सत्साहित्य प्रकाशन
सत्साहित्य प्रकाशन
14 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित
14 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित
जिस घर में साहित्य नहीं... वो घर नहीं ! श्मशान है । - स्वामी विवेकानन्दजी
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ।।