सोनभद्र जिले के मध्य पश्चिमी क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत पनारी के अत्यन्त ही पिछड़े मजरे करमसार में यह उच्च प्राथमिक विद्यालय अवस्थित हैं। भौगोलिक दृष्टि से यहाॅ केवल प्रकृति का ही वास है सबकुछ प्राकतिक रूप में मौजूद हैं पेड़ पहाड़ और जंगल।बरसात के दिनों मे यहाॅ मनमोहक दृश्य उत्पन्न हो जाते हैं जिन मनमोहक दृश्यों की खोज में हम विदेशों की दौड़ लगाते हैं।इन सबके बावजूद विकास की गति यहाॅं अत्यन्त धीमी है। यह क्षेत्र पूर्व में स्थित रेणुका नदी द्वारा अन्य क्षेत्रों से पृथक कर दिया जाता है।आवगमन का एक मात्र रास्ता ओबरा बांध के उपर से जाता है।जिसके सुरक्षा की कमान सी0आई0एस0एफ0 के हाथ में होने से आवागमन सर्वसुलभ नहीं हैं।पश्चिमी क्षेत्र मध्यप्रदेश के सीधी जिले की सीमा को छूती है।इस सम्पूर्ण क्षेत्र को भाठ क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।यहाॅं की अधिकतर जनसंख्या अदिवासियों की हैं।बेरोजगारी व गरीबी इनका दामन नहीं छोड़ती है।
यह क्षेत्र प्रदेश सरकार के संज्ञान में तब आया जब यहाॅ के चोरपनिया मजरे के लोगों ने पहाड़ काटकर अध्यापक के स्कूल पहुॅचने हेतु मार्ग का निर्माण किया था।इस कार्य के लिये 32 परिवारों वाले पूरे मजरे को तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री जी ने मिलने के लिये लखनउ बुलाया था और सम्पूर्ण मजरे को आवास सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं से अच्छादित कर दिया था।
इस तरह के कुछ अवसरों को छोड़ दें तो इस क्षेत्र का विकास अभी बहुत दूर है। सर्व प्रथम इस क्षेत्र में शिक्षा विभाग द्वारा एक प्राथमिक विद्यालय खोला गया था तब से ही लोग यहाॅं की समस्याओं से अवगत होने लगे थे।आज भी विद्यालय में बिजली नहीं है आजादी के 70 सालों में मात्र एक खम्भा ही गड़ पाया है।
This upper primary school is located in the very backward Majre Karamsar of Gram Panchayat Panari, located in the central western region of Sonbhadra district. Geographically, there is only the habitat of nature, everything is present in the natural form, trees, mountains and forests. In the rainy days, beautiful scenes are generated here, in which we race abroad in search of enchanting scenes. The pace is very slow here. This area is separated from the other areas by the Renuka River in the east. The only way of arrival is over the Obra Dam. The movement of security is not in the hands of CISF. It touches the border of the district. This entire area is known as Bhat area. Most of the population here is of tribals. Unemployment and poverty do not leave them.
This area came to the notice of the state government when the people of Chorpania Majre here had constructed a road to reach the teacher's school by cutting the mountain. For this work, the entire Majra with 32 families was called to Lucknow to meet the then Honorable Chief Minister. Was and exorcised the entire Majra with various government schemes including housing.
Barring few such opportunities, the development of this area is still far away. First of all, a primary school was opened in this area by the Department of Education, since then people started becoming aware of the problems here. Even today there is no electricity in the school, only one pillar has fallen in the 70 years of independence.
