बहुत गयी थोड़ी रही, व्याकुल मन मत होय । धीरज सबका मित्र है, करी कमाई मत खोय ।।
संत बीज पलटे नहीं, चाहे युग बीते अनन्त ।
ऊँच नीच घर अवतरे, रहे संत को संत ।।