"Fall in love with process and the results will come".
"Fall in love with process and the results will come".
कल्यानिका
यह कहानी शुरू होती है, एक खुशहाल गांव से जिस गांव में एक अमीर जमीदार रहता है ,जिसके दो बेटे और एक बेटी हैं सबसे बड़ा बेटा शहर में वकालत की पढ़ाई कर रहा होता है, और दूसरा सबसे छोटा बेटा 5वीं कक्षा में पढ़ता है, और जो बेटी हैं कल्यानिका बहुत ही खूबसूरत , होनहार और होशियार, तेज दिमाग वाली लड़की जो अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करके अभी लगभग 18 वर्ष की हो गई है,कोई भी काम हो बड़े ही समझदारी से करती थी, घर में सब उसी से सलाह मांगा करते थे चाहे जो भी काम हो ।
एक रात उसे सपना आता है कि, उसके हाथों को किसी ने बड़े ही प्यार से थाम रखा है मानो सारा जीवन उसी पर नौचावर करता हो, उसकी आंखे किसी प्यारे मृग की तरह नजर आ रही थी, चाहकर भी वह उसे अनदेखा नहीं कर सकती थी ।
सबेरा तो हुआ पर यादे सिर्फ सपनों वाली, उसकी आंखे उसके दिमाग में किसी पोस्टर की तरह छप गई हो, वह उन यादों के साथ एक अजीब सी खुशी के साथ जी रही थी, जिसका उसको अता पता नहीं था जिसको प्यार भी कह सकते है लेकिन किस तरह का कुछ और ही समझ आ रहा था, और न ही सच्चाई नज़र आ रही थी
दिल में ख़ुशी तो थी पर वजह बहुत विचित्र है।
फिर कुछ वक्त बाद उसके घर शादी होती है, उसके बुआ के बड़े बेटे की सब कार्यक्रम में व्यस्त रहते है, दिसंबर का महीना होता है।
वह भी अपनी सहेलियों के साथ शादी के कुछ कामो में हाथ बटा रही है, बच्चों के साथ खेल भी रही है यहां बैठी लड़कियाँ आपस में बातें कर रही थी, कि तेरी शादी यहाँ होगी तेरी वहां होगी तुझको ऐसा लड़का मिलेगा तुझे ऐसा मिलेगा…. फिर सभी हंसने लगती है,
तभी एक बूढ़ी दादी बोलती है कि जब तुम लोग ससुराल जाउगी तो पता चलेगा, सास जब तुम्हारी चाल निकालेगी फिर खिखियाते रहना सब लड़कियों का मुंह लाल हो जाता है ,फिर वह लोग दूसरी बूढ़ी दादी से पूछती है कि सब सास ऐसे ही होते हैं क्या? तो वह जवाब देती है कि अगर तुम्हारी मति न मारी गई हो और वह इतना कह कर वहा से चली जाती है उधर बेचारी लड़कियाँ सहम जाती है और कहती हैं कि कितने बेकार लोग हैं, फिर कल्यानिका से पूछते हैं, सभी को वह हंसकर जवाब देती है, कि अभी के जमाने में पहले दहेज दो फिर लड़की की विदाई होगी अगर लड़की के घर वाले दहेज और भुगतान न करें तो हम रिश्ता तोड़ देंगे या फिर लड़की के साथ अनावश्यक अत्याचार करते हैं, आज कल के लड़के वाले के परिवार लोग। फिर एक सहेली बोलती है कि लेकिन तेरे भैया तो अच्छे हैं और उनके मम्मी पापा भी तो बहुत अच्छे हैं फिर?
