उत्तर-
सार्वजनिक उद्योग— इसका संचालन सरकार स्वयं करती है। इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है। दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला, भारतीय हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, आदि।
निजी उद्योग— इसमें उद्योग पर नियंत्रण निजी व्यक्तियों का होता था । निजी लाभ के उद्देश्य से ही इनका उपयोग किया जाता है। जैसे- टाटा इस्पात उद्योग, रिलायंस इंडस्ट्रीज।
उत्तर- वर्तमान समय में उद्योगों ने प्रदूषण को बढ़ाया है और पर्यावरण को दूषित किया है। उद्योगों ने चार प्रकार के प्रदूषण वायु, जल, भूमि एवं ध्वनि को बढ़ाया है। उद्योगों से निकलने वाले धुएँ वायु को बुरी तरह प्रदूषित किया है । उद्योग द्वारा अवशिष्ट पदार्थों द्वारा नदियों तालाबों में छोड़ा जाता है। उससे जल प्रदूषण होता है। ध्वनि प्रदूषण उद्योग एवं परिवहन की देन है।
तापीय प्रदूषण— उद्योगों तथा तापों से गर्म जल को जब बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है तो उससे जल में तापीय प्रदूषण होता है।
उत्तर-
कच्चा माल:- उद्योगों को उन क्षेत्रों के पास स्थित होना चाहिए जहां सस्ते दर पर कच्चा माल उपलब्ध है।
पावर संसाधन:- मशीनों को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होने पर उद्योग के स्थान को निर्धारित करने के लिए पावर संसाधनों की उपलब्धता एक अन्य महत्वपूर्ण कारक है।
बाजार:- उत्पादित वस्तुओं का उनके व्यापार के लिए एक बाजार होना चाहिए। बाजार एक क्षेत्र में निर्मित वस्तुओं की विविधता के साथ-साथ मांग को निर्धारित करता है।
उत्तर- लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग इसलिए कहते हैं कि अन्य उद्योगों के लिए मशीनें, कल-पूर्जे, परिवहन के विभिन्न साधनों के लिए मोटरगाड़ियाँ, इंजन तथा कृषि के विभिन्न यंत्र इसी उद्योग द्वारा बनाए जाते हैं। इसलिए लोहा एवं इस्पात उद्योग को बुनियादी उद्योग कहा जाता है।
उत्तर- उद्योगों के स्थानीकरण से संबंधित छह कारक हैं—
कच्चा माल
शक्ति
बाजार
यातायात एवं परिवहन साधन
पूँजी एवं
सरकारी नीति।
उत्तर- स्वामित्व के आधार पर उद्योग को दो भागों में बाँटा जाता है—
(i) सार्वजनिक उद्योग— इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित हैं। इनका संचालन स्वयं सरकार करती है। जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राऊरकेला इस्पात उद्योग।
(ii) संयुक्त अथवा सरकारी उद्योग— जब उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान हो तो उसे संयुक्त या सहकारी उद्योग कहते हैं। जैसे- ऑयल इंडिया लिमिटेड, अमूल आदि।
उत्तर- कृषि पर आधारित उद्योगों को कच्चा माल कृषि से मिलता है। यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करता है। ये अधिकतर उपभोग वस्तुओं का ही उत्पादन करते हैं। जैसे-चीनी, पटसन, वस्त्र, खनिज पर आधारित उद्योग को कच्चा माल खनिज से मिलता है। यह उद्योग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करता है। यह उपभोग्य तथा मूल पर आधारित दोनों प्रकार की वस्तओं का उत्पादन करते हैं। जस लौह इस्पात, पोत निर्माण, मशीनरी उपकरण इत्यादि।
उत्तर- प्रदूषण मानव जीवन स्थल तथा जल के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक विशेषताओं में अपेक्षित परिवर्तन जो मानव स्वास्थ्य के लिए एवं अन्य जीवों के लिए हानिकारक है, प्रदूषण कहलाता है।
ये निम्नलिखित प्रकार के हैं– वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, तापीय प्रदूषण आदि।
उत्तर- ऐसे उद्योग जो उपभोक्ता के सीधे उपभोग के लिए आते हैं, उपभोक्ता उद्योग कहलाते हैं। जैसे दंतमंजन, कागज, पंखा आदि।
उत्तर- मुम्बई को सूती वस्त्र की महानगरी इसलिए कहा जाता है कि सिर्फ मुम्बई महानगर क्षेत्र में भारत का लगभग एक-चौथाई सूती कपड़ा तैयार किया जाता है।
उत्तर- वर्तमान समय में विनिर्माण उद्योग किसी भी राष्ट्र के विकास और सम्पन्नता का सूचक है। कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएँ तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है। जैसे कपास से कपड़ा, गन्ना से चीनी, लौह-अयस्क से लोहा-इस्पात, बॉक्साइट से एल्युमिनियम आदि वस्तएँ।
उत्तर- प. बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़।
उत्तर- उत्तर प्रदेश में तापक्रम संयंत्र नरोड़ा तथा कर्नाटक में कैगा नाभकीय संयंत्र है।
उत्तर- आधारभूत उद्योग वैसे उद्योगों को कहते है, जिन पर अन्य उद्योग भी निर्भर रहते है। जैसे:- लौह इस्पात एक आधारभूत उद्योग है, क्योंकि इस पर अनेक अन्य उद्योगों का विकास निर्भर है।
