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an initiative by
Seth Murlidhar Jewellers
GOLD JEWELLERY CONSULTANTS
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स्वर्ण आभूषण व्यवसाय
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स्वर्ण आभूषण व्यवसाय
स्वर्ण आभूषण खरीदने में निवेश करना भारत की प्राचीन परंपरा रही है। किसी भी धर्म में कोई भी विवाह स्वर्ण आभूषणों के बगैर नहीं होता। प्राचीन काल से देश अथवा विदेश सभी जगह तथा हर धर्म में महिलाओं के लिए गहने आवश्यक माने गए हैं। पुरुषों द्वारा स्वर्ण आभूषण पहने जाने पर उनका व उनके परिवार का सामाजिक रुतबा बढ़ता है। आभूषण की खरीदारी जहां एक और फैशन से जुड़ी है वहीं दूसरी तरफ निवेश से, साथ ही साथ स्वर्ण आभूषण मुश्किल वक्त में अत्याधिक काम आते हैं और, यह वह बचत है जो कभी नजर नहीं आती, सिवाय मुश्किल वक्त के। घर में स्वर्ण आभूषण होना मुश्किल वक्त मैं मदद की गारंटी है। भारत की प्रत्येक मां, बेटी, बहन के पास कुछ ना कुछ सोने के गहने अवश्य होते हैं। वक्त के साथ सोने के भावों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है जिसके कारण स्वर्ण आभूषण में किए गए निवेश पर उपभोक्ताओं को भारी लाभ हुआ है। भारत की वर्तमान न्याय पद्धति हो या प्राचीन भारत का इतिहास स्त्री के आभूषणों को “स्त्रीधन” कहा गया है और जिस महिला के आभूषण हैं उसके अतिरिक्त किसी भी अन्य का उन आभूषणों पर अधिकार नहीं माना गया है। कोई भी माता या पिता अपने पुत्री या पुत्र वधू को अपनी क्षमता के अनुसार ज्यादा से ज्यादा स्वर्ण आभूषण देकर उसके भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं। इसलिए शादी विवाह के अवसर पर विवाह में आने वाले कुल खर्चों का एक बहुत बड़ा भाग सोने-चांदी के आभूषणों को खरीदने पर निवेश किया जाता है एवं पुत्र या पुत्री के जन्म के साथ ही उसके माता-पिता स्वर्ण आभूषण खरीदना शुरू कर देते हैं। आइए हमारे परामर्शदाता बनकर उससे होने वाली आमदनी को अपने बच्चों की आमदनी मानते हुए उसे उनके भविष्य की खुशहाल जिंदगी के लिए निवेश कर दें।
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