साधारण से साधारण एवं असाध्य रोगों में भी अगर चिकित्सा के किसी पद्धति का पहला या आखिरी विचार बनाया जाए, तो वो निश्चित ही आयुर्वेद होगा, जिस तरह सनातन पद्धति को संजोए रखने के लिए पुराणों में अथाह विधा के आयाम शामिल किए गए है, ठीक उसी प्रकार शरीर, आत्मा, इन्द्रिय, मन सबके स्वाथ्य की कामना के लिए आयुर्वेद में तरह तरह के विधाओ को संजोया गया है। प्राचीन से प्राचीन औषधियां उपक्रम और तंत्रो को संजोने में जतन आयुर्वेद शुरू से प्रयास रत है।
उद्देश्य यह भी है, किसी भी छोटी या भयावह ब्याधि में आयुर्वेद रूपी ससक्त एवं आसान औषधियों एवं नीतियों को हर कोई समझे 80% ब्याधिया ऐसी है हमारा उद्देश्य यह है कि लोगो को कुछ इस प्रकार शिक्षित किया जाय कि एक बार जतन आयुर्वेद में आने के बाद साधारण रोगों का नाश मरीज स्वयम कर पाए, इसके लिए उन्हें किसी भी प्रकार का सेवा-राशि का भुगतान नही करना होगा।
जतन आयुर्वेद हर उस ब्यक्ति के लिए खड़ा है, जो शारीरिक एवं मानसिक ब्याधि से ग्रस्त है, धनवान हो या धन के अभाव में हो , पहली बार चिकित्सा ले रहा हो या बड़े बड़े अस्पतालों में लाखों लाख रुपये गवाने के बाद हार गया हो। हमारा उद्देश्य ये है कि हम आपको किसी भी परिस्थिति में ठीक से बेहतर की ओर, दुःख से सुख की ओर तथा सुख से आराम की तरफ ले चले।
वैध अवंतिका सिंह आयुर्वेद जगत की जानी मानी हस्ती रही है | आयुर्वेदाचार्य के ब्यवसायिक सत्र को पूरा करने के बाद आयुर्वेद पद्धति के निचे काम करने के द्रिन्ध संकल्प ने उन्हें बाबा रामदेव से मिलवाया | लगातार 5 साल तक 10000 से ज्यादा मरीजो को स्वास्थ्य लाभ देते हुए बिहार के दो-दो जिले रोहतास (डेहरी ऑन सोन) एवं जेहानाबाद के पतंजलि जिला चिकित्सालय के मुख्य बैध के कुर्सी पर आसीन रही | उसके बाद भी और आगे बढ़ने की इच्छा ने उन्हें स्तीफा देने पर बाध्य किया तब जब की सीधे सीधे बाबा रामदेव को यह इस्तीफा स्वीकार्य नहीं था | इसके बाद पंचकर्म की बिद्य के लिए केरल हिमाचल का रुख किया | जहा उनको केरलीय ब्राह्मण राजवैध परिवार के महाज्ञानी गुरु से सिक्षा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | उसके बाद बिहार आ के उन्होंने जतन आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्र की नीव बिक्रमगंज (रोहतास) में ०३ जुलाई २०१८ को डाली फिर दूसरी सखा डेहरी ऑन सोन (रोहतास) में दो साल बाद १३.११.२०२० को स्थापित किया |
श्रीमती सिंह की कुछ ख़ास उपलब्धिया...
