"दिल से किसी का हाथ अपने हाथो में लेकर देखो,
फिर मालूम होगा कि अनकही बातों को कैसे सुना जाता है"
"Dil se kisi ka haath apne haathon me leker dekho,
Phir maloom hoga ki ankahi baaton ko kaise suna jata hai"
"जिन्हे इश्क़ का नशा होता है महक,
उन्हें जिस्म की तलब नहीं होती"
"Jinhe ishq ka nasha hota hai mahak,,
Unhe jism ki talab nhi hoti.. "
"मेरी रूह की तलब हो तुम,
कैसे कहूं सबसे अलग हो तुम"
"Meri rooh ki talab ho tum,
Kaise kahu sabse alag ho tum…"
" ख़ामोशी का मज़ा वोई उठा सकता है,
जो फना हुआ हो किसी के प्यार में "
" Khamoshi ka maza wohi utha sakta hai
Jo fana hua ho kisi k pyar mein…"
" हर उम्र में रहती है मोहब्बत की जरूरत,
इस उम्र में क्या दिल, दिल नहीं रहता "
" Har umar me rehti hai mohabbat ki zarurat
Is umar me kya dil *dil nahi rehta..."
रह-ए-आशिक़-ए-जवाँ को कहीं बेनिशाँ न कर दे
तेरा इस चमन से जाना इसे पुर-ख़िज़ाँ न कर दे
जो बदल बदल के रस्ते मैं ये चल रहा हूँ अक्सर
कहीं बेदख़ल मुझे ख़ुद मेरा कारवाँ न कर दे
जो तेरा शबाब-ए-रंगीं मैं क़रीब आ के देखूँ
तेरी जिस्म का सुलगना मुझे आतिशां न कर दे
तेरे हुस्न की अदाएँ तेरी ज़ुल्फ़ की घटाएँ
बरबाद ये बलाएँ मेरा आशियाँ न कर दे
तेरी शबनमी लटों से जो टपक रही हैं बूंदें
मेरे शोला-ए-मोहब्बत को धुआँ धुआँ न कर दे
सर-ए-महफ़िल-ए-वफ़ा ये उसे मुस्कुरा के तकना
मुझे डर है मेरी आदत उसे बदगुमाँ न कर दे
तेरी शबनमी लटों से जो टपक रही हैं बूंदें
मेरे शोला-ए-मोहब्बत को धुआँ धुआँ न कर दे
नाज़ुक लबों को उसकी अगर एक बार देखे
कहीं तर्क-ए-बाग़-ए-गुल फिर ख़ुद बाग़बाँ न कर दे
ग़म-ए-ज़िन्दगी से दबकर कहीं बुझ चला था ये दिल
तेरी ख़्वाहिशों की बारिश इसे फिर जवाँ न कर दे
के हो जिस गली में मस्जिद कभी उस गली न जाना
तेरी बंदगी में वाइज़ हुक्म-ए-अज़ाँ न कर दे
है अदा-ए-ज़ब्त-ए-ग़म पर हमें नाज़ फिर भी हमदम
तेरे इश्क़ की हक़ीक़त मेरा दिल बयाँ न कर दे ..