उत्तर- उदारीकरण का अर्थ ऐसे नियंत्रण में ढील देना या उन्हें हटा लेना है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले। उदारीकरण में वे सारी क्रियाएँ सम्मिलित हैं, जिसके द्वारा किसी देश के आर्थिक विकास में बाधा पहुँचाने वाली आर्थिक नीतियों, नियमों, प्रशासनिक नियंत्रणों, प्रक्रियाओं आदि को समाप्त किया जाता है।
उत्तर- भारत में खिलौने उद्योग कई शहरों में विकसित है। इसमें कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, मदुरै, भोपाल, शिवकाशी महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर- सरकार ने राष्ट्रीय निनिर्माण परिषद् की स्थापना विनिर्माण उद्योगों की उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए की है ताकि यह उच्च विकास दर को हासिल कर सके।
उत्तर- निजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है , जिसके द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों के स्वामित्व एवं प्रबन्ध को निजी स्वामित्व , प्रबन्ध एवं संचालन में अन्तरित किया जाता है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों में से अधिक से अधिक उद्योगों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया जाता है।
उत्तर- 'औद्योगिकरण' तथा 'नगरीकरण' साथ-साथ चलते हैं क्योंकि औद्योगीकरण के कारण कारखाने में उपलब्ध नौकरियों में वृद्धि होती है। इस प्रकार, जैसे-जैसे रोजगार दर बढ़ती है, यह लोगों को विभिन्न स्थानों से खींचती है और शहरीकरण की ओर ले जाती है तथा लोग नौकरियों के लिए शहरों की ओर बढ़ने लगते हैं। इस प्रकार हम कह सकते है कि 'औद्योगिकरण' तथा 'नगरीकरण' साथ-साथ चलते हैं।
उत्तर- बहुत अधिक पूँजी तथा श्रम से चलाए जाने वाले उद्योग बड़े पैमाने के उद्योग कहलाते हैं। छोटे पैमाने के उद्योग वे उद्योग हैं जिनमें अपेक्षाकृत कम पूँजी लगती है। इन उद्योगों में श्रमिकों की संख्या अधिक होती है।
उत्तर- भारत में ऐल्युमिनियम के दो कारखाने का नाम इस प्रकार हैं—
(i) हिन्दुस्तान एल्युमिनियम कॉरपोरेशन रेणुकूट।
(ii) इंडियन एल्युमिनियम कम्पनी मूरी (झारखंड)।
उत्तर- वैश्वीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना, अर्थात् प्रत्येक देश का अन्य देशों के साथ बिना किसी प्रतिबंध के पूँजी, तकनीकी एवं व्यापारिक आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहते है।
उत्तर- कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित का अधिक मात्र में वस्तुओं के उत्पादन करने को विनिर्माण कहा जाता है। उदाहरण के लिए कागज लकड़ी से, चीनी गन्ने से, लौह-इस्पात लौह अयस्क से तथा एल्युमिनियम बॉक्साइट से निर्मित है।
उत्तर- भारी उद्योग एवं हल्के उद्योग में निम्न अंतर हैं—
(i) भारी उद्योग इन उद्योगों में भारी कच्चे माल का प्रयोग होता है, जिससे विनिर्मित वस्तुएँ भी भारी होती है। जैसे- लोहा इस्पात उद्योग।
(ii) हल्के उद्योग- इस वर्ग के उद्योग में हल्के कच्चे माल का प्रयोग होता है जिससे ये हल्के माल का निर्माण होता है। जैसे- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिलाई मशीन उद्योग।
उत्तर- उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत के चीनी उद्योग में निम्न अंतर हैं—
दक्षिण भारत में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज अपेक्षाकृत उत्तर भारत से अधिक है।
समुद्री जलवायु के कारण गन्ने में रस की मात्रा अधिक होती है।
गत्रे में अधिक शर्करा की मात्रा अधिक है।
सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत मिलों की स्थापना दक्षिण भारत में अधिक है।
चीनी उद्योग के लिए आवश्यक बिजली भी दक्षिणी भारत में काफी मात्रा में उपलब्ध है।
उत्तर- प्रदूषण को उचित योजनाओं द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है—
वैकल्पिक ईंधन का चयन करके।
उद्योगों में कोयले के जगह तेल का उपयोग करके।
उद्योगों के प्रदूषित जल को नदियों, तालाबों में छोड़ने के पहले उपचारित करके ताकि जल प्रदूषण न हो सके।
कूड़े-कचरे का पुनः चक्रण कर उसे उपयोगी बनाकर।
उत्तर- भारत में जूट उद्योग के निम्न समस्याएँ हैं—
जूट से बने कालीनों तथा टाट-बोरियों की माँग निरंतर कम हो रही है।
जूट से बनी वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है। इसलिए निर्यात बाजार में इन्हें कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है।
कृत्रिम धागों से बने सामान के बढ़ते हुए प्रचलन ने भी जूट उद्योग के लिए समस्या उत्पन्न कर दी है।