कल्यानिका कहती है, वो तो अलग बात है कि वे इतने अच्छे हैं पर यहां अच्छे होने की वजह तो कोई नहीं जानता न।
फिर कुछ देर बाद शाम को बारात रवाना हो जाती है। वह और उसकी सारी सहेलियां भी बारात जाती हैं, दो गांव पार करके शादी वाले घर पहुंच जाते है, फिर आगे का कार्यक्रम होता है ।
अगली सुबह कल्यानिका और उसकी सहेलियां दुलहन के बहनों के साथ उसी गांव में घूमने निकलते हैं, खेत खलिहान के बीच से सूरज अपनी खूबसूरती उजागर कर रहा होता है। दुलहन की बहनें बताती हैं कि हमारे गांव में एक नदी है जिसका पानी ठंढियों में भी बहोत गर्म रहता है, और उसके किनारे पर एक बड़ी सी मंदिर है, जहां पर हर चार वर्ष (लीप ईयर) में मेला लगता है, फरवरी के महीने में जो चार दिनों तक चलता है।
थोड़े देर तक चलने के बाद वे लोग वहां पर पहुंच जाते है,
नदी के आस पास चारो तरफ कोहरा छाया होता है, कुछ लोग पेड़ के नीचे आग जलाकर हाथ सेंक रहे होते हैं, वे लोग नदी के करीब चले जाते है, जहां पर सीढियां होती है नदी के पानी तक जाने के लिए, वहीं पर पहली सीढ़ी में एक लड़का बैठा होता है जो कुछ फटे किताबों के कागजों को व्यवस्थित कर रहा है, वे लोग पानी के पास जाकर उसमे हाथ भिगोने लगते है,उन्ही में से एक लड़की कहती है ’अरे! सच में देखो इतने ठंड में भी कितना गर्म पानी है ’ ,तभी कल्यानिका कहती है कि रुको मैं एक कागज़ मांग कर लाती हूं, फिर कागज़ का नाव बनाकर तैराएंगे।
वह उस लड़के के पास जाती है जो पहली सीढ़ी पर बैठा हुआ कागज़ समेट रहा है, कल्यानिका उसे कुछ कह पाती कि वह लड़का उसकी ओर देखता है, उसे देखते ही कल्यानिका भूल जाती है कि वह उसके पास क्यों आई है।
वह उसके पास बैठ जाती है और उस लड़के से पूछती है, क्या तुम मुझे जानते हो? वह मुस्कुराते हुए बोलता है, मैं तो शायद आपको पहली बार इस गांव में देख रहा हूं। कहां से आए हो आप…?
उसके कुछ पूछने से पहले ही कल्यानिका कहती हैं, पर मैं तुम्हे जानती हूं, वह पूछता है कैसे? कल्यानिका कहती हैं तुम्हारी आंखें…. और कुछ कहती कि उसकी आंखो में वह खो जाती है।
हवा के झोंको से सारे कागज़ यहां वहां उड़ने लगते है, तो वह दोनो लोग दौड़ दौड़ कर कागज़ पकड़ने लगते है, सब कुछ मानो धीरे धीरे (स्लो मोशन) में चल रहा हो ,एक कागज नदी ओर जा रहा होता है कल्यानिका उसके पीछे भागती है,तभी उसका हाथ कोई पकड़ लेता है और जोर से आवाज सुनाई देती है कल्यानिका…. वह होश में आती हैं तो देखती है, वह और वो लड़का वहीं पर बैठे होते हैं, उसकी एक सहेली उसका हाथ पकड़ी होती है, तभी कोई बोलती है ‘कागज लाना था मौतरमा! काग़ज़ वाले को नहीं ’ हंसते हुए उसे वहां से ले जाते हैं, वह उससे उसका नाम तक नहीं पूछ पाती ,कुछ दूर जाकर वह मुड़ कर देखती है, और जोर से चिल्ला कर बोलती है तुम्हारा नाम क्या है? वह लड़का कुछ कहता है पर कल्यानिका सुन नहीं पाती और वे लोग वहां से चले जाते है। शादी वाले घर विदाई समारोह पूरा होता है, वहां से बाराती नई नवेली दुल्हन को अपने घर ले आते हैं ।
फिर कुछ दिनों बाद भी कल्यानिका को उस लड़के की याद सता रही होती हैं, तो वह अपने नई भाभी के पास जाकर बैठ जाती है
वे लोग चावल छांट रहे होते हैं, कल्यानिका वहां पे रखे चावलों में अपने हाथ फिराने लगती है, और कहती हैं क्यों भाभी आपके यहां की सबसे अच्छी चीज क्या है? उसकी भाभी कहती है, क्या! नदी है, खेत खलिहान है, और एक खेल का मैदान है, और क्या हो सकता है ख़ास? तभी कल्यानिका पूछती है , आपके यहां पर कोई मेला लगता है न?
भाभी:– हां तुम्हे चलना है तो बताओ ? कुछ ही दिन का समय बचा है मेले में, वो भी चार वर्ष में एक बार आता है।
कल्यानिका:– जरूर चलेंगे! आप बस हमें भूलियेगा नहीं।
फिर कुछ दिनों बाद वे लोग मेले में जाते हैं, कल्यानिका और उसकी सहेलियां भी रहती हैं, वो सभी झूले झूलते हैं, रेलगाड़ी में घूमते हैं, गुब्बारे फोड़ते है, खूब मस्ती मजाक करते हैं, तभी कल्यानिका की नजर एक किताबों की दुकान पर पड़ती है, वहां पर वही लड़का होता है जिसे कुछ महीनो पहले नदी के पास देखा था, कल्यानिका
उसके पास जाती है तो वह लड़का भी उसे देखते ही पहचान जाता है, फिर वह लड़का कल्यानिका से कहता है, बताइए आपको कौन सी पुस्तक चाहिए?
