एनआरएलएम - सामाजिक समावेशन प्रोटोकाल
एनआरएलएम का मुख्य केंद्र बिंदु अति गरीब से गरीब व्यक्तियों का शीघ्र समावेशन कर समाज की मुख्यधारा में लाने का है, साथ ही साथ परित्यक्त, अनुसूचित जाती, अनु.जनजाति, विशेष परित्यक्त, ट्राइबल समुदाय, महिलायों द्वारा संचालित परिवार, बुजुर्ग व्यक्ति जो किसी न किसी शारीरिक अछमता के साथ रह रहे है | अल्पसंख्यक समुदाय, पहाड़ी, दुर्गम छेत्र में रहने वाले, एच.आई.वी. एड्स के मरीज, ट्रांस जेंडर, मेला धोने वाले एवं उनके परिवारों या विशेष खतरनाक बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों को समावेशित करना है|
एनआरएलएम् के उद्देश्यों के अनुसार उपरोक्त सभी व्यक्तियों एवं समुदायों का पूर्ण रूप से सामाजिक समावेशन प्राप्त करना है, इंटेंसिव ब्लाको में कार्य प्रारंभ करने के आगामी 18 महीनो में अति गरीब एवं परित्यक्त समुदाय को समावेशित करने की प्रक्रिया संपन्न कर लेनी होगी|
इन समुदायों एवं समूहों को संस्थागत रूप से कार्य करने में तथा आजीविका के साधनों में वृधि करके गरीबी दूर करने के उद्देश्यों में मदद करेगा|
संवेदीकरण एवं तैयारी करना
आदिवासियों,अशक्तो, मैला धोने वाले, और पीवीटीजी (मुख्य रूप से वंचित आदिवासी समुदाय) के हितो से जुड़े कार्यो को इस स्तर तक बढ़ाना की वे मुख्य धरा में शामिल हो सके इसके लिए उनका सार्वभौमिक रूप से निरंतर सामाजिक गतिशीलता करना |
अति गरीब एवं परित्यक्तो के समावेशन हेतु विशेष ध्यान रखते हुए रूचि के अनुसार समय की अवधी, नीतियों एवं फण्ड का निर्धारण करना| इसके अंतर्गत निमन्लिखित बाते ध्यान रखी जाएँगी –
1. इन समुदायों के समूहों में संस्थागत नीतियों तथा पंचसूत्रा की प्रक्रिया में ढील दी जा सकती है, चुकी यह समूह बुजुर्गो एवं दिव्यंगो के है अतेह इनमे सदस्यों की संख्या 5 से 20 ही सकती है, तथा महिला एवं पुरुष दोनों ही सदस्य हो सकते है|
2. बुजुर्ग एवं दिव्यांग बर्तमान बने समूहों में यदि शामिल है तो वे उन समूहों में बने रह सकते है अथवा उनके अपने नए समूहों में वे शामिल हो सकते है|
3. जो दिव्यांग अपने देखरेख में समर्थ नही है वे अपने केयर टेकर के माध्यम से समूह के सदस्य बन सकते है|
4. इनके समूहों के गठन हेतु अति गरीब एवं परित्यक्त व्यक्तियों (बुजुर्ग एवं दिव्यांग) को वर्रियता दी जाएगी |
- सीआरपी, बरिष्ठ सीआरपी एवं प्रशिक्षको के चक्रों में वृधि करना तथा सीआरपी के प्रोटोकाल का पुनरवलोकन करना
- सक्रीय महिला एवं ग्राम सगठनो के साथ समावेशन के बिन्दुओ पर चर्चा करना|
- ब्लाक स्तर पर कार्य शुरू करने के 18 महीनो के पश्चात् कम से कम 80 प्रतिशत समावेशन की स्थिति को प्राप्त करना ताकि ग्राम संगठन और सीएलऍफ़ को फंडिंग प्रदान की जा सके
- नो एक्सक्लूशन
- समूह के रूप में कार्य करने हेतु वंचित सदस्यों को गतिशील करना एवं निश्चित समयावधि के अंतर्गत नेत्रत्व प्रदान करना
- अति गरीब जो समूह के सदस्य है, उनकी स्थिति को सीआरपी चक्र समाप्त होने के पश्चात् ग्राम सभा तथा आम सभा में प्रस्तुत करना एवं ग्राम संगठन की प्रगति को वार्षिक स्तरपर प्रस्तुत करना एवं जो डाटा उपलब्ध हो उसको एम्आईएस पर दर्ज किया जाए|
