उद्देश्य :
1. सही अनुतान सहित मुखर वाचन की क्षमता का विकास हो सकेगा।
2. अपठित साहित्य को पढ़कर अथवा सुनकर समझना, उसके सार को मौखिक रूप से अभिव्यक्त करना तथा प्रश्नोत्तर की योग्यता का विकास हो सकेगा।
3. विभिन्न अवसरों पर स्थिति के अनुरूप मौखिक अभिव्यक्ति की योग्यता का विकास हो सकेगा।
विषय वस्तु :
1. विविध शैलियों में लिखित अंश, रिपोर्ट, समाचार, आलेख वाचन, और कविता पाठ आदि।
2. विविध विषयों से संबंधित पाठांशों का बोधन और उन पर प्रश्नोत्तर।
विषय – समाचार-पत्र, एकांकी, कहानी तथा तथ्यात्मक लेख आदि।
3. रेडियो व दूरदर्शन से समाचार, परिचर्चा, आँखों देखा हाल, भाषण, कथा-वाचन और प्रवचन आदि का श्रवण और बोधन।
4. विभिन्न अवसरों पर स्थिति के अनुरूप भाषण देना।
5. विविध विषयों पर चर्चा-परिचर्चा और वाद-विवाद (साहित्यिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक तथा दार्शनिक आदि)।
6. विभिन्न अवसरों पर औपचारिक तथा अनौपचारिक वार्तालाप।
7. ऐंकरिंग, मंच का संचालन, बैठक का संचालन, कार्यक्रम की प्रस्तुति, साक्षात्कार, उद्घोषणा आदि।
8. एकांकी के आधार पर एकालाप और पात्राभिनय।
अंक विभाजन :
पूर्णांक – 100 (आगरा तथा दिल्ली केंद्र के पाठ्यक्रम के लिए)
वार्षिक परीक्षा – 70 + आंतरिक परीक्षा – 30 = 100 अंक
नोट - श्रीलंका में संचालित पाठ्यक्रम के लिए वार्षिक परीक्षा 100 अंक की होगी।
वार्षिक परीक्षा का अंक विभाजन :
आगरा/दिल्ली केंद्र के लिए - वाचनपरक प्रश्न – 20 अंक + बोधन/अभिव्यक्तिपरक प्रश्न – 50 अंक
कोलंबो (श्रीलंका) के लिए - वाचनपरक प्रश्न – 25 अंक + बोधन/अभिव्यक्तिपरक प्रश्न – 75 अंक = 100 अंक
संदर्भ ग्रंथ –
1. स्वयं हिंदी सीखें - सं. वी.रा. जगन्नाथन / केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
2. उच्चस्तरीय अंग्रेज़ी-हिंदी अभिव्यक्ति पुस्तक - सीताराम शास्त्री / केंद्रीय हिंदी संस्थान प्रकाशन, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
3. मौखिक कौशल, खंड-1 (द्वितीय संशोधित संस्करण, 2017) / केंद्रीय हिंदी संस्थान प्रकाशन, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
4. मौखिक कौशल, खंड-2 (द्वितीय संशोधित संस्करण, 2017) / केंद्रीय हिंदी संस्थान प्रकाशन, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
5. आओ हिंदी सीखें, भाग-1 - प्रो. भरत सिंह, श्री केइसुके कातो (2010) / गोयल पब्लिशर्स, दिल्ली-07
6. आओ हिंदी सीखें, भाग-2 - प्रो. भरत सिंह, श्री केइसुके कातो (2012) / गोयल पब्लिशर्स, दिल्ली-07
7. हिंदी शिक्षण का अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य -डॉ. बीना शर्मा (2015) / नई किताब, दिल्ली-32
8. भारतीय सांस्कृतिक प्रतीक - डॉ. बीना शर्मा (2016) / केंद्रीय हिंदी संस्थान प्रकाशन, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा