गलघोंटू (HAEMORRHAGIC SEPTICAEMIA)
गलघोंटू (HAEMORRHAGIC SEPTICAEMIA)
गलघोंटू रोग में ऐलोपैथिक एंटीबायोटिक्स के साथ होम्योपैथिक दवाइयां देने
से जल्दी लाभ होता है तथा रोगी पशु के बचने की संभावना हो जाती है।
लेकेसिस (Lachesis)
रोग की शुरूआती अवस्था में लेकेसिस दें।
आर्सेनिक (Arsenic)
यह एच. एस. रोग में काफी प्रभावशाली है तथा काफी रोगी बच सकते हैं। आर्सेनिक की पांच बूंदे हर घंटे बाद दो दिन तक दें।
मर्क्युरिस (Mercurius)
गले में काफी सूजन हो, नाक से काफी डिस्चार्ज हो तो दिन में दो बार दें।
• ब्रायोनिया (Bryonia)
जब सूजन हार्ड और अधिक हो तो ब्रायोनिया दें।
टेटेनस (TETANUS)
• हाइड्रोसाइनिक एसिड (Hydrocynic acid)
शरीर में खिंचाव, चेहरा, जबड़ा और पीठ में तनाव, सांस में तकलीफ मुंह से
झाग, पैरों में अकडन ।
• लेडम पालुस्ट्रे (Led pal)
जब घाव के कारण टेटेनस हो तो दिन में पांच बार दें।
स्ट्रिकनिन (Strychnine)
मांसपेशियों का अकड़ जाना, पैर अकड कर सीधे हो जाना, गर्दन व कमर धनुष के आकार की हो तो दिन में तीन बार तीन दिन तक दें।
क्युप्रम मेटालिकम 1000 (Cuprum Met. 1M)
मांसपेशियों के जकड़न की शुरूआती अवस्था में जब पशु पैर के झटके मारता हो, ऐंठन हो तो दिन में दो बार तीन दिन तक दें।
• बेलाडोना (Belladonna 1M )
यदि टेटेनेस ग्रस्त रोगी का मुह अकड़न से बंद हो, धनुषटकार शरीर, घूरती हुई आंखें, तेज कंपन, आंखों की पूतलियां फैली हुई हों तो हर घंटे दें।
• कॉलचिकम (Colchicum )
पशु के लगातार लेटे रहने की स्थिति में टिम्पेनी होने पर हर आधा घंटे बाद पांच बार दें।
एक्टिनोमाइकोसिस (ACTINOMYCOSIS)
• हेक्ला लावा 1000 (Hecla lava 1M)
जबड़े की बोन में या अन्य भाग की बोन में सूजन होने पर पांच बूंद दिन में एक बार बीस दिन तक दें।
• एसिड फ्लोर (Acid Flour)
एक्टिनोमाइकोसिस में बोन की सूजन के साथ घाव हो, बोन गलने लगती है, मवाद तथा ब्लड निकलता है तो दिन में दो बार दस दिन तक दें।
काली हाइड्रोआयोडिकम (Kali Hydroiodicum )
बोन में घाव के साथ डिस्चार्ज हो, वहा स्किन भी गलने लगी हो तो इस दवा। को दिन में दो बार 15 दिन तक दें।
एक्टिनोबेसिलोसिस (ACTINOBACILLOSIS)
• काली हायड्रोआयोड (Kali hydroiod)
5 बूंदे दिन में दो बार 12 दिन तक दें।
● मर्क्युरियस आयोडायट फ्लेवस (Mere lod. Flav )
गले की बायी ओर सूजन हो तो इसे दिन में चार बार एक सप्ताह तक दें।
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मर्क्युरिस आयोडायड रूबर (Merc. lod. Ruber )
गले की दायी ओर सूजन हो तो इसे दिन में चार बार एक सप्ताह
लंगड़ा बुखार (BLACK QUARTER)
हिपर सल्फ 1000 (Hepar Sulbph 1M)
जब रोगी पशु को बुखार हो, रोग ग्रस्त भाग पर अधिक सूजन हो, हाथ लगाने से तेज दर्द हो तो हर आधा घंटे बाद दस बार दें।
● रस टॉक्स 1000 (Rhus Tox 1M)
खासतौर से बारिश के दिनों में जब रोग हो, रोग ग्रस्त भाग की सूजन को दबाने से कागज जैसी आवाज हो तो रस टॉक्स दिन में दो बार तीन दिन तक दें।
खुरपका मुंहपका रोग (FOOT & MOUTH DISEASE)
आर्सेनिकम (Arsenicum)
