था क्योंकि सदियों से वह ऐसे माहौल में पीढ़ी दर पीढ़ी पलने लगा था जहां उसे आक्रामकता की जरूरत नहीं थी लेकिन जब उसे आक्रामक होने की जरूरत पड़ी तब वह भूल गया हमला करना किसे कहते हैं तेज भागना किसे कहते हैं।
नतीजा यह हुआ 1710 तक इस धरती से डोडो पक्षी पूरी तरह से विलुप्त हो गया इस पक्षी के सिर्फ दो Mummy बनाकर रखे गए हैं एक ब्रिटेन के रॉयल म्यूजियम में है दूसरा मॉरीशस यूनिवर्सिटी में है!
2:- पक्षी नंबर दो केसोवरी.......
केसोवरी पापुआ न्यू गिनी ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड समूह यानि प्रशांत महासागर के और कैरेबियन महासागर के कई दीपों पर रहता था यह भी शुतुरमुर्ग एमु और डोडो के परिवार का ही पक्षी था।
लेकिन इसे ऐसे माहौल में रहना पड़ा जहां इसके कई शिकारी थे यहां तक कि मनुष्य भी इसका शिकार करने की कोशिश करते थे पीढ़ी दर पीढ़ी केसोवरी ने अपने अंदर बेहद तेज आक्रामकता गुस्सैल और खतरनाक हथियार विकसित कर लिए और इसमें मनुष्यों सहित दूसरे जीव जंतुओं को देखकर अपने अंदर स्वत रक्षात्मक सोच विकसित कर लिया।
आज हालात ऐसे हैं कि यह मनुष्यों को देखते ही उसे दौड़ाकर अपने पंजों से फाड़ देते हैं यह 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं और इनके नाखून 8 इंच लंबे होते हैं और किसी तेज चाकू की तरह पैने होते हैं । अंग्रेजों ने जो कैरेबियन पापुआ न्यू गिनी न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया पर कब्जा किया तब अंग्रेज इनका भी शिकार करना चाहते थे लेकिन केसोवरी पहले से ही ऐसे माहौल में रहा था इसलिए उसने जमकर प्रतिकार किया और शिकारियों को दौड़ाकर फाड़ देता था यहां तक कि यह पक्षी झुंड में रहकर यानी समूहों में रहकर हमला करना भी सीख लिया क्योंकि बाद में अंग्रेज गोली से इनका शिकार करने की कोशिश करते थे तब इनके समूह का दूसरा पक्षी पीछे से आकर शिकारी पर हमला कर देता था।
आज हालात ऐसे हैं की जिन जंगलों में केसोवरी पक्षी पाए जाते हैं वहां पर बड़े-बड़े चेतावनी के बोर्ड लगे होते हैं क्योंकि यह मनुष्य को देखते ही हमलावर हो जाता है।
आज केसोवरी धरती से विलुप्त नहीं हुआ बल्कि आराम से अपने प्राकृतिकहैबिटेट में फल-फूल रहा है
निष्कर्ष
दोनों पक्षियों के उदाहरण से वही सीख मिलती है की जो प्रजाति पीढ़ी दर पीढ़ी अपने संतानों को हमलावर होना गुस्सैल होना प्रतिकार करना नहीं सिखाएगी वह पीढ़ी विलुप्त हो जाएगी। पाकिस्तान में हिंदुओं ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाई अंत में नतीजा क्या हुआ कि उन हवेलियों में शांतिदूत रहते हैं। कश्मीर में पंडितों ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाई आज उन हवेलियों में शांतिदूत रहते हैं । केरल के कासरगोड सहित कई जिलों में हिंदुओं ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाई आज हवेलियों में शांतिदूत रहते हैं ।
अगर हिंदुओं ने पहले ही केसोवरी से प्रेरणा लेते हुए आक्रामकता दिखाई होती आज यह हालात नहीं हुई होती।
धर्मनिरपेक्षता कायरों का मत है।
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कमाई के मामले में बिल गेट्स से आगे निकले मार्क जुकरबर्ग, टॉप-4 की लिस्ट में शामिल
फेसबुक के सह-संस्थापक और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने फिर एक बार टॉप-4 की सूची में शामिल हो गये है. जी हां, खबरों की मानें तो मेटा का तिमाही मुनाफा वॉल स्ट्रीट की उम्मीदों से अधिक हुआ है जिस कारण वह 27 अरब डॉलर से अधिक कमाई कर चौथे नंबर के अमीर हो गए है.
'राष्ट्रपिता' महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर आज लखनऊ स्थित शहीद स्मारक स्थल पर 'शहीदों को श्रद्धांजलि' कार्यक्रम में पूज्य बापू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और भजन संध्या में सम्मिलित हुआ।
इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में वीरगति प्राप्त ज्ञात-अज्ञात अमर बलिदानियों की पावन स्मृति में दीपदान कर उनकी वीरता, संघर्ष और समर्पण को नमन किया।
जय हिंद!
भारतीय तटरक्षक दिवस
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भारतीय तटरक्षक दिवस, हर साल 1 फरवरी को मनाया जाता है, जो 1977 में भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) की स्थापना की याद दिलाता है। यह दिन समुद्री सुरक्षा, सुरक्षा और भारत के तटीय और अपतटीय हितों की रक्षा के लिए आईसीजी की अटूट प्रतिबद्धता का जश्न मनाता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस की थीम
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भारतीय तटरक्षक दिवस 2024 की आधिकारिक थीम अभी तक घोषित नहीं की गई है। हालाँकि, तकनीकी प्रगति पर आईसीजी के हालिया फोकस और सेवा, सुरक्षा और सुरक्षा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता के आधार पर, तटरक्षक दिवस 2024 के लिए एक संभावित विषय हो सकता है:
यह विषय अपने विविध समुद्री मिशनों को पूरा करने में अपनी क्षमताओं और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रगति को अपनाने के लिए आईसीजी के समर्पण को उजागर करेगा। यह भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और वीरता और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए संगठन की अटूट प्रतिबद्धता पर भी जोर देगा।
भारतीय तटरक्षक दिवस के उद्देश्य
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आईसीजी की विरासत का सम्मान: यह दिन आईसीजी के समृद्ध इतिहास और भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति उसके समर्पण का सम्मान करता है।
जागरूकता बढ़ाना: इस दिन का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में आईसीजी की विविध भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना है।
भावी पीढ़ियों को प्रेरित करना: यह दिन भावी पीढ़ियों को आईसीजी में करियर पर विचार करने और देश की समुद्री सुरक्षा में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस का इतिहास
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भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) एक महत्वपूर्ण शक्ति है जो भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करती है। इसका इतिहास स्वतंत्रता-पूर्व युग से जुड़ा है, जो समय के साथ राष्ट्र के सामने आने वाली समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए विकसित होता गया।
प्रारंभिक शुरुआत
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आईसीजी की जड़ें 1792 में राजस्व क्रूजर सेवा की स्थापना में पाई जा सकती हैं, जिसे तस्करी को रोकने और समुद्री नियमों को लागू करने का काम सौंपा गया था। 1942 में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, रॉयल इंडियन नेवी ने भारतीय नौसेना रिजर्व का गठन किया, जिसने तटीय रक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता के बाद का युग और आईसीजी का गठन
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भारत की स्वतंत्रता के बाद, एक समर्पित समुद्री सुरक्षा बल की आवश्यकता तेजी से स्पष्ट हो गई। 1952 में, भारतीय नौसेना ने तटीय क्षेत्रों में गश्त करने और तस्करी को रोकने के लिए नेवल कोस्टल बैटरी (एनसीबी) की स्थापना की। समय के साथ एनसीबी की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। 1972 में इसका नाम बदलकर भारतीय तटरक्षक कर दिया गया।
आईसीजी की औपचारिक स्थापना
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1 फरवरी, 1977 को, भारतीय संसद द्वारा भारतीय तटरक्षक अधिनियम पारित किया गया, जिसने औपचारिक रूप से आईसीजी को संघ के एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में स्थापित किया। यह भारत के समुद्री सुरक्षा तंत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
भूमिका एवं उत्तरदायित्व का विस्तार
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अपनी स्थापना के बाद से, ICG ने समुद्री मिशनों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करने के लिए अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों का विस्तार किया है, जिनमें शामिल हैं।
समुद्री खोज और बचाव (एसएआर):
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आईसीजी भारत के समुद्री क्षेत्रों में एसएआर संचालन के समन्वय और संचालन के लिए जिम्मेदार है, जिससे संकट में अनगिनत लोगों की जान बचाई जा सके।
समुद्री कानून प्रवर्तन: आईसीजी तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और अन्य समुद्री अपराधों से निपटने के लिए समुद्री कानूनों और विनियमों को लागू करता है।
तटीय सुरक्षा: आईसीजी भारत की तटरेखा को आतंकवाद, समुद्री डकैती और अवैध घुसपैठ जैसे खतरों से बचाता है।
अपतटीय गश्ती: ICG भारत की अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा करता है, जिसमें तेल रिसाव, मछली पकड़ने के मैदान और समुद्री प्रतिष्ठान शामिल हैं।
पर्यावरण संरक्षण: आईसीजी समुद्री प्रदूषण को रोकने, पर्यावरणीय नियमों को लागू करने और समुद्री पर्यावरणीय घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस का महत्व
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प्रतिवर्ष 1 जनवरी को मनाया जाने वाला भारतीय तटरक्षक दिवस, भारत और इसकी समुद्री सुरक्षा के लिए बहुत महत्व रखता है। यह 1978 में तटरक्षक बल (आईसीजी) की स्थापना का जश्न मनाने और भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए संगठन की अटूट प्रतिबद्धता का सम्मान करने का दिन है।
भावी पीढ़ियों को प्रेरित करना:
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यह दिन भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करता है, उन्हें आईसीजी में करियर पर विचार करने और देश की समुद्री सुरक्षा में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि: यह दिन समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता और अपने समुद्री हितों की रक्षा के प्रति समर्पण की पुष्टि करता है।
अंत में, भारतीय तटरक्षक दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है जो आईसीजी की विरासत का सम्मान करता है, अपने कर्मियों के योगदान को मान्यता देता है, सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाता है, भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता है और समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने और इसके तटीय समुदायों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करने में आईसीजी की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है।
बिहार में सत्ता का संग्राम एकबार फिर से छिड़ा हुआ है. जदयू महागठबंधन से अलग होकर फिर एकबार एनडीए के साथ सरकार बनाने जा रही है. इधर नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मुलाकात करके अपना इस्तीफा सौंपा है. जबकि BJP के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े देर रात राजभवन पहुंचे थे......
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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया आज पूरी कर ली गई है. आज जनता 23 जनवरी से प्रभु रामलला का दर्शन कर सकेंगे. पूरे देश में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है.
ब्यूरो चीफ/ लखनऊ
कोमल
शवेता दर्पण समाचार पत्र
बलिदानियों को मिला सम्मान, गोधरा काण्ड के मृतकों के परिजनों को मिले निमंत्रण “श्री राम मंदिर” के
अयोधा जी लौट रहे 59 कार सेवक जिंदा फूंक दिए गए थे।
एक तरफ जहां नव निर्मित भगवान श्री राम जी के मंदिर पर कुछ लोगों के द्वारा आपत्तियां उठाई जा रही है तो दूसरी तरफ सर सनातन समाज तरह-तरह से अपनी खुशियां प्रकट कर रहा है इस बीच उन 59 लोगों के परिवारों को भी प्रसन्नता के साथ-साथ शांति का भी अनुभव हो रहा होगा जिन्हें श्री राम लाल जी के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है यह वह 59 लोग हैं जिन्हें विधर्मियों के द्वारा रेलगाड़ी के एक डिब्बे में पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था इससे संबंधित खबर जानने से पहले उसे खौफनाक दिन के बारे में भी आपको अवश्य जान लेना चाहिए।
बताने की आवश्यकता नहीं हैं की अहमदाबाद को जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन से चली ही थी कि किसी ने चेन खींचकर ट्रेन रोक ली और फिर भारी पथराव किया गया जिससे भयभीत हो कर यात्रियों ने डिब्बे के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए उसके बाद दानवों ने ट्रेन के एक डिब्बे में पेट्रोल डाल कर उसे आग लगा दी थी। जिससे श्री अयोध्या जी से लौट रहे 59 हिंदू तीर्थ यात्री जिंदा जल कर भस्म हो गए थे।
प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य समारोह 22 जनवरी 2024 को होने वाला है। इस अवसर पर गुजरात के गोधरा कांड में मार दिए गए 59 कारसेवकों में से उनके परिवार वाले भी शामिल होंगे। इस बारे में गुजरात विश्व हिंदू परिषद के महासचिव अशोक रावल ने जानकारी देते हुए बताया है कि आमंत्रित किए गए लोगों में उन कार सेवकों के परिजन भी शामिल हैं जो अयोध्या जी से अहमदाबाद लौट रहे थे और गोधरा रेलवे स्टेशन के पास उन्मादियों द्वारा साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बों में आग लगा दिए जाने से मारे गए थे। विश्व हिंदू परिषद के पास 39 कारसेवकों के नाम और संपर्क थे। जिससे उन लोगों से संपर्क करने के प्रयास किए गए किंतु केवल 20 परिवारों से ही हम संपर्क कर पाए हैं। अशोक रावल ने आगे बताया कि इनमें से 19 परिवारों द्वारा 22 जनवरी को अयोध्या जी में होने वाले समारोह में शामिल होने की सूचना प्राप्त हुई है। बता दें कि गोधरा में जलाकर मार दिए गए कारसेवकों में से एक ऑटो रिक्शा चालक हरी भाई डाभी भी शामिल हैं। उन्होंने गोधरा कांड में अपनी मां को खो दिया था। यह डाभी अयोध्या के कार सेवक पुरम में रहकर सेवा कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद के अनुसार गोधरा कांड के पीड़ितों के अलावा गुजरात से 320 संत और समाज के 105 प्रमुख लोगों को भी इस उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
हिंदू द्रोही मीडिया के लिए बहुत फंडिंग है, किंतु हिंदुत्ववादी मीडिया को अपना खर्चा चलाना भी मुश्किल है।
अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कल यानी सोमवार को भव्य आयोजन हो रहा है. समारोह की भव्य तैयारी हो चुकी है. कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल हो रहे हैं. वहीं, अयोध्या राम मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा समारोह की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शुभकामनाएं दी हैं. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को धन्यवाद भी दिया है. अपने पत्र में राष्ट्रपति ने कहा कि सौभाग्य से राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने का मौका मिला.....
हिन्दूराष्ट्र के 5000 वर्ष के इतिहास का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन अब दूर नहीं है।* आजतक देशभर के नगर नगर में देवता प्रतिष्ठित हुए होंगे, पर दूसरे नगरों को उसकी खबर नहीं थी। वहाँ तमिलनाडु में यदि भव्य मंदिर बनते थे तो हिमाचल में बैठे हिन्दू से हम उस मन्दिर का नाम जानने की आशा भी नहीं कर सकते थे। यद्यपि पूर्वजों ने महाकुंभ की ऐसी परम्परा चलाई थी जहाँ सम्पूर्ण हिन्दू समाज जुटता चला आ रहा था। मुझे प्रयाग के कुम्भ में सम्राट हर्षवर्धन का वो दान याद है, जब वो सर्वस्व दान करके धन्य अनुभव करते थे। पर संचार व परिवहन के अभाव में एक एक हिन्दू कुम्भ में नहीं पहुँच सकता था।
*आज तो विश्वभर का करोड़ों हिन्दू समाज इस राष्ट्रपर्व में मग्न है। मानो सप्तद्वीपा मेदिनी ही एक नगर हो गयी है। प्रथम बार हर हिन्दू संचार माध्यमों से एकाकार हो गया है। श्रीनगर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से आसाम तक एक ही भाव है। लंदन से अमेरिका तक मन्दिर सज रहे हैं, शोभायात्रा निकल रही हैं। कोई मुहल्ला ऐसा नहीं है जहाँ भगवा ध्वज न फहर रहे हों। कोई ऐसा मन्दिर नहीं है जिसमें पौष शुक्ल द्वादशी को उत्सव न हो। 5000 वर्ष में ऐसा अवसर कभी नहीं आया। सभी हिन्दू एक साथ प्रभु के दर्शन करेंगे। धन्य हैं वे नेत्र जो यह दृश्य देख रहे हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि यह क्षण जी पा रहे हैं, वरना प्रतीक्षा करते करते पथराई आँखों से पीढ़ियाँ चली गईं। जिन्होंने स्वप्न देखा, उनके प्रिय स्वप्न की पूर्ति हमने देखी, वे पूछेंगे समय आने पर उस आनन्दित क्षण के बारे में।*
*कल एक बंधु ने बहुत ही भावुक बात लिख दी, "सच कहूँ तो आजकल मैं रास्ते चलते हुए भी बहुत सावधानी बरतने लगा हूँ। कारण यह है कि किसी भी गलती से प्राण प्रतिष्ठा से पहले मरना नहीं चाहता। बस 22 जनवरी 2024 तक शरीर बचा रह गया और यह प्राण प्रतिष्ठा हो गया तो मेरी आत्मा अनंतकाल तक के लिए यह क्लेम कर सकेगी कि जब इस धरा पर यह पावन कार्य हो रहा था तो मैं भी सशरीर यहीं था। मैं कोटि जन्मों के लिए अपने को सौभाग्यशाली मान लूँगा। ऐ मालिक! चार दिन के लिए और सांसें दे दे, उसके बाद कभी भी छीन लेना कोई शिकायत नहीं करूँगा।"*
करोड़ों हिन्दुओं ने अपने जीवन का चरम इस क्षण को मान लिया, अपने जीवन के सत्त्व को इस उत्सव से अभेद कर दिया है। साध्वी ऋतम्भरा का अवरुद्ध कण्ठ स्वरलहरी लगता है। अब ऐसा ही लगता है रामलला प्रतिष्ठित नहीं हो रहे हैं, प्रकट हो रहे हैं। जैसे ही रामलला प्राण प्रतिष्ठित हो जाएंगे राष्ट्र के रंग ढंग बदल जाएंगे। घावों पर मरहम लग जाएंगे। आसमान में चाँद लग जाएंगे। बुझे हुए सूरज जल जाएंगे। भटके हुए नक्षत्र टिक जाएंगे। महलों में कंगूरे लग जाएंगे। राष्ट्र के पंख लग जाएंगे। मानो किसी निर्जन वन की तपती दुपहरी में शिवजी पर किसी ने अखण्ड जल धार कर दी हो।
आज तो 2024 चल रहा है, सम्वत् 2080 चल रहा है। हम आज हैं, मंदिर तो 5080 में भी रहेगा। आज से 5000 साल बाद भी रामलला विराजमान रहेंगे। महाराजश्री अखण्डानन्द जी की एक बात याद आ गयी। एक भक्त किन्हीं सन्त के पास आकर बोला, प्रभु, भगवान के दर्शन कैसे होंगे? महाराज बोले, "कहाँ से आ रहे हो?" वह बोला, "कनकभवन से आ रहा हूँ।" महाराज बोले, "यदि कनकभवन में भगवान के दर्शन नहीं हुए तो कैसे भी भगवान के दर्शन नहीं हो सकते।"
रामलला स्वयं प्रकट रामलला हैं, विग्रह नहीं है ये देव हैं, इस रूपमाधुरी को भला कोई प्राकृत कहेगा? महाराजश्री प्रेमानन्द जी एक बार बोले, "देवता भोगयोनि है, मनुष्य जन्म को तरसते हैं देव, कि इस रूपमाधुरी का पान हो जाए, कथा का श्रवण हो जाए, मोक्ष लेने के लिए तो देवों को भी धरती पर आना होगा।" जब भगवान का अवतार हुआ, तो देवता धरती पर आ आकर दर्शन करते, यह लीलासुख स्वर्ग में नहीं है। एक बार जब शुकदेवजी ने भागवत सुनाई तो देवता कथा सुनने को बहुत तरसे। आज फिर वह क्षण आ गया, कि ऐसे सुंदर मंदिर में भगवान् विराजमान होने जा रहे हैं, मानो साकेत धाम में आसन सजा है।
यह वही गर्भगृह है, जहाँ कौशल्या माँ ने टेर लगाई है, "कीजे सिसुलीला, अतिप्रिय सीला" शिशु लीला करो प्रभु , मुझे वही प्रिय है, "यह सुख परम अनूपा"। यही वह गर्भगृह है "सुनि वचन सुजाना, रोदन ठाना, होहि बालक सुरभूपा" चतुर्भुज विष्णु शिशुरूप हो गए, रो रहे हैं, प्रभु रो रहे हैं। आसमान में देवताओं में धक्का मुक्की हो गयी, झांक रहे हैं कि ये क्या प्रपंच है भैया। "सर्वलोकमहेश्वर रो रहे हैं"। महादेवजी की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं है। ब्रह्माजी भी बेसुध हो गए देखकर। सूर्यकुल में सूर्य उदित हो गया। दशरथ के अंगना में लाला हुआ है। सारे देश में बधाई है। भारत माता रूपी कौशल्या के लाला हुआ हैपृथ्वी को अपना पिया मिल गया। ब्रह्मांड को अपना पिता मिल गया। हिन्दू राष्ट्र को अपना राजा मिल गया।
जय जय रघुनाथ!! सर्वलोकस्य नाथ!!
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के प्रयास से दिसंबर 2021 में रांची के ओरमांझी स्थित कुल्ही इंडस्ट्रियल एरिया में कई टेक्सटाइल प्लांट्स का शुभारंभ किया गया था. आज उन प्रयासों से महज तीन वर्ष में 10 हजार से अधिक युवाओं को रांची में रोजगार मिला है.
भारतीय पूर्व टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के पति पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक ने दूसरी शादी कर ली है. उन्होंने एक पाकिस्तानी टीवी एक्ट्रेस से शादी की है. अब तक सानिया और शोएब का तलाक नहीं हुआ है लेकिन काफी समय से दोनों अलग रह रहे हैं.
अभेद्य हुई अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था, एटीएस, एसटीएफ और एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात
22 जनवरी को श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है. एटीएस, एसटीएफ और पुलिस बल की भारी भरकम फोर्स तैनात की गई है. सीसीटीवी, एआई और एंटी ड्रोन से रामनगरी के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है.
ये जो बालस्वरूप रामलला के एक हाथ में कोदण्ड शोभायमान है तथा दूसरे में बाण वही इनसे सहन नहीं हो रहा। इन पंजेछापों को तो बस निरीह रामलला चाहियें जैसे सत्तर वर्षों से रखवाया हुआ था। रामराज्य भी तभी आता है जब शक्ति साधना पूर्ण होती है।
यह समय भारतवर्ष के उत्थान का समय है,धार्मिक सांस्कृतिक मूल्यों का उत्थान,आर्थिक राजनैतिक शक्ति का उत्थान
अंततः यह समस्त सनातन धर्मियों के उत्थान की बेला है और यह तभी सम्भव हो सकेगा जब हम सभी राम जी के आदर्शों मूल्यों की मर्यादा का अनुपालन करने की ओर अग्रसर होंगे।इतने हर्ष की भी अनुभूति हो सकती है इतनी तो कल्पना भी ना कि थी कभी।
लोकसभा चुनाव से पहले लोकपाल केस में झामुमो सुप्रीमो दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है. इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच को रद्द करने की राज्यसभा सांसद और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की याचिका को खारिज कर दिया है.
अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कंगना रनौत, शेफाली शाह, रजनीकांत, धनुष, विवेक ओबरॉय, रणदीप हुडा और लिन लैशराम, मधुर भंडारकर, सोनू निगम, शंकर महादेवन, अनु मलिक पहुंच गए हैं. इसके अलावा हवाई अड्डे पर अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन को देखा गया.....
मैं प्रभु राम से क्षमा चाहता हूं : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री रामलला के नवीन विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अपने संबोधन की शुरुआत ‘सियावर रामचंद्र की जय’ से की. उन्होंने कहा कि जहां भगवाना राम का काम काम होता है, वहां हनुमान जरूर रहते हैं. मैं हनुमानगढ़ी को प्रणाम करता हूं. सदियों के धैर्य की धरोहर आज मिली है. गुलामी की मानसिकता तोड़कर राष्ट्र आगे बढ़ गया है. पीएम ने कहा कि मैं प्रभु राम से क्षमा चाहता हूं कि इस मंदिर के लिए सदियों को इंतजार करना पड़ा.
राम आग नहीं बल्कि राम ऊर्जा हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मैं प्रभु श्री राम से क्षमा याचना भी करता हूं, हमारे पुरुषार्थ में कुछ तो कमी रह गई होगी, हमारी तपस्या में कुछ कमी रही होगी कि हम इतने सदियों तक मंदिर निर्माण नहीं कर पाए. आज वह कमी पूरी हुई. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने न्याय की लाज रख ली. राम भारत की अंतरआत्मा से जुड़े हैं. राम आग नहीं बल्कि राम ऊर्जा है. राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं.
आज राम लला के आगमन में लखनऊ के सेक्टर ओ मानसरोवर योजना गोकुल धाम मन्दिर में सुन्दर काण्ड का पाठ और शाम को दीपोत्सव जलाकर श्री राम जी का भव्य स्वागत किया
मुनव्वर राणा का निधन
दिल का दौरा पड़ा
रायबरेली में कल होगा अंतिम संस्कार
संदेशखाली में ईडी टीम पर हुए हमले के सिलसिले में दो गिरफ्तार
उत्तरी 24 परगना जिले के संदेशखाली में पांच जनवरी को शेख के घर पर छापे के दौरान ईडी अधिकारियों पर कथित तौर पर हमला किया गया और उनका सामान छीन लिया गया था. इस हमले में ईडी के तीन अधिकारी घायल हो गये थे.
प्रधानमंत्री ने ‘हैडलाइन मैनेजमेंट’ के लिए मिलिंद देवड़ा का इस्तीफा आज के लिए तय किया, लेकिन इसका कांग्रेस संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह बात कही है. उन्होंने कहा कि एक मिलिंद जाता है, लेकिन ''लाखों मिलिंद'' पार्टी में हैं जो कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखते हैं.....
22 जनवरी को बंद रखें टीवी, बच्चों को दिखाए बाबरी को तस्वीर... CPIM नेता का राम द्रोह
ये हैं केरल के CPM नेता PK बीजु। इन्होंने लोगों से आह्वान किया है, की 22जनवरी को अपना टीवी सेट चालु न करें , साथ ही स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से बच्चों को विवादित बाबरी मस्जिद की तस्वीर दिखाने के लिए कहा है।
दुसरी तरफ केरल की कम्यूनिस्ट सरकार ने उसी दिन राज्य भर में वृहद विद्युत सुधार की मुहिम चला कर सारे राज्य में बिजली बंद रखने की रूप रेखा तय की है । 22 जनवरी को पुरे केरल में बिजली सप्लाई बन्द रहेगी नीचता की भी हद हो गई। ऐसे लोगों को , ऐसी पार्टी को वोट देने वाले क्या वाकई हिंदू हो सकते हैं? विचार जरूर करना चाहिए....
जन्मभूमि ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार , सीपीएम नेता ने स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से बच्चों को विवादित बाबरी मस्जिद की तस्वीर दिखाने के लिए कहा है। पीके बीजू केरल स्कूल टीचर्स एसोसिएशन जिला सम्मेलन के उद्घाटन पर बोल रहे थे।इस बीच नेता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की भी आलोचना की और कहा कि यह नीति केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली को 'भगवाकरण' करने के लिए पेश की गई है और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान राज्य के खिलाफ मिलीभगत कर रहे हैं। इससे पहले, केरल में सीपीएम ने कहा था कि वे उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। “हमारी पार्टी अयोध्या में राम मंदिर के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह में शामिल नहीं होगी। हम धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं लेकिन वे एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ रहे हैं। यह एक धार्मिक कार्यक्रम का राजनीतिकरण है. यह सही नहीं है,'' पार्टी नेता बृंदा करात के हवाले से कहा गया।
समाचार रिपोर्टराजनीत सीपीएम नेता पीके बीजू ने लोगों से राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर टीवी बंद करने को कहा, शिक्षकों को बच्चों को बाबरी ढांचे की तस्वीरें दिखानी चाहिए
22 जनवरी को बंद रखें टीवी, बच्चों को दिखाए बाबरी को तस्वीर... CPIM नेता का राम द्रोह
ये हैं केरल के CPM नेता PK बीजु। इन्होंने लोगों से आह्वान किया है, की 22जनवरी को अपना टीवी सेट चालु न करें , साथ ही स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से बच्चों को विवादित बाबरी मस्जिद की तस्वीर दिखाने के लिए कहा है।
दुसरी तरफ केरल की कम्यूनिस्ट सरकार ने उसी दिन राज्य भर में वृहद विद्युत सुधार की मुहिम चला कर सारे राज्य में बिजली बंद रखने की रूप रेखा तय की है । 22 जनवरी को पुरे केरल में बिजली सप्लाई बन्द रहेगी नीचता की भी हद हो गई। ऐसे लोगों को , ऐसी पार्टी को वोट देने वाले क्या वाकई हिंदू हो सकते हैं? विचार जरूर करना चाहिए....
जन्मभूमि ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार , सीपीएम नेता ने स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से बच्चों को विवादित बाबरी मस्जिद की तस्वीर दिखाने के लिए कहा है। पीके बीजू केरल स्कूल टीचर्स एसोसिएशन जिला सम्मेलन के उद्घाटन पर बोल रहे थे।इस बीच नेता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की भी आलोचना की और कहा कि यह नीति केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली को 'भगवाकरण' करने के लिए पेश की गई है और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान राज्य के खिलाफ मिलीभगत कर रहे हैं। इससे पहले, केरल में सीपीएम ने कहा था कि वे उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। “हमारी पार्टी अयोध्या में राम मंदिर के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह में शामिल नहीं होगी। हम धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हैं लेकिन वे एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ रहे हैं। यह एक धार्मिक कार्यक्रम का राजनीतिकरण है. यह सही नहीं है,'' पार्टी नेता बृंदा करात के हवाले से कहा गया।
समाचार रिपोर्टराजनीत सीपीएम नेता पीके बीजू ने लोगों से राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर टीवी बंद करने को कहा, शिक्षकों को बच्चों को बाबरी ढांचे की तस्वीरें दिखानी चाहिए
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सर्द हवाओं के बीच उम्मीदों का सूरज! 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' में राहुल गांधी का ये लुक पसंद आया लोगों को
कांग्रेस की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' शुरू करने के लिए मणिपुर का चुनाव किए जाने का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सवाल उठा था कि यात्रा शुरू कहां से होनी चाहिए? मैंने साफ कहा कि यह यात्रा मणिपुर से ही शुरू होनी चाहिए.