कल्यानिका:– मुझे तो डायरी चाहिए क्या आपके पास मिलेगी?
वहीं दुकान पर उस लड़के के भईया भी होते है, वो कहते हैं माफ कीजिएगा पर हमारे पास तो सिर्फ़ पुस्तकें हैं, आप कोई भी अपने पसंद की पुस्तक ले जा सकतीं है।
कल्यानिका:– कोई बात नहीं
लड़का:– हैं न! मैं अभी लेकर आया आप मुझे 5 मिनट का समय दो
वह दुकान से झटपट भाग कर अपने घर जाता है उसके पास अपनी एक डायरी होती है, वह उसे ही लेकर आ जाता है, और उसे कल्यानिका को दे देता है।
कल्यानिका:– पर यह तो खाली है, इसमें कुछ लिखा हुआ नहीं है?
लड़का:– हैरान नज़रों से उसकी ओर देखता है।
कल्यानिका:– उसके करीब जाती है और उसके कानों मे धीरे से कहती हैं, मुझे इसमें तुम्हारे शब्द चाहिए क्या तुम मुझे अपने शब्द दोगे?
लड़का:– मुस्कुराते हुए धीरे लहज़े से कहता है, आपको मेरे शब्द चाहिए? मैं आपको अपने एहसास लिखकर दे सकता हूं।
कल्यानिका:– सच में!
फिर कहती हैं मैंने सुना है कि यहां की शाम बढ़ी खुबसूरत होती है,
लड़का:– हां आपको देखना है क्या? आज की शाम शायद और भी खुबसूरत होगी?
कल्यानिका:– चलो मैं तो अभी तैयार हूं
फिर लड़का अपने भईया से कहता है, भईया मैं आता हूं कुछ देर से आप रुकना ।
कल्यानिका अपने सहेलियों से कहती हैं मैं अभी आती हूं, किसी से मत कहना, कहा गई हूं मैं।
फिर वह लड़का उसे मंदिर के दूसरी ओर पहाड़ की तरफ ले जाता है, वह दोनो भागते हुए ऊपर पहुंच जाते हैं, वहां से पुरा गांव दिख रहा होता है और ढलते हुऐ सूरज की खूबसूरती मानो जन्नत सा लग रहा हो।
वो दोनों एक बड़े से पत्थर पर बैठ जाते हैं।
कल्यानिका:– वहां नीचे देखो कितनी चहल पहल है, लोग कितने खुश हैं ।
लड़का:– हां और मैं यहां बिना चहल पहल के बहुत खुश हूं।
कल्यानिका:– और मैं भी तुम्हारे साथ।
लड़का:– मुझे नहीं लगता कि आप यहां सिर्फ मेला घूमने आए हैं?
कल्यानिका:– पहले तो तुम मुझे आप मत कहो । वैसे मैं यहां एक पहेली सुलझाने आई हुं।
लड़का:– और क्या है वो पहेली मैं जान सकता हूं?
कल्यानिका:– तुम मेरी आंखों में उस पहेली को खोज सकते हो।
लड़का:– उसके ओर कुछ देर तक देखता है, और कहता है इसमें तो सिर्फ़ मैं नज़र आ रहा हुं, कही वो पहेली मैं तो नहीं जिसे तुम अभी सुलझा रही हो?
कल्यानिका:– मुस्कुराते हुए…अब तो सुलझ गई मेरी पहेली ।
लड़का:– मैं इस पहेली का जवाब जानना चाहता हूं
कल्यानिका:– सवाल तुम खुद ही हो, मुझसे जवाब मत मांगो।
लड़का:– तुम्हारी आंखें, तुम्हारी खुशी मुझे साफ साफ बता रही है।
कल्यानिका:– तो क्या बता रही है मेरी आंखें और मेरी खुशी?
लड़का:– तुम्हारे खुश होने की वजह! जिसे शायद तुम अपनी आंखों से देख रही हो,
जरूरी नहीं मैं गलत भी हो सकता हूं।
कल्यानिका:– और शायद सही भी हो सकते हो।
लड़का:– क्या मैं तुम्हारा नाम जान सकता हूं?
कल्यानिका:– क्यों नहीं! कल्यानिका ।
लड़का:– मैं अभिसार !
कल्यानिका:– तुम्हारा अभिसार नाम किसने रखा है?