5. स्वयं सहायता समूह के जो फेडरेशन पहले से है वे इन विशेष समूहों को अपने साथ सम्मलित करेंगे, इन विशेष समूहों के फेडरेशन अलग से भी बनाये जा सकते है|
6. 1 या 2 जिम्मेदार सक्रीय व्यक्तियों की पहचान करना जो की इनके सामाजिक विकास, अभिसरण, जेंडर, एवं समावेशन की प्रक्रिया में सहायक हो सके, साथ ही साथ आंतरिक सीआरपी के भत्तो को समय से प्रदान कर सके |
7. आर ऍफ़ , सी आई ऍफ़, वी आर ऍफ़ और एल ऍफ़ के अतिरिक्त आवश्यकता अनुसार अन्य फण्ड की व्यबस्था करना| यह ध्यान दिया जाना चाहिए की सी आई ऍफ़, वी आर ऍफ़ और एल ऍफ़ इन सामुदिक संस्थाओ के सदस्यों के अनुसार वंचित सदस्य का एंटाइटलमेंट 50 प्रतिशत एवं पिविटीजी का 100 प्रतिशत अधिक होगा
8. बैंक से जोड़ने हेतु प्राथमिकता देना
9. इन समूहों तथा समुदायों को इनकी योग्यता अनुसार सभी योजनाओ से जोड़ना
10.सूक्ष्म नियोजन की प्रक्रियाओ में वंचितों को प्राथमिकता देना
11. ग्राम स्तर पर गरीबो एवं वंचितों की स्थितियों का मूल्याङ्कन करते हुए गरीबी कम करने हेतु योजना बनाने की शुरुआत करना (वीआरपी) तथा इसके लिए फण्ड उपलब्ध करना
12. सभी कर्मचारियों के सम्बेदिकरण हेतु राज्य एवं जिला स्तर पर संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन करना
13. राज्य, जिला एवं समुदाय स्तर पर प्रशिक्षको एवं सन्दर्भ व्यक्तियों का चयन करना साथ ही साथ प्रशिक्षण माडयूल एवं पठन पाठन सामग्री का निर्माण करना
14. सीअरपी चक्र के प्रारंभ के साथ ही उपलब्ध सीआरपी, सीनिअर सीआरपी एवं सामुदिक प्रशिक्षको के शेक्षिक भ्रमण एवं इमर्सन करना ताकि गरीबो एवं वंचितों का समावेशन पूर्ण किया जा सके|
15. सन्दर्भ सेल का निर्माण करना साथ ही साथ नए पीआरपी एवं सीआरपी का चयन करके समावेशन हेतु शीघ्र कार्य प्रारभ करना|
16. अन्य विशेसग्य संस्थाओ के साथ साझेदारी करके तकनीकी सहयोग प्राप्त करना
17. वर्तमान समुदाय के साथ साथ सक्रीय महिलाओ, समुदाय के नेतृत्व तथा धरा में फेडरेशन के संवेदीकरण के लिए 3 महीने का कैम्पेन की योजना बनाना ताकि एनआरएलएम् के उद्देश्यों एवं एजेंडा के अनुसार अति गरीब एवं परित्यक्त का मुख्य धारा में समावेशन किया जा सके|
ग्राम एवं संकूल स्तर पर सामाजिक समावेशन हेतु विशेष प्रोटोकाल
1. सीअरपी चक्र हेतु गाँव को तैयार करना, सीअरपी द्वारा सभी अति गरीब एवं वंचित समुदाय के सदस्यों को गतिशील करने हेतु आगे बढ़ना| बर्तमान समूहों को मजबूती प्रदान करना, आम सभा में समूह के सदस्यों की गरीबी के स्तर को प्रस्तुत करना| सक्रीय महिला की पहचान करके उन्हें प्रशिक्षित करना तथा पीआरपी द्वारा समूहों में और सदस्यों को गतिशील कराना |
2. समूहों को आर ऍफ़ देना |
3. सामुदाइक प्रशिक्षक चक्र के अंतर्गत सदस्यों, नेताओ एवं कैडर को समावेशन हेतु अति गरीब एवं वंचितों को सूक्ष्म नियोजन प्रक्रिया में प्राथमिकता देना |
4. इन समूहों को वीआरऍफ़ उपलब्ध करना, बैंक मेंक खाता खुलवाना एवं बीमा योजना का लाभ दिलवाना |
5. आवश्यकता अनुसार बुजुर्गो एवं दिव्यंगो के फेडरेशन बनाने में सहायता करना एवं आजीविका नियोजन प्रक्रिया करके आजीविका फण्ड प्राप्त करना |
6. समूहो हेतु अभिशरण योजना बनाना एवं सहायता करना – जिसमे निम्न बिंदु शामिल होंगे ..