ब्यूरो चीफ/लखनऊ
कोमल वर्मा
राम मंदिर जब नहीं बना था तब मैं हमेशा अयोध्या को अभागी कहा करता था...।।_*
*_उस दौर में जब राम मंदिर निर्माण की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं लग रही थी तब मैने लिखा भी था...अयोध्या जी को इंगित करते हुए कि क्यूँ तुम्हारी पावन भूमि पर रामधाम नहीं बन पा रहा है..._*
*_"सुनो अयोध्या, तुमने ही संत्रास दिया था रघुपति को_*
*_राजतिलक के बदले में वनवास दिया था रघुपति को_*
*_श्रीराम के सरल हृदय को कितना दुख पहुंचाया था_*
*_तुमने ही वैदेही को भी निष्काषित करवाया था.._*
*_निष्ठुर बनी रहीं तुम प्रभु के अंतरतम को छील गयी_*
*_कैसे धरती फटी तुम्हारी, माँ सीता को लील गयी ?_*
*_वो ही दुख, वो ही पीड़ाएं और मिला संत्रास तुम्हें_*
*_अभी झेलना होगा, यह है श्री राम का श्राप तुम्हें।।"_*
*_अनंत पीडाओं की स्याही से लिखी गयीं ये पंक्तियाँ...मुझे खुशी है कि अब निर्मूल साबित हो रही हैं।_*
*_कवि की कविता का मर जाना दुःखद होता है लेकिन अब इस कविता की मृत्यु पर शोक नहीं, आनंद हो आ रहा है।_*
*_मन आल्हादित है....और अयोध्या जी की श्राप मुक्ति ऐसी लग रही है जैसे कि लाखों करोड़ों भक्तों के मन पर रखा टनों बोझ उतर गया हो। भारत के सांस्कृतिक उत्थान का यह पर्व अभिभूत किये हुए है।_*
*_अब जो कविता लिखी गयी है...वो पूरे देश के राममय हो जाने और भारतवर्ष की सारी आस्था का अयोध्या जी में सिमट आने का भाव लिये है...!!_*
*_"एक ही जगह पे चारों धाम आ गये_*
*_अवधपुरी में श्री राम आ गये...!!"_*
*_जय जय श्रीराम
माननीय श्री Shivraj Singh Chouhan जी ने आज MIT, पुणे में श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज वर्ल्ड पीस लाइब्रेरी का भ्रमण किया।
गोरखपुर में 'सांसद खेल एवं लोक कला महाकुम्भ: 2023-24' के अंतर्गत आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को आज पुरस्कृत कर सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ।
सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की कामना है।
सनातन धर्म के सम्प्रदाय-भाग-42
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वैशेषिक दर्शन में पदार्थों का निरूपण निम्नलिखित रूप से हुआ है :-
(2.1.1).जल :- यह शीतल स्पर्श वाला पदार्थ है।
(2.1.2).तेज :- उष्ण स्पर्श वाला गुण है।
(2.1.3).काल :- सारे कायो की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश में निमित्त होता है।
(2.1.4).आत्मा :- इसकी पहचान चैतन्य-ज्ञान है।
(2.1.5).मन :- यह मनुष्य के अभ्यंतर में सुख-दु:ख आदि के ज्ञान का साधन है।
(2.1.6).पंच भूत :-पृथ्वी,जल,तेज,वायु और आकाश।
(2.1.7).पंच इन्द्रिय :-घ्राण,रसना,नेत्र,त्वचा और श्रोत्र।
(2.1..पंच-विषय :- गंध,रस,रूप,स्पर्श तथा शब्द।
(2.1.9).बुध्दि :-ये ज्ञान है और केवल आत्मा का गुण है।
(2.1.10).ज्ञान:-नया ज्ञान अनुभव है और पिछला स्मरण।
(2.1.11).संख्या :- संख्या,परिमाण,पृथकता,संयोग और विभाग। ये आदि गुण: सारे गुण द्रव्यों में रहते हैं।
(2.1.12).अनुभव :-यथार्थ (प्रेम,विद्या) एवं अयथार्थ, (अविद्या),।
(2.1.13).स्मृति :-पूर्व के अनुभव के संस्कारों से उत्पन्न ज्ञान।
(2.1.14).सुख :- इष्ट विषय की प्राप्ति जिसका स्वभाव अनुकूल होता है। अतीत के विषयों के स्मरण एवं भविष्य में उनके संकल्प से सुख होता है।सुख मनुष्य का परम उद्देश्य होता है।
(2.1.15).दु:ख:- इष्ट के जाने या अनिष्ट के आने से होता है जिसकी प्रकृति प्रतिकूल होती है।
(2.1.16).इच्छा :- किसी अप्राप्त वस्तु की प्रार्थना ही इच्छ है जो फल या उपाय के हेतु होती है।
(2.1.17).धर्म, अधर्म या अदृष्ठ :- वेद-विहित कर्म जो कर्ता के हित और मोक्ष का साधन होता है, धर्म कहलाता है। अधर्म से अहित और दु:ख होता है जो प्रतिषिद्ध कर्मो से उपजता है।अदृष्ट में धर्म और अधर्म दोनों सम्मिलित रहते हैं।
वैशेषिक दर्शन के मुख्य पदार्थ:-(2.2.1). द्रव्य :- द्रव्य गिनती में 9 है-पृथ्वी,जल,तेज,वायु,आकाश,काल,दिशा, आत्मा और मन।
(2.2.2).गुण :- गुणों की संख्या चौबीस मानी गईं है, जिनमें कुछ सामान्य ओर बाकी विशेष कहलाते हैं। जिन गुणो से द्रव्यों में विखराव न हो उन्हें सामान्य (संख्या,वेग, आदि) और जिनसे बिखराव (रूप,बुध्दि,धर्म आदि) उन्हें विशेष गुण कहते हैं।
(2.2.3).कर्म :- किसी प्रयोजन को सिद्ध करने में कर्म की आवश्यकता होती है,इसलिए द्रव्य और गुण के साथ कर्म को भी मुख्य पदार्थ कहते हैं।चलना,फेंकना,हिलना आदि सभी कर्म।मनुष्य के कर्म पुण्य-पाप रूप होते हैं।
(2.2.4).सामान्य :- मनुष्यों में मनुष्यत्व, वृक्षों में वृक्षत्व जाति सामान्य है और ये बहुतों में होती है।दिशा,काल आदि में जाति नहीं होती क्योंकि ये अपने आप में अकेली है।
(2.2.5).विशेष :- देश काल की भिन्नता के बाद भी एक दूसरे के बीच पदार्थ जो विलक्षणता का भेद होता है वह उस द्रव्य में एक विशेष की उपस्थिति से होता है।उस पहचान या विलक्षण प्रतीति का एक निमित्त होता है :- यथा गौ में गौत्व जाति से,शर्करा में मिठास से।
(2.2.6).समभाव :- जहां गुण व गुणी का संबंध इतना घना है कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता एवं
(2.2.7).अभाव :- इसे भी पदार्थ माना गया है। किसी भी वस्तु की उत्पत्ति से पूर्व उसका अभाव अथवा किसी एक वस्तु में दूसरी वस्तु के गुणों का अभाव (ये घट नहीं, पट है) आदि इसके उदाहरण है।
बहुत से लोग ये भूल जाते हैं कि भाजपा सत्ता के लिए हिंदू समाज का इस्तेमाल कर रही है और हिंदू समाज अपने हित के लिए भाजपा का इस्तेमाल कर रहा है। अगर आप हिंदू हैं तो हिंदू हित के लिए भाजपा के इस्तेमाल होने और भाजपा के लिए इस्तेमाल होने में बुराई नहीं। पर भाजपा की सत्ता प्राप्ति के लिए अपने हिंदू हित कुर्बान भी न करें। यहां एक बात पूरी तरह से स्पष्ट कर दूं। राम मंदिर हिंदू हितों का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है। सारे हिंदू हित केवल राम मंदिर निर्माण से ही पूरे या सुरक्षित नहीं हो जाने वाले।। हां, तत्काल में राम मंदिर भी महत्वपूर्ण है। लेकिन केवल राम मंदिर ही महत्वपूर्ण नहीं है।
राम राम रहेगी...
एक तरह से यह अच्छा ही है कि सोनिया गांधी , अखिलेश यादव टाइप लोग अपने अहंकार और मुस्लिम वोट बैंक के प्रेम में 22 जनवरी , 2024 को अयोध्या नहीं जा रहे हैं। अयोध्या न जा कर यह लोग योगी और मोदी का सहयोग कर रहे हैं। क़ानून व्यवस्था की मदद कर रहे हैं। इस के लिए उन का धन्यवाद करना चाहिए। आप सोचिए कि अगर 22 जनवरी को खुदा न खास्ता हज़ारों की भीड़ के बीच से जब सोनिया गांधी या अखिलेश यादव टाइप लोग गुज़रेंगे तो कहीं हज़ारों की भीड़ पागल हो कर इन के स्वागत के लिए टूट पड़े तो ? भारी पुलिस बंदोबस्त के बावजूद जिस भीड़ ने बाबरी का ढांचा , देखते ही देखते धराशाई कर दिया , सोनिया , अखिलेश यादव टाइप लोगों को कैसे बर्दाश्त करेगी कोई भीड़। स्वागत तो करेगी ही। भारी स्वागत। क्यों कि लोगों में इन लोगों के लिए गुस्सा बहुत है। यह लोग इस गुस्से की आंच को महसूस कर रहे हैं , यह भी अच्छा है। क्यों कि भीड़ के स्वागत को कोई पुलिस नहीं रोक सकती। पुलिस कल्याण सिंह के समय की हो या योगी के समय की। नरसिंहा राव के समय की हो या मोदी के समय की। भीड़ अराजक होती है। बहुत अराजक। किसी अदालत को भी नहीं मानती।
के के पाठक ने दिया इस्तीफा, छुट्टी के दौरान ही ACS ने छोड़ दिया पद..
बिहार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
(स्मृति ईरानी ने आज इतिहास रच दिया। पहली गैर वो भी बिना किसी पर्दे या हिजाब के भारतीय संस्कृति की पूरी आभा के साथ।भारतीय स्वाभिमान और सहज गर्व से भरी भाव भंगिमाओं के साथ।आज भारतीयता के विश्व बंधुत्व के साथ इस्लाम का भाईचारा एकाकार हो चुका था। आज कितने नियम टूटे, सदियों की कितनी परम्पराएँ टूटीं पर समूचे विश्व को एक परिवार मानने वाली भारतीय संस्कृति की विलक्षणता आज एक बार फिर से जीवंत और गुंजायमान हो उठी। स्मृति ईरानी को इस नये इतिहास सृजन*.*पाकिस्तान और भारतीय लिब्रांडुओं ने UAE को OIC से बाहर किया।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की बेटी वामिका कोहली 11 जनवरी यानी आज के दिन तीन साल की हो गई है. वामिका के जन्म के बाद से अनुष्का और विराट दोनों ने अपनी बेटी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की है. दोनों अपनी प्यारी बेटी के साथ समय बिताने का कोई मौका नहीं छोड़ते
वैश्विक होगा "प्राण प्रतिष्ठा समारोह" पूरे विश्व में मनाया जाएगा महोत्सव
कूर्म द्वादशी "22 जनवरी 2024" को रामजन्मभूमि अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा होगी और इस अवशर पर केवल अयोध्या ही नहीं, केवल भारत नहीं अपितु विश्वभर में महोत्सव मनाया जायेगा। फ्रांस का एफिल टॉवर हो या न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर, हर जगह विशाल पर्दों पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रसारण की तैयारी है। इस्लामी मुल्कों में भी का महोत्सव का लाइव प्रसारण होगा।
ऐसा महोत्सव शायद ही कभी विश्व में हुवा हो जब विश्व के कोने कोने में लोग उत्साहित हों और इस अवसर को मनाने की तैयारी में कई दिनों पहले से ही जुट गए हों। विदेशों में राम रथ यात्राएं निकलेंगी , कार रैलियों की तैयारी चल रही है और मंदिरों में धार्मिक आयोजनों की तैयारियां भी हो रही हैं।
राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप तक के श्रद्धालु उत्साहित हैं। फ्रांस का एफिल टॉवर हो या न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर, हर जगह विशाल पर्दों पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रसारण की तैयारी है। इतना ही नहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न इलाकों में कार रैली भी निकाली जाएगी। यहाँ तक कि इस्लामी मुल्कों में भी रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान का लाइव प्रसारण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।
लोगों के उत्साह का आलम देखिए कि अयोध्या में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर विदेश तक में लोग इंतज़ार कर रहे हैं। इस तरह से अब ये एक वैश्विक कार्यक्रम बन रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें बनी हुई हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में 21 जनवरी, 2023 को ‘राम रथ यात्रा’ भी प्रस्तावित है, जिसमें पूरे यूरोप से श्रद्धालु जुट रहे हैं। साथ ही एफिल टॉवर के पास भी कार्यक्रम का आयोजन होगा। अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर तो राम मंदिर के शिलान्यास के कार्यक्रम का भी लाइव प्रसारण हुआ था, अब प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का होगा।
नॉर्थ अमेरिका के कई इलाकों, कनाडा में भी मंदिरों में 22 जनवरी को धार्मिक आयोजन होंगे, विशेष पूजा-अर्चना होगी। कैलिफोर्निया, वाशिंगटन और शिकागो सहित USA के कई शहरों में कार रैलियाँ होंगी। भारतीय समय के अनुसार 12:30 बजे कार्यक्रम होना है। उस दौरान जहाँ पेरिस में सुबह होगी, वहीं अमेरिका में रात होगी। चूँकि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला अपने मंदिर में विराजने जा रहे हैं, इसीलिए श्रद्धालुओं ने तैयारियाँ भी ख़ास कर के रखी हैं।
पेरिस में रहने वाले अविनाश मिश्रा ने बताया कि इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनते हुए यूरोप के लोग पेरिस में ‘राम रथ यात्रा’ में भाग लेंगे और एफिल टॉवर के पास प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखेंगे। उन्होंने इस यात्रा का नक्शा शेयर करते हुए श्रद्धालुओं से इसका हिस्सा बनने की अपील की। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी इस कार्यक्रम से जुड़ी सूचना को रीट्वीट किया है। अविनाश ने कहा कि इस प्राण-प्रतिष्ठा आयोजन का लाइव प्रसारण देखना श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य की बात है।
नॉर्थ अमेरिका और कनाडा में ‘द मांडू मंदिर एम्पावरमेंट काउंसिल’ ने कई देवस्थानों में कार्यक्रम की योजना बनाई है। वाशिंगटन और शिकागो के बाद अब कैलिफोर्निया में कार रैली होनी है। श्रद्धालुओं ने कहा कि भले ही वो सदेह अयोध्या में उपस्थित रहने में अक्षम हैं, लेकिन भगवान राम उनके हृदय में रहते हैं और वो उनकी वापसी से हर्षित हैं। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर एरिक एडम्स ने कहा कि ये एक हिन्दुओं की जनसंख्या को देखते हुए ये एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है, ये आध्यात्मिकता के पथ पर बढ़ने और त्योहार मनाने का एक अच्छा अवसर है।इतना ही नहीं, 160 अलग-अलग देशों में कई कार्यक्रमों का आयोजन होना है। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) ने इसकी रूपरेखा तैयार की है। 50 देशों में बड़े आयोजन होने हैं। अमेरिका में 300, मॉरीशस में 100, UK में 25, ऑस्ट्रेलिया में 30 और कनाडा में 30 लोकेशनों से अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण होगा। आयरलैंड, फिजी, इंडोनेशिया और जर्मनी में भी बड़े-बड़े कार्यक्रम होंगे, जहाँ लाइव प्रसारण दिखाया जाएगा।
अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और फिजी समेत 50 देशों के प्रतिनिधियों को अयोध्या इस समारोह में उपस्थित रहने के लिए बुलाया गया है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसी इस्लामी मुल्कों में भी लाइव स्ट्रीमिंग की योजना है। हवन पूजा और हनुमान चालीसा पाठ जैसे कार्यक्रम 160 देशों में होने हैं। एक तरह से यूपी भी इस कार्यक्रम के जरिए विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। दुनिया भर में हिन्दू पुनरुत्थान की एक इस नई गाथा के लोग साक्षी बनेंगे।
भाषा की दरिद्रता बनाम बच्चों_का_नामकरण
बच्चों का नाम रखने के विषय में समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को ना जाने हो क्या गया है....? लगता है जैसे...समाज पथभ्रष्ट एवं दिग्भ्रमित हो गया है।
एक सज्जन ने अपने बच्चों से परिचय कराया, और बताया की पोती का नाम *अवीरा* रखा है, बड़ा ही यूनिक नाम रखा है...यह पूछने पर कि इसका अर्थ क्या है....? तो बड़े गर्व से बोले कि... बहादुर, ब्रेव, कॉन्फिडेंशियल। सुनते ही मेरा दिमाग चकरा गया।...फिर बोले, मुझसे कृपा करके बताएं आपको कैसा लगा?
