भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है — जो अपने भक्तों की छोटी-सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
सुबह ब्राह्म मुहूर्त (4:00 – 6:00 AM) या सूर्योदय से पहले शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
अगर यह संभव न हो तो शाम के समय सूर्यास्त के बाद भी पूजा की जा सकती है।
स्नान करके साफ कपड़े पहनें (सफेद या हल्के रंग के)।
पूजा स्थान को स्वच्छ रखें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करें।
शिवलिंग या शिव प्रतिमा को किसी लकड़ी के आसन या ताम्बे की थाली पर स्थापित करें।
गंगाजल
बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)
चावल (अक्षत)
पुष्प (धतूरा, बिल्वपत्र, आक आदि)
दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत)
धूप, दीपक, रुद्राक्ष माला
फल व प्रसाद
ध्यान: भगवान शिव का ध्यान करें —
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत स्नान कराएं।
बिल्वपत्र अर्पण: हर पत्ते के साथ “ॐ नमः शिवाय” कहते हुए बेलपत्र चढ़ाएं।
धूप-दीप जलाना: दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
आरती:
“ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा...”
प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परिवार में बांटें।
सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध व शहद अवश्य चढ़ाएं।
रोज़ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
घर में महामृत्युंजय मंत्र का नियमित पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
अगर कोई कार्य रुक गया हो, तो रुद्राक्ष धारण करें और “ॐ हौं जूं सः” मंत्र का जप करें।
मानसिक शांति और आत्मबल की वृद्धि
आर्थिक स्थिरता व करियर में प्रगति
रोग, भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
दांपत्य और पारिवारिक जीवन में सामंजस्य
रोजाना शिव पूजा करने से जीवन में शुभ ऊर्जा और आत्मिक बल बढ़ता है।
भक्तिभाव और सच्चे मन से की गई पूजा भगवान शिव को तुरंत प्रसन्न करती है।
आप भी आज से ही घर में रोज़ाना शिव पूजा का संकल्प लें और देखें कैसे महादेव की कृपा से जीवन में परिवर्तन आता है।
लेख स्रोत: Kali Kripa Jyotish – Online Puja & Astrology Consultation Services