"स्काउट " का शाब्दिक अर्थ है- गुप्तचर, भेदिया, जासूस
फौज में जो चुस्त,चालाक और साहसी हो रास्ता बनाने ,नदी नालों पर पूल बनाने ,घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करने तथा शत्रु की गतिविधियों का पता अपने अधिकारियों को देने का काम करते हैं उन्हें " स्काउट " कहा जाता है।
लार्ड बेडन पावेल ने फौजी स्काउट को बालोपयोगी स्वरूप प्रदान कर उनका चरित्र-निर्माण और व्यक्तित्व का विकास करने वाली संस्था बनाया ,ताकि वे एक सुयोग्य नागरिक बन सके।
बी.पी का जन्म 22 फरवरी 1857 ई. को स्टेनहोल स्ट्रीट,लैंकेस्टर गेट लंदन में रेवेंड प्राध्यापक हर्बर्ट जॉर्ज बेडन पावेल के घर हुआ। वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में रेखागणित के प्राध्यापक थे। उनकी माता हेंनरीटा ग्रेस स्मिथ ब्रिटिश एडमिरल की पुत्री थी।
बी.पी की शिक्षा चार्टर् हाउस स्कूल में हुई। चार्टर हाउस में वे 1870 में छात्रवृत्ति लेकर प्रविष्टि हुए।जहाँ उन्हें "बेदिंग टॉवल" के नाम से जाना जाता था। ये इस स्कूल में प्रसिद्ध फुटबॉल गोलकीपर रहे।
1876 ई. में सेना अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में 700 अभ्यर्थियों में से कैवेलरी में दूसरे और इन्फैंट्री में चौथे स्थान पर उतीर्ण हुए। अतः उन्हें प्रशिक्षण से मुक्त कर 13वीं हुसार्स रेजिमेंट, लखनऊ(भारत) में सब लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्ति मिली। सन 1883 ई. में 26 वर्ष की अवस्था मे वे कैप्टन हो गए। घुड़सवारी, सुवर का शिकार करना,स्काउटिंग तथा थियेटर में भाग लेना उनके प्रमुख शौख थे।
बी.पी को स्कोउटिंग की प्रेरणा 1899-1900 में दक्षिण अफ्रीका की एक घटना से प्राप्त हुई। दक्षिण अफ्रीका में मैफकिंग नाम का एक कस्वा था जहाँ 1500 गोरे और 8000 स्थानीय लोग रहते थे। हॉलैंड निवासी डच लोग जिन्हें बोआर के नाम से पुकारा जाता था, इस कस्वे को अपने अधीन लेना चाहता था। who holds Mafeking,hold the regins of south Africa की कहावत वहाँ प्रचलित थी।बोरओ की 9000 सेना ने मैफकिंग को घेर लिया।बी.पी के पास अंग्रेजी सेना में कुल मिलाकर 1000 सैनिक थे जिनके पास मात्र 08 बंदूके और थोड़ा सा डायनामाइट था। अपनी युक्ति से बी पी ने 217 दिन तक बोआरो को कस्बे में घुसने नही दिया। 17 मई 1900 को इंग्लैंड से सैनिक सहायता प्राप्त होने के पश्चात बी पी ने विजय प्राप्त की। इस विजय का पूर्ण श्रेय बी पी को जाता है।
इस विजय की एक प्रमुख घटना यह रही थी कि बी पी के स्टाफ ऑफिसर "एडबर्ड सिसिल " ने मैफकिंग के 9 वर्ष से अधिक उम्र के लड़कों को इकट्ठा कर एक "कैडेट-कॉर्प्स या बाल सेना" तैयार की जिन्हें प्रशिक्षित कर और वर्दी पहनाकर सन्देश वाहक, अर्दली,प्राथमिक चिकित्सा इत्यादि कार्यो में लगा दिए तथा उनके स्थान पर लगे सैनिकों को सीमा पर लड़ने के लिए मुक्त कर दिया। गुड ईयर नामक सार्जेंट मेजर के नेतृत्व में इन लड़को का कार्य अद्वितीय रहा। लार्ड सिसिल के इस प्रयोग ने बी पी को प्रभावित किया। इस घटना से प्रेरित होकर उन्होंने "एड्स टू स्काउटिंग नामक पुस्तक लिखी ।
