सिकल सेल एनीमिया क्या है?
प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं जो आकार में गोल, नर्म और लचीली होती हैं | यह लाल रक्त कोशिकाएं जब स्वयं के आकार से भी सूक्ष्म धमनियों में से प्रवाह करती हैं तब वह अंडाकार आकार की हो जाती है | सूक्ष्म धमनियों से बाहर निकलने के पश्चात कोशिकाओं के लचीलेपन के कारण वे पुनः अपना मूल स्वरूप ले लेती हैं | लाल रक्त कोशिकाओं का लाल रंग उसमे रहने वाले हीमोग्लोबिन नामक तत्व के कारण होता है | स्वस्थ रक्तकण में हीमोग्लोबिन नॉर्मल अर्थात सामान्य प्रकार का होता है | हीमोग्लोबिन का आकार सामान्य के बदले असामान्य भी देखने को मिलता है | जब लाल रक्त कोशिकाओं में इस प्रकार का बदलाव होता है तब लाल रक्त कोशिकाएं जो सामान्य रूप से आकार में गोल तथा लचीली होती हैं यह गुण परिवर्तित कर अर्ध गोलाकार एवं सख्त/कड़क हो जाता है जिसे सिकल सेल कहा जाता है (लेटिन भाषा में सिकल का अर्थ हंसिया होता है) | यह धमनियों में अवरोध उत्पन्न करती हैं जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन व खून की कमी होने लगती है इसलिए इसे सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है| लाल रक्त कोशिकाओं का यह विकार हमारे अंदर रहने वाले जीन की विकृति के कारण होता है | जब लाल रक्त कोशिकाओं में इस प्रकार का विकार पैदा होता है तब व्यक्ति के शरीर में अलग-अलग प्रकार की शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं जैसे कि हाथ पैरों में दर्द होना, कमर के जोड़ों में दर्द होना, अस्थिरोग, बार- बार पीलिया होना, लीवर पर सूजन आना, मूत्राशय में रूकावट/दर्द होना, पित्ताशय में पथरी होना | जब किसी भी व्यक्ति को यह समस्याएँ होने लगें तो उसे रक्त की सिकल सेल एनीमिया के लिए जांच करवाना आवश्यक होता है|
यह रोग कैसे होता है और उसके प्रकार
यह रोग अनुवांशिक आधारित है | हर व्यक्ति को अपने माता-पिता के माध्यम से एक जीन मिलता है | अर्थात हर व्यक्ति में दो जीन होते हैं एक माता के द्वारा जबकि दूसरा पिता के द्वारा प्राप्त होता है | इस जीन में सामान्य प्रकार का Hb-A हीमोग्लोबिन हो सकता है अथवा एक में सामान्य और दूसरे में असामान्य Hb-S प्रकार का हीमोग्लोबिन हो सकता है, अथवा दोनों जीन मे असामान्य Hb-S प्रकार के हीमोग्लोबिन हो सकते हैं | असामान्य प्रकार के हीमोग्लोबिन वाली लाल रक्त कोशिका को सिकल सेल कहा जाता है | इस प्रकार के जीन पाने वाले व्यक्ति भविष्य में अपने बच्चों को वंशानुगत रूप से इसमें से किसी भी प्रकार के जीन दे सकते है जो सामान्य Hb-A या असामान्य Hb-S हो सकते हैं | सिकल सेल एनीमिया दो प्रकार का होता है पहले प्रकार को अंग्रेजी में सिकल वाहक कहा जाता है | जिसमे असामान्य हीमोग्लोबिन Hb-S का प्रमाण 50% से कम होता है तथा सामान्य Hb-A का प्रमाण 50% से ज्यादा होता है | जबकि दूसरे प्रकार को सिकल रोगी वाला व्यक्ति कहते है जिसमे असामान्य हीमोग्लोबिन Hb-S का प्रमाण 50% से अधिक लगभग 80% होता है तथा सामान्य हीमोग्लोबिन उपस्थित ही नहीं होता है |
प्रथम प्रकार अर्थात सिकल सेल वाहक: व्यक्ति रोग के वाहक के रूप में काम करते हैं अर्थात उनमे सिकल सेल के रोग के लक्षण स्थायी न होकर कभी - कभी दिखाई देते है| फिर भी ये व्यक्ति अपने बच्चों को वंशानुगत यह रोग दे सकते हैं |
दूसरे प्रकार के सिकल रोगी: यह वह व्यक्ति होते है जिनमें रोग के लक्ष्ण स्थायी रूप से रहते हैं Iजिससे उनके शरीर का विकास रुक जाता है | ये लोग निश्चित ही अपने बच्चों को वंशानुगत यह रोग देते हैं|
यह रोग अनुवांशिक कैसे होता है?
यदि माता और पिता में सिकल सेल के गुण अथवा सिकल सेल का रोग नहीं है तो उनके बच्चों को यह रोग नहीं होता है | अर्थात् सामान्य हीमोग्लोबिन रखने वाले माता-पिता के बच्चों को यह रोग नहीं होता है और वंशानुगत बच्चों मे सामान्य हीमोग्लोबिन होता है|
यदि माता अथवा पिता दोनों में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल वाहक होगा तो 50% बच्चों को सिकल वाहक होने का और 50% बच्चे में सामान्य गुण वाले होने की सम्भावना होती है| लेकिन इसमें से किसी भी बच्चे को सिकल रोग/बीमारी नहीं होती है|
यदि माता पिता दोनों ही सिकल वाहक होंगे तो उनके 25% बच्चों को सिकल रोग, 50% बच्चे सिकल वाहक और मात्र 25% सामान्य बच्चे होने की सम्भावना रहती है|
यदि माता-पिता में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल रोग वाला है और दूसरा व्यक्ति सामान्य है तो 100% यानी की सभी बच्चे सिकल वाहक हो सकते है परन्तु सिकल रोग नहीं |
यदि माता-पिता दोनों में से एक व्यक्ति सिकल रोग वाला और एक व्यक्ति सिकल वाहक वाला होगा तो उनके 50% बच्चे सिकल रोग वाले होंगे और 50% बच्चे सिकल वाहक वाले होंगे|
यदि माता पिता दोनों सिकल रोग वाले होंगे तो 100% यानी की सभी बच्चे सिकल रोग वाले ही जन्म लेंगे |
हम क्या कर सकते हैं
वास्तविकता को स्वीकारते हुए विवाह करते समय हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि,विवाह करने वाले दोनों व्यक्तियों में सिकल वाहक अथवा सिकल रोग नहीं होना चाहिए |
यदि दोनों व्यक्तियों में से कोई एक सिकल सेल वाहक है, या किसी एक को सिकल सेल रोग हो तो बच्चों को सिकल रोग नहीं हो सकता | परन्तु मात्र सिकल सेल वाहक होने की सम्भावना रहती है|
इसलिए उचित होगा कि अस्पताल में खून की जांच करवाकर योग्य जीवन साथी पसंद करके विवाह करें |
सिकल सेल रोग वाले मरीज़ के लक्ष्ण क्या हैं ?
जोड़ों में सूजन या दर्द होना, पित्ताशय की पथरी, बार- बार बुखार या जुकाम होना , तिल्ली का बढ़ जाना , लीवर पर सूजन आना, बच्चों का विकास न होना, रोग प्रतिरोधक शक्ति घटने से दूसरी बीमारियों का आसानी से होना आदि, इस बीमारी के लक्षण है| यदि रोग का निदान न किया जाये तो जरुरी उपचार न मिलने से बचपन में ही बच्चे की मृत्यु हो सकती है|
यह सब जानने के पश्चात कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है जैसे कि:विवाह से पहले लड़के और लड़की के खून की सिकल सेल के लिए जांच कराएं |
यदि परिवार में किसी भी सदस्य को सिकल सेल एनीमिया हो तो परिवार के सभी सदस्यों के रक्त की सिकल सेल की जांच कराएं |
यदि आप स्वयं सिकल सेल रोगी हैं (रक्त की जांच करने के बाद पता चला हो) तो डॉक्टर के पास जब दवा लेने जाएं तब डॉक्टर को अपनी बीमारी की सही जानकारी से अवगत कराएं जिससे आपको जरूरी दवाएँ मिल सकें और उपचार हो सके |
याद रखें सिकल वाहक रोगी नहीं है, परन्तु सिकल वाहक (केरियर) हैं जबकि सिकल रोग एक रोग है | यह दोनों परिस्थितियां माता-पिता की तरफ से बच्चों को अनुवांशिक मिलती हैं|
यदि आपको बार-बार पीलिया होता है, खून की कमी रहती है, जोड़ों में दर्द रहता है या चेहरे पर पीलापन अनुभव करते हैं तो अस्पताल में खून की जांच करवाएं |
सिकल वाहक अथवा सिकल रोग वाले व्यक्ति का विवाह दूसरे सिकल वाहक अथवा सिकल रोग वाले व्यक्ति के साथ हुआ हो और स्त्री गर्भवती हो तो बच्चों में यह रोग होगा या नहीं इस बात की जांच 10 से 12 सप्ताह के गर्भ में से सैंपल लेकर किया जा सकता है| यदि बच्चें की सिकल रोग के साथ पैदा होने की संभावना है तो गर्भपात करवाया जा सकता है|