हिंदी विभाग
DEPARTMENT OF HINDI, P.N. DAS COLLEGE
आगामी 25 सितंबर 2026 को हिन्दी दिवस मनाया जाएगा, विभाग के सभी छात्र-छात्राओं को उपस्थित होना अनिवार्य है
हिंदी विभाग
DEPARTMENT OF HINDI, P.N. DAS COLLEGE
"संस्कृति की संवाहक और चेतना का विस्तार है, हिंदी हर दिल को जोड़ने वाला सुंदर विचार है।"
पी. एन. दास कॉलेज की स्थापना 20 अगस्त 1962 को प्रियनाथ दास की स्मृति में की गई थी। स्थापना के समय कॉलेज में पठन-पाठन के लिए कई विषयों को शामिल किया गया था, लेकिन कॉलेज में हिंदी विषय को एक औपचारिक विभाग के रूप में शुरू होने में थोड़ा समय लगा। इस संस्थान में हिंदी विषय के पठन-पाठन की ऐतिहासिक शुरुआत वर्ष 2003 में हुई। विभाग को सुचारू रूप से संचालित करने और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने के लिए सर्वप्रथम अस्थायी पद पर डॉ. रमेश यादव की नियुक्ति हुई थी, जिन्होंने शुरुआती दौर में विभाग की नींव मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसके बाद, जब पश्चिम बंग कॉलेज सर्विस कमीशन ने स्थायी पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की, तब श्री अजय कुमार चौधरी ने इस स्थायी पद पर सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 8 अप्रैल 2010 को इस विभाग की कमान अपने हाथों में ली।
इसी दौरान, लगभग सात वर्षों तक अपनी बहुमूल्य और सराहनीय सेवाएँ देने के पश्चात डॉ. रमेश यादव एक अन्य कॉलेज में स्थायी पद पर नियुक्त होकर यहाँ से स्थानांतरित हो गए। वर्ष 2010 से लेकर वर्तमान समय तक, डॉ. अजय चौधरी हिंदी विभाग के सर्वांगीण विकास, अकादमिक स्तर को ऊँचा उठाने और छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनवरत रूप से प्रयासरत हैं। समय के साथ बदलते शैक्षिक परिदृश्य को अपनाते हुए, जब भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को स्वीकृति दी गई, तो पी. एन. दास कॉलेज का हिंदी विभाग भी इसके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ा। वर्तमान में, विभाग का पूरा शैक्षणिक कार्यक्रम और पठन-पाठन की रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत निर्धारित नियमों और बहुविषयक दृष्टिकोण के अनुसार पूरी निष्ठा के साथ संचालित की जा रही है, जो विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हिंदी विभाग का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति का संवर्धन, प्रसार तथा वैश्विक स्तर पर विकास करना है।
विभाग के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
विद्यार्थियों में पठन, लेखन, संभाषण और अवबोधन (समझने की क्षमता) सहित सर्वांगीण भाषाई कौशल विकसित करना, जिससे वे हिंदी में प्रभावी एवं आत्मविश्वासपूर्ण संवाद कर सकें।
विद्यार्थियों को प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक साहित्य की विविध विधाओं से परिचित कराकर हिंदी की समृद्ध साहित्यिक विरासत के प्रति समझ और सम्मान की भावना जागृत करना।
साहित्य और भाषा के अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मक दृष्टि और विश्लेषणात्मक क्षमता का विस्तार करना, ताकि वे विचारों व रचनाओं का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन कर सकें।
हिंदी भाषी क्षेत्रों की विविध परंपराओं, जीवन-मूल्यों, लोक-संस्कृति और रीति-रिवाजों के प्रति विद्यार्थियों में संवेदनशील समझ और सम्मान विकसित करना।
अनुवाद के सैद्धांतिक और व्यावहारिक कौशलों को तराशना, जिससे हिंदी और अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं के मध्य सेतु का निर्माण हो सके और बहुभाषिक व अंतर-सांस्कृतिक संवाद सुलभ बने।
मातृभाषा के रूप में हिंदी सीखने वालों के साथ-साथ अहिंदी भाषियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए पाठ्यक्रम संचालित करना, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भाषा के प्रसार को गति मिले।
आधुनिक तकनीकी संसाधनों, डिजिटल टूल्स और समकालीन शिक्षण पद्धतियों का उपयोग कर भाषा शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना।
अन्य भाषा विभागों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करना, ताकि भाषाई विविधता, अंतर-सांस्कृतिक सौहार्द और अंतर-विषयी (interdisciplinary) शोध को बढ़ावा मिल सके।
इन उद्देश्यों की पूर्ति के माध्यम से हिंदी विभाग भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन में योगदान देने के साथ विद्यार्थियों और समाज में भाषाई अस्मिता तथा भाषाई गौरव की भावना को भी सशक्त करता है।
Associate Professor
Department of Hindi
"हमारी है, मेरी है, उसकी है, इसकी है, सबकी है, हमारी हिंदी।"