रोग की शुरूआती अवस्था में 5 बूंदें दिन में तीन बार तीन दिन तक दें।
मर्क्युरियस सॉलुबिलिस (Mercurius Solubilis)
जब रोगी पशु के मुह में छाले फूट कर घाव या अल्सर जैसे बन जाते हो, मुंह से चपचप की आवाज आती हो, ब्लड मिला हुआ डिस्चार्ज निकलता हो तो हर चार घंटे बाद पांच दिन तक दें।
रस टॉक्स (Rhus Ttox)
जब पैरों के घाव व सूजन के कारण चलने में दर्द हो, मुंह में सूजन व दर्द हो तो दिन में चार बार पांच दिन तक दें।
नेट्रम म्युरिएटिकम (Natrum Muriaticum)
रोगी पशु के मुह से लगातार लार गिरने, पूरी मात्रा में पानी नहीं पीने, फीवर से जब डिहाइड्रेशन हो तो इस दवा को दिन में चार बार चार दिन तक दें।
फेरम फॉस (Ferrum Phos)
जब रोगी पशु शारीरिक रूप से कमजोर हो गया हो तो इसे नेट्रम म्यूर के साथ एक के बाद दूसरी दें। इसे हर चार घंटे रोगी ठीक होने तक दें।
बोरेक्स (Borax)
मुंह में छाले हो तो मर्क सॉल, आर्सेनिकम के साथ दिन में चार बार दें। ऊपर वर्णित छः दवाइयों के मिक्चर को दिन में पांच दिन तक देने से भी
काफी लाभ होता है।
• पांचों फॉस + अल्फा अल्फा (Five Phos + Alfa Alfa) जब रोगों के लक्षण खत्म हो जाए तो पशु की शारीरिक दुर्बलता दूर के लिए इस मिक्चर को दिन में दो बार दस दिन तक दें।
पशुमाता रोग (COW POX)
वेरिओलिनम + वैक्सीनिनम (Variolinum+Vaccininum)
ये पशुमाता रोग में काफी उपयोगी दवाए हैं। इस मिक्चर को दिन में एक बार तीन दिन तक दें। इसे रोग की रोकथाम हेतु भी दिया जाता है। वेरिओलिनम की एक डोज तीन महिने देने से रोग बचाव होता है।
काली ब्रायक्रोमिकम (Kali Bichromium)
जब रोग के छाले (pustules) बड़े हो लेकिन पीला डिस्चार्ज कम हो तो इसे दिन में दो बार पांच दिन तक दें।
एंटिमोनियम क्रुडम (Antimonium Crudum) छाले (Vesicles) हल्के लाल हो तो दिन में एक बार तीन दिन तक दें।
क्युप्रम ऐसेटिकम (Cuprum Aceticum)
जब स्किन पर छालों के साथ मांसपेशियों में ऐंठन (spasms) हो, दस्त भी
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हो सकती है ऐसे में इसे दिन में तीन बार तीन दिन तक दें। ● रानुनकुलस बल्बोसस (Ranunculus Bulbosus)
जब पॉक्स के छाले अडर (udder) पर अधिक हो तो इस दवा को दिन में
तीन बार पांच दिन तक दें।
अढैया बुखार (EPHEMERAL FEVER )
एकोनाइट (Aconitum)
रोग की शुरूआती अवस्था में जब हल्का बुखार हो तो हर आधा घंटे बाद पांच बार दें।
ब्रायोनिया (Bryonia)
सांस तेज चले, हार्ट रेट अधिक हो तो हर दो घंटे बाद पांच बार दें।
● आर्सेनिक 1000 (Arsenicum 1M)
यदि आखों व नाक से डिस्चार्ज हो, सास तेज चलती हो तो दिन में चार बार तीन दिन तक दें।
• नक्सवोमिका 1000 (Nuxvomica 1M )
जब पशु चारा-पानी नहीं ले रहा हो, जुगाली नहीं कर रहा हो तो दिन में एक बार सप्ताह भर तक दें।
● स्ट्रिकनिन 6 (Strychnine 6 )
यह मांसपेशियों की ऐंठन, अकड़न, कंपकंपाहट रोकता है। दिन में तीन बार तीन दिन तक दें।
• कुप्रम मेटालिकम 1000
(Cuprm Met. 1M)
मांसपेशियों की ऐंठन के साथ नर्वस सिस्टम के लक्षण हो तो दिन में एक बार तीन दिन तक दें।