Hindi Poems List
Author -Ratnesh Kumar
All rights reserved by author Ratnesh Kumar
Author Contact Email : ratneshbusinessid@gmail.com
-रत्नेश कुमार
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लेखक / कवि का नाम : रत्नेश कुमार !
पिता : श्री नरेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव !
माता : किरण देवी !
जन्म स्थान: बिहार, भारत !
वर्तमान स्थान: बैंगलोर, कर्नाटक, भारत !
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शीर्षक :रत्नेश की रचनाएँ
(Ratnesh Kee Rachanaaein)
(1)
चटाई पर जिन्दगानी, Part-1
(Chataai Par Jindagani- Part -1)
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देवता नहीं मनुज हूँ भगवन, इतना सह नहीं पाऊंगा l
थक गया हूँ अब, असहिष्णु, बिकराल हो जाऊँगा l
नहीं इक्छा दौलत सोहरत की ,केवल शुभ संगती दे दो l
करके बिध्वंश दानवता का, मानवता को अमरगति दे दो ll1ll
मिली रुस्वाई हुकूमत से, भरोसा उठ गया l
चले थे साथ जिनके, साथ छूट गया l
पेशानी कहेगी क्या ? वे समझेंगे भी नहीं l
दिल की बात है जो, जुबा से कहेगे नहीं ll2ll
पता था जहर है, पर पी लिया हमनें l
लिया शिव का नाम और जी लिया हमनें l
डर नहीं है मुझको, क्या होगा जिन्दगी में l
जख्म मिला सबसे, पर सी लिया हमनें ll3ll
मिस्मार हो गया है, सोचा हुआ अभिलाषा l
नहीं बचा है अब, आशियाना से आशा l
नभ के चाँद सितारे और चेन्नई का पानी है।
थी तम्मना अनुष्का की, चटाई पर जिन्दगानी है ll4ll
वजूद अभी जिन्दा है, आसमान छूने की !
दामन फैला कर बैठा हूँ, ईश्वर की दुआ की l
दुआ आते ही किस्मत खुल जायेगा l
खुशियों का सागर मिल जायेगा ll5ll
सत्य को कभी छुपाया नहीं जा सका l
अनल अक्षरों में लिखा इतिहास, मिटाया नहीं जा सका l
जो शेष रह गया, उसकेलिए क्षमाप्राथी हूँ l
आपके उपकारों का कृतार्थी हूँ ll6ll
जब शक्ति दिखाना है ! तो आत्मशक्ति से बढ़कर क्या होगी ?
मनुजता जिन्दा रहे मनुज में, इससे बड़ी हुकूमत क्या होगी !
निर्णय लेने से पहले , खुद को पदस्थापित कर सोचो l
दिमाग नहीं केवल, दिल को प्रतिस्थापित कर देखो ll7ll
बहारे फिर आएगी इस दुनिया में भी l
नियम यही कहता है प्रकृति का भी l
रात के बाद सुबह का होना स्वाभाविक है l
मिलाना बिछड़ना नैसर्गिक है ll8ll
कर्म योग को कभी नहीं भूलाना है l
अंतरात्मा की शक्ति को प्रकाश में लाना है l
ये नाशवत जीवन रहे या मिट जाए l
हमें सही सिधान्तो को अपनाना है ll9ll
हे खुदा हर दोजख को जन्नत बना देना l
तमपूर्ण मानस को दिनकर दिखा देना l
अच्छे और बुरी राजनीति में अंतर समझाकर,
मेरे आंगन में बैठनेवालों का किस्मत चमका देना ll10ll
जहाँ रहूँ वहां खुशियाँ आये, हो भला सबका मेरे होने से !
हो जाये अंत अंधकार का, चमक उठे सूर्यमण्डल दिल से !
बनु सदा मैं सत्य का सेवक, केवल शुभ कर्म हो मुझसे !
बनु सदा मैं देनेवाला, सत्कर्म धर्म अब हो मुझसे !
बनकर तेरी ज्योति मैं, फैला सकूँ प्रकाश इस दुनिया में !
शक्ति दो ! धन, ज्ञान दो ! ईश्वर निभा सकू विश्वास इस दुनिया में ll11ll
End of Chataai Par Jindagani, Part -1
चटाई पर जिंदगानी, पार्ट-1
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