- वृधावस्था पेंशन, दिव्यांग एवं बिधवा पेंशन प्रदान कराना एवं मनरेगा, आईसीडीएस, आवास, जन धन,जेएसवाय, एवं दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना जैसी सरकारी योजनाओ का लाभ वंचितों के परिवारों को दिलवाना|
- कृषि एवं ग्रामीण विकास की योजनाओ का लाभ दिलाना ताकि उनके जीवन स्तर में सुधर हो सके
- ऍफ़एनएचडब्लू और वाश की गतिबिधियो हेतु योजना बनाना
- आदिवासी समुदाय, महादलित एवं पिविटीजी हेतु विशेष योजना बनाना
- ग्राम पंचायत के साथ कार्य करने हेतु योजना बनाना
- गैर सरकारी संगठनों एवं कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के अंतर्गत कार्य करने हेतु विशेष योजनाये बनाना
उपरोक्त सभी योजनाओ को ग्राम एवं संकुल स्तर पर समेकित करना ताकि अन्य विभागों एवं साझेदारों के साथ फलो-अप किया जा सके |
बुजुर्गो के समावेशन हेतु विशेष प्रोटोकाल
इस बात के समुचित प्रमाण है की बुजुर्गो की स्वयं की संस्थाए उनकी अपनी स्थिति में बदलाव ला सकते है| वर्तमान समय में बुजुर्ग की उनके अपने समुदाय आधारित संस्थाए सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ी है|
बुजुर्गो के समूहों में सदस्यता हेतु अहर्ता
1. वे सभी महिला/पुरुष जो 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के है वो बुजुर्ग समूह के सदस्य हो सकते है | एनआरएलएम् के द्वारा सभी सामुदिक फण्ड जैसे आरऍफ़, वीआरऍफ़, सीआईऍफ़ , और एल ऍफ़ प्रदान किया जायेगा
2. यदि घर में 1 से अधिक बुजुर्ग है तो वे सभी ई- एसएचजी के सदस्य हो सकते है|
3. यदि 1 बुजुर्ग महिला पहले से ही समूह की सदस्य है तो उसको इस बात की स्वतंत्रता होगी की वो उसी समूह में बनी रहे अथवा नए ई-एसएचजी की सदस्य बन जाए दोनों ही स्थिति में उसको समस्त लाभ दिए जायेंगे|
बुजुर्गो की पहचान करने, उन्हें गतिशील बनाने एवं संस्थागत रूप से सुधरण करने हेतु प्रमुख समावेशी चरण
मिशन स्तर पर,
1.राज्य, जिला और ब्लाक स्तर पर सभी कर्मचारियों का संवेदीकरण तथा सामुदिक कैडर उनके नेतृत्व एवं समूह के सदस्यों का अभिमुखीकरण करना
2. प्रशिक्षण माडयूल एवं पाठ्य सामग्री का विकास करना
- ई-एसएचजी की अभ्यास पुस्तिका तैयार करना
- संवेदीकरण एवं जागरूकता सम्बन्धी पाठ्य सामग्री का निर्माण करना
- सामुदिक कैडर हेतु बुजुर्गो के अधिकार एवं योजनाओ से जोड़ने हेतु प्रशिक्षण माडयूल बनाना
- सामुदिक कैडर हेतु बुजुर्गो की सामाजिक सुरक्षा,स्वस्थ एवं पोषण के सदर्भ में एक माडयूल का निर्माण करना
- बुजुर्गो की आजीविका के विकास पर आधारित एक सन्दर्भ माडयूल का निर्माण करना
- बुजुर्गो के मुद्दों पर सीआरपी का प्रशिक्षण एवं संवेदीकरण करना|
ग्राम एवं संकुल स्तर पर
प्रथम सीआरपी चक्र के समय ही बुजुर्गो की पहचान करना तत्पश्चात उनकी गतीशेलता की पहल करना
