छली गई मासूमियत तब,
जादूगरी सीख पाए हैं
रोए पहले बहुत बाद में ये
मसखरी सीख पाए हैं
नाच नचाता जादूगर ये
कठपुतली बन नाचा भी है
हाथ उठाना सीखा तब , जब
गहरे छपा तमाचा भी है
सीखे बहुत बाद में हमने
ये चुटकुले तमाशेबाजी
कितने दिन तो कविता का ही
अक्षर अक्षर बाँचा भी है
सर्कस ही मढ गया गले जब
तब रस्सी पर चलना सीखा
जिसने हमे निगलना चाहा
हमने वहाँ संभलना सीखा
कृष्ण सदा रहते अजेय हैं
अभिमन्यू मारे जाते हैं
माखन वंशी वाले ने भी
इसीलिए बस छलना सीखा
"न" न कह पाने की अबतक
कीमत बहुत चुकाई हमने
तब जाकर कह पाना मन
की बातें खरी सीख पाए हैं
पहली लड़ाई जीतनी है अपने आप से...
डरना नहीं किसी के भी पैरों के नाप से,
आखिर में पुण्य जीत ही जाएगा पाप से ।
गीता में कृष्ण ने कहा अर्जुन से बस यही,
पहली लड़ाई जीतनी है अपने आप से ।।
अपने-आप की किमत पता चली...
जब डर पता चला तभी ताकत पता चली,
सीने की आग, सीने की हिम्मत पता चली ।
शर्तो पर तेरे बिकने से इनकार कर दिया,
तब जाकर अपने-आप की किमत पता चली ।।
खुन पसीने की चमक है...
पत्थर की चमक है न नगिने की चमक है,
चेहरे पर सीना तानके जीने की चमक है ।
पुरखों से विरासत में हमें कुछ नहीं मिला,
जो दिख रही है खुन पसीने की चमक है ।।
आखरी हद तक गया हूँ मैं...
दुनिया समझ रही है कि चमक गया हूँ मैं,
पर दिल ये जानता है बहुत थक गया हूँ मैं ।
आसान लग रहा है यह सफर देखने पर,
दिवानगी की आखरी हद तक गया हूँ मैं ।।
घर के वास्ते...
मुश्किल थी सम्भलना ही पड़ा घर के वास्ते,
फिर घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते ।
मजबूरियों का नाम हमने शौक रख लिया,
हर शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते ।।
एक राम कहानी...
कल भोर की चिंता में रात नींद ना आनी,
रावण नहीं है मारना रोटी है कमानी ।
हम राम तो नहीं मगर ये बात भी सच है,
हर आदमी की होती है एक राम कहानी ।।
मेरा सफर अलग है...
मुझको ना रोकिये, ना ये नजराने दीजिए,
मेरा सफर अलग है, मुझे जाने दिजिए ।
ज्यादा से ज्यादा होगा यह कि हार जायेगें,
किस्मत तो हमें अपनी आजमाने दीजिए ।।
चल पड़े तो चल पड़े...
जिस रास्ते पर चल रहे उस पर है छल बड़े,
कुछ देर के लिए मेरे माथे पर बल पड़े ।
हर सोचने लगे कि यार लौट चलें क्या
फिर सोचा यार छोड़ो चल पड़े तो चल पड़े ।।
तमाशों का दौर है...
बातों का दौर है ये कयासों का दौर है,
जिंदो की अर्थियों पर, बताशों का दौर है ।
जो तृप्त उनके पास समंदर रखा मिला,
प्यासों के इर्द-गिर्द तमाशों का दौर है ।।
तेरे जैसा कोई दूसरा नहीं...
बीती है उम्र जख्म अभी उतना हरा नहीं...
उतना हरा नहीं मगर अब तक भरा नहीं...
यूँ जिदंगी में लोग मिले कितने ही मगर,
पर याद तेरे जैसा कोई दूसरा नहीं ।।
कि सच हार जाएगा...
मायूस होके द्वार से लाचार जाएगा,
इस झूठ का हर वार ही बेकार जाएगा ।
ये ठीक है कि थोड़ी देर लग रही है पर,
कैसे लगा ये तुमको कि सच हार जाएगा ।।
उसी चांद की तस्वीर बनी है...
जो याद तेरे पांव की जंजीर बनी है,
वो याद मेरे हाथ की लकीर बनी है ।
पानी जो कहीं चाँद पर ढूंढ़े नहीं मिला,
पानी पर उसी चांद की तस्वीर बनी है ।।