अभिसार:– मेरे भईया ने रखा है।
कल्यानिका:– तुम्हारे मम्मी पापा कहा है?
अभिसार:– जब मैं छोटा था तभी मेरे मम्मी पापा गुजर गए, वो मुझे देख रहे होंगे, कहीं छिपकर इस खाली आसमान से।
कल्यानिका:– तुम अपने भईया से बहुत प्यार करते हो न?
अभिसार:– हां! पर मैं बहुत का अंदाजा नहीं लगा सकता।
कल्यानिका:– पता नहीं क्यों? पर मुझे तुम्हारे साथ एक अजीब सी खुशी मिल रही हैं, और यह भी नहीं पता कि कब तक रहेगी?
अभिसार:– यह सब तो एक पल है, जो कभी न कभी गुजर जायेंगे।
अच्छा ये बताओ तुम्हारा सपना क्या है? अपने ज़िंदगी में ऐसा क्या चाहती हो, जिसे करके तुम्हे हमेशा खुशी मिलती रहे?
कल्यानिका:– मैं डॉक्टर बनना चाहती हुं, जो भी मरीज या जरूरतमंद, मेरे पास आए उन लोगों की परेशानियां, तकलीफों को दूर करके मुझे बहुत सुकून मिलेगा। और तुम्हारा सपना क्या है?
अभिसार:– मैं चाहता हूं कि किताबों में मेरा नाम लिखा हो।
कल्यानिका:– बहुत दिलचस्प सपना है तुम्हारा, एक दिन जरूर पूरा होगा।
सूरज ढल गया है अब लगता है, मुझे जाना होगा बहुत देर हो गई है
और कल्यानिका वहां से उठ कर जाने लगती है, तभी अभिसार कहता है, मैने कहीं सुना था, किसी से दो बार इत्तेफ़ाक से मुलाकात हो तो तीसरी बार भी जरूर मिलते हैं।
कल्यानिका:– क्यों नहीं!
अभिसार:– इंतज़ार रहेगा।
दो साल बाद फिर कल्यानिका के घर एक रिश्ता आता है, तभी कल्यानिका अपने मां से पूछती हैं, अब किसके बुरे दिन शुरू होने वाले है? उसकी मां कहतीं हैं, चुप पागल रिश्ता तेरे लिए है, अब मेरी बेटी ससुराल जायेगी । कल्यानिका के होश उड़ जाते हैं, उसे ज़रा भी अंदाजा नहीं होता कि घर वाले उसकी शादी करने वाले हैं। वह कहती हैं, मां मुझे यह शादी नहीं करनी है। उसकी मां कहती हैं, बेटा क्यों नहीं करनी है शादी, तेरे अच्छे भविष्य के लिए है, लड़का किसी बड़े कॉलेज में प्रोफेसर है अच्छा घर बार, खानदान है। एक बार तेरी शादी हो जाए फिर तेरे को सब वहीं का अच्छा लगने लगेगा शायद घर की कभी याद भी न आए। और उसकी मां के आंखो में आंसु आ जाते हैं। कल्यानिका कहती है, ऐसा कुछ नहीं होगा मां आप अपने आंसु मत बहाओ। वह अपने घर वालों को बहुत समझाती है कि मुझे अभी शादी नहीं करनी है लेकिन उसकी बात कोई नहीं सुनना चाहता था।
सभी घर की साफ सफाई, सजावट करने में लग जाते हैं, कल लड़के वाले कल्यानिका को देखने आ रहें हैं। कल्यानिका चुपके से वहां से भाग जाती है अभिसार के पास, लेकिन अब वह यहां पर नहीं रहता है, वह उसके बारे में वहां हर किसी से पूछती हैं, पर किसी को पता नहीं होता। फिर वह मंदिर जाती हैं और नदी के किनारे उदास हो कर बैठ जाती है, फिर कुछ देर बाद वहां पे मंदिर के पुजारी आते हैं, और
कल्यानिका से पूछते है क्या हुआ बेटी इतनी हताश होकर क्यों बैठी हो?
तभी अचानक से उसे याद आता है कि अभिसार मंदिर भी आता था, वह उनसे पूछती हैं, क्या आप किसी अभिसार नाम के लड़के को जानते हैं,जो किताबों का काम करता था शायद?