- बुजुर्गो को एसएचजी (ई-एसएचजी ) में जाने हेतु प्रेरित करना
- सक्रीय एवं सहायता प्राप्त बुजुर्गो को पूर्ण समावेशन प्राप्त करने हेतु गतिशील करना
- secc डाटा के द्वारा प्राप्त बुजुर्गो को पहले, तत्पश्चात sc/st, सिंगल, PwD को शामिल करना
- यदि ग्राम स्तर पर पूर्व में ही कोई ई-एसएचजी है तो उसको स्वीकार करना
- सुबिधा अनुसार पंच्सुत्र का प्रत्येक ई-एसएचजी में पालन करना
- दो से तीन सक्रीय महिलाओ का चुनाव करना तत्पश्चात उन क्षत्रो में शेक्षिक भ्रमण/ इमर्सन की योजना बनाना ताकि बाद में इनको बुजुर्गो के पूर्ण समावेशन करने की प्रक्रिया में कैडर के रूप में तैनाती की जा सके
- आंगनबाड़ी एवं आशा बहु को बुजुर्गो के मुद्दों पर कार्य करने हेतु सम्मलित करना, तथा वर्तमान कैडर/सीनिअर सीआरपी को आदेशित करना
- योजना अनुसार इ-एसएचजी सदस्यो, इनके नेतृत्व एवं कैडर की क्षमता का विकास करना
नोट – कार्य क्षेत्रो में तीन प्रकार के बुजुर्ग देखने को मिलेंगे
1. सक्रीय (कार्यशील बुजुर्ग) – ये बुजुर्ग गतिशील होंगे अपनी आजीविका हेतु कार्य कर रहे होते है , इनका स्वास्थ्य अच्छा होता है तथा शारीरिक रूप से सक्षम होते है |
2. (ASSISTED) ये बुजुर्ग गतिशील तो होते है परन्तु इन्हें कुछ समस्स्ययें होती है जैसे जोड़ो में दर्द, टेंसन, सुगर की बीमारी, की वजह से निरंतर दवा एवं सहायत की आवश्यकता होती है, एवं आजीविका के कार्यों में भीं कठिनाई होती है|
3. परित्यक्त/बहिष्कृत बुजुर्ग – ये बुजुर्ग अपनी दैनिक दिनचर्या बिना किसी की सहायत से नही कर पाते है|
उपरोक्त तथ्यों के अनुसार इन बुजुर्गो की क्षमता विकास की योजना बनानी चाहिए |
- ई-एसएचजी को आरऍफ़ देना
-एसएचजी से ग्राम संगठन बनाने में मदद करना तथा सीआईऍफ़, -वीआरऍफ़, एलऍफ़ प्रदान करके उच्च स्तरीय संघ का निर्माण करवाना|
-सोशल एक्शन कमिटी की तर्ज पर ई-एसएचजी को संगठित करने हेतु उप समिती बनाना
-बुजुर्गो की गरीबी एवं वंचित होने की दशा में सुधर करने हेतु वीआरपी प्लान बनाना एवं उसमे मदद करना|
-पुनर्वास में बुजुर्गो की सहायता करना |
-बुजुर्गो की क्षमता पर आधारित आजीविका के साधनों को उपलब्ध करना |
-बुजुर्ग स्वाम सहायत समूहों द्वारा अपने मुद्दों पर पैरवी करने तथा एकजुट होने के लिए मदद करना |
-ग्राम पंचायत/संकुल/ब्लाक स्तर पर इनके विशिष्ट संघो का निर्माण करना |
इस बात का पर्याप्त साक्ष्य है की PwD की संस्थाएं स्वयं के समूहों के विकास हेतु अधिक संजीदगी से कार्य करती है
Pw D एसएचजी हेतु योग्यताये
वह व्यक्ति जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से बाधित/मंधित होते है उन्हें PwD कहते है| जैसे मूक वधिर, मंद बुध्ही, कुश्ठ रोगी, दिमागी मरीज विकलांग एवं अन्य प्रकार की शारीरिक अक्षमताओ से ग्रसित व्यक्ति को Pw D कह सकते है| वे सभी Pw D जिनकी आयु एक साल से अधिक एवं दिव्यन्गता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है तो वह PwD एसएचजी का सदस्य होगा | इन PwD समूहों को आरऍफ़, सीआईऍफ़, वीआरऍफ़ एलऍफ़ पाने के पात्र होंगे