मैंने कहा आदरणीय, अवीरा तो बहुत ही अशोभनीय नाम है...नहीं रखना चाहिए....!
मैने उनको बताया कि....
1. जिस स्त्री के पुत्र और पति न हों. पुत्र और पतिरहित (स्त्री)
2. स्वतंत्र (स्त्री), उसका नाम होता है अवीरा. जिसके बारे में शास्त्रों में लिखा गया है कि..
*नास्ति वीरः पुत्त्रादिर्यस्याः सा अवीरा*
उन्होंने बच्ची के नाम का अर्थ सुना तो बेचारे मायूस हो गए... बोले महोदया अब क्या करें....
अब तो स्कूल में भी यही नाम हैं बर्थ सर्टिफिकेट में भी यही नाम है। क्या करें... कैसे क्या होगा..?
आजकल लोग कुछ नया करने की ट्रेंड में कुछ भी अनर्गल करने लग गए हैं... जैसे कि...
लड़की हो तो... मियारा, शियारा, कियारा, नयारा, मायरा तो अल्मायरा आदि.. !
लड़का हो तो... वियान, कियान, गियान, केयांश, रेयांश आदि...
और तो और इन शब्दों के जब अर्थ पूछो तो...
दे_गूगल ...! दे_याहू ....!
और उत्तर आएगा "इट मीन्स रे ऑफ लाइट" "इट मीन्स गॉड्स फेवरेट" "इट मीन्स ब्ला ब्ला"नाम को यूनीक रखने के फैशन के दौर में एक सज्जन ने अपनी गुड़िया का नाम रखा " *श्लेष्मा* ".स्वभाविक था कि नाम सुनकर मैं सदमें जैसी अवस्था में थी।सदमे से बाहर आने के लिए मन में विचार किया कि हो सकता है इन्होंने कुछ और बोला हो या इनको इस शब्द का अर्थ पता नहीं होगा तो मैं पूछ बैठी" अच्छा...श्लेष्मा....? इसका अर्थ क्या होता है....? तो महानुभाव नें बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ उत्तर दिया "श्लेष्मा" का अर्थ होता है "जिस पर मां की कृपा हो" मैं सर पकड़ कर 10 मिनट मौन बैठी रही ! मेरे भाव देख कर उनको यह लग चुका था कि कुछ तो गड़बड़ कह दिया है तो पूछ बैठे.
क्या हुआ मैंने कुछ ग़लत तो नहीं कह दिया?
मैंने कहा महोदय जी...हो सके तो तुंरत बच्ची का नाम बदल दीजिए क्योंकि श्लेष्मा का अर्थ होता है "नाक का कचरा" उसके बाद जो होना था सो हुआ...आप समझ सकते हैं..
यही हालात है समाज के एक बहुत बड़े वर्ग का।
अशास्त्रीय नाम न केवल सुनने में विचित्र लगता है, बालकों के व्यक्तित्व पर भी अपना विचित्र प्रभाव डालकर व्यक्तित्व को लुंज पुंज करता है।...जो इसके तात्कालिक कुप्रभाव हैं।
"भाषा की संकीर्णता और दरिद्रता इसका दूरस्थ कुप्रभाव है।"
परंपरागत रूप से ,नाम रखने का अधिकार,दादा-दादी, बुआ, तथा गुरुओं का होता था या है. यह कर्म उनके लिए ही छोड़ देना हितकर है.
आप जब दादा दादी बनेंगे या बन गए है तब यह कर्तव्य ठीक प्रकार से निभा पाएँ उसके लिए आप अपनी मातृभाषा पर कितनी पकड़ रखते हैं... अथवा उसपर पकड़ बनाने के लिए क्या कर रहे हैं, विचार अवश्य करें...
अन्यथा आने वाली पीढ़ियों में आपके परिवार में भी कोई "श्लेष्मा" हो सकती है, कोई भी अवीरा हो सकती है।
शास्त्रों में लिखा है कि व्यक्ति का जैसा नाम है समाज में उसी प्रकार उसका सम्मान और उसका यश कीर्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण कारक होता है,जैसे..
स्मृति_संग्रह....में बताया गया है कि व्यवहार की सिद्धि आयु एवं ओज की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ नाम होना चाहिए...
नाम_कैसा_हो..
नाम की संरचना कैसी हो इस विषय में ग्रह्यसूत्रों एवं स्मृतियों में विस्तार से प्रकाश डाला गया है पारस्करगृह्यसूत्र में..
*द्व्यक्षरं चतुरक्षरं वा घोषवदाद्यंतरस्थं।*
*दीर्घाभिनिष्ठानं कृतं कुर्यान्न तद्धितम्।।* *अयुजाक्षरमाकारान्तम् स्त्रियै तद्धितम् ।।*
इसका_तात्पर्य यह है कि..बालक_का_नाम...दो या चार अक्षर युक्त, पहला अक्षर घोष वर्ण युक्त, वर्ग का तीसरा, चौथा, पांचवा, वर्ण, मध्य में अंतस्थ वर्ण, य र ल व आदिऔर नाम का अंतिम वर्ण दीर्घ एवं कृदन्त हो तद्धितान्त न हो....तथा कन्या_का_नाम विषमवर्णी तीन या पांच अक्षर युक्त, दीर्घ आकारांत एवं तद्धितान्त होना चाहिए...
*धर्मसिंधु में चार प्रकार के नाम बताए गए हैं* ..
१ देवनाम
२ मासनाम
३ नक्षत्रना
४ व्यावहारिक_नाम
उनमें ऐसा भी जोर देकर कहा गया है कि कुंडली के नाम को व्यवहार में बोलने वाला नाम नहीं रखना चाहिए...क्योंकि जो नक्षत्र नाम होता है...उसको गुप्त रखना चाहिए...
कारण... यदि कोई हमारे ऊपर अभिचार कर्म मारण, मोहन, वशीकरण इत्यादि दुर्भावना से कार्य करना चाहता है तो उसके लिए नक्षत्र नाम की,यानी जन्म के समय के नक्षत्र अनुसार नाम की आवश्यकता होती है।
जबकि व्यवहार नाम पर तंत्र का असर नहीं होता इसीलिए कुंडली का जन्म नाम गुप्त होना चाहिए।
हमारे शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि बच्चे का नाम मंगल सूचक, आनंद सूचक,
बल रक्षा और शासन क्षमता का सूचक ,ऐश्वर्य सूचक, पुष्टि युक्त अथवा सेवा आदि गुणों से युक्त होना चाहिए।
शास्त्रीय नाम की हमारे सनातन धर्म में बहुत उपयोगिता है..
मनुष्य का जैसा नाम होता है वैसे ही गुण उसमें विद्यमान होते हैं या विकसित होने की संभावना प्रबल होती है।
बच्चों का नाम लेकर पुकारने से उनके मन पर उस नाम का बहुत असर पड़ता है और प्रायः उसी के अनुरूप चलने का प्रयास भी होने लगता है
इसीलिए नाम में यदि उदात्त भावना होती है तो बालकों में यश एवं भाग्य का अवश्य ही उदय संभव है।
हमारे धर्म में अधिकांश लोग अपने पुत्र पुत्रियों का नाम भगवान के नाम पर रखना शुभ समझते हैं...ताकि इसी बहाने प्रभु नाम का उच्चारण भगवान के नाम का उच्चारण हो जाए।
*भायं कुभायं अनख आलसहूं।*
*नाम जपत मंगल दिसि दसहूं॥
विडंबना यह है की आज पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण में नाम रखने का संस्कार मूल रूप से प्रायः समाप्त होता जा रहा है....
सयुंक्त परिवार में रहने कि प्रथा अब लगभग अंतिम साँसे ले रही है...अन्यथा मुझे याद है कि घरों में नाम रखे जाने की भी एक खास रस्म होती थी...
जिसमे घर में दादा,दादी, बुआ अथवा उनकी अनुपस्थिति में घर का अन्य कोई वरिष्ठ, बच्चे को गोद में लेकर, श्री गणेश का स्मरण करते हुए, छोटी घंटी बजाते हुए,बच्चे के कान के पास अपना मुंह ले जाकर,उसका निर्धारित किया हुआ नाम पुकारते थे ताकि अपने नाम का पहला श्रोता वो बच्चा खुद रहे....
अब चूंकि घर में वरिष्ठों की उपस्थिति या दखलंदाज़ी ना के बराबर है और अगर है भी, तो भी, उनका सुझाया हुआ नाम, या मार्ग दर्शन को सुनता कौन है।
एक_निवेदन...
आप सभी से.... अगर नई पीढ़ी में कोई आपकी सुन रहा है तो उसे ज़रूर बताएं....
विशेष_संदेश...
नाम ऐसा रखना ठीक होता है...जो सकारात्मक और अर्थपूर्ण हो....उल्ल्हास मय हो...आसानी से उच्चारित और लिखा जा सके....ईश्वर और प्रकृति के विभिन्न सुंदर भावों का समावेश या प्रतिनिधित्व करने वाला हो आदि आदि....
इसी में भलाई है, इसी में कल्याण है
जनपद बरेली में आज इंडोर स्टेडियम का उद्घाटन हुआ। विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने जा रहा है।
जनपद वासियों, विशेषकर युवा साथियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!
नाथ नगरी बरेली में आज 'अंजनीनंदन' श्री हनुमान जी की भव्य प्रतिमा के अनावरण का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।
श्री हनुमान जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे, यही प्रार्थना है।
अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की विशेषताएं:
1. मंदिर परम्परागत नागर शैली में बनाया जा रहा है।
2. मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊंचाई 161 फीट रहेगी।
3. मंदिर तीन मंजिला रहेगा। प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 392 खंभे व 44 द्वार होंगे।
4. मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप (श्रीरामलला सरकार का विग्रह), तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा।
5. मंदिर में 5 मंडप होंगे: नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप
6. खंभों व दीवारों में देवी देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियां उकेरी जा रही हैं।
7. मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार से होगा।
8. दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी।
9. मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी।
10. परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा।
11. मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा।
12. मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे।
13. दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है एवं तथा वहां जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।
14. मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है।
15. मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है। इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है।
16. मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊंची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है।
17. मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे।
18. 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहां दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी।
19. मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी।
20. मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा
श्री अयोध्या धाम में आज आत्मीय भेंट ...माननीय मुख्यमंञी योगी आदित्यनाथ
मोहम्मद शमी को 'अर्जुन अवॉर्ड' मिला, दिग्गज फुटबॉलर फ्रेंज बेकनबाउर का निधन हुआ
8 घंटे पहले
जकार्ता में एशियन चैंपियनशिप के पहले दिन शूटिंग में वरुण तोमर ने मेंस एयर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया। बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना लगातार 8वीं बार चुनाव जीत गईं। वहीं, जर्मनी के महान फुटबॉलर और कोच फ्रेंज बेकनबाउर का 78 साल की उम्र में निधन हो गया।आइए आज के ऐसे ही प्रमुख करेंट अफेयर्स पर नजर डालते हैं, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए अहम हैं…
अवॉर्ड (AWARD)
1. राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2024 का आयोजन: 09 जनवरी को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2024 का आयोजन किया गया। इसमें 5 कोच को द्रोणाचार्य सम्मान, 26 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार और 3 लोगों को लाइफ टाइम सम्मान से नवाजा गया।
नाथ नगरी बरेली के सर्वांगीण विकास के लिए आज 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के अवसर पर ₹3,405 करोड़ लागत की 170 लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास हुआ।आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जो 'विजन' है, वही हमारा 'मिशन' है।
जनपद वासियों को हार्दिक बधाई!
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर
कृपाराम की सफल हनुमान का आयोजन होगा
मंदसौर - राम मंदिर निर्माण के अवसर पर मंदसौर में हनुमान भक्त पंडित श्री विजय शंकर जी मेहता के मुखारविंद से रामायण जी के सुंदरकांड पर आधारित कृपाराम की सफल हनुमान का व्याख्यान होने जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन गतिमान सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किया जा रहा है । कार्यक्रम पांच शताब्दियों के लंबे इंतजार के पश्चात राम जन्मभूमि तीर्थ स्थल अयोध्या में विशाल मंदिर में प्रभु श्री रामलला जी के विराजमान होने के महाउपलक्ष में किया जा रहा है। उक्त धार्मिक आयोजन को प्रसिद्ध हनुमान भक्त विचारक चिंतक और जीवन प्रबंधन केलिए विख्यात श्री पंडित विजय शंकर जी मेहता संबोधित करेंगे। इस अवसर पर गतिमान सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा शहर, जिले और क्षेत्र के सभी गणमान्य नागरिकों से सविनय अनुरोध है कि इस प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन कृपाराम की सफल हनुमान के उद्बोधन का लाभ ले और प्रभु श्री राम और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर अपने मानव जीवन को सफल बनावे। साथ ही सामाजिक संस्थान द्वारा शहर के गणमान्य और प्रबुद्ध नागरिकों से यह अनुरोध किया गया है कि अपने इष्ट मित्र और परिवार सहित उक्त धार्मिक आयोजन का लाभ ले और आयोजन में संभव हो सके तो भारतीय पारंपरिक वेशभूषा धोती और कुर्ता पहनकर व्याख्यान का लाभ ले।
उम्रकैद की सजा काट रहे 56 कैदी होंगे रिहा, झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद का फैसला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि रिहा होने वाले कैदियों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि उन्हें जीविकोपार्जन के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़े.
हिन्दू राष्ट्भारत :
ध्यान से पढ़ना हिंदुओ अपनी कामचोरी और कमजोरी
1.सारा केमिकल का काम जिनके कब्जे में है।
2. अवैध हथियारों की पैरेलल इंडस्ट्री जो चलाते हैं।
3. शटर बनाना तोड़ना जिनके बांये हाथ का खेल है।
4.और 10 मिनट में गाड़ी का स्क्रैप बना के काम की चीजें निकाल लेने में जिनको महारथ हासिल हो।
5. कौन सी लकड़ी कैसी आरी से कटेगी उसका रोज का अनुभव हो।
6.जानवर के कौन से हिस्से पर छुरा चलाएं तो जानवर बिना आवाज़ किये मर जाए, या पस्त हो जाये... जैसा स्किल सेट हो।
7.जिनके हमदर्द नेशनल, इंटरनेशल मीडिया में बैठे हों।
8.जिनको अपना लांग टर्म गोल और शार्ट टर्म कुर्बानियां समझ आती हो।
उनसे आखिर कैसे 15 हज़ार रुपये की टाइम पास नौकरी ढूंढने वाली जनता जूझ पाएगी?