पुजारी कहते हैं, अभिसार उसे कैसे भूल जाऊंगा बड़ा ही होनहार बालक था, लेकिन 7 महीने पहले ही वह और उसका भाई यहां से कही चले गए है। मुझे उनके बारे में नहीं पता कि वे लोग कहां गये होंगे।
फिर कल्यानिका वहां से घर वापस आ जाती है, अगले दिन लड़के वाले आते हैं, दोनों परिवार आपस में बात कर रहे होते हैं, तभी कल्यानिका कहती हैं मुझे लड़के से अकेले में बात करनी है, तो वह दोनों बाहर आ जाते हैं। फिर वह उस लड़के से पूछती हैं, उसका नाम निश्चय होता है,
कल्यानिका:– क्या आप मेरे लिए अपनी जान दे सकते हैं?
निश्चय:– आपकी खूबसूरती देख कर हम तो पहले ही मर गए ।
कल्यानिका:– मुझे आपसे शादी नहीं करनी है।
निश्चय:– कोई बात नहीं मत करो पर हम तो आप से शादी कर सकते हैं न।
कल्यानिका:– मुझे कोई और पसंद है।
निश्चय:– उसे भी अपने शादी में बुला लेंगे क्या दिक्कत है?
कल्यानिका:– गुस्साते हुए! आप तो प्रोफेसर है न फिर भी मेरी बातें आपको समझ क्यों नहीं आ रही है, मैं किसी और से प्यार करती हूं, उसके अलावा मैं किसे से शादी नहीं कर सकती चाहे मुझे अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े।
निश्चय:– तुम्हारे जान का तो पता नहीं, पर तुमने मेरी जान जरूर ले ही है।
फिर वह दोनों वापस आते हैं तभी घर वाले पुछते है क्या फैसला लिया तुम दोनों ने, तब निश्चय कहता है, मुझे कल्यानिका पसंद है मेरी तरफ से हां है। और बेटी तुम्हारा क्या फैसला है,तभी कल्यानिका वहां से चुप चाप चले जाती है। तो उसके पापा कहते हैं, शर्मा गई बिटिया रानी। कल्यानिका छत में जाकर रोने लगती है, और सोच में पड़ जाती है क्या करें और क्या न करें?
फिर कुछ समय बाद लड़के वाले वहां से जाने लगते हैं, तभी निश्चय कहता है मुझे एक बार और कल्यानिका से मिलना है, मैं अभी आता हूं, तो उसकी मां कहती हैं, शादी हुई नहीं अभी बहु के बिना रह नहीं पा रहा। वह खोजते हुए छत में जाकर देखता है, कल्यानिका वहां पर रो रही होती है, वह चुपके से एक चिठ्ठी उसकी ओर फेंकता है, और वहां से निकल जाता है।
फिर एक दिन बाद उसके पापा आते हैं और कहते हैं, शादी की तारीख तय हो गई है , 17 को बरात आएगी और 18 को बिटिया रानी यहां से विदा हो जायेगी।
शादी वाला दिन आता है, और कुछ ही देर में बरात भी आने वाली है, घर चारो ओर रोशनी से जगमगा रहा है, सभी लोग बहुत खुश हैं और नाच गाना भी हो रहा होता है, फिर कुछ देर बाद बरात आ जाती है, जयमाला का वक्त हो चला है, पर अभी तक दुल्हन नहीं आई । उसके मम्मी पापा को पता चलता है कि कल्यानिका घर छोड़ कर कहीं भाग गई है, उसके कमरे में पहुंचते हैं तो एक कागज़ मिलता है जिसमे लिखा होता है, मुझे माफ कर देना मेरे प्यारे मम्मी पापा, मुझे अभी शादी नहीं करनी है,क्योंकि मुझे अभी अपने सपनों को पूरा करना, मैं बेफिक्र होकर अपनी जिंदगी जीना चाहती हुं, आजादी से इस दुनिया में उड़ना चाहती हुं। कृपया करके आप लोग मुझे मत ढूंढना, मै जहां भी रहूंगी खुश रहूंगी, मेरा प्यार हमेशा आप लोगों के साथ है।वहां सभी को दुलहन के भाग जाने की खबर लग जाती है।और बरात भी वापस हो जाती है।
फिर निश्चय भी अपने कॉलेज चला जाता है जो शहर में होता है, फिर उसी दिन शाम को वह किसी के घर जाता है, तो वहां पर एक लड़की खिड़की खोलती हैं और हैं किससे मिलना है आपको? निश्चय कहता है मुझे कल्यानिका से मिलना है। वह उसे खिड़की से देखती है और तुरंत भाग कर आती है, और बोलती है क्या वह चिट्ठी आपने फेंकी थी? निश्चय कहता है मैं यह सब काम नही करता हूं।
और कल्यानिका को पता चल जाता है, तो वह निश्चय को अपनी पूरी कहानी बताती है। फिर वह दोनों अभिसार को खोजने निकल जाते हैं, 2 महीने तक हर जगह ढूंढते हैं, पर कहीं अभिसार का कुछ पता नहीं चलता है। कल्यानिका निश्चय से कहती है, आप इतना सब मेरे लिए क्यों कर रहे हैं? निश्चय हंसते हुए कहता है, तुम अगर अपनी जान दे दी तो मैं तुम्हारी खूबसूरती कैसे देखूंगा? पागल लड़की ।
फिर वह कहता है अब क्या करोगी घर जाओगी क्या?