एनआर एल एम् एजेंडा के अनुसार
1. एक से 17 वर्ष की आयु का व्यक्ति जो की दिव्यांग है वो अपनी केयर टेकर के माध्यम से PwD एसएचजी का सदस्य हो सकता है, एवं इनको सभी प्रकार के लाभ प्रदान किये जायेंगे जिसकी निगरानी भी होनी चाहिए |
2. यदि एक घर में एक से अधिक PwD सदस्य है तो वे सभी अन्य PwD एसएचजी के सदस्य हो सकते है
3. यदि कोई महिला दिव्यांग पहले से ही एसएच
4. जी की सदस्य है तो उसको यह स्वतंत्रता होगी की वह उसी समूह में रहे या नए समूह में शामिल हो जाए, दोनों ही स्थिति में उसे लाभ मिलते रहेंगे
PwD की पहचान करते हुए उन्हें गतिशील करना एवं संस्थागत रूप से समावेशित करने के प्रमुख चरण|
मिशन स्तर पर
1.राज्य, जिला और ब्लाक स्तर पर सभी कर्मचारियों का संवेदीकरण तथा सामुदिक कैडर उनके नेतृत्व एवं समूह के सदस्यों का अभिमुखीकरण करना
2. प्रशिक्षण माडयूल एवं पाठ्य सामग्री का विकास करना
- Pw D-एसएचजी की अभ्यास पुस्तिका तैयार करना
- संवेदीकरण एवं जागरूकता सम्बन्धी पाठ्य सामग्री का निर्माण करना
- सामुदिक कैडर हेतु Pw D के अधिकार एवं योजनाओ से जोड़ने हेतु प्रशिक्षण माडयूल बनाना
- सामुदिक कैडर हेतु Pw D की सामाजिक सुरक्षा,स्वस्थ एवं पोषण के सदर्भ में एक माडयूल का निर्माण करना
- Pw D की आजीविका के विकास पर आधारित एक सन्दर्भ माडयूल का निर्माण करना
- Pw D के मुद्दों पर सीआरपी का प्रशिक्षण एवं संवेदीकरण करना|
ग्राम एवं संकुल स्तर पर
प्रथम सीआरपी चक्र के समय ही Pw D की पहचान करना तत्पश्चात उनकी गतीशेलता की पहल करना
- Pw D को एसएचजी में जाने हेतु प्रेरित करना
- सक्रीय एवं सहायता प्राप्त Pw D को पूर्ण समावेशन प्राप्त करने हेतु गतिशील करना
- secc डाटा के द्वारा प्राप्त Pw D को पहले, तत्पश्चात sc/st, सिंगल, को शामिल करना
- यदि ग्राम स्तर पर पूर्व में ही कोई Pw D -एसएचजी है तो उसको स्वीकार करना
- सुबिधा अनुसार पंच्सुत्र का प्रत्येक Pw D -एसएचजी में पालन करना
- दो से तीन सक्रीय महिलाओ का चुनाव करना तत्पश्चात उन क्षत्रो में शेक्षिक भ्रमण/ इमर्सन की योजना बनाना ताकि बाद में इनको Pw D के पूर्ण समावेशन करने की प्रक्रिया में कैडर के रूप में तैनाती की जा सके
- आंगनबाड़ी एवं आशा बहु को Pw D के मुद्दों पर कार्य करने हेतु सम्मलित करना, तथा वर्तमान कैडर/सीनिअर सीआरपी को आदेशित करना
- योजना अनुसार Pw D -एसएचजी सदस्यो, इनके नेतृत्व एवं कैडर की क्षमता का विकास करना
- PwD -एसएचजी को आरऍफ़ देना
- Pw D -एसएचजी से ग्राम संगठन बनाने में मदद करना तथा सीआईऍफ़, -वीआरऍफ़, एलऍफ़ प्रदान करके उच्च स्तरीय संघ का निर्माण करवाना|
