Sab per penni nazar
शवेता दर्पण पञकार वेल्फेयर एसोसिएशन की चेयरपर्सन शवेता रस्तोगी ने कहा
❁ मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे ❁
एक बार भगवान भी बड़ी दुविधा में फंस गये, क्योंकि लोगों की बढ़ती आस्था और साधना वृति से वो प्रसन्न तो थे, लेकिन फिर भी उन्हें उच्च व्यावहरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था.जब भी कोई दुखी होता, या मुश्किल में होता, वो भगवान के पास भागा-भागा आता और उन्हें अपनी परेशानियाँ दूर करने को कहता.हर समय कुछ न कुछ माँगने की समस्या से दु:खी और परेशान होकर उन्होंने इस समस्या के निराकरण के लिए सभी देवताओं की बैठक बुलाई, और उनसे इस सम्बन्ध में उनकी राय माँगी.भगवान बोले ~ मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूँ अब तो मैं कहीं भी शाँति से नहीं रह सकता.आप मुझे कोई ऐसा स्थान बताएं जहाँ मनुष्य कभी न पहुँच पाये भगवान के विचारों का आदर करते हुए देवताओं ने अपने विचार प्रकट किये.गणेश जी बोले ~आप हिमालय की चोटी पर चले जाएं भगवान ने कहा ~ वह स्थान तो मनुष्य की पहुँच में है. उसे वहाँ पहुँचने में अधिक समय नहीं लगेगा इंद्र ने सलाह दी ~ आप किसी महासागर में चले जाएं.वरुण देव ने सलाह दी आप अन्तरिक्ष में चले जाएंणभगवान ने कहा ~ एक दिन मनुष्य वहाँ भी पहुँच जायेगा भगवान निराश होने लगे अंत में सूर्यदेव ने कहा ~भगवान् आप एक काम करें.आप मनुष्य के हृदय में बैठ जाएं मनुष्य हमेशा आपको ...बाहर ही तलाश करता रहेगा. अपने हृदय में कभी •• तलाश नहीं करेगा कुछ ही योग्य लोग होंगे ,जो आप तक पहुँच पाएंगे इससे आपको कोई परेशानी भी नहीं होगी सूर्यदेव की बात भगवान को पसंद आई, और वे उसी दिन मनुष्य के हृदय में बैठ गये.उस दिन के बाद से मनुष्य हर बाहरी जगह में ,भगवान को तलाश कर रहा है ,
।❗ लेकिन ❗
अपने हृदय में बैठे भगवान को नहीं देख पा रहा
लाला लाजपत राय ने आज से 100 साल पहले ही कुरान के खिलाफ हिंदुओं को सावधान किया था
17 नवंबर 1928 को लाला लाजपत राय का निधन हुआ था । आज उनकी पुण्यतिथि है । शत शत नमन और श्रद्धांजलि । लाला लाजपत राय ने देशबंधु चितरंजन दास को एक चिट्ठी लिखी थी । इस चिट्ठी का जिक्र भीम राव अंबेडकर ने अपनी किताब पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन में किया है । (फोटो उन्हीं की किताब से ली गई है कुरान और हदीस को पढ़ने के बाद चिंता से ग्रस्त होकर लाल लाजपत राय ने चिट्ठी में लिखा... कि अगर मान भी लिया जाए कि कोई मुसलमान बहुत सज्जन हो तो भी क्या वो कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा (काफिरों को मित्र ना बनाओ) के खिलाफ जाएगा ?उस चिट्ठी में लाला लाजपत राय लिखते हैं..“एक बात ओर मुझे बहुत दिनों से कष्ट दे रही है जिसे मैं चाहता हूँ कि आप बहुत ध्यान से सोचें और वो है हिंदू-मुस्लिम एकता । मैंने पिछले 6 महीने में अपना अधिकांश समय मुस्लिम इतिहास और मुस्लिम कानून को पढ़ने में लगाया है और मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि यह ना तो संभव है और ना ही व्यवहारिक है । हकीम अजमल खां साहब से बेहतर कोई मुसलमान हिंदुस्तान में नहीं है लेकिन क्या कोई अन्य मुस्लिम नेता कुरान के खिलाफ जा सकता है । मैं तो केवल यही सोचता हूँ कि इस्लामिक कानून के