इस पुस्तक से प्रभावित होकर मि. स्मिथ ने बी पी से लड़को के लिए स्काउटिंग की एक योजना बनाने का आग्रह किया। परिणामस्वरूप 1907 में इंग्लिश चैनल में पुल हार्बर के निकट ब्राउन सी द्वीप में 29 जुलाई से 09 अगस्त तक समाज के विभिन्न वर्गों के 20 लड़कों का प्रथम स्काउट शिविर स्वयं बी पी ने आयोजित किया। इस प्रयोगात्मक शिविर के अनुभवों को उन्होंने "स्काउटिंग फ़ॉर बॉयज "नामक अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में लिपिबद्ध कर दिया।इस पुस्तक के 26 वें कथानक बी पी द्वारा शिविर तथा कैम्प फायर में कही गयी बाते तथा कहानियां है जिन्हें छ पाक्षिक संस्करणों में जनवरी 1908 से अप्रैल 1908 तक प्रकाशित किया गया।
इस तरह स्काउटिंग आंदोलन की शुरुआत हुई ।
08 जनवरी 1941 को केन्या में लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष 10 माह 17 दिन का शानदार जीवन जी कर बी पी स्वर्गवासी हुए। माऊंट केन्या में उन्हें दफनाया गया।
स्काउट एवं गाइड का उद्देश्य नवयुवकों की पूर्ण शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक क्षमताओं का विकास करना है, जिससे कि वे एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी क्षमताओं के द्वारा स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान कर सकें।
मैं मर्यादा पूवर्क प्रतिज्ञा करता/करती हूं कि मैं यथाशक्ति -
- ईश्वर और अपने देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करूंगा/करूंगी
- दुसरो की सहायता करूंगा/करूंगी
- स्काउट/गाइड नियम का पालन करूंगा/करूंगी
स्काउट नियम
स्काउट नियम एक है लेकिन इसके खण्ड(भाग) नौ (09) है।
1.) स्काउट विश्वसनीय होता है।
2.) स्काउट वफादार होता है।
3.) स्काउट सबका मित्र और प्रत्येक दूसरे स्काउट का भाई होता है।
4.) स्काउट विनम्र होता है ।
5.) स्काउट पशु -पक्षियों का मित्र और प्रकृति प्रेमी होता है।
6.) स्काउट अनुशासनशील होता है और सार्वजनिक सम्पति की रक्षा करने में सहायता करता है।
7.) स्काउट साहसी होता है।
8.) स्काउट मितव्ययी (कम खर्चीला) होता है।
9.) स्काउट मन, वचन और कर्म से शुद्ध होता है।
दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना .
हमारे ध्यान में आओ ,प्रभु आँखों में बस जाओ,
अँधेरे दिल में आकर के ,परम ज्योति जगा देना.
बहा दो प्रेम की गंगा,दिलो में प्रेम का सागर,
हमे आपस में मिलजुलकर प्रभु रहना सिखा देना.
हमारा कर्म हो सेवा,हमारा धर्म हो सेवा,
सदा ईमान हो सेवा व सेवकचर बना देना.
वतन के वास्ते जीना,वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जां फ़िदा करना प्रभु हमको सिखा देना.
दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना.
(प्रार्थना में लगने वाला समय – 90 सेकण्ड)
प्रार्थना के रचियता – श्री वीर देव वीर
भारत स्काउट गाइड झंडा ऊँचा सदा रहेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा.
नीला रंग गगन सा विस्तृत भात्र भाव फैलाता,
त्रिदल कमल नित तीन प्रतिज्ञाओं की याद दिलाता.
और चक्र कहता है प्रतिपल आगे कदम बढेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा.
भारत स्काउट गाइड झंडा ऊँचा सदा रहेगा.
(झंडा गीत में लगने वाला समय – 45 सेकण्ड)
भारत स्काउट एवं गाइड झंडा गीत के रचियता -श्री दयाशंकर भट्ट
कब बुलबुल एक अच्छा नागरिक बनने का कोशिश करते हैं। स्काउट गाइड अपना शारिरिक, मानसिक, संवेगात्मक और आध्यात्मिक विकास हेतु स्काउट शिक्षा के पांच मूलाधार चरित्र-गठन, स्वास्थ्य और बल, कौशलों के विकास, समाज सेवा तथा ईश्वर के प्रति कर्तव्य पालन के सतत अभ्यास से जीवन की चुनौतियों के लिए अपने को तैयार करते है। जबकि रोवर रेंजर्स के रूप में वे सेवा व्रत लेते है।
इस प्रकार स्काउट गाइड का आदर्श वाक्य है:- तैयार (BE PREPARED)
तैयार का अर्थ है कि वह मानसिक रूप से जागरूक, शारीरिक रूप से स्वस्थ और उनका नैतिक स्तर उच्च हो। ताकि कोई भी समस्या उत्पन्न होने पर तुरंत उसका समाधान कर सके।
स्काउट/गाइड चिन्ह परिचय और पहचान का गुप्त संकेत है। इस चिन्ह को दिखाकर विश्व मे कही भी कोई स्काउट गाइड एक दुसरे के स्काउट गाइड संगठन के सदस्य होने की जानकारी दे देता/देती है। इस संस्था का सदस्य बनने के लिए प्रत्येक बालक/बालिका को एक शपथ(प्रतिज्ञा) लेनी अनिवार्य है। इस शपथ को स्काउट गाइड चिन्ह बनाकर लिया जाता है। प्रतिज्ञा लेते या दोहराते समय स्काउट गाइड चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
इस चिन्ह को बनाते समय दाहिने हाथ केहुनी से मुड़ा, तीन अंगुलिया कंधे की सीध में खड़ी जबकि छोटी अंगुली अंगूठे से दबी हो। तीन खड़ी अंगुलिया प्रतिज्ञा की तीन प्रतिबद्धता की प्रतीक है।
स्काउट/गाइड सैल्यूट आदर और विनम्रता का प्रतीक है। जो भी पहले देख ले वह सैल्यूट करता है। छोटे बड़े का भेद किये बिना प्रतिदिन जो पहले देखते हैं वो सैलूट करता है।
सैल्यूट देते समय दाहिने हाथ को कंधे की सीध में ले जाकर केहुनी से इस प्रकार मोड़ा जाता है कि तर्जनी अंगुली दाहिनी भौंह के ऊपर मध्य भाग को स्पर्श करें। दो तीन सेकेंड रुक कर हाथ आगे के रास्ते से गिरा दिया जाता है।
सैल्यूट निम्न अवसर पर देनी चाहिए:-
* राष्ट्रीय ध्वज, भारत स्काउट गाइड ध्वज और विश्व स्काउट गाइड ध्वज फहराते समय सावधान की अवस्था मे सैल्यूट किया जाता है। इसके अतिरिक्त टोली/दल के निरीक्षण में टोली/दल नायक सैल्यूट करेंगे। ध्वज अवतरण के समय सैल्यूट न कर सावधान खड़ा होना चाहिए।
* शव यात्रा, मुख्य अतिथि व मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त एवं अन्य वरिष्ठ आयुक्तों को सैल्यूट करते हैं।
स्काउट गाइड एक दूसरे से बाँया हाथ मिलाते है। बी पी ने इस विचार को अफ्रीका की 'अशांति' जाति के सरदार " परमपेह " से ग्रहण किया। परमपेह ने 1874 में उसके पूर्बजों से हुई सन्धि को उसने नही माना। अतः उसे वश में करने का कार्य बी पी को सौंपा। बी पी ने अपनी युक्ति ,बुद्धि, कौशल और साहस से उसे बन्दी बना लिया।