- -सोशल एक्शन कमिटी की तर्ज पर Pw D -एसएचजी को संगठित करने हेतु उप समिती बनाना
- Pw D की गरीबी एवं वंचित होने की दशा में सुधर करने हेतु वीआरपी प्लान बनाना एवं उसमे मदद करना|
- -पुनर्वास में Pw D की सहायता करना |
- Pw D की क्षमता पर आधारित आजीविका के साधनों को उपलब्ध करना |
- Pw D स्वाम सहायत समूहों द्वारा अपने मुद्दों पर पैरवी करने तथा एकजुट होने के लिए मदद करना |
- -ग्राम पंचायत/संकुल/ब्लाक स्तर पर इनके विशिष्ट संघो का निर्माण करना |
आदिवासी समुदायों के समावेशन हेतु विशेष प्रोटोकाल
एनआरएलएम् सामान्य तौर पर आदिवासी समुदाय से परिचित है परन्तु खास तौर पर वंचित आदिवासी समुदायों को संवेदना एवं सहायता की आवश्यकता है| पारंपरिक रूप से अभी तक इन समुदायों की देखरेख भौतिक एवं सामाजिक रूप से पंचायतो के द्वारा देखा जाता रहा है| उन क्षत्रो में जहाँ आदिवासी निवास करते है संबिधान के अंतर्गत उन्हें सामाजिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना होता है, साथ ही साथ खास तौर पर वंचित आदिवासी समुदाय के आन्तरिक असमानताओं, व्यव्हार तथा परिस्थितियों को देखते हुए विशेष प्रोटोकाल की आवश्यकता है| यह बात विशेष रूप से देखने योग्य है की हम तीन प्रकार के आदिवासी समुदाय के साथ कार्य कर रहे है –विशिष्ट आदिवासी क्षेत्र जिनमे उनका निवास स्थान है या नहीं और दुसरे सामान्य तौर पर गाँव में रहने वाले आदिवासी समुदाय|
साथ ही साथ खास तौर पर परित्यक्त एवं वंचित समुदाय जो अपने क्षेत्र में मिलते है अथवा नहीं मिलते है|
उपरोक्त सदर्भ में आदिवासियों के समावेशन हेतु विशेष प्रोटोकाल निमन्लिखित हैं |
1. आदिवासी समुदायों की सामाजिक आर्थिक एवं संस्कितिक स्थितियों का अवलोकन करते हुए वर्तमन में चल रही योजनाओं से जोड़ना तथा रूचि अनुसार परियोजना की अवधी, प्रक्रिया नीतियों और फंड्स का निर्धारण करना| इसके अंतर्गत ---
2. आदिवासी समुदाय जो घरो में निवास करते है एवं साथ ही साथ PVTG के साथ कार्य करने को प्राथमिकता दी जाएगी
1. इनके समूह बनाने हेतु सदस्यता में ढील दी जाएगी – इनके समूह में 5-20 सदस्य हो सकते है, समूह में बचत करने की प्रक्रिया, एवं पंच्सुत्र की पलना करने में ढील दी जा सकती है
2. इनके समूहों की गतिविधियों का निर्धारण PVTG एवं आदिवासी समुदायों पर आधारित होगा जिसमें मुख्य रूप से उनकी स्थानीय समस्याए जैसे खाद्य असुरक्षा, कुपोषण एवं उनकी एकजुटता से सम्बंधित होगी
3. विशेष रूप से PVTG एवं अन्य घरों में रहने वाले आदिवासियों को गतिशील करने हेतु प्राथमिकता दी जाएगी
- सीआरपी, बरिष्ठ सीआरपी एवं प्रशिक्षको के चक्रों में वृधि करना तथा सीआरपी के प्रोटोकाल का पुनरवलोकन करना
- सक्रीय महिला एवं ग्राम सगठनो के साथ समावेशन के बिन्दुओ पर चर्चा करना|
