उत्तर- "माँ" शीर्षक कहानी ईश्वर पेटलीकर द्वारा रचित किया गया है। यह कहानी गुजराती भाषा से ली गई है। इस कहानी में कहानीकार ईश्वर पेटलीकर ने अपने संतान के प्रति माँ की ममता का मार्मिक चित्रण किया गया है। इस कहानी में मंगु जन्म से पागल और गूँगी है। पड़ोस के लोग मंगु की माँ को सलाह देते है कि वह उसे पागलों के अस्पताल में भर्ती करा दें। इस बात को सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ जाते है। वह लोगों को जवाब देती है कि मैं माँ होकर अपनी बेटी की सेवा नहीं कर सकती तो अस्पताल वाले मेरी बेटी की सेवा क्या करेंगे? मंगु की माँ की आत्मा उसको अस्पताल भेजने को तैयार नहीं है। उसके लिए मंगु को अस्पताल भेजना उसे मौत के मुँह के धकेलने के बराबर है। मंगु की माँ चाहती है कि उसकी बेटी मंगु घर पर रहे और उसका उपचार घर पर ही हो।
गाँव की एक लड़की जिसका नाम कुसुम है जो पागल थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और तीन महीने अस्पताल में रहने के बाद वह पूर्ण स्वस्थ होकर घर आ जाती है। सभी गाँव के लोग उसे देखने आते है। मंगु की माँ भी कुसुम को देखने आती है। माँ को यह आश्चर्य होता है कि जब कुसुम उनसे कहती है कि अस्पताल में डॉक्टर तथा नर्स द्वारा पागल मरीजों का बहुत ध्यान रखा जाता है। यह बात जानकर अस्पताल के संबंध में उनकी बुरी सोच बदल जाती है और अब वह यह सोचती है कि वह अपनी बेटी को भी अस्पताल में भरती करवाके उसे ठीक करेगी। यह सोचकर मंगु की माँ अपने बड़े पुत्र को घर आने का पत्र लिखवाती है।
जब उसका बड़ा पुत्र घर आता है और जब मंगु को भरती कराने अस्पताल ले जाता है, तो यह देखकर माँ का हृदय अपनी बेटी के लिए रो उठता है और वह अपनी बेटी के लिए रोने लगती है। यह देखकर सभी लोग माँ को यह दिलासा देते है कि मंगु को अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होगी। वे लोग मंगु का अच्छी तरह इलाज करेंगे तथा उसका ख्याल रखेंगे। इस प्रकार इस कहानी के द्वारा माँ को अपने संतान के प्रति ममतामयी चित्रण को दर्शाया गया है।
उत्तर- माँ बहुत ही ममतामयी है। अपनी बेटी के पागल और गूँगी होने के बाद भी वह उससे बहुत अधिक प्यार करती है। वह अपनी बेटी को अपने से अलग नहीं होने देना चाहती है। माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निश्छल और निःस्वार्थ है। उसे अपनी पागल और गूँगी मंगु के प्रति काफी स्नेह भाव है।
उत्तर- "माँ" शीर्षक कहानी में शुरू से अंत तक संतान के प्रति माँ के प्रेम को दर्शाया गया है। इस कहानी की मुख्य पात्र मंगु की माँ है, जो अपनी निश्छल और निःस्वार्थ प्रेम को पूरी कहानी में दर्शाती है। माँ का जो स्वरूप अपनी संतान के प्रति होता है, वही स्वरूप इस कहानी में दर्शाया गया है। इस कहानी में यह दर्शाया गया है कि संतान कैसी भी हो, वह अपनी माँ के सबसे प्यारा होता है। वह अपनी संतान को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देख सकती है।