श्री युत अभिभावक महोदय,
यदि आप से यह प्रश्न किया जाये कि मनुष्य अपने जीवन भर लगातार गति से चोटी तक का पसीना एक क्यों करता चला जा रहा है। सम्भवत: यही कहेगा कि संतान सुख समृद्धि के लिए तो फिर आइये आपने नन्ने मुन्नो में सदृगुण वृद्धि और समुचित विकास हेतु विद्यालय में प्रवेश दिलाकर एक शिक्षित एवं कुशल अभिभावक की भूमिका अदा करें।
प्रिय बच्चो ,
विश्व में कोई वस्तु मनोहर नहीं है जितने सुशील पुण्यात्मा बालक तो फिर आइये और अपने को महान बनायें और कुशल शिष्य /शिष्या के परम गुण को अपने अन्दर सजोये। काक चेष्टा वकोध्यानम्, स्वान निद्रा तथैव च। अल्पहारी, ग्रहत्यागी, विद्यार्थी पंचलक्षणम्।।
अर्थात
"कौआ जैसी लगन, वगुले के जैसे ध्यान, कुत्ते जैसी नीद, कम भोजन लेने वाला, घर का त्याग करने वाला यही पाँच लक्षण एक कुशल विद्यार्थी के होते है।"
आइये यह लक्षण अपने अन्दर समाहित कर अध्यापन कार्य करें।
विद्यालय परिसर में सुविधाए
बड़े हवादार कमरे
स्मार्ट क्लास
कंप्यूटर क्लास
वाइट बोर्ड्स
आरामदायक फर्नीचर
खेल का मैदान
कैंटीन की सेवा
स्वच्छ वातावरण
“Education is the movement from darkness to light.”
HARI OHM GANGWAR
“An investment in knowledge pays the best interest.”
SONI GANGWAR
“Learning is never done without errors and defeat.”
RAHUL RANA
“You haven’t failed, until you stop trying”
KHUSHI SHUKLA
“Learning never exhausts the mind.”
RAVINDRA GANGWAR