जब उसे बी पी के सम्मुख लाया गया तो उसने अभिवादन के लिए अपना बांया हाथ आगे बढाया, इसका रहस्य पूछने पर उसने कहा कि उनकी जाति में सबसे बहादुर योद्धा अपने मित्र से बायाँ हाथ मिलाते है।जिसका तात्पर्य है कि उनके पास कोई शस्त्र नही है और वह प्रगाढ़ दोस्ती का प्रतीक है। एवं सभी लोगो का हृदय बाए तरफ होता है जो हार्दिक सद्भावना का प्रतीक है। इस घटना से प्रेरित होकर बी पी ने स्काउटिंग में बाँया हाथ मिलाने की प्रथा को लागू करना तय किया।
स्काउट/गाइड गणवेश ( Uniform ) किसी भी संगठन की पहचान उसके सदस्यों के पहनावे से की जा सकती है।स्काउट गाइड संस्था भी एक निश्चित वेशधारी संगठन है ,यही पहनावा उसकी पहचान है, चुस्त , फुर्तीले तथा सही वेशधारी व्यक्ति की ओर सभी का ध्यान आकर्षित होता है।
अतः स्काउट गाइड को सही यूनिफॉर्म पहननी चाहिए। आकर्षक यूनिफार्म संगठन एवं स्वयं को यश प्रदान करती है। जब कभी हम नये और आकर्षक परिधान में होते हैं तो हमें आत्म - सम्मान की अनुभूति होती है।
स्काउट गणवेश (Uniform) स्काउट निम्नलिखित गणवेश पहनेगा :-
( i ) कमीज - स्टील ग्रे रंग की दो पैच पॉकेट वाली कमीज जिस पर दो शोल्डर स्ट्रैप्स लगे हों , आधी या लपेटी हुई आस्तीन के साथ । सर्दी के मौसम में आस्तीने नीचे की जा सकती हैं ।
( ii ) नेकर या पैन्ट- नेवी ब्लू रंग की नेकर या पैन्ट पहनी जाएगी । लेकिन राष्ट्रपति स्काउट जाँच शिविर या राष्ट्रपति पुरस्कार रैली में पैन्ट पहनना अनिवार्य है । पैन्ट न तो अधिक ढीली होगी और नही अधिक कसी हुई । इसके पीछे एक जेब होगी
( iii ) बैरट कैप- गहरे नीले रंग की वैरेट कैप जिस पर राष्ट्रीय संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया अधिकृत कैप - बैज लगा होगा , पहनी जाएगी । सिक्ख अधिकृत कैप - बैज के साथ नीले रंग की पगड़ी पहनेंगे । समारोहों के अवसर पर टोपी पहनना अनिवार्य है
( iv ) बैल्ट ( पेटी ) - स्लेटी रंग की नाइलैक्स बैल्ट जिस पर राष्ट्रीय संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया भारत स्काउट्स व गाइडस् का अधिकृत बक्कल लगा होगा।
( v ) स्कार्फ- हरा ,पीला और बैगनी रंग छोड़ कर , ग्रुप के रंग वाला त्रिभुजाकार स्कार्फ जो स्थानीय या जिला संघ (जैसी भी स्थिति हों ) द्वारा मान्य होगा , गर्दन के चारों ओर व कॉलर तथा शोल्डर स्ट्रैप्स के ऊपर , ग्रुप - वोगल ( गिलवैल वागल से भिन्न ) के साथ पहना जाएगा । स्कार्फ की दोनों भुजाएं कम - से - कम 70 से.मी. तथा अधिक से अधिक 80 से.मी. लम्बी होगी
( vi ) शोल्डर बैज - सफेद कपड़े का 6 से 8 से.मी. लम्बा तथा 1.5 से.मी. चौड़ा शोल्डर बैज जिस पर लाल रंग से ग्रुप का क्रमांक व नाम लिखा होगा , दोनों कन्धों की सिलाई के ठीक नीचे की ओर हल्का घुमाव के साथ सिलाई करके लगाया जाएगा
(vii ) शोल्डर स्ट्रिप्स -स्टील ग्रे रंग के वर्गाकार पैबन्द (पैच) पर , स्काउटिंग फॉर बॉयज में बताए गए टोली के नाम तथा रंग को प्रदर्शित करने वाली दो शोल्डर स्ट्रिप्स ( पट्टिया ) लगाई जाएगी । ये पट्टियां प्रत्येक 5 से.मी. लम्बी तथा 1.5 से.मी. चौड़ी होगी और एक दूसरे से 2 से.मी. के अन्तर पर समानान्तर होगी । इस पैच को शोल्ड बैज के तुरंत नीचे बाएं आस्तीन के शीर्ष पर पहना जाएगा