हमने पुराने जमाने में एक व्यवस्था की थी।
उक्त समस्या 1,2,3,4,5,6,7,8 के लिए कोई न कोई जाति या वर्ग तैयार किया था।
उन्हें वह काम सौंपा था, (जैसे 8 के लिए यादव,जाट,गुर्जर,राजपूत,मराठा इत्यादि क्षत्रिय.)
तत्कालीन जातियों में परस्पर सौहार्द के लिए उनके बीच नीति नियम स्थापित किये थे, तभी हम 800 वर्ष तक संघर्ष कर पाए और टिक पाए।
आज अलग अलग पिटना सबकी नियति है।
बात मेवात दिल्ली की नहीं है..हर जगह की है।
अपनी एकजुटता की ताकत के दम पर वो अपनी हर जरूरी-गैर जरूरी बात मनवाने के लिए आपको घुटने टेकने पर मजबूर करते जाएंगे।
मोदी -शाह-योगी सब टेम्परेरी 10 20 साल का सेफ्टी वाल्व हैं।
उसके बाद क्या कैराना क्या दिल्ली और क्या आपका शहर।क्या आपका घर क्या मेरा घर,
समाधान
हिन्दू कम उम्र में शादी करो और अधिक से अधिक संतान उत्पत्ति करो और सरकारी नौकरी के साथ उपरोक्त लिखे बिजनेस जैसे , केमिकल,एसिड,लोहा,लकड़ी,अवैध हथियार का बिजनेस करो। तभी बच पाओगे
मुसलमानों का सबसे बड़ा हथियार
अल तकिया
गजवा-ए-हिन्द (हिन्दुस्तान को मुग्लिस्तान बनाना मकसद)
इसने इस्लाम के प्रचार प्रसार में जितना योगदान दिया है उतना इनकी सैंकड़ों हजारों कायरों की सेनायें नहीं कर पायीं ।
इस अचूक हथियार का नाम है "अल - तकिया" ।
आज मै आपको इसके बारे में बताने जा रही हूँ भाईयों इग्नोर न करना ध्यान से जरुर पढ़ना
--> ये " अल तकीय " जिहाद का सबसे खतरनाक रूप है ये एक मीठा जहर है यह " अल तकिया " सभी तरह के जिहादों का समावेस है जैसे की --
● लव जिहाद ,
● भक्ती जिहाद,
● ब्लोगिंग जिहाद,
● भाषा जिहाद,
● सांस्कृतिक जिहाद
इसमे न जाने कौन कौन और किस किस तरह के सैकड़ों जिहाद और भी सामिल है
--> अल- तकिया के अनुसार यदि इस्लाम के प्रचार , प्रसार अथवा बचाव के लिए किसी भी प्रकार का झूठ, धोखा , द्वेष अपने वादे से मुकर जाना काफिरों (हिन्दू) का विस्वास जितना और उनको घात लगाकर पीछे से हमला करना यहाँ तक की कुरआन की झूठी कसमे खाना - सब धर्म स्वीकृत है । और ये इनके अल्लाह का फरमान है
--> इस प्रकार अल - तकिया ने मुसलामानों को सदियों से बचाए रखा है ।
***
मुसलमानों के विश्वासघात के अन्य उदाहरण --->
1 -मुहम्मद गौरी ने 17 बार कुरआन की कसम खाई थी कि भारत पर हमला नहीं करेगा, लेकिन हमला किया ।
2 -अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोड़ के राणा रतन सिंह को दोस्ती के बहाने बुलाया फिर क़त्ल कर दिया ।
3 -औरंगजेब ने शिवाजी को दोस्ती के बहाने आगरा बुलाया फिर धोखे से कैद कर लिया ।
4 -औरंगजेब ने कुरआन की कसम खाकर शिखों के गुरु श्री गोविन्द सिघ जी को आनंद पुर से सुरक्षित जाने देने का वादा किया था.
फिर पीछे से हमला किया था और निर्मम हत्या की थी
5 -अफजल खान ने दोस्ती के बहाने
शिवाजी की ह्त्या का प्रयत्न किया था ।
6-मित्रता की बातें कहकर पाकिस्तान ने कारगिल पर हमला किया था ।
सावधान रहें और अपने आस पास नजर बनाएं रखें
मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या भारत को निगल जायेगी!
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मुसलमान जिस देश में भी रहते हैं,कभी उस देश के वफादार नहीं रहते.वहां हमेशा कोई न कोई समस्या पैदा करते रहते हैं.उनकी हमेशा उस देश पर कब्जा करने इच्छा होती है. मुसलमान एक ऎसी विषैली अमरबेल की तरह हैं कि अगर उस देश रूपी वृक्ष पर चढ़ जाएँ ,तो उसी का रस पीकर उसी वृक्ष को सुखा देते हैं.फिर भी हम इन साँपों को पाल रहे हैं.हम देश के लोगों को उन देशों के बारे में बताना चाहते हैं ,जहां मुसलमानों की संख्या बढ़ जाने से क्या क्या समस्याएं पैदा हो रही हैं.और बाद में उन देशों का क्या हाल हो गया.हम चाहते हैं कि लोग इन आंकड़ों पर गौर करें ,और सचेत हों.
यह आंकड़े सी आई ऐ ने जमा किये हैं ,और वर्ल्ड फेक्ट बुक 2007 में प्रकाशित किये हैं इसके अनुसार -
1-1 से 2 %मुसलमान होने पर मुसलमान शांत रहते हैं,देश का कानून मानते हैं,खुद को उस देश का भक्त मानते हैं.उदाहरण -अमेरिका1%,कनाडा 1.5%,नार्वे 1.8%,आस्ट्रेलिया 1.5%
2--2 से 5 प्रतिशत मुसलमान हो जानेपर मुसलमान अपने अल्पसंख्यक होने नाम पर विशेष अधिकार माँगने लगते हैं,धरना प्रदर्शन करते हैं,अपना अलग ग्रुप बनाकर उत्पात करते हैं शहर में गुंडा गीरी करते हैं.उदाहरण-डेनमार्क 2%,जर्मनी3.7%,इन्गलेंड2.7%,स्पेन 4.7%,थाईलेंड 4.6%
3--5 से 10 प्रतिशत हो जाने पर मुसलमान वहां की सरकारों पर अपन अलग कानून बनाने पर दवाब डालते हैं,अपनी रीति रिवाजों,भाषा को मान्यता दिलाने की मांग करते है .मस्जिदों के लिए जगह मागते हैं.
4-10से 20प्रतिशत हो जाने पर
अपने अलग राजनीतिक दल बना लेते हैं,अपने अलग स्कूल कालेज खोल लेते हैं.देश में फसाद करते हैं,धर्मपरिवर्तन कराते हैं.देश के कानून की अवहेलना करते हैं अलगाव की नीति अपनाते हैं उदाहरण-गुयेना10%,भारत 13%,इस्राइल 16%.केन्या 11%,रूस 10.5%
5-- 20से 40प्रतिशत हो जाने पर मुसलमान आक्रामक हो जाती हैं,हथियार उठालेते हैं बड़े पैमाने पर जिहादी बनाते हैं,,देश में दंगे करवाते हैं,,खूनखराबा करते हैं ,अपने लिए अलग जगह की मांग करते हैं.
6--40 से 60 प्रतिशत हो जाने पर मुसलमान वहां के लोगों को भागने पर मजबूर कर देते हैं,उनकी औरतों को बल पूर्वक उठा लेते हैं और मुसलमान बना लेते हैं.पूरे देश में अराजकता का माहौल बना देते है,उदाहरण-बोस्निया 40%,चाड 553%,लेबनान 59.7%
7--60 से 80 प्रतिशत हो जाने पर अपने क्षेत्र में जजिया लगा देते हैं ,दुसरे धर्म को मिटाने की कोशिश करते हैं,दुसरे धर्म के लोगों को प्रताड़ित करके हैं ,उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लेते हैं.उदाहरण-अल्बानिया78%,मलेशिया 60.4%,सूडान 70%,क़तर 77%
8--81 से 99 प्रतिशत हो जाने पर वह देश इस्लामी देश घोषित कर दिया जाता है ,वहां किसी गैर मुस्लिम को कोई अधिकार नहीं रह जाता है .सभी गैर मुस्लिमों की औरतों पर बलात्कार किया जाता है.देश में मुल्लेमौलवी राज करते हैं.,मानव अधिकारों का हनन किया जाता है.उदहारण -मिस्र 89-%,इंडोनेसिया 86%,बंगलादेश 83%,ईरान98%,जोर्डन 92%,मोरक्को 98,7%पाकिस्तान 97%,सीरिया96%.तुर्की96.8%फिलिस्तीन 97%,अरब इमारत 96%
9-100 प्रतिशत हो जाने पर वह देश दारुल इस्लाम बन जाता है और आस पास दे देशों की नींद हराम कर देता है .जगह जगह आतंकवादी भेजता है, वहां की व्यवस्था चौपट कर देता है .उदाहरण-अफगानिस्तान 100%,यमन 100%सौउदी अरब 100%,ईराक 100%
10--इसके बाद भी मुसलमानों की खून की प्यास नहीं बढ़ती रहेगी वह आपस ने ही लड़ते रहेंगे। जैसा कि उन्हें कुरआन ने सिखाया ,और उनकी आदत है.
नॉट - इस लेख का अगला भाग दो दिन बाद प्रकाशित होगा ऐसा कहा जाता है कि इतिहास से सबक न लेने वाले इतिहास बन जाते हैं अस्तु कुछ दिमाग पर जोर डालिए । 1946 में अलग देश की मांग पर "डायरेक्ट ऐक्शन डे" हुआ हमें कुछ नहीं पता 1947 में बंटवारे में लाखों लोग मारे गए, करोड़ों लोग बेघर हो गए हमें कुछ नहीं पता 1947 के बंटवारे में 23 % मुसलमानों को 31 प्रतिशत भूमि दे दी गई हमें कुछ नहीं पता अपनी आबादी के अनुपात से अधिक भूमि लेने के बाद भी 9करोड़ में से 3करोड़ मुसलमान भारत से गए ही नहीं हमें ये भी नहीं पता हमसे टूटा हुआ हिस्सा इस्लामिक देश बन गया और भारत धर्मशाला बन गया हमें बिलकुल भी नहीं पता और सबसे बड़ी बात जो हिन्दू को अब तक नहीं पता है कि १९४७ में आजादी सिर्फ मुस्लिम को ही मिली है। हिन्दू तो आज भी गुलाम है। और हमें अब तक नहीं पता पूरा का पूरा संविधान हिन्दू के खिलाफ बना दिया और सेक्युलर के नाम पर हिन्दू का दमन होता आ रहा है। फिर भी हमें अब तक नहीं पता 80-85 प्रतिशत हिन्दुओं के राष्ट्र में मस्जिद और मदरसा महत्वपूर्ण हो गए जबकि मंदिर और मठ का नाम लेना साम्प्रदायिक हो गया हमें नहीं पता सौ साल के भीतर ही मुसलमान फिर से एक देश लेने की स्थिति में पहुंच गए हमें ये भी नहीं पता होगा मेरे प्यारें लोभी-लालची सेक्युलर हिन्दुओं तुम्हें पता क्या है ? हां .अब पता करो कि भागना कहां है ?अतः कुछ ज्ञान चक्षु खुले हो तो जगिए और जगाइए !!
।। जय जय श्री राम।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार को यहां द्विपक्षीय बैठक की और दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रही द्विपक्षीय साझेदारी की सराहना की. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं की मौजूदगी में भारत और यूएई के बीच चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें से एक गुजरात सरकार और दुबई स्थित बहुराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स कंपनी डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ करार शामिल है. नरेंद्र मोदी और अल नाहयान के बीच गत सात महीने से भी कम समय में यह चौथी मुलाकात थी.भारत मे आपका स्वागत है मेरे भाई, Sheikh Mohamed bin Zayed bin Sultan Al Nahyan यह एक सम्मान की बात है कि आप हमारे पास आ रहे हैं।
विश्व हिंदी दिवस आज
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हर साल 10 जनवरी को पूरी दुनिया में हिंदी दिवस मनाया जाता हैं। विश्व हिंदी दिवस का प्रमुख उद्देश्य पूरी दुनिया में हिंदी के प्रचार और प्रसार को बढ़ावा देना है। इसके अलावा लोगों को हिंदी भाषा के प्रति जानकारी उपलब्ध भी करवाना है ताकि हर एक व्यक्ति हिंदू भाषा को सीख सके। पूरी दुनिया में हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसे समझने और बोलना काफी आसान है। इसलिए प्रत्येक साल विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन हिंदी दिवस संबंधित कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें हिंदी क्षेत्र के जानकार लोग शामिल होकर हिंदी भाषा के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करते हैं। हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है और यहां के अधिकांश लोग हिंदी भाषा में ही बातचीत करते हैं।
10 जनवरी पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। इस दिन कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जहां पर हिंदी के क्षेत्र में काम करने वाले बड़े-बड़े लेखक और विचारक शामिल होते हैं ताकि हिंदी भाषा को और भी ज्यादा किस प्रकार से उन्नत और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सके। उसके लिए अहम सुझाव लोगों के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके अलावा हिंदी को पूरी दुनिया में प्रचार और प्रसार करने की योजना पर भी काम होता है ताकि अधिकांश लोग हिंदी भाषा को सीख सके।
विश्व हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है?