कल्यानिका:– मैं अब अपना चेहरा भी वहां कैसे दिखा सकती हुं, मैं घर नहीं जाऊंगी।
निश्चय:–मैंने सुना था तुमने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई बहुत अच्छे अंको से उत्तीर्ण (पास) की हो। क्यों न आगे की पढ़ाई यहां पूरी कर लो?
कल्यानिका बताती है कि उसे क्या करना है फिर निश्चय उसका दाखिला अच्छे से मेडिकल साइंस कॉलेज में करवा देता है।
और कहता है फीस की चिंता मत करना मैं सब करवा दिया हूं, निश्चिंत होकर अपनी पढ़ाई करना और कुछ जरूरत हो तो मुझे याद कर लेना।
फिर कल्यानिका 5 साल कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बन जाती है, उसके कई नए दोस्त भी बन जाते हैं, कई लोगों का उपहार आता है उसमें से एक निश्चय का भी होता है, वह उसे ही सबसे पहले खोलती हैं ,तो देखती है इसमें तो एक किताब है और उसे पढ़ने लग जाती है।
यह कहानी शुरू होती है एक लड़के से जो की मैं हूं ,मेरा एक भाई और एक घर है इस गांव में जो कि बहुत खुबसूरत है । मेरी ज़िंदगी हमेशा की तरह सामान्य चल ही रही थी, मैं हमेशा की तरह चित्रकारी करता, तस्वीरें बनाता और उन्हें नदी के किनारे सुखाने ले जाता, पर एक दिन मैने एक अप्सरा को देख लिया और मेरी ज़िंदगी सामान्य से शानदार हो गई, उसने मेरे पास आकर कहा, क्या तुम मुझे जानते हो? मैने तो वहीं पर अपना होश खो दिया सब कुछ धीरे धीरे चलने लगा मुझे उसकी आंखें और मुस्कुराहट ही नजर आ रही थी, और फिर वह किसी झटके की तरह वहां से चले गई। उसका चेहरा मेरी आंखों मे मानो किसी तस्वीर के जैसे छप गई हो, मैं आंखे बंद करूं तो वह नजर आए और आंखें खोलूं तो भी वही नजर आए।
फिर मेरे गांव में मेला लगता है, मेरी भी दुकान लगी थी उस मेले में तस्वीरों की, मैं और मेरा भाई थे वहां पर, जिस अप्सरा की तस्वीर मेरे आंखों में बसी हुई थी, अचानक से वह अब मेरे ठीक नज़रों के सामने है, और वह मेरे ओर आकार मुझसे कहती हैं, क्या आपके पास हर प्रकार की तस्वीरे है? मैने कहा आपको जो पसंद आए वो ले जा सकते हैं। तो वह कहती हैं, मुझे बहुत ख़ास तस्वीर चाहिए। मैने पूछा उससे आपको किसकी तस्वीर चाहिए? वह लड़की चुपके से मेरे कानों में कहती हैं, मुझे आपकी तस्वीर चाहिए क्या आप मुझे देंगे? न चाहते हुए भी फिर मैने अपना होश खो दिया सब कुछ धीरे धीरे चलने लगा, मैं कुछ देर बाद फिर से होश में आता हूं तो वह लड़की अभी भी वहीं पर होती है, तो मैं उससे कहता हूं आप मुझे कुछ दिनों का वक्त दो मैं आपको जरूर आपकी चीज दे दूंगा। वह कहती हैं मुझे इंतेजार रहेगा, फिर मैं उसे अपने गांव के बारे में बताता हूं, और एक जगह के बारे में बताता हूं जहां से हम पूरा गांव देख सकते हैं। वह कहती हैं मुझे अभी देखना है, मैं उसे मंदिर के पीछे वाले पहाड़ पर ले जाता हूं, वहां पर ढलते हुऐ सुरज को देखना किसी जन्नत से कम नहीं था, फिर हम दोनों एक पत्थर पर बैठ जाते हैं, और ढेर सारी बातें करते हैं, मैं उससे उसका नाम पूछता हूं तो वह अपना नाम बताती है, और फिर मैं होश खो देता हूं उसका नाम उसकी तरह अप्सरा जैसा था। फिर वह मेरा नाम पूछती हैं, मैं उसे अपना नाम बताता हूं, ‘लेकिन अपनी कहानी में मैं यह सब आपको नहीं बता सकता’ वह मेरे सपनों के