बढ़ती हुई उम्र को हराना है तो शौक जिंदा रखिए । दोस्त चंद रखिए मगर चुनिंदा रखिदा ।
आग लगाने वालों कहाँ खबर, रूख अगर हवाओं ने बदला तो खाक वो भी होगें ।
और आज भी सफर जारी है...
ना थके है पांव कभी,
ना ही हिम्मत हारी है ।
मैंने देखे है कई दौर यहां,
और आज भी सफर जारी है।।
नींव के पत्थर है हम, राह के के पत्थर नहीं...
हमने माना कि हम आपसे बेहतर नहीं,
पर हमारी भी महत्ता आपसे कमतर नहीं ।
हम हटे तो गिर पड़ोगे ओ गगनचुंम्बी शिखर,
नींव के पत्थर है हम, राह के के पत्थर नहीं ।।
तुम बड़े घर के हो और मैं घर का बड़ा हूँ...
बड़े सस्ते में बेची है मासूमियत चेहरे की,
कच्चे उम्र में जिम्मेदारियां ले खड़ा हूँ ।।
तुम्हें क्यूं लगता है कि हम दोनों एक जैसे है,
तुम बड़े घर के हो और मैं घर का बड़ा हूँ ।।
बुरे जमाने कभी किसी से पुछ कर नहीं आते...
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते,
इसलिए तो तुम्हें हम नजर नहीं आते ।
जिन्हें एहसास है किसी के दुःख समझने का,
उन्हीं के रोने में आँसू नजर नहीं आते ।।
खुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना,
बुरे जमाने कभी किसी से पुछ कर नहीं आते ।।
यूं ही नहीं मिलती राही को मंजिल...
यूं ही नहीं मिलती राही को मंजिल,
एक जुनून दिल में जगाना होता है ।
पुछा चिड़िया से कैसे बना आशियाना,
बोली - भरते है उड़ान बार-बार,
तिनका-तिनका उठाना होता है ।।
खोए शब्द नहीं थे...खो गई थी आवाज़े ।
शब्द कम नहीं थे कभी भी दुनिया में,
फिर भी नहीं कही जा सकी कुछ बातें ।
शब्द नहीं मिल रहे कहकर टाल दिया उन्हें,
दरअसल खोए शब्द नहीं थे !!! कहीं खो गई थी आवाज़े...
हमें झूठ सुनने की आदत नहीं है...
अगर तुमको हमसे शिकायत नहीं है,
तो फिर ये भी तय है कि मोहब्बत नहीं है ।
सुनो जो भी दिल में है सच-सच बताना...
हमें झूठ सुनने की आदत नहीं है ।।
आंसू गिरे कितने... गिना नहीं सकते !
दर्द कितना है बता नहीं सकते,
जख्म कितने है दिखा नहीं सकते ।
आँखों से समझ सको तो समझ लेना,
आंसू गिरे कितने... गिना नहीं सकते ।।
जो बे अमल है, वो बदला किसी से क्या लेगा...
दुनिया एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा,
ढलेगा जब दिन हर एक अपना रास्ता लेगा ।
कलेजा चाहिए... दुश्मन से दुश्मनी के लिए,
जो बे अमल है, वो बदला किसी से क्या लेगा ।।
जाति का शोर मचाते केवल कायर और क्रूर...
मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों और वीरों का,
धनुष छोड़ और गोत्र क्या होता है रणधीरों का ?
पातें है सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
जाति का शोर मचाते केवल कायर और क्रूर ।
जो दिल में ठानिए उसे करना भी सीखिए...
हर खौफ हर खतरे से गुजरना भी सीखिए,
जीना है गर अजीज तो मरना भी सीखिए ।
ऐसा ना हो कि ख्वाब ही रह जाय जिंदगी,
जो दिल में ठानिए उसे करना भी सीखिए ।।
नहीं चाहिए खैरात भी...
इश्क मुझसे है नहीं गर,
मत करो तुम बात भी ।
हक मुझे जो ना मिला,
नहीं चाहिए खैरात भी ।।
कि सिर्फ जाना ही नहीं, लौट कर आना भी है...
इश्क महँगा शौक है और इस पे जुर्माना भी है,
जो नशे सस्ते है उनमें एक याराना भी है ।
तुमसे मिलने जाते समय रूक गया ये सोच कर,
कि सिर्फ जाना ही नहीं है, लौट कर आना भी है ।।
जिंदगी का आनंद लेना हो तो...
सफर का आनंद लेना हो तो,
अपने साथ सामान कम रखिए ।
जिंदगी का आनंद लेना हो तो,
दिल में अरमान कम रखिए ।।
हमको तो है भरोसा मगर अपने वार पर...
दुनिया लगाये शर्त भले जीत-हार पर,
हमको तो है भरोसा मगर अपने वार पर ।
गीदड़ नजर ना आयेगा जंगल में एक भी,
निकलेगें जब भी शेर के बच्चे शिकार पर ।।
अन्याय के आगे झुक नहीं सकते...
मृत्यु का भय किसे है यारों,
जो भाग्य में लिखा है वो होगा ।
अन्याय के आगे झुक नहीं सकते,
प्राण जायेगें और क्या होगा ।।
महफिल में चल रही थी,
हमारे कत्ल की तैयारी ।
जब हम पहुँचे तो बोले,
बड़ी लम्बी उम्र है तुम्हारी ।।