टिप्पणीः - यदि एम्बूलेन्स मैन बैज है तो ' शोल्डर स्ट्रिप्स ' को एम्बूलेन्स मैन बैज के नीचे की ओर लगाया जाएगा
(viii) सदस्यता बैज- हरे रंग के कपड़े का बैज जिस पर पीले रंग में तीन पंखुड़ियां ( Fleur - de - lis ) व इसके अन्दर की ओर पीले ही रंग का गाइड त्रिदल फूल (Trefoil) तथा बीच में पीले रंग से ही अशोक चक्र बना होगा , कमीज की जेब की खड़ी पट्टी पर जेब के ढक्कन पर लगे बटन तथा जेब के नीचे वाली सिलाई के बीचों बीच लगाया जाएगा
( ix ) मौजे या जुर्राब - मौजे या जुर्राब काले रंग की होगी जुरबिं घुटनों के नीचे मुड़ी हुई होगी । इन्हें हरे रंग के गार्टर टैब्स से जोकि 1.5 से.मी. बाहर दिखते होंगे से बाँधा जाएगा । इसे केवल नेकर के साथ पहना जाएगा । जुराब ( केवल पेन्ट के साथ ही पहना जायेगा
( x ) विश्व स्काउट बैज - इसे सदस्यता बैज की ही तरह कमीज की दायीं जेब जिस मी . दो की खड़ी पट्टी के मध्य में लगाया जाएगा
(xi) जूते - चमड़े या कैनवस के काले रंग के फीतेदार जूते होंगे
(xii) ओवरकोट ,ब्लेजर या जाकेट - नेवी ब्लू रंग का ओवर कोट , ब्लेजर या विण्ड चीटर केवल सर्दी के मौसम में पहनी जा सकती है
(xiii) धातु का बैज- सादी पोशाक पर भारत स्काउट्सएवं गाइड्स के चिन्ह वाला धातु का बैज लगाया जा सकता है
(xiv) सीटी डोरी- स्लेटी रंग की डोरी गर्दन के चारों ओर डाल कर पहनी जाएगी,इसके सिरे पर बंधी सीटी को कमीज की बायीं जेब में रखा जाएगा। गाँठ लगाने वाली स्टैण्डर्ड नाप की तीन मीटर लम्बी रस्सी को बैल्ट में लटकती हुई उचित स्थान पर लगाया जाएगा
( xv ) हैवरसैक या रकसैक - हैवरसैक या रकसैक को बाहरी गतिविधियों में साथ ले जाया सकता है
( xvi ) भारत स्काउट्स एवं गाइड्स पट्टी - राष्ट्रीय मुख्यालय द्वारा निर्धारित और उपलब्ध कराई गई यह पट्टी जिस पर दी भारत स्काउट्स एवं गाइड्स लिखा होगा कमीज की दायीं जेब के ठीक ऊपर लगाई जाएगी । यह पट्टी 11 से.मी. x2 से.मी.की होगी । इसकी दायीं तरफ 3 से.मी. x2 से.मी. में तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज होगा और शेष भाग में भारत स्काउट्स व गाइड्स
यह जामुनी रंग की पृष्ठभूमि का होता है जिसमें सफेद रंग का विश्व स्काउट बचपना होता है सफेद रंग की दूरी का गोल घेरा होता है वह सीधे नीचे की ओर इस नोट से बंधे होते हैं ध्वज के आकार 180 गुड़ 120 तथा अनुपात 3 अनुपात 2 होता है
विश्व स्काउट-ध्वज
विश्व स्काउट-ध्वज को 18वें विश्व स्काउट सम्मेलन-1951 में लिस्बन में स्वीकार किया गया। ध्वज का आकार संस्था के ध्वज (एसोसिऐशन फ्लैग) की भाँति 3ः2 के अनुपात में होता है। ध्वज का कपड़ा जामुनी रंग का होता है। जिसके मध्य में 3ः2 के अनुपात का विश्व स्काउट बैज बना होता है।
15 अगस्त 1961 से भारत स्काउट्स और गाइड्स ध्वज देश की एकमात्र ध्वज है। यह गहरे आसानी रंग की नीली पृष्टभूमि का होता है। नीला आसमान जिस प्रकार सम्पूर्ण विश्व को ढके हुए है उसी प्रकार ध्वज का नीला रंग संगठन की विश्व-व्यापकता का प्रतीक है बीच में स्काउट/गाइड बैज पीले रंग का बना होता है जिसकी तीन पंखुड़ियां स्काउट/गाइड प्रतिज्ञा की तीन प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करती है। बैज के मध्यम में बना नीले रंग का अशोक चक्र धर्म के अनुसार आचरण करने तथा प्रगति-पथ पर आगे बढ़ते रहने का घोतक है। गाइड त्रिदल सम्मलित ध्वज तथा आकाश में सूर्य के सामान चमकने का प्रतीक है। चक्र में चौबीस आरे बने होते है जो दिन और रात के चौबीस घंटों को प्रदर्शित करते हैं। ये चौबीस आरे हमें चौबीस घंटे सतर्क और सावधान रहने का संदेश देती है। स्काउट चिन्ह के नीचे तीन पंखुड़िया जिन्हें एक सूत्र में बाँधा गया है जो अनुमान और विश्व बन्धुत्व का प्रतीक है। ध्वज की नाप 3ः2 के अनुपात में होती है अर्थात लम्बाई 3 हो तो चौड़ाई 2 होगी। संस्था के ध्वज में बैज की नाप 45गुणा 3 होगी। स्काउट ध्वज फहराने के नियम लगभग राष्ट्र-ध्वज की भाँति होते है स्काउट/गाइड ध्वज फहराते समय सैल्यूट दिया जाता है।
1930 के विश्व गाइड सम्मेलन में नार्वे की मुख्य गाइड ‘मिस कैरीआस ’ द्वारा स्वीकार किया गया। ध्वज की नाप 3ः2 के अनुपात में होती है नीले रंग की पृष्टभूमि में सुनहरा त्रिदल के मध्यम भाग में इसी तरह बनाया गया है कि मानों नीले आसमान में सूर्य चमक रहा हो। इसकी बैज की पंखुड़िया में बने दोनों सितारे नियम और प्रतिज्ञा के प्रतीक है, जो हमारे जीवन में पथ-प्रदर्शन करते है कम्पास की सूई की तरह की रेखा हमें सही दिशा पर चलने का बोध कराती है। त्रिदल के नीचे की अग्नि ज्वाला इस बात की परिचायक है कि हमारे मन में सेवा की ज्वाला सदैव धधकती रहे तथा हम विश्व भाई चारा जीवन पर्यत अपनाते रहें। बैज का गोलाकार घेरा संगठन में प्रवेश हेतु सदैव खुले मार्ग की ओर प्रदर्शित करता है। ध्वज की गहरी नीली पृष्टभूमि पर सुनहरा पीला गाइड चिन्ह संसार के बच्चों पर सूर्य की किरणों के समान सुनहरी छाया को दर्शाता है।
ध्वज के नियम
1. विश्व स्काउट/गाइड ध्वज हमारे राष्ट्रीय ध्वज के बांये तथा उससे नीचे होगा, पर भारत स्काउट्स और
गाइड्स ध्वज से ऊँचा व दाहिने होगा।
2. जब ध्वज ले जाया जा रहा हो तो दाहिने कंधे के ऊपर तिरछा हो तथा दाहिने हाथ से पकड़ा व बन्द हो। जब मार्च पास्ट में ले जाया जा रहा हो तो दाहिने देखे पर फहरा दिया जायेगा और सामने देख पर पुनः बन्द की स्थिति में लाया जायेगा। लाठी पर सुन्दर ढंग से लपेटकर सुनहरी डोरी से बाँधकर भी ले जाया जा सकता है।
3. भारत स्काउट्स / गाइड्स ध्वज राष्ट्रपति , राष्ट्रध्यक्ष तथा राष्ट्रआयुक्त के अतिरिक्त अन्य किसी के लिये नहीं झुकाया जा सकता।
राष्ट्रीय ध्वज( तिरंगा) 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज नियुक्त किया गया
जिसमें सबसे ऊपर केसरिया (साहस और बलिदान) का प्रतीक है बीच में सफेद (सत्य व शांति) का प्रतीक है और सबसे नीचे हरा (समृद्धि व खुशहाली )का प्रतीक है इसके बीच में अशोक चक्र विधमान रहता है।