बारे मे जानना चाहती है, मैं उसे बताता हूं कि मुझे तस्वीरें बनाना कितना पसंद है, और उससे कहता हुं कि तुम्हारा चेहरा मेरी आंखों में किसी तस्वीर की तरह छप गया है। मैं उससे उसके सपनों के बारे में पूछता हूं, तो वह कहती हैं मुझे शिक्षिका (टीचर) बनना है, मैं गांव के सभी गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहती हुं,जो किसी कारण से अपनी पढ़ाई नहीं कर सकते है मैं उन्हें पढ़ाऊंगी उस लायक बनाऊंगी कि उनसे उनका हक कोई न छीन सके। उसकी बातें भी उसकी तरह अनमोल थी।
उसकी ख्याल मेरे जहन में ऐसी समा गई थी कि मैं कुछ सोचूं भी तो वही याद आए।
फिर 3 साल बाद एक दिन वह मुझे खोजते हुए आती हैं, और कहती है, मेरे घर वाले मेरी शादी तय कर दिए है, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती हुं। मैं पहले से ही उसे देख कर अपने होश खो देता हूं और उसकी बातें सुनकर अब तो मेरी नींद भी उड़ गई।
मैने उससे कहा तुम अभी घर जाओ मैं कल तुम्हारे घर तुम्हारा हाथ मांगने जरुर आऊंगा। वह तो चले गई उम्मीद लेकर पर मुझे कुछ अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होगा।
मैं अपने भाई के साथ उसके घर जाता हूं, अपने अपने जान हथेली पर रखकर, वहां इंतेजार किसी और का हो रहा था, पर हम बिना बुलाए मेहमान वहां पहुंच गए, वह हमें देखती ही भागते हुए आती हैं, फिर अपने घर वालों से हमारा परिचय कराती है, सभी लोग हमे ऐसे देख रहे थे जैसे कि हमने उनकी बेटी को अगवा कर लिया हो, कुछ देर बाद जिससे उसका रिश्ता तय होता है वह लोग आते हैं, उन्हे हमारे बारे में पता चलता है, तो वह लोग बिना कुछ कहे ही वहां से चले जाते है, अब हम और हमारी किस्मत ही रह गई है यहा पर
फिर वह अपने घर वालों को बहुत समझाती है, हम दोनों उसके पापा के कदमों में जाकर अपने प्यार की भीख मांगते हैं, और उनका दिल पता नहीं किस तरह पिघल जाता है, हमे यकीन था और वह शादी के लिए मान जाते हैं, फिर उसके पापा अपना हाथ मेरे कंधे पर रख कर अकेले में ले जाते हैं, और कहते है अगर मेरे बिटिया रानी के आंख से एक आंसू भी निकले न तो मैं तुम्हारी तस्वीर पर हार चढ़ाऊंगा यह याद रख लेना ।
मैं आज भी परेशान हुं वह उनकी धमकी थी या आशीर्वाद, फिर हमारी शादी हो जाती हैं। मैं अब अपनी किस्मत से ज्यादा अपने आप पर विश्वास करने लगा हूं, क्योंकि जिस अप्सरा ने मुझे स्वर्ग दिखाया है, उसी ने मुझे भरोसा दिलाया है, आज हम साथ है। हमारे कुछ ही मुलाकात से हमारी जिंदगी कितनी बदल गई।
और यहां पर मेरी कहानी खत्म होती है।
कल्यानिका को अपने बीते कल की पूरी याद आ जाती है, और किताब बंद करती हैं, तो देखती है उसमे लेखक का नाम अभिसार होता है, वह खुशी से उछल पड़ती है नीचे दिए हुऐ पते को लेकर निश्चय के पास जाती है और कहती हैं मुझे अभिसार मिल गया! मुझे इस पते पर जाना है, निश्चय उसे ट्रेन की टिकट दिखाते हुए कहता है चले! कल्यानिका कहती हैं, आपको इसके बारे में पता था? निश्चय कहता है, मैने कल सुबह के अखबार में उसका नाम पढ़ा बहुत बढ़ा लेखक है वो, मुझे लगा शायद वह तुम्हारा ही अभिसार हो इसलिए एक किताब उसकी तुम्हे लाकर दे दी, वैसे क्या लिखा हुआ है उस किताब मे जो तुम भागी चली आई?
