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जोहर, आदिवासी समाजों में पारंपरिक शासन व्यवस्था का महत्व अत्यंत गहरा है। महली आदिवासी समुदाय की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक संरचना सदियों से गाँव आधारित स्वशासन प्रणाली पर टिके हुए हैं। इसी ऐतिहासिक शासन व्यवस्था के मूल स्वरूप को “नौ महल माहली माहाल" व्यवस्था कहा जाता है, जिसे वर्तमान समय में व्यापक स्तर पर पहचान और संगठनात्मक रूप प्रदान करते हुए “आदिम महली माहाल” के रूप में कार्यरत है।
आदिम महली माहाल केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और परंपरा संरक्षण का जीवंत प्रतीक है। माहाल की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की जड़ें प्राचीन जनजातीय काल तक जाती हैं। उस समय राज्य नियोजन या बाहरी प्रशासनिक व्यवस्था का अभाव था। प्रत्येक जनजातीय समाज ने अपने सामाजिक जीवन, न्याय व्यवस्था, भूमि प्रबंधन, जन्म, विवाह एवं मृत्यु संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान, संघर्ष - समाधान तथा सांस्कृतिक संरक्षण हेतु स्वयं का प्रशासनिक ढांचा निर्मित किया। महली समुदाय में यह ढांचा —
माझी बाबा (गाँव प्रमुख), (न्यायपालिका)
जोग माझी बाबा (युवा संरक्षणकर्ता )
पारगाना बाबा (क्षेत्रीय प्रमुख), (विधायिका)
परानिक बाबा (सहायक),
गोडेत बाबा (संवाहक), (प्रेस मीडिया)
नायके बाबा (पुजारी).
आदि के रूप में विकसित हुआ। यह पदानुक्रम न केवल प्रशासनिक व्यवस्था हैं, बल्कि सामाजिक नैतिकता, धार्मिक संस्कार और सामुदायिक आचार संहिता का संरक्षक भी बना रहा।