180cm*120cm और 45cm*30cm इसका साइज रखा गया है।
•ध्वज् फहराने के नियम
•ध्वज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराना चाहिए ।
•धवज् को राष्ट्रीय पर्व व उत्सव में फहराना चाहिए ।•राष्ट्रीय ध्वज सब ध्वजो से पहले फहराया जाएगा और सबसे अंत में उतारा जाएगा।
• दो या उससे अधिक राष्ट्रों के झंडे समान ऊंचाई पर फैलाए जाते हैं।
•ध्वज की फट जाने पर उसे सम्मान पूर्वक दफनाया जाता है।
•शोक प्रकट करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज को पहले पूरा फैला कर तब झंडे की चौड़ाई के बराबर नीचे ला कर फहराया जाता है।
•उतारते समय ऊपर तक ले जाकर धीरे-धीरे उतारना चाहिए।
#निषेध:-
•निषेध ध्वज को किसी के आगे झुकना नहीं चाहिए। •राष्ट्रीय ध्वज के दाहिने और कोई ध्वज नहीं फहराना चाहिए। और ना ही कोई व्यक्ति खड़ा होना चाहिए। •राष्ट्रीय झंडे को जमीन से नहीं छूने देना चाहिए।
i. एक ट्रूप(Troop), पट्रोल में विभाजित होता है। प्रत्येक पट्रोल का एक पट्रोल कोना(Patrol Corner), पट्रोल गीत(Patrol Song), पट्रोल निनाद (Patrol Yell), पट्रोल चिन्ह(Patrol Sign), पट्रोल आवाज़(Patrol Cry) और पट्रोल झण्डा (Patrol Flag) होता है।
ii.
a. प्रत्येक पट्रोल में पट्रोल लीडर और सेकंड को मिलाकर छ: से आठ स्काउट होते हैं।
b. हर पट्रोल का नाम किसी जानवर या पक्षी के नाम पर चुना जाता है। यह नाम “स्काउटिंग फॉर बॉयज” से पट्रोल इन काउंसिल (Patrol-in Council) के साथ चुना जाता है और पट्रोल के प्रत्येक सदस्य को स्काउट यूनिफॉर्म पर पट्रोल की पट्टी(stripes of the patrol), कंधे पर पहनी जानी चाहिए।
iii. ट्रूप लीडर (Troop Leader) :
पट्रोल लीडर में से किसी एक पट्रोल लीडर को, जिसको एक पट्रोल लीडर के रूप में 6 महीने से ज्यादा समय का अनुभव हो, ट्रूप लीडर चुना जा सकता है। द्वितीय सोपान बैज जिस पट्रोल लीडर के पास हो, उसको प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ट्रूप लीडर का चुनाव स्काउट मास्टर द्वारा कोर्ट ऑफ ऑनर (Court of Honour) के साथ विचार-विमर्श करके किया जाना चाहिए। ट्रूप लीडर को स्काउट पौशाक पहननी चाहिए और उसके साथ ही ऊन या कॉटन से बनी तीन हरे रंग की लम्बवत पट्टियाँ (प्रत्येक 6 सेमी॰ लंबी व 1.5 सेमी॰ चौड़ी) बायीं जेब पर पहनी जानी चाहिए। बीच वाली पट्टी सदस्यता बैज के नीचे और अन्य दो पट्टियाँ सदस्यता बैज के दोनों तरफ होती हैं और ट्रूप लीडर का बैज सर्विस स्टार के ऊपर शर्ट के बायीं जेब के ऊपर या उसी जगह जर्सी पर पहना जाना चाहिए। ट्रूप लीडर, स्काउट मास्टर और सहायक स्काउट मास्टर के लिए एक सक्रिय सहायक के रूप में भूमिका निभाता है और वयस्क यूनिट लीडर की अनुपस्थिति में यूनिट का नेतृत्व करता है। ट्रूप लीडर का बैज आयताकार होता है जिस पर हरे पृष्ठभूमि पर पीला संप्रतीक होता है। हरे पृष्ठभूमि के चारों और पीले रंग की वलय (रिंग) होती है और संप्रतीक के बायीं ओर हरे रंग की तीन पट्टियाँ लम्बवत होती हैं। यह बैज 1.5 सेमी॰ चौड़ा और 5 सेमी॰ लंबा होता है।
