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डिजीलॉकर, एक भारतीय डिजिटलीकरण ऑनलाइन सेवा है जो इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय(MeitY), भारत सरकार द्वारा अपनी डिजिटल भारत पहल के तहत प्रदान की जाती है। डिजीलॉकर प्रत्येक आधार धारक को इन प्रमाण पत्रों के मूल जारीकर्ताओं से डिजिटल दस्तावेज़ में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, शैक्षणिक मार्क शीट जैसे प्रामाणिक दस्तावेजों / प्रमाण पत्रों का उपयोग करने के लिए क्लाउड में एक खाता प्रदान करता है। यह विरासत दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियों को अपलोड करने के लिए प्रत्येक खाते में 1GB भंडारण स्थान भी प्रदान करता है।
यह सुविधा पाने के लिए बस उपयोगकर्ता के पास भारत सरकार द्वारा प्रद्दत आधार कार्ड होना चाहिए। अपना आधार अंक डाल कर उपयोगकर्ता अपना डिजिलॉकर खाता खोल सकते हैं और अपने जरूरी दस्तावेज़ सुरक्षित रख सकते हैं। आधार अंक की अनिवार्यता होने की वजह से यह तय किया गया है। कि इस सरकारी सुविधा का लाभ सिर्फ भारतीय नागरिक ही ले सकें और जिसका भी खाता हो, उसके बारे में सभी जानकारी सरकार के पास हो। कोई भी ठग, झूठा और अप्रमाणित व्यक्ति इसका उपयोग ना कर सके इसके लिये आधार कार्ड होने की अनिवार्यता बेहद आवश्यक है। क्योंकि आधार कार्ड भी भारत सरकार द्वारा पूरी जाँच पड़ताल के बाद ही जारी किया जाता है। इस तरह से इस प्रणाली के दुरुपयोग की संभावना बेहद कम हो जाती है। इस सुविधा की खास बात ये हैं कि एक बार लॉकर में अपने दस्तावेज अपलोड करने के बाद आप कहीं भी अपने प्रमाणपत्र की मूलप्रति के स्थान पर अपने डिज़िलॉकर की वेब कड़ी (यूआरएल) दे सकेंगे।[2]
भारत के संचार एवं आईटी मंत्रालय की शाखा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्मोगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) ने जुलाई २०१५ में डिजिटल लॉकर का बीटा संस्करण जारी किया है। इस संस्करण का नाम डिजीलॉकर रखा गया है।[3] यह विरासत दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियां अपलोड करने के लिए प्रत्येक खाते में 1 जीबी भंडारण स्थान भी प्रदान करता है। फिलहाल यह वेबसाईट हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है।
दिसंबर 2019 तक, डिजीलॉकर 149 जारीकर्ताओं से 372+ करोड़ से अधिक प्रामाणिक दस्तावेजों तक पहुंच प्रदान करता है। डिजीलॉकर पर 3.3 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। 43 आवश्यकताकर्ता संगठन डिजीलॉकर के दस्तावेजों को स्वीकार कर रहे हैं।
डिजीटल लॉकर को खोलने के लिए आपको डिजिलॉकर की वेबसाइट पर जाकर अपना खाता खोलना होगा। पंजीकरण करने के लिए आपको मुख्यपृष्ठ पर (अभी रजिस्टर करें) नामक बटन दबाना होगा और फिर नए खुले पृष्ठ पर अपने आधार कार्ड का नंबर डालना होगा। फिर आप ओटीपी या अंगुली के निशान के ज़रिए लॉगिन (अंदर प्रवेश) कर सकते हैं। लॉगिन होने के बाद आपसे जो सूचना मांगी जाए उसे भरें। इसके बाद आपका खाता बन जाएगा। खाता खुलने के बाद आप कभी भी इस पर अपने व्यक्तिगत दस्तावेज डाल (अपलोड कर) सकेंगे और बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रख सकेंगे।
लेकिन आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड नंबर से लॉगिन करने वाली शर्त को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में हरियाणा की तरफ से जबरदस्त भागीदार हो रही है। पहली जुलाई 2015 से शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के पहले सप्ताह में ही हरियाणा के 30 हजार नागरिक डिजिटल लॉकर से जुड़ गये।[11][12][13] सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी इसमें पीछे नहीं हैं और उन्होंने भी डिजिटल लॉकर खोले हैं। सरकार के डिजिटल लिट्रेसी कार्यक्रम के तहत कॉमन सर्विस सेंटर, डिजिटल लॉकरबायोमैट्रिक अटेंडेंस जैसी योजनाएं क्रियांवित की जा रही हैं।[14] उत्तरप्रदेश में भी शासन के निर्देश से जगह-जगह डिजिटल लॉकर जागरूकता अभियान चलाया गया है। कार्यशालाएं आयोजित कर लोगों को डिजिटल लॉकर के फायदे, उसकी उपयोगिता और उसे खोलने का तरीका बताया जा रहा है। [15] मध्य प्रदेश सरकार भी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साहित है। खासकर विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जगह-जगह हो रहे कार्यक्रमों में डिजिटल लॉकर खोलने की प्रक्रिया को समझाया जा रहा है। बैतूल जिले में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत 1 लाख छात्रों के डिजिटल लॉकर खोले जाएंगे।[16] साथ ही इंटरनेट सेवा के तहत ई-अस्पताल, ई-बस्ता, इलेक्ट्रानिक उत्पादन, क्लस्टर एंव स्किल डेवलपमेंट इंडिया डिजिटल कार्यक्रम, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल, भारत नेट, नेक्स्ट जनरेशन नेटवर्क, इंडिया पोस्ट, सीएससी आदि के बारे में बताया जा रहा है। [17] राजस्थान में भी डिजिटल इंडिया सप्ताह के तहत कई जिलों में कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। लोगों को डिजिटल लॉकर से लेकर कई तरह की जानकारी दी गई, उन्हें प्रोत्साहित किया गया। डिजिटल इंडिया सप्ताह के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र पाली के तत्वावधान में भी कार्यशाला का आयोजन कर डिजिटल लॉकर के बारे में जानकारी दी गई।[18] छत्तीसगढ़ सरकार भी इस कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहित है। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने डिजिटल लॉकर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने अधिकारियों को प्रेरित किया और उन्हें पत्र लिखा है। राज्य शासन के सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल लॉकर के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।