मानचित्र ( Mapping)



पृथ्वी के धरातल के किसी भू - भाग को पैमाने के आधार पर कागज पर सूक्ष्मतम आकार में प्रदर्शित करना मानचित्र कहलाता है ।

     मानचित्र का प्रयोग निम्न उद्देश्यों हेतु किया जाता है:-

-पृथ्वी पर अपनी स्थिति जानने के लिए

- दो वस्तुओं की दूरी अथवा दिशा निर्धारण हेतु

- धरातल पर स्थित दो स्थानों की दूरी जानने हेतु

- यात्रा की योजना हेतु

- टूरिस्ट स्थलों एवं मार्गों के निर्धारण हेतु ।

- मौसम की दशाओं , जनसंख्या तथा उसका घनत्व , वनस्पति , औद्योगिक क्षेत्र , कृषि इत्यादि के प्रदर्शन हेतु

- कर निर्धारण हेतु

- विविध दृश्यावलियों को प्रदर्शित करने हेतु ।

- मानचित्र से वस्तु और वस्तु से मानचित्र की स्थिति जानने हेतु

मानचित्र कार्य को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जा सकता है :-

1. मानचित्र पठन ( Map Reading )

2. मानचित्र का निर्माण ( Map Making )


मानचित्र में निम्नलिखित पाँच (Five D's) बातें आवश्यक है:-


( क ) विवरण ( Description ) - मानचित्र पढ़ने व बनाने में निम्नलिखित आवश्यक है

( i ) पत्रक का नाम ( Name of the Sheet )

( ii ) पैमाना ( Scale )

( iii ) उत्तर दिशा ( North )

( iv ) उच्चावचन ( Altitude )

( v ) परिचय संख्या ( Reference Number )

( vi ) प्रकाशन एवं भूमान तिथि ( Date of publication and Surveying )

( vii ) सांकेतिक चिन्ह ( Symbolse / Convention signs )

( viii ) अक्षांश और देशांतर रेखाएं ( Longitude and Latitude )

( ix ) क्षेत्रफल ( Area Covered )

( ख ) दिशा ज्ञान ( Direction ) - मानचित्र के ऊपरी दाहिने शीर्ष पर तीर द्वारा उत्तर दिशा को दर्शाया जाता है तथा साथ ही उत्तर दिशा से चुम्बकीय उत्तर का अन्तर भी ।

( ग ) दूरी ( Distance ) - मानचित्र के नीचे के मध्य भाग पर पैमाना ( Scale ) दर्शाया जाता है जिससे दो स्थानों की दूरी ज्ञात की जा सकती है

( घ ) प्रतीक चिन्ह ( Demarcation ) - परंपरागत सांस्कृतिक चिन्हों , रंगों एवं अन्य सांकेतिक चिन्हों से मानव निर्मित दृश्यावलियों को दर्शाया जाता है ।

( ड . ) नामांकन ( Designation ) - मानचित्र में नदियों , शहरों , झीलों , महाद्वीपों , महासागरों , राष्ट्रों , पर्वतों , खाड़ियों , द्वीपों आदि की जानकारी नामांकित कर दी जाती है।

मापनी ( Scale ) - मानचित्र पर दो स्थानों के मध्य की दूरी और धरातल पर उन्हीं स्थानों के मध्य पर वास्तविक दूरी के अनुपात को मापनी कहते हैं । उदाहरण के लिये मापनी में 5 किलोमीटर की दूरी को एक सेन्टीमीटर में दर्शाया गया हो । इस प्रकार मापनी एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा छोटे - छोटे हिस्सों को बड़े आकार में तथा बड़े - बड़े क्षेत्रों को छोटे आकार में प्रदर्शित किया जा सकता है ।

मापनी निम्नांकित प्रकार की होती है :-

1. साधारण मापनी 

2. विकर्ण मापनी 

3. तुलनात्मक मापनी 

4. पग मापनी 

5 . चक्कर मापनी 

6. समय या दूरी मापनी 

7. वर्नियर मापनी 

8. ढाल या प्रवण मापनी