Course
Course
प्रस्तावना
प्राचीन भारत के लोगों को इतिहास विषय अवधारणा आज के संदर्भ में सर्वथा भिन्न थी।
भारतीय दृष्टि मुख्य आध्यात्मिक रहि है, इसलिए यह , हमारे पास विश्व का विशाल साहित्य है जो हमारी धरोहर है
परवर्ती काल में हमारी बहुत सी साहित्यिक सामग्री आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट कर दिए गए हैं।
भारत में अलग से भी इतिहास लिखने का प्रयास किया गया था।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने उल्लेख किया है कि अच्छी बुरी घटनाओं का वृत्तांत लिखने के लिए अलग से अधिकारी होता था
तो कश्मीरी लेखक कल्हण ने भी लिखा है कि वही गुणवान कवि प्रशंसा का पात्र है जो राग द्वेष से उठकर सत्य का निरूपण अपनी भाषा में करता है।
इसीलि से हम कह सकते हैं कि प्राचीन भारत के निवासी इतिहास के प्रति अभिरुचि एवं न चेतना दोनों विद्यमान थी।
उद्देश्य:
भारतीय इतिहास के स्रोतों का विस्तृत सर्वेक्षण जान सकेंगें।
इतिहास में प्रचलित साहित्य साधनों का ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
बौद्ध साहित्य इतिहास एव समकालीन ग्रंथों को समझ सकेंगे।
पाठ्यक्रम की रूपरेखा
1.वीडियो प्रारूप
2.पाठ प्रारूप
3.मूल्यांकन और प्रश्नोत्तरी
1.वीडियो प्रारूप