Sher-o-Shayari ki purani riwayat rahi hai. Mughalon k zamane se chali aa rahi ye riwayat aaj har hindustani k dil me basi hui hai, sher-o-shayri urdu zuban ka ek bhehtreen tohfa hai, shayari ka matlab dimagi-aiyyashi nahi, balki roohani- khushi hai, sakoon hai..
Shayari insaan ke ehsaaso ko naam dene ka ek zariya hai, koi bhi sher apne aap me kisi ki puri zindagi ka afsana hota hai.. shayari urdu kavita ka ek sangeet roop hai.
Ek insaan alfazo k zariye apne andar chal rahe ehsaaso ko kaise dusre se waqif kara sakta hai, ye hame shayri hi seekhati hai.. Shayari me shoq rakhne wale hi ye jaante hain ke koi baat aise kis andaz me kahen, jissey wo samne wale ke dil per asar kar jaye.
“वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे,
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे,
दूर से जब इतना याद करते हैं आपको,
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे”
“उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा,
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा,
बेकरारी के आग में जो जल रहे हैं आप,
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा”
“जिस जिस ने मुहब्बत में,
अपने महबूब को खुदा कर दिया,
खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए,
उनको जुदा कर दिया”
इशरत-ए-कतरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
तुझसे किस्मत में मेरी सूरत-ए-कुफ़ल-ए-अबजद
था लिखा बात के बनते ही जुदा हो जाना
दिल हुआ कशमकशे-चारा-ए-ज़हमत में तमाम
मिट गया घिसने में इस उकदे का वा हो जाना
(ग़ालिब )
रोना उन के लिए जो तुम पर निसार हो,
उनके लिए क्या रोना जिनके आशिक हज़ार हो..
अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।
Rahat Indori
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है
ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा है
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है
अपने हाथों की लकीरों में सजा ले मुझ को,
मैं हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुझ को |
मैं जो काँटा हूँ तो चल मुझ से बचा कर दामन,
मैं हूँ गर फूल तो जूड़े में सजा ले मुझ को |
मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मा'नी,
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को |
मैं समुंदर भी हूँ मोती भी हूँ ग़ोता-ज़न भी,
कोई भी नाम मेरा ले के बुला ले मुझ को |
तू ने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी,
ख़ुद-परस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझ को |
ख़ुद को मैं बाँट न डालूँ कहीं दामन दामन,
कर दिया तू ने अगर मेरे हवाले मुझ को |
मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामाँ प्यारे,
तू दबे-पाँव कभी आ के चुरा ले मुझ को |
वो कहती है करो वादा! मेरी आँखों मे रहने का
मै कहता हूँ समुन्दर से मुझे यूँ भी मुहब्बत है
कल की बात और है मैं अब सा रहूँ या न रहूँ,
जितना जी चाहे तिरा आज सता ले मुझ को |
वो कहती है करो वादा! मुझे अपना बनाओगे
मै कहता हूँ यहाँ किस्मत पर किसका जोर चलता है
वो कहती है करो वादा! मेरे ख्वाबों मे आओगे
मै कहता हूँ तुम्हें मुझसे बिछडकर नींद आएगी?
वो कहती है करो वादा! सदा यूँ खुश रहोगे तुम
मै कहता हूँ कि फिर तुम उम्र भर बनकर रहो मेरी
वो कहती है करो वादा! नही जागोगे रातों को
मैं कहता हूँ मेरी नींदों मे फिर तुम जागती क्यों हो?
वो कहती है करो वादा! कभी कुछ ना छुपाओगे
मै कहता हूँ यह आँखे भेद सारे खोल देती है
वो कहती है करो वादा! रहोगे तुम नही तन्हा
मै कहता हूँ मुझे अब कौन अपने साथ रखेगा?
वो कहती है करो वादा!ख्याल अपना रखोगे तुम
मै कहता हूँ कि पहले क्यों मेरी आदत बिगाडी थी
वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ 'क़तील',
शर्त ये है कोई बाँहों में सँभाले मुझ को |
वो कहती है करो वादा! कभी वादा ना तोडोगे
मै कहता हूँ भला कैसे मै तुमको तोड़ सकता हूँ