A आक्षर
A a (अ) B b (ब) C c (च) D d (द) E e (ऍ) F f (फ़) G g (ग) H h (ह) I i (इ) J j (ज) K k (क) L l (ल) M m (म) N n (न) O o (ऑ) P p (प) R r (र) S s (स) T t (त) U u (उ) W w (व) Y y (य) Z z (ज़)
शब्दांश करनेवाला "r" भी है जो किसी भी स्वर की सीमा नहीं रखता है और "ऋ" रूप में उच्चारित कीया जाता है।
संयुक्ताक्षर
* "aa" ("आ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "ai" ("आइ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "au" ("आउ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "bh" ("भ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "ch" ("छ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "dh" ("ध" रूप में पढ़ा जाता है)
* "ei" ("ए" रूप में पढ़ा जाता है)
* "gh" ("घ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "ii" ("ई" रूप में पढ़ा जाता है)
* "jh" ("झ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "kh" ("ख" रूप में पढ़ा जाता है)
* "-ong" (ऑं" ध्वनि का रूप में उच्चारित जाता है)
6. क्रिया पुरुष और संख्याओं में परिवर्तनीय नहीं है, परंतु (निर्देशात्मक, आदेशात्मक, निषेधात्मक, प्रतितथ्यात्मक/कल्पनात्मक, संभावित, इच्छा का वर्णन करनेवाला) विषय के सापेक्ष कहनेवाले की अभिवृत्ति कीं वर्गों में, (वर्तमान, भूत, भविष्य) कालों में, (कर्ता, कर्म, भाव) वाच्यों में और (उचित "habitual", प्रगतिशील "continuous", पूर्ण "perfective", अचूक "perfect") पहलुओं में परिवर्तनीय है। उदाहरणतः : tun karre - तू करता है / तू करती है, kun karre - जन करता है, hans karre - वे करते हैं / वे करतीं हैं, men-nei karii - मैंने कीया, men-nei ha karii thaare - मैंने वह कीया गया है, perans perbile - चिड़ियों पड़ सकतीं हैं।
* "ph" ("फ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "sh" ("श" रूप में पढ़ा जाता है)
* "th" ("थ" रूप में पढ़ा जाता है)
* "uu" ("ऊ" रूप में पढ़ा जाता है)
B) शब्द भेद
संज्ञा ध्वनियों से समाप्त होती है जो है: -अ, -आ, -इ, -ई, -उ, -ऊ, -ल, -म, -न, -र। बहुवचन बनाने के लिए "-s" प्रत्यय जोड़े, परंतु यदि निकट संख्या या मात्रा बताने अन्य शब्द है, तो यह प्रत्यय छूट जाता है, क्योंकि मात्रा बताने अन्य शब्द ही अपना कार्य करता है।
कारक:
- (कर्ता)
-no (संबंध)
-ke (संप्रदान)
-ong (कर्म)
-nei (करण)
-de (अधिकरण)
-dou/-doro (अपदान)
-hei (संबोधन)
विशेषण अविभक्तिक है और संज्ञा के समान ध्वनियों के साथ समाप्त है। तुलनात्मक डिग्री "pul ..." अभिव्यक्ति से बना जाता है, तथा उत्तम डिग्री "sel-dou pul ..." अभिव्यक्ति से बना जाता है; जिस संज्ञा की तुलना की जाती है, अपादान कारक में होता है।
उदाहरण:
rukkha-dou pul bada - पेड़ से अधिक बड़ा
मुख्य संख्याएँ अविभक्तिक हैं: on (१), du (२), tara (३), nel (४), pam (५), ses (६), seti (७), wati (८), dogon (९), kuim (१०), gatu (१००), sahasra (१०००)। दसियों और सैकड़ों संख्याओं एक साधारण संयोजन से बनाते है। क्रमसूचक संख्या बनाने के लिए, "-tii" प्रत्यय का उपयोग किया जाना चाहिए, गुणक संख्या के लिए "-keri", "-pii"। इसके अलावा, संज्ञा का रूप में और क्रिया-विशेषण संख्याएँ हो सकते हैं।
उदाहरण:
gatu dukuim tara = १२३ (सौ तेईस); setitii (सातवां), tarakeri (तिगुना), tarapii (तिहाई)
5. व्यक्तिगत सर्वनाम:
men (मैं), tun (तू), munthaa (आप), han (वह - मनुष्य के, जंतु के और अधिप्राकृतिक सत्त्व के बारे में), ha (वह - वस्तु के बारे में), di (ख़ुद), mens (हम), ame (हम - अर्थ में: मैं और तू/तुम/आप), tume (तुम; वह "munthaa/munthaas" स्थान लेना सकता है), munthaas (आप लोग), hans (वे - मनुष्यों के, जंतुओं के और अधिप्राकृतिकों सत्त्वों के बारे में), has (वे - वस्तुओं के बारे में); स्वामिगत सर्वनाम "-'ii" प्रत्यय से या ("an", "ha", "hans" और "has" सर्वनाम के मामले में) संबंध का प्रत्यय से बनाता है। (स्वामिगत के अलावा) व्यक्तिगत सर्वनाम तिर्यक कारक लेनेवाला होता है।
उदाहरण:
रूप:
उचित वर्तमान काल: -re
उचित भूत काल: -ye
भविष्य काल: -ge
आदेश: -∅
निषेध: -me
कल्पना: -we
संभावना: -bile
इच्छा: -mako
कर्ता कृदंत: -∅
अचूक कर्म कृदंत: -ii
क्रियार्थक संज्ञा: -te
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