ऽ विद्यालय बहुत ही मनोरम प्राकृतिक संसाधनों के मध्य अवस्थित है।विद्यालय काया कल्प योजना से अच्छादित है।
ऽ विद्यालय का निर्माण 2005 में किया गया था।तब से अब तक भौतिक संसाधनों में निरन्तर वृ़िद्ध हुयी है।
ऽ विद्यालय में एक रसोईघर है।दो अतिरिक्त कक्षा कक्ष है।
ऽ यूरिनल सहित विद्यालय में छात्र छात्राओं के लिये पृथक पृथक चार चार शौचालय उपलब्ध हैं। अध्यापकों के लिये अलग से शौचालय उपलब्ध है समस्त शौचालय नियमित रूप से प्रयोग किये जाते है।
ऽ पेयजल हेतु एक हैण्डपम्प है।
ऽ विद्यालय चारो ओर से चहारदीवारी से घिरा है।
ऽ विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिये जन सहयोग से वाद्य यंन्त्र, विभिन्न वेषभूषायें, मुखौटे आदि सामग्री उपलब्ध हैं।
ऽ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रैली एवं सर्व शिक्षा अभियान की रैली हतु साउण्ड सिस्टम, 3 वायरलेस माइक सहित उपलब्ध हैं इसे जन सहयोग व अध्यापकों के अंशदान द्वारा क्रय किया गया है।
ऽ प्रत्येक कक्षा हेतु डस्टबिन उपलब्ध है व प्रयुक्त होती है।
ऽ एक कक्षा में छात्रों हेतु फर्नीचर उपलब्ध है।
ऽ प्रत्येक कक्षा में अध्यापको हेतु फर्नीचर उपलब्ध है।
ऽ स्काउट एवं गाइड से सम्बन्धित यूनिफार्म एवं अन्य संसाधन उपलब्ध हैं।
ऽ पर्याप्त खेल सामग्री उपलब्ध है।
ऽ पुस्तकालय में लगभग 300 पुस्तकें हैं।
ऽ गणित लैब विज्ञान लैब व भाषा लैब की स्थापना अध्यापकों द्वारा स्वयं की गयी है।
ऽ समाचार पत्र(दैनिक जागरण) एवं कुछ पतित्रकायें (विज्ञान प्रगति,योजना,कुरूक्षेत्र) प्रतिदिन उपलब्ध रहता है।
1- मनीष पटेल सहायक अध्यापक एम0एस-सी0,बी0टी0सी0,बी0एड0।
2- मोनू कन्नौजिया अनुदेशक(गृह विज्ञान) एम0ए0,बी0एड0।
3- अनीता कुमारी अनुदेशक(कला) एम0ए0।
ऽ 2005 से अद्यतन विद्यालय के नामांकन में आशातीत वृद्धि हुयी है 42 छात्रों से आरम्भ कर वर्तमान में छात्र संख्या 400 के आंकड़े को पार करने की स्थिति में है।
ऽ सामान्य दिनों में विद्यालय पर छात्रों की उपस्थिति लगभग 60 प्रतिशत तक रहती है अधिकतम 85 प्रतिशत तक उपस्थिति पहुॅंच जाती है।
ऽ ब्लाक एवं जिले स्तर की स्कूल चलो अभियान की रैली एवं अन्य आयोजनों में विद्यालय के छात्र छात्रायें प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऽ परीक्षा के दिनों में यह उपस्थिति 98 प्रतिशत तक पहुॅंच जाती है।
ऽ कम उपस्थिति होने पर समस्त अध्यापकों द्वारा अभिभावकों से सम्पर्क किया जाता है व उनके पाल्यों की स्थिति की जानकारी का आदान प्रदान होता है।
ऽ उपस्थिति अत्यधिक कम होने पर ग्राम प्रधान व गणमान्य लोगों की टोली बनाकर छात्रों को विद्यालय आने के लिये प्रेरित किया जाता है।
ऽ प्रतिदिन प्रार्थना सभा में दिवसवार निर्धारित प्रार्थना कराई जाती है।
ऽ प्रार्थना सभा में प्रतिदिन छात्रों द्वारा ही आदर्श वाक्य चयनित कर बोला जाता है।
ऽ विगत दिवस के मुख्य समाचार का छात्रों की समिति द्वारा वाचन किया जाता है।
ऽ यदि कोई सूचना हो तो वह बताई जाती है।
ऽ विद्यालय के बाहर के श्यामपट पर प्रतिदिन का श्यामपट कार्य किया जाता है जिसमें एक आदर्श वाक्य, एक अंग्रेजी का शब्द, एक सामान्य ज्ञान, एक समसामयिक सामान्य ज्ञान लिखा जाता है।वर्तमान में तर्कशक्ति का प्रश्न भी शामिल किया जा रहा है।