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आमतौर पर लोगों को विश्व हिंदी दिवस को लेकर एक धारणा है कि हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस दोनों एक ही हैं, जो कि बिल्कुल गलत हैं। हिंदी दिवस 14 सितंबर को भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है जबकि विश्व हिंदी दिवस पूरे दुनिया में 10 जनवरी को मनाया जाता हैं। विश्व हिंदी दिवस के माध्यम से लोगों को हिंदी भाषा के बारे में व्यापक जानकारी दी जाती हैं। ताकि अधिक संख्या में लोग हिंदी सीख सके। हिंदी एक ऐसी सरल और सहज भाषा हैं, जिसे सीखना और लिखना दोनों ही आसान हैं। यही वजह है कि विश्व हिंदी दिवस के माध्यम से दुनिया में हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित किया जाएगा भारत में हिंदी राष्ट्रीय भाषा के रूप में घोषित किया गया है।
विश्व हिंदी दिवस का इतिहास
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10 जनवरी पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा इसकी घोषणा अध्यक्ष जनवरी 2006 को भारत सरकार के द्वारा किया गया था हालांकि इसका सबसे पहले हिंदी सम्मेलन का आयोजन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 10 जनवरी 1975 को नागपुर में किया था। तभी से 10 जनवरी विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जा रहा हैं। पहला हिंदी सम्मेलन में 22 देश के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे आज के वक्त में भारत समेत पोर्ट लुईस, स्पेन, लंदन, न्यूयॉर्क, जोहानसबर्ग जैसे देशों में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है।
विश्व हिंदी दिवस का महत्व
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हिंदी भाषा का नाम “हिंद” शब्द से आया है जो फ़ारसी है, जिसका अर्थ है “सिंधु की भूमि।” इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार के इंडो-आर्यन घटक में हिंदी शामिल है। यह भारत, त्रिनिदाद और टोबैगो, नेपाल, गुयाना, टोबैगो और मॉरीशस सहित अन्य देशों में बोली जाती है। विश्व हिंदी दिवस के माध्यम से दुनिया में हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार करना है ताकि अधिक लोग हिंदी भाषा को सीख सके इसके अलावा दुनिया के कई विश्वविद्यालय में हिंदी को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में पढ़ाया जाता है ताकि वहां पर रहने वाले छात्र हिंदी भाषा को आसानी से सीख सके।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें भारत सरकार और राज्य सरकार के द्वारा हिंदी के क्षेत्र में किस प्रकार के काम किए जाएंगे उसके एक रूपरेखा लोगों के सामने प्रस्तुत की जाती हैं। इसके अलावा दुनिया भर से हिंदी भाषा के जानकारी व्यक्ति इस सम्मेलन में सम्मिलित होते हैं। इसके अलावा विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर निबंध प्रतियोगिता, सेमिनार, डिबेट, मीटिंग्स, परिचर्चा एवं जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं हैं। जिसमें अधिक संख्या में छात्र सम्मिलित होकर हिंदी भाषा को और भी करीब से जानते हैं।
हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है जो ‘अ’ अनपढ़ से शुरू होती है,
और ‘ज्ञ’ ज्ञानी बनकर समाप्त होती है।
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
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हिंदी भारत की कई महान भाषाओं में से एक है और हमें इस पर बहुत गर्व है। हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ
जैसे हम अन्य भाषाएँ सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी अपनी हिंदी भाषा कितनी विशेष है। आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है, यह मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
सरस, सरल मनोहारी है, अपनी हिंदी प्यारी है।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
हिन्दी है हमारी राष्ट्रभाषा, हिन्दी है हमें बड़ी प्यारी, हिन्दी की सुरीली वाणी, हमें लगे हर पल प्यारी।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
हिन्दी आशीर्वाद सी है, अंग्रेजी एक आफत है, हिंदी मात्र भाषा नहीं, हिंदी हमारी विरासत है।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
हाथ में तुम्हारे देश की शान, हिन्दी अपनाकर तुम बनो महान।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
जीवन की बेशकीमती स्नेह सौहार्द की दौलत सौपने वाले सभी सुहृदजनो का भाव- स्पंदित हृदय से हजारो हज़ार नतशीश साधुवाद सहित शुभमंगल रात्रि।
दोस्तों , "'सफल जीवन के लिए....."'
मनुष्य की जीवन यात्रा का एक उद्देश्य और लक्ष्य है। और लक्ष्य को पाने के लिए वैसे ही लक्षण और कुछ लक्ष्मण रेखाओं अर्थात नियमों का होना अत्यंत आवश्यक है।
जैसे बाजार से खरीदी गई एक छोटी सी मशीन के साथ भी हमें एक निर्देशिका Manual मिलती है,जिसमें स्पष्ट लिखा होता है "ऐसा करें और ऐसा ना करें" ("Dos and Donts") जिससे कि उस मशीन का उचित लाभ प्राप्त किया जा सकता है।सोचने वाली बात है ऐसी कई मशीनों को बनाने वाले इंसान के जीवन के लिए कोई निर्देशिका नहीं होगी ?
जो लोग अपने लिए नियम नहीं बनाते है- उन्हें फिर दूसरों के बनाये हुए नियमों पर चलना पड़ता है। मंजिल तक पहुँचने के लिए रास्ता मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है अपितु एक समर्पण भाव, अनुशासन, प्रतिबद्धता और एक बहुत बड़े जूनून की भी आवश्यकता होती है।
जीवन में छोटे-छोटे नियम आपको बड़ी-बड़ी परेशानियों से बचा लेते हैं। कई बार छोटे-छोटे नियमों का पालन ना करना भी बडी़ परेशानियों का कारण बन जाया करता है।
अत: कोई दूसरा आप पर आकर राज करे इससे तो अच्छा है, आप स्वयं ही स्वराज्य अधिकारी बने।
अपने जीवन के लिए कुछ नियम जरूर बनाएँ और उनका पालन भी करें। नियम से ही सफलता के शिखर का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन को सफल बनाने और वांछित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आज ही अपने लिए कुछ नियम और कानून बनाएं!
सदा स्मृति रहे कि आप एक शांत स्वरूप और वरदानी आत्मा है..!
*हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि* *देवी को शराब चढ़ाई* जाये..,
*ग्रंथ नहीँ कहते की शराब* *पीना ही क्षत्रिय धर्म* है..
ये *सिर्फ़ एक मुग़लों की* *साजिश थी*
*हिंदुओं को कमजोर करने* की !
*जानिये एक अनकही* *ऐतिहासिक घटना.........?*
*कैसे हिंदुओं की*
*सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया* *इन मुग़लों* ने ........??
*जानिये और फिर सुधार* कीजिये !!
मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे , उसी दौरान मुगल *बादशाह ने एक दम्भोक्ति की* "है
*कोई हमसे बहादुर इस दुनिया* में ...............?"
*सभा में सन्नाटा सा पसर* गया , *एक बार फिर* *वही दोहराया गया !*
*तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी ** *से चिल्ला कर* कहा " *है*
*कोई हमसे बहादुर जो*
*हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम* *कर* *सके* ........... ??
सभा की खामोशी तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की और गया !
वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल थे !
*रिड़मल जी ने कहा, "मुग़लों ** *में बहादुरी नहीँ* *कुटिलता है..., सबसे* *बहादुर तो राजपूत है* *दुनियाँ में,मुगलो ने* *राजपूतो को आपस में लड़वा* **कर हिंदुस्तान पर* *राज किया !*
कभी सिसोदिया राणा वंश को कछावा जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से...।
*बादशाह का मुँह देखने* *लायक था , ऐसा लगा जैसे* *किसी ने चोरी करते* *रंगे हाथो पकड़ लिया* हो ।
*"बाते मत करो* *राव...उदाहरण दो वीरता का* ।"
*रिड़मल ने कहा "क्या किसी ** *कौम में देखा है** *किसी को सिर कटने के* *बाद भी लड़ते हुए ??"*
*बादशाह बोला ये तो सुनी हुई* *बात है देखा तो* *नही ,रिड़मल बोले " इतिहास* *उठाकर देख लो* *कितने वीरो की* *कहानिया है सिर कटने के* *बाद भी लड़ने की ... "*
*बादशाह हसा और दरबार में* *बेठे कवियों की* *और देखकर बोला* *"इतिहास लिखने वाले तो* *मंगते होते है में भी 100* *मुगलो के नाम* *लिखवा दूँ इसमें क्या ?*
*मुझे तो जिन्दा ऐसा राजपूत ** *बताओ जो कहे* *की* *मेरा सिर काट* *दो* *में फिर भी* *लड़ूंगा** ।"
राव रिड़मल निरुत्तर हो गए और गहरे सोच में डूब गए ।
रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहणी ठिकाने के जागीरदार का ख्याल आया ।
रात को 11 बजे रोहणी ठिकाना (जो की जेतारण कस्बे जोधपुर रियासत) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीरदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी ।
ठाकुर साहब काफी वृद अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभक्त के लिए बाहर पोल पर आये ,, घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले " जोधपुर महाराज... आपको मैंने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है.. इस तरह भेष बदलने पर भी में आपको आवाज से पहचान गया हूँ ।
हुकम आप अंदर पधारो...मैं आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता ।
राव रिड़मल ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले एक समस्या है , और बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी, अब आप ही बताये की जीवित योद्धा का कैसे पता चले की ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा ?
रोहणी जागीदार बोले ," बस इतनी सी बात..मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और रजपूती की लाज जरूर रखेंगे "
राव रिड़मल को घोर आश्चर्य हुआ कि एक पिता को कितना विश्वास है अपने बच्चो पर.. , मान गए राजपूती धर्म को ।
सुबह जल्दी दोनों बच्चे अपने अपने घोड़ो के साथ तैयार थे!
उसी समय ठाकुर साहब ने कहा ," महाराज थोडा रुकिए में एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में ।"
राव रिड़मल ने सोचा आखिर पिता का ह्रदय है कैसे मानेगा अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को , एक बार रिड़मल जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए ।
ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को कहा " आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को , दोनों में से कौनसा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है ? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा !
ठकुरानी जी ने कहा बड़ा लड़का तो क़िले और क़िले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल परकोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था।।
लड़ दोनों ही सकते है ,आप निश्चित् होकर भेज दो ।
दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस द्रश्य को देखने जमा थे ।
बड़े लड़के को मैदान में लाया गया और मुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया की इसकी गर्दन उड़ा दो..
*तभी बीकानेर महाराजा बोले* *"ये क्या तमाशा है ?*
*राजपूती इतनी भी सस्ती नही* *हुई है , लड़ाई का* *मोका दो और फिर देखो कौन* *बहादुर है ?*
बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर् काट दो...
20 घुड़सवारों को दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन 20 घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी ।
दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ , *मुगलो में घबराहट और* *झुरझरि फेल गयी ,इसी तरह* *बादशाह के 500* *सबसे ख़ास योद्धाओ की* *लाशें मैदान में पड़ी थी* *और उस वीर राजपूत* *योद्धा के तलवार* *की खरोंच भी नही* आई ।।
ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा " 500 मुगल बीबियाँ विधवा कर दी आपकी इस परीक्षा ने अब और मत कीजिये हजुर , *इस काफ़िर* *को गोली मरवाईए* हजुर..?
*तलवार से ये नही मरेगा...*
*कुटिलता और मक्कारी से* *भरे मुगलो ने उस वीर के* *सिर में गोलिया मार दी ।*
*सिर के परखचे उड़ चुके थे* *पर धड़ ने तलवार की* *मजबूती कम नही करी* *और मुगलो का* *कत्लेआम खतरनाक रूप से* *चलते रहा ।*
*बादशाह ने छोटे भाई को* *अपने पास निहथे बेठा* *रखा था ये सोच कर* की यदि ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा *लेकिन* *जब छोटे ने ये* *अंन्याय देखा तो उसने* *झपटकर बादशाह की* *तलवार निकाल ली ।*
*उसी समय बादशाह के* *अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन* *काट दी फिर भी धड़* *तलवार चलाता गया* *और अंगरक्षकों समेत* *मुगलो का काल बन* गए ।
*बादशाह भाग कर कमरे में* *छुप गया और बाहर* *मैदान में बड़े भाई और अंदर* *परकोटे में छोटे भाई* *का* *पराक्रम देखते ही* *बनता था ।*
*हजारो की संख्या में मुगल* *हताहत हो चुके थे* *और आगे का कुछ पता* *नही था ।*
*बादशाह ने चिल्ला कर कहा* *अरे कोई रोको* *इनको..।*
*एक मौलवी आगे आया और* *बोला इन पर*
"""" *शराब छिड़क दो"""""*
""""" *राजपूत का इष्ट कमजोर* *करना हो तो* *शराब* """
*का उपयोग करो।*
*दोनों भाइयो पर शराब* *छिड़की गयी ऐसा करते ही* *दोनों के शरीर ठन्डे पड़* *गए* ।
*मौलवी ने बादशाह को कहा *"* *हजुर ये लड़ने* *वाला* *इनका शरीर नही** *बल्कि ""इनका इष्ट* *देवी है"" और*
*ये राजपूत शराब से दूर रहते* *है और अपने धर्म और* *इष्ट को मजबूत रखते* है ।
*यदि मुगलो को हिन्दुस्तान पर* शासन करना है तो इनका इष्ट और धर्म भृष्ट करो और इनमे दारु शराब की लत लगाओ ।। यदि मुगलो में ये कमियां हटा दे तो मुगल भी मजबूत बन जाएंगे ।
*उसके बाद से ही ""राजपूतो* *में मुगलो ने* *शराब"" का प्रचलन चलाया* *और धीरे धीरे* *"""राजपूत शराब में डूबते* *गए"" और अपनी इष्ट देवी को* *नाराज करते गए ।*
*और मुगलो ने ""मुसलमानो* *को कसम* *खिलवाई"" की शराब पीने के* *बाद नमाज नही पढ़ी जा* सकती ।
*इसलिए इससे दूर रहिये* ।।.......
क्रमशः आगे की घटना जिसे पता हो वो इनबॉक्स में या कमेंट में जिक्र कर सकते है ......
*हमे हिन्दू समाज को इस* *कुरीति से दूर करना* होगा ।
*तब ही हम पुनः खोया वैभव* *पा सकेंगे और*
*हिन्दू धर्म की रक्षा कर सकेंगे* ।
भारत ने चीन को दी मात! खिलौनों के निर्यात में 239 परसेंट की जबरदस्त उछाल, ड्रैगन को पछाड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन साल पहले मन की बात में खिलौना निर्माण के प्रोत्साहन का जिक्र किया गया और उसके बाद से खिलौने के निर्माण से लेकर इसके निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
◆ भारत टेक्नोलॉ़जी, कपड़ा उद्योग, सहित कई क्षेत्रों में लगातार विकास कर रहा है.
◆ खिलौना उद्योग अन्य उद्योगों के लिए उदाहरण बनता जा रहा है।
◆ वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में खिलौने के निर्यात में 239 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसके आयात में इस दौरान 52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
◆ वर्ष 2014-15 में खिलौना निर्यात सिर्फ 9.6 करोड़ डॉलर का था जो वित्त वर्ष 22-23 में बढ़कर 32.6 करोड़ डॉलर का हो गया।
◆ वर्ष 2022-28 के दौरान खिलौने के कारोबार में सालाना 12 प्रतिशत से बढ़ोतरी का अनुमान है और यह उद्योग तीन अरब डॉलर के स्तर को छू सकता है।
◆ वित्त वर्ष 2014-15 में खिलौने का आयात 33 करोड़ डालर का था जो वित्त वर्ष 22-23 में घटकर 15.9 करोड़ डॉलर का हो गया।
◆ वित्त वर्ष 2013-14 में खिलौने के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी 94 प्रतिशत थी जो गत वित्त वर्ष 22-23 में घटकर 62 प्रतिशत रह गई।
खिलौने के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल नियम लागू करने के साथ खिलौने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की गई। इसके अलावा क्लस्टर आधार पर खिलौने का निर्माण शुरू किया गया।
■ खिलौने के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल नियम लागू किया गया और आयात शुल्क में भी बढोतरी की गई. वहीं क्लस्टर आधार पर खिलौने का निर्माण शुरू किया गया.
■ क्वालिटी कंट्रोल नियम लागू होने से घटिया किस्म के खिलौनों का आयात थम गया और इससे घरेलू स्तर पर निर्माण को प्रोत्साहन मिला। क्वालिटी कंट्रोल नियम के लागू होने से प्लास्टिक के घटिया खिलौने घरेलू बाजार से बाहर होते गए।
*खिलौने के निर्यात में पिछले 8 सालों में 239 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले मन की बात कार्यक्रम में खिलौना निर्माण के प्रोत्साहन के बारे में बात की थी. उसके बाद से ही खिलौने के निर्माण से लेकर इसके निर्यात में लगातार वृद्धि देखने को मिली है. इससे खिलौना उद्योग व्यापारी को बहुत फायदा हुआ है.
