वन्दना-1
हे शारदे माँ हे शारदे माँ अज्ञानता से हमें तार दे माँ हे शारदे माँ... तू श्वेत वरिणी कमल पर विराजे। हाथों में वीणा मुकुट सिर पर साजे मन से हमारे मिटा दे अँधेरे हमको उजालों का संसार दे माँ अज्ञानता से हमें तार दे माँ वेदों की भाषा पुराणों की वाणी। मुनियों ने समझी है ऋषियों ने जानी हम भी तो समझे है हम भी तो जाने विद्या का हमको अधिकार दे माँ अज्ञानता से हमें तार दे माँ हे शारदे माँ.तू स्वर की देवी है संगीत तुझसे, हर शब्द तेरा है हर गीत तुझमें। अपनी शरण में हमें प्यार दे माँ, अज्ञानता से हमें तारदे माँ
वन्दना-2
दयाकर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना। दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना, हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखो में बस जाओ। अंधेरे दिल में आकर के, परम ज्योति जगा देना। दयाकर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना। हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा । सदा ईमान हो सेवा, व सेवक चर बना देना। दयाकर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना। वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना, वतन पर जां फिदा करना, प्रभु हमको सिखा देना। दयाकर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना।
वन्दना-3
ज्योति से ज्योति जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो। राह में आये जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो। ज्योति से ज्योति जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो। जिसका न कोई संगी साथी, ईश्वर है रखवाला। जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभु का प्यारा। प्रेम के मोती लुटाते चलो, प्रेमकी गंगा बहाते चलो। ज्योति से ज्योति जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो। आशा रूठी ममता रूठी, रूठ गया जग सारा । बन्द करो न द्वार दया का दे दो मुझे सहारा। दीप दया के जलते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलों। ज्योति से ज्योति जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो।
बन्दना -4
सोने की जहाँ धरती, चाँदी का व मेरा वतन, मेरा, वतन, मेरा गगन है। वतन है। सोने की जहाँ धरती, चाँदी का गगन है। हर जगह यहाँ गीत है, हर मौज है संगीत है। इस दुनिया की जो ररीत ह, कहते है। उसे प्रीत। जरी भी याहँ फूल है सहारा भी चमन है। यह मेरा वतन, यह मेरा वतन, यह मेरा वतन हम एक हैं एक हमारा देश और एक है बोली मिलजुल कर मानते है। दीपवली हो या होली। हर जगह जहाँ प्यार की धुन में ही वतन है। सोने की जहाँ धरती, चाँदी का गगन है। यह मेरा वतन, यह मेरा वतन, यह मेरा वतन
राष्ट्रीय गान
जन गण मन अधिनाययक जय हे, भारत भाग्य विधाता ।
विन्ध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा उच्छल जलधि-तरंग ।
पंजाब, सिंधु, गुजरात, मराठा, द्राविड़, उत्कल, बंग।
तव शुभ नामें जागे, तव शुभ आशिष मांगे, गाये तब जय गाथा।
जन गण मंगलदायक जय हे, भारत भाग्य विधाता ।
जय हे, जय हे, जय हे। जय जय, जय, जय हे।।
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम् सुजलां सुफलाम् मलयज शीतलाम् । शस्य श्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम् ।
शुभ्र ज्योत्सनां पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित-द्रुम दल शोभिनीम्। सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम् सुखदां वरदां मातरम् । वन्दे मातरम्।
कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दाः प्रभाते कर दर्शनम् ।।
समुद्र वसने देवी, पर्वत स्तन मण्डले ।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्वमे ।।
ब्रह्मामुरारि स्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुद्धश्च ।
गुरूश्च शुक्रः शनि राहु केतवः कुर्वत्तु सर्वेमम सुप्रभावतम् ।।