“वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे,
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे,
दूर से जब इतना याद करते हैं आपको,
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे”
“उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा,
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा,
बेकरारी के आग में जो जल रहे हैं आप,
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा”
“जिस जिस ने मुहब्बत में,
अपने महबूब को खुदा कर दिया,
खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए,
उनको जुदा कर दिया”
“रिश्ता हमारा इस जहाँ मे सबसे प्यारा हो
जैसे ज़िंदगी को सांसो का सहारा हो
याद करना हमे उस पल मे
जब तुम अकेले हो और कोई ना तुम्हारा हो”
जिन्दगी मे कभी खुद को तन्हा न समझना,
साथ हूं मे तुम अपने से जुदा न समझना,
उर्म भर दोस्ती का वायदा किया है,
अगर जिन्दगी साथ न दे,
तो बे वफा न समझना!!
वह तो मोहब्बत हो गई जनाब,
वरना उम्र ही क्या थी शायरी करने की..|||
थोड़ा सा और #बिखर जाऊं मैंने यही ठानी है,
ए #जिंदगी थोड़ा रुक मैंने अभी हार कहां मानी है...|||
वह तो मोहब्बत हो गई जनाब,
वरना उम्र ही क्या थी शायरी करने की..|||
थोड़ा सा और #बिखर जाऊं मैंने यही ठानी है,
ए #जिंदगी थोड़ा रुक मैंने अभी हार कहां मानी है...|||
नुमाइश ए इश्क की होड़ लगी हैं
और हर रिश्ते में गाँठ और जोड़ लगी हैं।
चुप थे तो चल रही थी ज़िन्दगी लाज़वाब
ख़ामोशियाँ बोलने लगीं तो बवाल हो गया।
अब लफ्जों में नही मेरे लहजे में हो तुम
बडी शिद्दत से तुझे पिरोया है खुद में।
कहाँ ढूंढें तुझे, खुद को ही भूल गये हम
बस याद हो तुम मेरी साँसों में लम्हा लम्हा।
कौन समझता है चाहतों का फसाना इस दौर में
यहाँ तो लोग अपनी जरुरत को मोहब्बत कहते हैं।
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तुम्हारे खुश होने के अंदाज से लगता है
कुछ टुटा है बड़ी खामोशी से तेरे अन्दर।
माना के मुझमें ऐब की गुजांइशें बहुत
इक हुनर तुझे चाहने का भी कमाल है।
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ईश्क़ का चर्चा मेरा आम हो गया है ,
सारी मुश्क़ीलों का काम तम़ाम हो गया है।
ज़िन्दगी लगती है इक प्यारी ग़ज़ल सी,
लेकिन,
इस का हर शेर बड़ा दर्द भरा होता है।
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हिचकियाँ लेते हुए दिल की रगें टूटने लगीं,
तेरी याद ने अजीब क़हर मचा रक्खा है।
दिल की खामोशी से साँसो के ठहर जाने तक
मुझे याद आएगा वो शख्स मेरे मर जाने तक।
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उदास नज़रों में कई ख़्वाब मिलेंगें
कहीं कांटे तो कहीं गुलाब मिलेंगें,
मेरे दिल की किताब में जरा झांक कर देखो
कहीं आप, कहीं आपकी यादें मिलेंगें।