उत्तर- "दही वाली मंगम्मा" शीर्षक कहानी श्रीनिवास द्वारा रचित किया गया है। यह कहानी कन्नड भाषा से ली गई है। इस कहानी में परिवार में कुल चार सदस्य है— मंगम्मा, उसका बेटा, उसकी बहू तथा उसका नन्हा-सा पोता। मंगम्मा दिन-भर घूम कर दही बेचने का काम करती है। एक दिन उसके नन्हे पोते को उसकी बहू खूब पिटाई कर देती है। यह देखकर जब मंगम्मा उसको मना करती है तथा अपनी बहू को जब इस बात के लिए बोलती है, तो उल्टे उसकी बहू अपनी सास मंगम्मा से लड़ने लगती है। छोटी-सी बात को लेकर लड़ाई इतनी अधिक हो जाती है कि उसका बेटा और बहू मंगम्मा से अलग हो जाते है।
परिवार बॅंट जाने के बाद मंगम्मा अकेली हो जाती है। पहले मंगम्मा के साथ उसका बेटा, बहू तथा पोता साथ थे तो वह उनके बारे में सोचती थी और अपने पैसे उनमें खर्च करती थी। अब वह दिन-भर दही बेचने के बाद पैसे एकत्र करती है। वह पूरे पैसे की मालकिन है लेकिन वह सोचती है कि ऐसे मालकिन बनने से क्या फायदा जब उसके साथ कोई नहीं है। मंगम्मा जब अकेली हो जाती है, तो रंगप्पा नामक जुआरी आदमी उसके पीछे पड़ जाता है। वह मंगम्मा से उधार पैसे माँगता है और उसके करीब आना चाहता है। अतः मंगम्मा को यह महसूस होता है कि अकेले होने के कारण उसको यह समस्या झेलनी पड़ रही है।
दूसरी तरह मंगम्मा की बहू और बेटा ये दोनों जानते है कि मंगम्मा के पास अधिक मात्रा में धन भी है तथा वे ये भी चाहते है कि मंगम्मा बारी से दही बेचने का दायित्व उसकी बहू नंजम्मा को सौंप दें। अतः मंगम्मा के बेटा और बहू अपने नन्हें पुत्र को उसकी दादी के पास भेजते है। दादी अपने पोते को पाकर निहाल हो जाती है। इस प्रकार उनकी दूरी नजदीकी में बदलने लगती है और धीरे-धीरे वे एक दूसरे से मिल जाते है। इस प्रकार उनका बिखरा हुआ परिवार पुनः एक हो जाता है।
उत्तर- रंगप्पा, मंगम्मा के गाँव का रहने वाला आदमी था। वह एक जुआरी था। वह मंगम्मा से कर्ज लेना चाहता था तथा उसके करीब आना चाहता था।
उत्तर- मंगम्मा की बहू जब उसके नन्हें से पोते को छोटी-सी गलती पर पिटती है, तो मंगम्मा गुस्सा होकर राक्षसी शब्द का प्रयोग करके अपनी बहू को डाँटती है। इस बात को लेकर उसकी बहू भी मंगम्मा से झगड़ा कर लेती है। इस प्रकार मंगम्मा के छोटे से पोते की बात को लेकर उनके बीच विवाद था।
उत्तर- मंगम्मा की बहू को डर था कि उसकी सास मंगम्मा सारे पैसे रंगप्पा को ना दे दे। इसके अतिरिक्त वह जानती थी कि उसकी सास के पास बहुत पैसे है तथा दही बेचने का काम आगे चलकर वह खुद लेना चाहती थी ताकि उसका परिवार आसानी से चल सकें। इसलिए मंगम्मा की बहू विवाद निपटाने में पहल की।
उत्तर- मंगम्मा की बहू को डर था कि उसकी सास मंगम्मा सारे पैसे रंगप्पा को ना दे दे। इसके अतिरिक्त वह जानती थी कि उसकी सास के पास बहुत पैसे है तथा दही बेचने का काम आगे चलकर वह खुद लेना चाहती थी ताकि उसका परिवार आसानी से चल सकें। इसलिए मंगम्मा की बहू विवाद निपटाने में पहल की।
उत्तर- मंगम्मा को दही बेचने कहानीकार के माँ के मुहल्ले से ही होकर आना-जाना पड़ता था। अतः वह आते समय और दही बेचने के बाद मंगम्मा माँजी के पास आकर बैठती थी और मंगम्मा अपनी सुख-दुख की बाते माँजी से करती थी। इस प्रकार वे दोनों आपस में घुल-मिल गए थे और दोनों में घनिष्ठता हो गई थी।
उत्तर- शहरों में रोज आकर दही देना और महीने के बाद पैसे लेने को बारी कहते है।
माँजी ने मंगम्मा को समझाया कि अंधविश्वास में जीना पागलपन है। अंधविश्वास काल्पनिक होता है, उनमें वास्तविकता नहीं होती है। अतः तुमको लोक प्रचलित धारणाओं से नहीं डरना चाहिए और अपना काम किसी से बिना डरे हँसते-हँसते करना चाहिए।