- ब्लाक स्तर पर कार्य शुरू करने के 18 महीनो के पश्चात् कम से कम 80 प्रतिशत समावेशन की स्थिति को प्राप्त करना ताकि ग्राम संगठन और सीएलऍफ़ को फंडिंग प्रदान की जा सके
- नो एक्सक्लूशन
- समूह के रूप में कार्य करने हेतु वंचित सदस्यों को गतिशील करना एवं निश्चित समयावधि के अंतर्गत नेत्रत्व प्रदान करना
- अति गरीब जो समूह के सदस्य है, उनकी स्थिति को सीआरपी चक्र समाप्त होने के पश्चात् ग्राम सभा तथा आम सभा में प्रस्तुत करना एवं ग्राम संगठन की प्रगति को वार्षिक स्तरपर प्रस्तुत करना एवं जो डाटा उपलब्ध हो उसको एम्आईएस पर दर्ज किया जाए|
4. वर्तमान एसएचजी के संघ सामान्य समूहों के साथ साथ PVTG एवं आदिवासी समुदायों के समूहों का भी प्रतिनिधित्व करेंगे अथवा इन समुदायों को अपना संघ बनानने में मदद करेगा
5. एक से दो सक्रीय महिलाओ का चयन एवं प्रशिक्षण करना ताकि उनके माध्यम से इनके समूहों का सम्पूर्ण समावेशन एवं सामाजिक विकास प्राप्त किया जा सके इनके द्वारा आन्तरिक सीआरपी के मंदी को देने की प्रक्रिया की जा सकती है|
6. पारंपरिक नेत्रत्वा के माध्यम से उपरोक्त प्रयासों को पूर्ण करने हेतु सहयोग लिया जायेगा|
7. पारंपरिक कृषि की उत्पादकता को बढ़ने हेतु क्षमता एवं तकनीक पर ध्यान दिया जायेगा साथ ही साथ गैर वन आधारित उत्पाद (NON TIMBER) एवं सांस्कृतिक गतिविधियों स्वास्थ्य शिक्षा और पोषण पर ध्यान दिया जायेगा
8. आर ऍफ़ , सी आई ऍफ़, वी आर ऍफ़ और एल ऍफ़ के अतिरिक्त आवश्यकता अनुसार अन्य फण्ड की व्यबस्था करना| यह ध्यान दिया जाना चाहिए की सी आई ऍफ़, वी आर ऍफ़ और एल ऍफ़ इन सामुदिक संस्थाओ के सदस्यों के अनुसार वंचित सदस्य का एंटाइटलमेंट 50 प्रतिशत एवं पिविटीजी का 100 प्रतिशत अधिक होगा
9. बैंक से जोड़ने हेतु प्राथमिकता देना
10. इन समूहों तथा समुदायों को इनकी योग्यता अनुसार सभी योजनाओ से जोड़ना
12.सूक्ष्म नियोजन की प्रक्रियाओ में वंचितों को प्राथमिकता देना
13. जहाँ पर बैंक की सुविधाएँ कम है वहां अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से उनको सहायता प्रदान करना|
गरीबी/वल्नेर्बिलिटी का ग्राम स्तर पर मूल्याङ्कन करते हुए इसे कम या घटाने हेतु योजना बनाना तथा फंड्स को गतिशील करना- इसके अंतर्गत निमन्लिखित बिन्दुओं को केन्द्रित किया जायेगा|
- इन समुहों को भोजन पानी, लकड़ी के ईधन, तथा मूल अधिकारों तक इनकी पहुँच बढ़ाना
- विद्यालय शिक्षा, स्वस्थ सेवाओं की उपलब्धता तथा पारंपरिक औषधियों को सुनिश्चित करना
- जमीन एवं संसाधनों का निर्धारण तथा प्रयोग, वन आर्गेनिक कृषि/बघबानी तथा अन्य प्राकृतिक उत्पादों की उपलब्धता
- बीज बैंक, अनाज बैंक तथा अन्य संभव समुहिकीकरण के प्रयास करना
1. राज्य और जिला स्तर पर आदिवासी समुदायों के समवेशन और अभिशरण के सन्दर्भ में सभी कर्मचारियों का संवेदीकरण करना|