बारे में मेरा ज्ञान सही नहीं है और ऐसा ही सोचकर मुझे राहत मिलती है । मुझे आशंका ये है कि हिंदुस्तान के 7 करोड़ मुसलमान और अफ़ग़ानिस्तान, मध्य एशिया, अरब और मेसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगे । मैं मुस्लिम नेताओं पर भी पूरी तरह से विश्वास करने को तैयार हूँ लेकिन कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की मेरे पास कोई काट नहीं है ।” (पूरी चिट्ठी अटैच की हुई तस्वीर में पढ़ सकते हैं लाल लाजपत राय आर्य समाज से जुड़े हुए बहुत विद्वान नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे लेकिन उनकी मृत्यु के बाद अंग्रेजों के एजेंट गांधी ने पूरे आंदोलन पर कब्जा कर लिया और मुस्लिम लीग और अंग्रेजों की कठपुतली बनकर देश को तोड़ने का काम किया । गांधी ने जिहादियों की जो चापलूसी की... पाकिस्तान उसी का परिणाम है । लाखों हत्याओं और लाखों हिंदू महिलाओं के बलात्कार और मर्डर का गुनाह गांधी के सिर पर है ।
लाल लाजपत राय को शत शत नमन
*जुल्फिकार अली भुट्टो ने इंदिरा गांधी को कैसे मूर्ख बनाया था*
जो लोग 1971 की लड़ाई में इंदिरा गांधी की पीठ थपथपाते हैं उन लोगों को बेनजीर भुट्टो के पति आसिफ अली जरदारी का पाकिस्तान के संसद में दिया गया यह बयान जरूर पड़ना चाहिए।
जब पाकिस्तान के 90000 से ज्यादा सैनिक भारत की कैद में थे उनके तीन हजार से ज्यादा सैनिक अधिकारी हमारे हिरासत में थे... पाकिस्तान की सेना आत्मसमर्पण कर चुकी थी। भारतीय सेना सिंध के जिले थारपारकर को भारत में मिला शामिल कर चुकी थी और उसे गुजरात का एक नया जिला घोषित कर दिया गया था और मुजफ्फराबाद पार्लियामेंट पर तिरंगा झंडा फहरा दिया गया था।
जुल्फिकार अली भुट्टो जब इंदिरा गांधी से शिमला समझौता करने आए तब वह अपनी बेटी बेनजीर भुट्टो को भी साथ में लाए थे। जुल्फिकार अली भुट्टो अपनी बेटी को राजनीति सिखा रहे थे।
इंदिरा गांधी ने जुल्फिकार अली भुट्टो के सामने शर्त रखी, यदि आपको अपने 93000 सैनिक वापस चाहिए तब आप कश्मीर हमें दे दीजिए। जुल्फिकार अली भुट्टो इंदिरा गांधी से कहा कि हम आपको कश्मीर नहीं देंगे। मैं कोई दस्तखत नहीं करूंगा आप यह 93000 सैनिकों को अपने पास ही रखो
इंदिरा गांधी सपने में भी नहीं सोची थी कि जुल्फिकार अली भुट्टो उनसे भी बड़ा खिलाड़ी है वह जानता है की सीमाओं पर हारी गई युद्ध को टेबल पर कैसे जीता जाता है। इंदिरा गांधी की हालत ऐसी हो गई थी जैसे कोई रोजा रखने जाए और उसके गले नमाज पड़ जाए।
पुपुल जयकर और कुलदीप नैयर दोनों ने अपनी किताब में लिखा है इंदिरा गांधी उस मौके पर चूक गई और उनके और उनके सलाहकारों के पास कोई ऐसी कूटनीतिक ज्ञान नहीं था कि ऐसे में स्थिति को कैसे संभाला जाए। जिनेवा समझौते के तहत यदि कोई देश किसी युद्ध बंदी को पकड़ता है तब वह उसके डिग्निटी का पूरा ख्याल रखना होता है।
जुल्फिकार अली भुट्टो शाम को होटल में अपनी बेटी बेनजीर भुट्टो से कहा इस युद्ध में भारत की कमर टूट चुकी है। हमने पूरी बहादुरी से लड़ा भले ही हमने भारत की अर्थव्यवस्था को बहुत करारी चोट दिया है। भारत पहले ही बांग्लादेशी शरणार्थियों का बोझ झेल चुका है। अब भारत 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को कैसे पालेगा और अगर भारत 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को अपने पास बसाना चाहता है तो बसाएं। और उन कायर सैनिकों को हम वापस लेकर भी क्या करेंगे मैंने इंदिरा गांधी की हालत सांप के गले में पड़ी छछूंदर जैसी कर दी है।
