आधे से ज्यादा free फण्ड की सेवा लेने वाले सरकार के वही चहेते लोग थे जो आज दिल्ली से पलायन कर रहे है ,ये वही मुर्ख लोग थे जो पैसा न होने का हवाला देकर राशन लिया करते थे और दारू के ठेके पर 500-500 की नोट लेकर line में लगे हुए दीखते थे ,ये वही भूखे लोग थे जिनके पास दो वक्त की रोटी नहीं थी पर दारू पिने के लिए न जाने किस सरकार ने पैसा दे दिया, ये वही लोग हैं जो अपने देश को पूरी दुनिया के सामने भूखा-नंगा दिखाने में कोई कसर बाकि नहीं रखते I इनको जरा भी शर्म नहीं आती की किस मुह से ये बोल जाते है की घर में खाने को कुछ नहीं बीवी बच्चे मेरे भूखे मर रहे है I
दिल्ली की मौजदा सरकार ने सच में इनको इतना नाकारा बना दिया है की ये खुद दो वक्त की रोटी कमा कर अपनें परिवार को जिन्दा नहीं रख सकते अगर ऐसा होता तो इतनी भारी मात्र में पलायन नहीं होता जितना की दिल्ली से हुआ है इस lockdown में I दारू की line में लग कर लात घुसे खाने के बावजूद भी डंटे रहेंगे पर जहा देश भक्ति की बात आएगी भाग खेड़े होंगे , इस मौजूदा सरकार को भी एहसास हो गया होगा की हमने आस्तीन में क्या पाला था और ये होना भी जरुरी था ताकि इनको भी इनकी करनी का एह्साह हो सके I
उपरोक्त सारी बाते मेरा देखा हुआ है जिसे मै बयां कर रहा हूँ बाकियों का क्या अनुभव रहा होगा इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है परन्तु मुझे पूरा विश्वाश है की अधिकतर लोगो का यही अनुभव होगा , इस पुरे लॉक डाउन के दौरान अलग-अलग जगह पर अपनी सेवाएं देने के समय और सेवाएँ खत्म होने का अनुभव share कर रहा हूँ I
सब घरों में दुबके बैठे थे मोदी सरकार का पालन कर रहे थे पर वही पर कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने बिना अपने जान की परवाह किये दिल्ली वालों की सेवाएँ दिन रात बिना थके निरंतर करते रहे I देश के सरे धुरंधर नेता घरों में कोन्फेरेंस में जुटे थे I आखिर इतना नाटक किसके लिए किया गया जो भगोड़े थे या सरकार झूठा हवाला देती रही मीडिया के जरिये क्या सच है क्या झूठ है I कुछ सोचा नहीं जाता बस इतना जरुर समझ आया की हम भारत वासी गद्दार है जो विकट पारिस्थि में पीठ दिखा कर भागने में भरोसा करते है कुछ जाबाजों को छोड़ कर जो इस लॉक डाउन में अपने-अपने रण में युद्ध करते मरते दिखाई दिए, जिसमे मुख्य रूप से : डॉक्टर , सैनिक , आपदा राहत कर्मचारी ,पुलिस की कुछ टुकड़ियाँ और इस बार तो Social NGO's ने साबित कर दिया की आतंरिक लड़ाई उनके बिना संभव नहीं है I
ये March 2020 ने Aug 1947 की यादों को जो सिर्फ किताबों में अब तक पढ़ा था 2020 मे आखों से दिखने लगा, मुझे पूरा यकीन है कि ये भी इतिहास के पन्नों में जरूर लिखा जाएगा संक्रमण का भय, भूख और प्यास से हजारों मील दूर पैदल सुनसान सड़कों पर औरतों और मासूम बच्चों को गोद में लिए हुए अपने घर की ओर निकल पड़ा ये हुजूम किसी भयानक परिस्थिति को ही दर्शाता हैं. शायद ये इतिहास मे अब तक का सबसे बड़ा पलायन साबित होगा पैदल पथ के जरिए, कई पथिकों से पिछले कई दिनों से मिलता हूँ तो जवाब मिलता हैं : अपने बीवी बच्चों को अपनी आखों के सामने भूखों मरते देखने से अच्छा हैं किसी तरह अपने गाँव पहुंच जाऊँ तो अपनी मिट्टी मे मरने पर अफसोस नहीं होगा, उनकी बातों ने मुझे रुला दिया मैं खुद को इतना बेबस और मज़बूर महसूस कर रहा था मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूँ l
सुनसान सड़कों पर अपराध होने की सम्भावना, मार पीट, औरतों और लड़कियों से छेड़ छाड़ के मामले भी अज्ञात श्रोतों से पता चले, बहुत रोकने की कोशिश की पर corona ने शायद उनको इतना नहीं सता रहा जितना कि lock down ने उनको भूख - प्यास से डरा दिया l ये भारत सरकार की नाकामी और अपूर्ण रणनीति का हिस्सा माना जाएगा l भारत सरकार के पास कोई पुख्ता खाखां नहीं जो इन गरीब जनता को सुरक्षित कर सके !
भारत सरकार को देश की चिंता थी तो एक महीने देरी से lock down की क्या जरूरत थी, क्या भारत में ऐसा कोई विद्वान वैज्ञानिक जिंदा नहीं था जो corona के आगामी परिस्थित को भांप सके, ये बीमारी अमीर अपनी ऐयाशीयौ की निच हरकतों से फैलाता है और सज़ा भारत की गरीब जनता क्यों भुगते इस बात का जवाब सरकार को देना चाहिये!
भारत या फिर किसी अन्य देश की गिरती अर्थव्यवस्था को कोई बर्बाद कर रहा है तो उसे ICJ के मुताबिक सख्त सज़ा मिलनी चाइये lये सब कुछ China और America की साज़िश का नतीज़ा हैं ज़रा इसको समझते हैं :
China में 17 मार्च को अचानक सब ठीक हो जाता हैं, 16 मार्च भारत मे lock down, अमेरिका में कोई lock down नहीं जबकी मरने वालों की दर सबसे ज्यादा अमरिका मे ही हैं, दुसरी तरफ Wuhan, chaina से सटा हुआ bejing, sanghai आदि कई और places थे वहा एक भी मामला नहीं दिखा, सीधे corona उड़ता हुआ भारत, Italy, America, Spain, आदि देशों तक आ जाता हैं, ये किसी मिली भगत को इशारा नहीं करती सोचना बनता है इसपर ?
दुसरी तरफ अमेरिका में हालात बहुत खराब है पर trump-नमस्ते जी ने कोई सक्त कदम नहीं उठाएं हैं इसपर भी सोचना बनता हैं ?
भारत को सही मायने में परिपक्व प्रबंधन की आवश्कता हैं जो आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेने मे सक्षम हो ? ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ ही कार्य कर सकते है किसी बेहतर रणनीति के साथ.
लेखक :
Er. Ram Singh (CEO) Delhi-India
"जब हौसले बुलंद हो, तो राह के पत्थरों की क्या बिसात, मार दे ठोकर उनको तू चूर चूर हो जाएंगे II
कोई औक़ात नहीं इनकी, तेरे पैरों तले समतल जमीन बन बिछ जाएंगे, रख हौसला, ना तू पीछे कदम हटाना II
बहुतेरे मिलेंगे गिराने वाले, पर तू घबराना मत, तेरा साथ कोई दे ना दे, तेरे अंदर की आग उर्जा बन तुझे आगे ले जाएगी II
जिसमें होगी बाकी आग, वही लोहा भी पिघलाएगा, वर्ना बाकी तो राख बन मिट्टी मे मिल जाएगा II"