मेरा सपना
मेरा सपना
“सहेली महिला मण्डल” यह संस्था मेरे लिए एक मिशन हैं. जिसे में उसके अंजाम तक पहुंचाकर रहूँगा. कई सालों से दिल में आग सी लगी थी कि महिलाओ पर हो रहे अत्याचारों को कैसे रोकूँ या फिर इन महिलाओ कि कैसे सहायता करूँ, चुकी मैं अकेले तो ये काम नहीं कर सकता था मुझे लोगों का साथ चाहिए था और वो मुझे नहीं मिला. एक बार मैंने अपनी पत्नी श्रीमती पूजा जाटव से महिलाओ के बारे में अपनी सोच रखी, अब मैं हम हो गए थे यानि अब इस मिशन के लिए दो लोग काम करने को तैयार थे. लेकिन हमने सोचा कि हम अपने साथ और महिलाओं को जोड़ेंगे और फिर हमने एक महिला मण्डल बनाने कि सोची, अब होता किया है कि हमारे समाज में एक अजीब सी परेशानी है हम किसी से भी जुड़ने के लिए कहते तो महिलाओं या फिर उनके पतियों के द्वारा एक ही बात पूंछी जाति कि फायदा किया होगा. सच तो ये है कि जिसके ऊपर जब भी कोई आफत आती है तभी उसे लगता है कि कुछ करना चाहिए. अमूमन लोग लालची हो गये है वे हर चीज में पैसा देखते हैं, लेकिन 2 अक्टूबर 2018 को बड़ी मेहनत के बाद 9 – 10 महिलाओं ने एक संस्था कि शुरुआत कि और छोटे मोटे कार्यक्रम करने लगीं और हिस्सा लेने लगीं. अब यह संख्या 30 के पार हो गई है (लिखते समय) और अब महिलाएं खुद व् खुद जुड़ रहीं है और मीटिंग / सेमिनारों में हिस्सा ले रहीं है. मेरा सपना था के समाज के लिए कुछ करें खास कर महिलाओं के लिए, मेरे सपने को और ऊंचाई दी मेरे सहयोगी संतोष कुमार जी, राजेश कुमार जी, विजय कुमार जी ने, इस संस्था का नाम भी संतोष कुमार जी ने ही सुझाया था और फिर महिलाओं में से एक ने इसका प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा और इसे रजिस्ट्रार के द्वारा पंजीकृत कर दिया गया.
“सहेली महिला मण्डल” यह संस्था मेरे लिए एक मिशन हैं. जिसे में उसके अंजाम तक पहुंचाकर रहूँगा. कई सालों से दिल में आग सी लगी थी कि महिलाओ पर हो रहे अत्याचारों को कैसे रोकूँ या फिर इन महिलाओ कि कैसे सहायता करूँ, चुकी मैं अकेले तो ये काम नहीं कर सकता था मुझे लोगों का साथ चाहिए था और वो मुझे नहीं मिला. एक बार मैंने अपनी पत्नी श्रीमती पूजा जाटव से महिलाओ के बारे में अपनी सोच रखी, अब मैं हम हो गए थे यानि अब इस मिशन के लिए दो लोग काम करने को तैयार थे. लेकिन हमने सोचा कि हम अपने साथ और महिलाओं को जोड़ेंगे और फिर हमने एक महिला मण्डल बनाने कि सोची, अब होता किया है कि हमारे समाज में एक अजीब सी परेशानी है हम किसी से भी जुड़ने के लिए कहते तो महिलाओं या फिर उनके पतियों के द्वारा एक ही बात पूंछी जाति कि फायदा किया होगा. सच तो ये है कि जिसके ऊपर जब भी कोई आफत आती है तभी उसे लगता है कि कुछ करना चाहिए. अमूमन लोग लालची हो गये है वे हर चीज में पैसा देखते हैं, लेकिन 2 अक्टूबर 2018 को बड़ी मेहनत के बाद 9 – 10 महिलाओं ने एक संस्था कि शुरुआत कि और छोटे मोटे कार्यक्रम करने लगीं और हिस्सा लेने लगीं. अब यह संख्या 30 के पार हो गई है (लिखते समय) और अब महिलाएं खुद व् खुद जुड़ रहीं है और मीटिंग / सेमिनारों में हिस्सा ले रहीं है. मेरा सपना था के समाज के लिए कुछ करें खास कर महिलाओं के लिए, मेरे सपने को और ऊंचाई दी मेरे सहयोगी संतोष कुमार जी, राजेश कुमार जी, विजय कुमार जी ने, इस संस्था का नाम भी संतोष कुमार जी ने ही सुझाया था और फिर महिलाओं में से एक ने इसका प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा और इसे रजिस्ट्रार के द्वारा पंजीकृत कर दिया गया.
साथियों हम तो बस इन सभी महिलायों के पीछे है जब भी ये हम सभी को आदेश करेंगी हम उसका पालन करेंगे येसा हमने संकल्प किया है. कोई भी चीज बिना अर्थ के व्यर्थ है हर मिशन में सोच, काम, लगन आदि के अलाबा भी एक और चीज कि आबश्यकता पड़ती है और बो है आर्थिक मदद. आज "सहेली महिला मण्डल" को आर्थिक सहायता कि बहुत जरुरत है इनकी सहायता करें और सामाजिक कार्यों में ये जो नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क क़ानूनी सहायता, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, महिलाओं / बलिकायों पर हो रहे अत्याचारों कि लड़ाई लड़ना आदि कार्य कर रहे है वास्ताव में ये सामाजिक उत्थान के लिए अति अवश्यक हैं.
साथियों हम तो बस इन सभी महिलायों के पीछे है जब भी ये हम सभी को आदेश करेंगी हम उसका पालन करेंगे येसा हमने संकल्प किया है. कोई भी चीज बिना अर्थ के व्यर्थ है हर मिशन में सोच, काम, लगन आदि के अलाबा भी एक और चीज कि आबश्यकता पड़ती है और बो है आर्थिक मदद. आज "सहेली महिला मण्डल" को आर्थिक सहायता कि बहुत जरुरत है इनकी सहायता करें और सामाजिक कार्यों में ये जो नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क क़ानूनी सहायता, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, महिलाओं / बलिकायों पर हो रहे अत्याचारों कि लड़ाई लड़ना आदि कार्य कर रहे है वास्ताव में ये सामाजिक उत्थान के लिए अति अवश्यक हैं.
आपका
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राहुल राजौरिया
राहुल राजौरिया
संस्थापक, सहेली महिला मण्डल
संस्थापक, सहेली महिला मण्डल