1.जहा लोग आयुर्वेद को ठीक से समझन नहीं पा रहे थे, वह श्रीमती सिंह ने कितने हाई बी.पी, इन्सुलिन डिपेंडेंट सुगर पेशेंट, थाइरोइड, पथरी, गाँठ, बाँझपन, चरम रोग को, गर्भाशय गोला, ल्युकोरिया दांत, आँखो के भी उच्चतम आधुनिक चिकिसा एवं होस्पिटल से निराश लौटे मरीज को समूर्ण चिकित्सा दे के स्वास्थ्य लाभ दिया |
2.लगातार 5 सालो के भीतर 10000 से ऊपर मरीजो को आरोग्य दिया,जिसमे कैंसर, किडनी फेलियर, हार्ट ब्लॉकेज, दमा, टी.बी., स्वाश रोग, लकवा, कम्पवात का भी सफल उपचार दिया|
3.मनोरोगियो पर भी आयुर्वेद की बिभिन्न चिकित्सा प्रणाली से सम्पूर्ण उपचार दिया |
4.रोगियों के हर समस्या हर बात को सुनना समझना और सवालो को जबाब देना और उनको बिना किसी हतोत्सहना के उनका उपचार देना अपनी कार्यशैली में शामिल रखा है |
अनुभव
२०१३ से अब तक श्रीमती सिंह ने लगातार छोटी से बड़ी और जानलेवा बीमारियों पर काम करते आई है
जिनमे ऐसे भी रोग शामिल है जो लगातार अन्य चिकित्सा सिधान्तो को फॉलो करते हुए जीर्ण –शीर्ण एवं असाध्य हो गए |जैसे सियाटिका ,गठिया,टी.बी.,दमा,माइग्रेन I
ऐसे भी जिनको हर जगह ऑपरेशन के लिए ही बोला गया |जैसे फिब्र्योइड ,सिस्ट ,गाँठ,कही भी हड्डी का बढ़ना,पथरी,बवाशिर ,हर्निया |
ऐसे जिनको कभी स्वयं के संतान नहीं हो सकते अप्राकृतिक तरीके का सहारा लेने को कहा गया ऐसो को सम्पूर्ण आयुर्वेदीय उपचार एवं नार्मल डिलीवरी के लिए भी सकारात्मक उपाय किया गया
चेहरे के रंग,दुबलापन,मोटापा ,बालो का पकना, झड़ना |
जीवन पर्यंत बने रहने वाले रोग का 2-3 सालो में समुल्नाश जैसे ब्लड प्रेशर ,सुगर ,थाइरोइड |
आँखों के लगभग रोग ,दांत के बहुत रोग का ऑपरेशन रुकवाया और सम्पूर्ण उपचार दिया |
श्री मनोहर मेहता जतन आयुर्वेद के करता धर्ता है | वैसे तो मेहता जी पेशे से फैशन डिज़ाइनर है जिन्होंने अपनी निफ्ट की पढाई हिमाचल के काँगड़ा जिले में पूरी करी है, मगर आयुर्वेद एवं औषधियों से गहरे लगाव ने इन्हें इस क्षेत्र में उतरने का मौका दिया | ब्यक्तित्व के साधारण और कर्तव्य एवं मरीजो के प्रति बहुत ईमानदार इन्सान है आयुर्वेद को भीतर से जानने की जिज्ञासा ने इन्हें पंचकर्म के ज्ञान को समझन लेने का सौभाग्य मिला इन्होने ने भी एक थेरेपिस्ट की सफल भूमिका के लिए पंचकर्म के थेरेपिस्ट का एक साल अनुभव एवं शिक्षा दीक्षा स्वयं भी लिया और इसमें माहिर भी हुए
मिलावटी और हानिकारक खाद्य एवं पेय पदार्थो को हर वैद्य की तरह श्रीमती सिंह का मानना है की मिलावटी और बनावटी चीजो से सेहत एवं आयु का सबसे बड़ा नुकसान होता है उस के शुद्ध एवं आयुर्वेदीय बिकल्प मेहता जी के वजह से आज जतन आयुर्वेद में उपलब्ध है
यहाँ पे मौजूद कुछ अमृत रूपी खजाने जो शायद ही कही से मिले |
देशी घी –बिश्व के सबसे बड़े गौशाला से हमारी देशी गौमाता के दूध का सुध घी |
स्वर्णप्राशन –शुद्ध सोना एवं जरुरी धतुवो औषधियों से मिल के बना हुआ एक अवलेह [चाटने लायक]ऐसा योग जो बच्चो में होने वाले बिभिन्न प्रकार के रोग का नाश में,शारीरिक बिकाश,मस्तिस्क बिकाश में कारगर है| जो कृत्रिम टीकाकरण से कई एक गुना श्रेष्ठ है
केरल की धरती में तैयार औषध योग ,च्यवनप्राश ,शैम्पू |
दूध में घोलने वाले कृत्रिम पाउडर से लाख गुना उत्तम आश्रम का बना हुआ मेधा पौष्टिक रसायन |
आश्रम में तैयार चटाई,ताम्बे के पात्र,बस्ती यंत्र ,नेति यंत्र |