लेखक: काल कृपा ज्योतिष
प्रातः काल (सुबह 5:00 से 7:00 बजे तक)
चतुर्थी तिथि या शुक्ल पक्ष के बुधवार को पूजा विशेष फलदायी होती है।
गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
तांबे या पीतल का कलश
दूर्वा घास (21 पत्ते)
लाल फूल, लाल कपड़ा
मोदक या लड्डू
दीपक, धूप, चंदन
अक्षत (चावल), जल, नारियल
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को शुद्ध जल या गंगाजल से शुद्ध करें।
गणेश जी की मूर्ति या चित्र को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
दीपक जलाएं और धूप चढ़ाएं।
गणेश जी को जल, अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें।
मोदक, लड्डू और नारियल भोग स्वरूप चढ़ाएं।
नीचे दिए गए गणेश मंत्र का जप करें।
🕉️ मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
(Om Gam Ganapataye Namah)
यह मंत्र सभी विघ्नों को दूर करता है और सफलता प्रदान करता है।
📿 अर्थपूर्ण मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ:
हे वक्रतुंड, विशालकाय प्रभु! जिनकी आभा करोड़ों सूर्यों के समान है — कृपया मेरे सभी कार्यों में विघ्नों को दूर करें।
🌸 गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
फल: बुद्धि, ज्ञान, और सफलता की प्राप्ति होती है।
गणेश आरती करें (जैसे “जय गणेश जय गणेश देवा”)
प्रसाद वितरित करें और परिवार के साथ श्रद्धा से ग्रहण करें।
दिनभर शुद्धता और शांति का पालन करें।
गणेश पूजन से बुद्धि, विवेक, सफलता, धन और सौभाग्य प्राप्त होता है। यह पूजा विशेष रूप से व्यवसाय, करियर, विवाह, शिक्षा और नई शुरुआत के लिए लाभदायक मानी जाती है।
📿 जय श्री गणेश! जीवन में हर कार्य निर्विघ्न पूर्ण हो!
🕉️ Presented by — Kali Kripa Jyotish