अनुमान लगाना (Estimation)

हमें अपने जीवन में पग-पग पर अनुमान लगाना पड़ता है। यदि आप सड़क पार करना चाहते हैं तो आने - जाने वाले वाहनों का अनुमान लगा लेते हैं कि उनके आने तक आप पार कर लेंगे या नहीं। किसी व्यक्ति का हुलिया पूछे जाने पर आप बता देते हैं कि उसकी उम्र लगभग कितनी है तथा ऊँचाई , मोटाई , शक्ल आदि कैसी थी। स्काउट गाइड अनुमान लगाने का बार - बार अभ्यास करते हैं और अंततः वे अनुमान लगाने में प्रवीण हो जाते हैं। अनुमान में 25 प्रतिशत तक की त्रुटि क्षम्य रहती है।

                        दूरी , ऊँचाई , चौड़ाई , वजन , संख्या आदि का प्रत्येक स्काउट / गाइड को अनुमान लगाना आना चाहिए।



दूरी का अनुमान लगाना

किसी घाटी के आर -पार की दूरी ,जमीन व वस्तु का रंग समान होने ,लेटकर देखने से गर्मी की लहरें उठने की स्थिति में वस्तुएं दूर दिखती है। इसके विपरीत यदि सूर्य पीछे हो , स्वच्छ हवा हो (जैसा कि किसी वर्षा के बाद का खुला दिन होता है) , जमीन और वस्तु का रंग भिन्न हो , पानी के ऊपर देखने , ऊँचाई या गहराई की ओर देखने या किसी बड़े आकार की वस्तु के पास वस्तुएँ निकट दिखती है। अतः स्काउट गाइड को उक्त बातों का ध्यान रखते हुए अनुमान लगाना चाहिए।

            प्रत्येक स्काउट / गाइड को अपने शरीर के विभिन्न अंग की नाप ज्ञात होती चाहिए ।


एक औसत व्यक्ति के विभिन्न अंगों की नाप निम्नांकित है

अंगूठे की चौड़ाई = 2.5 से.मी. या 1 इंच

तर्जनी व अंगूठे के मध्य की दूरी = 17.78 से.मी.

मध्यमा या अनामिक और अंगूठे के बीच की दूरी -21.6       से.मी.

कोहनी से कलाई की दूरी = 25.4 से.मी.

कोहनी से मध्यमा तक ( हाथ ) की दूरी = 44 से.मी. 

घुटने से भूमि तक पैर की दूरी= 45 से.मि.

हाथों को फैलाकर या फैदम की दूरी = व्यक्ति की ऊँचाई

एक कदम की नाप=  75 से.मी. (2.5 फीट) से 85 से.मी. तक (औसतन 80 से.मी.)

120 कदम - 100 गज अथवा 90 मीटर

तेज गति से चलने पर 16 मिनट में एक मील की दूरी तय होती है

तेज चाल में कदम की दूरी - 30 से.मी.

दौड़ चाल में कदम की दूरी - 40 से.मी.

दूरी का अनुमान चाल प्रति मिनट या प्रतिघंटा से भी लगाया जा सकता है । माना कोई व्यक्ति 5 कि.मी. प्रति घंटे चलकर 2.5 घंटे चल चुका है तो कुल दूरी होगी 5x25-125 कि.मी. दूरी का अनुमान आवाज से भी लगाया जा सकता है । यदि बन्दूक से निकली चमक और आवाज के मध्य का सेकण्ड में अन्तर ज्ञान कर लिया जाय तो बन्दूक से दूरी ज्ञात की जा सकती है । आवाज की गति 365 गज प्रति सेकण्ड होती है ।

दूरी का अनुमान इस विधि से भी लगाया जा सकता है :-

50 गज की दूरी पर किसी व्यक्ति की आंखें व मुंह साफ दिखते है

100 गज की दूरी पर आंखें बिन्दू के समान दिखती है।

200 गज की दूरी पर बटन और कपड़े साफ दिखते है।

300 गज की दूरी पर चेहरा दिखता है ।

400 गज की दूरी पर पैरों की हरकत दिखती है ।

500 गज की दूरी पर कपड़ों का रंग दिखता है ।

600 गज की दूरी पर सिर बिन्दु के समान दिखता है ।

700 गज की दूरी पर सिर नहीं दिखाई देता ।

800 गज की दूरी पर आदमी बिंदु जैसा दिखता है।

स्काउट गाइड उक्त दूरियों को अपने कदमो से नापकर ज्ञात कर सकते हैं।

 ESTIMATIOM (अनुमान लगाना)

ऊँचाई का अनुमान

ऊंचाई नापने के लिए अनेक विधियाँ अपनाई जा सकती हैं जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं :- 