ऽ विद्यालय के विज्ञान लैब,गणित लैब व भाषा लैब का निरन्तर प्रयोग किया जा रहा है।
ऽ विद्यालय कुछ विषयों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करता है।
ऽ प्रतिदिन आलेख एवं सुलेख लिखवाया जाता है एवं जांच की जाती है।
ऽ विज्ञान किट आदि का प्रयोग छात्र स्वयं करते है।
ऽ विद्यालय के प्रत्येक छात्र का स्वास्थ्य परिक्षण प्रत्येक तीन माह में सरकारी चिकित्सकों को आमंत्रित करके कराया जाता है।
ऽ बीमार छात्रों को निर्धारित तिथि पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर अध्यापकों द्वारा या छात्रों के अभिभावकों द्वारा ले जाया जाता है।
ऽ विद्यालय के विकलांग छात्रों को समय समय पर लगने वाले कैम्प में अघ्यापक द्वारा ले जाया जाता है एवं उचित देखभाल की जाती है।
ऽ विद्यालय के प्रत्येक छात्र को विगत वर्ष दो बार कृमि रोधक दवा एलवेण्डाजोल दी गयी।
ऽ विद्यालय के प्रत्येक छात्र को आयरन व फोलिक एसिड की दवायें साप्ताह में एक दिन खाना खाने के बाद दी जाती है।
अभिभावकों की समितियाॅं-
ऽ एस0एम0सी0 का गठन विभागीय निर्देशानुसार नियमित निष्पक्षता के साथ किया जाता है।विद्यालय के एस0एम0सी0 के सदस्यों का प्रशिक्षण विभाग द्वारा कराया जाता है एवं िवद्यालय की एस0एम0सी0 अपने समस्त दायित्वों का निर्वहन प्रधानाध्यापक के सहयोग से सम्पन्न करता है।विद्यालय के नामांकन से लेकर छात्रों की उपस्थिति तक में अपना योगदान करती है।यथा सम्भव बुलाई गयी प्रत्येक मीटिंग में सभी सदस्य उपस्थित हो जाते है एवं अपने विचार रखते हेै।
ऽ एम0टी0ए0 एवं पी0टी0ए0 का गठन भी विद्यालय मे बरकरार रखा गया है। इससे अधिक से अधिक अभिभावक विद्यालय से जुड़ते हैं और अपना अमूल्य योगदान देते हैं।विगत वर्षों मंे नैपकीन वितरण एवं इससे सम्बन्धित जानकारियों से छात्राओं को अवगत कराने में एम0टी0ए0 ने अभूतपूर्व भूमिका निभाई थीं।पी0टी0ए0 के माध्यम से मतदाता जागरूकता दुर्घटना जागरूकता पर्यावरण संरक्षण नारी सुरक्षा स्वास्थ्य जागरूकता आदि कार्यक्रमों को सफल आयोजन विद्यालय में किया जाता रहा है।
छात्रों की समितियाॅं-
ऽ सन् 2008 से विद्यालय में बाल संसद का गठन अनौपचारिक रूप से किया जाता रहा है।इसी के अन्तर्गत छात्रों की 12 समितियाॅं कार्य करती थीं। विगत वर्ष विभागिय निर्देष के क्रम में औपचारिक रूप से बाल संसद का गठन किया गया।जिसमें शिक्षा स्वास्थ्य नामांकन ख्ेालकूद सांस्कृतिक गतिविधियों से सम्बन्धित कुल 9 समितियाॅं कुशलता पूर्वक कार्य करती हैं।इन्ही समितियों के माध्यम से पुस्तकालय व समाचार पत्र वाचन का कार्य किया जाता है।विद्यालय में अनुशासन कायम करने में बाल संसद का विशेष योगदान रहा है।
ऽ मीना मंच की गतिविधियाॅं न केवल विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं के लिये उपयोगी सिद्ध हो रही हैं बल्कि विद्यालय से पास हो चुकी व अधिक उम्र की अनपढ़ लड़कियाॅं भी जीवनापयोगी गुण मीना मंच के माध्यम से सीखकर अपना जीवन सुधार रही हैं। मीना मंच के अन्तर्गत गृहविज्ञान की अनुदेशक श्रीमती मोनू कन्नौजिया द्वारा विभिन्न प्रकार की पाक कला का ज्ञान विद्यालय की छात्राओं को कराया जाता है।
ऽ सन्2017 में क्षेत्र की समस्त 5 पास छात्राओं का नामंाकन विद्यालय में कराने में मीना मंच की सदस्यों का उल्लेखनीय योगदान रहा है।