नन्ही सी हसी भोली सी ख़ुशी
फूलों सी वो बाहें भूल गए
जब देश ने दी आवाज़ हमें
हम घर की राहें भूल गए
हम सोये नहीं कई रातों से
ए जाने वतन सौ चाँद बुझे
हमें नींद उसी दिन आएगी
जब देखेंगे आबाद तुझे
तेरी मिट्टी में मिल जावां
गुल बनके मैं खिल जावां
इतनी सी है दिल की आरजू
तेरी नदियों में बह जावां
तेरे खेतों में लहरावां
इतनी सी है दिल की आरजू
मजबूर हुई जब दिल की दुआ तो
हमने दवा काम लिया
वो नब्ज़ नहीं फिर थमने दी
जिस नब्ज़ को हमने थाम लिया
बीमार है जो किस धर्म का है
हमसे ना कभी ये भेद हुआ
सरहद पे जो वर्दी खाकी थी
अब उसका रंग सफ़ेद हुआ
तेरी मिट्टी में मिल जावां
गुल बनके मैं खिल जावां
इतनी सी है दिल की आरजू
तेरी नदियों में बह जावां
तेरे खेतों में लहरावां
इतनी सी है दिल की आरजू
This song is dedicated to Corona frontline Warriors.