2. राज्य, जिला एवं सामुदिक स्तर पर प्रशिक्षकों एवं संदभ व्यक्तियों का चयन करना एवं प्रशिक्षण माडयूल के साथ साथ पाठ्य सामग्री का निर्माण करना
3. सीअरपी चक्र के प्रारंभ के साथ ही उपलब्ध सीआरपी, सीनिअर सीआरपी एवं सामुदिक प्रशिक्षको के शेक्षिक भ्रमण एवं इमर्सन करना ताकि आदिवासी तथा PVTG का समावेशन पूर्ण किया जा सके|
4. सन्दर्भ सेल का निर्माण करना साथ ही साथ नए पीआरपी एवं सीआरपी का चयन करके समावेशन हेतु शीघ्र कार्य प्रारभ करना|
5. अन्य विशेसग्य संस्थाओ के साथ साझेदारी करके तकनीकी सहयोग प्राप्त करना
6. वर्तमान समुदाय के साथ साथ सक्रीय महिलाओ, समुदाय के नेतृत्व तथा धरा में फेडरेशन के संवेदीकरण के लिए 3 महीने का कैम्पेन की योजना बनाना ताकि एनआरएलएम् के उद्देश्यों एवं एजेंडा के अनुसार आदिवासी समुदाय एवं PVTG का मुख्य धारा में समावेशन किया जा सके|
आदिवासी समुदायों हेतु विशिष्ट सामाजिक संवेशन प्रोटोकाल
ग्राम एवं संकुल स्तर पर
1. सीअरपी चक्र हेतु गाँव को तैयार करना, सीअरपी द्वारा सभी अति गरीब एवं वंचित समुदाय के सदस्यों को गतिशील करने हेतु आगे बढ़ना| बर्तमान समूहों को मजबूती प्रदान करना, आम सभा में समूह के सदस्यों की गरीबी के स्तर को प्रस्तुत करना| सक्रीय महिला की पहचान करके उन्हें प्रशिक्षित करना तथा पीआरपी द्वारा समूहों में और सदस्यों को गतिशील कराना |
2.समूहों को आर ऍफ़ देना |
3. सामुदाइक प्रशिक्षक चक्र के अंतर्गत सदस्यों, नेताओ एवं कैडर को समावेशन हेतु अति गरीब एवं वंचितों को सूक्ष्म नियोजन प्रक्रिया में प्राथमिकता देना |
4.इन समूहों को वीआरऍफ़ उपलब्ध करना, बैंक मेंक खाता खुलवाना एवं बीमा योजना का लाभ दिलवाना |
5. आवश्यकता अनुसार आदिवासी समुदाय एवं PVTG के फेडरेशन बनाने में सहायता करना एवं आजीविका नियोजन प्रक्रिया करके आजीविका फण्ड प्राप्त करना |
6. समूहो हेतु अभिशरण योजना बनाना एवं सहायता करना – जिसमे निम्न बिंदु शामिल होंगे ..
- वृधावस्था पेंशन, दिव्यांग एवं बिधवा पेंशन प्रदान कराना एवं मनरेगा, आईसीडीएस, आवास, जन धन,जेएसवाय, एवं दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना जैसी सरकारी योजनाओ का लाभ वंचितों के परिवारों को दिलवाना|
- कृषि एवं ग्रामीण विकास की योजनाओ का लाभ दिलाना ताकि उनके जीवन स्तर में सुधर हो सके
- ऍफ़एनएचडब्लू और वाश की गतिबिधियो हेतु योजना बनाना
- आदिवासी समुदाय, एवं पिविटीजी हेतु विशेष योजना बनाना
- ग्राम पंचायत के साथ कार्य करने हेतु योजना बनाना
- गैर सरकारी संगठनों एवं कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के अंतर्गत कार्य करने हेतु विशेष योजनाये बनाना
उपरोक्त सभी योजनाओ को ग्राम एवं संकुल स्तर पर समेकित करना ताकि अन्य विभागों एवं साझेदारों के साथ फालो-अप किया जा सके |