और अंत में इंदिरा गांधी की हालत ऐसी हो गई जैसे कोई जूते भी खाए और प्याज भी खाए। इंदिरा गांधी ने कश्मीर भी पाकिस्तान को दे दिया 93000 सैनिक भी वापस कर दिए और अपने 56 सैनिकों को पाकिस्तान की जेल मरने को छोड़ दिया। और 8 महीने के बाद नोबेल पुरस्कार की इच्छा में भारत के गुजरात राज्य में शामिल जिला थारपारकर को ही पाकिस्तान को वापस कर दिया जबकि थारपारकर कि उस वक्त 98% आबादी हिंदू थी।
शिमला समझौते के बाद उस वक्त के सेना प्रमुख ने रिटायरमेंट के बाद जो किताब लिखी थी उसमें कहा था इस युद्ध को हमने लड़ाई के मैदान में तो जीत लिया लेकिन टेबल पर राजनेताओं ने भारत को हरा दिया।
*ओर वो राजनेता इंदिरा गांधी थी।*
चिंटू पुरी ने एक गौ वंश को उप जिलाधिकारी के द्वारा गौशाला भेजा
खीरी। ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत धर्म दास महाराज के निर्देश अनुसार दिनांक 27-11-2023 को शोभित भाई ने सूचना दी चिंटू पुरी ब्रजवासी गो रक्षक सेना भारत जिला अध्यक्ष को की संपूर्ण नगर रोड ब्लॉक के पास एक छोटे बछड़े का एक्सीडेंट हो गया है चिंटू पुरी तत्काल पहुंचे देखा कि बछड़े के पूरे शरीर में चोट लगी हुई है फिर चिंटू पुरी गो रक्षक ने ब्लॉक के पशु मित्र राणा भैया और मंजीत कुमार को बुलाया फिर चिंटू पुरी ने तीनों ने मिलकर उपचार किया फिर चिंटू पुरी ने गौशाला भिजवाने के लिए उप जिलाधिकारी एसडीएम कार्तिकेय सिंह जी से कहा फिर एसडीएम साहब जी ने जेसीबी भिजवाई चिंटू पुरी ने बछड़े को गौशाला भिजवाए। भारत देश में ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन में जुड़ने वाले सभी कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि सभी जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संत धर्म दास महाराज को दें। ताकि आप का मार्गदर्शन कर सकें। जुड़ने के लिए आधार कार्ड, एक फोटो हमारे हेल्पलाइन नंबर -9568576382 पर भेजें
7985753028
01 अवैध तमंचा 315 बोर मय जीवित/खोखा कारतूस बरामद
जनपद बुलन्दशहर/थाना कोतवाली दिनांक 27.11.2023 को थाना कोतवाली नगर व क्राइम ब्रान्च की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा सूचना के आधार पर खालसा तिराहा के पास मोटर साइकिल सवार बदमाशों को रोकने का प्रयास किया गया तो बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से फायरिंग कर दी। पुलिस टीम द्वारा की गई आत्मरक्षार्थ कार्यवाही में अभियुक्त बाबुद्दीन निवासी मिठेपुर थाना गुलावठी जनपद बुलन्दशहर घायल हो गया, जिसे गिरफ्तार किया गया। एक अन्य अभियुक्त मौके से फरार हो गया, जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे है। गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से 01 अवैध तमंचा 315 बोर मय जीवित/खोखा कारतूस, 01 मोटर साइकिल बरामद हुई।उल्लेखनीय है कि गिरफ्तार अभियुक्त थाना अनूपशहर पर पंजीकृत अभियोग में वांछित चल रहा था, जिसकी गिरफ्तारी हेतु जनपद स्तर से 20 हजार रूपये का पुरस्कार घोषित था। थाना कोतवाली नगर पर अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है।