iv.सहायक टोली नायक (Assistant Troop Leader)
पट्रोल लीडर्स में से किसी एक ट्रूप लीडर को, जिसको एक पट्रोल लीडर के रूप में 6 महीने से ज्यादा समय का अनुभव हो, असिस्टेंट ट्रूप लीडर चुना जाता है। जिस पट्रोल लीडर के पास द्वितीय सोपान बैज हो, उसको प्राथमिकता दी जानी चाहिए। असिस्टेंट ट्रूप लीडर का चुनाव स्काउट मास्टर द्वारा कोर्ट ऑफ ऑनर (Court of Honour) के साथ विचार-विमर्श करके किया जाना चाहिए। Assistant Troop Leader को स्काउट पौशाक पहननी चाहिए और उसके साथ ही शर्ट की बायीं जेब पर दो हरी पट्टियाँ लगानी चाहिए और असिस्टेंट ट्रूप लीडर का बैज बायीं जेब के ऊपर सर्विस स्टार के ऊपर पहनना चाहिए। असिस्टेंट ट्रूप लीडर, अपने ट्रूप लीडर का सहायक होता है और ट्रूप लीडर जैसे दिशा निर्देश देता है, उनकी पालना करता है। असिस्टेंट ट्रूप लीडर का बैज आयताकार होता है जिस पर एक वृताकार गोले में स्काउट संप्रतीक होता है और संप्रतीक के बायीं ओर हरे रंग की तीन लम्बवत पट्टियाँ होती हैं।
V. दल नायक (PATROL LEADER) :
प्रत्येक पट्रोल का एक पट्रोल लीडर होता है। पट्रोल लीडर एक स्काउट होता है जिसको कोर्ट ऑफ ऑनर की अनुमति से स्काउट मास्टर द्वारा नियुक्त किया जाता है। पट्रोल लीडर स्काउट यूनिफ़ोर्म ही पहनता है। इसके साथ ही ऊन या कॉटन की 6 सेमी॰ लंबी व 1.5 सेमी॰ चौड़ी हरे रंग की दो पट्टियाँ बायीं जेब पर लगे सदस्यता बैज के दोनों तरफ पहनी जाती हैं। पट्रोल का झण्डा पट्रोल लीडर रखता है।
VI. द्वितीय (SECOND) :-
प्रत्येक पट्रोल में दूसरा (Second) होता है। Second, पट्रोल लीडर के द्वारा स्काउट मास्टर और कोर्ट ऑफ ऑनर की स्वीकृति के बाद चुना जाता है। Second, पट्रोल लीडर की सहायता करता है तथा पट्रोल लीडर की अनुपस्थिति में पट्रोल लीडर के कार्य करता है। Second, स्काउट यूनिफ़ोर्म पहनता है। उसके साथ ही ऊन या कॉटन की 6 सेमी॰ लंबी व 1.5 सेमी॰ चौड़ी हरे रंग की एक पट्टी बायीं जेब पर लगे सदस्यता बैज के दायीं ओर पहनता है।
VII. COURT OF HONOUR
प्रत्येक ट्रूप का एक Court of Honour होता है। Court of Honour में ट्रूप लीडर, असिस्टेंट ट्रूप लीडर तथा पट्रोल लीडर्स होते हैं। अनुशासनात्मक मामलों को छोडकर, Seconds को भी कोर्ट ऑफ ऑनर के सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। ट्रूप लीडर, असिस्टेंट ट्रूप लीडर या कोई एक पट्रोल लीडर एक अध्यक्ष होगा तथा कोई एक सदस्य सचिव (Secretary) होगा। कोर्ट ऑफ ऑनर, गतिविधियों की योजना बनाता है और ट्रूप के आंतरिक मामलों को सुलझाता है। कोर्ट ऑफ ऑनर वित्तीय तथा अनुशासन के मामलों को भी देखता है। स्काउट मास्टर तथा सहायक स्काउट मास्टर कोर्ट ऑफ ऑनर के लिए सलाहकार होते हैं।
VIII. PATROL-IN-COUNCIL
प्रत्येक पट्रोल का Patrol-in-council होता है। इसमें पट्रोल के सभी सदस्य शामिल होते हैं। पट्रोल लीडर इसका अध्यक्ष होता है। पट्रोल के सभी मामलों को Patrol-in-council में सुलझाया जाता है।