"संस्कृति की संवाहक और चेतना का विस्तार है, हिंदी हर दिल को जोड़ने वाला सुंदर विचार है।"
"संस्कृति की संवाहक और चेतना का विस्तार है, हिंदी हर दिल को जोड़ने वाला सुंदर विचार है।"
पी. एन. दास कॉलेज की स्थापना 20 अगस्त 1962 को प्रियनाथ दास की स्मृति में की गई थी। स्थापना के समय कॉलेज में पठन-पाठन के लिए कई विषयों को शामिल किया गया था, लेकिन कॉलेज में हिंदी विषय को एक औपचारिक विभाग के रूप में शुरू होने में थोड़ा समय लगा। इस संस्थान में हिंदी विषय के पठन-पाठन की ऐतिहासिक शुरुआत वर्ष 2003 में हुई। विभाग को सुचारू रूप से संचालित करने और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने के लिए सर्वप्रथम अस्थायी पद पर डॉ. रमेश यादव की नियुक्ति हुई थी, जिन्होंने शुरुआती दौर में विभाग की नींव मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसके बाद, जब पश्चिम बंग कॉलेज सर्विस कमीशन ने स्थायी पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की, तब श्री अजय कुमार चौधरी ने इस स्थायी पद पर सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 8 अप्रैल 2010 को इस विभाग की कमान अपने हाथों में ली।
इसी दौरान, लगभग सात वर्षों तक अपनी बहुमूल्य और सराहनीय सेवाएँ देने के पश्चात डॉ. रमेश यादव एक अन्य कॉलेज में स्थायी पद पर नियुक्त होकर यहाँ से स्थानांतरित हो गए। वर्ष 2010 से लेकर वर्तमान समय तक, श्री अजय कुमार चौधरी हिंदी विभाग के सर्वांगीण विकास, अकादमिक स्तर को ऊँचा उठाने और छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनवरत रूप से प्रयासरत हैं। समय के साथ बदलते शैक्षिक परिदृश्य को अपनाते हुए, जब भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को स्वीकृति दी गई, तो पी. एन. दास कॉलेज का हिंदी विभाग भी इसके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ा। वर्तमान में, विभाग का पूरा शैक्षणिक कार्यक्रम और पठन-पाठन की रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत निर्धारित नियमों और बहुविषयक दृष्टिकोण के अनुसार पूरी निष्ठा के साथ संचालित की जा रही है, जो विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
"संस्कृति की संवाहक और चेतना का विस्तार है, हिंदी हर दिल को जोड़ने वाला सुंदर विचार है।"