8 जनवरी/पुण्यतिथि
स्वामी प्रणवानन्द
स्वामी प्रणवानन्द का जन्म बंगाल के बाजितपुर गांव में 14 मई 1896 को हुआ था जो अब बांग्लादेश में है। उनके बचपन का नाम बिनोद था। उनके पिता विष्णुचरण दास एवं माता शारदा देवी शिवभक्त थे। बचपन से ही वे गहन चिन्तन करते-करते ध्यान-मग्न हो जाते थे। जैसे-जैसे वे बड़े होते गये, उनके ध्यान का समय भी बढ़ता गया। घर वालों ने उन्हें गांव की पाठशाला में भेज दिया। वहां भी वे ध्यानमग्न ही रहते थे। पाठशाला की पढ़ाई खत्म होने पर उन्हें एक अंग्रेजी विद्यालय में भेजा गया। वे कक्षा में सदा अन्तिम पंक्ति में बैठते थे और नाम पुकारने पर ऐसे बोलते थे, जैसे नींद से जागे हों। उन्हें शोर और शरारत पसन्द नहीं थी; पर बुद्धिमान होने के कारण वे सब बच्चों और अध्यापकों के प्रिय थे। बलिष्ठ होने के कारण खेलकूद में हर कोई उन्हें अपने दल में रखना चाहता था।
क्रान्तिकारियों से उनका सम्पर्क था जिसके कारण उन्हें कई महीने जेल में भी रहना पड़ा। वे अपने विप्लवी प्राचार्य सन्तोष दत्त से प्रायः सन्यास की बात कहते थे। इस पर प्राचार्य ने उन्हें गोरखपुर के बाबा गम्भीरनाथ के पास भेजा जहाँ उन्हे 1913 ई. में विजयादशमी के दूसरे दिन ब्रह्मचारी की दीक्षा दी। अब तो वे घंटों तक समाधि में पड़े रहते। उनके गुरुजी ही उन्हें बुलाकर कुछ खिला देते थे। आठ महीने बाद गुरुजी के आदेश से वे काशी आये और फिर अपने घर लौट गये। उन्हें 1916 ई. में माघ पूर्णिमा को शिव तत्व की प्राप्ति हुई। इसके एक साल बाद 1917 में उन्होने भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की । जहां गरीब, भूखों, असहाय और पीड़ितों की सहायता का कार्य किया जाता था । सन 1919 में बंगाल में आये भीषण चक्रवात में उन्होंने व्यापक सहायता कार्य चलाया। उनका दूसरा आश्रम मदारीपुर में बना।
उन्होंने 1924 ई. में पौष पूर्णिमा के दिन स्वामी गोविन्दानन्द गिरि से संन्यास की दीक्षा ली। अब उनका नाम स्वामी प्रणवानन्द हो गया। उसके बाद उन्होंने गया, पुरी, काशी, प्रयाग आदि स्थानों पर संघ के आश्रमों की स्थापना की। तभी से ‘भारत सेवाश्रम संघ’ विपत्ति के समय सेवा कार्यों में जुटा हुआ है। उन्होंने समाजसेवा, तीर्थसंस्कार, धार्मिक और नैतिक आदर्श का प्रचार, गुरु पूजा के प्रति जागरूकता जैसे अनेक कार्य किये।
स्वामी प्रणवानन्द जी जातिभेद को मान्यता नहीं देते थे। उन्होंने अपने आश्रमों में ‘हिन्दू मिलन मंदिर’ बनाये जिनमें जातिगत भेद को छोड़कर सब हिन्दू प्रार्थना करते थे। सबको धर्मशास्त्रों की शिक्षा दी जाती थी। इसके बाद उन्होंने ‘हिन्दू रक्षा दल’ गठित किया। इसका उद्देश्य भी जातिगत भावना से ऊपर उठकर हिन्दू युवकों को व्यायाम और शस्त्र संचालन सिखाकर संगठित करना था।
वर्तमान समय में भारत सेवाश्रम संघ के देश-विदेश में 75 आश्रम कार्यरत हैं। 8 जनवरी, 1941 को अपना जीवन-कार्य पूरा कर उन्होंने देह का त्याग किया। उनके जन्मस्थान बाजितपुर में उनकी समाधि है। अब उनके बताए आदर्शों पर उनके अनुयायी संघ को चला रहे हैं।
ब्यूरो चीफ/ लखनऊ
कोमल
16 से 22 तक का विस्तृत कार्यक्रम... मूर्ति निर्माण स्थल से शुरू होगा पूजन
द्वादश अधिवास होंगे- प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराएंगे 11 यजमान
अयोध्या ।08जनवरी। श्री राम लला की मूर्ति का जिस कुटिया में निर्माण किया गया 16 जनवरी को पूजन का प्रारंभ इसी कर्म कुटी से होगा। इसके बाद मूर्ति का निर्माण करने वाले शिल्पी का प्रायश्चित पूजन होगा विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और धर्माचार्य संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने बताया कि 17 फरवरी को श्री विग्रह का परिसर भ्रमण कराया जाएगा तथा गर्भगृह का शुद्धिकरण होगा। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी से अधिवास प्रारंभ होगा दोनों समय जलाधिवास होगा साथ ही सुगंधि और गंधाधिवास भी होगा 19 जनवरी को प्रातः फल अधिवास और शाम को धान्य अधिवास होगा। इसी तरह 20 जनवरी को सुबह पुष्प और रत्न अधिवास शाम को घृत अधिवास होगा श्री तिवारी के अनुसार 21 जनवरी को प्रात: शर्करा, मिष्ठान और मधु अधिवास होगा,शाम को औषधि और शय्या अधिवास होगा ।भगवान राम सूर्यवंशी हैं और आदित्य भी द्वादश हैं इसलिए द्वादश अधिवास हो रहे हैं।इसके अलावा सोलह से 22 जनवरी तक चतुर्वेद यज्ञ होगा। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के ब्रह्मा गणेश्वर शास्त्री द्राविड़, प्रमुख आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित सुनील दीक्षित, गजानंद जोगकर, अनुपम दीक्षित, घटाटे गुरुजी प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान संपन्न कराएंगे इसमें 11 यजमान भी होंगे । 22 जनवरी को मध्य दिवस में श्री राम लला के विग्रह की आंखों से पट्टी खोली जाएगी और उन्हें दर्पण दिखाया जाएगा।
लोकसभा चुनाव के पहले विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' पूरी तरह से एक्टिव नजर आ रहा है. इस बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने सोमवार को पहली बार दिल्ली में बैठक की. दोनों पार्टियों ने लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की व्यवस्था पर चर्चा की. इस बैठक को लेकर अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर प्रकाशित की है. खबरों की मानें तो आप के साथ कांग्रेस की पहली बैठक किसी औपचारिक घोषणा के बिना समाप्त हो गई, लेकिन इस आश्वासन के साथ बैठक खत्म हुई कि दोनों पक्षों के नेता एक साथ काम करेंगे. दोनों पार्टियां फॉर्मूले को अंतिम रूप देने के लिए फिर से बैठक करेंगे. सूत्रों के हवाले से खबर दी गई है कि आप ने दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से तीन कांग्रेस को देने की इच्छा व्यक्त की है, जबकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी को गुजरात में एक, हरियाणा में तीन और गोवा में एक लोकसभा सीट दी जाएगी.....
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर जोंटी रोड्स भारत से बहुत प्यार करते हैं। वह भारत से इतना प्यार करते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम इंडिया रखा है। जोंटी रोड्स एक बहुत अच्छे फील्डर भी रहे हैं। वह मुंबई इंडियंस के फील्डिंग कोच भी हैं। जोंटी रोड्स भारत आते-जाते रहते हैं। जोंटी रोड्स को भारतीय संस्कृति से बहुत प्यार है। एक बार जोंटी रोड्स भारत के पवित्र तीर्थ स्थल ऋषिकेश गए थे, जहां उन्होंने गंगा में स्नान भी किया था, जिसकी तस्वीरें आप देख सकते हैं।
ब्यूरो चीफ/ग्वालियर
बीना वर्मा
शवेता दर्पण समाचार पत्र
मालदीव को तगड़ा झटका! पीएम मोदी के अपमान पर फूटा भारतीयों का गुस्सा, 10 हजार होटल-5000 फ्लाइट की बुकिंग रद्द
मालदीव के मंत्रियों द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के बाद भारतीय पर्यटकों का आक्रोश तूफान बनकर फूटा है. अब तक 10,500 होटल बुकिंग और 5,520 हवाई जहाज के टिकट रद्द किए जा चुके हैं. मालदीव के मंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और भारत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के बाद भारतीय पर्यटकों का आक्रोश तूफान बनकर फूटा है. सोशल मीडिया से लेकर ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म तक हर जगह गुस्से का ज्वार उमड़ रहा है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अब तक 10,500 होटल बुकिंग और 5,520 हवाई जहाज के टिकट रद्द किए जा चुके हैं.ये आंकड़े मालदीव के पर्यटन उद्योग के लिए एक बड़ा झटका हैं. गौरतलब है कि पिछले साल ही मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ु ने "इंडिया आउट" नामक अभियान चलाया था, जिसका उद्देश्य मालदीव में भारतीय सैन्य उपस्थिति का विरोध करना था. हालांकि, इस अभियान को भारत और भारतीयों के एक बड़े वर्ग ने नकारात्मक रूप से लिया था.
BoycottMaldives हुआ ट्रेंड
लोग मालदीव के बजाय लक्षद्वीप को पर्यटन के लिहाज से बेहतर बता रहे हैं. सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप की खूबसूरत तस्वीरें लगातार पोस्ट की जा रही है. और BoycottMaldives ट्रेंड हो रहा है. हजारों भारतीयों ने मालदीव जाने का प्लान कैंसिल कर दिया है.
सिंधी सोशल ग्रुप : राजेश सोनी सर्वसम्मति से पुन: चुने गए अध्यक्ष -सचिव कमल कलवानी, कोषाध्यक्ष मोहित रामरख्यानी निर्वाचित
सिंधी सोशल ग्रुप, नीमच के नवीन सत्र-2024 के लिए नई कार्यकारिणी गठन के लिए चयन समिति को जिम्मेदारी सौपी गई थी। चयन समिति द्वारा सर्वसम्मति से राजेश सोनी(सोनी प्लायवुड्स) को सिंधी सोशल ग्रुप नीमच का पुन: अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया। सिंधी सोशल ग्रुप नीमच के पदाधिकारियों व सदस्यों की बैठक विगत दिवस कनावटी रोड स्थित होटल श्रेष्ठा पैराडाइज में आयोजित की गई। बैठक में चयन समिति द्वारा वर्ष-2024 के लिए सिंधी सोशल ग्रुप नीमच की नवीन कार्यकारिणी को लेकर चर्चा की गई और सर्वसम्मति से निर्णय लिया। नवीन सत्र-2024 के लिए अध्यक्ष राजेश सोनी(सोनी प्लायवुड्स), सचिव कमल कलवानी (कमल कलेक्शन), कोषाध्यक्ष मोहित रामरख्यानी (ओल्ड एंड न्यू बुक सेंटर), उपाध्यक्ष मनीष टिलवानी, सहसचिव संतोष आहूजा, सलाहकार प्रकाश रामनानी, महेश वरधानी व किशन बच्चानी काे निर्वाचित घोषित किया। साथ ही कार्यकारणी सदस्य के रूप में भरत पुरस्वानी, अमर वरधानी, श्याम गोविंदानी, संजय राजदेव, समीर रामनानी, रितेश तलरेजा, महेश साहनी, मनीष नासा को निर्वाचित किया गया।
8 जनवरी : सोमनाथ की लूट, 50 हजार पुजारियों और भक्तों का बलिदान
इतिहास में कुछ तिथियाँ और उनमें घटी घटनायें ऐसी हैं कि जिनके स्मरण से आज भी रोंगटे होते हैं । ऐसी ही एक घटना हैं गुजरात के सोमनाथ मंदिर की लूट और वहां उपस्थित श्रद्धालुओं की सामूहिक हत्या काँड ।
सोमनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक है । मान्यता है कि उसकी स्थापना भगवान् परशुराम जी ने की थी । यह मंदिर पूरे विश्व के आकर्षण का केन्द्र रहा । संपूर्ण एशिया ही नहीं यूनान और रोम से भी पर्यटकों के सोमनाथ आने का वर्णन इतिहास में मिलता है । नौवीं शताब्दी से पहले यह मंदिर यदि विश्व भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रहा तो नौवीं शताब्दी के बाद लुटेरों और आतताइयों के लालच का केन्द्र भी यह मंदिर रहा । मध्यकाल का इतिहास लूट, विध्वंस और हत्याकांड से भरा हुआ है । पर मेहमूद गजनवी की लूट इतनी बीभत्स और क्रूरतम थी कि उसका वर्णन हृदय को विदीर्ण कर देता है ।
सोमनाथ मंदिर में लूट और विध्वंस की यह घटना 8 जनवरी 1026 की है । उस दिन लुटेरे मेहमूद गजनवी और उसकी फौज ने केवल संपत्ति लूटकर सोमनाथ मंदिर का विध्वंस नहीं किया था बल्कि वहां उपस्थित एक भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा था । वह या तो उन्हें मार गया था या उन्हें बंदी बनाकर अपने साथ ले गया था । यही हाल स्त्रियों का किया था । उन्हें भी या तो क्रूरता की मौत मिली या बंदी बनाकर ले जाईं गईं । बाद में इन सभी बंदियों को गुलामों के बाजार में बेचा गया ।
सोमनाथ मंदिर में विध्वंस पहला या अंतिम नहीं था । इससे पहले भी विध्वंस हुआ और बाद में भी । लेकिन यह विध्वंस क्रूरता की पराकाष्ठा थी इसलिये केवल इसी को याद किया जाता है ।
सोमनाथ मंदिर की पहली लूट सिंध में तैनात अरब के गवर्नर जुनायद ने की थी । यह गवर्नर जुनायद वही था जो सिंध पर मोहम्मद बिन कासिम की फतह के बाद तैनात हुआ था । सिन्ध से चलकर जुनायद समुद्री रास्ते से सोमनाथ आया था और सीधा हमला बोला । उसने मंदिर विध्वंस किया संपत्ति लूटी और लौट गया । उसने हमला अचानक बोला था । जुनायद ने हत्या वही की जो उसके रास्ते में आया । उसका उद्देश्य केवल संपत्ति लूटना और महिलाओं का हरण करना था । वह तेजी से लौट गया । उसके जाते ही मंदिर का पुनरुद्धार गुजरात के शासक नागभट्ट ने किया और मंदिर पुनः अपने वैभव पर लौट आया । इसके बाद दूसरा और भयानक हमला मेहमूद गजनवी ने बोला । इस लूट और विध्वंस का वर्णन भारतीय इतिहास में कम और अल्बरूनी के वर्णन में अधिक मिलता है । अल्बरूनी मेहमूद के लगभग हर अभियान में साथ रहा । बाद में जो भी लिखा गया उसका आधार अल्बरूनी का ही वर्णन है । अल्बरूनी ने न केवल लूट और विध्वंस का वर्णन किया है बल्कि लूट और आक्रमण की रणनीति का उल्लेख किया है । इस वर्णन के अनुसार मेहमूद ने अपने कुछ एजेन्ट पहले भेज दिये थे जो वेश बदल कर रहते थे । ये लोग हर समूह में फैल गये थे, हर वेष में रहते थे । पुजारियों के रूप में भी यात्रियों के रूप में भी और व्यापारियों के वेष में भी और उन्होंने पूरी जमावट कर ली थी । कुछ फकीरों के वेष में भी थे । यही नहीं मेहमूद ने एक नजूमी को भी भेजा था । नजूमी यनि भविष्य बताने वाला । जब मेहमूद ने सोमनाथ पर आक्रमण किया तब गुजरात में भीमदेव का शासन था । राजा भीमदेव ज्योतिष पर बहुत भरोसा करता था । इसकी सूचना मेहमूद गजनवी को थी । उसने इसका लाभ उठाया । नजूमी के रूप में जिसे भेजा गया था वह जासूस था और अनेक भाषाएँ जानता था । उस ने राजा को चौबीस घंटे रुक कर मुक़ाबला करने की सलाह दी थी और कहा कि चौबीस घंटे तक कालग्रास योग है । यह मेहमूद की योजना थी । वह रास्ते में युद्ध लड़ना नहीं चाहता था और पूरी शक्ति के साथ सीधे सोमनाथ पहुंचना चाहता था । इसलिए उसने जो मार्ग चुना था वह लंबा जरूर था पर भारतीय रियासतों के किनारे से निकला था । उसने रास्ते में केवल दो स्थानों में युद्ध लड़ा । बाकी जगह रसद और भेंट लेकर आगे बढ़ता रहा । उसकी योजना थी कि गुजरात की धरती पर भी युद्ध न लड़ना पड़े । वह पूरे रास्ते सुरक्षात्मक युद्ध करते ही आगे बढ़ा था । युद्ध टालने के लिये ही उसने राजा के पास नजूमी को भेजने की योजना बनाई थी । गुजरात के राजा ने चौबीस घंटे रुकने की बात मानी । और रुक गया । मेहमूद ने इस समय का फायदा उठाया और सीधा सोमनाथ धमक गया । राजा को मूहमूद के आने की सूचना थी । पर सूचना यह भी थी कि हमला गुजरात पर होगा । इसलिये सेना की सुरक्षा राजधानी में मजबूत की गयी और अधिकांश सेना राजधानी की सुरक्षा में लगा दी गयी । मंदिर की सुरक्षा के लिये न सेना पहुंच ही सकी और न ध्यान ही गया ।
1-हर व्यक्ति जन्म लेता है गो-पुत्र के रूप में-इसलिये उसका एक गोत्र होता है।
2-हर व्यक्ति अपना विवाह मुहूर्त चाहता है -गो धूलि बेला में।
3-हर व्यक्ति मृत्यु के बाद जाना चाहता है गोलोक धाम,हर आत्मा चाहती है गोलोकवास
4-हर जीव वैतरणी पार करना चाहता है -मृत्यु से पहले गो दान करके।
सोचिये ! हर कामना पूरी करने के लिए गो माता का सहारा। लेकिन उसी गो माता की सेवा के लिए समय नही होता है।