1. इंच-फुट विधि (Inch To Feet) :-

मान लीजिए किसी पेड़ की ऊँचाई ज्ञात करनी है। पेड़ से जिस ओर समतल भूमि हो ,उस तरफ नाप की किसी भी इकाई में 11 इकाई अथवा 11 कदम चलकर " A " बिन्दु ज्ञात कर लें। यहां से एक कदम और लेकर " B " बिन्दु ज्ञात कर लें । अब " A " पर स्काउट गाइड लाठी खड़ी कर लें और " B " से भूमि पर लेटकर भूमि के निकट की आँख से पेड़ की ऊँचाई के बराबर लाठी पर निशान लगा लें । इसे इंचों में पढ़ लें। लाठी पर जितने इंच होंगे पेड़ पर उतने ही फीट ऊँचाई होगी।

माना यह दूरी लाठी पर 27 ' है तो पेड़ की ऊँचाई 27 फीट होगी। इंच - फुट के स्थान पर इसे से.मी. में भी ज्ञात किया जा सकता हैं जिसमें 11 कदम के स्थान पर 9 कदम लें ।

2. लम्बर मैनस् विधि (Lumberman's Method) -

इस विधि में यह कल्पना की जाती है कि पेड़ की चोटी गिरकर भूमि पर कहा पड़ेगी। इसमें स्काउट गाइड लाठी दोनों हाथों में इस प्रकार आगे तान ली जाती है कि एक हाथ चोटी को तथा दूसरा जड़ को इंगित करें। अब चोटी वाला हाथ भूमि के समानान्तर लाकर देख लें कि वह भूमि कहा इंगित करता है , दूसरा हाथ जड़ को इंगित करता रहना चाहिए । पेड़ की जड़ से उस स्पर्श बिन्दु को नाप लें। यही पेड़ की ऊँचाई होगी ।

3. पेंसिल विधि -

इस विधि में किसी ऊँचाई को व्यक्ति की ऊँचाई के अनुपात के आधार पर ज्ञात कर लिया जाता है । माना किसी पेड़ की ऊँचाई ज्ञात की जानी है । उस पेड़ के निकट व्यक्ति को खड़ा कर दिया जाता है । हाथ आगे तानकर पेंसिल से उसकी ऊँचाई ज्ञात कर ली जाती है । इसे इंच या सेंटीमीटर में पढ़ लिया जाता है। अब उसी पेंसिल से पेड़ की ऊंचाई ज्ञात कर पढ़ ली जाती है। पेंसिल में ली गई नापों से व्यक्ति और पेड़ की सामानुपातिक ऊंचाई ज्ञात कर ली जाती है ।

4. छाया विधि (Shadow Method) -

इस विधि में किसी वस्तु की ऊंचाई को उसकी छाया और लाठी की छाया ( जिसकी ऊंचाई ज्ञात है ) से कर ली जाती है

खड़े हो वस्तु की ऊँचाई,      लाठी की ऊँचाई

    उस वस्तु की छाया लाठी की छाया

5. रेड इण्डियन विधि (Red Indian Method) -

इस विधि में पेड़ या वस्तु की ओर पीठ कर पैरों के मध्य से पेड़ या वस्तु की चोटी की शरीर को 45° मोड़कर देखा जाता है । जब तक चोटी न दिख जाय , आगे या पीछे जाना होगा। इस स्थान से पेड़ या वस्तु तक की दूरी ही उसकी ऊँचाई होगी 

6. मुड़ा कागज विधि (Folded Paper Method) -

किसी वर्गाकार कागज को कर्णवत् मोड़कर 45° का कोण बना लिया जाता है इसे स्काउट लाठी पर इस प्रकार लगा लिया जाता है कि लम्ब लाठी पर तथा कर्ण का सिरा पेड़ की चोटी तथा दूसरा जड़ को दर्शाता हो । जिस स्थान पर पेड़ की चोटी और जड़ इस कागज के दोनों सिरों के ठीक सीध में होंगे वहीं दूरी तथा अपनी आँख तक की ऊँचाई पेड़ की ऊँचाई होगी ।

7. समभाग - विधि-

इस विधि में पेड़ या वस्तु को नजर से दो समान भागों में बांट दिया जाता है । निचले आधे भाग को पुनः दो भागों में बांटकर सबसे नीचे के भाग को नाप लिया जाता है । इस प्रकार अब पेड़ के चार सम भाग बन गये । इस चौथाई भाग की नाप को चार से गुणा करने पर पेड़ या वस्तु की ऊँचाई निकल जायेगी । यदि अब भी इस चौथाई भाग को नापना सम्भव न हो तो पुनः इस भाग को दो भागों में बांटकर नाप लें । इस प्रकार अब आठ समान भाग बन जायेंगे , आठवें भाग की नाप को आठ से गुणा कर ऊँचाई ज्ञात कर ली जाती है ।