कल्यानिका कहती है एक पूरी कहानी लिखी हुई है,जो की अधुरी है।
उस पते के हिसाब से वह जगह यहां से लगभग 500 कि.मी. दूर है।
वह आज शाम की ट्रेन पकड़ कर जाते हैं । रास्ते में कल्यानिका निश्चय से पूछती है कि, लड़के इतने खुदगर्ज क्यों होते हैं, कि वो अपने दिल की बात भी नहीं बता सकते? निश्चय मुस्कुराते हुए उदास होकर कहता है, सभी लोगों का तो मुझे नहीं पता पर, जो तुमसे सच में प्यार करते हैं, परवाह करते हैं, वो तुम्हे कभी खोना नहीं चाहते, किसी भी कीमत पर चाहे फिर तुम उन्हें न मिलो। कल्यानिका सोच में पड़ जाती है। फिर अगले दिन वह दोनों उसी जगह पर पहुंच जाते हैं, जो किताब में लिखी हुई थी l वहां पर वह देखते हैं कि, बुक पब्लिश कम्पनी जैसा कुछ है, वह अंदर जाते हैं, काउंटर में एक लड़की बैठी होती है जो अपना कुछ काम कर रही है, वह उस लड़की से पूछते हैं कि हमें अभिसार से मिलना है वो कहां पर मिलेंगे? वह बिना देखे ही उनसे बातें करती है, और कहती है क्या आपने अपॉइंटमेंट लिया है? वे कहते है नहीं, तो वह लड़की कहती हैं, कि आप उनसे किस कारण (पर्पस) से मिलना चाहते हैं? वे कहते है हम उसके दोस्त हैं और हमें जरूरी काम है, क्या आप कृपया करके हमें उनसे जल्दी मिलवा सकते हो? वह लड़की अपना सर उठाकर जैसे कल्यानिका को देखती है, और कहती हैं मैम आप! मुझे माफ करियेगा मैं अभी बताती हूं उन्हें कि आप उनसे मिलने आई हो, वह वहां से भागते हुए अंदर जाती हैं। कल्यानिका और निश्चय दोनों थोड़ा हैरान होते हैं, और वह भी उस लड़की के पीछे जाने लगते है, अन्दर पहुंचते ही वह देखते हैं कि चारो ओर सिर्फ कल्यानिका की तस्वीरें लगी हुई थी, और हर तस्वीर में अभिसार के हस्ताक्षर(सिग्नेचर) होते हैं।
फिर वहां पर जैसे ही अभिसार आता है, कल्यानिका उसे देखते ही रह जाती है और जाकर गले लगा लेती है, तभी निश्चय भी वहां से चला जाता है । फिर कल्यानिका अभिसार को अपनी पूरी कहानी बताती हैं, कैसे उसके घर वाले उसकी शादी करा रहे थे, कैसे वह वहां से भागी, और कैसे निश्चय ने उसकी मदद की और कैसे तुम मिले। फिर अभिसार कहता है, मुझे यकीन था तुम मुझे तीसरी बार भी जरूर मिलोगी, मेरा इंतेजार पूरा हुआ।
कल्यानिका वही सवाल अभिसार से भी पूछती हैं, जो निश्चय से रास्ते में पूछी थी, और अभिसार का भी बिलकुल वैसा ही जवाब होता है।
फिर कुछ देर सोचने के बाद अभिसार कहता है, मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हारे काबिल हुं, मुझे तो तुम्हारी बातों से प्यार है, तुम्हारी यादों से प्यार है, तुम्हारी तस्वीरों से प्यार है, पर निश्चय तुमसे हकीकत में प्यार करता है, हमारे साथ जो भी हुआ वह बचपना था, तुम हमेशा उस प्यार की तलाश कर रही थी जो तुम्हारे पास नहीं था, और जो प्यार तुम्हारे साथ था तुम उसे कभी पहचान ही नहीं पाई, तुम्हें अतीत को भुला कर असलियत को मानना पड़ेगा।
कल्यानिका सोचने लगती है, हर चीज किसी न किसी वजह से होती हैं, लेकिन आख़िरी में फैसला हमारा होता है, कि हम उस चीज की वजह तलाशे या उस चीज को स्वीकारे।
अगले दिन निश्चय के घर का दरवाजा कोई खटखटाता है, जैसे ही वह दरवाजा खोलता है, कल्यानिका कहती है, क्या तुम मेरे लिए जान दे सकते हो? निश्चय मुस्कुराते हुए कहता है,बिलकुल नहीं।
और वह दोनों अपने गांव जाकर फिर शादी कर लेते हैं।
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