कन्थुवा में अंबेडकर पार्क-पुस्तकालय की आधारशिला रखी गई|
पूर्व मंत्री सोनकर ने सामाजिक न्याय का संदेश दिया|
शिवशंकर मोदनवाल | कारा(कौशाम्बी)
अंबेडकर पार्क-पुस्तकालय की आधारशिला।
कन्थुवा में भारत रत्न, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति में कन्थुवा में प्रस्तावित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क एवं सार्वजनिक पुस्तकालय की आधारशिला रखी गई। इस कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, शिक्षा और समानता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मतेश चन्द्र सोनकर थे, जबकि नायब तहसीलदार विनय सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समाजसेवी अंकित मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और सागर निषाद ने इसका संचालन किया।
मुख्य अतिथि मतेश चन्द्र सोनकर ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्षों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाबा साहेब के नारे “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को देश व समाज के लिए दिशा देने वाला मंत्र बताया। सोनकर ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया और महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए।
विशिष्ट अतिथि नायब तहसीलदार विनय सिंह ने कहा कि बाबा साहेब ने विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान बनाकर भारत को लोकतंत्र की मजबूत नींव दी। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के जीवन को संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान की प्रेरक गाथा बताया। सिंह ने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अंबेडकर ने शिक्षा को अपना हथियार बनाकर वंचित वर्गों को अधिकार दिलाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी अंकित मिश्रा ने कहा कि यह अंबेडकर पार्क और सार्वजनिक पुस्तकालय क्षेत्र के लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए शिक्षा और जागरूकता के केंद्र बनेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुस्तकालय समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य करेगा।
कार्यक्रम के अंत में सागर निषाद ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी, युवा और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग मौजूद थे। सभी ने बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने और सामाजिक समानता व भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया।