एक दिन आएगा जब सब यहीं धरा रह जायेगा
समय बीत रहा है
समय बीत गया
बीत जायेगा आने वाला कल
तू है फसा जीवन की माया में, राग द्वेष में
जीवन कट रहा है, बीत रहा है
पड़ा होगा एक दिन अपनी मौत की शैय्या पर
करेगा विचार, क्या पाया, क्या खोया, जीवन यूहीं गवाया
एक दिन आएगा जब सब यहीं धरा रह जायेगा......
हर पल जीवन का महत्पूर्ण है
ईश्वर की कृपा के अधीन है
जीवन बहुत छोटा है अगर दिशा हीन है
निरंतर अपने पे काम करना
सीखना सदुपयोग ऊर्जा का
इस जीवन का मात्र एक उद्देश है
एक दिन आएगा जब सब यहीं धरा रह जायेगा......
उस पल के आने से पहले
पूछ कुछ प्रश्न अपने आप से
क्या जी लिया तूने अपने सपनो को?
क्या ले लिया सब अनुभव जो लेना था?
क्या कहीं कुछ पछतावा तो नही?
क्या कहीं कुछ ऐसा तो नहीं जो सीखना रहे गया?
क्या कुछ ऐसा तो नहीं जो छोड़ना था वो छूटा ही नही?
एक दिन आएगा जब सब यहीं धरा रह जायेगा......
(लेखक- धीरेन्द्र सिंह)