गो माता के विषय में कुछ रोचक जानकारी
1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनन्दपूर्वक चैन की सांस लेती है। वहाँ वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं।
2. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं।
3. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है।
4. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है।
5. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है। जहाँ गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते।
6. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है।
7. गौ माता कि एक आँख में सुर्य व दूसरी आँख में चन्द्र देव का वास होता है।
8. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है।
9. गौ माता की पूँछ में हनुमानजी का वास होता है। किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूँछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है।
10. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है, उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है। रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है।
11. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है।
12. गौ माता के दूध घी मक्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है। इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं।
13. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है।
14. गौ माता के चारों चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है।
15. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे।
16. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं।
17. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है।
18. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं।
19. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है।
20. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं। जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है।
21. गाय एक चलता फिरता मंदिर है। हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है, हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं।
22. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार-बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा।
23. गौ माता सर्व सुखों की दातार है।
हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूँ।
*☆गोसेवा धर्म हमारा*
कांग्रेस की आत्मा हिंदू' उद्धव की शिवसेना बोली
मुखपत्र 'सामना' में लिखे एक लेख में लिखा कि 'अगर कांग्रेस पार्टी को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है तो इसके नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए।'
राम मंदिर निर्माण के बाद अब जल्द ही मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन होगा। ऐसे में जब पूरा देश राममय हो रहा है तो राजनीतिक पार्टियों में भी खुद को हिंदू बताने की होड़ मची हुई है। कांग्रेस अपने धर्मनिरपेक्ष स्टैंड के चलते कहीं ना कहीं असमंजस में दिख रही है। ऐसे हालात में शिवसेना (यूबीटी) अपनी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के बचाव में उतर आई है। शिवसेना (यूबीटी) कहना है कि कांग्रेस पार्टी की आत्मा हिंदू है और पार्टी के नेताओं को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में जाना चाहिए।
मुखपत्र 'सामना' में लिखा लेख
शिवेसना (उद्धव बाल ठाकरे गुट) ने बुधवार को अपने मुखपत्र 'सामना' में लिखे एक लेख में लिखा कि 'अगर कांग्रेस पार्टी को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है तो इसके नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए। इसमें गलत क्या है? कांग्रेस की आत्मा हिंदू है और इसमें छिपाने जैसी कोई बात नहीं है।'
एक बार धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं अंधा क्यों हुं। मुझे पिछले सौ जन्मों की तो खबर है। इन सौ जन्मों में मैंने ऐसा कोई कर्म नहीं किया जिसके कारण मैं अंधा हूं। श्री कृष्ण ने धृतराष्ट्र के सिर पर हाथ रखकर कहा कि और पीछे देखो तो एक सौ छ: जन्म पहले का ऐसा कर्म मिला जिसके कारण वह अंधा हुआ है। उसने देखा कि वह छोटा बालक है और एक छोटे से तालाब के किनारे बैठा है। एक मेंढक तालाब के पानी से बाहर निकलता तो वह मेंढक की आंखों में कांटा चुभा देता। मेंढक पानी में गिर पड़ता, मेंढक पानी से बाहर निकलता तो फिर आंखों में कांटा चुभा देता। उस मेंढ़क के श्राप के कारण धृतराष्ट्र को अंधा होना पड़ा। कर्मों का जाल बड़ा पेंचिदा है। कर्म फल तो हमें किसी न किसी जन्म में भुगतना पड़ता है। चाहे कर्म हम नादानी में करें या समझदार होकर भी करें तो भी उसका फल तो भोगना ही पड़ेगा। नादानी में किये गये कर्म का बोझ कम होता है। नादानी में कर्म करने के कारण धृतराष्ट्र को सिर्फ अंधा होना पड़ा, कांटों का दर्द नहीं सहना पड़ा। अगर हम सब समझकर भी जानबूझ कर ग़लत कर्म करें तो उसका बोझ भी ज्यादा उठाना पड़ेगा। मौजूदा बाबाजी व बाकी संतों ने न जाने कितने सत्संग के द्वारा हमें सब समझा दिया है कि हमें मनुष्य जन्म क्यों मिला है ? मनुष्य जन्म का असल उद्देश्य क्या है ? कर्मों के जाल से कैसे बचा जा सकता है ? नामदान और सत्संग, सेवा हमारे लिए क्यों जरूरी है ? नाम की कमाई अर्थात् भजन सुमिरन करना कितना जरूरी है ? अगर हम सबकुछ जानकर व समझकर भी सत्संग का लाभ प्राप्त नहीं करते, सेवा और असल सेवा भजन सुमिरन नहीं करते तो हमें आम आदमी की बजाय ज्यादा कर्मों का बोझ उठाना पड़ेगा अर्थात् हम ज्यादा सज़ा के हकदार होंगे। फिर दुःखी होने पर हमें शिकायत करने का भी हक नहीं है। जो सत्संगी भाई बहन भजन सुमिरन करते हैं, उन्हें सतगुरु बड़े इज़्ज़त मान और प्रेम प्यार के साथ सचखंड से आगे अनामी राधास्वामी देश ले जायेंगे और जो सत्संगी भाई बहन भजन सुमिरन नहीं करते, सतगुरु उन्हें भी इस जन्म या अगले जन्म में सचखंड से आगे अनामी राधास्वामी देश में ले जायेंगे, मगर कान पकड़कर अर्थात् दुःख देकर। अब यह हमारे हाथ में है कि हम राधास्वामी अनामी देश में प्रेम प्यार व इज़्ज़त मान के साथ जाना चाहते हैं या दु:खी होकर अर्थात् कष्ट भोगकर। इसलिए जो सत्संगी भाई बहन दुःखी हैं तो समझो सतगुरु उनके कान खींच रहे हैं। अभी मौका है भजन सुमिरन कर लें, सतगुरु दया मेहर के सागर हैं, हम पर दया मेहर करके सूली की सूल कर दे
संासद सुधीर गुप्ता ने नीमच विधानसभा के ग्रामों में विकसित भारत संकल्प यात्रा को संबोधित किया
मंदसौर - सांसद सुधीर गुप्ता विकसित भारत संकल्प यात्रा अंतर्गत आज नीमच विधानसभा के ग्राम कुचडोद एवं नीमच नगर के रावण रुंडी में वार्ड क्रमांक 1 से 6 के वार्डवासियों के बीच विकसित भारत संकल्प यात्रा में शामिल हुए। सांसद सुधीर गुप्ता ने यात्रा में पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समीक्षा की और पात्र हितग्राहियों को लाभ वितरित किया । इस दौरान देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का श्रवण किया और ग्रामावासियो को विकसित भारत संकल्प यात्रा के संबंध में जानकारी दी। संासद गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में आर्थिक सम्पन्नता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ को सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे यही विकसित भारत संकल्प यात्रा का उद्देश्य है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान कार्ड जिसके तहत 5 लाख का निःशुल्क उपचार की पात्रता है इसके साथ जी आधार कार्ड भी बनाए जा रहे है जिसमे किसी भी व्यक्ति के पुराने उपचार का पूरी जानकारी संकलित की जाती है, प्रसूति सहायता योजना अंतर्गत प्रथम व द्वितीय प्रसव के दौरान 14हजार की राशि किस्तों के माध्यम से प्रदान की जाती है। कृषि विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कृषि व सिंचाई उपकरण को लॉटरी में चयनित किसान भाइयों को अनुदान पर उपलब्ध कराए जाते है, और नेनो यूरिया और डीएपी का भी उपयोग किया रहा है, पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं को बीमा राशि में अनुदान प्रदान किया जा रहा है और साथ ही किसानों को पशुओं पर केसीसी प्रदान की जायेगी जिसमे प्रत्येक भैंस पर 18 हजार और गाय पर 15 हजार की राशि लोन के माध्यम से प्रदान की जावेगी। खाद्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री उज्जवला योजना अंतर्गत प्रत्येक परिवार को गैस चूल्हा वितरित किए गए । इसके साथ उज्जवला 2.0 के दौरान जो परिवार जो किसी कारण से चूक गए उनके नाम लिखकर उन्हे भी योजना से जोड़ा गया, और प्रधानमंत्री अन्य योजना अंतर्गत ग्राम के 380 परिवार को मुफ्त में अनाज प्राप्त हो रहा है, इसके साथ जिला सहकारी बैंक, महिला बाल विकास, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, सहित अन्य विभाग द्वारा सभी योजनाओं की पूर्ण जानकारी ग्रामवासियों को बताई गई । और जो पात्र व्यक्ति किसी भी योजना से वंचित रह गए है उन्हे भी कैंप के माध्यम से योजनाओं में जोड़ा गया। मोदी के ड्रीम को साकार करते हुए ग्रामवासियों के बीच ड्रोन के माध्यम से खेती करने का परीक्षण किया । नीमच नगर स्ट्रीट वेंडर, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, और स्वरोजगार योजना के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किया।
इस अवसर विधायक दिलीप सिंह परिहार, जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जनसिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष सुनील कटारिया, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती स्वाति चोपड़ा, , जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मदन धनगर, मंडल अध्यक्ष मधुसुदन राजोरा, पूर्व जिलाध्यक्ष हेमंत हरित, मंडल अध्यक्ष मोहन राणावत, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष नवल गोस्वामी, भाजपा नेता मेहरसिंह जाट, मंडल महामंत्री श्री शुभम शर्मा, किशन अहिरवार, सहित पार्टी पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
डिजिटल भूगतान को लेकर सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा मंे किया प्रश्न
मंदसौर - यूपीआई लेनदेन को लेकर सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा मंे प्रश्न किया। सांसद गुप्ता ने कहा कि देश भर में यूपीआई लेन-देन धीरे-धीरे बहुत बढ़ रहा है और नकदी के परिचालन में अंततः गिरावट आ रही है। सरकार ने हाल ही में लोगों से केवल डिजिटल माध्यम से भुगतान करने का आग्रह किया है। लोगों को नकद भुगतान करने से रोकने और इसके स्थान पर डिजिटल करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए है। उन्होने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने रूपये क्रेडिट कार्ड को यूपीआई खातों से जोड़ने की अनुमति दे दी है ताकि छोटे लेन-देन के लिए प्लास्टिक कार्यों का उपयोग किया जा सके और यह उपभोक्ताओं के लिए किस प्रकार लाभकारी होगा। डिजिटल भुगतान पद्धति को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए किए जा रहे अन्य उपाया किए जा रहे है।
प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. भागवत कराड ने बताया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेन-देन की संख्या, जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में 92 करोड़ थी वित्तीय वर्ष 2022-23 में बढ़कर 8,375 करोड़ हो गई है, इस प्रकार इसमें 147 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर (सीएजीआर) से वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, यूपीआई लेन-देन का मूल्य, जो 168 प्रतिशत सीएजीआर पर वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1 लाख रुपये करोड़ था, वित्तीय वर्ष 2022-23 में बढ़कर 139 लाख करोड़ रुपये हो गया है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 11 दिसंबर, 2023 तक यूपीआई के माध्यम से 8,572 करोड़ लेन-देन हुए हैं। उन्होने बताया कि देश में डिजिटल भुगतान लेन- देन की समग्र वृद्धि में यूपीआई, एक प्रमुख प्रेरक बल रही है, जिसके माध्यम से वित्तीय वर्ष 2022-23 में 62 प्रतिशत डिजिटल भुगतान लेन-देन हुए हैं। प्रचलन में रहे बैंक नोटों के मूल्य में वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि में कमी आई है, वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रचलन में रहे नोटो का मूल्य 9.9 प्रतिशत था, जो वित्तीय वर्ष 2022-23 में घटकर 7.8 प्रतिशत हो गया है। उन्होने बताया कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों में अन्य बातों के साथ-साथ रूपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना, भुगतान स्वीकार करने सम्बंधी अवसंरचना ढांचे में सुधार के लिए विभिन्न हितधारकों को भारत सरकार द्वारा परामर्श जारी करना, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए डिजिटल भुगतान लेन- देन और कारोबारियों को शामिल करने सम्बंधी वार्षिक लक्ष्य का आवंटन और निगरानी, प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए अभियान और डिजिटल भुगतान हितधारकों और विधि प्रवर्तन एजेंसियों के साथ आयोजित अन्य प्रचार-प्रसार सम्बंधी गतिविधियां शामिल हैं। उन्हानेे बताया कि
ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए, आरबीआई डिजिटल भुगतान उत्पादों, धोखाधड़ी और जोखिम को कम करने और शिकायत निवारण के बारे में जागरूकता पर जोर देने के साथ-साथ देश भर में इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग जागरूकता और प्रशिक्षण (ई-बात) कार्यक्रम, डिजिटल भुगतान जागरूकता सप्ताह, मिशन हर पेमेंट डिजिटल कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है । जिसका उद्देश्य भारत के प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल भुगतान की जानकारी देना है। आरबीआई ने आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 75 डिजिटल गांव कार्यक्रम भी शुरू किया है और विभिन्न डिजिटल भुगतान पहल जिनमें ग्राहकों की संरक्षा, सुरक्षा और सुविधा को कवर किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से लिंक करने की अनुमति दे दी है। उपभोक्ताओं को होने वाले लाभों में, एक बार रुपे क्रेडिट कार्ड यूपीआई से लिंक हो जाने पर, यूपीआई क्यूआर के माध्यम से इसका उपयोग करने के लिए प्लास्टिक कार्ड ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी ।