उत्तर-
उत्तर- तल चिह्न द्वारा किसी दीवार, स्तंभों आदि पर अंकित किसी चिह्न को समुद्र तल से ऊँचाई प्रदर्शित की जाती है। इसमें ऊँचाई फीट अथवा मीटर किसी एक इकाई में मानचित्र पर लिखा जाता है।
स्थानीय ऊँचाइयाँ मानचित्र में धरातल के किसी स्थान की समुद्र तल से ऊँचाई प्रदर्शित करने वाले बिंदु को कहते है। इसमें बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या लिखा जाता है।
उत्तर- उच्चावच-प्रदर्शन की वह विधि जिसमें भू-आकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है। इसके कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को या ढाल को गहरी आभा से भर देते हैं जबकि प्रकाश वाले हिस्से या कम ढाल को हल्की आभा में भरते हैं या खाली ही छोड़ देते हैं।
उत्तर- शंक्वाकार पहाड़ी के लिए बनाए जाने वाले समोच्च रेखाओं का मान बाहर से अंदर की ओर बढ़ता हुआ होता है यानि अधिक ऊँचाई वाली सर्वोच्च रेखा सबसे बाहर की ओर होती है।
उत्तर- धरातल पर समुद्रतल से समान ऊँचाई वाले समीपस्थ बिन्दुओं को जोड़ने वाली कल्पित रेखा को समोच्च रेखा कहते हैं।
(i) समोच्च रेखाएं पास-पास हैं तो धरातल पर ढाल तीव्र होगा।
(ii) यदि समोच्च रेखाएं दूर-दूर हैं तो धरातल पर ढाल मंद होगा।
उत्तर- स्थानीय ऊँचाइयाँ मानचित्र में धरातल के किसी स्थान की समुद्र तल से ऊँचाई प्रदर्शित करने वाले बिंदु को कहते है। इसमें बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या लिख दिया जाता है।
उत्तर- सीढ़ीनुमा ढाल को प्रदर्शित करने वाली समोच्य रेखाएँ निम्न आरेख में देखें।
उत्तर-
उत्तर- यह स्थलाकृतियों को प्रदर्शन करने की एक विधि हैं जिसमें धरातलीय ऊँचाई एवं निचाई को विभिन्न छायाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। ऊँचाई में वृद्धि के अनुसार रंगों की आभाएँ हल्की होती जाती हैं। इनमें समद्र या जलीय भाग को नीले रंग से दिखाया जाता है। मैदान को हरा रंग से तथा पर्वतों को बादामी हल्का कत्थई रंग से दिखाया जाता है जबकि बर्फीले क्षेत्र को सफेद रंग से दिखाया जाता है।
उत्तर- पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियाँ होती हैं। जैसे- शंक्वाकार पहाड़ी, पठार, V-आकार की घाटी, जलप्रपात, झील आदि।
उत्तर- स्तर रंजन में जलीय भाग को नीले रंग से एवं बर्फीले भाग को सफेद रंग से, मैदानी भाग को हरे रंग से दिखाया जाता है।
उत्तर- उच्चावच निरूपण का तात्पर्य मानचित्र की वह विधि है, जिसके द्वारा धरातल पर पायी जानेवाली त्रिविमीय आकृति का समतल सतह पर प्रदर्शन किया जाता है।
उत्तर- पृथ्वी पर पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियों मानचित्र पर निरूपण ही उच्चावच निरूपण कहलाता है अर्थात् उच्चावच निरूपण का तात्पर्य मान चित्रण की वह विधि है, जिसके द्वारा धरातल पर पायी जानेवाली त्रिविमीय आकृति का समतल सतह पर प्रदर्शन किया जाता है।
उत्तर- 'V' आकार की घाटी का निर्माण नदी द्वारा किया जाता है। इस आकृति को प्रदर्शित करने के लिए सर्वोच्च रेखाएँ को अंग्रेजी के V अक्षर की उल्टी आकृति बनायी जाती है। इसमें सर्वोच्च रेखाओं का मान बाहर से अंदर की ओर क्रमशः घटता जाता है।